आज का दिन बाबरी मस्जिद काण्ड के नाम से याद किया जाता है ! पर मै उससे भी कई साल पहले ६ दिसम्बर १९** को हुए एक काण्ड को राजी या बिना राजी याद भी करता हूँ और मनाता भी हूँ ! आज के दिन मेरे लिए ताई नाम का काण्ड पैदा हुवा था ! सही में कुछ दिन इतिहास में दर्ज होने के लिए ही याद किए जाते हैं ! जन्म दिन की बधाई तो देनी ही पड़ती है ! अब देनी क्या पड़ती है ? रात को जैसे ही १२ बजे यानी ६ दिसम्बर की तारीख शुरू हुई , लट्ठ के डर के मारे मैंने दे दी ! मुझे और कुछ याद रहे ना रहे ! भले किसी को उधार दिए रुपये भूल में पड़ जाए ! पर आज का दिन नही भूल सकता ! ये है लट्ठ का कमाल !
उपरी मन से खुश होने का नाटक करते हुए मैंने बधाई दे दी पर अन्दर मेरे मन में क्या है , ये मैं ही जानता हूँ ! ईश्वर ने कितने साल पहले ही मेरे लिए ये काण्ड पैदा कर दिया था ! फ़िर से बधाई ताई ! माहोल की वजह से अन्टशन्टात्मक लिखने का मन नही कर रहा है वरना आज का दिन इस तरह के लेखन के लिए बड़ा प्रेरणादायक है ! जीवन के हर क्षेत्र में पिछले ३६ साल से ये दिन बड़ी प्रेरणा देता रहा है ! क्योंकि ताई मेरे साथ तो इतने सालो से ही है ! उससे पहले ससुर जी की आफत थी ! जो उन्होंने मेरे गले डाल दी थी !
इब रामराम !