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होली पर सियाचिन में ब्लागर सम्मेलन, योग एवम प्राकृतिक चिकित्सा शिविर

ब्लागिंग के माननिय नये, जूने-पुराने, घुटे घुटाये, डायनासोर एवम नान ब्लागर्स यानि फ़ेसबुकियों से ताऊ की होली टाईप रामराम. जैसा कि आप जानते हैं हमने 10 साल पहले सियाचिन में एक बहुत ही सफ़ल आयोजन किया था और सभी ब्लागर्स उससे लाभान्वित भी हुये थे. आप लोगों के बार बार अनुरोध पर इस साल यह आयोजन दुबारा आयोजित किया गया है.

                                                                   मिस समीरा टेढी                   

इस आयोजन के बारे में संपूर्ण विवरण जल्द ही आपकी सेवा में एक ब्लाग पोस्ट द्वारा दिया जायेगा. इस आयोजन में सीटे बहुत ही कम हैं अत: हम पर कोई पक्षपात का आरोप नही लगे कि ताऊ ने अपने अपनों को रेवडी बांट दी....इस आरोप से बचने के लिये इस शिविर के लिये पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है. आप सबसे निवेदन है कि मिस समीरा टेढी से अपने अपने पंजीकरण फ़ार्म प्राप्त करलें. मिस समीरा टेढी के बारे में आपको बताने की जरूरत नही है. शिविर में मिस समीरा टेढी आपको सटा खेलने की विधा के बारे में सारी गुप्त टेक्निक सिखायेंगी.

इस फ़ार्म की फ़ीस आपकी सुविधा और जेब का ध्यान रखते हुये रूपये 251/= मात्र रखी है जो कि नान रिटर्नेबल होगी. इन प्राप्त फ़ार्म्स में से लाटरी ड्रा निकाला जायेगा. लाटरी में जिन सदस्यों को नाम निकलेगा, उन्हीं को शिविर में आने दिया जायेगा.

फ़ार्म्स की डिमांड बहुत ज्यादा है. अभी तक एक लाट तो खत्म भी हो चुका है. आज ही दूसरा लाट प्रिंट होकर आया है अत: शीघ्रता करें. एक सदस्य एक से अधिक चाहे जितने फ़ार्म्स भी भर सकता है. उस पर कोई रोक टोक नहीं होगी. आप जितने अधिक फ़ार्म भरेंगे, आपका नाम निकलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी.

                                                     डा. रामप्यारी कैट-स्केन स्पेशलिस्ट

जैसा कि आप जानते ही हैं कि सियाचिन में आक्सीजन की कमी रहती है अत: स्वास्थ्य चेक अप जरूरी है. स्वास्थ्य चेक अप सर्टीफ़िकेट दूसरी जगह का मान्य नहीं होगा. सिर्फ़ डा. रामप्यारी द्वारा दिया गया हैल्थ सर्टीफ़िकेट ही मान्य होगा. इसमें भी अनिवार्य तौर पर कैट-स्केन करवाना अनिवार्य होगा. आपके लिये हमने डा. रामप्यारी से स्पेशल कन्शेसनल पैकेज सिर्फ़ रूपया 7500/= मात्र तय किया है. बिना कैट-स्केन के स्वास्थ्य सर्टीफ़िकेट मान्य नहीं होगा. भीड से बचने के लिये आप एडवांस में कैट-स्केन करवा कर रख लेवें.

शिविर में ब्लागिंग के गुरू घंटालों के टिप्स, बाबाश्री ताऊ महाराज की दुर्लभ दवाएं और दुर्लभ साहित्य उचित मूल्य पर उपलब्ध करवाया जायेगा. इस शिविर में भाग लेना एक अलौकिक अनुभव रहेगा.

बाकी की जानकारी के लिये अगली ब्लाग पोस्ट का इंतजार करें.

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

ब्लागिंग को जिंदा करने के लिये "रायता फ़ैलाऊ समिति"

आज सुबह सुबह ही ब्लागिंग के पितामह, घुटे घुटाये ब्लागर अनूप शुक्ल जी “फ़ुरसतिया” द्वारा दिये गये ज्ञान स्वरूप इस आलेख की शुरूआत कर रहे हैं.

आप बहुत अच्छा पढने वाले हैं और आप बहुत अच्छे टिप्पणी कार हैं. जैसे कवियों को तालियां वैसे ही ब्लागरों को आपकी टिप्पणियां प्रोत्साहित करती हैं. आप ब्लाग पर आयें और टिप्पणी करके हमारा उत्साह वर्धन करें जिससे हम रायता बिखरें और आप मुफ़्त में रायता खाते रहें. तो अब कविता पाठ…सारी...सारी... अब आलेख की शुरूआत करते हैं….

