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सैम और बीनू फ़िरंगी की चुनावी तैयारियां

सैम आजकल चुनाव जीतने की रणनीति बनाने मे जुटा हुआ है. बीनू फ़िरंगी उसका चुनाव संचालक है, चुनाव क्षेत्र मे एक पठ्ठे का लंबा चोडा हालनुमा आफ़िस खाली पडा है. वहां चुनाव कार्यालय खोल दिया गया है.

 

कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग का काम शुरु हो चुका है. सबको अपनी २ ड्युटी कैसे निभानी है, इसकी भी तैयारियां चल रही हैं. सभी कार्यकर्ताओं के लिये नाश्ते पानी से लेकर वाहन आदि की व्यवस्थाएं कर दी गई हैं.

 

अभी तो कार्यकर्ता जुटाने की मुहीम इस तरह चल रही है जैसे महाभारत के युद्ध के समय कौरव और पाण्डव अपने २ समर्थन मे राजाओ को जुटा रहे थे. आज के हालात मे तो कार्यकर्ता भी राजा ही हैं चुनाव होने तक.  

 

पहले कार्यकर्ता जो प्रबंधकिय कार्य संभालेंगे और दुसरे वो कार्यकर्ता जो मैदानी जंग को फ़तेह करेंगे.

 

इन मैदानी कार्यकर्ताओं के भरोसे ही सारा दारोमदार चुनाव जीतने हारने का रहता है. एवम उसी अनुरुप इनकी बहुत ही कठोर ट्रेंनिग होती है. इनको मानसिक और शारिरिक रुप से बिल्कुल चुस्त दुरुस्त होना होता है.

 

आज  कार्यकर्ताओं की बहुत ही गुप्त मीटींग चल रही है. मीटींग समाप्ति के बाद सब गपशप मे लगे हैं कि बीनू फ़िरंगी आकर सैम को पूछता है कि यार सैम भाई आपने वो टिकट वाली बात तो बताई ही नही कि आपको ताऊ ने कैसे टिकट दिलवाई?

 

सैम आसपास देखता है. वहां सब उसके विश्वासपात्र ही बैठे हैं. अब वो कहता है, अरे यारों अब तुमसे क्या छुपाना? मैं बता ही देता हूं कि असल बात क्या हुई? अगर ताऊ जैसा शातिर दिमाग साथ मे नही हो तो चुनाव जीतना तो दूर बल्कि  टिकट ही नही मिल सकता.

 

अब हुआ यों कि मेरा टिकट भीतरघातियों ने कटवा दिया और कुजागर सिंह को दिलवा दिया. अब तुम तो जानते ही हो कि कुजागर सिंह टिकट बांटने वाले किद्या कुक्ला जी का खासमखास है. बस फ़िर क्या होना था?  वो तो ताऊ ही था जिसने आखिरी दम तक मेरे लिये फ़ंदा फ़ेंक रखा था.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई असली बात बताओ अब आप तो.

 

सैम - अरे यार बडा मजेदार किस्सा है. तुम सुनोगे तो यकीन भी नही करोगे और इतना हंसोगे कि तुम्हारे पेट मे बल पड जायेंगे.

 

जब मैने ताऊ को आत्महत्या की झूंठी धमकी दे दी तब ताऊ ने प्लान बनाया. किद्या कुक्लाजी हमारे शहर मे दो घंटे के लिये आने वाले थे. पिछले सप्ताह वो आये थे, यह तो तुमको मालूम है ना?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम हमको मालूम है कि किद्या भैया आये थे और उनके कपडे भी कार्यकर्ताओं ने फ़ाड डाले थे. ये खबर तो अखबारों मे भी आ चुकी है. अब आगे की बात बताओ?

 

सैम - अबे साले फ़िरंगी कहीं के. सुन उनके कपडे कार्यकर्ताओं ने नही फ़ाडे थे. उनके कपडे तो ताऊ के बाहुबलियों ने फ़ाडे थे.

 

बीनू फ़िरंगी आश्चर्य से बोला -  अरे नही यार सैम भाई, क्या बात कर रहे हो? किसी को कानो कान भी खबर नही है इस बात की तो? पर ताऊ को क्या जरुरत पड गई थी इतने बडे नेता के कपडे इस तरह फ़डवाने की?

 

सैम - अरे यार पूरी बात सुन. जैसे ही हवाई अड्डे से किद्या कुक्लाजी बाहर निकले और सडक पार लगे मंच पर भाषण देने चढे, वैसे ही ताऊ के आदमियों ने पहले तो किद्या भैया जिंदाबाद के खूब नारे लगाये.

 

इतने नारे सुनकर किद्या भैया खुश होगये. वहीं पर कुजागर सिंह भी खडा था. किद्या भैया समझे कि ये सब कार्यकर्ता कुजागर सिंह के हैं और किद्या भैया का जयकारा जब खूब जोर से लगा तब कुजागर सिंह को भी फ़ोकट की वाहवाही लेने की सूझी. वो भी पहुंच गया किद्या भैया से शाबासी लेने. किद्या कुक्लाजी ने उसकी पीठ थपथपाई इस शानदार स्वागत के लिये. और कहा कि टिकट तो तुम्हारा पक्का होचुका है जाकर तैयारी करो.

 

बीनू फ़िरंगी - फ़िर आगे क्या हुआ?

 

सैम - अरे होना क्या था? ताऊ के पठ्ठे तो इसी क्षण के इन्तजार मे थे कि किद्या भैया ये जान ले कि ये इकठ्ठा हुये कार्यकर्ता कुजागर सिंह के हैं और जैसे ही  जयघोष से लग गया कि ये कार्यकर्ता कुजागर भैया के हैं उन्ही कार्यकर्ताओं मे से दो पांच सात बाहुबलि मंच पर चढ कर झुमा झटकी कर बैठे किद्या भैया से. और अब जयकारा लगा ..कुजागर सिंह ..जिंदाबाद...कुजागर सिंह  ..जिंदाबाद...

 

बस अब क्या था? किद्या कुक्लाजी तो कुजागर सिंह पर निकल लिये इस अपमान के लिये और गुस्सा हो गये. अब वहां से जैसे ही भागने लगे..ताऊ के बाहुबलियों ने किद्या कुक्ला जी के बचे खुचे कपडे भी फ़ाड डाले.. और इस तरह कुजागर सिंह का टिकट कैंसिल होकर मुझे मिला.

 

बीनू फ़िरंगी - यानि कुल मिलाकर कुजागर सिंह को इस बात की सजा मिली कि उसके आदमियों ने किद्या कुक्ला जी के कपडे फ़ाड डाले और ताऊ पर शक भी नही गया.

 

सैम - और क्या? अब किद्या कुक्ला जी के ताऊ खासमखास हो गये हैं.

 

 



इब खूंटे पै पढो :-    

बात किम्मै घणी पुराणी सै. एक बार ताऊ ने एक साहुकार से कुछ पिस्से उधार
ले लिये. पिस्से वापस करण का तो सवाल ही कोनी उठदा. ताऊ के पास थे ही नही
तो लौटाता कहां से?

साहुकार ने पहले तो घणा तगडा ब्याज लगा लगा कै रकम घणी बडी कर दी. और
इब दिन रात का तगादा कर शुरु कर दिया. ताऊ का ऊठना बैठना मुश्किल हो गया.

एक दिन साहुकार आया और कडक तगादा किया और बोला अब तो मुझे कडक
कार्यवाही करनी पडेगी ताऊ तेरे खिलाफ़.

ताऊ बोला -  ओ जी सेठ साहब.  इब इतने दिन निकाल दिये तो इब तो रात भर की
बात रह गी सै. आप तो कल दोपहर म्ह आजाओ और ब्याज सहित अपने पूरे पिस्से
गिन के लेजाना.

साहुकार तो बडा खुश हो गया. और सोचने लगा कि डुबी रकम वापस आ रही है और
वो भी ब्याज के साथ. सो घर जाकर गणेश जी को सवा आठ आने का परसाद का भोग
लगाया और सारे मोहल्ले मे भी बांट  दिया.

इधर दुसरे दिन ताऊ ने एक ढोळ बजाने आला ढोली बुलवा लिया और अपने घर के
बाहर खडा कर दिया और उसको समझा दिया कि जैसे ही सेठ मेरे घर के अंदर
दाखिल हो जाये, तू जोर जोर से ढोळ बजाना शुरु कर देना.

