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रोमांचक खेल "दो और दो पांच" में वंदना गुप्ता

रामप्यारी ने आजकल ताऊ टीवी का काम संभालना शुरू कर दिया है. उसी की पहल पर ब्लाग सेलेब्रीटीज से "दो और दो पांच" खेलने का यह प्रोग्राम शुरू किया गया है. दो और दो पांच में, ब्लॉग सेलिब्रिटीज  से निवेदन है कि वे सवाल के जवाब कुछ चटपटे रखें ताकि ब्लोगर साथियों का मनोरंजन भी हो , इस प्रोग्राम का मकसद  सिर्फ़  हंसना हंसाना सीखना है. प्रतिभागियों  द्वारा दिये गये जवाबों का  गंभीर या वास्तविक  अर्थ निकालने की कोशिश न करे और हलके फुल्के मजाक का आनंद लें !   इस एपिसोड में  रामप्यारे का  "हां या ना " कालम जोडा गया है सिर्फ़   मनोरंजन के लिये, 

ब्लाग सेलेब्रीटीज को रूबरू पकडना बहुत ही मुश्किल होता है, नेट पर तो जब चाहे तब पकड लिजीये.....पर रामप्यारी भी कोई कम नही है.  रामप्यारी अब तक  2 + 2 = 5 के  खेल में शामिल कर चुकी है  सतीश सक्सेना ,  हरकीरत ’हीर’ ,  काजल कुमार ,   संगीता स्वरूप  (गीत) और दबंग हीरो अरविंद मिश्र. को.   और आज तो रामप्यारी  वंदना गुप्ता के साथ ही दाखिल हुई स्टूडियो में..........बस तो फ़िर क्या था....हो गया गेम शुरू..  फ़िलहाल आप  बिना ब्रेक देखिये अटपटे सवालों के चटपटे जवाब... सीधे...ताऊ,  रामप्यारी और रामप्यारे की वंदना गुप्ता से "दो और दो पांच"......आईये जोरदार तालियों से स्वागत कीजिये......


ताऊ और रामप्यारी के साथ "दो और दो पांच खेलते" वंदना गुप्ता 
 (कैमरामैन - रामप्यारे)


सवाल ताऊ के जवाब वंदना गुप्ता के यानि 2 + 2 = 5


ताऊ : सबसे ज्यादा दुखी कौन है?
जवाब : ताऊ

ताऊ: आप आखिरी बार कब रोई थी?
जवाब : जब पैदा हुयी थी. :)

ताऊ : पैदा होते समय रोना आपको सच मे याद है या सुनी सुनाई बात कह रही हैं?
जवाब : मुझे तो पिछला जन्म भी याद है..कहो तो तुम्हारे पिछले जन्म की पोल भी खोल दूं ताऊ?

ताऊ : कल रात आपने कौन सी सब्जी खायी थी?
जवाब : जो आज तक दुनिया में बनी ही नहीं.:)

ताऊ : आपकी किस आदत से आपके पति ज्यादा परेशान है?
जवाब : सारा दिन की ब्लोगिंग से.:)

ताऊ. : कौन सा ट्रेफ़िक रुल आप सबसे ज्यादा तोडती हैं?
जवाब : यहाँ तो ट्रैफ़िक ही नहीं है तो रुल कहाँ से तोडें?

ताऊ. : अगले जन्म मे आप क्या बनना चाहेंगी?
जवाब : ताऊ की टीम मैम्बर ………फ़ुल टू मस्ती रामप्यारे और रामप्यारी के साथ

ताऊ : एक चुटकला सुनाइये.
जवाब : सबसे मुश्किल काम यही है

ताऊ : सवा छ: और पोने दस कितने होते हैं?
जवाब : बस सरदारों के बारह नहीं होते.:)

ताऊ : सास से आखिरी बार डांट कब खायी थी?
जवाब : साँस आये तो ना,  यहाँ तो साँस आती ही नहीं फिर भी ज़िन्दा हैं हम

ताऊ : कौन से कलर के सैंडल फ़ोकट मे भी नही पहनना चाहेंगी?
जवाब : जो रंग आज तक बना ही नहीं

ताऊ : लिपस्टिक का कौन सा कलर आपको आकर्षित करता है?
जवाब :  नेताओं के खून वाली या फिर काली जिसे देख हर किसी को लगे साक्षात् काली माई ही प्रगट हो गयी है बच के रहना कोई गलती से छेड़ न देना वर्ना अपने हश्र को खुद तैयार रहना

ताऊ : खुद आप की एक खराब आदत कौन सी है?
जवाब : अपनी बुराई आप कैसे करूँ ?

ताऊ : अपने मुंह मियामिठ्ठू बनिये
जवाब : हमसे अच्छा कौन है.:)

ताऊ : .ऐसा ब्लागर जिससे आपको जलन होती हो और क्यों?
जवाब : सबसे ही होती है सब आगे भाग रहे हैं और हम पीछे की तरफ़ दौड लगा रहे हैं.

ताऊ : ऐसा कोई गीत, जिसकी हीरोईन आप अपने आपको समझने लगती हों?
जवाब : आज तक जितने गीत बने या गाये गये हैं हर गीत की हिरोइन मैं ही तो हूँ.

ताऊ : ऐसा एक शब्द जिससे आपको  चिढ आ जाती हो ?
जवाब : चिढ

ताऊ : पसंदीदा फ़िल्म अभिनेता और अभिनेत्री?
जवाब : कोई नहीं

ताऊ : पसंदीदा ब्लागर?
जवाब : सिर्फ़ मैं अब अपने से ज्यादा पसंदीदा भी क्या कोई हो सकता है ताऊ ………? प्रश्न तो सोच कर करना चाहिये था ना.:)

ताऊ : फ़ेवरिट गायक ?
जवाब : जो या तो होठों पर मुस्कान ला दे या आँख में आँसू

ताऊ: पसंदीदा लेखक
जवाब : जिसके लेखन में खुद की तस्वीर देख लूँ बस वो ही

ताऊ : ब्लागर ताऊ की इमेज आपके दिमाग में क्या है?
जवाब : ब्लोगर ताऊ, लठैत ताऊ, सम्माननीय ताऊ, आग लगाऊ ताऊ , झगडा करवाउ ताऊ , निर्देशक बनता ताऊ , रौब गाँठता ताऊ , हंसमुख ताऊ , ताई से पिटता ताऊ , गधा सम्मेलन कराता ताऊ ………असल में तो आल इन वन ताऊ.:)

ताऊ - चलते चलते ब्लागर्स के लिये कोई मेसेज देना चाहेंगी?
जवाब : बिलकुल ताऊ मेसेज देना तो  बहुत जरूरी है। ब्लोगिंग करो , सब की ऐसी तैसी करो और जब अपना नंबर आये तो बुक्का फाड़ के रोने लगो......

ताऊ : इसके अलावा भी मेसेज में कुछ कहना चाहेंगी?
जवाब : अभी बात पूरी कहां हुई है ताऊ? अभी तो सुनते जाईये...हां तो मैं क्या कह रही थी?....

ताऊ : अब ये तो आप ही जानो....
जवाब : हां तो मैं ब्लागर्स को मेसेज दे रही थी....बुक्का फ़ाडकर रोने के बाद..... टंकी आरोहण करो और जब सब मनाने लगें.....  वाद विवाद इतना बढ़ जाए की दो गुट बन जाएँ तो दबे पाँव किनारा कर लो और कह दो मैंने तो ऐसा कुछ किया ही नहीं था और तब भी कोई न माने तो ताऊ और रामप्यारी को बुला लो.... सारा झूठ का सफ़ेद कर देंगे..... और जो ना माने तो ताऊ के डंडे को तेल पिलाकर तैयार रखो जब भी पड़ेगा बे आवाज़ ही पड़ेगा और दबा कर पड़ेगा। ……तो ब्लोगर हो जाओ तैयार ताऊ स्टाइल की ब्लोगिंग के लिए

ताऊ : तो धन्यवाद  वंदना जी ..अब फ़टाफ़ट राऊंड के लिये तैयार हो जाईये. रामप्यारी तैयार है अपने सवाल दागने के लिये..... ठीक है?

 अब रामप्यारी का फ़टाफ़ट राऊंड शुरु होता है. 


रामप्यारी : हां तो वंदना आंटी...आप तैयार हैं फ़टाफ़ट खेलने के लिये?
वंदना गुप्ता - अरे रामप्यारी एक मिनट...कितनी गर्मी हो रही है तुम्हारे स्टूडियो में? आज एसी नही चल रहा क्या?......जरा सांस तो लेने दे.......हां अब बोल...


रामप्यारी का फ़टाफ़ट वंदना गुप्ता  के साथ 

रामप्यारी : हां तो वंदना  आंटी...आप तैयार हैं फ़टाफ़ट खेलने के लिये? तो बताईये कि आपको क्या पसंद है? – क्लीन शेव्ड या मूंछ वाला?
जवाब : दोनो में से कोई नहीं रामप्यारी... नई जाति पैदा करो.

