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बाबाश्री ताऊ महाराज द्वारा "क रोना" का शर्तिया ग्यारंटेड ईलाज

भक्तजनो, ह्में मालूम है कि कोरोना काल में आपके कष्ट बहुत बढे हुये हैं. और बाबाश्री तो सदैव से आपके कष्टों का शमन करते आये हैं. इन दिनों काफ़ी भक्तों के समाचार आ रहे हैं कि वो कष्ट में हैं. आपमें से कई "क रोना" से पीडित हैं. कुछ भक्त पत्नियों से पीडित हैं मार खा खा कर मोटू पतलू वाले पतलू जैसी हालात में पहुंच गये हैं.


                                                    मोबाईल पर "क रोना" झाडा देते बाबाश्री

कुछ पति भी पत्नियों पर अत्याचार कर रहे हैं जिसकी वजह से पुलिस भी परेशान है. अब पुलिस लोक डाऊन को मैनेज करे या इन खूसट पतियों की खबर ले? चारों तरफ़ हालत बहुत ही नाजुक और दयनीय हैं.

आपको इन कष्टों से छुटकारा दिलाने के लिये बाबाश्री ताऊ महाराज ने अचूक उपाय खोज निकाले हैं. और कोरोना के लोक डाऊन को देखते हुये आपको बाबाश्री के पास आने की आवश्यकता भी नहीं है बल्कि मोबाईल पर ही आपका ग्यारंटेड इलाज उपलब्ध करवा दिया जायेगा.


इस ईलाज की न्यौछावर फ़ीस बहुत ही मामूली रखी है. आप यह न्यौछावर फ़ीस आन-लाईन "बाबाश्री ताऊ महाराज 420 अपर्माथिक ट्रस्ट"  के अकाऊंट में ट्रांसफ़र करवाये और मिस समीरा टेडी  (Finance Controller) से फ़ोन पर अपाईंटमैंट लेकर फ़ोन करें. आपको ईलाज उपलब्ध करवा दिया जायेगा.

            मर्ज का नाम                                               न्यौछावर फ़ीस
1.   "करो ना" झाडा                                                     रूपये 21,001/  मात्र           

2.  "करो ना" ऊपरी फ़ेंट बचाव                                      रूपये 17,501/   मात्र       

3. "करो ना" आपसी गृह क्लेश                                     रूपये 25,001/= मात्र

4. "करो ना" पतिकूट यंत्र                                              रूपये 27,501/  मात्र                  

5. "क रोना" पत्नी पीडा बचाव यंत्र                              रूपये 31,001/  मात्र

6. "क रोना" घर में मन लगाऊ झाडा                              रूपये 16,501/  मात्र  

7. " क रोना" समस्त असाध्य बाधा पीडा यंत्र                 रूपये 38,501/  मात्र

हमारे सभी ईलाज जांचे हुये और शर्तिया ग्यारंटेड हैं. ईलाज करवाने वाले की जानकारी गुप्त रखी जाती है. ईलाज किसी कारणवश फ़ेल होने की स्थिति में आपका जमा रूपया वापस नहीं करने की हमारी पक्की ग्यारंटी रहेगी.


#हिन्दी_ब्लॉगिंग

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र द्वारा गधा सम्मेलन 2017 के आयोजन की सूचना

हवाओं में आजकल गधों की कुछ विशेष सी खुशबू छाई है. सोशल मीडिया हो या ताऊ टीवी के चैनल बस गधा...गधा और गधा.....। वैसे भी बसंत आगया है और होली भी सामने ही है सो गधा सम्मेलन 2017 के आयोजन की सूचना बतौर यह पोस्ट लिखी गई है.
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जैसे दुनियां में शुरू से ही,  एक ही जाति में दो वर्ग होने का फ़ैशन रहा है वैसे ही ब्लाग जगत तो क्या बल्कि कोई भी जीव समाज इससे कभी   अछूता नही रहा.  देखा जाये तो गधे और घोडे भी  शायद एक ही प्रजाति के जीव हैं पर घोडों को अपने ऊपर विशेष गर्व है. घोडा कहलाना फ़ख्र की बात है और गधा कहलाना अपमान की, जबकि  दोनों ही बिना सींग के हैं और दोनों ही लीद करते हैं. दोनों मे कुछ भी फ़र्क नही है. एक राज की बात आपको और बता देते हैं कि ये तथाकथित घोडे भी कभी गधे ही थे पर चालाकी,  मौका परस्ती और चापलूसी से अपने आपको स्वयंभू  घोडा घोषित कर लिया. इस वजह से  जो भी मान सम्मान, पुरस्कार, सुविधाएं होती हैं वो सब घोडों के हक में आ गयी और गधे बेचारे निरीह बन कर रह गये.  

एक दिन कुछ गणमान्य गधों का डेलीगेशन ताऊ महाराज धृतराष्ट्र के पास आया और उन्होंने अपना दुखडा रोया. अब ताऊ महाराज धृतराष्ट्र  से किसी का दुख देखा नही जाता सो उसी दिन से ताऊ महाराज धृतराष्ट्र  ने गधा सम्मेलन करवाना शुरू कर दिया. इस मौके पर सभी गणमान्य गधों को उचित मूल्य पर  विशेष पुरस्कार और सम्मान दिया जाने लगा. लेकिन घोडों को यह भी बर्दाश्त नही हुआ, उन्होंने उल्टे सवाल उठा  दिये कि गधों को सम्मेलन करवाने का हक ही नही है. यह सिर्फ़ और सिर्फ़ घोडों का एकाधिकार है जिस तरह समुद्र मंथन से निकले  अमृत पर देवताओं का एकाधिकार था.   

इस तरह महाराज धृतराष्ट्र द्वारा आहूत गधा सम्मेलन अस्तित्व में आया. पिछले वर्ष यह गधा सम्मेलन इस लिये नही हो पाया कि पिछला साल गधों और घोडों के बीच शीत युद्ध का रहा. असली युद्ध तो इराक, मिश्र, सीरिया और अफ़गानिस्तान में चल रहा था सो दोनों ही पक्ष उलझे हुये थे. इस साल एक दिन गधों और घोडों के मध्य जमकर बहस हो गई. दोनों ही सर्वश्रेष्ठता का दावा कर रहे थे. 

घोडों के लीडर ने कहा - अबे गधों अपनी औकात में रहो, हम तो तुमको हमारे सम्मेलन में आमंत्रित ही नही करते...तुम गधे हो और हम घोडे हैं. तुम कभी घोडे नही बन सकते....और ना ही हमारे सम्मेलन में शामिल हो सकते हो और ना ही कोई सम्मान पा सकते हो.

इस बार गधों का लीडर था रामप्यारे जो कि महाराज धृतराष्ट्र की संगत में रहकर आरपार हो चुका था. रामप्यारे ने घोडों के लीडर से कहा - घोडों के लीडर जी.. ये सही है कि हम गधे कभी घोडे नही बन सकते पर क्या तुममें से कोई एक भी गधा बन कर दिखा सकता है?

अब तो घोडों के अस्तबल में खामोशी पसर गई...सब हैरान परेशान...ऐसे घोडे क्या काम के? जो कभी वापस गधे  ही नही बन सकें? घोडों ने गधा बनने के लिये तुरंत अपनी इमरजेंसी मीटिंग आहुत कर ली है जो शीघ्र ही होने वाली है.

इधर गधों के लीडर रामप्यारे की जय जय कार होने लगी....और इस जीत के शुभ अवसर पर गधों ने भी एक प्रीतिभोज का आयोजन कर डाला जिसमे खूब गुलाब जामुन, रसमलाई और समोसे  खाये गये. 



इसके बाद विचार विमर्श शुरू हुआ गधा सम्मेलन की तारीख,  समय और स्थान तय करने का.

आप दिल थाम के बैठिये....गधा सम्मेलन की तारीख, समय और स्थान शीघ्र ही घोषित किये जाने वाले हैं. जिन्हें भी गधा सम्मेलन में हिस्सा लेना हो वो तुरंत संपर्क करें. 

विशेष नोट : - सिर्फ़ आमंत्रित अथितियों के ही आने जाने, ठहरने व खाने पीने की व्यव्स्था मुफ़्त रहेगी बाकी के सभी लोग अपनी अपनी व्यवस्था से आयें और सम्मेलन स्थल का पास अग्रिम प्राप्त कर लें. गधा सम्मेलन में कोई जातिगत भेद भाव नही किया जाता यानि अपने आपको घोडा समझने वाला भी समिल्लित हो सकता है.

विशेष सम्मान प्राप्त करने के लिये  अपना आफ़र आप सील बंद लिफ़ाफ़े में रखकर  एडवांस में भी भिजवा सकते हैं पर आखिरी निर्णय  बोलियां लगवा कर  सम्मेलन स्थल पर ही लिया जायेगा. सम्मान और पुरस्कार हर श्रेणी और वर्ग में दिया जायेगा.

पुराने गधा सम्मेलनों की झलकियां निम्न पोस्टों में पढ सकते हैं.

"जन ठोकपाल" पास करवा...तेरा कल्याण होगा !

कुछ ही समय पहले हस्तिनापुर में ऊंटनाथ पार्टी का शासन शुरू हो गया यानि ऊंट खडा हो गया. सांडनाथ व भैंसानाथ पार्टियों ने भीतरघात करते हुये उसके कदम रोकने शुरू कर दिये. ऐसे में ऊंटनाथ पार्टी को कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या करे और क्या ना करे?

एक शुभचिंतक ने ऊंटनाथ पार्टी के इकलौते विचारक मेजरीवाल को सलाह दी कि यदि सियासी चालों में सफ़ल होना है और सत्ता की मलाई का रसास्वादन करना है तो ताऊ महाराज धृतराष्ट्र की शरण में जाईये. इन मामलों में महाराज धृतराष्ट्र  से ज्यादा अनुभव किसी को नही है.

मेजरीवाल ने अपनी आशंका जाहिर करते हुये कहा कि ताऊ  महाराज धृतराष्ट्र तो सांडनाथ और भैंसानाथ पार्टी के सलाहकार हैं फ़िर वो हमको क्यों सलाह देंगे?

ऊंटनाथ पार्टी को राजनैतिक ज्ञान देते हुये  ताऊ महाराज धृतराष्ट्र

शुभचिंतक ने कहा कि ताऊ महाराज धृतराष्ट्र तो बिल्कुल निरपेक्ष आत्मा हैं वो तो बिल्कुल निरपेक्ष भाव से सबको सलाह देते हैं, जैसे चोर को कहेंगे - जा चोरी कर और साहुकार को सलाह देते हैं कि जागते  रहना.... आप तो तुरंत  ताऊ महाराज के पास जाईये.

मेजरीवाल अपने दो चार पठ्ठों के साथ महाराज के पास राजनैतिक शासन चलाने के लिये सलाह मांगने पधार गये. ताऊ महाराज धृतराष्ट्र उस समय ध्यानस्थ थे और मेजरीवाल को इतना टाईम कहां...उन्हें तो मुख्य मंत्री की कुर्सी के अलावा धरने प्रदर्शन के लिये भी समय निकालना पडता है. पर क्या करें...मजबूरी है...सो मन मार कर बैठे रहे. कुछ समय पश्चात ताऊ महाराज धृतराष्ट्र बाबा ठांशाराम की मानिंद अवतरित हुये. और दोनों में मंत्रणा शुरू हुई.

मेजरीवाल - ताऊश्री...हम तो फ़ंस गये...अब सरकार कैसे चलायें? यदि हस्तिनापुर की लोकल सरकार (विधान सभा) में उलझे तो हस्तिनापुर की बडी सरकार (लोक सभा) के लिये कैसे जुगाड जमायें? मैंने  समर्थन देने वाली ंसांडनाथ पार्टी के लोगों पर FIR  भी करवा दी, पर इतने बेशर्म लोग नही देखे जो समर्थन वापस लेते ही नही हैं.....और मैं यह पद छोडकर किस तरह भांगू? महाराज जरा इसका जुगाड बताईये.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र बोले - मेजरीवाल जी, इसमे कौन सी बडी बात है? आप नाहक चिंता करते हैं....एक काम किजीये....सांडनाथ और भैंसानाथ पार्टी के बडे बडे नेताओं पर जमकर भ्रष्टाचार के, मिली भगत के बडे बडे झूंठे सच्चे  आरोप लगाईये....लगे हाथ ही उनके साथ के कार्पोरेट्स को भी आरोपों से सराबोर कर दिजीये. फ़िर देखिये आपकी इच्छा तुरंत पूरी हो जायेगी....

मेजरीवाल बोले - पर ताऊश्री, सच्चे आरोपों का तो ठीक है पर झूंठे आरोपों का क्या करेंगे? उन  आरोपों को सिद्ध कैसे करेंगे?