अभी कल ही दिल्ली में समीरलाल जी, राजीव तनेजा जी, खुशदीप सहगल जी, वंदना गुप्ता जी, डा. दराल साहब व अन्य घुटे घुटाये ब्लागर्स ने ब्लागिंग को पुन: जिंदा करने के लिये गहन विचार विमर्श कोल्ड ड्रिंक की चुस्कियों के बीच किया. अब बताईये किसी में जान डालने के लिये कोल्ड ड्रिंक से काम चलता है क्या? बताओ मितरों, भाईयों और बहनों? अरे ब्लागिंग तो पहले ही ठंडी हुई पडी है और आप ऊपर से ठंडा पीये जा रहे हैं….ब्लागिंग को जिंदा ही करना है तो कुछ गर्म पीते…पिलाते. ताऊ जैसे कुछ रायता फ़ैलाऊओं को बुलाकर सलाह लेते. ब्लागरों, रायता बडे काम की चीज है….याद किजीये पुराने जमाने को जब सारी ब्लाग दुनियां में रायते की नदियां बहा करती थी और वो ब्लागिंग का स्वर्णिम काल कहलाया.

अभी परसों शिवरात्रि पर ताऊ उज्जैन चला गया था और वहां महानकाल का महा प्रसाद ले लिया, उसने ऐसा रंग दिखाया कि सर नीचे और पांव ऊपर हो गये. महा प्रसाद का नशा घर लौटने तक नहीं उतरा तो ताई ने बेहतरीन रायता फ़ैलाकर नशा उतारा. एक दम खट्टे दही से बूंदी और मिक्स फ़्रूट का रायता बनाया, उसमे अपना मेड-इन-जर्मन लठ्ठ भिगो भिगो कर जो ताऊ की पीठ पर बजाये तो एक दम से  नशा काफ़ूर हो गया.

तो सभी ब्लागर बंधुओं से निवेदन है कि ब्लागिंग का यदि जीर्णोदार करना है तो रायता फ़ैलाना ही एक मात्र ईलाज है. जितना रायता फ़ैलाओगे उतनी ही ब्लागिंग जीवित होती जायेगी. ब्लागिंग के स्वर्णिम काल में कितना रायता फ़ैला हुआ रहता था? कसम से हमने तो कभी उस जमाने में घर में रायता या सब्जी नहीं बनाई. उसी रायते से दोनों टाईम की रोटी खा लेते थे….आज कम से कम सौ डेढ सौ रूपये की सब्जियां खरीदनी पडती हैं…..

और हां यदि रायता फ़ैलाना ही हो तो ब्रांडेड यानि अमूल, ब्रिटानिया, मदर डेयरी या अन्य किसी के दूध दही से काम नहीं चलेगा बल्कि आपके लोकल मोहल्ले वाले का दही लेवें जो बिल्कुल सडा गला रखता हो तो यह ज्यादा असर कारक रहेगा. पैसे भी कम लगेंगे और रिजल्ट सटीक मिलेगा.

मेरी नेक सलाह है कि ब्लागिंग का जीर्णोद्धार करने को एक “रायता फ़ैलाऊ समिति” बनाई जाये और उसे यह काम सौंप दिया जाये. यदि कोई अध्यक्ष बनने को तैयार नहीं हो तो ताऊ यह कुर्बानी दे सकता है बशर्ते कोषाध्य्क्ष का पद भी ताऊ को दे दिया जाये.
  

ताऊ की रायता फ़ैलाऊ क्षमता देखनी हो तो शाहीन बाग का रायता देखिये जिसमें बूंदी, मिक्स फ़्रूट और आलू सहित तमाम तरह के रायते बिखेरे गये हैं और जो आज तक नहीं सिमटा है और अब ताऊ अहमदाबाद में ट्रंप के आगमन के लिये रायता फ़ैलाने के ईवंट में जुटा है.

ध्यान रहे कि रायता फ़ैलाना इतना आसान नहीं है. हर काम के हिसाब से अलग अलग प्रकार का दही और वस्तुएं काम में ली जाती है. आप तो बस बूंदी, आलू और फ़्रुट रायता ही जानते हॊंगे. पर मर्ज के अनुसार लौकी, कद्दू, करेला, बथुआ, गोभी, वेज, नानवेज इत्यादि कई प्रकार के रायते काम में लिये जाते हैं. और ताऊ ने रायता फ़ैलाने में पी.एच.डी. की हुई है. 
सभी ब्लागर्स से निवेदन है कि "रायता फ़ैलाऊ समिति" के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष पद के लिये ताऊ को ही वोट करें.

#हिन्दी_ब्लॉगिंग