रामप्यारी - हिल स्टेशन या समुद्र तट?
जवाब : हिल स्टेशन चलो मेरे साथ दौड लगायेंगे दोनो

रामप्यारी - ट्रेन का सफ़र, बस का सफ़र या हवाईजहाज का?
जवाब : ट्रेन तक की ही औकात है अभी तो

रामप्यारी - पुस्तक पढना या फ़िल्म देखना?
जवाब : जो मज़ा पुस्तक में है वो फ़िल्म में कहाँ

रामप्यारी - सलमान खान या आमिर खान?
जवाब : आमिर

रामप्यारी - कैटरीना कैफ़ या करीना कपूर?
जवाब : करीना

रामप्यारी - कारों में हैचबैक या सेडोन?
जवाब : है ही नहीं कोई भी तो पता भी नहीं

रामप्यारी - साडी या जीन्स?
जवाब : भारतीय नारी की जो है पहचान उसे साडी कहते हैं मेरी जान.:)

रामप्यारी - मिरिंडा, पेप्सी या रूहफ़्जा?
जवाब : जो भी कोई प्यार से पिला दे फिर ज़हर दे या मिरिंडा , पेप्सी या रूह अफ़ज़ा

रामप्यारी - गांव या शहर?
जवाब : शहर

रामप्यारी - लैंड लाईन या मोबाईल
जवाब : जो भी वक्त पर साथ दे फिर लैंड हो या मोबाइल

रामप्यारी - स्प्लिट एसी या विंडो एसी
जवाब : स्प्लिट की तो बात ही और है शोर नहीं करता तभी तो जवाब दे रही हूँ रामप्यारी

रामप्यारी - लेप टोप या डेस्कटोप
जवाब : नया नौ दिन पुराना सौ दिन रामप्यारी,  तो डेस्कटाप से बेहतर क्या होगा?

रामप्यारी – ब्लेक एंड व्हाईट फ़ोटो या कलर फ़ोटो
जवाब : जिसमें मैं तुमसे ज्यादा सुन्दर लगूँ बस वो ही फ़ोटो

रामप्यारी - ज्वाईंट फ़मिली या न्युक्लियर फ़ेमेली?
जवाब : जो मुझे आराम से ब्लोगिंग , सर्फ़िंग करने दे

रामप्यारी - कांच की चूडियां या मेटल की?
जवाब : जिनके खनकने से पिया जी का दिल हिंडोले लेने लगे

रामप्यारी - शिफ़ोन की साडी या काटन की?
जवाब : जिसे पहन कर ऐश्वर्या सी लगने लगूँ.:)

रामप्यारी - चश्मा या कांटेक्ट लैंस?
जवाब : कांटेक्ट करने के लिये तो कांटेक्ट लैंस ही जरूरी हैं ना इतना भी नही समझती रामप्यारी ……हाँ नहीं तो ………आँखें चार चश्मे से कहाँ होती हैं?

रामप्यारी - नौकरी या हाऊस वाईफ़?
जवाब : कोई भी बस मेरी स्वतंत्रता मेरी ही रहे

रामप्यारी - प्यार शादी के पहले या बाद?
जवाब : अबे राम प्यारी.... प्यार भी कभी शादी के बाद होता है ………?  प्यार तो पहले होता है और जो शादी के बाद होता है वो समझौता

रामप्यारी - ताऊ की बकबक या रामप्यारी की चकचक?
जवाब : अरे छोडो रामप्यारी ये बताओ मेरी चकल्लस कैसी लगी?:)

रामप्यारी - वाह वंदना आंटी....आपने तो सच में ही बहुत ही चटपटे जवाब दिये.....मुझे तो बस मजा ही आ गया.....अब आपको स्पेशल राऊंड के लिये रामप्यारे के पास लिये चलती हूं....
वंदना गुप्ता : ओह...तो अभी रामप्यारे का स्पेशल राऊंड भी बाकी है? खैर चलो...उससे भी निपटते हैं.....

स्पेशल राऊंड विद रामप्यारे


रामप्यारे - नमस्कार वंदना जी...कैसी हैं आप?
वंदना गुप्ता - मैं अच्छी हूं रामप्यारे...पर आजकल तुम कैमरामैन के अलावा  इंटर्व्यू भी लेने लगे...क्या बात है डबल डबल काम?

रामप्यारे - क्या करूं वंदना जी...मुझे भी कैमरे के सामने आकर प्रसिद्ध होना है तो यह सब करना ही पडेगा...अब मैं आपसे कुछ सवाल करूंगा....आप चाहें तो मुझे रामप्यारे के बजाय प्यारे के नाम से भी पुकार सकती हैं....
वंदना गुप्ता -  प्यारे के नाम से और तुमको? अपने दांत देखे हैं कभी? चल सवाल पूछ फ़टाफ़ट...

सवाल -  सपने  में कभी कोई हीरो दिखा?
जवाब - पहले तो हीरो की परिभाषा बता रामप्यारे.... किसे कहते हैं हीरो तब ना बताऊँगी?

सवाल - कभी भूत से सामना हुआ?
जवाब - कभी क्या रामप्यारे.... मेरे यहाँ तो भूत रोज सलाम ठोंकने आते हैं, आते ही नमस्ते करते हैं फ़िर पूछते हैं  बताओ आज किसकी खाट खडी करनी है जो तुम्हें तंग करे उस  ब्लोगर का  बस एक बार नाम बता देना फिर हमारा काम ।


सवाल -  प्यार से पति को क्या कह कर बुलाती है ?
जवाब - ले रामप्यारे.... अब तू  घर में भी सेंध लगाने की सोचने लगा?  ये तो गलत बात है...अगला सवाल पूछ ।

सवाल - पति से सबसे अधिक झगडा कब हुआ  )
जवाब - झगडा करेगा तो निकाल के घर से बाहर  नहीं फ़ेंक दूँग़ी... और ताई की तरह लट्ठ भी भांजूँगी।

सवाल -  शीशे के सामने अपने से  क्या सवाल करती हैं?
जवाब - अरे रामप्यारे... शीशा तो खुद मुझे देख पानी भरने लगता है...उफ़्फ़  ब्रह्माँड सुन्दरी मेरे आगे... और यही सोचते सोचते  बेचारा बेहोश होकर गिर पडता है ।

सवाल - फ़िर तो आपका रोज का नुक्सान होता होगा?
जवाब - रामप्यारे...वो कौनसा मेरी जेब से जाता है...उसके लिये पतिदेव हैं ना....

सवाल - राह चलते कभी  किसी शोहदे ने बदतमीजी की?
जवाब - अरे रामप्यारे...तू वाकई निरा गधा ही लगता है मुझको....बेवकूफ़,  अगर शोहदे जुमले ना कसें तो मुझे  कैसे पता चलेगा कि  अभी तो मैं जवान हूँ :)।

सवाल - सपने में कभी भगवान दिखे?
जवाब - अरे रामप्यारे.... सपने में क्या वो तो रोज मेरे साथ चौपड खेलने आते हैं और तुम सपने की बात करते हो? थोडी देर रुको वो आते ही होंगे...

"म्याऊँ म्याऊँ बोले कौन" टीवी धारावाहिक में वंदना गुप्ता

सवाल - क्या किसी शोप ओपेरा (टीवी सीरियल) की नियमित दर्शक हैं? यदि हां तो क्या उससे प्रभावित होती हैं?
जवाब - रामप्यारे... लगता है अब बताना ही पडेगा कि  सोप ओपेरा की दर्शक क्या मैं तो खुद उसमें लीड रोल कर रही हूँ.

सवाल - वो कौनसा सीरियल है?
जवाब -  रामप्यारी प्रोडक्शन का "म्याऊँ म्याऊँ  बोले कौन"  में ।

सवाल -  कोई  ऐसी घटना जिसका आपको आज भी  दर्द हो?
जवाब - रामप्यारे..... दर्द की क्या मज़ाल जो यहाँ फ़टके भी,  उसे पता है लट्ठ लेकर पिल पडेगी उसी पर इसलिये दूर से ही राम राम करके निकल जाता है।

सवाल - घर में सुरक्षा के लिये बेलन को उपयोगी मानती हैं?
जवाब - घर में तो मेरी बोली ही काफ़ी है मुझे बेलन आदि की जरूरत नहीं पडती,  एक आँख दिखाकर ही सबको  भीगी बिल्ली बना देती हूँ।

सवाल - साक्षात भगवान आकर आपसे कोई एक वरदान मांगने को पूछें तो क्या मांगेगी?
जवाब - भगवान को कहूँगी तू मुझसे व्ररदान माँग आज तो,  पहले सब तुझसे माँगते रहते हैं और कोई तेरे को कुछ देता नहीँ तो आज जो चाहे माँग ले...

सवाल - ओह क्या क्या दे सकती हैं भगवान को वरदान में?
जवाब - रामप्यारी प्रोडक्शन में काम करती हूँ.... ताऊ समेत सबको मुहैया करवा दूँगी और भगवान के अकेलेपन को दूर करवा दूँगी.... जब रामप्यारी नाचेगी और रामप्यारे  वहां  झाडू लगायेगा।

सवाल - सबसे ज्यादा खुशी कब मिलती है?
जवाब - मैं तो हमेशा ही खुश रहती हूँ....हां ये अलग बात है कि   जब ताऊ की खिंचाई और पिटाई  ताई करती है ना..... तब जो खुशी मुझे मिलती है उसको शब्दों में बयान नही कर सकती...असली और सच्ची खुशी तभी मिलती है.

