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कब से बैठे है , विपक्ष में , अपने घर में, फांके होते : सतीश सक्सेना

पिछली रिपोर्ट मैं नागनाथ, तू सांपनाथ, मौसम है दिखावा करने का में  आपने पढा था कि कैसे ताऊ महाराज धृतराष्ट्र ने सभी  विपक्षी पार्टियों को एक शाम मुशायरे के नाम पर खाने पीने के लिये  आमंत्रित किया था. जिसमें वो सभी विपक्षी पार्टियों को अगले चुनाव के एजेंडे में शामिल करना चाहते थे. 

मुशायरे में महाराज ने खाने पीने का बिल्कुल फ़ाईव स्टार इंतजाम किया था, सभी जानते हैं कि विज्ञान व अंतरिक्ष मंत्री श्री अरविंद मिश्र आम चूसने के बहुत शौकीन हैं उनकी फ़रमाईश पर महाराज ने  बीज घोटाला व चारा घोटाला से तैयार  आर्गेनिक खाद से पैदा हुये रत्नागिरी के  अल्फ़ांसो,  मालदा के लंगडा और पाकिस्तान के सिंधडी आम विशेष रूप से सभी को चुसवाने के लिये मंगाये  थे.  

जब सभी आमंत्रित अतिथी पहुंच गये तो स्टार्टर के रूप में  टू जी घोटाला समोसा,  कोलगेट घोटाला चिल्ली पनीर,   जमीन घोटाला केशर कलाकंद,  बोफ़ोर्स घोटाला  छोला  टिक्की...जैसे जायकेदार पकवान सर्व करवाये गये......इनको मुंह में रखते ही सभी सदस्य वाह वाह कर महाराज की मेहमान नवाजी की तारीफ़ करने  लगे. 

इसी तरह स्टार्टर कोर्स का आनंद लेते हुये  बहुत ही   सौहाद्र पूर्ण माहोल में नेता प्रतिपक्ष सतीश सक्सेना और ताऊ महाराज धृतराष्ट्र आम चूसते हुये आने वाले चुनाव के बारे में सब बातें तय कर रहे थे. ...

तभी सतीश सक्सेना बोले  - ताऊ महाराज, आपके जिम्मेदार पदाधिकारी  महिलाओं को सौ टंच  माल बताकर नारी शक्ति का अपमान कर रहे हैं......यह हमसे बर्दाश्त नही होगा....आप उन्हें नियंत्रित करें और माफ़ी मंगवाये....

तभी ताऊ महाराज बात को बीच में काटते हुये आंखे तरेर कर  बोले - सतीश जी, हम आपकी नेता प्रतिपक्ष के नाते इज्जत करते हैं पर आप हमारी पार्टी के अंदरूनी मामलात में दखल दे रहे हैं....... हमारे पदाधिकारी ने हमारी ही पार्टी की नेत्री को सौ टंच माल  कहा है आपकी पार्टी की किसी महिला के बारे में तो नही कहा ना? खुद हमारी नेत्री कह रही है कि किग्विजय ने तारीफ़ के बतौर कहा था.....फ़िर आपके पेट में क्यों दर्द उठ रहा है?  आप चाहो तो आपकी पार्टी की महिलाओं को आप दो सौ टंच बताईये...., हम आपके अंदरूनी मामलों में  कुछ नही बोलेंगे.....

सतीश सक्सेना बोले - खैर महाराज, आप जो चाहे करें....पर आपके नेता एक रूपया, पांच रूपया और दस रूपया में गरीब को भरपेट भोजन उपलब्ध होने की बयान बाजी करके गरीबों का मजाक उडा रहे हैं और आप चुप बैठे तमाशा देख रहे हैं? यह भी नाकाबिले बर्दाश्त है...

ताऊ महाराज - सतीश जी, आप समझते नही है.......योजना आयोग की 27 रूपये की बात सही ठहराने के लिये ही हम ऐसा करवा रहे हैं.....आप बात को  समझा करें.

सतीश सक्सेना तैश खाकर  बोले - महाराज, आप बिल्कुल सठिया गये हैं......आज  आदमी  27 रूपये में नाश्ता नही कर सकता और आपका आयोग इसमे गरीबी ही नही देख पा रहा है? आप बताईये आपकी आज की  इस पार्टी का प्रति व्यक्ति कितना खर्च आया?

ताऊ महाराज - सतीश जी आज की पार्टी का खर्च तो प्रति व्यक्ति एक रूपया भी नही आया. ...बिल्कुल मुफ़्त...जैसे गुरूद्वारे में लंगर मुफ़्त...यहां की यह पार्टी भी मुफ़्त......आज के सारे खर्च को स्पांसर करने के लिये  कार्पोरेट सेक्टर के लोगों की लाईन लगी है, कोई भी भुगतान  कर देगा, आप क्यों चिंता करते हैं?  लिजीये आप तो यह गर्मागर्म   टू जी घोटाला समोसा चखिये.......

सतीश ही बोले - महाराज सिर्फ़ चखाने से काम नही चलेगा, असली माल कहां हैं? उसका बंटवारा चाहिये, चाबी से कम की शर्त पर कुछ भी मंजूर नही.... और सतीश सक्सेना माईक हाथ में लेकर  शायरी करने लगे...... 


"पक्ष विपक्ष पार्टी मुशायरा संध्या"  में काव्य पाठरत सतीश सक्सेना

प्यारे साथियों, आज मैं आपके सामने अपने दिल की बात रख रहा हूं. ये ताऊ हमको सिर्फ़ बेवकूफ़ बनाता आया है इसलिये हम खजाने की  चाबी से कम पर बिल्कुल सहमत नही होंगे..... 