ढोली ने पूछा - वो किस लिये? क्या शादी है आपके छोरे की?

ताऊ बोला - अरे बावली बूच, तेरे को क्या लेना? मुझे सेठ जी का हिसाब करना है
जरा ढोल ढमाके के साथ.

अब जैसे ही साहुकार आया और ताऊ के घर मे घुसा, ढोळ वाले ने जोर जोर से ढोल
बजाना शुरु कर दिया.

उधर ताऊ तो किम्मै घणे छोह (गुस्से) म्ह था ही सो उसने साहुकार को बजाना
शुरु कर दिया. साहुकार चिल्लाने लगा तो ताऊ बोला - इब बाहर कोई सुनने वाला
नही है चाहे जितनी जोर से चिल्ला ले तू.

फ़िर साहुकार बोला - ताऊ तू मन्नै इबकी बार छोइ दे मैं आईंदा तेरे से तगादा नही करुंगा. तेरी मर्जी हो तब दे देना मेरे पिस्से. और गाम म्ह किसी को ये मत बताना कि तूने मेरी पिटाई की थी.

ताऊ बोला - फ़िर तो बैल और गुड. ( well and good). नही बताऊंगा किसी को. 

इस तरह साहुकार कुटपिट कर वहां से चला गया. और गाम में किसी को भी ये पता नही लगा कि साहुकार पिट कर गया है. और इब जब भी ढोल बजने कि आवाज आती उसको ताऊ का हिसाब याद आ जाता. 

कुछ दिन बाद गांव मे जोर जोर से ढोल बजने की आवाज आने लग रही थी.
साहुकार का छोरा उससे बोला - बापू आज तो लगता है कि गाम म्ह कुश्ती का
दंगल होण आल्ला सै. घणे ढोल बाज रे सैं.

साहुकार बोला - अरे मेरी सुसरी के, चुप रह. यो कोई कुश्ती वुश्ती का ढोल नही
बज रहा है. ये तो लगता है कि ताऊ फ़िर किसी साहुकार का हिसाब कर रहा है. 

 

ताऊ के सैम को टिकट मिला.

सैम बहादुर और बीनू फ़िरंगी दोनो बैठे हैं. बीनू फ़िरंगी कुछ नोट्स बना रहा है और सैम किसी विचार मे खोया अखबार देख रहा है. ्सैम अचानक बोल पडता है - ओये फ़िरंगी..देख बे..देख अपने ताऊ ने जो कहा था वो ही हो गया.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई मुझे कल की चुनाव सभा मे आपके लिये भाषण लिखना है. आप मुझे लिखने दो. फ़िर आपको प्रेक्टिस भी करवानी है. पर बोलो अब क्या कह रहे हो?

 

सैम - अरे देख यार. ताऊ कितने दिन पहले से कह रहा था कि ये क्रेडिट कार्डस का भांडा भी फ़ुटेगा एक दिन. देख यहां क्या लिखा है? इसी साल मे क्रेडिट कार्ड्स का रिपेमेंट करने वाले डिफ़ाल्टर दुगुने हुये. और देशी विदेशी तमाम बैंक खुलासे को तैयार नही.

 

बीनू फ़िरंगी - हां यार ताऊ ने कही तो थी. पर ताऊ तो कहता है कि वो बिना दिमाग के काम करता है? तो बिना दिमाग ये कैसे समझ लिया था इतने दिन पहले?

 

सैम - अरे यार तू और मैं ताऊ को क्या समझेंगे? ताऊ जितना बाहर दिखता है उससे डबळ अंदर है. अब तुझे क्या क्या बताऊं?

 

बीनू फ़िरंगी - यार सैम भाई आपकी ये ही आदत तो हमको ठीक नही लगती. आपके साथ हमने आज तक कोई गद्दारी करी क्या? जो आप ऐसी बातें करते हैं? हमें भी बताओ ना. अच्छा चलो आपकी टिकट वाली बात ही बता दो.

 

सैम - अबे कौन सी टिकट वाली?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई  ज्यादा मत बनो. हमको मालूम है कि आपका टिकट तो हाईकमान वाले किद्या कुक्ला जी ने काट दिया था और तुम्हारी जगह कुजागर सिंह जी को टिकट दे दिया गया था. फ़िर अचानक ऐसा क्या हुआ कि तुमको टिकट दे दिया गया?

 

सैम - अरे यार ये सब ताऊ के दिमाग का कमाल है. अगर ताऊ दिमाग नही लगाता तो मुझे इस चुनाव मे टीकट मिलना बडा मुश्किल था. वाकई ताऊ का दिमाग लाख टके का है.

 

बीनू फ़िरंगी - पर यार ताऊ के दिमाग की कीमत अभी पिछले सप्ताह ही १५ लाख बताई थी और अब तू एक लाख बता रहा है?  क्या ताऊ के दिमाग की कीमत मे भी मंदी  आगई क्या?

 

सैम - अबे ओ फ़िरंगी के बच्चे. जबान संभालकर बात करियो, ताऊ के खिलाफ़ मैं कुछ नही सुन सकता. समझ गया ना?

 

अब बीनू फ़िरंगी समझ गया कि ये सैम चाहे जब तो ताऊ की बुराई करता है. चाहे जब छोडकर जाने की बात करता है और आज इतना स्वामीभक्त बना हुआ है?

 

बात क्या है आखिर? कोई राज जरुर है इस स्वामीभक्ति के पीछे. वर्ना सैम इतना सीधा नही है.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई नाराज मत हो यार. ताऊ की मैं तो तेरे से भी घणी ज्यादा इज्जत करता हूं. पर यार तेरी वो टिकट वाली बात अधूरी रह गई कि ताऊ ने तेरी टिकट का जोगाड कैसे करवाया?

 

सैम - अरे यार क्या बताऊं? किद्या भैया ने तो मेरा पता साफ़ करके टिकट कुजागर सिंह जी को दे दिया.

 

मैं गया रोता रोता ताऊ के पास. और ताऊ की चापलूसी करते हुये मैने कहा कि ताऊ अगर मुझे टिकट नही मिला तो मैं तुम्हारे दरवाजे पर ही आत्महत्या कर लूंगा.

 

बीनू फ़िरंगी - फ़िर क्या हुआ?

 

सैम - हुआ क्या? मैने ताऊ से कहा कि कुछ खोकों का इन्तजाम कर देता हू, आप जाओ और किसी भी तरह  मेरी टिकट पक्की होनी चाहिये.

 

इस पर ताऊ कहने लगे कि सैम तू भी साले उल्लू का पठ्ठा है. साले जानवर का जानवर ही रहेगा. इतने दिन से मेरे साथ रह कर भी कुछ नही सीखा? मेरा नाम डुबोयेगा तू.

 

बीनू फ़िरंगी - फ़िर क्या हुआ यार सैम?

 

सैम - अबे होना क्या था? मुझे तो ऐसा गुस्सा चढा कि इस ताऊ को यहीं पर काट खाऊं. जब चौदह इंजेक्शन लगेंगे तब मालूम पडेगा कि सैम को गालियां देने का क्या हश्र होता है?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे नही यार सैम भाई ! फ़िर क्या तूने ताऊ को काट खाया?

 

सैम - अबे काटने की बात करता है? ताऊ ने जो कमाल दिखाया, उसके बाद तो मैने ताऊ के चरण पकड लिये और आजीवन गुलाम हो गया.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार वो कैसे?

 

सैम - अरे यार बस पूछ मत. ताऊ ने कुजागर सिंह का टिकट कटवा कर मुझे  टिकट भी दिलवा दिया और मेरे चार खोके जो चंदे मे देने थे वो भी बचा दिये.

 

बडे आश्चर्य से बीनू फ़िरंगी ने पूछा  -  यार झूंठ मत बोल. बिना चंदे के टिकट? मुश्किल काम है. यार तू मुझे बता सही बात क्या है.

 

सैम - जरुर बताऊंगा. पर तू विद्या माता की कसम खा कि किसी को नही बतायेगा?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार, चल विद्यामाता की कसम खाई. अब बता.