ताऊ महाराज नाराज होते हुये बोले - मेजरीवाल जी, लगता है आपको राजनीति करना आती नही है जब हस्तिनापुर की विधान सभा नही चला सकते तो हरियाणा प्रदेश में सरकार बनाने का सोच भी कैसे सकते हो? अरे हरियाणा में जगह बनानी है तो जाट नीति सिखीये....वर्ना भूल जाईये हरियाणा और हस्तिना पुर की बडी गद्दी का सपना.....

ताऊश्री की बात बीच में काटते हुये ही मेजरीवाल जी बोले - ताऊ महाराज श्री, अब ये जाट नीति कहां से आगई? अभी तक तो सांडनाथ, भैंसानाथ, थर्ड फ़्रंट और फ़ोर्थ फ़्रंट की नीतियां ही सुनी थी.....

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र ने मेजरीवाल की अक्ल पर तरस खाते हुये कहा - हद हो गई यार.....राजनीति करने निकले हो और जाट नीति नही जानते? क्या खाक राजनीति करोगे?

मेजरीवाल ने खसियाते हुये ताऊ महाराज धृतराष्ट्र से विनय करते हुये कहा - ताऊश्री, अब आप मुझको यह जाट नीति सिखा ही दीजिये....बडा एहसान होगा आपका हम पर.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र बोले - सुनो.....एक बार एक तेली और जाट का झगडा हो गया. तेली हाथ पैर से तो जाट से जीत नही सकता था सो वो जुबान ही चलाता रहा और आखिर में झगडा जब ज्यादा बढ गया तो तेली गुस्से में आकर   - जाट रे जाट, तेरे सर पर खाट.... कहते हुये भागने लगा

जाट ने जब ये सुना तो गुस्से में अपना लठ्ठ उठाकर तेली के पीछे भागते हुये चिल्लाया- तेली रे तेली, तेरे सर पर कोल्हू.....

जाट का जुमला सुनकर तेली बोला - तेली और कोल्हू का जुमला मिला नही...

जाट बोला - अबे बावलीबूच....जुमला नही मिला तो मत मिलने दे..जब सर पर कोल्हू लिये सारा दिन घूमेगा तो नानी याद आ जायेगी तेरे को.

यह कहानी सुनाकर ताऊ महाराज बोले - अब समझ आ गई जाटनीती कि और समझाऊं?

मेजरीवाल गदगद होकर बोले - महाराज श्री, सब समझ गया...अब जाट की तरह मैं भी झूंठे सच्चे, उल्टे सीधे, जो भी दिमाग मे आयेगा वो आरोप लगाना शुरू कर दूंगा...अगले उसी में उलझे रहेंगे...और मेरा काम बन जायेगा.

अब मेजरीवाल कंपनी ने सांडनाथ और भैंसानाथ पर अनर्गल आरोपों की झडी लगा दी...फ़िर भी सांडनाथ पार्टी ने अपना समर्थन वापस नही लिया तो मेजरीवाल घबरा कर फ़िर ताऊ महाराज धृतराष्ट्र की शरण में चले गये और बोले - ताऊ श्री, हमने उन पर इतने झूंठे सच्चे आरोप लगाये...अम्मा और युवराज के नाम पर भी आरोप लगाये...लिस्ट जारी कर दी...पर पता नही ये कैसे बेशर्म लोग हैं कि समर्थन वापस ही नही लेते....महाराज कुछ तो पक्का उपाय बताईये कि सांडनाथ पार्टी समर्थन वापस खींच ले और हमारी  जान छूटे और हम आसानी से हस्तिनापुर की बडी गद्दी (लोकसभा) का चुनाव लड लें.... आप तो कोई परफ़ेक्ट तरीका बताईये कि सांप भी मर जाये और मेरी झाडू भी बची रहे पर सामने वाले की लाठी टूट जाये.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र बोले - वत्स मेजरीवाल....अब एक काम कर....."जन ठोक पाल" पास करवा...तेरा कल्याण अवश्य होगा.

मेजरीवाल बोले - पर महाराज श्री...जन ठोकपाल पास करवाना लोक सभा के अधिकार में है उसे दिल्ली विधान सभा में पास नही करवाया जा सकता...इसमे संवैधानिक अडचन है.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र बोले - अरे ओ बावलीबूच मेजरीवाल....तेरे को जब इतनी ही संविधान की फ़िक्र है तो काहे को मुख्य मंत्री और प्रधान मंत्री बनने का ख्वाब देख रहा है? तू ये बता, जब तूने सामने वालों पर बिना आधार के आरोप लगाये जिनका कोई सबूत ही नही है,  वो संवैधानिक था क्या? तूने सब बडे नेताओं को चोर बेईमान कह दिया, उसका कोई सबूत है क्या?

मेजरीवाल बोले - महाराज कुछ के तो सबूत हैं पर कुछ के नही...बस यूं ही आप के कहने पर लगा दिये थे पर उन बेशर्मों को कोई शर्म भी नही आती.....

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र बोले - हां अब समझ आया ना.....आरोप लगाना पहली स्टेज थी. अब बस इसी तरह मजे मजे में घोषणा कर दे कि "जन ठोक पाल" दिल्ली विधान सभा में पारित करवाऊंगा....और ये तेरे को मालूम ही है कि यह पास नही हो सकता और बस पतली गली से भाग लेना.....समझ गया ना या और समझाऊं?

मेजरीवाल को जैसे परम ज्ञान मिल गया हो...अपनी खांसी को रोकते हुये बोले - वाह ताऊ महाराज, आपने तो सही सलाह दे दी...बस यह जन ठोक पाल विधान सभा में रखवा दूंगा....और सांडनाथ व भैंसानाथ इसको सपोर्ट नही करेंगे...बिल गिर जायेगा...और मेरा छुटकारा हो जायेगा....

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र बोले - अरे..तू रहा बावलीबूच का बावलीबूच ही......बिल को हर्गिज भी विधान सभा में मत ले जाना...उसके पहले ही  कन्नी काट लेना...समझ गया ना? अगर बिल विधान सभा में ले गया तो तेरा इस मुख्य मंत्री की कुर्सी से पीछा छूटने वाला नही है.....बस यह कहकर इस्तीफ़ा भिजवा देना कि जन ठोक पाल के लिये हजारों मुख्य मंत्रियों की कुर्सियां कुर्बान.....

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र के वचन सुनकर मेजरीवाल जी अति गदगद हो गये और ताऊश्री को साष्टांग दंडवत कर वहां से सीधे अगली जन ठोक पाल की रणनीति पर विचार करते हुये  हस्तिनापुर की केंद्रीय सरकार के मुखिया बनने के सपने बुनने शुरू कर दिये.


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चुनावी साल में पांच हजार साल के राजनिती के अनुभवी "ताऊ महाराज धृतराष्ट्र" के अनुभव से लाभ उठाईये....हमारे विशेष पैकेज निम्नानुसार हैं :-

*जिसको भी चुनाव लडना हो...
  **सरकार बनानी हो....सरकार गिरानी हो.....
   ***अपने पक्ष में सर्वे रिपोर्ट करवाना हो...
    ****उम्मीदवारों के चयन में सहायता लेना हो...
     *****चुनाव हारना या हरवाना हो...
      ******चुनाव जीतना या जितवाना हो...
       *******किसी की खाट आडी या खडी करवाना हो....
        ********गठबंधन करना हो....गठबंधन तुडवाना हो.....
         
हर तरह के राजनैतिक मर्ज का तुरंत हल....

मूल्य सूची मंगवाने के लिये "ताऊ टीवी" से संपर्क किजीये.

नोट - हम सिर्फ़ राजनैतिक गठबंधन ही जुडवाते और तुडवाते हैं, वैवाहिक नही.

एक ब्लागर सम्मेलन इधर भी

आजकल चारों तरफ़ ब्लाग सम्मेलन, ब्लागर मीट, ब्लागर मिलन इत्यादि इत्यादि... का दौर चल रहा है. और विज्ञान का युग है तो ऐसे में चैट सम्मेलन तो शुरू से चलन में रहा है यानि गाहे बगाहे ब्लागरों ने सम्मेलन की तर्ज पर चैट को सार्वजनिक करके चैट सम्मेलन की रिपोर्टिंग की है. अब ये अलग बात है कि उसमें भाईचारा था या जूतमपैजारीयता? खैर जो भी रहा हो आखिर था तो ब्लागर सम्मेलन ही.

तो हमने भी इसी तर्ज पर अब दूरभाष ब्लागर सम्मेलन की सोची कि जब सभी लोग ब्लागर सम्मेलन नाम की लुटिया लूट रहे हैं तो क्यों ना हम भी बहती गंगा में हाथ धो डाले? वो कहते हैं ना कि जहां चाह वहां राह...बस हम यह विचार कर ही रहे थे कि किसको दूरभाष ब्लागर सम्मेलन का निमंत्रण देने को घंटी बजाई जाये कि इतनी देर में खुद हमारी घंटी बज उठी.

कल दोपहर करीब 12:31 बजे एक ब्लागर मित्र का फ़ोन आया. मेरे हैल्लो...हैल्लो कहते ही उधर से तल्ख आवाज में भाई जान शुरू हो गये. लोग मेरे पीछे क्यों लगे हुये हैं? मैने किसका क्या बिगाडा है? ये बहुत गलत बात है...इत्यादि इत्यादि... मैं समझ गया कि माजरा संगीन है सो फ़ट से अपना ताऊपाट दांव मारा और पूछ बैठा - भाई आप कौन हो? किससे काम है? और क्या चाहते हैं? दांव फ़िट बैठा...सामने वाले को लग गया कि शायद रांग नंबर लगा है. पर वो भी आखिर पक्का ब्लागर ठहरा सो पूछ बैठा - आप कौन, ताऊ बोल रहे हो?

मैने कहां - हां भाई अभी तक तो ताऊ ही बोल रहा हूं पर आप जिस तरह से शुरू हुये हो उसको देखते हुये ये ताऊ की आत्मा भी बोल सकती है. मेरी इस बात से सामने वाला थोडा सामान्य बातचीत पर उतर आया और करीब आधा घंटा, जी हां कम से कम सिर्फ़ 31 मिनट तक शिकवा शिकायत, प्रेम, भाईचारा, ब्लागर भाईचारा, पीठ सहलाना, चने के झाड पर चढाना, किसने किसको गाली दी, किसके ब्लाग पर आज क्या हुआ यानि आल इंडिया रेडियो की उर्दू खबरों का प्रसारण चलता रहा.

लुब्बे लुबाब ये कि, इस तरह की आधे घंटे की बात चीत के बाद हालात कुछ सामान्य हुये. बातचीत सामान्य स्तर पर आ गई तो जाहिर है अब "ब्लागर दूरभाष सम्मेलन" की समाप्ति का समय आ पहुंचा था. हमको आज कोई काम धंधा था नही सो वो जब भी दूरभाष सम्मेलन समाप्त करने पर आये हम..पूछ बैठे...और सुनाईये जी...और क्या हाल है? वो कहे - ताऊ जी सब ठीक ठाक है...इस तरह का संवाद आखिरी के दस मिनट में पांच सात बार हो गया....हमारी तव्वे की सूई वहीं अटकी थी...और सुनाईये जी...और क्या हाल चाल है?

लगता है हमारी अटकी सूई से एक ही आवाज सुन सुन कर ब्लागर मित्र पक गये थे. थक हार कर अबकी बार उन्होंने सीधे ही उल्टा धोबी-पाट हम पर मारा और बोले - ताऊ जी, ऐसा है ब्लाग जगत में आपसी भाई चारा रहना चाहिये. लोग इस कोशीश में लगे भी हैं...आपको भी इसमे आगे आना चाहिये, अब ये जाल की दुनिया असल की दुनिया बन रही है. लोग एक दूसरे को परेशान करते हैं, एक दूसरे के ब्लाग पर जा कर गाली गलोच करते हैं... इन सबसे बचने में हमें उनकी मदद करनी चाहिये. आखिर एक दूसरे के दुख सुख में ब्लागर भाई काम नही आयेंगे तो कौन आयेगा?

मैने कहा - वाह भाई वाह, जीता रह, तेरे से हमको ऐसी ही उम्मीद थी. और ये बात बिल्कुल सही कही कि सुख दुख में ब्लागर भाई ही एक दूसरे के काम आयेंगे....तो एक काम कर भाई, मैं आजकल थोडे ज्यादा ही दुख में हूं, जरा मेरी मदद तू कर दे या ब्लागर भाई बहणों से करवा दे.

वो बोला - ताऊ जी आप हुक्म करिये, आपके लिये जी और जान दोनों हाजिर हैं.

