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अंधेरी रात की दरखास्त '

 
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ईश्वर की अदालत मे
अंधेरी रात की दरखास्त
माई बाप न्याय कीजिये
इस लफ़ंगें सूरज का प्रकाश

आवारा दीवाना हुआraat2jpg
मेरा पीछा कर परेशान
मुझे है करता ....
शर्म हया से मुह छुपा
भागना मुझे है पड़ता ...
एक अबला की सुन पुकार
अदालत की  तुरंत हरकत

नियत पेशी पर
प्रकाश हाजिर हुआ
पर रात  गैर हाजिर

अदालत मे  प्रकाश  का बयान
मै क्या जानु कौन है कैसी
वो सुंदर सलोनी अंधेरी रात
देखी ना तस्वीर अभी तक
हुई ना कोई प्यार की भी बात
युगों से अदालत की यही बस एक आसraat1jpg
हाजिर हो जाए दोनों एक साथ
परमात्मा की परेशानी  कोई समझ ना पाया

उसकी अदालत मे, इतना संगीन मुकदमा
आज तक दुसरा कभी ना  आया
कौन किसका पीछा कर रहा है
ये राज सुलझ ना पाया
आखिर मे परमात्मा भी पछताया
क्या सोच कर उसने
दिन  ओर रात को बनाया  ?


(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)