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"मेरा हमसाया"

mera hamsaya
"मेरा हमसाया"


आंगन रेस्टोरेंट मे
एक शेर और खरगोश
एक साथ दाखिल हुये
उनको देखते ही वेटरों के

होश उडे , पांव थर्राए
जहां खडे थे वहीं जड हो गये

आखिर मैनेजर हिम्मत करके आया
पूछा, क्या सेवा कर सकता हूं ???



खरगोश ने की फरमाइशmera  hamsaya2
चार अंडे का आमलेट, काफ़ी
और थोडा ये और वो ले आओ
अब मेनेजर कुछ सकपकाया
शेर की तरफ चेहरा घुमाया फ़िर पूछा

आपके मित्र के लिये?
इस पर खरगोश ने फ़रमाया
तुम भी क्या आदमी हो यार?
अगर मित्र होता भूख से हकलाया..
तो मैं यहां बैठा होता क्या ऐसे मस्ताया

या तो मित्र के पेट मे होता
या होता कहीं ख़ुद को जा  छुपाया



मित्र का पेट भरा है....
इसीलिये दो दिन है मेरा हमसाया.....

(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)