हमने तव्वे को गर्म देखकर तुरंत पासा फ़ेंका - यार तेरा "जी तो लाख का" और "जान करोड की", बात यह है कि मुझे आजकल थोडी कडकी चल रही है और कडकी से बडा दुख क्या होगा? जरा अपने ब्लागर भाई बहणो से कहकर दो चार लाख की मदद करवा दे...

हमारी बात पूरी होने के पहले ही..उधर से..हैल्लो..हैल्लो..ताऊ जी...आपकी आवाज नही आ रही है... हैल्लो जरा जोर से बोलिये...हैल्लो...हैल्लो....ताऊ जी कुछ भी नही सुनाई दे रहा....हैल्लो...हैल्लो.... और ब्लागर सम्मेलन यहीं समाप्त हो गया.

मुफ़लिसी में
प्यार भी
नफ़रतों में बदल जाता है.

कडकी का रोना सुनते ही
ब्लागर दोस्त भी
सम्मेलन समाप्ति के पूर्व ही
सम्मेलन समाप्त हुआ, का
उदघोष कर देता है.

और जेबे भरी दिखे यारों को तो
बिना बात के ही
ब्लागर सम्मेलन
करवा देता है.

जैसे भरा हुआ खीसा (जेब)
नफ़रतों को भी मुहब्बतों में
बदल देता है.

भीम और दुर्योधन का टेस्ट : ब्लागाचार्य द्वारा टी.आर.पी. बढाने के लिये?

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र महल में आज अकेले ही बैठे हैं. महारानी ताई गांधारी शायद किसी काम से राजमहल के अंदर गई है. रामप्यारे अभी अभी आकर महाराज के पास खडा हुआ है और मिस समीरा टेढी राजमहल के पिछले दरवाजे से प्रवेश कर ही रही हैं. यूं तो महाराज अंधे हैं पर किसी के भी आने की खुशबू महाराज को बिल्कुल सटीक लग जाती है.


जैसे ही रामप्यारे आकर खडा हुआ महाराज ने पूछा - आवो रामप्यारे आवो, हम तुम्हारा ही इंतजार कर रहे थे. असल में हम राजकुमारों के लिये चिंतित थे, सारे राजकुमार रोहतक की तिलयार झील पर पिकनिक के लिये आज्ञा लेने आये थे पर वहां से लौट कर ना तो कोई प्रणाम करने आया और ना किसी ने शक्ल दिखाई?

दरबार हाल में महाराज, पास खडा रामप्यारे और पिछले दरवाजे से आती हुई मिस समीरा टेढी


रामप्यारे - ताऊ महाराज की जय हो! अब वहां से कोई राजमहल में लौटा हो तब ना आपको प्रणाम करने आयेगा? कुछ राजकुमार वहां से सीधे काम धंधे के लिये निकल गये और कुछ राजकुमार जबलपुर चले गये. वहां दिन में एक होटल में सम्मेलन किया और रात में वहीं महफ़िल जमाई.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - वाह रामप्यारे वाह! तुम तो सब खबर रखते हो? ये तो बहुत अच्छी बात बताई कि कुमारों ने रात को होटल में गीत संगीत की महफ़िल जमायी. असल में महफ़िल जमाना तो राजकुमारों को ही शोभा देता है. आखिर कुमार किसके हैं? हमें उनकी कारगुजारियों पर बहुत ही फ़ख्र हो रहा है., पर हमको ये बतावो कि वहां कुमारों ने आपस में टांग खिंचाई तो नही कि ना?

रामप्यारे - महाराज, अब छोडिये इस बात को. आखिर आपके राजकुमार हैं तो टांग खिंचाई के बिना किसी काम को कैसे कर सकते हैं? और चूंकी वो आपके लख्ते जिगर हैं और मैने सदियों से आपका नमक खाया है सो उनकी असली कारगुजारियां तो मैं किसी को भी नही बता सकता. आप इस नाचीज रामप्यारे की तरफ़ से निश्चिंत रहें महाराज.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - पर रामप्यारे ये तो बतावो कि सिर्फ़ टांग ही खींची ना...कहीं किसी की तोड तो नही डाली? हमें जरा भीम और दुर्योधन की नियत पर यकिन नही हो पाता...ना जाने क्यों...हमको हमेशा कुछ खुटका सा लगा रहता है....खैर ये बतावो... आगे वहां क्या क्या हुआ?

रामप्यारे - महाराज सारी रात महफ़िल की खुमारी के बाद कुमार सुबह सुबह उठकर भेडाघाट भ्रमण को निकल गये, फ़िर वहां दाल बाटी गक्कड भुर्ता के साथ खींच खांचकर अपने अपने स्थान को गमन कर गये? पर महाराज श्री आप चिंतित से क्युं दिखाई दे रहे हैं? अब तो राजकुमार वयस्क हो गये हैं. उनकी चिंता छोडिये और वृद्धावस्था का आनंद लिजिये.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - अब वृद्धावस्था का मजा क्या खाक लें रामप्यारे, हम चिंतित ना हों तो क्या करें? बात ही ऐसी है. अभी थोडी देर पहले आचार्य द्रोण का संदेशा आया था कि वो भीम और दुर्योधन की बुद्धि का टेस्ट लेना चाहते हैं कि उन दोनों मे कौन अधिक बुद्धिमान है? . अब भला ये कोई बात हुई कि उनकी बुद्धि का टेस्ट ले रहे हैं? हमें तो आचार्य की नीयत पर शक हो रहा है...कहीं कूछ गडबड जरूर है.

रामप्यारे - महाराज की जय हो! महाराज इस युग में लेखन बुद्धि के सहारे ही श्रेष्ठता का चयन किया जाता है. आप चिंतित ना हों. आचार्य द्रोण बहुत ही महारत और योग्यता वाले आचार्य हैं वो अवश्य ही कोई फ़ैसला कर लेंगे.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - अरे रामप्यारे, पहलवानों की श्रेष्ठता का चयन मलयुद्ध या कुश्ती से होना चाहिये ना कि लेखन से. अरे भीम और दुर्योधन को बुद्धि से क्या लेना देना? उनकी श्रेष्ठता का पता करना है तो एक दंगल आयोजित करवा लिया जाये या गदा युद्ध. पर ना जाने आचार्य द्रोण की बुद्धि बुढापे में क्यों सठिया रही है?

इतनी देर में ही मिस समीरा टेढी ने आकर महाराज को नमन जुहार करते हुये पूछा - महाराज श्री क्या हुआ? किसकी बुद्धि सठिया रही है?

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र समीरा जी के आने से किंचित प्रसन्न होकर बोले - आईये आईये समीरा जी...असल में हम आचार्य द्रोण की बात कर रहे थे.

मिस समीरा टेढी - क्यों क्या हुआ आचार्य द्रोण को? सब कुशल मंगल तो है ना? कोई चिंता वाली बात तो नही है?

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - समीरा जी, हम भीम या दुर्योधन के लिये चिंतित नही हैं...हम तो आचार्य द्रोण के लिये चिंतित हैं...

रामप्यारे बीच मे ही पूछ बैठा - महाराज, बुद्धि का फ़ैसला तो भीम और दुर्योधन में किसी का होना है और आप चिंतित हो रहे हैं आचार्य के लिये? बात कुछ समझ नहीं आई?

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - रामप्यारे तू भी निरा गधे का गधा ही है. अरे भीम और दुर्योधन अपने ही हैं...कोई भी हारे कोई भी जीते. खिचडी से घी बहेगा तो अपनी ही थाली मे गिरेगा. और हम आचार्य द्रोण के लिये चिंतित इस वजह से हैं कि चाहे वो किसी को भी जिताये...जो भी हारेगा वो लानत मलामत तो आचार्य की ही करेगा ना?
बेचारे ब्लागाचार्य द्रोण..............

मिस समीरा टेढी - महाराज आप नाहक ब्लागाचार्य द्रोण के लिये परेशान हो रहे हैं. अब ब्लागाचार्य द्रोण द्वापर जितने भी सीधे और सरल नही रहे. बिना मतलब वो कोई काम नही करते.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - समीरा जी आप पहेलियां क्यों बुझा रही हैं? साफ़ साफ़ कहिये ना ....आखिर इसके पीछे ब्लागाचार्य का मंतव्य क्या है?

मिस समीरा टेढी - महाराज ताऊ श्री, आप नये जमाने को नहीं समझते. यह टेस्ट तो ब्लागाचार्य द्रोण ने अपनी टी. आर.पी. बढाने के लिए कराया है. भीम और दुर्योधन से उसका क्या लेना देना. वो जब लड़ेंगे तो टी आर पी तो ब्लागाचार्य की ही बढ़ेगी. वरना तो शाही शिक्षक को ट्यूशन के लिए स्टूडेंट का टंटा लग जाये. वैसे भी सूखी तन्खाह में आजकल कहाँ गुजारा?

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - ओह समीरा जी, आप कितनी जीनियस हैं? इतने जटिल प्रश्न का आपने सोलहों आने सही उत्तर देकर हमारी जिज्ञासा का शमन कर दिया... आईये अब डिनर के लिये चलते हैं......

(क्रमश:)

ताऊ : चूहे की औलाद या लंगडे कुत्ते की औलाद?

अनेक सालों के बाद इस साल अचानक सर्दी का प्रकोप भयानक होगया है. उम्मीद से विपरीत सर्दी बहुत ज्यादा है. दिन में जरासी हवा चलते ही दांत कटकटाने लगते हैं. ताऊ को तुरंत ख्याल आया कि हो ना हो जरूर इसमें कोई ग्रह चाल उल्टी सीधी हो गई है सो ताऊ महाराज अपना पोथी पत्रा लेके अपनी उंगलियों पर मीन मेष कर्क करने लग गया. आखिर में ताऊ उछल पडा जब उसने पता लगा लिया कि दुनियां भर में पड रही इस तीव्र सर्दी का राज क्या है?

ताऊ ज्योतिषी महाराज ने अपनी दिव्य दृष्टि से साफ़ साफ़ देख लिया कि इस बार अग्निकारक ग्रह मंगल 29 नवंबर से ही अस्त हो गया है जो 11 मई 2011 तक अस्त रहने वाला है सो इस बार कडाके की ठंड पडेगी. जिनको भी ठंड ज्यादा लगती हो या जिनकी हड्डियां ज्यादा कडकडाती हों वो ताऊ ज्योतिषी महाराज से संपर्क कर सकते हैं. शर्तिया और ग्यारंटेड इलाज किया जायेगा. अति जाडे से पीडित लोगों ( सिर्फ़ ब्लागरों ) को विशेष रियायत दी जायेगी. विशेष जानकारी के लिये हमसे फ़ोन पर तुरंत संपर्क करें.

ताऊ महाराज ने अपने दिव्य चक्षुओं से एक और दुर्योग देखा है, हम आपको डरा नही रहे हैं, आप चिंता नहीं करे हमारे पास इसका पक्का इलाज और उपाय मौजूद है, आप तो बस हमसे संपर्क करिये और फ़ीस चुकाईये और निश्चिंत हो जाईये. न्योछावर मात्र सवा इक्कीस हजार रुपये !

हां तो हम बात कर रहे थे एक और दुर्योग की. और लगता है ब्लागजगत के दिनमान भी इनसे ज्यादा प्रभावित हुये हैं. चुंकि राहु केतु ठहरे छायावादी ग्रह, ये दिखते कुछ और हैं और दिखाते कुछ और हैं. ये दाल बाटी दिखाते हैं और खाने जावो तो जला हुआ बैंगन भुर्ता भी नही देते. ये सब राहु केतु का एक दूसरे के नीच नक्षत्र में भ्रमण का फ़ल है. आप चिंता नही करें, ताऊ महाराज ने इनका उपाय ढूंढ लिया है. आप अभी और इसी वक्त हमसे फ़ोन पर संपर्क किजिये. फ़ीस जमा करवाने के लिये हमारा बैंक अकाऊंट नंबर भी आपको फ़ोन पर ही बताया जायेगा.

ताऊ महाराज ज्योतिषी यह घोषणा करते हैं कि इस बार राहु केतु के इस नीच नक्षत्र भ्रमण काल में अर्थ जगत में भारी उठा और पटक का खेल चलेगा. कुछ भी अप्रत्याषित गडबड शेयर बाजार, सोना चांदी में होने वाली है अत: बिना डरे ताऊ महाराज से तुरंत संपर्क करें हम आपको इनसे बचने का उपाय बतायेंगे....पर समय रहते संपर्क करें..... कहीं लुटने पिटने के बाद नही...वर्ना हम फ़ीस कैसे वसूलेंगे?