जनता कैसी बेवकूफ है 
भ्रष्टाचार न इनको दिखता                                       
चोर  डकैती घोटाले से  
ताऊ राम का पेट न भरता 
कितनी बार घोटाले देखे , स्विट्ज़रलैंड में  ताऊ देखे 
हम बैठे बैठे विपक्ष में,  गले फाड़ ,  चिल्लाते   रहते   !

२० साल से ताऊ राज  है  ! 
जनता को ये समझ न आती 
हमको मौक़ा एक न मिलता 
यह भगवान् को समझ न आती 
जमा माल सब खर्च हो गया , अब तो दिन भर रोते रहते 
अगर मिल गए ताऊ  सोते,कसम खुदा की  फूटे मिलते !

बड़े  बड़े   घोटाले  करता  
रोज़ खजाना अपना भरता
जनता को क्यूँ समझ न आये 
मेरे भी कुछ दिन, फिर जाएँ 
देख देख सोने के सिक्के,दाल औ चावल हज़म न होते   ! 
काश हमारे  घर में  भी तो ,  सोना , चांदी    बरसे  होते   !

बीस बरस से राम मनाऊं  
बरसों से इफ्तार खिलाऊँ 
हर रविवार चर्च में जाऊं 
फिर भी वोट न पूरे पाऊं 
हथकंडे, और राज़ बताये , ताऊ   मंत्री पकडे दिखाए !
एक बार राजा बन वा दे,  हम भी  कुछ  तो मोटे   होते ! 

 कब से बैठे  है ,  विपक्ष में , अपने घर में,  फांके होते !
ताऊ के घर में ऐश हो रही ,काश हमें भी मौके मिलते !

शायरी पढकर तैश में आकर सतीश सक्सेना जाने लगे तो  ताऊ महाराज धृतराष्ट्र ने उनके कंधे पर हाथ रखते हुये कहा - अरे सतीश जी, आप तो ख्वाम्खाह नाराज हो रहे हैं...आप मेरा पूरा प्रस्ताव तो सुनिये.............

(क्रमश:)

मैं नागनाथ, तू सांपनाथ, मौसम है दिखावा करने का

अभी तक तो हस्तिनापुर में ताऊ महाराज धृतराष्ट्र का एक छत्र शासन चल ही रहा है  पर आजकल विपक्षियों ने महाराज की नाकों में दम कर रखा है. पिछले काफ़ी लंबे अर्से से  अभी तक महाराज और उनके चेले चपाटे ही घोटालों पर घोटाले करके माल कमाये  जा रहे हैं. विरोधियों के सब्र का बांध टूटा जा रहा है वो किसी भी कीमत पर आने वाले चुनाव में अपना शासन स्थापित करने को बेताब हैं क्योंकि घोटालों में उनको बराबरी का हिस्सा नही मिला.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र को उनके खुफ़िया सुत्रों ने  आगाह कर दिया है कि अबकि बार विपक्षी नेता सतीश सक्सेना  के इरादे नेक नही लग रहे हैं, क्योंकि लूट का माल महाराज ने कहीं छुपा दिया था और चाबी की हवा भी किसी को नही लगने दे रहे हैं.  पार्टी प्रवक्ता खुशदीप सहगल भी महाराज को लगातार इस अनहोनी के लिये तैयार रहने को  चेता रहे थे और आजकल क्राईसेस मैनेज करने में जुटे हुये थे.

इस बात से महाराज काफ़ी चिंतित से रहने लगे हैं कि कहीं ऐसा ना हो कि अगली बार उन्हें घोटाले करने का मौका नही मिले. क्योंकि घोटाले, बेईमानी, भ्रष्टाचार ही तो ताऊ महाराज के जीवन की डोर है. यह सब ना हों तो महाराज जिंदा ही नही रह सकते.

स्वागत कक्ष में बैठे पार्टी प्रवक्ता श्री खुशदीप सहगल, प्रमुख विपक्षी नेता
श्री सतीश सक्सेना, कामरेड श्री  दिनेशराय द्विवेदी, स्वास्थ्य मंत्री डा. दराल
एवम विज्ञान व अंतरिक्ष मंत्री श्री अरविंद मिश्र.


आखिर ताऊ  महाराज को एक तरकीब सूझ ही गई और उन्होंने सत्ता छोडने की बजाय एक नया फ़ार्मुला निकाला. सभी  विपक्षी पार्टियों को एक शाम मुशायरे के नाम पर खाने पीने के लिये  आमंत्रित कर लिया. महाराज  अपना लठ्ठ कंधे पर रख कर आमंत्रितों का गर्मजोशी से स्वागत करने लगे.   कंधे पर लठ्ठ रख कर स्वागत करना यूं तो शालीन नही कहा जा सकता  पर महाराज के पास बस यही एक तो हथियार है विपक्षियों को काबू में रखने का.  कंधे पर रखा लठ्ठ महाराज की CBI यानि Celebrity Blog Investigation
द्वारा जांच बैठाने  का सूचक है जिसको देखते ही सामने वालों को पता चल जाता है कि यदि महाराज की बात नही मानी तो CBI प्रमुख परिकल्पना वाले श्री रवींद्र प्रभात जी को उनके ब्लाग की जांच का  काम सौंपा  जा सकता  है.