 

इतनी देर मे ही पार्टी के कुछ कार्यकर्ता आ गये और ये राज की बात कल बताने का कह कर सैम कार्यकर्ताओं से चुनाव की अगली रणनिती पर विचार विमर्श करने लगा.

 

(अगली पोस्ट मे सैम  वाकई धमाके दार खुलासा करेगा कि कैसे ताऊ ने कुजागर सिंह की टिकट कटवाई और सैम को दिलवाई. पढना मत भुलियेगा)

 

 

 

 

इब खूंटे पै पढो :-
 




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ताऊ काम धंधे से घणा परेशान तो था ही. अब किसी ने सलाह दे दी की आज कल डाक्टरी म्ह घणी कमाई सै. सिर्फ़ नब्ज पकडण की फ़ीस ५०० रपये. और जांच वगैरह की भी तगडी कमाई.

सो ताऊ ने तय कर लिया कि अब वो डाक्टरी की दुकान खोलेगा. सब तैयारी कर ली,
और डाक्टर बन गया. बाहर बोर्ड टंगवा दिया - डा. ताऊ अस्पताल.

उदघाटन म्ह भाटिया जी भी आये. और उन्होने पूछा कि ताऊ तू कब से डाक्टर बन गया. यार तू तो मेरी साथ का पांचवीं फ़ेल सै? फ़िर यो डाक्टर किस तरियां?

ताऊ बोला - अरे भाटिया जी, डाक्टर बनने में कौन सा ज्यादा खर्चा है? बस एक ये सफ़ेद कोट सिलवा लिया. ये एक स्टेथेस्कोप मेरे दोस्त डा. शुक्ला से मांग लाया, दुकान अपने पास थी ही. और ये चमचमाता नियोन साइन बोर्ड बन गया ५ हजार मे.

मेरी मानो तो थम भी कहां जर्मनी वापस जाओगे? आपको भी एक अस्पताल खुलवा देता हूं, दोनो भाई यहीं पर मजे करेंगे.

भाटिया जी- अरे मेरे ताऊ, तू जरुर अंदर जायेगा. अरे ये कानुनन जुर्म है. और तू कोई भी काम सीधा क्यों नहीं करता?

ताऊ - तो इब के करूं? मेरा तो घणा खर्चा होगया.

भाटिया जी - अरे ताऊ एक काम कर. तू आदमियों का इलाज करने के बजाये ढोर डाक्टर बण जा. यानि पशुओं का इलाज किया कर. उसमे रिस्क भी कम है.

सो ताऊ ने अब भाटीया जी की बात मान कर बोर्ड पर  लिखवा लिया "डा. ताऊ पशु चिकित्सालय"

इब एक दिन एक सुथरी सी बीरबानी अपने कुत्ते को गोद मे ऊठाकर लाई और बोली - डाक्टर ताऊ, जरा मेरे कुत्ते को देखिये, ये कुछ बोल नही रहा है.

ताऊ ने उसकि जांच करके बताया कि ये बोलेगा कैसे? ये तो मर चुका है.

वो बीरबानी बोली - नही डाक्टर. अगर ये मर गया तो मैं भी नही बचूंगी.
आप इसकी अच्छी तरह से पूरी जांच किजिये. मुझे ये दुनियां मे सबसे ज्यादा
प्यारा है.

ताऊ   ने भांप लिया कि आसामी मालदार है. सो ताऊ बोला - जी मैडम जी आप जरा शांति से बैठिये, मैं जो भी बेहतर बन पडेगा वो करता हूं.

अब ताऊ अंदर गया और अपनी पालतू बिल्ली रामप्यारी को लेकर आगया. वहां आकर उसने अपनी बिल्ली (रामप्यारी) को छोड दिया.   

रामप्यारी उछल कर टेबल पर चढ गई और कुत्ते को चारों तरफ़ से सूंघ कर
देखा और वापस नीचे कूद कर दुसरे कमरे मे भाग गई.

अब डाक्टर बना ताऊ बोला - देखिये मैडम जी अब पक्का है कि आपका
कुता मर चुका है.

अब उस बीरबानी ने भी मान लिया की उसका कुता मर चुका है और
उसने ताऊ से पूछा कि आपकी फ़ीस कितनी हुई?

ताऊ बोला - जी मैडम जी, सिर्फ़ ७५०० रुपये.

अब उस मैडम को थोडा झटका लगा और उसने कहा कि साढे सात हजार
रुपये किस बात के? आखिर आपने ऐसा किया ही क्या है?

ताऊ बोला - जी मैडम जी. इसमे मेरी फ़ीस के सिर्फ़ पांच सौ रुपये हैं बाकी सात हजार तो कैट- स्केन के हैं.

   

ताऊ के सैम और बीनू फ़िरंगी की पोस्ट

सैम हमेशा की तरह अपनी कुर्सी पर बैठा है और कुछ गहरे विचारों मे खोया हुआ है.

इतनी देर मे बीनू फ़िरंगी आता है और चहकता हुआ बोलता है - अरे यार सैम भाई..

ये क्या रोनी सूरत बना कर बैठे हो? हम तो आपके पास मिठाई और चिकन आलाफ़ूस

खाने आये थे.

 

सैम - क्यों बे फ़िरंगी ? तू क्या मेरे बाप की जनेत (बारात) मे जाने को आया है जो तुझे मिठाई और चिकन आलाफ़ूस खिलाऊं?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई हमसे ज्यादा मत बनो. हमको मालूम है कि आपका चुनाव मे टिकट ताऊ ने पक्का करवा दिया है?

 

सैम - हां यार.

 

बीनू फ़िरंगी - पर सैम भाई आपने ये जोगाड कैसे भिडा ली? बडे बडे तीसमारखां भी पीछे रह गये. और आप सीधे चुनाव मैदान में?

 

सैम : अबे तो तेरा क्युं पेट दुख रहा है? ये तो इस हाथ ले उस हाथ दे वाला हिसाब है.

 

बीनू फ़िरंगी - वो कैसे सैम भाई?

 

सैम - अबे फ़िरंगी तू इतने दिनों से मेरे साथ फ़िर क्या खाक ही छानता रहा? अबे मैने

ताऊ का नाम पदम पुरुष्कार के लिये चलाया  क्योंकि ताऊ तो अब चुनाव लडेगा नही.

उसको तो बुढापे मे पदम ही चाहिये. सो कोई लाबिंग करने वाला चाहिये. वो मैं अरेंज कर  रहा हूं.  और बदले मे ताऊ मुझे टिकट दिलवा रहा है.

 

बीनू फ़िरंगी- अच्छा तो अब समझ मे आई तुम्हारी भागदौड का राज.

 

अब सैम बीनू फ़िरंगी को अपना चुनाव संचालक बना लेता है और आप जानते हैं कि

चुनाव संचालक के नखरे चुनाव के दिनों मे आसमान पर होते हैं.

 

आप तो जानते हैं कि सैम तो अपना काम निकलवाने मे पक्का घाघ है. सो वो बीनू फ़िरंगी को नाश्ते मे चिकन आलाफ़ूस और रसगुल्ले खिलवाता है. और उसको कहता है कि वो उसका भाषण तैयार करवा दे. चुनावी सभाओं के लिये.

 

बीनू फ़िरंगी नाश्ता करके सैम को कुछ भाषण लिख कर प्रेक्टिस करवा रहा है.

 

अब बीनू फ़िरंगी कहता है कि -  सैम भाई, अब आप बिना कागज मे पढे भाषण दो और ये समझो कि जनता सामने बैठी है.

 

 

अब सैम बोलना शुरु करता है - भाईयों और बहणों एवम  गाम के सारे लुंगाडो, भाईयो आप सब मेरे को वोट देकर विजयी बनाओ. 

मैं वादा करता हू कि मैं आपको सबसे बडा घोटाला करके दिखाऊंगा. जितने भी घोटाले बाज हैं उनको आजाद कर दूंगा. किसी भी ताऊ की कमाई या उसके परिवार का कोई विवरण जनता को कभी नही बताऊंगा....सैम जोश मे बोले जारहा है.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे सैम भाई ये क्या गजब करे जा रहे हो? ये तो अंदर की बाते बाहर क्युं बोले जारहे हो?

 

सैम - अरे यार भूल गया था. वो क्या है कि मेरे दिमाग मे चुनाव जीतने के बाद जो कुछ हाई कमान के सामने बोलना है ना, वो वाली फ़ाईल रन हो गई थी गल्ती से.