तो दोस्तों यह थी ताऊ, रामप्यारी और रामप्यारे  के साथ वंदना गुप्ता ’ की "दो और दो पांच"....अगली बार हम किसी और ब्लाग सेलेब्रीटी के साथ खेलेंगे दो और दो पांच....तब तक मस्त रहिये.

ताऊ और रामप्यारी की हरकीरत ’हीर’ से दो और दो पांच.....

रामप्यारी ने आजकल ताऊ टीवी का काम संभालना शुरू कर दिया है. उसी की पहल पर ब्लाग सेलेब्रीटीज से "दो और दो पांच" खेलने का यह प्रोग्राम शुरू किया गया है. दो और दो पांच में, ब्लॉग सेलिब्रिटी से निवेदन है कि वे सवाल के जवाब कुछ चटपटे रखें ताकि ब्लोगर साथियों का मनोरंजन भी हो , इस प्रोग्राम का मकसद  हंसना हंसाना सीखना है. इस मनोरंजक पोस्ट का अधिक अर्थ निकालने की कोशिश न करे यह काम रामप्यारे को ही करने दें.

ब्लाग सेलेब्रीटीज को रूबरू पकडना बहुत ही मुश्किल  है, नेट पर तो उनको जब चाहे तब पकड लिजीये.....पर रामप्यारी भी कोई कम नही है. एक दिन वो किसी ब्लाग सेलेब्रीटीज को पकडने के चक्कर में घूम ही रही थी कि चलते फ़िरते  सतीश सक्सेना उसके हत्थे चढ गये थे  और अबकि बार रामप्यारी के चक्कर में आ गई हरकीरत हीर, जिन्हें अपनी भोली सूरत से   बातों में फ़ंसाकर वो  "दो और दो पांच" खेलने के लिये ले आयी सीधे ताऊ टीवी के स्टुडियों में.....अब आप बिना ब्रेक देखिये अटपटे सवालों के चटपटे जवाब... सीधे...ताऊ और रामप्यारी की हरकीरत हीर  से दो और दो पांच.....


ताऊ और रामप्यारी के साथ "दो और दो पांच" करते हुये हरकीरत ’हीर’
(कैमरामैन : रामप्यारे)

ताऊ : आपसे सबसे ज्यादा दुखी कौन है?
हरकीरत ’हीर’ : पति

ताऊ. आपने आखिरी बार किसे रूलाया था?
हरकीरत ’हीर’ : मैं किसी को नहीं रुलाती अक्सर खुद रोती हूँ ….:))

ताऊ : दिन में आप कितनी बार हंस लेती हैं?
हरकीरत ’हीर’ : दर्द की कवयित्री भला कैसे हँस सकती है - कभी कभार

ताऊ : कल रात को आपने कौन सी सब्जी खायी थी?
हरकीरत ’हीर’ : कल … भिन्डी

ताऊ : आपकी किस आदत से आपके पति ज्यादा परेशान रहते है?
हरकीरत ’हीर’ : कवितायेँ लिखने से ….

ताऊ : कौन सा ट्रेफ़िक रुल आप सबसे ज्यादा तोडती हैं?
हरकीरत ’हीर’ : मैं कार नहीं चलाती

ताऊ. : अगले जन्म मे आप क्या बनना चाहेंगी?
हरकीरत ’हीर’ : हीर

ताऊ : एक चुटकला सुनाइये.
हरकीरत ’हीर’ : संता : डॉक्टर साहब, यह फूलों की माला किसलिए है?
डॉक्टर : यह मेरा पहला ऑपरेशन है, अगर कामयाब हुआ तो मेरे लिए वरना तुम्हारे लिए.

ताऊ : साढे अढाई और साढे एक कितने होते हैं?
हरकीरत ’हीर’ : गणित में सिफ़र हूँ ….

ताऊ : सासू मां से आखिरी बार डांट कब खायी थी?
हरकीरत ’हीर’ : जब तक वो ज़िंदा थीं रोज़ ही … अब वो इस दुनिया में नहीं हैं.

ताऊ : कौन से कलर के सैंडिल फ़ोकट मे भी नही पहनना चाहेंगी?
हरकीरत ’हीर’ : ऐसा तो नहीं …। सभी कलर पहन लूंगी

ताऊ : कौन सा परफ़्य़ुम आपको ज्यादा अच्छा लगता है?
हरकीरत ’हीर’ : निविया

ताऊ : खुद अपने आप की एक खराब आदत कौन सी है?
हरकीरत ’हीर’ : यही कि मैं हँसती कम हूँ

ताऊ : अपने मुंह मियामिठ्ठू बनिये
हरकीरत ’हीर’ : ऐसा मुझ में कुछ नहीं

ताऊ : .ऐसा ब्लागर जिससे आपको जलन होती हो और क्यों?
हरकीरत ’हीर’ : कोई नहीं …हाँ . अनुराग आर्य का लेखन बहुत प्रभावित करता रहा ….

ताऊ : ऐसा गाना, जिसकी हीरोईन आप अपने आपको समझने लगती हों?
हरकीरत ’हीर’ : आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे ज़ख़्मी जिगर देखेंगे तीरे नज़र देखेंगे ….

ताऊ : वे हसरतें जो अधूरी रह गयीं?
हरकीरत ’हीर’ – कोई राँझा न मिला

ताऊ : आपको एक दिन के लिये छोटी बच्ची बना दें तो क्या करना चाहेंगी?
हरकीरत ’हीर’-पेड़ों पर चढूँगी

ताऊ : सबसे बढ़िया बीता समय कौन सा था?
हरकीरत ’हीर’ –बचपन

ताऊ : सबसे घटिया समय?
हरकीरत ’हीर’ –समय कभी घटिया नहीं होता …. घटिया समय ही सबसे बड़ी चुनौती होता है

ताऊ : दुश्मन को कोई संदेश देना चाहेंगी?
हरकीरत ’हीर’ –औरत को कभी कमजोर न समझे

ताऊ – दोस्त के लिये कोई संदेश?
हरकीरत ’हीर’ –दोस्ती को अंत तक निभाने की कोशिश करे

ताऊ : अपने जीवन साथी से कुछ कहना चाहेंगी जो आप कभी रूबरू ना कह सकी हों?
हरकीरत ’हीर’ : पत्नी को पत्नी समझे दासी नहीं …

ताऊ : ऐसा एक शब्द जिससे आपको  चिढ आती हो?
हरकीरत ’हीर’ : प्रेम

ताऊ : पसंदीदा अभिनेत्री?
हरकीरत ’हीर’ : मीना कुमारी

ताऊ : पसंदीदा ब्लागर?
हरकीरत ’हीर’ : डॉ अनुराग आर्य , दानिश भारती , डॉ दराल , डॉ कौशलेन्द्र , राजेन्द्र स्वर्णकार, रश्मि प्रभा , ताऊ रामपुरिया.

ताऊ : फ़ेवरिट गायक
हरकीरत ’हीर’ : लता जी …

ताऊ: पसंदीदा लेखक
हरकीरत ’हीर’ : अमृता प्रीतम

ताऊ : ब्लागर ताऊ की इमेज आपके दिमाग में क्या है?
हरकीरत ’हीर’ : कमाल हैं बस , सबको हंसाने की कोशिश में जुटे अनोखे ब्लोगर

ताऊ : ब्लागर्स के लिये कोई मेसेज देना चाहेंगे?
हरकीरत ’हीर’ –जो लिखें दिल से लिखें

ताऊ : आपकी पसंद के 10 टाप ब्लाग्स बिना किसी वरीयता क्रम के?
हरकीरत ’हीर’ –पसंदीदा ब्लोगर लिख चुकी हूँ उन्ही के ब्लॉगस हैं

ताऊ : बच्चे परेशान करें तो उन्हें मारेंगी या समझायेंगी?
हरकीरत ’हीर’-जैसे हालात होंगें ….

ताऊ : तो धन्यवाद हीर जी ..अब फ़टाफ़ट राऊंड के लिये तैयार हो जाईये. रामप्यारी तैयार है अपने सवाल दागने के लिये..... ठीक है?

हरकीरत ’हीर’ : ओह...तो अब रामप्यारी  भी कान पकायेगी?  खैर....शुरू हो जा राम की प्यारी... रामप्यारी, आज तूने बहुत समय खोटी करवा दिया...... मैं तैयार हूं.....

अब रामप्यारी का फ़टाफ़ट राऊंड शुरु होता है

रामप्यारी : हां तो हीर  आंटी मैं आपके कान ज्यादा नही पकाऊंगी.... ...आप तैयार हैं फ़टाफ़ट खेलने के लिये? तो बताईये कि आपको क्या पसंद है? – मूंछ वाला या क्लीन शेव्ड?

