प्रिय बहणों, भाईयो, भतीजियों और भतीजों आप सबका पहेली के जवाबी अंक मे स्वागत है.
कल की पहेली का सही जवाब था तिरुवल्लुवर स्टेच्यू कन्याकुमारी... इसके बारे मे कल सोमवार की ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे विस्तार से बता रही हैं सु अल्पना वर्मा.
इस पहेली की प्रथम विजेता रही हैं poemsnpuja यानि कि सुश्री पूजा उपाध्याय और द्वितिय विजेता रहे हैं Smart Indian - स्मार्ट इंडियन यानि श्री अनुराग शर्मा और तृतिय विजेता हैं हिंदी ब्लाग टिप्स वाले आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) बधाई.
हमारी परम्परा के अनुसार हमारी आज की सम्माननिय प्रथम विजेता सुश्री पूजा उपाध्याय को आंमंत्रण भेज रहे हैं ताऊ के साथ हरयाणवी कलेवा (breakfast) करने के लिये.
अब आज के रिजल्ट की तरफ़ बढने से पहले अनवर हुसैन अनवर साहब फ़रमाते हैं :
ना कोई खत ना खबर और ना कोई संदेशा
बिछडने वाले गये तो किधर गये आखिर
ताऊ रामपुरिया की तरफ़ से आपको बहुत घणी रामराम.






















आदर्णीय देवियों और सज्जनों, ताऊ के भाइयो, बहणों, भतीजियों और भतीजो, समस्त संपादक मंडल के सदस्य गणों, आप सबको बीनू फ़िरंगी का सादर प्रणाम.
और मिस रामप्यारी और हीरामन को विशेष रामराम.
ताऊ पहेली राऊंड –२ के नौवें अंक का रिजल्ट घोषित करते हुये मुझे अपार हर्ष हो रहा है. और मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि मुझे ये मौका आज फ़िर मिला. और जब तक ताऊ चाहेगा आगे भी मिलता रहेगा.
तो आईये अब चलते हैं रिजल्ट की तरफ़. हमारी इस पहेली का सही जवाब तिरुवल्लुवर स्टेच्यू कन्याकुमारी, जिस पर कल आपको ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे सु अल्पना वर्मा देगी बहुत ही विस्तृत जानकारी.
|  सर्वाधिक अंक प्रात किये १०१
घणी बधाई प्रथम स्थान के लिये. .सुश्री पूजा उपाध्याय तालियां..... तालियां..... तालियां..... जोरदार …. तालियां विशेष बधाई….  |
आईये अब अन्य माननिय विजेताओं के बारे में क्रमश: जानते हैं. जिनको ऊपर से नीचे के क्रम में ९८ से ७६ तक अंक दिये गये हैं. सभी को हार्दिक बधाई.
इसके अलावा निम्न महानुभाओं ने भी इस पहेली अंक मे शामिल होकर हमारा उत्साह बढाया. जिसके लिये हम उनके हृदय से आभारी हैं.
डा. रुप चन्द्र शाश्त्री, श्री दिनेश राय द्विवेदी, श्री अरविंद मिश्रा, श्री दीपक तिवारी साहब, श्री मकरंद,
श्री संजय बैंगाणी, श्री अनिल पूसदकर, सुश्री लवली कुमारी, श्री गौतम राजरिशी, सुश्री विधु, सुश्री सोनु,
श्री भैरव, श्री मोहन वशिष्ठ, श्री रतन सिंह शेखावत, श्री काजल कुमार और श्री नरेश सिंह राथौड.
बहुत धन्यवाद आप सभी का.
