 

बीनू फ़िरंगी - देखो सैम भाई अब हम आपके चुनाव संचालक हैं सो आप मेहरवानी करके हमारा नाम तो खराब करवा्ना मत. आपके दिमाग के कंप्युटर मे फ़ाईल वगैरह सही रन किया करो. वर्ना  आज कल जुतमपैजारियता का सीजन चल रहा है. फ़िर हमे दोष मत देना.

 

सैम - अबे फ़िरंगी तू क्या मुझे जनता से जूते पडवाने की बात कर रहा है क्या? तेरी ओकात क्या है बे? तू तमीज से बात किया कर मुझसे. आखिर अपने आपको समझता क्या है बे तू?

 

सैम तो जुतमपैजारियता का नाम सुनकर एक दम आपे से बाहर हो गया. जैसे उसी पर जूते पड गये हों?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई, चुनाव के दिनो मे इतना गुस्सा मत खाओ. अभी तो जनता जो कहे उसको मुस्करा कर सहन कर लो. समझ लो मैं भी जनता हूं. तुमको प्रेक्टिस करवा रहा हूं. और फ़िर असली जुतम पैजारी हो जाये तो बात ही क्या है? बस समझ लो कि मजा आ जायेगा.

 

सैम - असली जुतम पैजारी ? इसका क्या मतलब?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई, अगर तुम चुनाव जीत कर पी.एम. बन गये तो फ़िर ताऊ बुश की तरह जूता खा सकते हो. ये तो अच्छी बात होगी ना.

 

अरे पी.एम. बनोगे तभी तो कोई तुम पर जूता फ़ेकेंगा ना. और सीजन इसलिये कि परसों ही चीन वाले ताऊ वेन जियाबाओ पर इंगलैण्ड मे किसी ने जूता फ़ेंक मारा.

 

सोचो क्या मजा आयेगा? मैं तो इस बात का इन्तजार करुंगा कि  जब तुम पर कोई जूता फ़ेंक मारेगा और सारी दुनियां मे तुम्हारा नाम होगा?

 

ये दोनों शेखचिल्ली अब शाम की चाय पीते हुये अखबार पढ रहे हैं और बीनू फ़िरंगी अपनी आदत मुताबिक चहक कर बोलता है- अरे यार सैम भाई, देखो यार देखो. क्या गजब हो गया?

 

सैम - अबे क्या पहाड टूट पडा?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार हद हो गई. नौसिखिया मालगाडी के ड्राईवर दिल्ली- रांची गरीब रथ को जबरन भगा ले गये? कोई अनहोनी हो जाती तो.

 

सैम - अबे तो इसमे क्या है? कहो वो राजी खुशी फ़ुरसतिया जी के  गांव कानपुर तक तो पहुंच गये. अरे मालगाडी के ड्राईवर थे तो यात्री गाडी उन बच्चों ने  चला कर प्रेक्टिस कर ली तो कौन सा जुर्म कर दिया?

 

अब इधर मुम्बई मे एक नशेडची ने १५ रुपये की केबल काट कर ६ घण्टे रेल्वे यातायात ठप्प कर दिया उसको तो  कोई कुछ नही कहता.

 

बीनू फ़िरंगी - तो इससे क्या हुआ?

 

सैम - अबे उल्लू के पठ्ठे, हुआ क्या? अरे इससे ये हुआ कि ८० ट्रेने रद्द हुई, ४ लाख मुम्बईकर आफ़िस नही पहंच पाये, एक दर्जन पुलिस वाले घायल हो गये. और तीन दर्जन से भी ज्यादा लोगों की गिरफ़्तारी हुई.

 

 

इब खूंटे पै पढो.:- 

 

एक बार न्यु हुया कि घणा तगडा अकाल पड गया. खेतों मे कुछ हुआ नही था.

सभी लोग बडी तकलीफ़ मे जीवन यापन कर रहे थे.

 

अब एक दिन एक फ़क्कड मिरासी सबेरे सबेरे ताऊ के घर आगे आकै सारंगी बजाण लाग ग्या.

 

ताऊ बाहर आया और पूछा -  कि भाई के बात सै?

 

मिरासी बोल्या - ताऊ के बताऊं? किम्मै अनाज देदे. बालक घणे दिन तैं भूखे मर रे सैं.

 

ताऊ बोल्या - अरे भाई मेरी हालत तो तेरे तैं भी घणी खराब सै. सारा माल असबाव तो गोटु सुनार ले भाग्या और खेतां म्ह पड ग्या अकाल. सो अनाज तो कोनी.

 

मिरासी बोल्या - ताऊ जब तेरे भी हाल मेरे जैसे ही हैं तो न्यु कर मेरी गैल्यां चाल. राजा के दरबार मे जाकर कविता सुनावांगे और  सुना है कि राजा कविता सुन कर बडा इनाम देता है.

 

ताऊ - पर भाई मेरे को कविता तो आवै कोनी. तेरे को गलत फ़ेमिली हो री सै. मैं तो यूं ही ऊटपटांग लिखकै सु. सीमा गुप्ताजी को भेज देता हूं और वो सुधार देती हैं. कविता सुनाना और वो भी राजा को? माफ़ कर भाई मेरे बस का काम नही सै यो.

 

ताऊ की साफ़गोई  से मिरासी बडा खुश था सो वो बोला - ताऊ तू मेरे साथ चल. राज दरबार मे. मैं वहां पर कविता पढूंगा और जब मैं तेरे को इशारा करूं तब वही लाईने तू भी दोहरा देना. बस काम बन जायेगा.

 

अब वो दोनो राजा के दरबार मे चले गये.

 

वहां राजा एक ऊंचे सिंहासन पर बैठा था और नीचे से देखने पर वो छोटा सा नजर आरहा था. राज दरबार देख कर ताऊ की तो आंखें फ़टी की फ़टी रह गई.

 

अब मिरासी ने अपना नम्बर आने पर कविता सुनाना शुरु किया.

 

                      "जय हो महाराज आपकी जय जय्रकार"

                         भरे रहें आपके सदा अन्न के भण्डार"

ये दो लाईने कह कर मिरासी ने पास खडे ताऊ के पेट मे ऊंगली अडाई यही दो लाईने दोहराने के लिये.

 

पर ताऊ तो राज दरबार  को देखने मे ही मशगूल था सो उसको कुछ याद नही आरहा था कि मिरासी ने क्या कहा था?

 

अब मिरासी ने दुबारा इशारा किया तो ताऊ ने अपने दिमाग पर जोर डाला और पहली लाईन तो याद आगई पर दुसरी लाईन की तुकबंदी   यूं  मिलाकर कविता दोहराई  -

 

                       "जय हो     महाराज आपकी जय जय्रकार

                        देखो कित चढ कै बैठ्या सै बेबे का यार"

 

अब ताऊ और मिरासी को क्या इनाम मिला होगा? आपही कल्पना किजिये.

 

 

 

          ताऊ शनीचरी पहेली - ८ का प्रकाशन कल सूबह ७.०० बजे होगा.

सैम और बीनू फ़िरंगी की पोस्ट

सैम और बीनू फ़िरंगी आज फ़िर ब्लाग-पोस्ट लिखने की जोगाड मे अखबारों का कचूमर निकाले जारहे हैं कि इतनी देर मे बीनू फ़िरंगी  की नजर एक समाचार पर पडी और वो फ़िर अपनी आदत मुताबिक चहक ऊठा. और बोला - अरे यार सैम भाई देखो यार,  देखो जरा... क्या मजेदार खबर है. कसम से मेरी तो हंसी ही नही रुक रही है.

 

सैम - अबे इतनी जोर से क्यों दांत फ़ाड रहा है? कहीं बाहर निकल कर गिर गये तो तेरी पोल पट्टी खुल जायेगी.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई, तुम भी ना, हर समय टांग खींचते रहते हो? कभी तो समझ की बात किया करो.

 

सैम - अच्छा चल बता, क्या बात है.

 

बीनू फ़िरंगी - ये देखो, राजस्थान के सांपनाथ पार्टी के सी.एम. क्या कह रहे हैं?