हरकीरत ’हीर’ : क्लीन शेव्ड

रामप्यारी - हिल स्टेशन या समुद्र तट?
हरकीरत ’हीर’ :समुद्र तट

रामप्यारी - ट्रेन का सफ़र, बस का सफ़र या हवाईजहाज का?
हरकीरत ’हीर’ : ट्रेन का सफ़र

रामप्यारी - पुस्तक पढना या फ़िल्म देखना?
हरकीरत ’हीर’ :पुस्तक पढना

रामप्यारी - सलमान खान या आमिर खान?
हरकीरत ’हीर’ : सलमान खान

रामप्यारी - कैटरीना कैफ़ या करीना कपूर?
हरकीरत ’हीर’ : करीना कपूर

रामप्यारी - कारों में हैचबैक या सेडोन?
हरकीरत ’हीर’ : पता नहीं

रामप्यारी – साडी या आधुनिक लिबास?
हरकीरत ’हीर’ : सलवार सूट

रामप्यारी - मिरिंडा, पेप्सी या रूहफ़्जा?
हरकीरत ’हीर’ : रूहफ़्जा

रामप्यारी - गांव या शहर
हरकीरत ’हीर’ : गांव

रामप्यारी - लैंड लाईन या मोबाईल
हरकीरत ’हीर’ : मोबाईल

रामप्यारी - स्प्लिट एसी या विंडो एसी
हरकीरत ’हीर’ : स्प्लिट एसी

रामप्यारी - लेप टोप या डेस्कटोप
हरकीरत ’हीर’ : लेप टोप

रामप्यारी - ब्लेक व्हाईट फ़ोटो या कलर फ़ोटो
हरकीरत ’हीर’ : कलर फ़ोटो

रामप्यारी - ज्वाईंट फ़मिली या न्युक्लियर्फ़ेमिली?
हरकीरत ’हीर’ : न्युक्लियर्फ़ेमिली

रामप्यारी - कांच की चूडियां या मेटल की?
हरकीरत ’हीर’ : कोई भी नहीं

रामप्यारी - शिफ़ोन की साडी या काटन की?
हरकीरत ’हीर’ : कोई भी नहीं

रामप्यारी - चश्मा या कांटेक्ट लैंस?
हरकीरत ’हीर’ : चश्मा

रामप्यारी - नौकरी या बिजनैस?
हरकीरत ’हीर’ : बिजनैस

रामप्यारी - प्यार शादी के पहले या बाद?
हरकीरत ’हीर’ : बाद

रामप्यारी - ताऊ की बकबक या रामप्यारी की चकचक?
हरकीरत ’हीर’ : दोनों

तो दोस्तों यह थी ताऊ और रामप्यारी के साथ हरकीरत ’हीर’ की "दो और दो पांच"....अगली बार हम किसी और ब्लाग सेलेब्रीटी के साथ खेलेंगे दो और दो पांच....तब तक मस्त रहिये.


दो और दो पांच का खेल, ताऊ, रामप्यारी और सतीश सक्सेना के बीच

रामप्यारी ने आजकल ताऊ टीवी का काम संभालना शुरू कर दिया है. उसी की पहल पर ब्लाग सेलेब्रीटीज से "दो और दो पांच" खेलने का यह प्रोग्राम शुरू किया गया है. दो और दो पांच में, ब्लॉग सेलिब्रिटी से निवेदन है कि वे सवाल के जवाब कुछ चटपटे रखें ताकि ब्लोगर साथियों का मनोरंजन भी हो , इस प्रोग्राम का मकसद आपको हंसना सिखाना है. इस मनोरंजक पोस्ट का अधिक अर्थ निकालने की कोशिश न करे यह काम रामप्यारे को ही करने दें.

 ब्लाग सेलेब्रीटीज को रूबरू पकडना बहुत ही मुश्किल होता है, नेट पर तो जब चाहे तब पकड लिजीये.....पर रामप्यारी भी कोई कम नही है. एक दिन वो किसी ब्लाग सेलेब्रीटीज को पकडने के चक्कर में घूम ही रही थी कि सतीश सक्सेना उसके हत्थे चढ गये और उनको बातों में फ़ंसाकर वो "दो और दो पांच" खेलने के लिये ले आयी सीधे ताऊ टीवी के स्टुडियों में.....अब आप बिना ब्रेक देखिये अटपटे सवालों के चटपटे जवाब... सीधे...ताऊ और रामप्यारी की सतीश सक्सेना से दो और दो पांच.....

 ताऊ टीवी स्टूडियो में ताऊ व रामप्यारी के साथ दो और दो पांच खेलते सतीश सक्सेना, 
 (कैमरामैन - रामप्यारे) 

ताऊ : आपसे, सबसे ज्यादा दुखी कौन है?
सतीश सक्सेना - ताऊ...

 ताऊ : आप आखिरी बार कब रोये थे?
सतीश सक्सेना - कल टीवी पर बरसात का ब्यौरा देते हुए एक न्यूज़ रिपोर्टर को सुनकर...

ताऊ : कल रात को आपने कौन सी सब्जी खायी थी?
सतीश सक्सेना - याद रखने लायक, खाए हुए बरसो बीत गए ...., वैसे तुझे ताई ने कब यादगार सब्जी खिलाई थी ? 

ताऊ : आपकी किस आदत से आपकी पत्नि ज्यादा परेशान है?
सतीश सक्सेना - वह क्यों परेशान होगी ?

ताऊ : कौन सा ट्रेफ़िक रुल आप सबसे ज्यादा तोडते हैं?
सतीश सक्सेना - ओवर स्पीडिंग , ताऊ के खजाने के पीछे गाडी भागते हुए..

ताऊ : अगले जन्म मे आप क्या बनना चाहेंगे?
सतीश सक्सेना - अपने देश में डिक्टेटर ..

ताऊ : एक चुटकला सुनाइये...
सतीश सक्सेना - एक बार ताऊ के होठ जल गए।
ओ यार ये कैसे हुआ?
बीवी को रेलवे स्टेशन छोड़ने गया था।
तो?
ख़ुशी के मारे ट्रेन के इंजन को चूम लिया..लेजा यार !!

ताऊ : अढाई और पोने चार कितने होते हैं?
सतीश सक्सेना - 25 पव्वा

ताऊ : धर्मपत्नि से आखिरी बार डांट कब खायी थी ?
सतीश सक्सेना - धर्मपत्नी से आपका तात्पर्य ...?

ताऊ : कौन से कलर के जूते फ़ोकट मे भी नही पहनना चाहेंगे?
सतीश सक्सेना - तिरंगे...

ताऊ : लिपस्टिक का कौन सा कलर आपको आकर्षित करता है?
सतीश सक्सेना - लिपस्टिक हमें देखती ही नहीं फिर कलर कैसे बताएं

ताऊ : खुद अपने आप की एक खराब आदत कौन सी है?
सतीश सक्सेना - मुंहफट होना ..

ताऊ : अपने मुंह मियामिठ्ठू बनिये
सतीश सक्सेना - मंच पर आने से पहले,
चेहरे न खिल पायें तो !
जाने से पहले वहाँ ,
दो बार रुकना चाहिए !
आहटें पैरों की सुनकर,साज़ भी थम जाएँ जब,
खकर हमको वहां , कुछ ढोल बजने चाहिए !
हम जहाँ से गुजर जाएँ ,
महक जाएँ बस्तियां ,
हम जहां ठहरें ,
वहां आबाद होगीं वादियाँ
मेरे जगने पर सुनें, सब चहकना संसार का ,
और जाने पर मेरे,आंसू छलकने चाहिए !

ताऊ : .ऐसा ब्लागर जिससे आपको जलन होती हो और क्यों ?
सतीश सक्सेना - जलन किसी से नहीं हुई मगर जिनसे सीखने का दिल करे ऎसी ब्लोगर लेखिका प्रतिभा सक्सेना हैं , (शिप्रा की लहरें ) उनका शब्द सामर्थ्य बेहद प्रभावशाली एवं आपसे आदर लेने में समर्थ है !

ताऊ : ऐसा गाना, जिसका हीरो आप अपने आपको समझने लगते हों?
सतीश सक्सेना - ऐसा कुछ कर पायें यादों में बस जाएँ सदियों जहाँ में हो चर्चा हमारा ! दिल करदा ...

ताऊ : ऐसा एक शब्द जिससे आप चिढ जाओ?
सतीश सक्सेना - आशिकी

ताऊ : पसंदीदा अभिनेत्री?
सतीश सक्सेना - शायद हेमा मालिनी मगर उसने धर्मेन्द्र से शादी करली

ताऊ : पसंदीदा ब्लागर?
सतीश सक्सेना - अनुराग शर्मा उर्फ़ स्मार्ट इंडियन
ताऊ : फ़ेवरिट गायक
सतीश सक्सेना - मैं खुद , छुप के गाता हूँ कोई सुन न ले

ताऊ : पसंदीदा लेखक
सतीश सक्सेना - ब्लोगिंग में ही कई हैं, जिनके नाम लेना संभव नहीं , जिनसे मैं सीखता हूँ ..

ताऊ : ब्लागर ताऊ की इमेज आपके दिमाग में क्या है?
सतीश सक्सेना - ताऊ रामपुरिया, जिसने एक अद्वितीय प्रयोग, ब्लॉग जगत में किया है , खुद को बेईमान ताऊ के रूप में एक्सपोज़ करते हुए , जनता को सावधान रहते हुए एक गंभीर सन्देश दे पाना, आसान काम नहीं !

ताऊ : तो धन्यवाद सतीश जी ..अब फ़टाफ़ट राऊंड के लिये तैयार हो जाईये..... रामप्यारी तैयार है अपने दो और दो पांच राऊंड के सवाल दागने के लिये.......तब तक मैं हुक्का खींच के आता हूं अगले राऊंड के लिये..... ठीक है?

