रात भर बर्फ़ गिरती रही
सुबह जब बाहर झांका तो
नजरें अवाक और दिल परेशान
सडक किनारे का दृश्य
एक गरीब बुढी मां की
चिथडों मे लिपटी 'हिम प्रतिमा'
सारा दिन भीड उस
कुदरत निर्मित प्रतिमा को
देखने आती रही
तभी मैने किसी को कहते सुना
कल की बर्फ़ीली रात
बुढिया सर छुपाने की
जगह मांगती फ़िर रही थी !
(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)