 

सैम -  अबे सी.एम. हैं, और वो भी ५ साल बाद बने हैं दुबारा,  तो कुछ ना कुछ तो कहेंगे ही ना. अब क्या घोषणा कर दी इन कसोक बहलोत साहब ने?

 

बीनू फ़िरंगी - बहलोत साहब ने मंगलोर की घटना पर, .. वो क्या कहते हैं...हां प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि - मैं अब राज्य से "पब कल्चर"  ही खत्म कर दुंगा. हर गांव गली और और शहर कस्बे में बडी बडी शराब की दुकाने और साईन बोर्ड लगे हैं. कहीं २ तो स्कूल और धार्मिक स्थलों के पास ही खोल दी गई हैं.

 

सैम - तो इसमे दांत फ़ाडने वाली कौन सी बात है? बिना मतलब मेरा दिमाग हटा दिया ब्लाग पोस्ट लिखने से.... खैरी का खूंट  कहीं का... सैम ने आंखे तरेरते हुये कहा.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई ..बस तुम्हारे अंदर वही ताऊ वाली आदत..दुसरों की पूरी सुनते नही हो और अपने मन से ही सब आईडिये लगा लेते हो? पूरी बात सुनो.

 

सैम - चल भाई तू भी सुना दे कि बहलोत साहब ने कौनसी नई रागनी गाई है?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे सैम भाई ये तो तगडी रागनी है. बहलोत साहब कहते हैं कि ये शराब के पब कल्चर में,  सांपनाथों की रानी  सरकार ने ही युवकों को पीना सिखाया है और वो इसे खत्म कर देंगे.

 

सैम - अरे यार बीनू भाई. तुम भी इनको जानते नही हो. ये सब इन सांपनाथों और नागनाथों की नूरा कुश्ती है. इनके बाद जब रानी गद्दी नशीं हुई थी तब वो भी ऐसा ही कहती थी. चल ब्लाग पोस्ट की तैयारी कर.. इन बातों मे ज्यादा ध्यान मत दिया कर. हमारे पास वैसे ही दिमाग की कमी है.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे सैम भाई ये खबर देखो. लिखा है कि  गधे गुलाब जामुन खा रहे हैं....

 

उसको बीच मे ही टोककर सैम बोला - अरे कूटांट..तेरे को सिवाय गुलाब जामुन और कुछ नही सूझता के? तेरे को मालूम है मुझे गुलाब जामुन बहुत पसंद हैं, और तू उनकी ही मेरे को याद दिला दिया कर हमेशा....साला उल्लू का प्यो कहीं का....

 

बीनू फ़िरंगी - इसमे मैने क्या गलत कह दिया यार...अब नाराज हो के गालियां क्यों दे रहा है?

 

सैम - अरे यार बीनू भाई. वो क्या है ना कि ..मुझे गुलाब जामुन खाने का बडा शौक है, पर आज तक मिले नही. सो सोचता हूं अबकी बार चुनाव लड ही लूं.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई, अब चुनाव लड के गुलाब जामुन कैसे खाओगे? और कुत्तों को तो मिठाई खाने से ताऊ भी मना करता है.

 

सैम - अबे जब गधे गुलाब जामुन खा सकते हैं तो कुत्ते क्यों नही? अब तू देखता जा. मैं भी तुझे चुनाव लड कर और जीत कर दिखाता हूं.

 

 

 


इब खूंटे पै पढो :-

बात युद्ध के दिनो की है. अमेरिकी राष्ट्रपति रुजवेल्ट साहब को एक सभा मे भाषण करना था. और वहां पर आये अखबार के पत्रकारों को आशा के विपरीत राष्ट्रपति महोदय के बिल्कुल नजदीक बैठने की व्यवस्था की गई थी.

कार्यक्रम बिल्कुल शांतिपुर्ण ढंग से निपट गया और तब ताऊ ने अपने साथी पत्रकारों
से कहा - भाईयो और बहणों..आज तक हमको राष्ट्रपति महोदय के इतने नजदीक बैठने का सौभाग्य नही मिला और मैं इस सम्मान से गदगदायमान हूं. हमको जाकर राष्ट्रपति
महोदय के सचिव को धन्यवाद कहना चाहिये.

और सारे पत्रकार भाई ताऊ की अगुआई मे राष्ट्रपति महोदय के सचिव के पास गये.

ताऊ ने कहा - सचिव साहब, आपने महामहिम के इतना नजदीक बैठा कर हमको जो सम्मान दिया उसके लिये हम आपको धन्यवाद देते हैं और आभार व्यक्त करते हैं.

अब मुस्कुराते हुये सचिव महोदय बोले - ताऊ, इसमे धन्यवाद देने और आभार व्यक्त करने सरीखी कोई बात नहीं है.

दर असल आप लोगों को राष्ट्रपति महोदय के इर्द गिर्द इस तरह से बैठाया गया था कि दर्शकों मे से कोई राष्ट्रपति महोदय पर गोली चलाता तो वो गोली आप लोगो मे से ही किसी को लगती. 

 

 

 

 


एक जरुरी सूचना :-

कृपया ध्यान देवे, ताऊ की शनीचरी पहेली-७ कल शनीवार सूबह ७.०० AM पर पुर्व वत
प्रकाशित होगी. कल की पहेली के साथ हमारी पहेली - ६ की प्रथम विजेता सु सीमा गुप्ता जी का साक्षात्कार भी प्रकाशित होगा, पढना ना भुलियेगा.

पहेली से संबन्धित क्ल्यु अगर जरुरी हुआ तो ब्लाग के दाहिंने साईड मे प्रकाशित किया  जायेगा, जहां अभी एक महिला और बालक का चित्र लगा है.

ताऊ की शनीचरी पहेली-६

आप सबनै शनीचर की राम राम. इस शनीचरी पहेली न.६ मे आपका स्वागत है . नीचै ध्यान तैं देख कै जवाब देणा है बिल्कुल ही आसान पहेली है . यह कौन सी प्रसिद्ध जगह, कहां पर है. तो जरा सा दिमाग पर जोर डालिये. और पहेली जीत कर अपनी मेरिट को उपर कर लिजिये.

 

आपसे गुजारिश है कि जवाब बिल्कुल सुस्पष्ट देवे, यह कौन सी जगह है? इसका नाम लिखें, और फ़टाफ़ट अपना जवाब दे दे. विवरण के लिये दुसरी टीपणि करें, जिससे आपके पहले कोई दुसरा जवाब देकर आपसे अधिक अंक नही ले जाये.


अगर आपको यह पहेली आयोजन पसंद आया है तो यहां दाहिने तरफ़ पसंद पर भी एक चटका लगाने की कृपा करें. इससे हमारा उत्साह वर्धन होता है.


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यह कौन सी प्रसिद्ध जगह है.


आप विषय से संबंधित जितनी सही जानकारी देंगे वो सभी के ज्ञानवर्धन के लिये ज्यादा अच्छा रहेगा . और आपकी टिपणी भी प्रकाशित की जायेगी .


इसका जवाब  परसों सोमवार को मिल जायेगा . यानि ठीक ४८ घन्टे बाद.

 

सर्दी का मौसम होने से इस शनीचरी पहेली के प्रकाशन का समय अब हर शनीवार सूबह ७.०० AM कर दिया गया है. और रिजल्ट  सोमवार को सुबह ७.०० AM पर प्रकाशित कर दिये जायेंगे.

 

तो है ना छुट्टी के दिनो का भरपूर मजा घर बैठे.

 

इस ब्लाग के दाहिंने तरफ़ आप आपकी मेरिट की स्थिति देख सकते हैं. सोमवार को इस अंक के रिजल्ट के साथ ही यह अपग्रेड कर दी जायेगी.

 

पहेली के नियम कायदे पहेली न.१ के रिजल्ट के साथ साथ बता दिये गये थे. जो यहां चटका लगा कर भी देखे जा सकते हैं.

 

आपके सुझावो का हमेशा ही स्वागत है.

 

एक विशेष सूचना हम अवश्य देना चाहेंगे कि आप चाहे जितनी देर से आयें आपको अगर सही जवाब मालूम है तो जवाब अवश्य देवें .

 

यहां पर आपको हर सही जवाब के साथ मार्क्स दिये जाते हैं जो इकठ्ठे होकर कभी भी भविष्य मे आपको बहुत काम आयेंगे. और हर भाग लेने वाले प्रतिभागी को एक अंक दिया जाता है.

