ताऊ ने कहा कि वो गजल पढना चाहता है कवि सम्मेलन में. माता रामप्यारी जी ने कहा कि - वत्स, गजल नही बल्कि कोई भजन सुनाना वहां पर. यकिनन मेरे आशीर्वाद से तुम्हीं विजयी होवोगे. पर ताऊ जिद्द करने लगा कि वो तो गजल ही सुनायेगा. तब मैने बीच बचाव करते हुये कहा कि गजल ना भजन बल्कि आप तो भजल सुनाईये. अरे लोग जब हजल सुना सकते हैं तो भजल क्युं नही?. और आप तो जानते हैं कि ताऊ और सबकी बात टाल सकता है पर रामप्यारे उर्फ़ "प्यारे" की नही.
तो अब आईये आपको"ताऊ की भजल" सुनवाता हूं जो उसने वार्षिक होली कवि सम्मेलन में पढी.
प्यारे बहणों और भाईयों, अब मैं आपके सम्मुख अपनी भजल प्रस्तुत कर रहा हूं. और आपसे दाद चाहुंगा. कंजूसी मत किजियेगा. आपकी पाकिट से तो कुछ नही जायेगा पर आपकी दाद पाकर इस देश को एक नौजवान उभरता हुआ भजलकार मिल जायेगा. तो दिल खोलकर दाद दिजियेगा.
टिप्पणी दीजो पाठकनाथ मोरी पोस्टवा प्यासी रे।।
अब तक ना दीदार आपका मोरी पोस्टवा होवत बासी रे।
तु आजा अब तो यहाँ जालिम,बीती जाये पूरनमासी रे॥
टिप्पणी दीजो पाठक नाथ मोरी पोस्टवा प्यासी रे॥
टिप्पणी बक्सा जब तू खोले, सप्तम स्वर में ब्लागर बोले।
ब्लागवाणी की हाट सीट ढिंग, मोरी दूर होवत उदासी रे॥
टिप्पणी दीजो पाठक नाथ मोरी पोस्टवा प्यासी रे॥
लिख लिख के की-बोर्डवा टूटा, बेनामी ने पकड के कूटा।
दया ना आई जालिम तुझको छुपा कहां सत्यानाशी रे॥
टिप्पणी दीजो पाठक नाथ मोरी पोस्टवा प्यासी रे॥
पानी पी पी गाली बकता, इससे ज्यादा मैं क्या करता।
बेनामी ने इतना सताया, लेलूं करवट काशी रे॥
टिप्पणी दीजो पाठक नाथ मोरी पोस्टवा प्यासी रे॥
आँख मिचौली तुम मत खेलो, भारी भारी पोस्टवा ठेलो।
सूना पडा है ब्लागवा मेरा, जाने सब घट घट वासी रे॥
टिप्पणी दीजो पाठक नाथ मोरी पोस्टवा प्यासी रे॥
इस भजल प्रस्तुति के बाद माता रामप्यारीजी ने पधार कर सभी को आशीर्वाद दिया. तत्पश्चात माता रामप्यारी जी के सानिंध्य में भजल कीर्तन का आयोजन हुआ. नीचे उसी अवसर का चित्र और तत्पश्चात भजल कीर्तन.
ऊपर चित्र में कीर्तन करते हुये... बांये से दांये : परमपूज्य माता रामप्यारी जी, तबले पर संगत करती हूई मिस. समीरा टेढी, सिंथेसाईजर पर श्री ललित शर्मा, हारमोनियम पर प्रख्यात भजलगायक ताऊ रामपुरिया, चिमटा बजाते हुये मिस. राजी भाटिया, झांझ बजाते हुये बालक मकरंद, हारमोनियम पर मिस. अजया कुमारी झा और कार्यक्रम के निर्देशन की कमान संभाले हुये श्री खुशदीप सहगल.
अब कीर्तन प्रारम्भ हुआ....
ब्लाग नगरिया पावन धाम
जप ले प्राणी प्रभु का नाम
रघुपति राघव राजा राम
पतित पावन सीता राम
कुटा बेनामी हाय-हाय राम
इसे खुब बजाया गंगा राम
गंगा राम हां गंगा राम
सुबह शाम भज गंगाराम
कुटा बेनामी हाय-हाय राम
मारीच सुर्पणखां तेरे नाम
नित जूते खाना तेरा काम
कुटा बेनामी हाय-हाय राम
फ़िरे निशाचर रात औ शाम
कभी तो भज ले राम का नाम
अरे सुधर जा ओ नादान
करते रहिये अपने काम
लेते रहिये हरि का नाम
रघुपति राघब राजाराम
ब्लाग नगरिया पावन धाम
नोट : - वैशाखनंदन सम्मान 2010 प्रतियोगिता में प्रविष्ठियां आना शुरु हो गई हैं. आप भी शीघ्रातिशीघ्र अपनी प्रविष्ठी भेजिये!