Showing posts with label बरसात. Show all posts
Showing posts with label बरसात. Show all posts

बरसात और सांप

बरसात का मौसम आते ही सांपों का बिलों में रहना मुश्किल हो जाता है. बिलों से बाहर निकलकर वो किसी सुरक्षित आश्रय के लिये अपनी यात्रा इधर उधर शुरू करते हैं. सांप कभी किसी को आगे होकर नहीं काटते वो तो सताये जाने पर ही डसते हैं. और मनुष्य उन्हें मारने पर उतारू हो जाते हैं. यह अच्छी बात नहीं है.

सांपों को एक तरह से डरावना और प्राण घातक समझ लिया गया है. जो सही नहीं है. किंतु इसके उलट कुछ मूर्ख लोग काटने को सांप का प्राकृतिक स्वभाव समझ कर उसे अपना लेते हैं. उन्हें नहीं मालूम कि सांप सताये जाने पर काटते हैं पर कुछ मूर्ख मनुष्य इसे अपना लेते हैं और लोगों को डसने में, उनको जलील करने में अपने को धन्य समझते हैं. आपको भी ऐसे लोगों से जीवन में अवश्य सामना हुआ होगा.

इन्हीं मनुष्यों को ध्यान में रखकर एक कविता अपने आप फ़ूट पडी. आप भी मजा लीजिये.

सांपों का घर नही होता
फकीरों का दर नही होता।
दोनो बंधे है अपनी आदत से
वरना यूँ ही कोई बेघर नही होता।
साँप माहिर हैं डसने में
फकीर दिलो में बसने में।
भले डरता है जमाना सांपों से
राम बचाए इन बापों से।
पर सुन बेटा साँप जरा सुन ले
अपने दिमाग मे ये बात धर ले
तेरे जहर की ताकत तभी तक है
जब तक तेरे दाँत नही उखाड़े जाते।  

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

सबसे भ्रष्टाचारी बरसात के विरोध में चक्का जाम

बरसात के नाम से तो ऐसा ही आभास होता है कि ये कोई देवी मईया ही होंगी पर हमें कुछ पक्का पता नही है। काहे से की कोई वरुण देव को जल मंत्री बताता है और हमारा रमलू कहता है कि इन्नर देवता जल बरसाते हैंगे। पर हमने बहुत खोज बीन और माथा पच्चीसी के बाद यह नतीजा निकाला कि यह मामला बहुत कुछ हमारे सरकारी मंत्रालयों जैसा ही है। जैसे एक ही मंत्रालय में केबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और फिर उप मंत्री और उससे भी आगे संसदीय सचिव, और सुना है की दिल्ली में केजरी दादा ने तो कोई 21 संसदीय सचिव पेले हुए थे।
अब इत्ते सारे मंत्री और कामकाज एक ही मंत्रालय का हो तो काणी के व्याव में कुंडल होना भी जरूरी है। कोई काम ढंग से हो ही नही सकता इत्ते लोगों की दखल होते हुए। और प्रजातन्त्र में तो कतई नही। हां ये अलग बात है कि कोई 56 इंची वाला हो तो फिर डर के मारे ही सही पर काम चलता रहता है।
पर ऊपर वाले यानी भगवान जी के दरबार मे पूरा प्रजातन्त्र है। वहां कोई किसी के भी काम में दोनों टांगे नही अड़ा सकता है, हां एक टांग अड़ाने की मनाही भी नही है, बस अपना हिस्सा सोमरस के रूप में मिलता रहे। वहाँ हमारे जैसा मामला नही है कि कोई पाक का झंडा उठाये, कोई आतंकियों का कोई बेईमानों या ताजा ताजा लारा वाला मामला ले लीजिए, मजाल है कोई एक सुर में बोले कि ये गलत है या सही है। खुद लठबंधन वाले दल ही चुप्पी साधे हैं तो किसी ओर क्या कह सकते हैं? यानी भगवान जी के प्रजातन्त्र में सब अपने हित साधकर सोमरस जुटाते हैं और हमारे यहां असली प्रजातन्त्र है। आखिर विश्व का सबसे बड़ा प्रजातन्त्र जो ठहरा।
असली बात ये है कि भगवान जी के यहां वाले लठबंधन में ऐसा कतई नही है। वहां सब एक ही सुर में राग अलापते हैं। धन्ना सेठ उनकी सेवा पूजा ज्यादा करते हैं तो उनको कोई कष्ट नही देते, गरीब खुद भूखा है तो बरसात देवी को कहां से 56 भोग खिलवाये और इसी का नतीजा गरीब दलित भुगत रहा है, सूखे या बाढ़ के रूप में।   वरुण देवता ने बरसात को आर्डर मार दिया  की यहां यहाँ ठीक ठाक टैंकर भिजवाना, वहां लाख दो चार लाख टैंकर एक साथ बिखरा देना जिससे बाढ़ आ जाये और खबरदार उस एरिया में एक टैंकर भी मत भिजवाना। अब बरसात देवी ने काम का क्या एक्जीक्यूशन किया इसे देखने की वरुण देव को फुर्सत ही नही है। बस आर्डर मारके वो तो अपने हिस्से आये सोमरस के सेवन में व्यस्त हो गए।
इधर बरसात देवी अपनी मनमानी करने से बाज नही आती, जहां से सोमरस नही मिला वहां पर वरुण देव के ऑर्डर के बाद भी,  जहां फसल खड़ी हो वहां एक टैंकर तो क्या एक लौटा नही बरसाएगी और जहां तैयार  फसल खड़ी हो वहां दे टैंकरों पे टैंकर और साथ मे ओले बोनस में भिजवायेगी। लगता है ऊपर वाले से डायरेक्ट बरसात देवी की सेटिंग सोमरस के लेन देन की है वरना इतना अंधेर तो नही हो सकता। पॉश एरिया और धन्ना सेठों के इलाकों में मजाल है जो कभी बाढ़ लाने की स्थिति बनी हो? बाढ़ लायक टैंकर भी  गरीब बस्तियों में ही भिजवाती है। आखिर गरीब मजदूर बस्ती और गरीब किसान ने बरसात का क्या बिगाड़ा है?
जरूर इसमें कोई साजिश है। हम बरसात देवी पर खुले आम आरोप लगा रहे हैं कि ये धन्ना सेठों से मिली हुई है, दलित किसान मजदूर विरोधी है। इसकी जांच सीबीआई और ईडी से कराए जाने की मांग करते हैं। यह लारा कम्पनी से भी बड़ा घोटाला निकलेगा। हम सुप्रीम कोर्ट से भी आग्रह करते हैं कि दलित किसान मजदूर विरोधी इस बरसात देवी के हाथ से यह मंत्रालय वैसे ही तुरन्त वापस लिया जाना चाहिए जैसे केजरीवाल ने कपिल मिश्रा से जल मंत्रालय छीन लिया था। गरीब और दलित की दुश्मन बरसात देवी की हम कड़ी निंदा करते हुए 27 तारीख को बरसात का चक्का जाम करने का फैसला लिए हैं, कहीं पर भी एक टैंकर तो क्या एक बून्द भी नही बरसने देंगे। बरसात देवी मुर्दाबाद....मुर्दाबाद... दलितों का मसीहा जिंदाबाद....जिंदाबाद।