विवाह से पहले आर्ट विवाह के बाद कामर्स और बच्चों के बाद हिस्ट्री.... समझ ना आए ऐसी है मिस्ट्री.... |
"यादें" उनकी याद खामोशी को नही बहलाती उनकी याद जुदाई को नही सहलाती उनकी याद भीड़ को बस तन्हा कर जाती हैं. |
| "बिछोह" वो जब रुबरु थे बात तक करने का होश नही रहा जब बिछुड गये तो नींद मे भी बुदबुदाया करते हैं |
| ( रचना सुधार हेतु आभार : सुश्री सीमा गुप्ता जी ) |