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![rampyari_thumb[3] rampyari_thumb[3]](https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiTLfXaXpGnMawqZerIBLbkE7YSQWuKPvooyI6Yd5-p50Gkh4nJ7LcWbvdbHLsfZ6PCdz3AxrG99lCbLlJEqJm6m9Lz01v7x4HTEKUDSMS31VUiMdOszf3au0uUxYI04yx_SACQ2W-FLSjM/?imgmax=800) रामप्यारी की क्लास मे :- हैल्लो एवरी बडी..गुड आफ़्टर नून…. जैसा कि अब तो आपको मालूम पड ही गया होगा कि सही जवाब क्या है? वो ना… वो ना…. स्वर्णलता आंटी ना…जबरन अप्सराओं मे घुस कर बैठ गई थी…. और मुझे सबसे पहले बताया नितिन व्यास अंकल ने…फ़िर ना वो पिट्स्बर्ग से अनुराग अंकल ने बिल्कुल सही सही बताया …..और मालूंम है…उसी वक्त लंदन से समीर अंकल की मेल आगई कि रामप्यारी क्या करूं? ताऊ के ब्लाग पर तो कमेंट ही नही कर पा रहा हूं? और मैं तो रास्ते मे हूं…..मैने भी कह दिया कि अंकल कोई बात नही आप का जवाब रामप्यारी तक पहुंच गया है…अब चिंता की कोई बात नही… और बोलो..एक बात आपने देखी कि नही? फ़िर आप कह दोगे..रामप्यारी तू भी फ़ालतू बकबास करती रहती है काम धाम कुछ करती नही है… अब आप तो ऐसे ही बोलोगे ना..पर रामप्यारी को चारों तरफ़ नजर रखनी पडती है…..हां तो मैं फ़िर भूल गई ? क्या कह रही थी मैं? हां याद आया…पहले तीनों सही जवाब NRI के आये..अब ये भी सोचने वाली बात है कि ये हुआ कैसे? विचार करना पडॆगा… हां फ़िर जयपुर वाले आशीष अंकल भी सही जवाब लेकर आगये…और फ़िर सीमा आंटी भी बिल्कुल सही जवाब लेकर आई….और मालूंम है…आंटी ने तो मेरी ड्रेस की तारीफ़ भी की..थैंक्यु आंटी.. फ़िर महक आंटी ने भी बिल्कुल सही जवाब दिया…और ना…और ना… महक आंटी ने तो मेरे को कहा कि रामप्यारी तू तो बदमाशी करती हुई ही अच्छी लगती है…थैंक्यु आंटी..जरा इन और लोगों को भी समझाईये ना. उसके बाद अनिल अंकल…...अंतर सोहिल अंकल, आये. और फ़िर ना..पहली बार आये मीत अंकल और उन्होने ही बताया कि ये स्वर्णलता जबरन घुस कर बैठ गई है. तब जाके मैने उसे बाहर किया…थैंक्यु अंकल…… फ़िर हे प्रभु ये तेरा पथ वाले अंकल आये…और फ़िर आज ना……वो अभिषेक ओझा अंकल भी बिल्कुल सही जवाब लेकर आये संस्कृत वाला…थैंक्यु अंकल..मेरी चाकलेट भिजवा देना..मुझे चाकलेट बहुत अच्छी लगती है . फ़िर आये पंडित डी.के. शर्मा अंकल…..अंकल मेरी जन्मपत्री देखी क्या? फ़िर रविकांत पांडे अंकल…..फ़िर आये दर्पण शाह दर्पण अंकल ..और दर्पण अंकल ने क्या किया? बतादूं अंकल? …?…हां दर्पण अंकल ने मैने जो गुलजार अंकल की नज्म “ मेरे यार जुलाहे” लिखी थी ना उसकी पैरोडी बना कर चले गये ..” मेरे यार ब्लागर बता..” फ़िर आये वो अशोक पांडे अंकल…हाय अंकल..कैसी चल रही है खेती बाडी..? और फ़िर आई डाक्टर पूजा दीदी..अरे दीदी..लठ्ठ वठ्ठ मत मारना…देखो ना ..