ताऊ महाराज मुशायरे में अपनी बात रखते हुये

मुशायरे की संध्या पर ताऊ महाराज ने सबका  स्वागत करने के बाद सबसे  खाने पीने का इसरार करते हुये अपने कंधे पर लठ्ठ  रखते हुये बोलना शुरू किया.....

प्यारे भाईयो, चाहे आप या हम सत्ता में रहें या विपक्ष में, उससे क्या फ़र्क पडता है? हम सबका एक ही उद्देष्य है कि देश को आगे ले जाना है और देश आगे तभी जायेगा जब यहां के लोगों में 100 रूपये किलो टमाटर और 50 रूपये किलो प्याज जैसी चीजे खरीदने की क्षमता हो.....खैर यह सब एजेंडा तो हम दोनों ही पक्ष विपक्ष के लोग जानते हैं.

मैने आज आपको इस गोपनीय मुशायरा संध्या में इसलिये बुलाया है कि आने वाले चुनाव का अंदरूनी एजेंडा हम तय करले, हममें से किसी एक की हार या जीत तो होनी ही  है. .. लेकिन हम ये वादा करें कि शासन चाहे जिसका भी रहे हम एक दूसरे का पूरा ख्याल रखेंगे.

मैं मानता हूं कि इस बार मेरे मंत्रियों ने घोटाले कुछ ज्यादा ही कर दिये और आपको ज्यादा मौका नही मिला किंतु इस बार ऐसा नही होगा. लूट के माल का बंटवारा बराबर होगा.


ताऊ महाराज की चाबी वाली बात गौर से सुनते सतीश सक्सेना

इसी बीच विपक्ष के नेता सतीश सक्सेना तमतमा कर उठे और बीच में ही बोले ......ताऊ महाराज, ऐसा नही चलेगा, तुमने लूट का सारा माल कहीं छुपा दिया है, यदि बराबरी की बात करते हो तो उस खजाने की चाबी हमारे हवाले करो वर्ना विरोध जारी रहेगा........

सतीश सक्सेना को शांत करते हुये ताऊ महाराज धृतराष्ट्र बोले - सतीश जी प्लीज...प्लीज आप शांत हो जाईये और मेरी पूरी बात तो सुनिये.....आप नाराज क्यूं हो रहे हैं? आपके लिये एक गजल पेश कर रहा हूं..आपकी सब शिकायते दूर हो जायेंगी और चाबी का राज भी पता चल जायेगा. सुनिये....

मैं नागनाथ, तू सांपनाथ, मौसम है दिखावा करने का 
या मैं जीतूँ  या तू जीते, न गम हो किसी के पिटने का

प्रजातंत्र की लूट मे हम, मिलजुल कर मलाई खा लेंगे

जब जेब भरें हम दोनों की , काहे झंझट में, पडने का   

तू मेरी सीडी पब्लिश कर , मैं तेरा  बैण्ड  बजवा  दूंगा 

मिलता है हमको कभी कभी, मौका नोटों के गिनने का  

तू  पक्ष में हो या विपक्ष में, हर तरफ़  फसल  है,  चांदी की 

काटो चुपचाप बिना पंगा, क्यों  व्यर्थ का  झगडा रोने का 

जनता के चक्कर में प्यारे क्यों अपना समय ख़राब करें 

चुपचाप गड्डिया रखता जा स्विस का बैलेंस बढाने का 

मिल बाँट खाओ और मौज करो, बेकार बहस में पड़ते हो  
ताऊ कहता , हद में ही रहो, मौका  आये क्यों लठ्ठ उठाने का



इस तरह ताऊ महाराज ने अंत में लठ्ठ (CBI) की छुपी हुई धमकी देते हुये  अपनी बात पूरी की, चारों तरफ़ शांति पसर गई  और अब बोलने के लिये खडे हुये प्रमुख विपक्षी नेता सतीश सक्सेना .......

(क्रमश:)

तेरी ऐसी की तैसी ताऊ की….. नागपत्नि

ब्लागिंग के ठंडेपन से  निराश हताश  ताऊ तपस्या करने जंगल की और  चला जा रहा था. रास्ते में ठंड और बर्फ़ीली हवाओं  की वजह से परेशान था. पर ब्लागर की यात्रा जारी रही. थोडी देर बाद बरसात भी होने लगी तो मन मारकर  ब्लागर ताऊ वहीं एक बूढे बरगद के तने के सहारे बैठ गया. ताऊ आगे बढने के लिये बरसात बंद होने का इंतजार करने लगा तभी वहीं पास में एक  बडे से शाही नाग देवता  भी बैठे दिखाई दिये. उसे देखकर पहले तो ताऊ डरा फ़िर यह सोचकर मुस्कराया कि इससे क्या डरना? यह तो अपनी ही प्रजाति का भाई बंद है.


ताऊ ने उससे राम राम की. बदले में नागराज ने भी जय श्री राम का उद्घोष किया. मालूम पडा कि नाग देवता का बिल वहां से काफ़ी दूर था इस वजह से वह भी यहां बरसात रूकने का इंतजार कर रहा था. समय काटने के लिये दोनों आपस में बातचीत करने लगे.

नाग बोला – हे मनुष्य तुम कौन हो? शक्ल से कुछ कुछ बंदर जैसे दिखाई देते हो पर मनुष्यों जैसी पगडी और लठ्ठ  धारण किये हुये हो? तुम मनुष्य हो या बंदर?

ताऊ ने जवाब दिया – हे सर्पराज, मेरे पूर्वज बंदर थे और मैं अपने पूर्वजों के कुछ ज्यादा ही नजदीक हूं इसलिये आधा बंदर और आधा मनुष्य दिखाई देता हूं. पर हकीकत यह है कि मैं ना बंदर हूं और ना मनुष्य हूं.