 

आपने अगर जवाब दे दिया हो तो आप इन्तजार करें. हो सकता है आप का जवाब जान बुझकर रोका गया हो. हम पहले ही बता देते हैं कि निरणायक गण आपको भ्रम मे डालने के लिये और पहेली की मनोरंजकता बढाने के लिये पहले जो टिपणियां प्रकाशित करते हैं वो गलत भी हो सकती हैं और सही भी. दोनो ही बाते हैं. अत: अपने विवेक से उत्तर देवें.


और आपसे एक निवेदन है कि किसी भी हालत में जवाब मे लिंक नही देवें. अगर आपका जवाब सही है तो हम उसे गलत नही करेंगे, पर आपके Link देने से आपके बाद आने वालों के लिये कोई चार्म नही बचता.


अत: प्लीज..प्लीज..Link कतई नही देवें. वर्ना आपकी टीपणी प्रकाशित नही की जावेगी.


इब खूंटे पै पढो :-

राज भाटिया जी ने अपने पैसों की वसूली का तगादा घणा तेज कर दिया. ताऊ बिल्कुल बेरोजगार था. अब ताऊ के पास एक ही अंतर्राष्ट्रिय ख्याति का सलाह कार था, सैम बहादुर.


सैम ने ताऊ को सलाह दी कि ताऊ आजकल खेती मे बहुत तगडी कमाई है और
तू हर्बल खेती शुरु कर दे, बस तेरे वारे न्यारे जल्दी ही हो जायेंगे.


ताऊ ने दिन रात मेहनत करके खेतों मे अपनी जी जान लगा दी. उसने धोली मूसली,  अश्वगंधा और पता नही कौन कौन सी औषधियों को खेतों मे उगा लिया.


समय पर खाद बीज पानी देने का काम ताऊ का और रखवाली का काम सैम का. अब सैम को तो आपने देख ही लिया है. उसके रहते चोरी चकोरी का क्या काम? 


एक दिन ताऊ खेत मे पानी देण लाग रया था कि एक उडता हुआ बाज पक्षी आकर
गिरा, ताऊ ने उस घायल बाज को ऊठा लिया. उसको किसी शिकारी ने घायल किया था.  


इतनी देर किम्मै घणा ही पढ्या लिख्या शहरी सा आदमी दौडता हुआ खेत म्ह घुस गया.


ताऊ ने उससे पूछा कि भाई तैं क्युं मेरे खेत रौंदण लाग रया सै? बात के सै?


वो बोला : ताऊ सुण, मैने एक उडते हुये बाज का शिकार किया था और वो आकर यहीं कहीं तेरे खेत मे गिरा है. मैं उसे ढुंढ रहा हूं.


ताऊ बोला - सुण बे भले आदमी. पक्षियों का शिकार करना जुर्म है. तेरे को तो मैं पुलिस म्ह पकडवाऊंगा.


ताऊ के इतना कहते ही उस "अ"हटाकर टाईप शिकारी ने अपनी रिवाल्वर निकाल ली और बोला - सुण बे गंवार ताऊ. ये कानून भी हम ही बनाते हैं. तू ज्यादा बकबास करेगा तो मैं तेरा भी शिकार कर डालूंगा.


अब उसके इतना बोलते ही ताऊ की बेटरी जल ऊठी. ताऊ ने देखा कि वो शिकारी बिल्कुल महाबली खली के आकार का था. और ताऊ उसके सामने बिल्कुल छटंकी.
फ़िर उसके हाथ मे रिवाल्वर. ताऊ की तो सिट्टी पिट्टी गुम हो गई.


इतनी देर म्ह सैम बहादुर वहां पहुंच गया, ताऊ की जान मे जान आई. सैम ने सारा
नजारा देखा और तुरंत ताऊ के कान मे जाकर चुपके से बोला - ताऊ. ये बहुत ऊंची पहुंच वाला,  बिगडा हुआ,  पुराने रईस की औलाद है. बाज का शिकार तो छोड, अगर ये तेरा और मेरा शिकार भी करदे तो कोई इस बात की गवाही देने वाला भी नही मिलेगा.


ताऊ : अरे तो बावली बूच. पहले क्युं नही बताया? मैं तो इसको पुलिस की धमकी भी दे चुका हूं.


सैम : ताऊ, अब सिर्फ़ एक ही उपाय है कि  अब तुम अपना फ़ार्मुला वन टू का फ़ोर लगाओ फ़टाफ़ट वर्ना आज मारे गये.


अब ताऊ ने उस फ़ुफ़कारते हुये रईस से कहा - अरे शिकारी साहब. देखो जी, बाज का शिकार आपने किया तो इसमे पुलिस क्या करेगी? भाई जो मेहनत करेगा वो खायेगा.


शिकारी ने ताऊ के इतने मीठे वचनो को सुनकर कहा कि ताऊ , ला फ़िर मेरा शिकार दे दे मुझे.

ताऊ बोला - जी वो तो आप ढूंढ लेना खेत में. पर उसके पहले न्याय की बात ये है कि  शिकार आपने किया और गिरा मेरे खेत मे. तो इस पर हक आपका है या मेरा? इसका  फ़ैसला तो करवाणा पडैगा.


शिकारी बोला - इसका फ़ैसला कैसे होगा?


ताऊ : जी, इसका फ़ैसला हम तो हमारे गांव मे  फ़ाइव किक रुल से करते हैं.


शिकारी बोला - ये फ़ाईव किक रुल क्या होता है 


ताऊ : जी, शिकारी साहब, जब भी कोई ऐसा वाकया होता है तो हम गांव वाले तो जैसे फ़ुटबाल मे कई बार फ़ैसला  पेनाल्टी किक से किया जाता है, उसी तरह से हम पांच किक बारी बारी मारते हैं. उसमे जो जीत जाता है, फ़ैसला उसी के हक मे दे देते हैं. 


अब शिकारी को हंसी आई कि इस ताऊ को मैं एक फ़ूंक मे ऊडा सकता हूं और ये
किक की बात कर रहा है. सो वो बोला - ले ताऊ , पहले तू किक मार ले, तू भी क्या
याद करेगा? फ़िर उसके बाद मैं तेरे को किक मारूंगा.


बस शिकारी तो सैम और ताऊ के जाल मे खुद ही फ़ंस गया, वर्ना वो तो इस चिन्ता
मे थे कि कहीं ये पहले किक मारने की जिद्द नही पकड ले.


अब ताऊ ने उछल कर पहली लात ही उसके नाजुक अंगो पर जमाई. शिकारी गिर गया.दुसरी.. सीधी उसके नाक पर...नाक मे खून...तीसई उसके पेट मे जमाई..और वो जोर जोर से चिल्लाने लगा....


अब ताऊ ने उसका रिवाल्वर कब्जे मे किया. और सैम उसकी छाती पर चढ गया. वो रोता चिल्लाता रहा.


अब ताऊ ने फ़टा फ़ट पुलिस बुलवा कर उसको गिरफ़्तार करवा दिया. ताऊ ने सैम को धन्यवाद दिया. और  सैम को बेचने के लिये कल विज्ञापन दिया था उसके लिये सैम से क्षमा मांगी.


सैम ने भी मुस्कराते हुये ताऊ को क्षमा कर दिया.


ताऊ के सैम बहादुर और बीनू फ़िरंगी की पोस्ट

saim bahadur सैम आराम से बैठ कर आज दूध कार्नफ़्लेक्स का नाश्ता कर रहा है.  बीनू फ़िरंगी आकर चहकता हुआ बोलता है अमां यार  सैम भाई ये क्या बात हुई? क्या इतनी कडकी आगई क्या? जो नाश्ते मे चिकन आलाफ़ूस की जगह घासफ़ूस ले रहे हो?

 

सैम : अबे साले, कडकी आये तुम फ़िरंगियों को. हमको क्यों आये? हम तो ताऊ राजू के पठ्ठे हैं. वो तो आज जरा पेट खराब है, इसलिये चिकन आलाफ़ूस की जगह अपने वो वाले डाक्टर साहब के कहने से  कार्नफ़्लेक्स ले रहे हैं.