सतीश सक्सेना : ठीक है ताऊ . मैं तैयार हूं.

अब रामप्यारी का फ़टाफ़ट राऊंड शुरु होता है. 


रामप्यारी : हां तो सतीश अंकल...आप तैयार हैं फ़टाफ़ट खेलने के लिये?
तो बताईये कि आपको क्या पसंद है? - जीन्स वाली या साडी वाली ?
सतीश सक्सेना - अंकल से भी चटपटे जवाबों की उम्मीद है खैर ...मुझे दोनों पसंद हैं , पहले साडी बाद में जींस 

रामप्यारी - हिल स्टेशन या समुद्र तट?
सतीश सक्सेना - अगर साडी हो तो हिलस्टेशन और जींस हो तो समुद्र तट

रामप्यारी - ट्रेन का सफ़र, बस का सफ़र या हवाईजहाज का ?
सतीश सक्सेना - साडी के साथ ट्रेन और बस , जींस के साथ हवाई जहाज

रामप्यारी - पुस्तक पढना या फ़िल्म देखना?
सतीश सक्सेना - साडी साथ हो तो पुस्तकें पढना, जींस के साथ फिल्म देखना

रामप्यारी - सलमान खान या आमिर खान?
सतीश सक्सेना - इनमें से कोई नहीं , वैसे डॉ अरविन्द मिश्र

रामप्यारी - कैटरीना कैफ़ या करीना कपूर?
सतीश सक्सेना - इनमें से कोई नहीं, वैसे रामप्यारी

रामप्यारी - कारों में हैचबैक या सेडोन?
सतीश सक्सेना - सिडान अपने बस की ही नहीं ...

रामप्यारी - मेक अप वाली या बिना मेक अप वाली
सतीश सक्सेना - जींस मेकअप वाली, साडी बिना मेक अप वाली ..

रामप्यारी - मिरिंडा, पेप्सी या रूहफ़्जा?
सतीश सक्सेना - साडी में रूहअफज़ा , जींस में मिरिंडा

रामप्यारी - गांव या शहर
सतीश सक्सेना - गाँव में साडी, शहर में जींस...

रामप्यारी - लैंड लाईन या मोबाईल
सतीश सक्सेना - साडी पर लैंड लाइन, जींस पर मोबाइल

रामप्यारी - स्प्लिट एसी या विंडो एसी
सतीश सक्सेना - साडी के लिए स्प्लिट एसी और जींस के लिए विंडो ठीक है 

रामप्यारी - लेप टोप या डेस्कटोप 
सतीश सक्सेना - जींस के लिए लेपटोप और साडी के लिए डेस्कटॉप ठीक है

रामप्यारी - ब्लेक व्हाईट फ़ोटो या कलर फ़ोटो
सतीश सक्सेना - साडी के लिए ब्लैक व्हाईट और जींस के लिए कलर

रामप्यारी - ज्वाईंट फ़मिली या न्युक्लियर्फ़ेमिली?
सतीश सक्सेना - साडी के लिए जॉइंट फॅमिली एवं जींस के लिए न्यूक्लियर फैमिली

रामप्यारी - कांच की चूडियां या मेटल की?
सतीश सक्सेना - साडी कांच की चूड़ियों में और जींस के लिए मैटिल

रामप्यारी - शिफ़ोन की साडी या काटन की?
सतीश सक्सेना - शिफोन की साडी और जींस काटन की

रामप्यारी - चश्मा या कांटेक्ट लैंस?
सतीश सक्सेना - चश्मा साडी को , कांटेक्ट लैंस जींस को

रामप्यारी - नौकरी या बिजनैस?
सतीश सक्सेना - नौकरी साडी को, बिज़निस जींस को

रामप्यारी - प्यार शादी के पहले या बाद?
सतीश सक्सेना - शादी के बाद साडी से , शादी से पहले जींस से

रामप्यारी - ताऊ की बकबक या रामप्यारी की चकचक?
सतीश सक्सेना - दोनों के अपने अपने आनंद हैं

रामप्यारी - वाह....सतीश अंकल वाह.... आपने जवाब तो बडे मजेदार दिये पर लगता है आज का इंटर्व्यू आपके लिये मुश्किल खडी कर सकता है..... 

सतीश सक्सेना - क्यों...ऐसा मैने क्या कह दिया रामप्यारी?

रामप्यारी - अंकल अब ये तो घर जाकर ही पता चल पायेगा.:) खैर घर पहुंचकर फ़ोन जरूर करियेगा अब आपको शुभकामनाएं देते हुये "चलते चलते राऊंड" के लिये आपको ताऊ के हवाले कर रही हूं....मैं तब तक दूध पी कर लौटती हूं........

ताऊ : सतीश जी चलते चलते ब्लागर्स के लिये कोई मेसेज देना चाहेंगे?
सतीश सक्सेना - हास्य विधा पढ़ते समय गंभीरता त्याग कर पढ़ें , किसी के प्रति, पूर्वानुमान करके जल्द ताल न ठोंकें ! यह आपकी मूर्खता और विद्वता का परिचय दे देगा.

ताऊ : टिप्पणियों के बारे में क्या कहेंगे?
सतीश सक्सेना - अपने लेखों से और जमा की गयीं टिप्पणियों से अपना प्रभामंडल तैयार न कर लें तो खुद की कलम के प्रति अहसान होगा.

ताऊ : टिप्पणी और फ़ालोवर्स की संख्या के बारे में कुछ कहना चाहेंगे?
सतीश सक्सेना - टिप्पणियों और फालोवर की संख्या से गुणवत्ता का अनुमान लगाना महा बेवकूफी है ! अगर आप अच्छा लिखते हैं तो देर सवेर लोग उसका सम्मान अवश्य करेंगे !

ताऊ : जी धन्यवाद सतीश जी, आप हमारे स्टूडियो में आये और हमसे बेबाक दो और दो पांच का खेल खेला...., आपका आभार.

सतीश सक्सेना - ताऊ, आपका और रामप्यारी का भी आभार....जो मुझे घेर घार कर यहां ले ही आये.

तो दोस्तों यह थी ताऊ और रामप्यारी के साथ सतीश सक्सेना की दो और दो पांच....अगली बार हम किसी और ब्लाग सेलेब्रीटी के साथ खेलेंगे दो और दो पांच....तब तक मस्त रहिये.

रामप्यारी व ताई का आगमन तथा लठ्ठ हस्तांतरण

पिछले भागों में आपने पढा कि ताऊ का अवतरण कैसे हुआ? उसके बाद के भाग बाबाश्री ताऊ महाराज चरितावलि -2  में भगवान  श्रीराम का यह लोक छोडकर जाना,  श्रीकृष्णावतार व उनका मथुरा छोडकर रणछोड दास बनना,  और श्रीकृष्ण द्वारा भविष्य के अनुसार योजना बनाना.

अब आज के प्रवचन में बाबाश्री बता रहे हैं. उनके जीवन में रामप्यारी व ताई का आगमन, तथा ताई को  लठ्ठ  हस्तांतरण परम पुनीत पावन प्रसंग, जिसके श्रवण मनन से समस्त पाप ताप दूर होकर अनंत भौतिक सुखों की प्राप्ति बैठे बिठाये बिना मेहनत किये ही हो सकेगी.

दूध की बाल्टी लिये सतीश सक्सेना,  बाबाश्री ताऊ आश्रम की सीढियां चढते हुये  

बाबाश्री ने श्रीकृष्ण के साथ आये दल का यथोचित स्वागत सत्कार करते हुये उन लोगों को  माखन रोटी   खिलाई तत्पश्चात भगवान श्री कृष्ण और बाबाश्री ने भविष्य की योजनाओं पर गुप्त मंत्रणा की. मंत्रणा पश्चात बाबाश्री ने अपने आश्रम से नाथद्वारा तक श्रीकृष्ण के पहूंचने के लिये एक गुप्त मार्ग का निर्माण करवाया, जिसके द्वारा श्रीकृष्ण अपने दल सहित नाथद्वारा के लिये प्रस्थान कर गये.

समय बीतने के साथ साथ बाबाश्री के आश्रम में आस पास के गांवों से भक्त नित्य दर्शन के लिये आने लगे. भेंट स्वरूप  सब अपने साथ फ़ल मिठाईयां और तरह तरह के पकवान लाया करते थे. आश्रम में चहल पहल काफ़ी बढ गयी थी. पर रात को बाबाश्री अपने आश्रम में किसी को भी रुकने नही देते थे. सूर्य डूबने से पहले सभी को आश्रम छोडना पडता था.

इन्हीं भक्तों में से एक भक्त सतीश सक्सेना भी नित्य प्रति दर्शन हेतु आने लगे. अपनी निष्ठा और सत्यशील विचारों की वजह से उन्होंने बाबाश्री के दिल में एक विशेष स्थान बना लिया.   बाबाश्री अक्सर अपनी गुप्त बातें और भविष्य की योजनाएं भी उनसे डिस्कस  कर लेते थे.