ताऊ ये सपना देख ही रहा था कि ताई ने आकर रजाई खींची और बोली...अबे ओ चूहे की औलाद....आज क्या सारे दिन सोते ही रहेगा? आफ़िस भी जायेगा कि नही? ताऊ हडबडाकर उठा तो क्या देखता है कि ताई के द्वारा चूहे की औलाद कहते ही ताऊ के पिताजी, दादाजी, चाचे, ताये, मौसे, मौसियां सारे आकर ताऊ के ऊपर चढ गये और लाड करने लगे.


"चूहे की औलाद" ताऊ अपने पुरखों के साथ

बेचारा ताऊ! अभी उस रोज ताऊ महाराज को लंगडे कुत्ते की औलाद, मुझे समझ क्या रखा है बे...ने परेशान करके रख दिया और आज ये नई गुत्थी है कि ये चूहे सही में ताऊ के पुरखे हैं और ताऊ चूहे की ही औलाद है? या फ़िर ताई ने कोई जादू करके ताऊ पर इनको छोड दिया है जिससे ताऊ वापस रजाई में ना दुबक जाये.

पर आप काहे चिंता करते हैं जी? ये पहेली तो ताऊ बुझा ही लेगा. आप तो आपके राहु केतु का इलाज करवाने के लिये तुरंत सम्पर्क करें. ग्यारंटेड इलाज किया जायेगा.

रामप्यारे की ट्वीट्स यहां पढिये!


रोहतक ब्लाग स्पेक्ट्रम : ताऊ महाराज और ताई महारानी चिंतित

सभी राजकुमार महाराज और महारानी से आज्ञा लेकर रोहतक तिलयार झील पर पिकनिक के लिये गये हुये हैं. ताऊ महाराज धृतराष्ट्र हमेशा की तरह राजमहल में अपनी जीवन संगिनी महारानी गांधारी के साथ बैठे हैं. और महाराज की आंखें संजय यानि इस जन्म का रामप्यारे भी वहीं आ पहुंचा है.

किसी अनहोनी की आशंका से ताऊ महाराज धृतराष्ट्र चिंतित से दिखाई दे रहे हैं. और महाराज की चिंता का कारण भी स्वाभाविक है क्योंकि जब जब उनके लाडले राजकुमार पिकनिक या आखेट के लिये गये हैं तब तब कुछ ना कुछ गुल अवश्य खिलाते हैं. तो रोहतक पिकनिक इससे कहां अछूती रहने वाली है?

महारानी गांधारी - हे ब्लागार्य महाराज! क्या बात है? आज मुझे पुन: आपके चेहरे पर कुछ परेशानी के भाव दिखाई दे रहे हैं?

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - हे महारानी ! आपकी बात तो सच है कि हम परेशान हैं पर हम अपनी परेशानी आपको बतायें उससे पहले ये जानना चाहेंगे कि आपकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई होने के बावजूद आप हमारे चेहरे के भावों को कैसे पढ लेती हैं? हम बडे आश्चर्यचकित से हो जाते हैं.

इसी बीच रामप्यारे बोल पडता है ....ताऊ महाराज श्रेष्ठ की जय हो! ताई श्रेष्ठा महारानी अपने मन की आंखों से आपके भाव पढ लेती हैं....

इस पर तनिक नाराज होकर ताई महारानी बोली - रामप्यारे तुम कभी चुप भी रहा करो...जब देखो अपने बडे बडे दांत दिखा के लोगों को डराया करते हो... हमेशा बक बक करते रहते हो. तुमको कम से कम पति पत्नि की बातचीत का तो ख्याल रखना चाहिये. पता नही महाराज ने तुमको कौन सी घडी में अपाईंटमैंट दिया था जो पांच हजार साल से पीछा ही नही छोड रहे हो? मैं तरस गयी महाराज से एकांत में बातचीत करने के लिये पिछले पांच हजार सालों से. हर सवाल का जवाब पूछने से पहले ही तुम देने लगते हो. तुमने तो बस समझ लिया कि एक अंधा बुड्ढा और एक बुढिया जिसने पट्टी बांध रखी है आंखों पर, उनको चाहे जैसे आंखों देखा हाल सुनावो ...

महारानी ताई गांधारी, महाराज ताऊ धृतराष्ट्र और रामप्यारे


ताऊ महाराज धृतराष्ट्र बीच में बात काटते हुये बोले - अरे महारानी आप तो नाहक रामप्यारे पर नाराज हो रही हैं...आप जानती हैं कि अगर रामप्यारे ना होता तो हम आज तक ये पांच हजार साल का सफ़र पूरा नही कर पाते...

महारानी गांधारी - हे ब्लागार्य आप चुप ही रहें तो अच्छा है. वो तो मैं ही हूं जिसने सफ़लता पूर्वक आंखों पर पट्टी बांधे हुये भी दिन में एकाध बार पट्टी का कोना उठाकर दुनियां पर तिरछी नजर डाल लेती हूं. वर्ना आज के जमाने में 101 पुत्रों की परवरिश करना कोई हंसी ठट्ठा..हा..हा..ही..ही..का काम नही है....आप और ये रामप्यारे आखिर करते क्या हैं? बस आफ़िस के मत्थे फ़ोकट का फ़ोन पकड लिया...इसकी टांग खींची...उसकी..टांग खींची...यहां बेनामी करवाई वहां अनामी करवाई.....और दोनों मौज लेते रहते हो...मेरे सामने पडते ही शक्ल बंदर जैसी बना कर परेशान होने का नाटक करते हो....मैं आपकी नस नस से वाकिफ़ हूं..आपको मालूम भी है कि आजकल आपके ब्लागाव्रत में क्या चल रहा है?

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र खिसियानी हंसी हंसते हुये बोले - ओह ..महारानी आप तो बस मौका मिलते ही बाल की खाल खींचने लगती हो. ..हम चिंतित हैं ब्लागाव्रत के भावी युवराज की गद्दी को लेकर, क्या आपको दिखाई नही दे रहा है कि आजकल ब्लागाव्रत कई खेमों में बंटता जारहा है? एवम आप ब्लागाव्रत की साम्राज्ञी होकर भी वही चौके चूल्हे की साधारण बातों में लगी रहती हैं? आपको समझना चाहिये कि राज्य में खेमेबाजी बढने से साम्राज्य की नींव कमजोर पड जाती है?

महारानी ताई गांधारी बोली - रहने दिजिये महाराज...बैठे बिठाये खाने को मिल जाता है आपको और मैं अब द्वापर जितनी भोली भी नही रही कि इतना भी ना समझ सकूं कि आप दिन भर इस सत्यानाशी रामप्यारे के साथ बैठकर लेपटोप पर लोगों की टांग खिंचाई करते रहते हो.....मौज लेते रहते हो....अब इस कलयुग में आपके इतने बडे कुनबे का खाना बनाते बनाते ही मेरी बुड्ढी हड्डियां दर्द करने लगती हैं. अब आप ये अंधे होने का नाटक बंद करिये...आजकल आंखों का आपरेशन होने लगा है, पर हम आंखों के आपरेशन का इतना रूपया लायेंगे कहां से? और सुना है आजकल कैश लैस मेडिक्लेम सुविधा भी बंद होगई है...सो आप तो इस रामप्यारे की एक आंख शाही कसाई को बुलवाकर निकलवा लिजिये और खुद को लगवा लिजिये और कुछ काम धंधा करके कमाना शुरू किजिये जिससे ये गृहस्थी की गाडी आगे बढे.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र खिसियाते हुये से बोले - अरे महारानी जी, आप हम पर इतना बडा अन्याय मत किजिये...हम अब अंधे ही रहना चाहते हैं. हमको अब इसी में मजा आने लगा है. हम से ये मजा मत छीनिये. आपको भी पता है कि अंधे रहकर आजकल जितने फ़ायदे हैं उतने कहीं नही हैं. हमको अंधे होने के एवज में ये जो महाराज गिरी मिली है, आंखे पाकर वो भी छिन जायेगी. फ़िर ये घर बैठे जो मुआवजा मिलता है महाराज गिरी का, वो कहां से मिलेगा और हम कोई काम धंधा सिवाय ब्लागरी के जानते नही हैं.... और आपको मालूम है कि आजकल ब्लागाव्रत में हमारे ब्लाग पुत्रों और पुत्रियों मे घमासान मचा हुआ है....(बस यह कहकर महाराज ने महारानी की कमजोर नस दबा दी. महारानी और जो चाहे सहन करले पर अपने ब्लाग पुत्र/पुत्रियों को तकलीफ़ मे और लडता नही देख सकती)

महाराज को बीच में ही रोककर महारानी ने पूछा - क्यों क्या हुआ हमारे ब्लाग पुत्र/पुत्रियों को? जल्दी बोलिये ब्लागार्य श्रेष्ठ...किसी अनहोनी से मेरा दिल बैठा जारहा है. वो सब तो रोहतक में पिकनिक मनाने गये थे ना? क्या वहां आपस में सर फ़ुट्टोव्वल कर बैठे? या फ़िर कहीं भीम और दुर्योधन में हाथापाई होगई? जल्दी बोलिये ब्लागार्यश्री? क्या फ़िर कहीं कोई महाभारत की शुरूआत तो नही होगई? क्या वो उनको आपस में लडवाने वाला फ़िर से मौज लेने तो वहां नही पहुंच गया? आप बोलते क्यों नहीं? तुम बतावो रामप्यारे...क्या हुआ मेरे कलेजे के टुकडे और टुकडियों को?

इतनी देर से चुप खडा सुन रहा रामप्यारे बोला - महारानी की जय हो! हे महारानी, असल बात ये है कि रोहतक में पिकनिक पर पहूंचे आपके ब्लागपुत्रों ने वहां पर जी भर के....

रामप्यारे के इतना बोलते ही ब्लागार्य श्रेष्ठ ताऊ महाराज बीच में ही चिल्ला पडे...नही रामप्यारे नही.... रोहतक स्पेक्ट्रम के बारे में जबान मत खोलना महारानी के सामने.... वहां पर.........

(क्रमश:)


ब्लागिंग में पी.एच.डी. सहित विभिन्न कोर्स उपलब्ध!

सभी लोगों के लिये आज का दिन महान और खुशखबर वाला है. काफ़ी समय से ब्लागजगत में लोग आते हैं और चले जाते हैं. कुछ चंद लोग जो बच जाते हैं वो महान मठाधीशों के बीच खेमेबाजी में बंट कर रह जाते हैं. आप लोग तो जानते ही हैं कि ब्लाग स्पेक्ट्रम का असली राजा तो ताऊ है जो खुद के साथ साथ सभी को रेवडियां खिलवाता ही रहता है.

पिछले कुछ समय से शिद्दत से यह महसूस किया जा रहा है कि कुछ ब्लागिंग के कोर्स शुरू किये जायें ताकि नयों के साथ साथ कुछ पुराने खूसट और घाघ (महाघाघ सिर्फ़ ताऊ है दूसरे इस पदवी की तरफ़ मुंह ना मारें) लोगों को भी ब्लागिंग की विभिन्न मनपसंद विधाओं में ट्रेनिंग देकर बाद में खुद ताऊ के निर्देशन में उनको डाक्टरेट करवाई जा सके.

"ताऊ युनिवर्सिटी आफ़ ब्लागिंग" के अंतर्गत निम्न कोर्स शुरू किये गये हैं जिनमें फ़ेकल्टी और नियमों की जानकारी नीचे दी जा रही है. कृपया अपने योग्य और मनपसंद कोर्स में एडमिशन लेकर अपना अध्ययन पूर्ण करें.


"ताऊ युनिवर्सिटी आफ़ ब्लागिंग"

वाइस चांसलर - ताऊ रामपुरिया अपने आफ़िस में

कोर्सेस का संक्षिप्त ब्यौरा :-

आदिकाल - राहुल सांकृत्यायन द्वारा आदिकाल को सिद्ध सामंत काल कहा गया है, जो कि हिंदी का शुरूआती काल है. इसी तरह ब्लागरी के शुरूआती काल के सभी कोर्सेस इस काल के अंतर्गत करवाये जायेंगे जिसके डीन
श्री समीरलाल ’समीर’ नियुक्त किये गये हैं.

आदिकाल कोर्सेस के डीन श्री समीर लाल

भक्तिकाल - तुलसीदास सूरदास जैसे भक्तों का काल रहा है और इस विषय के समस्त ब्लागिंग कोर्सेस के डीन - डा. अरविंद मिश्र नियुक्त किये गये हैं.

भक्तिकाल कोर्सेस के डीन डा. अरविंद मिश्र

रीतिकाल - बिहारी, सत्सैया रहीम का काल है , इसमें तीन तरह के कवि थे रीतिसिद्ध, रीतिबद्ध और रीतिमुक्त.. इस विधा मे समस्त ब्लागिंग कोर्सेस के डीन - डा. रूपचंद्र शाश्त्री "मयंक" नियुक्त किये गये हैं.

