आज सुबह सूबह ही कहीं से एक मेल मिला जन्म दिन मुबारक हो. और इस मेल का वापसी उत्तर देने का कष्ट नही करें. बताईये अब हम भेजने वाले का आभार भी व्यक्त नही कर सकते? खैर साहब …क्या करें? उनकी मर्जी. वैसे भी आजकल जन्मदिन आप नही भी याद रखो तो बैंक और बीमे वाले एस.एम.एस. करके याद दिलवा देते हैं और बचे खुचे माल के स्टोर वाले कि भाई साहब आजाओ.
वैसे आज हमारे सारे परिवार के लोग इकठ्ठे हैं इस दिन को मनाने के लिये. क्योंकि आज छुट्टी है सो चम्पाकली भी सीधे चांद से आगई है, अनारकली बालीउड से लौट आई है. बीनू फ़िरंगी और सैम तो यहां हैं ही. रामप्यारी भी यहीं है. रामदयाल और उसकी चम्पा गधेडी भी आ चुके हैं. संतू गधे को भी हम कुंये से निकलवा लाये हैं.
हमारी प्यारी रामप्यारी ने हमसे कहा कि ताऊ इस मौके पर दो शब्द कहिये सो कह रहे हैं. वैसे हमारी इच्छा तो फ़ुरसतिया जी स्टाईल मे बीसेक हजार शब्द कहने की थी. पर क्या करें? आज कल के बच्चें हैं सो उन्होने दो शब्द बोलने का कहा तो ज्यादा से ज्यादा दौ सौ बोल लेंगे.
सबसे पहले तो हम कबीर साहब का ये दोहा अपने आप को ही सुना रहे हैं.
“कबिरा हम पैदा हुये जग हंसे हम रोये
ऐसी करणी कर चलो हम हंसे जग रोये”
वैसे आजकल बडा मुश्किल है भाई किसी को कुछ कहना. हम ठहरे देहाती आदमी. अब हम किसी किताब के दो पन्ने पढ कर उस पर बुद्धिजिवी के जैसा तो कमेंट नही ना कर सकते. और इतने बुद्धिजीवी भी नही हैं कि किसी उपन्यास के पन्ने बांचकर काफ़ी और सिगरेट फ़ूकंते नजर आयें.
भाई अपना तो फ़िर से आदर्श कबीर साहब ही हैं.
“कबिरा खडा बाजार मे लिये लुकाठी हाथ
जो घर फ़ूंके आपना चले हमारे साथ”
अब हमारे साथ कौन अपना घर जलवायेगा? ईश्वर ताऊ का घर छोडकर सबका सलामत रखे. एक और साल पूरा हुआ. ब्लाग जगत मे आने के पहले लगने लगा था कि जगत से मोह माया कम होने लगी है पर अब मुझे लगने लगा है कि ये आभाशी जगत भी मुझे मोह ग्रस्त करने लगा है. शायद आत्म मंथन की आवश्यकता है.
आदर्णीय देवियों और सज्जनों, ताऊ के भाइयो, बहणों, भतीजियों और भतीजो आप सबको बीनू फ़िरंगी का सादर प्रणाम. ताऊ पहेली राऊंड –२ के प्रथम अंक का रिजल्ट घोषित करते हुये मुझे अपार हर्ष हो रहा है. और मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि मुझे ये मौका मिला.
मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि मैं बिना किसी बेईमानी और बदमाशी के इमानदारी पुर्वक रिजल्ट घोषित करुंगा. और आशा है आप मेरे द्वारा तैयार रिजल्ट से संतुष्ट होंगे.
तो आईये अब चलते हैं रिजल्ट की तरफ़ :- हमारी इस पहेली का सही जवाब है “मदन महल फ़ोर्ट” विजेता इस प्रकार रहे.
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Madan Mahal Fort, Jabalpur, .. madhya pradesh
घणी बधाई प्रथम स्थान के लिये. सर्वाधिक अंक प्रात किये १०१. तालियां..... तालियां..... तालियां..... जोरदार
अब श्री शुभम आर्य को अगली बार जीतते ही हेट्रिक के साथ कुल पांच बार के विजेता बनने का सुनहरा मौका है. विशेष बधाई…..
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| २. वरुण जायसवाल said... Madan Mahal Fort, in Jabalpur, madhya pradesh अंक १०० |
| ३.
Madan Mahal Fort, Jabalpur, Madhya Pradesh अंक ९९ |
४. PN Subramanian said... अरे भैय्या हम तो फंस जायेंगे. मदन महल, जबलपुर है. इसके बारे में बहुत ज्यादा तो मालुम नहीं है. यह ११०० ईसवी का है. किसने बनाया यह भी नहीं मालुम. मदन शाह (सिंह भी कहीं कहीं कहा गया है) जो रानी दुर्गावती का बेटा था, यहाँ आराम फरमाता था. यहाँ से दूर दूर तक नज़र राखी जा सकती है. अंक ९८
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| ५. Madan Mahal Fort Sitting pretty on top of a rocky hill, this 900 year old fort dominates the landscape. A view of the low-lying areas from the fort is scintillating and makes it worth your visit. The most characteristic feature of the Madan Mahal Fort is the simplicity of the fort itself. The fort was built by the Gond king Madan Shah in the year 1116 and since then it has become a landmark for Jabalpur City. अंक ९७ |
६.