एक दिन सुबह सबेरे ही सतीश सक्सेना आ पहुंचे और बाबाश्री ताऊ महाराज को चिंता मग्न देखकर पूछ बैठे - बाबाश्री आज आपके चेहरे पर मुझे चिंता की लकीरें दिखाई दे रही हैं? कुछ खास बात हुई है क्या? किसी ने गलत सलत टिप्पणी कर दी या कोई बेनामी आपके खिलाफ़ कोई पोस्ट लिख गया? आप आदेश करें...मैं सबकी ऐसी तैसी कर दूंगा......

बीच में टोकते हुये बाबाश्री ताऊ महाराज बोले - नही नही वत्स...जैसा तुम सोच रहे हो वैसी कोई बात नही है. असल समस्या यह है कि यहां आश्रम में अब भक्तों का खाना पीना होने लगा है जिसकी वजह से यहां चूहे हो गये हैं और हमारे पास एक दो लंगोटियां ही हैं जो चूहे कुतर गये हैं. हम इसी को लेकर चिंतित हैं.

सतीश सक्सेना बोले - बाबाश्री, आप इतने बडे ज्ञानी होकर इतनी छोटी सी बात से डर रहे हैं. मैं आपके लिये जाकी कम्पनी को आर्डर देकर दर्जनों लंगोटियां बनवा देता हूं..आप निश्चिंत रहिये. अगले ही दिन भक्त सतीश सक्सेना एक दर्जन लंगोटियां और साथ में एक बिल्ली भी ले आये.

बाबाश्री ने बिल्ली को देखकर पूछा - भक्त, ये बिल्ली क्यों लाये हो?

सतिश सक्सेना बोले - महाराज श्री, यह बिल्ली अब यहां रहेगी और चूहों का खात्मा कर देगी. अब आप चूहों की तरफ़ से निश्चिंत होकर हस्तिनापुर वाले प्लान के बारें सोचिये. यह छोटी मोटी बाते आप मुझ पर छोड दिजीये.

बाबाश्री ने खुश होकर भक्त को आशिर्वाद दिया. धीरे धीरे बिल्ली ने अपना काम करना शुरू कर दिया. बाबाश्री की लंगोटियां भी सुरक्षित रहने लगी. बाबाश्री को अब बिल्ली से स्नेह हो गया और वो प्यार से उसे रामप्यारी के नाम से बुलाने लगे.  भक्त गण भेंट स्वरूप रामप्यारी के लिये दूध भी अवश्य लाते थे. बाबाश्री के साथ ही आश्रम में रामप्यारी की भी पूजा होने लगी, वह भी एक अवतार समझी जाने लगी. आश्रम में सब काम व्यवस्थित चलने लगा.

वर्षा के दिनों में भक्त रास्ते में पडने वाले नदी नालों की वजह से पहाड पर स्थित बाबाश्री के आश्रम में नही  पहुंच पाते थे सो रामप्यारी के दूध की समस्या आने लगी. जितने भी चूहे थे उनको तो रामप्यारी ने पहले ही सफ़ाचट कर दिया था. एक समय लगातार दस दिन तक कोई भी भक्त दूध लेकर नही आया तो रामप्यारी के प्राणों पर बन आयी. बाबाश्री तो अवतारी पुरूष थे सो उन्हें कोई भूख प्यास नही लगती थी...पर रामप्यारी का क्या करें?......

किसी तरह रास्ते खुले तो तुरंत सतीश सक्सेना दूध की बाल्टी लिये हुये आ पहुंचे. अब रामप्यारी की जान में जान आयी. सतीश सक्सेना ने रामप्यारी की मरियल हालत और बाबाश्री की बेचैनी देखते हुये तुरंत एक मुर्रा भैंस लाकर आश्रम में बंधवा दी. अब क्या था...आश्रम में दूध का भी पक्का इंतजाम हो गया और फ़िर से अमन चैन बहाल हो गया.

अब बाबाश्री का सारा ध्यान रामप्यारी और भैंस का चारा पानी का इंतजाम करते हुये बीतने लगा. उधर बाबाश्री ने हस्तिनापुर में महाराज धृतराष्ट्र के रूप में भी जन्म ले रखा था सो इस भैंस की वजह से हस्तिनापुर के राजकाज में भी बाधा पडने लगी. बाबाश्री का सारा दिन भैंस के लिये चारा पानी जुटाने, गोबर साफ़ करने,  दूध निकालने, दूध को गर्म करके रामप्यारी को देने इत्यादि  में ही पूरा होने लगा.

इस समय तक सतीश सक्सेना बाबाश्री के परम खास भक्त बन चुके थे सो उन्होनें  बाबाश्री के सामने प्रस्ताव रखते हुये कहा कि -  बाबाश्री अब इस तरह तो काम नही चलेगा, आप यदि भैंस की सेवा में ही लगे रहे तो फ़िर आश्रम और हस्तिनापुर कौन संभालेगा? वैसे आपकी आज्ञा हो तो आश्रम के काम धंधे  तो मैं भी संभाल लूंगा पर भैंस के गोबर इत्यादि का काम मेरे वश का नही है.

बाबाश्री किसी भी कीमत पर आश्रम का प्रबंध किसी और को देने के पक्ष में नही थे सो उन्होंने कोई जवाब नही दिया. बाबाश्री ताऊ महाराज को मौन देखकर सतीश सक्सेना ने कहा - बाबाश्री मेरे दिमाग में एक लाजवाब आईडिया आया है. आप विवाह कर लिजीये. सारी समस्या हल हो जायेगी.

बाबश्री ताऊ महाराज ने भृकुटियां तानते हुये कहा - ये क्या कह रहे हो भक्त? जानते नही हो हम त्रेता से अब तक बाल ब्रह्मचारी हैं? और तुम हमारा ब्रह्मचर्य तुडवाने का कह रहे हो?

सतीश सक्सेना बोले - बाबाश्री, अब इसके अलावा कोई उपाय भी नही है. और विवाहित रहते हुये भी आप ब्रह्मचारी बने रह सकते हो. आप तो महान तपस्वी हैं और फ़िर कितने ही ऋषि मुनियों ने आश्रम व्यवस्था के नाम पर राजकन्याओं से विवाह रचाये थे यह क्यों भूल जाते हैं? आप तो आज्ञा दिजीये.

भक्त सतीश सक्सेना के तर्कों के सामने बाबाश्री ताऊ महाराज निरूत्तर हो गये और विवाह के लिये रजामंदी दे दी. भक्त सतीश सक्सेना ने ताऊ के समकक्ष ताई नाम की एक योग्य कन्या को ढूंढ निकाला. यही कन्या गांधार नरेश  की राजकुमारी गांधारी का दूसरा प्रतिरूप थी जिसने इसी लिये यह दूसरा रूप धारण किया था जिससे हस्तिनापुर व आश्रम में दोनों जगह साथ रह सके.

इस तरह बाबाश्री के साथ ताई का विवाह संपन्न  होगया और आश्रम में फ़िर चहल पहल हो गयी. अब ताई सारा दिन खेतों में काम करती और भैंस के चारे पानी व आश्रम का रख रखाव करती. बाबाश्री अब सारा दिन भजन सत्संग और भक्तों का कल्याण करने में बिताने लगे.

ताई जब खेतों में काम करती तो वहां उन्हें जंगली जानवरों का खतरा रहता था सो एक दिन यह समस्या बताकर ताई ने बाबाश्री ताऊ महाराज से अपनी रक्षार्थ वह प्रभु श्रीराम  प्रदत लठ्ठ मांग लिया.  समस्या को देखते हुये मजबूरी मे सकुचाते हुये यह लठ्ठ बाबाश्री ताऊ महाराज ने  ताई को हस्तांतरित कर दिया.

प्रभु श्रीराम ने जब यह लठ्ठ  ताऊ महाराज को दिया था  तब कहा था कि इसे हमेशा अपने साथ ही रखना यदि किसी दुसरे को यह लठ्ठ हस्तांतरित किया तो इसका उपयोग तुम्हारे खिलाफ़ ही होगा. और प्रभु श्रीराम के यह वचन सत्य सिद्ध हुये. वो जादुई लठ्ठ इस कलियुग के ब्लाग युग में भी ताई द्वारा बाबाश्री की पीठ पर बरसता ही रहता है.

(क्रमश:)  



जा रामप्यारी जल्दी जाकर इसका कैट-स्केन करवा !

एक ही जगह यानि रसोई घर में दूध और शक्कर  रहते थे. पर दोनों में वहा भी भेदभाव था. दूध अधिकतर समय ठंडे फ़्रीज में ही रहता था थोडी देर को बाहर आता, काम होते ही वापस फ़्रीज में...अपना लेखन कर्म करने लगता.   वहीं शक्कर बेचारी तपते रसोई घर में भी बाहर ही पडी पडी अपनी व्यंग रचनाएं लिखती  रहती.

दूध को अपनी इस स्थिति पर बेहद घमंड  था. वो जब भी थोडी देर के लिये फ़्रीज से बाहर निकलता उस समय अपने आसपास रखी चीजों को....देशी लेखकों को   उसी तरह हिकारत से देखता जैसे एक अंग्रेजी  लेखक हिंदी लेखकों को  देखता है...बिल्कुल स्तर हीन और देशी लोग..... उन पर  तरह तरह के कटाक्ष करता. पर कोई भी उसकी बात का जवाब नही देता था क्योंकि दूध का हमेशा ठंडक में रहना, बच्चों का जरूरी पेय, किसी भी मिठाई का महत्वपूर्ण अंग और वैद्य डाक्टरों द्वारा दूध के गाये गये महत्व और उसके आभिजात्य लेखन के कारण  सब उसकी इज्जत करते थे.