सांप ने विस्मय पूर्वक पूछा –  तुम  तो बडे दार्शनिक भाव से बात कर रहे हो? तुम्हारा नाम क्या है? क्या तुम्हारी बंदरिया तुम्हें छोड कर भाग गई या कुछ और हुआ है जो तुम इस बियाबान और खतरनाक जंगल में चले आये हो? यहां पग पग पर मौत खडी रहती है, फ़िर भी तुमने यहां आने का साहस किया है, इसके पीछे कोई बडा गहरा राज होगा? मुझे भी  जानने की इच्छा हो रही है.

ताऊ बोला –  मेरा नाम ताऊ है सर्पराज. यह भी जान लिजिये कि   ना तो मेरी बंदरिया कहीं भागी है, और ना मैं उससे पिटने की वजह से भागा हूं. ये बात अलग है कि आज कल महिला अधिकार कुछ ज्यादा ही बढ गये हैं. इस वजह से  पहले तो वो  मुझे दिन भर में चार छ लठ्ठ ही मारा करती थी पर आजकल जब उसका मूड चाहे मुझे कूट पीट देती है और मैं चूं तक नही कर सकता. और सच कहूं तो अपनी बंदरिया से आठ दस लठ्ठ खाए बिना आजकल मेरी पीठ भी सीधी नही होती, बस यूं समझ लिजिये कि आदत सी पड गई है पर ये  मेरी परेशानी का कारण नही है.

सांप ने बीच में ही टोका – यार ताऊ, तुम अजीब आदमी हो? तुम्हारी बंदरिया तुम्हें सरे आम दिन दहाडे मारती है और तुम्हारा घर छोडने का यह कारण भी नही है? मेरी उत्सुकता और बढ गई है? कहीं चोरी डकैती… की वजह से फ़रारी काटने तो नही आ गये हो?   

ताऊ बोला – नही नही…चोरी डकैती तो मैं वर्षों पहले छोड चुका हूं…और मेरी कोई सरकारी सजा भी बाकी नही है…

नाग देवता की उत्सुकता बढती ही जा रही थी उन्होंने पूछा – तो ताऊ, फ़िर तुम जरूर कोई सरकारी मंत्री संत्री रहे होगे और कोई घोटाला करके आये हो? सुना है आजकल घोटाले बाजों और रिश्वतखोरों के खिलाफ़ सख्त माहोल बना हुआ है?

ताऊ ने जवाब दिया – नाग देव, आप भी  अजीब सी बाते कर रहे हैं? अफ़्सोस तो यही है कि मुझे घोटाले और रिश्वत खोरी का मौका ही नही मिला वर्ना मैं यहां जंगल में क्या करता? कही विदेश में जाकर अपनी बंदरिया के साथ  छुट्टियां बिता रहा होता. काश घोटाले और भ्रष्टाचार करने के मौके मुझे मिल गये होते.

सर्पराज ने पूछा – ताऊ, अब मुझे सच सच बताओ……मेरी उत्सुकता बढती ही जा रही है…तुम जरूर किसी महिला उत्पीडन के मामले में फ़ंस कर यहां आये हो……साधारण स्थिति में कोई इस जंगल में आने की हिम्मत नही करता….तुम सही बात जल्दी से बताओ…

ताऊ बोला – नागराज, आप मुझ पर सरासर गलत शक कर रहें हैं…मैं तो अपनी बंदरियां के अलावा सबको मां बहन बेटी समझता हूं. असल में मैं अपनी बंदरिया के लठ्ठ की वजह से इतना डरता हूं कि ऐसे कामों के बारे में सपने में भी नही सोच सकता.

सर्पराज ने पूछा – तो  तुम करते क्या हो?  लगता है कहीं गहरी चोट खाई है?

ताऊ ने जवाब दिया – करने के नाम पर तो मैं बस  ब्लागिंग करता हूं और अब इससे निराश हो चला हूं इसलिये परेशान होकर इस भयानक जंगल में तपस्या करने चला आया हूं.

सांप ने पूछा – ब्लागिंग से परेशान होने की क्या बात है? वो तो तुम यहां से भी कर सक सकते हो. मेरे बिल में हाईस्पीड नेट कनेक्शन और कंप्यूटर सब कुछ है. कुछ दिन के लिये  मेरे घर चलो वहां  मुझे भी ब्लागिंग सिखा देना…

ताऊ बोला – सर्पराज, अब ब्लागिंग में क्या रखा है? ब्लागिंग का स्वर्णयुग तो कभी का खत्म हो चुका है….अब तो सारे ब्लागर फ़ेसबुक की और फ़ेस कर चुके हैं …कुछ ट्विटर पर टर टरा लेते हैं…..

बीच में ही नाग देवता बोले – नही नही ताऊ….तुम्हें कुछ दिन मेरा आतिथ्य तो स्वीकार करना ही पडेगा और मुझे ब्लागिंग भी सिखानी पडेगी. अब बरसात भी बंद हो चुकी है और रात गहराने लगी है. इस जंगल में अब कहां जाओगे…बेवजह किसी शेर चीते का शिकार बन जाओगे…अब जल्दी चलो.