रीतिकाल कोर्सेस के डीन डा. रूपचंद्र शाश्त्री "मयंक"

आधुनिक काल - की शुरूआत ब्लागिंग में ताऊ के आगमन के साथ ही मानी गई है और इस विधा के समस्त ब्लागिंग कोर्सेस के डीन - श्री सतीश सक्सेना नियुक्त किये गये हैं.


आधुनिक काल कोर्सेस के डीन श्री सतीश सक्सेना

ब्लागिंग के आधुनिक काल के अंतर्गत निम्न कोर्सेस शुरू किये गये हैं.

प्रयोगवाद - के अंतर्गत, प्रणामवाद, धन्यवाद, नम्रवाद, ब्लागर मिलन वाद, रामराम वाद एवम अन्य कई कोर्सेस हैं.

इस विधा के हैड आफ़ डिपार्टमैंट श्री अंतरसोहिल नियुक्त किये जाते हैं.

छायावाद - के अंतर्गत अनामी बेनामी टिप्पणी ज्ञान, पोस्ट पब्लिश करने के बाद उसमें से कांट छांट ज्ञान? स्वयं अदृष्य रहकर दूसरों की खाट कैसे खडी करें का ज्ञान? किसी बेनामी की टिप्पणि किसी शरीफ़ ब्लागर के आईपी एडरेस का पता करके उसके मत्थे करने का ज्ञान इत्यादि....

इस छायावाद विधा की समस्त ब्लागर शिक्षा दीक्षा ताऊ रामपुरिया के निर्देशन में दी जायेगी पर इस विभाग के लिये एक सुयोग्य व्यक्ति की तलाश है जो कि इस विभाग का विभागाध्यक्ष बन सकें और ताऊ के इशारों पर चलकर स्पेक्ट्रम के कार्य को गति दे सके . पारिश्रमिक योग्यतानुसार देय होगा. चैतुआ यानि डेपुटेशन पर भी चलेगा. तुरंत संपर्क करें.

नारी विमर्श - के कोर्सेस अति शीघ्र तय किये जा रहे हैं. योग्य और कुशल नारी विभागाध्यक्ष की आवश्यकता है. कृपया इच्छुक उम्मीदवार तुरंत संपर्क करें . पारिश्रमिक योग्यतानुसार देय होगा.

दलित विमर्श - योग्य और कुशल पुरूष / नारी विभागाध्यक्ष की आवश्यकता है. कृपया इच्छुक उम्मीदवार तुरंत संपर्क करें . पारिश्रमिक योग्यतानुसार देय होगा.

"साधारण नियमावली"

१. "ताऊ युनिवर्सिटी आफ़ ब्लागिंग" के किसी भी कोर्स में दाखिले के लिये किसी भी योग्यता या अनुभव की आवश्यकता नही है सिवाय पी.एच.डी. को छोडकर.

२. प्रत्येक कोर्स की फ़ीस ४२,७००/ रूपये मात्र प्रति सेमेस्टर रखी गयी है.

३. सभी कोर्स आन लाईन करवाये जायेंगे. परंतु प्रत्येक सेमेस्टर की परीक्षा देने १० दिन के लिये युनिवर्सिटी कैंप्स मे ही आना पडेगा. प्रत्येक परीक्षार्थी को रेल का A.C. फ़र्स्ट क्लास का दोनों तरफ़ का किराया युनिवर्सिटी की तरफ़ से दिया जायेगा, बेडरूम ट्विन शेयरिंग करना होगा.

४. बुढऊ और खूसट ब्लागर अपनी दवाईयों के साथ साथ डाक्टर से स्वस्थता का प्रमाण पत्र अवश्य लाये. कोई अर्दली या अटेंडेंट कैंप्स मे अलाऊ नही किया जायेगा. ५ मील की नित्य दौड लगाना अनिवार्य होगा.

५. युनिवर्सिटी के नियम और कानून कायदे सब पर बंधन कारक रहेंगे.

६. युनिवर्सिटी प्रवास के दौरान बेड टी, लंच और डिनर सामुहिक रूप से करना अनिवार्य होगा.

७. किसी भी हालत में मच्छर भगाऊ अगरबत्ती का उपयोग अलाऊ नही होगा क्योंकि ताऊ युनिवर्सिटी जीव हत्या की घनघोर विरोधी है.

८. कोर्स की फ़ीस में सिर्फ़ ताऊ के खेमे वालों को या डीन लोगों के खेमेबाजों को ४० % की विशेष रियायत दी जायेगी.

९. अन्य खेमे के ब्लागर भी इन कोर्सेस में सादर आमंत्रित हैं. अगर उन्हें फ़ीस में छूट चाहिये तो वो अपना खेमा बदलकर छूट प्राप्त कर सकते हैं.

१०. एक बार "ताऊ युनिवर्सिटी आफ़ ब्लागिंग" से कोर्स करने के बाद कोई भी ब्लागर अपना खेमा नही बदल सकेगा. अगर खेमा बदलना ही होगा तो कोर्स में दी गई छूट का दस गुना दंड ब्याज वसूल किया जायेगा.

११. किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में ताऊ का निर्णय ही सर्वमान्य और अंतिम होगा.

१२. सभी कोर्से की विस्तृत जानकारी के लिये रूपये २६५०/ भेजकर नियमावली और फ़ार्म बुलवाये.

१३. सभी कोर्सेस में सीटे बहुत ही सीमित हैं अत: तुरंत लपक लें वर्ना बाद में पछताना पड सकता है.

१४. सीटे फ़ुल होते ही रजिस्ट्रेशन बंद कर दिये जायेंगे.

नोट : "ताऊ युनिवर्सिटी आफ़ ब्लागिंग" से डबल पी.एच.डी. भी करवाई जाती है. जिसके लिये अपनी आर्थिक, मानसिक और शारीरिक स्थिति की रिपोर्ट सलंग्न करें उसके उपरांत ही मैनेजमैंट कमेटी आपके दाखिले पर कोई निर्णय ले सकेगी.

ताऊ ब्लागिंग विश्व विद्यालय की ओपनिंग पर विशेष बम्पर ऑफर:

-पी एच डी के लिए उपलब्ध विषय मय शोध पत्र के बेचे जा रहे हैं:

’साधुवाद टिप्प्णीकाल का उदय’
विक्रेता: समीर लाल


’नारी सशक्तिकरण: विरोध के स्वर एवं ताल’
विक्रेता: मनोनीत होना बाकी


’दलित विमर्श: एक नया ब्लॉगिया दृष्टिकोण’
विक्रेता: सेटिंग लगभग फाईनल हो गई है, अब जोर न लगायें.

-विश्व विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं का ब्यौरा:

-ब्लॉगर मिलन समारोह के लिए बड़े बड़े हाल सस्ते किराये पर उपलब्ध हैं. चाय पानी का खर्चा अलग से लिया जायेगा. चाय के गरम होने की हमारी कोई गारंटी नहीं है. रसीद आधे पैसे की दी जायेगी बाकी साथ में कैश लायें.

-विशेष प्रलोभन: हमारे युनिवर्सिटी क्षेत्र में मच्छर नहीं हैं.


राशि लग्नानुसार शनि की लघु कल्याणी अढैया और साढे साती विचार : आसमानी बाबा

कुछ भक्तजनों द्वारा आसमान में हमको अनगिनत संदेश भेजे गये. और बताया गया कि आजकल ब्लागाव्रत मे घोर अव्यस्था फ़ैली हुई है. एक अखण्ड ब्लागाव्रत की अवधारणा को कुछ तुच्छ मानसिकता वाले स्वयं भू क्षत्रपों ने खंडित कर दिया है. फ़लस्वरूप छोटे छोटे मोहल्ले जैसे ग्रूप बन गये हैं. आज तक एक क्षत्रप को छोडकर कोई भी सौ गांवो (टिप्पणियों) से ज्यादा का जमींदार नही बन पाया . बाकी सब दस बीस ज्यादा से ज्यादा पच्चीस गांव के छोटे मोटे जमींदार ही रह गये हैं. एवम अन्य सब दो पांच गांव के लोगों ने भी अपने आपको स्वतंत्र घोषित कर दिया है.

जगत कल्याणकारी सिद्ध ताऊ आसमानी बाबा


हमने तो कभी का यह धरा धाम छोड कर आसमान में रहने का फ़ैसला कर लिया था पर आप सबको इस हाल में देखकर वापस पृथ्वी पर प्रकटे हैं, ज्योतिष का परम ज्ञान देने के लिये. आज उपरोक्त स्थितियों के मद्देनजर कुछ चालू टाईप के लोग अपना साम्राज्य बढाने के लिये उल्टी सीधी सलाह देकर बहुत नाजायज फ़ायदा उठा रहे हैं और ब्लागाव्रत में यह जो क्लेश और वैमनस्य का राज्य भी सब उन्हीं की कृपा का फ़ल है. अत: आप सबसे निवेदन है कि आप उनके जाल में ना फ़से और हमारी ज्योतिषिय सेवाओं से लाभ उठायें.

भक्तजनों, अब हम आप सब पर विशेष कृपा करके वापस आगये हैं आप चिंता नही करें. मैं सबसे पहले आपको स्वयं आपकी कुंडली देखना सिखाऊंगा और फ़िर असली ज्योतिषिय गूढ ज्ञान प्रदान करूंगा, जिससे आप इन नकली मठाधीशों से बच सकें . आपको सबसे पहले आपका लग्न/राशि देखना आना चाहिये. आज हम आपको बताऊंगा कि आप अपने लग्न/राशि को जानकर यह तय कर लें कि आपका कौन सा समय खराब है? कब आपको सम्मेलन में बुलाया जायेगा? कब नही बुलवाया जायेगा? कब आपको ब्लागाव्रत में विजयश्री मिलेगी? हमारा दावा है कि आप इस सलाह के अनुसार कार्य करेंगे तो आप हमेशा सफ़ल रहेंगे और फ़िर आपको कुछ स्पेशल हवन पूजन की आवश्यकता पडेगी तब तो हम हैं ही.

ईश्वर ने आपको पृथ्वी पर भेजते समय ही आपके प्रारब्ध के अनुसार तय कर दिया है कि आपके ऊपर ईश्वर कितना विश्वास करेगा? कितने दिन बाद आपसे ईश्वर हिसाब मांगेगा? और यह सब जन्मकुंडली में लिख दिया गया है. और साढे साती के माध्यम से यह कर्मफ़लों का हिसाब करता है. इसे कोई साधारण ज्योतिषि नही देख सकता यह तो बस हम जैसे पहुंचे हुये दिव्य चक्षु प्राप्त ज्ञानी ताऊ आसमानी बाबा ही यह सब जान सकते हैं. पर हम आज अति प्रसन्न हैं तो आपको बता देते हैं. आप सब अपना लग्न जान कर यहां आपका अच्छा बुरा समय जान लें और उसी अनूरूप आचरण करें, खराब समय में किसी से ना उलझे और अच्छे समय में जिसकी ऐसी तैसी करनी हो उसकी कर दें. ईश्वर साढे साती के रूप मे आपके कर्मों का हिसाब लग्नानुसार मांगता है. और आपके कर्मों का त्वरित फ़ैसला करता है.

तो आईये अब सबसे पहले मेष और वृष लग्न के जातको के बारे में बात करते हैं कि उनको साढे साती किस प्रकार लगती है?

मेष और वृष लग्न (चू,चे,चो,ला,ली,लू,ले,लो,अ,ई. 21 मार्च से 20 अप्रैल तक मेष एवम इ उ ए ओ वा वी वू वे वो 21 अप्रैल से 21 मई वृष) के जातक बडे ही विश्वास योग्य होते हैं. ईश्वर भी इन पर काफ़ी भरोसा करता है और जल्दी से इनकी बुराईयों का दंड नही देता. इनको सबसे पहला दंड दस साल में मिलता है. अत: इसके बाद खूब बदमाशी करें क्योकि अब अगला हिसाब आपसे सीधे साढे बारह साल बाद ही मांगा जायेगा. एक बार यह हिसाब होने के बाद आपसे अगला हिसाब सीधे साढे बाईस साल बाद मांगा जायेगा अत: इस पीरियड में आपको जो भी मनमर्जी करनी हो कर लिजिये. चाहे जिसकी खिल्ली उडानी हो, मजाक करना हो, अनामी बेनामी करनी हो...सब कुछ कर सकते हैं. लेकिन सावधान.... ईश्वर जब आपकी मौज का हिसाब मांगना शुरू करता है तो आपकी रक्षा कोई ताऊ भी नही कर सकता. अगर किसी गुप्त एजेंडा के तहत किसी की ऐसी तैसी करने का मंसूबा हो तो विशेष परामर्श के लिये हमसे संपर्क करें.