किसी भी चीज का हम अति गुण गान करें तो स्वाभाविक रूप से अभिमान हो ही जाता है. जैसे कि  विभिन्न  पुरस्कार प्राप्त लेखक, बिना पुरस्कार पाये लेखक को दीन हीन समझकर हेयता से देखते हैं. इसमे कोई बडी बात नही है. बस दूध महाराज की भी यही हालत थी

एक दिन  रामप्यारी ने आकर बताया कि ताऊ आज तो दूध भैया और शक्कर दीदी  में जम कर झगडा हो रहा है तुम भी चलकर देखो. अब ताऊ को झगडे की खबर लगे और फ़टे में पांव ना फ़ंसाये यह कैसे हो सकता है? ताऊ तुरंत उठकर झगडा स्थल पर हाजिर हो गया.

हुआ यूं था कि ताई बाहर गयी थी और  रामप्यारी को मौका हाथ लग गया था कि आज तो दूध की मलाई पर हाथ साफ़ कर ही ले.  आजकल रामप्यारी का वजन भी कुछ ज्यादा ही बढा हुआ है, फ़िर आगे जाकर कहीं उसके ब्याह शादी में दिक्कत ना आये इसलिये  ताई उसे मलाई हटाकर दूध देती थी और उससे डाईटिंग भी करवाती थी. और आप जानते ही हैं कि रामप्यारी को मलाई कितनी पसंद है.

रामप्यारी ने  ताई के पीछे से चोरी छिपे  दूध की मलाई पर हाथ साफ़ करने  के लिये दूध को फ़्रीज से  बाहर निकाला, वैसे ही  उससे वजन संभल नही पाया और दूध बेचारा औंधे मुंह गिर पडा. दूध बांयी  टांग के बल गिरा था सो उसकी बांयी  टांग भी टूट गई. इस वाकये से  वहां मौजूद बाकी सब चीजों की तो सांसे रूक गई  पर अनायास ही शक्कर  के मुंह से जोरदार हंसी निकल गई.

अब दूध को अपनी खीज मिटाने का इससे ज्यादा अच्छा बहाना क्या मिलता? सो वो जमकर शक्कर पर बरसने लगा - शक्कर...तू मुझे समझती क्या है? तेरी हिम्मत कैसे हुई...मुझ पर हंसने की? तू जानती है ना मैं कौन हूं? मेरे नाम से नीर क्षीर निर्णय होते हैं, मुझसे ज्यादा शुद्ध और पवित्र कोई नही है, इसीलिये मैं आलीशान स्थान फ़्रीज की ठंडक में  रहता हुआ गंभीर लेखन कर्म करता हूं ...तुम दो टके की शक्कर जैसे देशी और अनकल्चर्ड लेखकों  जैसा    बाहर 48 डिग्री में  बैठकर नही लिखता हूं.... तुम लिखती भी हो तो क्या...सिर्फ़ हा.. हा.. ही..ही.. ठी... ठी...और वो भी दूसरों पर कडवे कसैले व्यंग......सिर्फ़ लोगों की खिल्ली उडाना.... कभी गंभीर लेखन करो तो तुम्हारे समझ आये कि गंभीर लेखन क्या होता है?   मैं गंभीर हूं, कोमल हूं, बच्चे बूढे सबके काम आता हूं......हंस के जैसा सफ़ेद हूं....सब मेरी उपमाएं देते हैं.  समाज में मेरी इज्जत है. कई जगहों पर समारोहों कि अध्यक्षता के लिये बुलाया जाता हूं...लोग मेरा सम्मान करते हैं.

उसकी बात सुनकर शक्कर और जोर से हंसने लगी. अब तो दूध बिल्कुल उफ़न पडा और हिंदी से अंग्रेजी पर आ गया.... बोला - यू ब्लडी किरकिरी....अनसिवीलाईज्ड...विदाऊट एनी यूनीफ़ार्म शेप गर्ल...तुम लोगों को शूगर रोग का मरीज बनाने वाली....बच्चों के दांतो को कीडा लगाने वाली जाहिल....लेखकों में दूसरों पर कटाक्ष करने वाली व्यंगिणी...... इसी तरह दूध आंय बांय बकने लगा....और शक्कर को मारने के लिये उठने लगा कि टूटी टांग के दर्द ने हिलने नही दिया और  दर्द के मारे कराहने लगा.

अब शक्कर अपनी मिठास भरी वाणी में बोली - अरे दूध भैया माना कि तुम अंगरेजी के लेखकों और हिंदी के पुरस्कार प्राप्त लेखकों जैसे हो पर तुम्हारा दंभ बिल्कुल गलत है.  तुम फ़्रीज की ठंडक  में बैठकर गम्भीर लेखन  करते हो...तुम्हारा आदर सत्कार सब करते हैं. पर देखो...तुम को जरा सा ज्यादा गर्म करते ही तुम उफ़न पडते हो...सीधे भगौने से बाहर...किसी काम के नही. ठीक है हम कडवे कसैले  व्यंग लिखते हैं... पर उनमें तुम्हारी तरह दंभ नही होता...जरा मेरे कडवे कसैले व्यंग मुंह में डालकर तो देखो...कठोर और खुरदरे होने के बावजूद तुम्हारे  मूंह में मिठास और हंसी ना आ जाये तो मुझसे कहना.

शक्कर की यह बात सुनते ही ताऊ बोला - वाह शक्कर वाह, क्या बात कही है तुमने? सच में तुम्हारे व्यंग यदि समझ लिये जायें तो जबान पर मिठास और हंसी ही आयेगी. और ये दूध जबरन अभिमान करता है. जरा सा ज्यादा गर्म करते ही यानि गंभीरता को चुनौती मिलते ही उबाल खा कर बाहर आ जाता है. किस काम की इसकी गंभीरता? एक तरफ़ तुमको (व्यंग और हास्य) जितना ही ज्यादा उबालों तुम और ज्यादा चाशनी सी मीठी हो जाती हो और  गुलाब जामुन, जलेबी और इमरती जैसी मिठाईयां में जान डाल देती हो.

इतना कहकर ताऊ चुप हुआ ही था कि रामप्यारी बोल पडी - अरे दूध भैया, चलो अब तुम्हें ताऊ हास्पीटल में ले जाकर तुम्हारा कैट-स्केन करवा देती हूं फ़िर प्लास्टर भी चढवाना पडेगा.

इस पर ताऊ बोला - हां हां रामप्यारी, अब तो तु भी समझदार हो गई है...बिना कहे ही इसका कैट-स्केन करवाने ले जा रही है. और हां सुन,  इस दूध को जब दूध पिलाना हो,   तब उस दूध में दो चम्मच शक्कर (व्यंग) मिला देना वर्ना ये गंभीर महाराज दूसरों को भले ही दूध (गंभीरता) पिलाते हों पर खुद बिना शक्कर नही पी पायेंगे.

रामप्यारी ने पूछा - ताऊ इस दूध को शक्कर मिला कर दूध पिलाना है? ये तो शक्कर दीदी से झगडता रहता है ये कैसे  पीयेगा शक्कर (व्यंग) वाला दूध.

ताऊ बोला - रामप्यारी अब मेरी जबान मत खुलवा ...मैने कई बार देखा है ये गंभीर लेखन वाले दूध महाराज जब भी दूध पीते है तब चोरी छिपे उसमे शक्कर (व्यंग) मिलाकर ही पीते है....सिर्फ़ दूसरों को गंभीरता का पाठ पढाते  हैं....जा जल्दी जाकर इसका कैट-स्केन करवा कर इसकी मरहम पट्टी करवा.  

ताऊ के सैम को टिकट मिला.

सैम बहादुर और बीनू फ़िरंगी दोनो बैठे हैं. बीनू फ़िरंगी कुछ नोट्स बना रहा है और सैम किसी विचार मे खोया अखबार देख रहा है. ्सैम अचानक बोल पडता है - ओये फ़िरंगी..देख बे..देख अपने ताऊ ने जो कहा था वो ही हो गया.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई मुझे कल की चुनाव सभा मे आपके लिये भाषण लिखना है. आप मुझे लिखने दो. फ़िर आपको प्रेक्टिस भी करवानी है. पर बोलो अब क्या कह रहे हो?

 

सैम - अरे देख यार. ताऊ कितने दिन पहले से कह रहा था कि ये क्रेडिट कार्डस का भांडा भी फ़ुटेगा एक दिन. देख यहां क्या लिखा है? इसी साल मे क्रेडिट कार्ड्स का रिपेमेंट करने वाले डिफ़ाल्टर दुगुने हुये. और देशी विदेशी तमाम बैंक खुलासे को तैयार नही.

 

बीनू फ़िरंगी - हां यार ताऊ ने कही तो थी. पर ताऊ तो कहता है कि वो बिना दिमाग के काम करता है? तो बिना दिमाग ये कैसे समझ लिया था इतने दिन पहले?