ताऊ ने जल्दी से अपना लठ्ठ उठाया और नाग देवता के पीछे पीछे हो लिया. रास्ते में नागदेवता ने पीछे मुडकर ताऊ के हाथ में लठ्ठ देखा तो बोला – ताऊ, इस लठ्ठ को तुरंत फ़ेंक दो…तुम्हारा क्या भरोसा? आदमी की जात के हो…कहीं पीछे से मेरे सर पर ही मार दो..तो? मेरे पिताजी ने कहा था कि आदमी का कभी भरोसा मत करना. ताऊ ने मौके की नजाकत देखकर अपना लठ्ठ दूर फ़ेंक दिया.

नाग देवता के घर पहुंचते ही ताऊ दंग रह गया. बिल क्या…यह तो आलीशान नाग महल था. वहां पहुंचते ही नाग देवता की पत्नि ने इठलाते हुये बडे प्रेमपूर्वक नाग देव का स्वागत किया……और ताऊ को देखकर थोडा सकुचा कर ठिठकी तो नागराज ने कहा – डरो मत, ये मित्र ताऊ है….रात के डिनर की व्यवस्था करो. 

नागराज की पत्नि एक आदर्श पत्नि की तरह मेहमान नवाजी की तैयारियों में लग गई. पास के ही कक्ष में नागराज के  वृद्ध माता पिता रजाई में दुबके हुये  आराम फ़रमा रहे थे वहीं दूसरी तरफ़ उनके बाल बच्चे धमाचौकडी मचाये हुये थे. नाग राज ने सबका ताऊ से परिचय कराया और ड्राईंग रूम में बैठकर दोनो गप शप करने लगे.

डिनर खत्म होने के बाद नागराज ने अपना कंप्यूटर चालू किया और  बोले – ताऊ अब मुझे ब्लागिंग सिखाओ कि कैसे क्या करना है?

जैसे कोई कनिष्ठ ब्लागर अपने वरिष्ठ ब्लागर को गुरूवर के संबोधन से  नवाजता हुआ कुछ सलाह मांगता है. इस तरह की खुशी ताऊ ने महसूस की.  ताऊ को भी ऐसी खुशी  काफ़ी समय बाद मिल रही थी सो  इसे चूकना नही चाहता था. 

ताऊ ने ब्लागर पर नाग राज का अकाऊंट बनाकर ब्लाग तैयार किया और सर्पराज को ब्लागिंग के गुर सिखाने लगा कि कहां कहां टिप्पणी देने जाना है…किसके यहां नही जाना है…किसकी टंगडी खींचनी है… किसकी वाह वाही करनी है…बेनामी टिप्पणी कैसे करनी है…. ब्लागिंग के कौन कौन से मठाधीश हैं? कौन सा मठाधीश अपने गुट का है? कौन सा दुश्मन गुट का है? किससे सतर्क रहना है…इत्यादि इत्यादि….

ठंड काफ़ी हो रही थी सो नागराज ने गर्मागर्म काफ़ी बुलवायी. थोडी ही देर में नागपत्नि काफ़ी लेकर आ गयी. ताऊ और नागराज को ब्लागिंग पर बातें करते सुनकर नागपत्नि का माथा ठनक गया और वो फ़ुफ़कारने लगी. ताऊ डर गया…थोडी देर पहले ही जो निहायत ही  आज्ञाकारी पत्नि  और सर्पसुंदरी दिखाई दे रही थी उसका रूप अब बदल चुका था, नागराज भी अपनी पत्नि का यह ताई छाप रूप देखकर सहमें हुये थे. नागराज ने पत्नि से इशारों में ही पूछा कि बात क्या है?

नागपत्नि बोली – नही नही…तुम ब्लागिंग नही करोगे नागराज. और ताऊ की तरफ़ मुखातिब होकर बोली - ताऊ, तुम जानते नही हो…पिछले जन्म में मैं तुमसे भी बडी ब्लागर थी. तुम्हारे सारे मठाधीश मेरी चिलम भरा करते थे…….

ताऊ ने बीच में ही टोका – भाभीजी, फ़िर आप इतना नाराज क्यों हो रही हैं? जब  आप स्वयं ब्लागर थी तो अब भाई साहब को ब्लागिंग करने दिजिये..आजकल हिंदी ब्लागरों का यों भी टोटा हो गया है.

नागपत्नि बोली – ताऊ तुम क्या जानो ब्लागिंग का दर्द? तुमको तो  ब्लागिंग की वजह से ताई  दो चार लठ्ठ ही मारती है पर मुझे तो जिंदा जलना पडा था पिछले जन्म में…. मुझे ब्लागिंग का इतना बडा नशा था कि मैं चौबीस घंटे बस उसी में खोयी रहती थी. दिन रात ब्लागिंग सेवा में ही लगी रहती……

ताऊ ने बीच में ही टोक कर पूछा – तो भाभीजी इसमें बुराई क्या थी? ब्लागिंग का जल कर मरने से क्या संबंध? आजकल भी कई ब्लागर चौबीसों घंटे ब्लागिंग करते हैं? तो उनको क्या जलकर मरना पडेगा? मैं तो खुद कभी चौबीस क्या बल्कि  अडतालीस घंटे ब्लागिंग किया करता था.

नागपत्नि बोली – ताऊ, असल में ब्लागिंग तो एक बहाना भर था. सत्य यह था कि मैं दहेज कम लायी थी. शादी के समय कम दहेज की वजह से मेरी सास मुझसे बहुत ज्यादा नाराज  रहती थी. बस हर समय मुझे ताने दिया करती थी. और मैं सास के तानों से अपना दिमाग हटाने के लिये ब्लागिंग में डूबी रहती. उसको मुझमें बुराई निकालने का इससे बडा और क्या बहाना मिलता?  एक दिन जब मैं बेनामी टिप्पणियां करने  में मशगूल थी तब चुपचाप पीछे से आकर  मेरी सास ने  मुझ पर केरोसिन डाल कर आग लगा दी और मुझे संभलने का मौका तक नही मिला…. और इस जन्म में मैं यहां हूं… ताऊ, तुम हमें माफ़ करो और अपने घर जावो… हमें नही करनी ब्लागिंग… हमें अपनी दुनियां में ही खुश रहने दो….