आज तो आपको प्रथम विजेता भी बनवा दिया मैने …आज तो लठ्ठ मत मारिये.. वो काम तो ताई ही बहुत अच्छी तरह कर लेती है…कभी कभी…ताऊ के साथ साथ मुझे भी पड जाते हैं. आज तो मिठ्ठाई खिलाईये…कब आऊं इंटर्व्यु लेने? फ़िर सतीश चंद्र सत्यार्थी अंकल आये….फ़िर प्रकाश गोविंद अंकल आये…अरे अंकल आप तो अबकी बार टीप कर पास हुये हो…आप कोई मेरी तरह बच्चे हो क्या? जो टीपते हो और सबको बता भी देते हो? और आपकी अप्सराओं से जरा दूर ही रहा किजिये…वो बहुत खतरनाक वाली अप्सराएं हैं. फ़िर आई हरकीरत आंटी..हाय आंटी…जब मेरे हाथ मे सत्ता आजायेगी ना..तब तो मैं सब कुछ आऊट कर दूंगी…ठीक है ना आंटी. और फ़िर आये सैयद अकबर अंकल….और बोले कि रामप्यारी ये जवाब तो लवि की मम्मी ने बताया है..तो सही बात है ना अंकल..आंटी तो है ही बुद्धिमान…इसीलिये आप जीत भी गये..हाय लवि कैसी है तू? तू नाराज मत होना, अबकी बार ना .. जब मैं जयपुर आऊंगी ना…तब पक्के से तेरे से मिलूंगी.. विद्या माता की कसम.. और सबके आखिर मे आये दिलिप कवठेकर अंकल..हाय अंकल कहां हो आजकल? हां तो अब मैने आप सब आंटियों , अंकलों और दीदीयों को पूरे ३० नम्बर दिलवा दिये हैं. आप सबको बधाई और अब रामप्यारी आपको अगले शनीवार फ़िर मिलेगी इसी ताऊ पहेली के अगले अंक में. अब रामप्यारी को इजाजत दिजिये….. आप सबको घणी नमस्ते.. रामराम… . |
पाठकों के विचार स्तम्भ मे आज फ़िर से हैं श्री महावीर बी. सेमलानी
 हे प्रभु यह तेरापन्थ महावीर बी सेमलानी " भारती' भारतीय प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित कन्याकुमारी अद्वितीय शहर है। (कोची केरल मे सारथी के शास्त्रीजीजी का पेतृक गॉव है) लेकिन कन्याकुमारी वास्तव में तमिलनाडु राज्य का एक खास पर्यटन स्थल है। आपको पता होगा,कन्याकुमारी दक्षिण भारत के महान शासकों चोल, चेर, पांड्य के अधीन रहा है। यहां के स्मारकों पर इन शासकों की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। यहां आए थे चैतन्य महाप्रभु कुमारी अम्मन मंदिर से कुछ दूरी पर सावित्री घाट, गायत्री घाट, स्याणु घाट एवं तीर्थघाट बने हैं घाट पर सोलह स्तंभ का एक मंडप बना है। मंदिर के गर्भगृह में देवी की अत्यंत सौम्य प्रतिमा विराजमान है। विभिन्न अलंकरणों से सुशोभित प्रतिमा केवल दीपक के प्रकाश में ही मनोहारी प्रतीत होती है। देवी की नथ में जडा हीरा एक अनोखी जगमगाहट बिखेरता है। कहते हैं बहुत पहले की बात है, मंदिर का पूर्वी द्वार खुला होता था तो हीरे की चमक दूर समुद्र में जाते जहाजों पर से भी नजर आती थी, जिससे नाविकों को किसी दूरस्थ प्रकाश स्तंभ का भ्रम होता था। इस भ्रम में दुर्घटना की आशंका रहती थी। इसी कारण पूर्वी द्वार बंद रखा जाने लगा। अब यह द्वार बैशाख ध्वजारोहण, उत्सव, रथोत्सव, जलयात्रा उत्सव जैसे विशेष अवसरों पर ही खोला जाता है। माना जाता है कि चैतन्य महाप्रभु इस मंदिर में जलयात्रा पर्व पर आए थे
