ताऊ रिटायर हो गया था. जीवन मे काफ़ी आपाधापी के बाद अब शांति से रहने का सोच रखा था. ब्लागिंग से लाखों रुपये महिने कमा चुका था ( ये हम नही कह् रहें है. यह नवभारत टाईम्स की खबर पर आधारित है.)
एक नदी किनारे की शांत कालोनी, घर के सामने ही पार्क, बस ताऊ ने देखते ही घर पसंद करके खरीद लिया और उसमे रहने आगया. ताई भी खुश. अब एक आधा सप्ताह तो घर जमाने मे लग गया. पार्क से आती आवाजों पर ताऊ ने ध्यान नही दिया.
फ़िर एक दिन दोपहर मे ताऊ सोने लगा तो पार्क मे से जोर जोर से कनस्तर पीटने की आवाज आरही थी जो ताऊ की नींद मे खलल डाल रही थी. खिडकी से बाहर झांक कर देखा तो कुछ बच्चे कनस्तर पीट कर पार्क मे मस्ती कर रहे थे. इतनी देर मे ताऊ की खिडकी पर आकर क्रिकेट की बाल टकराई..उधर ताई का दिमाग सातवें आसमान पर. जाहिर है ताऊ की कालोनी मे इन बच्चों का उत्पात था. पर अब क्या किया जा सकता था?
तभी एक बच्चा आया..अपनी बाल मांगने. ताई चिल्लाकर बोलने ही वाली थी कि ताऊ ने हाथ के इशारे से उसे मना किया और बाल दे दी. ताई के पूछने पर बताया कि ये बच्चे ऐसे नही मानेंगे..इनके साथ तो फ़ार्मुला उल्टा सीधा लगाना पडेगा.
अब ताऊ बाहर खडा होकर उन बच्चों को बुलाने लगा. बच्चे पहले तो डरे..फ़िर वो धीरे २ ताऊ के पास आगये. ताऊ ने उनको बैठाया और सबको मिल्क चाकलेट खिलाई. बच्चे बडे प्रशन्न हो गये. अब ताऊ बोला - बच्चों मैं तुम्हे खेलते देखता हूं तो मुझे मेरा बचपन याद आ जाता है. और मुझे बडी खुशी होती है तुम लोगों को रोजाना यहां खेलते देखकर.
बच्चे भी खुश..अब ताऊ बोला - देखो बच्चों अगर तुम लोग रोज यहां आकर खेलोगे तो तुमको मैं रोज एक सौ रुपये दूंगा. बच्चों को तो समझो कि आनंद ही आगया. उधर ताई ने ताऊ को आंखे दिखाई कि ये क्या कर रहे हो? बुढापे मे तुम सठिया गये हो? कहां से दोगे इनको रोज सौ रुपये?
ताऊ बोला - भागवान तू चिंता मत कर..अरे ये तो इंवेस्टमैंट है. मल्टिपल रिटर्न देगा. तू तो हुक्का भरकर लादे और मुझे सोचने दे आराम से.
अब ये रोज का क्रम होगया. बच्चे वहां खेलते..रोज रुपये ले जाते..चाकलेट खाते....और पढाई लिखाई बंद...बच्चों के मा - बाप परेशान..बच्चे ना तो पढें ना होमवर्क करे...स्कूल से आये और सीधे पार्क में.
आखिर बच्चों के मां बाप ताऊ से मिलने आ गये और बुरा भला कहने लगे कि ताऊ तुम हमारे बच्चों को बिगाड रहे हो.
ताऊ बोला - भाई इब मैं क्या करुं? तुम्हारे बच्चे हैं ही खिलाडी.. बच्चों के मा .बापों के बहुत अनुनय विनय करने पर ताऊ बोला - भाई देखो, मैं तुम्हारे बच्चों को दो हजार रुपये तो दे चुका हूं ..और मेरी बीस दिन की नींद खराब हो गई...वो मुफ़्त में.
बच्चों के मा बाप बोले - ताऊ आपको हम दो हजार रुपये वापस देदेंगे पर हमारे बच्चों का पीछा छोडो.
ताऊ बोला - अरे भाई बात दो हजार की होती तो कोई बात नही थी. दो हजार तो नगदी गये...बीस दिन की नींद के पिस्से कुण देगा? अगर १५०० रुपये रोज से भी लगाओगे तो तीस हजार रुपये तो मेरी नींद के ही होगये..
अब तो पालक गण खुसर पुसुर करने लग गये कि ये किस ताऊ के चंगुल मे फ़ंस गये? फ़िर भी उन्होने आपस मे सलाह करके, चंदा करके ताऊ को तीस हजार नींद के और दो हजार नगदी यानि कुल बत्तीस हजार वापस देने की हामी भर ली.
ताऊ बोला - अरे बावलीबूचों..३२ हजार से क्या होगा?
कालोनी वाले बोले - ताऊ इब के म्हारी जान लेगा?
ताऊ बोला - देखो भाईयो, इसमे जान लेने देने की बात नही है. आपके बच्चे शैतान हो रहे हैं और आप लोग खुद सोने के लिये उनको घर से बाहर पार्क मे भेज देते हो. और वो हम जैसे बुढ्ढों की नींद खराब करते हैं. अब तो मैं तभी उपाय करुंगा जब तुम लोग मुझे पूरे एक लाख रुपये दोगे.