ताऊ को ऐसा झटका लगा जैसे आसमान से जमीन पर गिरा हो. नागराज जैसा सुलझा हुआ एक ब्लागर चेला हाथ से निकला जा रहा था...…क्योंकि नागराज जैसा दबंग चेला हो तो बडे बडे मठाधीशों के मठों की बैंड आसानी से बजायी जा सकती है सो नागपत्नि को समझाने के उद्देष्य से ताऊ बोला – भाभी जी आप मेरी बात तो सुनिये…. आज हिंदी की सेवा के लिये नये और भाई साहब जैसे  सुलझे हुये ब्लागरों की सख्त आवश्यकता है…

ताऊ के इतना कहते ही नागपत्नि फ़ुफ़कारते हुये बोली – तेरी ऐसी की तैसी ताऊ की….. तुझे मालूम नही है कि इस जन्म में भी मेरे बाप ने दहेज नही दिया है और ये रजाई में दुबक कर बैठी मेरी जिंदा  सास अभी भी नाराज होकर ताने मारती रहती है. पिछले जन्म में भी जला कर मारी गई हूं....…इस जन्म में नहीं जलना चाहती…..

ताऊ इस हाथ आये ब्लागर को छोडना नही चाहता था सो कुछ बोलता इसके पहले ही नागपत्नि फ़ुफ़कारते हुये लहरायी और पास पडा लठ्ठ उठाकर ताऊ की टांगों पर दे मारा. ताऊ चीखते हुये झटके से उठा तो देखा  सामने ताई दूसरा  लठ्ठ मारने को तैयार खडी चिल्ला रही थी….सबेरे के नौ बज गये…अब तक नही उठा..आफ़िस क्या तेरा ताऊ जायेगा?


ताऊ महाराज रावण को गुस्सा क्यों आता है?

दर्शकों,  ताऊ टी.वी. के चीफ़ रिपोर्टर रामप्यारे का  झटकेदार नमस्कार कबूल किजिये. अभी चार दिन पहले ही ताऊ महाराज रावण ने एक प्रेस कांफ़्रंस बुलायी थी जिसमें पत्रकारों ने इतने उल्टे सीधे सवाल किये कि ताऊ दशानन महाराज बुरी तरह तैश में आगये.  महाराज रावण को इतना गुस्सा आया कि उसके सामने कलमान कुर्शीद को आया गुस्सा कुछ भी नही था. जहां कुर्शीद साहब ने गुस्से में आपा खो दिया वहीं पर महाराज दशानन गुस्से को अंदर ही अंदर पी गये और अपनी बात को किसी तरह रख कर वहां से चले गये.




कल दशहरे को रात साढे आठ बजे हमने ताऊ स्टूडियो में ही रावण दहन का कार्यक्रम रखा था. रावण दहन करके मुंह मीठा कर  के लौट ही रहा था कि एक अंधेरे गलियारे में  अचानक महाराज रावण प्रकट हो गये और मुझे गर्दन से पकड कर उठा लिया. मेरी चारों टांगे हवा में लटकी हुई थी. डर के मारे मेरी सिट्टी पिट्टी गुम हो रही थी... अभी दो मिनट पहले तो महाराज का अंतिम क्रियाकर्म किया था और ये अभी कहां से आ गये?

मेरी दुविधा देखते हुये महाराज दशानन ने जोर से अट्टहास करते हुये कहा - अरे रामप्यारे...तू क्या समझता है कि मैं तुम्हारे मार देने से मर जाऊंगा? अरे बेवकूफ़ों...ये क्यों नही समझते कि मेरी नाभि में अभी भी अमृत भरा है...मैं हमेशा अमर हूं...मैं कभी नही मरूंगा...तुम चाहे जितनी बार मुझे मार दो पर मैं जिंदा ही रहूंगा.

मैंने डरते हुये कहा - महाराज लंकेश की जय हो....महाराज आप मुझे जमीन पर उतार दें नहीं तो मेरी गर्दन टूट जायेगी....

लंकेश ने मुझे जमीन पर उतार दिया और मुझसे पूछा - रामप्यारे, ये बता कि तुझे कभी दुख हुआ है? कभी असह्य वेदना हुई है?

मैने कहा - हे लंकापति, मुझे सबसे बडी वेदना अभी कुछ ही समय पहले हुई थी जब मेरा तबादला दूसरे शहर में हो गया...मेरा घर और प्यारा शहर छूट गया. ... वो सकोरे से सुडक सुडक कर पीने   वाली सुबह सबेरे की  चाय भी छूट गई.....नई  जगह एडजस्ट होने में पसीना आ गया...वो बहुत गहन वेदना का समय था मेरे लिये...

मेरे इतना कहते ही महाराज दशानन भडक गये और बोले - अरे मूर्ख...जब तुझे सकोरे वाली चाय और शहर छूटने से इतनी पीडा हो रही है तो हमारी पीडा भी सोच....मुझे लोग किस तरह बदनाम करते हैं?  हर साल मुझे बारूद के ढेर पर सर से पांव तक जला डालते हैं? अरे...इतनी बुरी तरह तो मैने हनुमान को भी नही जलवाया था... बस प्रेम पूर्वक  उसकी पूंछ में जरा सी आग ही छुआयी  थी.....