मंदिर में पुरुषों को ऊपरी वस्त्र यानी शर्ट एवं बनियान उतार कर जाना होता है। Tirukkural बोल्ड विचारों वाले थे,उन्होंने जाति व्यवस्था को खारिज कर दिया। एक महान और पुण्य कवि और दार्शनिक तिरुक्कुल्लुर जो दक्षिण भारत के कृषक समुदाय मे जन्मे, अपनी जिविका कढाई-बुनाई करके यापित करते थे। तिरुक्कुल्लुर "है थिरू"+क्कुल्लुर, इसके नाम का दूसरा भाग छंद की कम लंबाई की वजह से दिया गया था।
"थिरू" शब्द पवित्रता का धोतक है + क्कुल्लुर (Kural) हिंदू ग्रंथों के वेदों के बराबर माना जाता है. तमिल कवि भरतियार (Bharathiyar) के शब्दो मे कहु तो -" तमिलनाडु "तिरुक्कुल्लुर" के सार्वभौमिक नज्मो के कारण प्रसिद्ध हो गया है.।" इसके अमरता और सार्वभौमिकता असंदिग्ध है. एक दुनिया के विभिन्न भाषाओं में इसका व्यापक अनुवाद के कारणों के निर्विवाद तथ्य यह है कि नैतिकता और इसे वहन मूल्यों सभी धर्मों, सभी देशों और सभी समय पर लागू कर रहे हैं. यह रोमन कैथोलिक ईसाई और सार्वभौमिकता प्राचीन या आधुनिक समय के किसी भी साहित्यिक कार्यों के लिए एक अद्वितीय विशेषता है. वैज्ञानिक के रूप में तमिल के कवियो के साथ ही तीन तमिल राज्य के राजा के दक्षिण भारत में Thirukkural की साहित्यिक महानता स्वीकार किया. तिरुक्कुल्लुर ने ऐसे एक तीक्ष्ण अंतर्दृष्टि, संपूर्ण प्रभुत्व और समाप्ति कौशल आधुनिक मनोविज्ञान की सबसे सूक्ष्म अवधारणाओं अवशोषित के साथ, यह एक है मानव स्वभाव की जटिलताओं diagnoses उसकी झाड़ू और गहराई में सोच छोड़ दिया है. आपको बता दू तमिलनाडु सरकार के मुख्यमन्त्री करुणाकरण रजनीकान्त को लेकर व होलिवुड के सहयोग से महान कवि के नाम पर "तिरुक्कुल्लुर" फिल्म बनाने जा रहे है जिस पर ५० से १०० करोड का खर्चा आऐगा। घर्म सार कहता है कि स्वर्ग मॉ के चरणो मे,(पैर छुने से व्यक्ती का जीवन धन्य हो जाता है पापो का क्षय होता है) तो फिर भारत माता के पैर छुने के लिऐ उनका आशिष लेने के लिऐ वास्तविक स्वर्गलोक जाने के लिऐ हमे कन्या कुमारी के दर्शन करने चाहिऐ आप शान्ती,का अनुभव करगे। नोट- कुछ वरृतान्त मेरी यात्रा के अनुभवो पर आधारित है और कुछ खोजी यन्त्रो एवम साहित्यो से प्राप्त है। प्रस्तुती - महावीर बी सेमलानी "भारती' हे प्रभु यह तेरापथ |
अच्छा अब नमस्ते. कल सोमवार को ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे आपसे पुन: भेंट होगी.
सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. इस दुसरे राऊंड की नौवीं पहेली का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया.
संपादक मंडल :-
मुख्य संपादक : ताऊ रामपुरिया
विशेष संपादक : अल्पना वर्मा
संपादक (प्रबंधन) : seema gupta
संपादक (तकनीकी) : आशीष खण्डेलवाल
संस्कृति संपादक : : विनीता यशश्वी
सहायक संपादक : बीनू फ़िरंगी एवम मिस. रामप्यारी
सहायक संपादक : हीरामन