 

अब बीनू फ़िरंगी अखबार ऊठाकर पढता है और चोंक कर कहता है - अरे सैम भाई देखो. ये क्या खबर है यार? ताऊ राजू के पास ४०००  एकड जमीन है ? और उसमे से भी २००० एकड तो उसने अभी भी छुपा रखी है? पर इतनी जमीन खरीदने का रुपया कहां से आया?

 

सैम - अबे ओ फ़िरंगी. इतने शरीफ़जादे मत बनो तुम. अरे जब तुम लोग सब प्राईम मे उल्टे सीधे मेन्युपुलेशन कर सकते हो तो ताऊ राजू क्यों नही कर सकता? आखिर मुझे क्यों रखा था उन्होने?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे बताओ यार सैम भाई. सब कुछ जरा खुल कर बताओ.

 

सैम - देख बे फ़िरंगी किसी को मेरा नाम मत बताना, अब तुझे सही बात बताता हूं. पर ये मत समझना कि तू फ़िरंगी है इसलिये सफ़ाई दे रहा हूं. वो तो बात ये है कि अब मेरे पेट मे बात पच नही रही है. सो उगलना जरुरी है.

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई, आज तक आपकी बात मैने किसी को बताई है क्या ? जो आज बताऊंगा? आप तो शुरु हो जाओ.

 

अब सैम बोला - देख बे. वहां ताऊ ने बोगस कर्मचारियों की भर्ती दिखा रखी थी. इस तरह २० करोड तो हर महिने इसी के आजाते थे. यानि इस रकम से किश्ते चुक जाती थी खरीदी की.

 

बीनू फ़िरंगी - पर सैम भाई सवाल ये है कि फ़िर डाऊन पेमेंट कहां से आया?

 

सैम - अबे तू चुप नही रह सकता क्या? चुप चाप सुनता जा. आज मैं तेरे को सब कुछ बता कर अपने दिल का बोझ हल्का कर लेना चाहता हूं. मेरी आत्मा की आत्मा अब मुझे धिक्कारने लगी है कि क्यों मैं इन ताऊओं के ही चंगुल मे चढता हूं? कोई शरीफ़ आदमी मुझे मिलता ही नही है?

 

बीनू फ़िरंगी - हां यार सैम भाई. ये आपने अच्छी कही. आप तो अब शुरु हो जाओ और अपनी आत्मा का बोझ मुझ पर ऊंडेल दो.

 

सैम - अबे ज्यादा मत बोल. मेरी आत्मा इतनी भी कमजोर नही है. ये तो मेरे रोज के कर्म कांड हैं. अब एक ताऊ की पोल खुल गई तो क्या सबकी थोडी खुलती है?

 

अब सैम ने चाय का कप ऊठाते हुये बोलना शुरु किया - अरे यार जो बैंक मे पक्की फ़िक्स डिपाजिट की रसीदें थी ना? मेरे कहने पर उन रसीदों को ताऊ ने छुपा लिया और बैंक वालो से जाकर बोला कि रसीदे गुम हो गई हैं. और बैंक वालों ने उनकी डुप्लीकेट

रसीदे जारी कर दी.

 

बीनू फ़िरंगी - फ़िर इससे क्या हुआ?

 

सैम - अबे उल्लू के पठ्ठे.. हुआ क्या? अबे सब कुछ तो हो गया.. करोडों की रसीद डबल हो गई. दो दो जगह प्लेज भी कर दी और जहां असली दिखानी थी वहां असली दिखाता रहा और दुसरी जगह डुप्लिकेट से काम चलता रहा. यानि मनी जेनेरेट करने का नायाब नुस्खा.

 

बीनू फ़िरंगी - वाह यार सैम भाई. आप तो गजब के आईडिये देते हो? अब समझ गया कि आपको तो कोई ताऊ ही झेल सकता है. किसी साधारण आदमी के बस का रोग नही है.

 

सैम - हां यार. और अब देखो ये खबर कि मार्गन और साक्स अब सत्यम को सलाह्कार के रुप मे सेवाएं देंगे. जिन्होने खुद अपना पटिया उलाल कर लिया. अब सत्यम को क्या सलाह देंगे? अरे ये तो सरकार को चाहिये कि मेरे जैसे सलाकार के रहते किसी फ़िरंगी सलाहकार की नियुक्ति ना कि जाये.

 

आगे सैम बोला - पारिख साहब ने कहा है कि वो निवेश बैंकर के लिये बात कर रहे हैं और मैने  भी नियुक्त होने के लिये जोड तोड शुरु कर दी है.

 

[आज युग पुरुष सुभाष चन्द्र बोस का जन्म दिवस है. शायद कहीं कोई चूं चपड नही है. नमन है उनको ]


 

इब खूंटे पै पढो :-

आजकल  सैम की बकबास करने की आदत से ताऊ घणा परेशान हो लिया था. और ताऊ ने यह तय कर लिया कि अब सैम को बेच डालेगा, ओने पोने दामो पर भी.

अब उसको सहन करना बडा मुश्किल हो गया था. ताऊ ने आफ़िस के बाहर एक बोर्ड लगा दिया और अखबार मे विज्ञापन दे दिया.

                                                          
                                                "तुरंत बिकाऊ है:"

                             एक बोलने वाला कुता वाजिब दामों मे बिकाऊ है : 
                                सम्पर्क समय सुबह १०.०० से २.३० बजे तक.
                                                जल्दी सम्पर्क करें.  
                                            
एक खरीद दार बोर्ड देख कर आया. और ताऊ से जाकर पूछताछ करने लगा.

कीमत पूछने पर ताऊ बोला - भाई साहब कीमत का क्या है? ये तो मेरे जिगर का टुकडा है. अनमोल है. बस कोई मजबूरी ही है जो इसे बेच रहा हूं .

खरीद दार ने फ़िर पूछा - अच्छा ताऊ ठीक है, पर मैं कैसे विश्वास कर लूं कि ये बोलता भी है? मैं उससे मिलना चाहुंगा.

अब उस खरीद दार को सैम से मिलवाया गया. सैम से उस खरीददार ने  पूछा कि 
आपने अभी तक  क्या क्या काम किया है?

सैम : - जी सबसे पहले तो मैं स्काटलैण्ड यार्ड पुलिस मे था, उसके बाद FBI में कुछ वर्षो तक सर्विस दी, उसके बाद मैं बुश साहब की सिक्युरिटी का चीफ़ इन चार्ज रहा.

खरीद दार सैम को इन्सानों की जबान बोलते देख कर और उसकी पिछली सेवाओं को
देख सुन कर बडा प्रभावित हो गया. और उसने पूछा कि जब आपकी इतनी हाई प्रोफ़ाईल रही है तो आप इस लोकल ताऊ के पास कैसे आगये?

सैम :- सर जी बात ये है कि मैं भी बुश ताऊ के साथ ईराक यात्रा मे था. वहां ताऊ बुश पर जो जूता फ़ेंका गया उसकी जिम्मेदारी मुझ पर डाल दी गई और मुझे इस लोकल ताऊ के हाथों बेच दिया गया.

खरीददार ताऊ से बोला - आपको तो ऐसे हाई प्रोफ़ाइल कुत्ते को पाकर फ़ख्र करना चाहिये. फ़िर आप इसे बेच क्युं रहे हैं?

ताऊ बोला - क्योंकि एक म्यान मे दो तलवारें नही रह सकती.

खरीददार - क्या मतलब?

ताऊ :- क्योंकि ये मुझसे भी बडा फ़ांकालोजिस्ट है.  

ताऊ के सैम और बीनू फ़िरंगी की अतिथि पोस्ट

आज सुबह सुबह सैम और बीनू फ़िरंगी बडे गम्भीर होकर सप्ताह भर के अखबारों को टटोल रहे हैं ! सैम थोडा अक्ल से पैदल और कम पढा लिखा है वहीं बीनू फ़िरंगी डिग्री धारी है ! दोनो ब्लाग लिखने के लिये कटिबद्ध हैं और सामग्री टटोल रहे हैं अतिथि पोस्ट लिखने के लिये ! बीनू फ़िरंगी अखबार पढ पढ कर सैम को सुनाते जा रहा है !


बीनू फ़िरंगी - यार सैम भाई ये देखो एक नागनाथ पार्टी का ताऊ ( विधायक) अपना विवाह समाज के सामूहिक शादी समारोह मे करेगा ! ये कैसा मसाला है अपनी पोस्ट के लिये ?