वो लोग बोले - ताऊ, तुमने क्या लूट समझ रखी है? और मानलो कि तुमको हम चंदा करके एक लाख रुपये दे भी दें तो तुम उन बच्चों को कैसे रोकोगे खेलने से?
ताऊ बोला - देखो भाईयो. ताऊ कोई ऊठाईगिरा तो है नही. अगर मैने उनको एक ही दिन मे खेलने से बंद नही किया तो तुमको एक के बदले दो लाख वापस करुंगा.
अब तो वो सारे सोच विचार मे पड गये. ताऊ का आफ़र भी कोई बुरा या गलत नही दिख रहा था और बच्चों को सुधारने के लिये जहां स्कूलों मे इतनी फ़ीस भर रहे थे वहीं ये ताऊफ़ीस भी उन्होने चंदा करके ताऊ को जमा करवा दी.
ताऊ बोला - भाईय़ो, इब आप लोग आराम से घर जाओ. कल बच्चे आयेंगे तो मैं उनको समझा दूंगा फ़िर उसके बाद वो पार्क मे कभी नही आयेंगे खेलने.
दुसरे दिन बच्चों ने स्कूल से घर आकर स्कूल बैग फ़ेंका और रोज की आदत अनुसार पार्क मे . और बच्चों के माता पिता ने देखा कि आज तो बच्चे बिना खेले ही तुरंत घर वापस आगये.
बच्चों से जब पूछा गया कि वो आज इतनी जल्दी घर वापस कैसे आगये?
बच्चे बोले - अरे आप तो पूछते हो कि आज जल्दी वापस कैसे आगये? कल से तो हम पार्क मे भी नही जायेंगे.
बच्चों के मा - बाप के आश्चर्य का तो ठीकाना ही नही रहा. उन्होने आखिर बच्चों से पूछा कि - ऐसा क्या हुआ है? ताऊ ने तुमको डराया है या कोई भूत प्रेत की कहानी सुनाई है?
बच्चे बोले - अरे उस ताऊ का तो नाम मत लो आप. वो एक नंबर का झूंठा और धोखेबाज है.
पहले तो हमको रोज खेलने के सौ रुपये दिया करता था आज बोला कि - बच्चों मेरे पिछले घोटालों का आफ़िस मे पता चल गया है..और मेरी पेन्शन बंद हो गई है तो अब से मैं तुमको पांच रुपये रोज ही दिया करुंगा.
अब हम कोई पागल हैं कि इतने सारे बच्चे सिर्फ़ ५ रुपये मे उसके लिये रोज खेले. अब तो वो जब रोज के दौ सौ रुपये देगा तभी वहां जाकर खेलेंगे. उससे कम मे नही.
बच्चों के मा बाप ने जाकर ताऊ को धन्यवाद दिया तो ताऊ बोला - अब समझे कि नही? अक्ल बडी होती है या भैस? सारे कालोनी वाले बोले - ताऊ अक्ल बडी होती है.
इस पर ताऊ हंसकर बोला - इब अगली बार आना फ़िर बताऊंगा कि भैंस भी कभी कभी अक्ल से कैसे बडी हो जाती है?
इब खूंटे पै पढो : -
ताऊ सेठ समीरलालजी के यहां ड्राईवर था. जब समीरजी कलकता जाने लगे तो ताऊ को भी साथ लेगये कि ताऊ वहां का जानकार है, रास्ते वगैरह सब पहचानता है. कलकता मे पहुंचकर समीर जी होटल मे शिवकुमार जी मिश्र के साथ बैठे थे.
समीर जी बोले – यार मिश्रा जी मेरा ड्राईवर ताऊ एक नम्बर का मुर्ख है, और ताऊ को बुलाकर एक सौ रुपया का नोट देकर बोले – ताऊ जाकर एक लिमोजिन कार खरीद लाओ.
ताऊ ने नोट लिया और – लाया मालिक..कहकर चला गया.
अब शिवकुमार मिश्रजी बोले – अरे समीर जी, आपका ताऊ तो कुछ भी नही. जरा मेरे ड्राईवर गब्बूलाल का हाल देखो, और आवाज लगाई – गब्बूलाल..
जी मालिक..गब्बूलाल आकर बोला. शिवजी मिश्र ने उसको कहा – गब्बू जा जरा जल्दी से देखकर आ कि मैं घर पर हूं या नही?
गब्बूलाल – जी मालिक अभी देखकर आता हूं.
बाहर गब्बूलाल को ताऊ खडा मिल गया. अब ताऊ बोला – अरे यार गब्बू भाई..मेरा सेठ भी एक नम्बर का सिरफ़िरा है. मुझे कहता है कि ताऊ…जा एक लिमोजिन कार खरीद कर ले आ..और अब कहां से खरीदूं लिमोजिन? आज रविवार होने से लिमोजिन का शोरूम ही बंद है.
अब गब्बू बोला – ताऊ आप सही कहते हो, पर मेरा सेठ भी कोई कम सिरफ़िरा नही है. मुझे जबरन दौडा दिया कि – गब्बू जा घर पर देख कर आ मैं हूं या नही? अरे पास मे मोबाईल फ़ोन था.उसीसे फ़ोन करके पूछ लेते कि वो घर पर हैं या नही? अब ये बडे लोगों को क्या कहो?
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