मिथुन लग्न (का की कू घ ङ छ के को हा 22 मई से 21 जून) के जातक जरा नाजुक स्वभाव के होते हैं. कोमल हृदय के होते हैं अत: ईश्वर इनसे पहला हिसाब चार साल के बाद मांगता है, फ़िर ५ साल बाद और फ़ायनल हिसाब ८ साल में करता है. अत: इनको सलाह दी जाती है कि इन सालों के हिसाब से ही अपना दूसरों को निपटाऊ कार्यक्रम चलायें, ये भी चाहें तो विशेष परामर्श के लिये संपर्क कर के अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं और किसी की भी ऐसी तैसी कर सकते हैं.


कर्क लग्न (ही हू हे हो डा डी डू डे डो 22 जून से 23 जुलाई ) के जातक बडे ही चंचल स्वभाव के होते हैं. इन पर ईश्वर ज्यादा भरोसा नही करता. ये जन्मजात नेतागिरी के गुणों से ओतप्रोत होते हैं अत: ईश्वर इनसे पहला हिसाब छ माह में मांगता है, दूसरा हिसाब साढे सात महिनों में और फ़ायनल हिसाब सवा साल मे मांगता है. और आजन्म ये इसी चक्र के अनुसार अपना कर्मफ़ल भोगते रहते हैं. अत: देख सुनकर उत्पात करें, आपको हमारी ज्योतिषिय सेवाओं की विशेष आवश्यकता है अत: तुरंत संपर्क करें. बिना सलाह किसी से ना उलझें.

सिंह लग्न (मा मी मू मे मो टा टी टू टे 24 जुलाई से 23 अगस्त) के जातक जरा हठीले और ठस पृकृति के होते हैं. नाक ऊठा कर जिस तरफ़ चल देते हैं उधर चल देते हैं बिना विचारे उत्पात कर बैठते हैं और बाद में भागे फ़िरते हैं. अत: इनका भी साढे साती का फ़ल कर्क लग्नानुसार ही मिलता है. आपको भी हमसे विशेष सलाह और तांत्रिक अनुष्ठान करवाने की सलाह दी जाती है. ऐसा नही करने पर आप संकट मे पडकर अपनी इज्जत और अर्थ हानि भुगतने को तैयार रहें.

कन्या लग्न (टो पा पी पू ष ण ठ पे पो 24 अगस्त से 23 सितम्बर) के जातक जरा शर्मीले होते हैं, धर्मकर्म में विश्वास रखते हैं, पर कभी कभी धर्म का आसरा छोडकर गलत संगति कर बैठते हैं और बडा कष्ट उठाते हैं. अक्सर बहकावे में आने की इनकी प्रूवृति के कारण ही ईश्वर इनको ज्यादा छूट नही देता और पहला हिसाब सवा दो महिनें मे, दूसरा हिसाब तीन माह मे और फ़ायनल हिसाब हर पांच माह में लेता है. अत: विशेष सतर्कता बरतें और हमारी सुपर स्पेशल सेवाओं का लाभ उठाये जो आप को ध्यान में रखकर ही यह पैकेज तैयार किया गया हैं.

तुला लग्न ( रा री रू रे रो ता ती तू ते 24 सितम्बर से 23 अक्टूबर) के जातक यूं तो देखने में धीर गभीर लगते हैं पर ईश्वर इन पर ज्यादा विश्वास नही करता. इनको हर महिने अपने कर्मों का फ़ल साढे साती द्वारा भोगना पडता है. तुला लग्न के जातको को साढे साती का फ़ल किसी दस नंबरी की चौकसी की तरह मिलता है. इनको महिने मे हर नवें दिन फ़िर १७ वें दिन और फ़िर २८ वें दिन हिसाब देना पडता है. ये साढे साती की बहुत ही कडी निगरानी में रहते हैं. ईश्वर इन पर बिल्कुल भी भरोसा नही करता. अत: निहायत सोच समझकर किसी कार्य को अंजाम देवें और हमारे डबल इफ़ेक्ट सुपर पावर पैकेज का लाभ उठायें. ग्यारंटेड सफ़लता मिलेगी.

शेष लग्नों/राशियों का फ़ल अगले अंक में.

हमारे यहां सम्मेलन में आमंत्रण पाने के लिये विशेष काला जादू तांत्रिक अनुष्ठान उचित मूल्य पर कराये जाते है.

एक बार अवश्य आजमा कर देखें. शौकिया लोग भी आजमा सकते हैं.


(क्रमश:)

महाराज ताऊ धृतराष्ट्र द्वारा गधा सम्मेलन 2010 आहूत

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र और ताई महारानी गांधारी ब्लागपुत्रों/पुत्रियों के झगडे से बहुत क्षुब्ध हो उठे थे. और उदास रहने लगे थे.

एक दिन महाराज ताऊ ने पूछा - हे रामप्यारे, ये "नीरो ही क्यों बाँसुरी बजाता है...?" हम क्यों नही बजा सकते? आखिर हमारा कसूर क्या है? द्वापर मे कृष्ण ने अकेले ही सारी बांसुरी बजा डाली और अब ये रोम को जलवाकर नीरो अकेले बांसुरी बजा रहा है? हे रामप्यारे, जरा तुम्हारी दिव्य दृष्टि से देखो कहीं ये नीरो के रूप में कृष्ण ही तो बांसुरी नही बजा रहा है?

रामप्यारे बोला - हे ताऊओं के ताऊ, हे श्रेष्ठ ब्लागार्य, आप मन छोटा ना करें...महाराज श्री आप अपने हिस्से की संपूर्ण बांसुरी द्वापर में बजा चुके हैं.

ताऊ महाराज - हे रामप्यारे, तुम हमारे जले पर नमक छिडक रहे हो? अरे हमने कब और कौन सी बांसुरी बजाई? किसकी बांसुरी बजाई? हमने तो देखी तक नही बांसुरी कभी?

रामप्यारे - महाराज की जय हो. हे ताऊ श्रेष्ठ, आपने द्वापर में पूरे हस्तिनापुर की बांसुरी तो क्या पुंगी बजवा दी थी. अगर पांच गांव पांडवों को दे दिये होते तो हस्तिनापुर की इतनी बडी बांसुरी नही बजती. आप तो अब आराम से बैठकर नीरो की बांसुरी सुनिये आपके बांसुरी बजाने के दिन द्वापर मे ही खत्म होगये.

रामप्यारे के ऐसे बोल वचन सुनकर महाराज ताऊ श्री अति खिन्न हो गये. ऐसे में रामप्यारे के रूप मे संजय को बहुत चिंता हुई. मन बहलाव के लिये वो उन्हें लेकर मालवा के पठार पर बने पहाडी सैरगाह पर चला गया. वहां की ताजी वायु के सेवन से ताऊ महाराज और ताई महारानी में नवजीवन का संचार होगया. काफ़ी समय वहां बिताने के बाद रामप्यारे ने उनसे अब मुख्य महल में लौट चलने के लिये निवेदन किया क्योंकि अब राजकाज भी देखना जरूरी था.

ताऊ महाराज और ताई महारानी सैरगाह से वापसी में विश्राम करते हुये


रामप्यारे की पूंछ पकडकर वो सैरगाह की ऊंचाईयों से उतरने लगे. बुढापे की वजह से बीच रास्ते मे थकान का अनुभव हुआ तो महाराज और महारानी वहीं एक मुंडेर पर बैठ कर विश्राम करने लगे. रामप्यारे भी वहीं खडा हो गया.

सहज भाव से ताऊ महाराज ने पूछा : हे रामप्यारे, ये तो बताओ कि हमारे ब्लागपुत्रों और पुत्रियों के क्या हाल चाल हैं? सब कुशल तो है ना?

रामप्यारे : हे ताऊश्रेष्ठ महाराज, अब ऊपर ऊपर तो शांति दिखाई देने लगी है पर मुझे कुछ ऐसा आभास हो रहा है कि अंदर किंचित अग्नि सुलग रही है. कभी भी फ़िर विस्फ़ोट हो सकता है.

ऐसा सुनकर महारानी ताई ने किंचित चिंतित स्वर में पूछा - हे रामप्यारे, आखिर ये सब इस तरह लड झगड क्यों रहे हैं? कहीं ये काम उस स्वघोषित ब्लागाचार्य का तो नही है जो इस तरह लडाई झगडे करवा कर हमेशा अपना ऊल्लु सीधा करने की फ़िराक में ही रहता है?

रामप्यारे : हे ताईश्रेष्ठ महारानी, अब मैं आपको क्या कहूं? आप अपनी दिव्य आंखों से तो सब कुछ देख ही लेती हैं. आप क्यों नाहक मेरे मुंह से कहलवाना चाहती है? बात वही है जो आप समझ रही हैं.

रामप्यारे का ऐसा उत्तर सुनकर ताऊ महाराज धृतराष्ट्र और महारानी ताई गांधारी को बडा कष्ट पहूंचा, फ़िर उदासी सी छा गई. उदास माहोल भांपकर रामप्यारे ने महाराज और महारानी का ध्यान बंटाने के लिये बात का रूख पलटते हुये कहा - हे ताऊ शिरोमणी महाराज, उन बातों को अब आप वक्त के फ़ैसले पर छोड दिजिये. उनका फ़ैसला तो अब समय ही करेगा. आप तो जो आपके करने योग्य कार्य हैं उन पर ध्यान दिजिये.......

रामप्यारे की बात बीच में काटते हुये महाराज ताऊ ने किंचित तल्ख होकर पूछा - हे गर्दभ शिरोमणी रामप्यारे...तुम हम पर ये लांछन क्यों लगा रहे हो कि हम कार्यच्युत हो गये हैं? लगता है तुम पर भी कलि काल का किंचित प्रभाव पडने लगा है?

रामप्यारे - महाराज ताऊओं के ताऊ की जय हो, महाराज आप मेरी बात को अन्यथा ले रहे हैं. मैं सपने में भी आपका अहित नही सोच सकता. मैं तो आपको सिर्फ़ स्मरण करवा रहा था कि जैसे हमने पिछले साल गधा सम्मेलन करवाया था उसी तरह इस साल भी गधा सम्मेलन करवाने का समय आ पहुंचा है. उसी की तैयारियों के लिये आपसे निर्देश लेने थे. आप आदेश करें तो अगले माह शुभ मुहुर्त निकल रहा है उसी में ये आयोजन करवा लिया जाये. पिछली साल के सम्मेलन मे जो गुलाब जामुन गधों को हमने परोसे थे उसका स्वाद उन्हें अभी तक याद है और इस साल भी वो बेकरारी से गुलाबजामुन खाने का इंतजार कर रहे हैं. और जो जलेबियां खत्म हो गई थी वो भी उन्हें याद है.

पिछले साल के गधा सम्मेलन मे गधे गुलाब जामुन और जलेबी खाते हुये


ताऊ महाराज - ओह रामप्यारे, क्षमा करना, मैं तुम पर ही संदेह करने लगा था, किंचित कलयुग का प्रभाव मुझपर आगया है. इस साल के गधा सम्मेलन का अगले महिने का मुहुर्त निकलवा कर चारों दिशाओं में निमंत्रण भेज दो. और सबको आग्रहपूर्वक बुलवाओ. और इस सम्मेलन में गुलाब जामुन नित्य परोसने का इंतजाम करवाओ. किसी तरह की कमी नही रहनी चाहिये. खजाने के मुंह खोल दिये जायें इस सम्मेलन के लिये. ये हमारा आदेश है.

रामप्यारे - जी ताऊ शिरोमणी, आपने मुझपर यह जिम्मेदारी डालकर जो विश्वास मुझमे व्यक्त किया है मैं उस पर खरा उतरूंगा. मैं आज ही ब्लागपंडित से मुहुर्त निकलवाकर चारों दिशाओं में निमंत्रण भिजवा देता हूं. अब हमे महल को लौट चलना चाहिये महाराज....गधा सम्मेलन में समय काफ़ी कम रह गया है और निमंत्रण पत्र और सम्मेलन का एजेंडा भी तैयार करना है....

महाराज और महारानी ने रामप्यारे की पूंछ पकडी और महल की तरफ़ रवाना हो गये. महल पहूंचकर ताऊ महाराज और ताई महारानी अपने कक्ष में विश्राम करने चले गये. रामप्यारे वहां से शीघ्रता पूर्वक ब्लाग पंडित के निवास की तरफ़ दुल्लतियां झाडते हुये दौड चला ...आखिर आज ही ब्लागपंडित से मुहुर्त और गधा सम्मेलन का एजेंडा जो तय करवाना था.

(क्रमश:)

चेतावनी : इस पोस्ट को कृपया ब्लागर गण ना पढें.

