ताऊ भी ये चोरी ऊठाईगिरी के धंधों से परेशान हो गया था सो इस नये बाबागिरी के धंधे में खुश था. पर ताऊ किसी भी काम मे आज तक सफ़ल हुआ है? जो इसमें सफ़ल होता? अब एक दिन बैठे बैठाये बाबा ताऊआनंद के अनन्य भक्त श्री अनिल पूसदकर बाबाश्री के दर्शन करने पधारे. और बाबा को ऐसी सलाह दे डाली की बाबा अब ब्लागरी करते नजर आरहे हैं.
आते ही उन्होने दंडवत प्रणाम किया. और बोले : प्रणाम महाबाबाश्री की..
ताऊबाबाश्री : तुम्हारा क्ल्याण हो वत्स. आओ विराजो. रास्ते मे कोई कष्ट तो नही हुआ?
अनिल पूसदकर जी : बाबाश्री, आपका आशिर्वाद साथ है तो कष्ट होने का क्या काम है?
ताऊबाबाश्री : और वत्स धंधा पानी कैसा चल रहा है?
अनिल पूसदकर जी : बाबाश्री आपके आशिर्वाद से सब कुशलमंगल है. अच्छे अच्छे तीसमारखाओं को भी उनकी नानी याद दिला देता हू.
ताऊबाबाश्री : हां भक्त वो तो आपकी कलम मे बडी ताकत है. इतनी ही देर मे एक चूहा कहीं से आगया..और बाबा की लंगोटी को कुतरने लगा. बाबा लठ्ठ ऊठाकर दौडे. अब अनिल पूसदकर जी ने सलाह दे डाली : बाबा आप काहे चिंता करते हैं? आप तो भजन करिये..मैं रायपुर पहुंचकर आपको एक दर्जन लंगोटिया भिजवा दूंगा.
बाबाश्री बोले : ये तो ठीक है, पर चूहे तो उनको भी कुतर देंगे?
अनिल जी बोले : बाबाश्री, मेरे रहते चूहों की इतनी हिम्मत कि आपकी लंगोटी कुतर जायें? अभी प्रबंध किये देता हूं और तुरंत एक रामप्यारी (बिल्ली) मंगवाकर बाबाश्री की कुटिया पर छोड दी..अब चूहे कैसे आयेंगे? बाबाश्री भी अनिल जी के उपकार के नीचे दब गये..अब बाबाश्री को क्या मालूम कि ये घाट घाट का पानी पिये हुये हैं, और खुद भी अभी तक कुंवारें हैं, पर बाबाश्री को तो रास्ते लगा ही देंगे.
अब बाबाश्री ताऊआनंद महाराज ने पूछा - वत्स शादी कब कर रहे हो?
अनिलजी : बाबाश्री, अब क्या करूं? घर परिवार मे, दोस्त और रिश्तेदार, सब के सब मेरे पीछे लगे हैं..आप तो जानते हैं कि ये सब निरर्थक बाते हैं. आपही बताईये कि क्या करुं?
बाबाश्री : वत्स, शादी अवश्य करो?
अनिल जी : क्यों बाबाश्री? आप मुझको ऐसा आदेश क्युं दे रहे हैं?
बाबाश्री : वत्स, शादी इसलिये कर लेनी चाहिये कि, अगर अच्छी बीबी मिल गई तो तुम्हारा जीवन स्वर्ग बना देगी और खराब मिल गई तो सुकरात की तरह दार्शनिक जरुर बना देगी. दोनों ही हालत मे नुक्सान नही है.
अब अनिल जी मन ही मन बोले - बाबाश्री, अब मैने तो बिल्ली छोड दी है, पहले आप निपटना, मेरा तो बाद मे देखूंगा. और अनिल जी प्रणाम दण्डवत कर वापस हो लिये.
इधर बाबाश्री को चुहों से छुटकारा मिल गया..रामप्यारी के दूध की व्यव्स्था सब भक्त कर ही देते थे..आराम पुर्वक बाबाश्री का समय उड रहा था. अब बरसात आई और कुटिया गांव से बाहर थी सो जिस दिन बरसात ज्यादा हो उस दिन रामप्यारी के दूध की व्यवस्था नही हो पाती थी. अब ये बडा कलेश खडा होगया.
फ़िर एक दिन अनिल पूसदकर जी आये और बाबाश्री ताऊआनंद ने रामप्यारी के दूध की समस्या बताई. अब पूसदकर जी ठहरे बाबाश्री के अनन्य भक्त..सो तुरंत एक गाय खरीदवा कर आश्रम मे बंधवा दी. अब बाबाश्री भी खुश..और रामप्यारी की भी बल्ले ..बल्ले..
गाय का चारा आदि की व्यवस्था सब गांव वाले भक्त जन कर ही देते थे. पर गाय को खोलना..बांधना..चरने के लिये छोडना..दूध दुहना..इन सब कामों मे बाबाश्री का अधिकतम समय व्यतीत होने लगा. अब भजन कीर्तन तो एक तरफ़ धरे रह गये और बाबाश्री का सारा ध्यान रामप्यारी और गाय पर लग गया. और यही अब उनका परिवार बन चुका था.
फ़िर एक दिन अनिल पूसदकर जी आये..बाबाश्री को प्रवचन करने की जगह ..गाय के आगे पीछे घूमते पाया तो बोले - बाबाश्री क्या बात है? आजकल प्रवचन नही चल रहे हैं?
बाबाश्री : वत्स, अब प्रवचन के लिये समय ही कहां बचता है? जो भी समय रहता है वो इस गऊ माता की सेवा मे निकल जाता है.
अनिल पूसदकर : अरे बाबाश्री, आप क्यों चिंता करते हैं? अभी आपकी उम्र ही क्या है? आपने जो फ़ार्मुला मुझे बताया था वो ही करिये. यानि शादी कर लिजिये..गुरुमाई, गाय को और रामप्यारी को संभाल लेगी और ..आपको भोजन भी दोनों समय गर्मागर्म तैयार मिलेगा..अभी भक्तों का लाया हुआ ठंडा बासी खाना पडता है.
अनिल पूसदकर जी की सलाह बाबाश्री ताऊआनंद को सोलह आने जंच गयी और बाबाश्री ने शादी करली..अब आजकल बाबाश्री का सारा ध्यान घर गृहस्थी मे लगा है? और भजन कीर्तन कब के छूट गये? बचा खुचा समय अब ब्लागरी मे व्यतीत होने लगा.
आपको याद दिला देते हैं कि यह आज की कथा और पिछले बुधवार की कथा ताऊ अपनी आपबीती के रुप में शेरू महाराज को सुना रहे हैं. याद करिये शेरू महाराज के गीदड सेकेरेटरी ताऊ ही बने हुये हैं और वहां कुछ ब्लागरों ने अपना रजिस्ट्रेशन भी करवाया हुआ था. उन सबकी अप्लीकेशन शेरू महाराज के पास सुनवाई के लिये पहुंच गई है और अगले सप्ताह से उन पर सुनवाई होने की संभावना है. उस पोस्ट को याद करने के लिये आप यहां चटका लगा सकते हैं.
|
|