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अमन चैन

अमन चैन

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चारों तरफ़ भय, है छाया हुआamanjpg
खो गया सब अमन चैन

सन्नाटा भी थर्राया हुआ
मर गई इन्सानियत
टुटता नहीं ये भ्रम-जाल
ईमान अब बोराया हुआ
झील पे बगुले, व्योम में बाज
सब हैं सहमें दुबके
सूरज भी जैसे पथराया हुआ





(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)