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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लागर दिवस - 2017 की तैयारियां
आप जानते हैं कि ब्लागिंग जैसे सशक्त माध्यम को ब्लागर सम्मेलन की जगह ब्लागर दिवस मनाने की आवश्यकता क्यों पड गयी? सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों के कारण ब्लागिंग पर धूल सी चढ गयी है पर हमें आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि हम सब मिलकर इस धूल को धूल चटा देंगे. ब्लागर दिवस मनाने का आईडिया 13 जून की अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में सु. अंशुमाला जी ने दिया था कि हर माह की पहली तारीख को फ़ेसबुक से छुट्टी लेकर ब्लाग गांव की तरफ़ चला जाये. हम तो कहते हैं कि पहली तारीख ही क्यों बल्कि निरंतरता से भी किया जा सकता है.
अंशुमाला जी की उपरोक्त पोस्ट पर सु. रश्मि रविजा, श्री मनोज कुमार, सु. अर्चना तिवारी, सु. रंजू भाटिया, श्री सागर नाहर, सु. निवेदिता श्रीवास्तव, श्री विवेक रस्तोगी, सु. शौभना चौरे, सु. अर्चना चावजी, सु. प्रियंका गुप्ता, श्री सोमेश सक्सेना, सु. शिखा वार्ष्नेय, स्वयंभू ताऊ रामपुरिया, सु. वाणी गीत, श्री आशीष श्रीवास्तव, श्री प्रवीण शाह, सु. संध्या शर्मा, श्री सलिल वर्मा, और श्री अंतरसोहिल नें इस विचार का स्वागत किया और इस तरह पहली जुलाई से ब्लागिंगको नये सिरे से संवारने की तरफ़ यह पहला कदम है. आशा है यह कदम आगे बढते रहेंगे.
वैसे फ़ेसबुक सरीखी संवाद की इंस्टेंट फ़ेसीलिटी के अभाव में यह कार्य इतना आसान भी नही होगा लेकिन ब्लाग पर भी इसे किया जा सकता है. ताऊजी डाट काम पर 2009 में एक खुल्ला खेल फ़र्रूखाबादी चलता था जो कमोबेश फ़ेसबुक जैसा ही था, वो तो हमारा आईडिया जुकरू भाई ले उडे और हम पीछे रह गये.
खुल्लाखेल फ़रूखाबादी - 113 की इस पोस्ट पर 516 कमेंट और खुल्लाखेल फ़रूखाबादी (152) : आयोजक उडनतश्तरी पर 616 टिप्पणी संवाद हैं. देखिये और अंदाजा लगाईये कि किस तरह यह एक मनोरंजक संवाद का जरिया था जिस पर शाम 6 बजते ही लोग जम जाते थे. इन पोस्ट पर संवाद यानि टिप्पणियों के रूप में गुफ़्तगू ही थी.
तो पहली जुलाई से शुरू हो जाईये और जिनके ब्लाग के पासवर्ड गुम गये हों वो उसे खोज लें और ब्लाग पर झाडू बुहारी करलें.
ब्लाग दिवस के शुभ अवसर पर ताऊ सद साहित्य प्रकाशन की कुछ अमूल्य पुस्तकें भी 20 प्रतिशत डिस्काऊंट रेट पर उपलब्ध रहेंगी.
इसके अलावा नामचीन ब्लागरों द्वारा लिखी गई दुर्लभ पुस्तके भी रिप्रिंट करवाई जा रही हैं जिन्हें खरीदने से आप पिछली बार वंचित रह गये थे. अबकि बार सूचना मिलते ही बुक करवा लें. यह पुस्तके बार बार नही मिलती.
कुछ नामचीन ब्लागरों की पुस्तकों का विमोचन और उनकी समीक्षा भी ताऊ महाराज करेंगे.
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