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बुढापा

बुढापा

budhapa प्रकृति का नियम सुना
हर चीज है आनी जानी
मेरे साथ मगर प्रकृति ने
अपना नियम नही निभाया
मैने किया स्वागत जबbudhapa2
बुढापे ने द्वार मेरा खटखटाया
मैं नादान समझे बैठा था
नियम के तहत ही तो है आया
कुछ दिन करेगा बसेरा अपना
और छोड चला जायेगा
पर हाय रे प्रकृति का दगा
बुढापा अपना घर समझ
साथ मेरे था रहने आया




(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)