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ताऊ ने भुट्टे बेचने का ठेला लगाया !

लगता है कि आज कल ताऊ के दिन ही खराब चल रहे हैं ! अभी अभी ताऊ के ब्लाग की हड्डी पसली दोस्तों ने जोड जाड कर ठीक किया था ! और अभी नई आफ़त आ गई ! ये तिवारी साहब ने ताऊ को नया धन्धा पकडवा दिया था ! और धन्धा भी अच्छा चल निकला था !

और इस धन्धे मे गजब का मुनाफ़ा देख कर अब तिवारी साहब ने अपनी जमी जमाई ओटोपार्ट्स की दुकान बंद करकै ताऊ के साथ इस धन्धे
मे साझेदारी कर ली थी !  तिवारी साहब ने इस धन्धे के नये नये गुर भी  ताऊ को सिखा दिये थे !

तिवारी साहब के कहने से ताऊ वहां पर एक फ़कीर के वेश मे बैठता था ! और उसका कटोरा देखते देखते ही नोटो से लबा लब भर जाता था ! ताऊ तो वहां फ़कीर बनकै लोगो दुआ दिया करै था ! और तिवारी साहब वहीं पास मे खडा होकर कटोरे पै नजर रखता था ! जैसे ही कटोरे मे नोटों की बाढ आती , तिवारी साहब आकै चुप चाप कटोरा खाली करके ले जाता और पीछे बैठ कर गिनना शुरु कर देता !

अब पता नही किसको इस बात से जलन मची कि उसने जाकर यह बात ताई को बता दी कि ताऊ तो आज कल दारुखाने के बाहर कटोरा लेके बैठता है ! और वहां भीख मांगने का काम करता है ! और साथ मे ये भी बता दिया की ये धन्धा तिवारी साहब ने सिखाया है !  इसी बात पर ताई का तो माथा सटक गया !  ताई ने फ़टाफ़ट
अपना "मेड इन जरमनी" लठ्ठ उठाया और पहुंच ली , वो तो, दारुखाने के बाहर !

अब वहां ताऊ तो दाढी मुंछ लगाकै बाबाजी बना किसी का हाथ देख रहा था ! सो ताऊ को तो उसने पहचाना नही और वहीं पीछे बैठ कर तिवारी साहब गिन रहे थे कटोरे के नोट ! ताई ने इधर उधर नजर दौडाई तो तिवारी साहब दिख गये ! ताई नै जाकै सीधे ही दो लठ्ठ बजाये तिवारी साहब कै माथे पे और बोली - क्युं रे तिवारी ? ये कुणसा धन्धा शुरु करया सै थमनै ? मेहनत से कमाकै नहीं खा सकते थम ? और बता वो नाशपीटा ताऊ कित सै ? ताऊ तो ताई को देख कर पहले ही वहां से उठ कर भाज लिया था ! और फ़ंस गया बिचारा तिवारी साहब !

ताई नै फ़िर ताऊ के घर मे आने के बाद जो पूजा पाठ और आरती करी सै वो थम ताऊ तैं ही पूछ लियो ! शायद ताऊ इब इस जनम मै यो भीख मांगण आला धन्धा तो नही करैगा ! ताई नै गाम मै बाबू धोरै खबर भिजवाई कि तेरा सपूत आज कल इसे काम करण लाग रया सै ! फ़िर बाबू और ताई नै समझा बुझा कै ताऊ को एक बैंक के बाहर मुंगफ़ली और मक्का के भुट्टे सेक कर बेचने का ठेला लगवा दिया ! और ताऊ को हिदायत दे दी की इस तिवारी से दोस्ती नही रखना ! ये अच्छा आदमी नही दिखता !

ताऊ की दुकान दारी वहां भी चल निकली ! एक दिन शाम कै समय तिवारी साहब ताऊ कै धोरै आकै बोल्या - अरे ताऊ राम राम ! इब ताऊ चुप चाप ! तिवारी साहब फ़िर बोल्या - ताऊ जरा सौ का नोट उधार दे दे ! मैं बटुआ घर भूल आया और इब मेरा पीने का समय हो गया है ! मैं कल तेरे को लौटा दूंगा !

ताऊ बोला - तिवारी साहब , बात ये है कि मेरा इन बैंक वालो से समझोता हो चुका है कि ये बैंक वाले मुंगफ़ली नही बेचेंगे और मैं लोन नही दुंगा ! इसलिये मैं आपको लोन नही दे सकता !

तिवारी साहब समझ गये की ताऊ लठ्ठ खा खा कै किम्मै हुंशियार होग्या दिखै ! सो ताऊ को पटाने की कोशीश करण लाग ग्या !

जब घणी देर होगी तो ताऊ बोल्या - अर तिवारी साहब मैं थमनै एक धेल्ला भी नही दूंगा ! तुम चाहे जितनी जोगाड लगालो ! मेरे बाबू ने मेरे को टके (रुपिये ) का महत्व समझा दिया है ! और मैं समझ भी गया हूं !

तिवारी साहब ने पूछा - ताऊ वो कौन सा गुरु मंत्र थारै बाबू नै दिया सै ? जरा हमनै भी बतादे !

इब ताऊ बोल्या - सुण ले भई तिवारी साहब ! म्हारा बाबू बोल्या --

टका धर्म: टका कर्म: टका ही परमं तपं
यस्य ज्ञान टका नास्ति हा: टका टक टकायते


अर्थात

टका ही धर्म, टका ही कर्म, टका ही परम तप है !
टका रूपी ज्ञान नही है, तो कुछ भी नही है !
सिर्फ़ टकाटक देखते रहो !


इसलिये आजकल जेब मे टका ( रुपिया ) होना आवश्यक है ! तो तिवारी साहब इब राम राम !