 

सैम - अरे यार तू और मैं ताऊ को क्या समझेंगे? ताऊ जितना बाहर दिखता है उससे डबळ अंदर है. अब तुझे क्या क्या बताऊं?

 

बीनू फ़िरंगी - यार सैम भाई आपकी ये ही आदत तो हमको ठीक नही लगती. आपके साथ हमने आज तक कोई गद्दारी करी क्या? जो आप ऐसी बातें करते हैं? हमें भी बताओ ना. अच्छा चलो आपकी टिकट वाली बात ही बता दो.

 

सैम - अबे कौन सी टिकट वाली?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई  ज्यादा मत बनो. हमको मालूम है कि आपका टिकट तो हाईकमान वाले किद्या कुक्ला जी ने काट दिया था और तुम्हारी जगह कुजागर सिंह जी को टिकट दे दिया गया था. फ़िर अचानक ऐसा क्या हुआ कि तुमको टिकट दे दिया गया?

 

सैम - अरे यार ये सब ताऊ के दिमाग का कमाल है. अगर ताऊ दिमाग नही लगाता तो मुझे इस चुनाव मे टीकट मिलना बडा मुश्किल था. वाकई ताऊ का दिमाग लाख टके का है.

 

बीनू फ़िरंगी - पर यार ताऊ के दिमाग की कीमत अभी पिछले सप्ताह ही १५ लाख बताई थी और अब तू एक लाख बता रहा है?  क्या ताऊ के दिमाग की कीमत मे भी मंदी  आगई क्या?

 

सैम - अबे ओ फ़िरंगी के बच्चे. जबान संभालकर बात करियो, ताऊ के खिलाफ़ मैं कुछ नही सुन सकता. समझ गया ना?

 

अब बीनू फ़िरंगी समझ गया कि ये सैम चाहे जब तो ताऊ की बुराई करता है. चाहे जब छोडकर जाने की बात करता है और आज इतना स्वामीभक्त बना हुआ है?

 

बात क्या है आखिर? कोई राज जरुर है इस स्वामीभक्ति के पीछे. वर्ना सैम इतना सीधा नही है.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई नाराज मत हो यार. ताऊ की मैं तो तेरे से भी घणी ज्यादा इज्जत करता हूं. पर यार तेरी वो टिकट वाली बात अधूरी रह गई कि ताऊ ने तेरी टिकट का जोगाड कैसे करवाया?

 

सैम - अरे यार क्या बताऊं? किद्या भैया ने तो मेरा पता साफ़ करके टिकट कुजागर सिंह जी को दे दिया.

 

मैं गया रोता रोता ताऊ के पास. और ताऊ की चापलूसी करते हुये मैने कहा कि ताऊ अगर मुझे टिकट नही मिला तो मैं तुम्हारे दरवाजे पर ही आत्महत्या कर लूंगा.

 

बीनू फ़िरंगी - फ़िर क्या हुआ?

 

सैम - हुआ क्या? मैने ताऊ से कहा कि कुछ खोकों का इन्तजाम कर देता हू, आप जाओ और किसी भी तरह  मेरी टिकट पक्की होनी चाहिये.

 

इस पर ताऊ कहने लगे कि सैम तू भी साले उल्लू का पठ्ठा है. साले जानवर का जानवर ही रहेगा. इतने दिन से मेरे साथ रह कर भी कुछ नही सीखा? मेरा नाम डुबोयेगा तू.

 

बीनू फ़िरंगी - फ़िर क्या हुआ यार सैम?

 

सैम - अबे होना क्या था? मुझे तो ऐसा गुस्सा चढा कि इस ताऊ को यहीं पर काट खाऊं. जब चौदह इंजेक्शन लगेंगे तब मालूम पडेगा कि सैम को गालियां देने का क्या हश्र होता है?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे नही यार सैम भाई ! फ़िर क्या तूने ताऊ को काट खाया?

 

सैम - अबे काटने की बात करता है? ताऊ ने जो कमाल दिखाया, उसके बाद तो मैने ताऊ के चरण पकड लिये और आजीवन गुलाम हो गया.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार वो कैसे?

 

सैम - अरे यार बस पूछ मत. ताऊ ने कुजागर सिंह का टिकट कटवा कर मुझे  टिकट भी दिलवा दिया और मेरे चार खोके जो चंदे मे देने थे वो भी बचा दिये.

 

बडे आश्चर्य से बीनू फ़िरंगी ने पूछा  -  यार झूंठ मत बोल. बिना चंदे के टिकट? मुश्किल काम है. यार तू मुझे बता सही बात क्या है.

 

सैम - जरुर बताऊंगा. पर तू विद्या माता की कसम खा कि किसी को नही बतायेगा?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार, चल विद्यामाता की कसम खाई. अब बता.

 

इतनी देर मे ही पार्टी के कुछ कार्यकर्ता आ गये और ये राज की बात कल बताने का कह कर सैम कार्यकर्ताओं से चुनाव की अगली रणनिती पर विचार विमर्श करने लगा.

 

(अगली पोस्ट मे सैम  वाकई धमाके दार खुलासा करेगा कि कैसे ताऊ ने कुजागर सिंह की टिकट कटवाई और सैम को दिलवाई. पढना मत भुलियेगा)

 

 

 

 

इब खूंटे पै पढो :-
 




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ताऊ काम धंधे से घणा परेशान तो था ही. अब किसी ने सलाह दे दी की आज कल डाक्टरी म्ह घणी कमाई सै. सिर्फ़ नब्ज पकडण की फ़ीस ५०० रपये. और जांच वगैरह की भी तगडी कमाई.

सो ताऊ ने तय कर लिया कि अब वो डाक्टरी की दुकान खोलेगा. सब तैयारी कर ली,
और डाक्टर बन गया. बाहर बोर्ड टंगवा दिया - डा. ताऊ अस्पताल.

उदघाटन म्ह भाटिया जी भी आये. और उन्होने पूछा कि ताऊ तू कब से डाक्टर बन गया. यार तू तो मेरी साथ का पांचवीं फ़ेल सै? फ़िर यो डाक्टर किस तरियां?

ताऊ बोला - अरे भाटिया जी, डाक्टर बनने में कौन सा ज्यादा खर्चा है? बस एक ये सफ़ेद कोट सिलवा लिया. ये एक स्टेथेस्कोप मेरे दोस्त डा. शुक्ला से मांग लाया, दुकान अपने पास थी ही. और ये चमचमाता नियोन साइन बोर्ड बन गया ५ हजार मे.

मेरी मानो तो थम भी कहां जर्मनी वापस जाओगे? आपको भी एक अस्पताल खुलवा देता हूं, दोनो भाई यहीं पर मजे करेंगे.

भाटिया जी- अरे मेरे ताऊ, तू जरुर अंदर जायेगा. अरे ये कानुनन जुर्म है. और तू कोई भी काम सीधा क्यों नहीं करता?

ताऊ - तो इब के करूं? मेरा तो घणा खर्चा होगया.

भाटिया जी - अरे ताऊ एक काम कर. तू आदमियों का इलाज करने के बजाये ढोर डाक्टर बण जा. यानि पशुओं का इलाज किया कर. उसमे रिस्क भी कम है.

सो ताऊ ने अब भाटीया जी की बात मान कर बोर्ड पर  लिखवा लिया "डा. ताऊ पशु चिकित्सालय"

इब एक दिन एक सुथरी सी बीरबानी अपने कुत्ते को गोद मे ऊठाकर लाई और बोली - डाक्टर ताऊ, जरा मेरे कुत्ते को देखिये, ये कुछ बोल नही रहा है.

ताऊ ने उसकि जांच करके बताया कि ये बोलेगा कैसे? ये तो मर चुका है.

वो बीरबानी बोली - नही डाक्टर. अगर ये मर गया तो मैं भी नही बचूंगी.
आप इसकी अच्छी तरह से पूरी जांच किजिये. मुझे ये दुनियां मे सबसे ज्यादा
प्यारा है.

ताऊ   ने भांप लिया कि आसामी मालदार है. सो ताऊ बोला - जी मैडम जी आप जरा शांति से बैठिये, मैं जो भी बेहतर बन पडेगा वो करता हूं.

अब ताऊ अंदर गया और अपनी पालतू बिल्ली रामप्यारी को लेकर आगया. वहां आकर उसने अपनी बिल्ली (रामप्यारी) को छोड दिया.   

रामप्यारी उछल कर टेबल पर चढ गई और कुत्ते को चारों तरफ़ से सूंघ कर
देखा और वापस नीचे कूद कर दुसरे कमरे मे भाग गई.

अब डाक्टर बना ताऊ बोला - देखिये मैडम जी अब पक्का है कि आपका
कुता मर चुका है.

अब उस बीरबानी ने भी मान लिया की उसका कुता मर चुका है और
उसने ताऊ से पूछा कि आपकी फ़ीस कितनी हुई?

ताऊ बोला - जी मैडम जी, सिर्फ़ ७५०० रुपये.

अब उस मैडम को थोडा झटका लगा और उसने कहा कि साढे सात हजार
रुपये किस बात के? आखिर आपने ऐसा किया ही क्या है?

ताऊ बोला - जी मैडम जी. इसमे मेरी फ़ीस के सिर्फ़ पांच सौ रुपये हैं बाकी सात हजार तो कैट- स्केन के हैं.