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ताऊ और मास्टरनी जी

प्रोढ़ शिक्षा की शाम को क्लास पंचायत में लाग्या करै थी
और गाम के सब बूढे इस लिए पढ़ने जाया करे थे ।
क्योंकि वहाँ शकुन्तला मास्टरनी जी , बुजुर्गों को पढाया करै थी ।
मास्टरनी जी बिल्कुल आइसक्रीम के लिकडे (डंडी) जैसीसूखी किडी काट थी ।
अब वो गाम आली भाषा मै ताऊओं को कुछ इस तरियां पढाया करती --
ऐ फार अंगद,.... बी फॉर बांगड़,... सी फार ।
एक दिन जनरल नालेज की क्लास शकुन्तला बहनजी लेवै थी ।
उसने पूछ्या -- थम न्यूं बताओ की धरती क्यूँ घुमती है ?
सारे बूढे चुप हो लिए मास्टरनी जी नै फिर पूछा -- कोई बता सकता है ?
इब ताऊ लद्दा से चुप नही रहा गया ।
और वो बोल्या-- -- अरे छोरी,.... कुछ खाया पीया कर नही तो,.. तन्ने यो धरती न्यूं ही घुमती दिखेगी ।
इतनी देर में ही इन्सपेक्टर आ गया और उसने सवाल पूछने शुरू कर दिए ।
उसने ब्लेक बोर्ड पर अन्ग्रेज़ी का "डब्लू" लिखा और ताऊ लद्दा से पूछा -- ये क्या है ?
ताऊ लद्दा बहुत देर तो माथे पर जोर देता रहा ।
फ़िर बोल्या -- जी यो लागे तो "एम्" फार मुनियाँ की माँ ही सै ।
पर मुनियाँ की माँ की टांग उलटी हो गयी दीखें सै ।