होने वाली है. यानि ताऊ टीवी को मालूं रहता है कि कब कहां और क्या होने वाला है? तो आईये आज की ताजादम खबरों के और बुलेटिन में.
आज तक तो ताऊ यही सोचा करता था कि सिर्फ़ "ताऊ और ताऊ की भैंस ही अक्सर गोबर करते हैं" पर ताऊ की चिंता तब बढ गई जब काजलकुमार जी और उनका मच्छर भी बाते करने लग गये. ताऊ की चिंता इसलिये और बढ गई जब उन्होने कहा कि "मैं और मेरा मच्छर दोनों अक्सर ये बातें करते हैं..." पर आप तो जानते हैं कि ताऊ का दिमाग बहुत तेज दौडता है. अब मच्छर के साथ अक्सर क्या बातें हो सकती हैं? ये तो जग जाहिर है.
ताऊ अपनी भैंस चंपाकली का दूध निकालते हुये
इसी बेचैनी में ताऊ ने अपनी भैंस चंपाकली का दूध निकालते हुये अपनी भैंस से पूछा - चंपाकली, तुम इस मच्छर से बातचीत का कुछ मतलब समझी क्या?
चंपाकली बोली - अरे ताऊ, तुम अब पूरी तरह सठिया चुके हो. इसमे समझने वाली क्या बात है? ये मच्छर वैसी ही बातें कर रहे हैं जैसी तुमने आई.पी.एल. वाला गोबर करवाया था.
ताऊ बोला - चंपाकली, बात तो तू सही कह रही है. आई.पी.एल. मे तो गोबर करने का हिस्सा मिला था ना अपने को? पर यहां अभी तक खेल शुरु हुये नही, और अपना हिस्सा अभी तक पूरा आया नही और मच्छर बाते भी करने लग गये.
चंपाकली - ताऊ बात तो तेरी सही लग रही है मुझे भी ये मच्छरों से बातें करने के पीछे कोई साजिश नजर आने लगी है. तभी मैं सोचूं कि खेलों से मच्छरों का क्या संबंध? पर ये भी मुझे तो गोबर करने जैसा ही कुछ लग रहा है. ताऊ तू चिंता मत कर...चल मुझे खेतों में हरी भरी घास खिला कर ला...फ़िर मैं ऐसा गोबर करूंगी..ऐसा गोबर करूंगी कि इन मच्छरों का भिनभिनाना मेरा मतलब बातें करना अपने आप बंद हो जायेगा.
ताऊ खेतों मे अपनी भैंस चंपाकली को चराते हुये
और ताऊ अपनी भैंस चंपाकली की पीठ पर चढ गया और खेतों में पहूंचकर चंपाकली ने घास चरना शुरु कर दिया जिससे आई.पी.एल. जितना ही गोबर करवाया जा सके. यानि ताऊ और उसकी भैंस ने एक और आई.पी.एल. से बडा गोबर करने की तैयारी शुरु करदी.
अभी ताऊ और चंपाकली घर भी नही लौटे थे कि मैच फ़िक्सिंग वाला गोबर करवाने की पुख्ता खबरे आने लगी हैं...यानि ताऊ ने फ़िर एक बडा गोबर करवा दिया .....
आज तक तो ताऊ यही सोचा करता था कि सिर्फ़ "ताऊ और ताऊ की भैंस ही अक्सर गोबर करते हैं" पर ताऊ की चिंता तब बढ गई जब काजलकुमार जी और उनका मच्छर भी बाते करने लग गये. ताऊ की चिंता इसलिये और बढ गई जब उन्होने कहा कि "मैं और मेरा मच्छर दोनों अक्सर ये बातें करते हैं..." पर आप तो जानते हैं कि ताऊ का दिमाग बहुत तेज दौडता है. अब मच्छर के साथ अक्सर क्या बातें हो सकती हैं? ये तो जग जाहिर है.
इसी बेचैनी में ताऊ ने अपनी भैंस चंपाकली का दूध निकालते हुये अपनी भैंस से पूछा - चंपाकली, तुम इस मच्छर से बातचीत का कुछ मतलब समझी क्या?
चंपाकली बोली - अरे ताऊ, तुम अब पूरी तरह सठिया चुके हो. इसमे समझने वाली क्या बात है? ये मच्छर वैसी ही बातें कर रहे हैं जैसी तुमने आई.पी.एल. वाला गोबर करवाया था.
ताऊ बोला - चंपाकली, बात तो तू सही कह रही है. आई.पी.एल. मे तो गोबर करने का हिस्सा मिला था ना अपने को? पर यहां अभी तक खेल शुरु हुये नही, और अपना हिस्सा अभी तक पूरा आया नही और मच्छर बाते भी करने लग गये.
चंपाकली - ताऊ बात तो तेरी सही लग रही है मुझे भी ये मच्छरों से बातें करने के पीछे कोई साजिश नजर आने लगी है. तभी मैं सोचूं कि खेलों से मच्छरों का क्या संबंध? पर ये भी मुझे तो गोबर करने जैसा ही कुछ लग रहा है. ताऊ तू चिंता मत कर...चल मुझे खेतों में हरी भरी घास खिला कर ला...फ़िर मैं ऐसा गोबर करूंगी..ऐसा गोबर करूंगी कि इन मच्छरों का भिनभिनाना मेरा मतलब बातें करना अपने आप बंद हो जायेगा.
और ताऊ अपनी भैंस चंपाकली की पीठ पर चढ गया और खेतों में पहूंचकर चंपाकली ने घास चरना शुरु कर दिया जिससे आई.पी.एल. जितना ही गोबर करवाया जा सके. यानि ताऊ और उसकी भैंस ने एक और आई.पी.एल. से बडा गोबर करने की तैयारी शुरु करदी.
ब्रेकिंग न्य़ूज............
अभी ताऊ और चंपाकली घर भी नही लौटे थे कि मैच फ़िक्सिंग वाला गोबर करवाने की पुख्ता खबरे आने लगी हैं...यानि ताऊ ने फ़िर एक बडा गोबर करवा दिया .....
हम तुरंत लौटते हैं...एक छोटे से ब्रेक के बाद....कहीं मत जाईयेगा.... हम आपके लिये ब्लाग जगत की पोल खोल खबरों का बुलेटिन लेकर शीघ्र लौट रहे हैं.........................