आदरणीय ब्लागर गणों, आज मैं आप सभी को यहीं से चेता देना चाहता हूं कि प्लिज...प्लिज...आप यह पोस्ट यहां से आगे मत पढिये. तो आप पूछेंगे "प्यारे जी" जब आपने ब्लाग पोस्ट लिखी है तो हम क्यूं नही पढेंगे? तो मैं आपको स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह पोस्ट ब्लागर्स के परिजनों और शुभचिंतकों की सेवा के लिये लिखी गई है. अत: अगर आप ब्लागर हैं तो यहीं से उल्टे पांव लौट जाईये और अगर आपका कोई परिजन या मित्र ब्लागरत्व प्राप्ति की और अग्रसर है तो आप आगे पढिये.

आप जानते हैं कि आजकल तंबाकू, शराब के नशे छुडवाने के लिये कितने प्रकार के लुभावने विज्ञापन छपते हैं कि बिना बताये चुपचाप नशा छुडवाईये. और आजकल तो उडनतश्तरी से सुना है कि सिगरेट छुडवाने के लिये बेलन रूपी मशीन भी आगई है. क्या किया जा सकता है? जो बेचारा तकलीफ़ में है वो तो अवश्य खरीदेगा. और बेलन रूपी मशीन खरीदने की क्या आवश्यकता है? वो तो हर भारतीय घर मे मौजूद है ही. बस मशीन चलाने वाले आपरेटर की दया पर निर्भर है कि वो कब चलायेगी?

पर दोस्तो मैं मजाक नही कर रहा हूं. क्या आप जानते हैं कि आजकल असली नशा कौन सा है? जिससे हर परिजन त्रस्त हो चुका है? जी हां आप ठीक समझे हैं...आजकल सबसे खतरनाक नशा है ब्लागिंग का. और आज तक इससे मुक्ति दिलवाने की कोई दवाई गोली, केप्सूल या मशीन इजाद नही हुई है. पर अब आप चिंता मत किजिये. ताऊ प्रोडक्ट्स ने अनेक दिनों की अथक मेहनत और खोज द्वारा ब्लागिंग नशे से मुक्त करने के लिये शर्तिया और अचूक नुस्खें ढूंढ लिये हैं. अब आप इस खतरनाक नशे से बिना बताये आपके ब्लागिंग करने वाले परिजन की ब्लागिंग की लत छुडवा सकते हैं.



इस के लिये हमने अलग अलग पेकैज तैयार किये हैं. यानि नशा जिस स्तर का है उसी के हिसाब से कोर्स दिया जायेगा. यह कोर्स टेस्टेड हैं जिनका परीक्षण ताऊ पर किया गया है. अत: आप बेफ़िक्र होजायें और निम्न स्थितियों वाले ब्लागिंग के नशे की लत छुडवाने के लिये तुरंत संपर्क करें.

आपका परिजन निम्न में से किसी भी श्रेणी की लत का आदि हो सकता है. हमने ब्लागिंग के नशे के संपूर्ण लक्षण लिख दिये हैं और कोर्स लेने का तरीका और कीमत भी सामने ही लिख दी है. तुरंत संपूर्ण एडवांस के साथ आर्डर भेजे. VPP से कोई माल नही भेजा जायेगा.

पहली स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस हालत में ब्लागर को सपने में भी ब्लाग पोस्ट दिखाई देने लगती हैं. और वो खुद इसी बारे मे सोचता रहता है कि ब्लाग पोस्ट कैसे लिखी जाये?

दूसरी स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस स्थिति का लतियल ब्लागर दिन रात पोस्ट लिखता और मिटाता रहता है. किसी तरह संतुष्ट होकर एक दो पोस्ट ठेलने में कामयाब हो ही जाता है. पुरानी मेगजिन्स और अखबारों की कतरनें बैग मे भरे रहता है कि उनसे ही पोस्ट निकल आयेगी.

तीसरी स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस तरह का ब्लागर दिन रात टिप्पणीयों का इंतजार करता है और इसी की उम्मीद मे इधर उधर टिप्पणीयां फ़ेंका करता है. कुछ कुछ खोया खोया सा रहने लगता है और घर वाले समझते हैं कि इस बेचारे पर आफ़िस के काम का बोझ ज्यादा है जो ये घर से लेपटोप पर आफ़िस का काम करता रहता है जबकि वास्तव में वो ब्लागिंग मे उलझा रहता है.

उपरोक्त पहली, दूसरी और तीसरी हालत के लतियलों की लत छुडवाने हेतु दवा का कोर्स : ब्लागगुटिका वटी की दो दो गोली सुबह शाम देवें. सोते समय ब्लागनिषेध पाऊडर की धूणी देवें. दो कोर्स में पूरा फ़ायदा मिलेगा.

कीमत : रुपया ३७५०/ मात्र प्रति कोर्स

चौथी स्थिति का लतियल :

लक्षण : चौथी स्थिति तक पहुंचते पहुंचते सुबह उठते ही जैसे तैसे आदमी नित्य कर्म से निपट कर कंप्यूटर की तरफ़ लपकने लगता है. सीधे ब्लाग खोलकर अपनी टिप्पणी बाक्स चेक करने बैठ जाता है. जाहिर है कि टिप्पणीयां नही मिलने पर झल्लाता है और सारी झल्लाहट घरवालों पर निकालता है और बिना नाश्ता किये ही आफ़िस के लिये रवाना होजाता है .

पांचवी स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस हालत मे आदमी ज्यादा से ज्यादा टिप्पणीय़ां करता है और बदले में टिप्पणीय़ां मांगने लगता है. तबियत गिरी गिरी सी रहने लगती है. सिवाय ब्लागिंग के कुछ याद नही रहता. सुबह का घूमना फ़िरना छूट जाता है. उठते बैठते सिर्फ़ ब्लागिंग ही याद रहती है.

छठी स्थिति का लतियल :

लक्षण : छठी स्थिति में आदमी किसी तरह पोस्ट ठेलकर बाकी सभी ब्लागर्स को इमेल भेजकर टिप्पणीयां मांगना शुरु कर देता है. किसी के मना करने पर भी नही मानता. और अपने आपको साहित्यकार समझने लगता है. चोबीसो घंटे कैमरा जेब मे लिये घूमता है.

उपरोक्त चौथी, पांचवीं और छठी हालत के लतियलों की लत छुडवाने हेतु दवा का कोर्स : इन स्थितियों वाले ब्लागरत्व की और अग्रसर लोगो कों ब्लागबेलन प्रहार वटी की तीन तीन गोली की खुराक प्रत्येक छह छह घंटे से नियमित देवे. रात्रि में सोते समय ब्लागमोह भंग चूर्ण की एक पुडिया करेले के रस में घोल कर नियमित पिलायें. तीन कोर्स में फ़ायदा नही मिले तो दो कोर्स और मंगवा कर देवें. अवश्य फ़ायदा मिलेग

कीमत : रुपया ७२५०/ प्रति कोर्स

सातवीं स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस स्थिति मे आदमी नींद में बडबडाने लगता है तब जाकर घरवालों पर यह राज खुलता है कि ये लेपटोप पर आफ़िस का काम नही बल्कि ब्लागिंग ब्लागिंग खेल रहा होता है. अब घरवालों से झगडे रोज की बात हो जाती है. और यह स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है. क्योंकि आदमी समाज और मित्रों से तो पहले ही कट चुका होता है अब घरवाले भी उसको जलीकटी सुनाने मे पीछे नही रहते. अगर आपका परिजन इस स्थिति तक पहुंच चुका है तो आपको सलाह दी जाती है कि तुरंत ताऊ प्रोडक्ट्स का शाही कोर्स लेकर इलाज करवायें अन्यथा स्थितियां और भी बिगड कर काबू से बाहर हो सकती हैं.

आठवीं स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस स्थिति का ब्लागर अपने आपको चेंपियन समझने लगता है. जैसे कुछ अपने आपको टेक्निकल ब्लागर समझने लगते हैं और दूसरों को ज्ञान बांटने लगते हैं. चाहे खुद को कुछ नही आता हो पर दूसरों को ज्ञान जरूर देता है. और खुद को परिजनों के बीच भी सेलेब्रिटी समझने लगता है.

नवीं स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस स्थिति का ब्लागर अपने आपको महान चर्चाकार समझने लगता है और अपनी मंडली को बढाता जाता है. और इसी नवीं स्थिति के ब्लागरों में यह पाया गया है कि वो दिन रात टोप चालीस में पहूंचने की कवायद में लगा रहता है. यानि बहुत ही खतरनाक स्थिति को प्राप्त हो चुका होता है.

उपरोक्त सातवीं, आठवीं और नवीं हालत के लतियलों की लत छुडवाने हेतु दवा का शाही कोर्स : यह बहुत ही गंभीर स्थितियां हैं,. इनसे छुटकारा सिर्फ़ शाही कोर्स से ही प्राप्त हो सकता है. शाही जूतमपैजार वटी की चार चार गोलियां दिन में चार बार देवें. ब्लाग निचोडरस की दो दो चम्मच सुबह शाम देवें. बेनामी चूर्ण की दो पुडिया रात सोते समय देवें. इस शाही कोर्स की चार खुराकों में संपुर्ण फ़ायदा मिलेगा.

कीमत : रुपया ११००१/ मात्र प्रति कोर्स

ऊपर वर्णित नौ प्रकार के लतियलों के अलावा दसवीं ग्यारहवीं और बारहवीं स्थितियों के लतियल अक्सर बेकाबू पाये गये हैं जिनके लक्षण और कोर्स नीचे बताये गये हैं. इन तीनों तरह के लतियलों को सुपर स्पेशल शाही दवा का कोर्स दिया जायेगा और जरुरत पडने पर ताऊ अस्पताल मे एडमिट भी होना पड सकता है.

दसवीं स्थिति का लतियल : इस स्तर तक लतियल होने पर अतिशय मौज लेने की आदत पड जाती है. एक ही चीज को बार बार दोहराने के खतरनाक लक्षण स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं. ऐसा लतियल आदमी अपने मन की करने लगता है. ब्लाग पर पहेली पूछने का चस्का लग जाता है. मौज लेने के चक्कर मे खुद को ज्ञानी समझने लगता है. जब देखो ब्लागर सम्मेलन करवाने के लिये उतावला रहता है. कुल मिलाकर दसवीं स्थिति दस नंबरीकी तरह चरितार्थ होने लगती है.

लत छुडवाने हेतु दवा का कोर्स : यह बहुत ही खतरनाक स्थिती को प्राप्त हुआ ब्लागर होता है.
वैसे तो इसका इलाज स्वयं ब्रह्माजी के पास भी नही है पर हमने निरंतर खोज और अनुसंधान द्वारा इसका उपाय खोज लिया है. इस श्रेणी के लतियलों को सुपर स्पेशल शाही दवा के सात कोर्स लेने पडेंगे.

पूरा इलाज इस प्रकार चलेगा : शाही जूतमपैजार वटी की चार चार गोलॊ सुबह शाम, शाही बेनामी गुटिकाकी तीन तीन गोलॊ दिन में तीन में बार, महा ब्लाग मोह भंग वटी की चार चार गोली सुबह शाम.

हर कोर्स में तीसरे दिन एक इलेक्ट्रिक शाक दिया जायेगा.

कीमत : रुपया ३१०००/ प्रति कोर्स एवम इलेक्ट्रिक शाक मुफ़्त दिया जायेगा. अगर एक सप्ताह में दूसरा शाक देना पडा तो उसका नियमानुसार चार्ज लिया जायेगा.

ग्यारहवीं स्थिति का लतियल : ऐसे लतियलों के हाथ की अंगुलियों में झुनझनी और कंपकपी आना शुरु हो जाती है. पीठ मे दर्द रहना शुरु हो जाता है. वजन तेज गति से बढता है. दिल दिमाग काम नही करता. नींद कम हो जाती है. जब भी नींद टुटती है तब ब्लाग खोलकर बैठ जाते हैं. आफ़िस में भी ब्लागिंग करने की लत लग जाती है. पूछने पर मना करते हैं यानि झूंठ बोलने की बीमारी भी घेर लेती है. ब्लागजगत और घर में भी पंगे लेने की आदत पड जाती है.