मदन महल, जबलपुर अंक ९६ |
| ७. Rani Durgawati Fort, Madan Mahal, Jabalpur
अंक ९५ |
| ८. यह चित्र रानी दुर्गावती फ़ोर्ट, मदनमहल, जबलपुर का है. इसे गोंड शासक मदन शाह ने सन १११६ ई० में बनवाया था. अब रामप्यारी का जवाब. अरे नहीं! अलग टिप्पणी कर रहा हूं. अंक ९४ |
| ९. दिगम्बर नासवा said... ताऊ राम राम
अंक ९३ |
| १०.
ताऊ, पहले भी शक था मगर गांधी जी के FDC की वजह से तय नहीं कर पा रहा था. अब चित्र बदला है तो पक्का हो गया की यह जबलपुर का मदन महल है जिसे रानी दुर्गावती के पुत्र दसवें गोंड राजा मदन सिंह का आवास माना जाता है
अंक ९२ |
| ११.
ये तो उडनतश्तरी के जबलपुर का मदनमहल का किला है्
अंक ९१ |
१२. आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...
Taau.. ye to Jabalpur ka Madan Mahal hai.. अंक ९० |
१३. दिलीप कवठेकर said... अरे, चित्र को क्लोज़ अप में देखा तो पहाडी के महल में उडन तश्तरी के समीर जी खिडकी पर बैठे दिख गये!!
अंक ८९ |
| १४. ANSWER :-
अंक ८८ |
१५. प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said... Madan Mahal Fort. Jabalpur अंक ८७ |
| १६. रानी दुर्गावती फोर्ट, मदन महल, जबलपुर अंक ८६ |
| १७.
ताऊ मेने तो लगे यह तेरा ही घर है, जब राजस्थान मै भयंकर बाढ आई थी, तो तुमने झट से मध्य प्रदेश मै मदन लाल से एक ऊंचे पहाड पर अपना झोपडा बना लिय था, फ़िर गोटू सुनार को चुना लगाया, सेठ को लुटा, भाटिया को चुना लगाया, ओर पता नही किस किस को चुना लगाया, ओर फ़िर झटपट इस बडे से पत्थर पर मदन महल बना लिया, अब बिजली का बिल तो देना ही नही, क्यो कि उडे तो चारो ओर से हवा आती है, ओर जब लाईट चाहिये तो टले ते कुंडी मार लो तारो मे, वेसे अपना जबाब तो सही नही हो सकता , क्योकि यह तो नकल मारी है, पाप से बचने के लिये पहले ही बता दे.
अंक ८५ |
| १८. ताऊ ये जबलपुर से पहला ही रेल्वे स्टेशन है जिसका नाम मदन महल है. वहीं स्टेशन से ये किला दिखता है.
अंक ८४ |
| १९. ये जब्लपुर का दुर्गावती फ़ोर्ट है मदन महल मे. अंक ८३ |
| २०.
इतने लोगो ने बताया नही भी होता तो भी मै ईमानदारी से बिना नकल के बता देता देता ये मदन महल है,जबलपुर का।अब तक़दीर ही खराब है जो आज देर से ईधर आया,वर्ना कई-कई बार झांको तो भी जवाब का पता नही रहता।आज थोड़ा देर क्या हूई सब के सब पेल दिये हैं।देखना ताऊजी ईमानदारी का खयाल रखना।
अंक ८२ |
| २१. ताऊ जी, पहले अपनी पहेली का जवाब सुन लो.
अंक ८१ |
| २२. HUm to train me the varna apna shahar na pahchante aisa kaise ho sakta hai..hume grace di jaye...madan mahal ka kila, jabalpur answer ke liye.
अंक ८०
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| इसके अलावा श्री अरविंद मिश्रा, श्री सुशील कुमार जी छोंक्कर, सु. रंजना [रंजू भाटिया] सु. कविता वाचक्नवी, श्री महामंत्री तस्लीम, श्री नीरज गोस्वामी, श्री भैरव, सु. इन्द्राणी , श्री संजय बैंगाणी, श्री शाश्त्री, श्री योगिंद्र मौदगिल, श्री विनय, श्री पी.डी., डा. रुपचन्द्र शाश्त्री मयंक, सु पल्लवी त्रिवेदी, श्री राजीव ने भी हमारा उत्साह वर्धन किया. आप सभी का हार्दिक आभार. |
अब आईये रामप्यारी की क्लास में:-
पाठकों ने कहा “
| seema gupta said...
Jabalpur – An Overview It was the 27th largest urban conglomeration in India in 2001 (2001 Census) and was the 325th largest city in the world in 2006. Jabalpur is the first district in India which has obtained comprehensive ISO 9001 Certificate in April 2007. The current population is about 15 lakhs. Climate Culture The art and crafts of Jabalpur are an important part of the cultural life of this city. One of the most well known Jabalpur crafts is durry designing. The unique designs and color of the durries make them very popular. The inhabitants of the region enthusiastically take part in the festivals of Jabalpur. Almost all the major festivals of India are celebrated in this city. Different forms of dance like Gond, Matki, Phulpati and Giridaand are an integral part of the celebration during these festivals. Transport Air Road Rail regards |
अच्छा अब नमस्ते. कल सोमवार को ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे सिर्फ़ रिजल्ट वाला हिस्सा
छोडकर बाकी सब स्तम्भ यथावत प्रकाशित होंगे.