मैंने  दादा दशानन का गुस्सा देखकर गर्दन हिलाते रहने में ही भलाई समझी. मन में सोच रहा था कि यहां महाराज दशानन से एक दो सवाल पूछ लूं तो एक अच्छी खासी ब्रेकिंग न्यूज बन जायेगी...पर यह सोच कर चुप लगा गया कि अभी महाराज गुस्से में हैं... कुछ उल्टा सीधा पूछने में आ गया  तो महाराज रावण को मेरी गर्दन मरोडने में यहां  कितनी देर लगेगी?

मैं कुछ बोलता इसके पहले ही महाराज दशानन तैश में बोलने लगे - रामप्यारे...भले ही मेरे दस सर हों पर मैं दोमुहीं बात नही करता. गठबंधन के नेता मंत्रियों की तरह नही कि सत्ता सुख भोगने के लिये अंदर कुछ बोलूं और बाहर कुछ और....मैं तो दशग्रीव  होते हुये भी डंके की चोट एक ही बात बोलकर उस पर कायम रहता हूं... क्या मेरे दामाद ने...कभी कोई कांड किया? क्या मेरे किसी मंत्री संत्री ने टू..जी..थ्री...जी किया?  किसी कोल का गेट खोला...?  क्या मेरे किसी मंत्री या रिश्तेदार ने कोई एन.जी.ओ. बना कर मलाई चाटी?.... क्या मेरे किसी मंत्री ने कोई कांडा  कांड किया?.... नहीं ना..? फ़िर भी तुम उन्हें जलाने के बजाए  हर साल मुझे  जलाते हो?

मैंने डरते हुये कहा - जी महाराज, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं अगर आप अपनी बात पर अडिग नही होकर प्रभु राम की शरण हो लेते  तो आज आप भी सत्ता सुख भोग रहे होते. आप तो बिल्कुल अटल और बात के धनी हैं....

मेरी बात सुनकर दादा लंकेश फ़िर तमतामये और बोले - अरे मूर्ख...मैं जानता हूं तू सीता की बात कर रहा है. पर ये बता कि मैने तो सिर्फ़ एक बार पराई स्त्री का उसकी इच्छा के विरूद्ध अपहरण किया...और उसे पूरे मान सम्मान और इज्जत  मर्यादा के साथ रखा,  इसके बाद भी तुम लोग हर साल मुझे जलाते हो? अरे आज कितनी अबलाओं पर सामुहिक ज्यादती हो रही है? किस  तरह उनकी इज्जत से खिलवाड किया जा रहा है? और तो और तुम्हारे नेताओं को यह कहते हुये  भी शर्म नही आती कि बलात्कार करवाने लडकियां खुद लडकों के साथ अपनी राजी मर्जी से जाती हैं? इस पर भी तुम मुझे जलाते हो? उन्हें क्यों नही जलाते? 

मेरी गर्दन   श्रद्धा पूर्वक महाराज दशानन के सामने झुक गई  और चुपचाप यह सोचते हुये घर  की तरफ़ चल पडा कि क्या ताऊ लंकेश वाकई सच नही बोल रहे हैं? क्या आज चारों तरफ़ रावण ही रावण नही पैदा हो गये हैं? एक लंकेश को जलाने से क्या होगा?

आखिर मिस. समीरा टेढी ने ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र को खोज ही लिया

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र, ब्लागिस्तान का सारा कार्यभार रामप्यारे के हवाले करके काफ़ी समय पूर्व ही दंडकारण्य के लिये प्रस्थान कर गये थे. अंधे होते हुये भी महाराज ताऊ धॄतराष्ट्र में शायद भविष्य में झांकने की असीम ताकत रही होगी जो समय रहते यहां से गमन कर गये. शायद उनको मालूम था कि अब सब घोटालों का पर्दा फ़ास होने का समय आ चुका है. हस्तिनापुर के सम्राट होने के नाते सारा ठीकरा तो आखिर उनके माथे ही फ़ूटना था.

महाराज को ढूंढने के अनेक लोगों ने प्रयास किये परंतु महाराज तो रामप्यारे के सींगों की तरह गायब हो गये थे. ऐसे में मिस समीरा टेढी को कहां चैन पडता सो अनेकों जगह ढूंढते ढूंढते मिस समीरा ने ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र को हिमालय की वादियों में जाकर ढूंढ ही लिया. मिस समीरा को देखते ही महाराज धॄतराष्ट्र खिल उठे और काफ़ी गर्मजोशी से उनका स्वागत किया.

आखिर मिस. समीरा टेढी ने ताऊ महाराज को खोज ही लिया


ताऊ महा घोटाला धाम के आसपास बिखरी पडी शुभ्र धवल बर्फ़ पर महाराज के साथ चहलकदमी करते हुये समीरा जी ने महाराज से राजकाज के प्रति उनकी बेरूखी का सबब जानना चाहा तो महाराज धॄतराष्ट्र आखिर बोल ही पडे - अब आप ही बताईये समीरा जी, हम क्या कर सकते हैं? हस्तिनापुर में हम सिर्फ़ नाम के महाराज रह गये थे. सब पक्ष विपक्ष के राजकुमार एक दूसरे की टांग खिंचाई में लगे थे, सरकारी अधिकारी, मंत्री, कर्मचारी किसी भी तरह अपना बैंक बैलेंस बढाने में लगे थे. तो हम वहां रह कर क्या करते?