लत छुडवाने हेतु दवा का कोर्स : इन्हें सुपर स्पेशल शाही दवा के ग्यारह कोर्स लेने की सलाह दी जाती है. अगर फ़ायदा नही होतो एक बार फ़िर से रिपीट करें. पूरा इलाज इस प्रकार चलेगा :

ब्लाग सटक वटी की असली तीन तीन गोलियां - दिन में चार बार, ब्लाग मोह भंग चूर्ण रात को सोते समय. ऐसे लोगों पर दवाईयों का असर ज्यादा नही होता. इन्हें ग्यारह सप्ताह तक एक दिन छोडकर एक दिन इलेक्ट्रिक शाकदिये जायेंगे. इनको कंप्यूटर पर बैठने का मौका नही दिया जाना चाहिये. घर गृहस्थी के कामों में उल्झाकर रखें. खाली दिमाग शैतान का घर समझकर इनसे कडाई से काम लें और घर के कामों में मशगूल रखें जिससे इनको ब्लागिंग की तरफ़ झांकने का मौका ही नही मिले. अगर ज्यादा ही चिडचिडाहट दिखाये तो जूतमपैजार वटी और बेलनगुटिका वटी की चार चार गोलियों का SOS सेवन करवाये, तुरंत काबू में आजायेंगे.

कीमत : रुपया ३८५००/ मात्र प्रति कोर्स ( इनको इलेक्ट्रिक शाक आधे फ़्री दिये जायेंगे)

बारहवीं स्थिति का लतियल : इस स्थिति का ब्लागर चंद्रयान की तरह समस्त कक्षाओं को पार कर चुका होता है. इनका इलाज अत्यंत ही दुष्कर कार्य है. ऐसे लोग दिन में अंधाधुंध टिप्पणीयां करने के शौकीन होते हैं. इन्हें खुद की पोस्ट पर भी सौ से कम टिप्पणीयां आयें तो बेचेनी रहती है. ये चाहे जमीन पर चले, रेल मे चले या हवाईजहाज में चले, इनको ब्लागिंग का भूत चौबीसों घंटे सवार रहता है. लेखन की हर विधा में दखल रखते हैं. वजन अनियंत्रित हो जाता है. मधुमेह की शिकायत घेरने लगती है. पीठ में दर्द होने लगता है.

लत छुडवाने हेतु दवा का कोर्स : इनको २१ डबलराजा शाही कोर्स की खुराक देने की सलाह दी जाती है. पूरा इलाज इस प्रकार चलेगा.

मनशांत गुटिका की तीन तीन गोली दिन में चार बार, ब्लागमोह भंग वटी की ४ - ४ गोली की तीन खुराक,टिप्पणी मोह भंग रस की चार चार चम्मच दिन मे तीन बार, और इलेक्ट्रिक शाक शुरु के दो सप्ताह नित्य प्रति सुबह शाम, अगले दो सप्ताह दिन में सिर्फ़ एक बार, फ़िर एक दिन छोडकर दिया जायेगा. इनको सख्ती से घर गृहस्थी और खासकर रसोई के कामों में उलझाकर रखा जाये. अनियंत्रित होने पर जूतमपैजार वटी और बेलनगुटिका वटी की चार चार गोलियों का SOS सेवन करवाये, तुरंत फ़ायदा होगा.

कीमत : रुपया ५१०००/ मात्र प्रति कोर्स

उपरोक्त कीमत के अलावा डाक खर्च और पैकिंग का चार्ज अलग लगेगा. हमारी कोई ब्रांच नही है. डायरेक्ट हमसे संपर्क करें. हर ब्लाग रोग का शर्तिया इलाज उपलब्ध है. एक बार आजमाकर देखें, बार बार आजमायेंगे. ऊपर लिखे गये लक्षणो को ध्यान से पढे और आपका मरीज जिस केटेगरी का हो उसी केटेगरी की दवा का आर्डर करें.

"बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" की स्थापना

बडे ही दुखित मन से पंडितजी (महेंद्र मिश्र) ने एक पोस्ट फ़ेंक के मारी गुस्से में. और लोगों ने हाथों हाथ लपक ली. उनको मलाल था कि उनके पूज्य दादा जी ने उनको बुढऊ की पदवी से नवाज दिया. पंडितजी ने गुस्से गस्से में पोस्ट दे मारी.

अब देखिये...बडे बुजुर्गों के मुंह से जो निकलता है वो आशीर्वाद ही होता है. मिश्रजी को तो मालूम ही नही कि आजकल बुढऊ शब्द बडा होट hot होगया है. यानि टिप्पणी खींचू होगये हैं आजकल के बुड्ढे भी. इसीलिये ललित शर्मा जी भी आजकल दिन रात बुढ्ढों पर पोस्ट लिखा करते हैं.

फ़िर घूमते घामते हम भी मिश्र जी के दरवाजे पहुंच गये और वहां मिश्रजी की पीडा देखते हुये हम द्रवित होगये. मिश्रजी ने बुढऊ लोगों की इतनी पीडाएं सुनाई कि हमने वहां पर ही तुरंत BBA के गठन की घोषणा कर दी. हम स्वयम भू अध्यक्ष घोषित होगये और महेंद्र मिश्रजी को हमने सेकेरेटरी घोषित कर दिया.

और अब हमने महेंद्र मिश्र जी को मेंबर बनाने का काम सौंप दिया और हम खुद जीवन में पहली बार अध्यक्ष बनने का सुख उठा रहे थे. आज तक तो किसी ने हमको चपरासी भी नही बनाया. और आज हम शान से "BBA" यानि "बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" के आफ़िस में बैठे हुक्का गुडगुडा रहे थे.

BBA के आफ़िस में स्वघोषित अध्यक्ष महोदय हुक्का गुडगुडाते हुये!


थोडी देर बाद मिश्रजी का फ़ोन आया कि ताऊ BBA की स्कीम फ़ेल ही समझो...जबसे तुमने BBA का बोर्ड टांगा है कोई दिखाई ही नही दे रहा है...हमने सोचा कि बुढापे में पंडितजी का शरीर आरामतलबी का आदि होगया सो हमने उनको साथ लिया और निकल पडे सडक पर भरी दोपहर मे बुढ्ढऊ ब्लागर्स ढूंढने.

अध्यक्ष और सेक्रेट्री महोदय बुढ्ढों की तलाश मे भटकते हुये!


दिन भर धूप में सडक पर भटकने के बाद हमको एक भी जालिम बुढ्ढा नही मिला. थक हार कर हम वापस आये और हमने सोचा कि आखिर हमारी स्कीम मे कहां गडबड रह गयी थी? बहुत मनन के पश्चात हमको कमियां समझ में आगयी और हमने तुरंत उनको दूर कर दिया.

पहला तो ये कि आजकल किसी सेलेब्रेटी को ब्रांड अंबेसडर बनाना बहुत जरुरी है अत: हमने तुरंत मिस. समीरा टेढी जी से बात की "बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" की ब्रांड अंबेसडर बनने के लिये. और वो भी इस शर्त पर की वो इसके लिये जब भी मिटिंग होगी यहां पर आयेंगी. और साथ में यह भी कि बुढऊ लोगों को कहीं हार्ट अटेक ना हो जाये तो वो सफ़ेद बालों वाला विग और साडी में रहेंगी यानि भडकाऊ ड्रेस नही पहनेगी.

मिस. समीरा टेढी इस बात पर भडक गई. पर जब हमने उनको समझाया कि यह समाज हित का काम है सो थोडा त्याग भी करना चाहिये और आपको कौन सा रोज रोज आना है? बस मिटींग वाले दिन आना है जिससे मीटिंग मे सारे बुढ्ढे आपके दीदार के बहाने हाजिर हो जायें और हमारे इस BBA के मेंबर बन जायें. बडी मुश्किल से वो राजी हूई, पर आखिर हां भर ही ली.

"बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" की ब्रांड एंबेसडर मिस. समीरा टेढी, बुढऊ के गेट अप में


बस जैसे ही बुढऊ लोगों को मालूम पडा कि BBA की ब्रांड अंबेसडर मिस. समीरा टेढी ने बनना स्वीकार कर लिया वैसे ही लाईन लग गई मेंबर शिप के लिये. जो जवान ब्लागर थे वो भी सफ़ेद विग लगाकर आ गये. बहुत ज्यादा मारामारी होगई. और सारे मेंबरशिप के फ़ार्म खत्म होगये.

मेंबरशिप किस किस को दी गई इसकी और किस का फ़ार्म रिजेक्ट होगया यह अगले सप्ताह बताया जायेगा.

अब आपको "बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" के एजेंडा के बारे मे कुछ बता देते हैं जिससे आप भी BBA की सदस्यता लेकर चैन से ब्लागिंग कर सकें. BBA के उद्देष्य और नियम इस प्रकार हैं.

१.BBA यानि कि "बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" किसी भी तरह के लिंग भेद को नही मानता. यहां ब्लागर्स से मतलब पुरुष और महिला दोनों हैं. और "बुढऊ" शब्द दोनों को अभिव्यक्त करेगा. यानि आप महिला ब्लागर्स को बुढिया नही बोल सकते.

२. बुढऊ ब्लागर की परिभाषा : जिन्हें एक साल से ज्यादा का समय ब्लागिंग करते होगया उनको बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन की सदस्यता की पात्रता तो है पर उनको सदस्यता उनके लेखकीय उत्पात को देखते हुये दी जायेगी . उनकी सदस्यता इस बात पर निर्भर करेगी कि उन्होने कितने बेनामी ब्लाग चलाये? कितने बेनामी कमेंट किये? कृपया आवेदन फ़ार्म में अपनी उपलब्धियों की समस्त जानकारियां देवें

३. ५० साल से ज्यादा उम्र के ब्लागर्स को वाईल्ड कार्ड एंट्री दी जायेगी. यानि उनको हर हालत मे बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन की सदस्यता लेनी अनिवार्य कर दी गई है. उनके लिये योग्यता का कोई पैमाना नही है.

४. कोई अपनी वास्तविक उम्र छिपाने की कोशीश करता पाया गया तो उसे "सरताज-ए-बुढऊ" की पदवी से पहली अप्रेल को नवाजा जायेगा. इसमें किसी भी तरह की रियायत नही दी जायेगी. चाहे महिला बुढऊ ही क्युं ना हो.

५. सभी की उम्र का हमने आयकर विभाग के पेन कार्ड से पता लगा लिया है अत: ज्यादा होशियारी ना करें और चुपचाप सदस्यता के लिये आवेदन करें.


BBA द्वारा आपको क्या फ़ायदा होगा?


१. "बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" इसके सभी सदस्यों को चश्मा, छडी और डेंचर (दांत वाली बत्तीसी) एक बार मुफ़्त और बाद में नाम मात्र के चार्ज पर उपलब्ध करवायेगा.

२. "बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" के सदस्यों के ब्लाग को नियमित अपडेट किया जायेगा, सदस्यों की ब्लाग पोस्ट पर सभी बुढऊ टिप्पणी करेंगे.

३. "बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" के सभी सदस्यों को ताऊ जादूई चिराग नाम मात्र की कीमत पर उपलब्ध करवाये जाने की बात चल रही है. जिससे आपके सभी कार्य जादूई चिराग द्वारा पूरे कर दिये जायेंगे.

४. मोटी चमडी करने हेतु प्रत्येक बुढऊ ब्लागर को भैंस का शुद्ध दूध पिलाने का इंतजाम किया जायेगा.

५. "बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" के सदस्यों के ब्लाग पर अगर मामा मारीच या सुर्पणखां का हमला होता है तो उनसे बचाने के अलावा...सामने वाले के ब्लाग पर इतनी खतरनाक टिप्पणीयां जादूई चिराग से करवाने का करार किया जा रहा है कि मारीच और सुर्पणखां सिट्टी पिट्टी भूल जायेंगे.

६. अगर किसी बुढऊ को गरियाने की इच्छा हो जाये तो उसकी यह इच्छा पूरी करवाने के लिये किराये पर गाली सुनने वाले बुलाये जायेंगे.

७. हर बुढऊ ब्लागर की पोस्ट पर ४३१ हिट और ४१ टिप्पणीयां कम से कम करवाने का प्रबंध किया जायेगा.

८. अगर कोई बुढऊ टंकी पर चढने की इच्छा करेगा तो उसे बाकायदा शान से टंकी पर चढाया जायेगा और सब मिल जुलकर उसको नीचे उतारेंगे. इसके लिये एक २३९ मीटर उंची टंकी का निर्माण किया जायेगा.

९. हर बुढऊ को कुछ पद पाने की इच्छा रहती है तो हर बुढऊ ब्लागर "बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" का उपाध्यक्ष कहलायेगा.

१०. हर बुढऊ को अपनी राय देने का अधिकार होगा भले उसके घर मे उससे कोई राय ना लेता हो.

११. चूंकी "बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" अभी शैशवकाल मे ही है तो इसके नियम कायदे बन रहे हैं. जो अगली मिटींग में घोषित किये जायेंगे. सदस्यता मंजूर करने या ना करने के अधिकार सिर्फ़ अध्यक्ष महोदय और सेक्रेरेट्री महोदय के पास सुरक्षित रहेंगे.