मिस समीरा टेढी : पर महाराज, आपके इस तरह पलायन करने से तो आपके हस्तिनापुर में और घोर अव्यवस्था फ़ैल गई है, आपकी प्रजा दुखी है?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : हम क्या कर सकते हैं समीरा जी? हम तो बस मंत्रि मंडल की कठपुतली भर रह गये हैं. हमारे राजकुमारों के अपने अपने खजाने भरने की महत्वाकांक्षाओं और भ्रष्टाचार के चलते हमारे लिये सांप छछूंदर जैसी हालात हो गई है, हमे ना चाहते हुये भी अपने राजकुमारों और मंत्रियों के गलत काम काज का बचाव और समर्थन करना ही पडता है.

समीरा जी : हां महाराज आपकी ये बात तो सही है, अब देखिये ना बाबा कामदेव और उनके सोते हुये शिष्यों पर आपके सिपहसालारों ने आंसू गैस और लाठियां पडवा दी, ये तो बहुत गलत बात हुई महाराज?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : अब समीरा जी हमारे मंत्री और राजकुमार इतने बुरे भी नही है, आप जानती है ना कि बाबा कामदेव योगासन सिखाने के नाम पर वहां शासन के खिलाफ़ साजिश रच रहे थे? इसमे क्या बुरा किया? इस मसले में हमारे अधिकारियों ने राज धर्म का पालन किया है, हम उनको साजिश बेनकाब करने के लिये धन्यवाद देते हैं, आखिर शासन थोडी सख्ती के बिना नही चल सकता.

समीरा जी - पर महाराज आपके अधिकारी एवम मंत्री तो कन्ना साहेब के रोकपाल बिल के भी खिलाफ़ हैं. वो कहते हैं कि बिना चुनाव लडे कोई सिविल सोसाईटी थोडे ही बन सकती है? या तो राजवंश में पैदा होके दिखाये या चुनाव लडे, तब ठीक है, यूं ही बैठ गये अनशन पर और बन गये रोकपाल बिल के कर्ता धर्ता?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : बिल्कुल सही कहा, आखिर प्रजा को प्रजा ही रहना चाहिये, हमने यहां से ही सख्त आदेश दे दिये हैं कि बगावत की कोशीशे हर स्तर पर नाकाम कर दी जानी चाहिये.

समीरा जी :- और महाराज आजकल आतंकवादी घटनाएं बढ गई है? आपकी इंटेलीजेंसिया नाकाम हो रही हैं? प्रजा रोज मर रही है.

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : अरे समीरा जी आप कहीं पत्रकारिता के पेशे में तो नही आ गई हैं? आप तो बाल की खाल निकाले जा रही हैं? अरे इतने सालों से जब आतंकवादी घटनाएं नही हुई तो उसका श्रेय आप हमारे शासन को नही दे रही हैं और कहीं दो चार बम फ़ूट गये, ट्रेनें पलटा दी गई तो आप आसमान सर पर उठा ले रही हैं? आपको मालूम है कि पडौस के मुल्कों में रोज आतंकवादी वारदातें होती हैं और हमारे यहां कभी कभी होती हैं. आतंकवादी घटनाओं को कोई भी नही रोक सकता, फ़िर आप उल्टे हमें दोष दे रही हैं? आपको तो हमारे मंत्री और अधिकारियों की पीठ थपथपानी चाहिये, उनका एहसानमंद होना चाहिये.

समीरा जी :- बस महाराज श्री एक बात और बता दिजिये कि डीजल, पेट्रोल, दवाई, स्कूल फ़ीस, खाना पीना सब कुछ महंगा हो गया है, अधिकतम जनसंख्या दो वक्त की रोटी और दूसरे संशाधन नही जुटा पा रही है. क्या आप इस के लिये कोई उपाय करेंगे?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : देखिये समीरा जी, महंगाई का बढना बहुत जरूरी है, इससे अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में हमारा रूतबा बढता है, इसलिये महंगाई को तो हम चाहकर भी कम नही करेंगे, अपना रूतबा बढाने के लिये हम चाहेंगे कि महंगाई अभी कम से कम दुगूनी तक बढ जाये तो हम विश्व बिरादरी के नंबरदार बनने की हैसियत वाले हो जायेंगे.

समीरा जी :- पर महाराज, अगर महंगाई दुगूनी तक बढ गई तो प्रजा भूखों मर जायेगी, कैसे जिंदा रहेगी प्रजा? कुछ तो सोचिये? बोलिये महाराज बोलिए?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : समीरा जी हमारे हाथ में कुछ नही है. महंगाई तो नही रूकने वाली, अलबत्ता जो प्रजा जन इस महंगाई के साथ नही चल सकते उनके लिये हम कुछ उपाय अवश्य सोचेंगे.

समीरा जी ने तनिक खुश होते हुये पूछा - बताईये महाराज बताईये, प्रजा के लिये आपका क्या प्रोग्राम है?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : समीरा जी, हम क्या कर सकते हैं? हमारे हाथ में कुछ नही है, हम तो बेबस तिकडमी सरकार के प्रधान हैं, हमारे हस्तिनापुर की प्यारी प्रजा रोज तिल तिल कर भूख प्यास से मरे, इसके बजाये हम सब्सीडी देकर सरकारी खजाने से मुफ़्त के जहर की बोरियां चौपाल में रखवा देंगे, जो तिल तिल कर मरने से डरता हो वो एक बार खाकर मर जाये.

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र की ये बाते सुनकर मिस समीरा टेढी अवाक सी उनको देखती रह गयी.