सैम - अबे तू भी यार बिल्कुल मेरे से भी ज्यादा पैदल है अक्ल से ! इसमे कौन सी बडी बात है ? शुरु शुरु मे नये नये ताऊ ऐसा ही करते हैं फ़िर पुराने होते ही असली रंग ढंग पकड लेते हैं ! चल अगली खबर पढ , आज मेरा चश्मा कहीं गुम हो गया है !


बीनू फ़िरंगी - ये देखो सैम भाई ! बाल ठाकरे दादा को क्या हो गया ? खुद ही कहते हैं कि आपात काल लगाओ ! और इन्दिरा गांधी के गुण गान कर रहे हैं ! और फ़िरंगी पूरी खबर सुनाता है !


सैम - अरे यार फ़िरंगी , अब इनको कोई खबरों मे बने रहने का बहाना तो चाहिये ना ! तो यही नोटंकी शुरु ! बोलो जिस आपातकाल को ये लोग भिगो भिगो कर कोसते थे उसी को वापस बुला रहे हैं ? तुमको मालुम है क्यों ?


बीनू फ़िरंगी - क्यों यार सैम भाई ? जरा हमे भी बताओ !


सैम - अरे यार सीधी बात है ! इन्दिरा जी ने आपातकाल लगाया था और जिनको मेरा मतलब विरोधी नेताओ को कॄष्ण जन्मस्थली पहुंचा दिया था ! बाद मे इसी आपातकाल की वजह से उनको पहली बार राजगद्दी मिली थी !


और जहां पहले केवल सांपनाथ पार्टी का राज करने पर एकाधिकार था वहीं पहली बार नागनाथ पार्टी का जन्म हुआ और सत्ता सुन्दरी उनको मिली ! अब ये अलग बात है कि ५ साल की बजाय ढाई साल मे ही लड झगड कर सता सुन्दरी ने इनको तलाक दे दिया ! और वापस सांपनाथ पार्टी से घरवासा कर लिया !


बीनू फ़िरंगी - पर सैम भाई इस बात से आपातकाल के गुणगान का क्या संबन्ध ?


सैम - अबे यार तुम फ़िरंगियों मे एक यही आदत बहुत गंदी है ! एक रट पकड लेते हो तो छोडते नही हो ! अबे दिल्ली के चुनावो मे मुम्बई कांड के बावजूद जनता ने सांपनाथों को जिता दिया है तो ठाकरे दादा सोच रहे हैं कि कहीं उनके साथ भी ऐसा नही हो जाये ! सो आपातकाल लगवाकर सता हथियाना चाहते हैं !


बीनू फ़िरंगी - अरे यार सैम भाई , तुम तो मुझे बिना पढा लिखा ही समझ रहे हो शायद ! आपातकाल लगवा कर सता कैसे हथिया लेंगे ?


सैम - अबे तू साले निरा पढा लिखा मूरख है मुरख ! इतना भी नही समझता कि आपातकाल लगायेंगे तो कुछ ना कुछ गल्तियां और ज्यादतियां होंगी और उसके फ़लस्वरुप वोट इनको मिल जायेंगे और सता मिल जायेगी !


नही तो पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिये आपातकाल की क्या जरुरत है ? हमको बोल दो ! हम तो एक मिनट मे "अ"हटाकर जी की तरह पाकिस्तान को भी खम्बा ना बनादे तो हमारा नाम भी सैम नही !


बीनू फ़िरंगी - सैम भाई, ये देखो , कानपुरिया ठग्गू के लड्डूओं की बिक्री को भी मंदी का सामना करना पड रहा है ! ठग्गू के लड्डूओं मे मंदी क्यों ? क्या लोगो ने खाना बंद कर दिया ?


सैम - अरे यार तूने भी क्या याद दिला दी ठग्गू के लड्डूओं की ..आहा.हा..जब मैं धर्म पा जी के दुसरे घर हेमा भौजाई के घर जाता था तो भौजाई मुझे इन्ही लड्डूओं का नाश्ता करवाती थी ! उनको ये लड्डू बहुत पसंद हैं ! भौजाई ये ठग्गू के लड्डू सीधे कानपुर से मंगवाती थी !


बीनू फ़िरंगी - तो अब ताऊ को बोल दे ! तेरे को वो मंगवा देगा कानपुर से !


सैम - अरे यार तूने भी किसका नाम ले दिया ? ताऊ कहां से मंगवायेगा ? वो खुद कडकी में चल रहा है ! कभी सेठ को चूना लगाता है और कभी कुछ करता है ! मैं भी किस कडके के पास आकर फ़ंस गया ?


बीनू फ़िरंगी - अरे सैम भाई , एक बार ताऊ को बोल के तो देखो !


सैम - बोला था परसों ही ! तब मुझे उल्टा डांट दिया ! ताऊ ने कहा - कुत्तों को मीठा नही खाना चाहिये ! बोलो अब ये कोई बात हुई ?


बीनू फ़िरंगी - यार सैम मेरी भी इच्छा हो रही है ठग्गू के लड्डू खाने की तो !


सैम - अब तू देखता जा ! ये ब्लाग लिखने की बात मैने इसिलिये की है कि इस बहाने मेरी फ़ुरसतिया जी से जान पहचान हो जायेगी और फ़िर ताऊ को अंगूठा दिखा दुंगा !


मैं तो फ़ुरसतिया जी के यहां नौकरी कर लूंगा ! काम करेंगे तो लड्डू तो मिल ही जायेंगे ! अपने को इससे ज्यादा कुछ चाहिये भी नही !


बीनू फ़िरंगी - ठीक है , मैं भी चलूंगा तुम्हारे साथ ! ये पोस्ट तो हो गई ! इब खूंटे पै क्या लिखें ?


सैम - अबे तू चिन्ता क्यों करता है ? मैने ये कविता लिख रखी है ! इसे ही छाप दे तू तो !






इब खूंटे पै पढो :-

जशोदा हरि इंगलिश पढावै !
मेरो कान्हा कान्वैंट जात है, इंगलिश में पोइम गावै !
टा टा कहि सुबह विदा लेत है, जशोदा का रोम रोम हरषावै !
आंटी सुनि गोपी बलि जावै, गोप अंकिल मूंछ फ़रकावै !
राक एंड रोल करत कजिन सिस्टर संग, नंद बाबा मुस्कावै !
बरसाने मे राधा या छवि को निरखत, अंग्रेजहु शरमावै !
राधा के बाबा ये देखत, राधा को भी कांवैन्ट स्कूल भिजवावै !
जशोदा हरि अंग्रेजी पढावै !



नोट :- शनिचरी पहेली न.२ कल सुबह 3.33 AM पर प्रकाशित होगी !

ताऊ का सैम और बीनू फ़िरंगी

सैम बहादुर धूप मे बैठे आराम से अखबार पढ रहे है कि इतनी देर मे पडौस से बालानी जी के   बीनू फ़िरन्गी ने झांक कर भौं .. भौं.. करके  नमस्ते की ! सैम ने   बडी बेरुखी से गर्दन झटक कर नमस्ते स्वीकार की ! मुझे लग गया कि दोनो मे कुछ मन मुटाव हो गया लगता है !

 

बीनू बोला - अमा  सैम भाई , क्या सुबह सुबह अकेले अकेले ही चाय पिओगे ? हमे नही पिलाओगे क्या ?

 

 

सैम - क्यों तू क्या मेरा रिश्तेदार लगता है ? और माफ़ करना मैं तुम्हारी तरह भुक्कड नही हूं ! मैं चाय तो ताऊ के साथ सुबह ६ बजे ही पी चुका ! और अब ९ बज चुके हैं और मैं चाय नही नाश्ते मे चिकन आलाफ़ूस खा रहा हूं !

 

अब चिकन आलाफ़ूस का नाम सुनकर बिनू फ़िरंगी जीभ लपलपाता आकर सैम के पास बैठ गया ! सैम ने एक प्लेट मे एक पीस चिकन आलाफ़ूस की उसको दी !

 

बीनू फ़िरंगी ने प्लेट हाथ मे ऊठाते हुये  कहा - यार सैम भाई, सुना है सानिया मिर्जा को चेन्नई युनिवर्सिटी ने डाक्टर बना दिया ?

 

सैम - हां बिल्कुल , हम तो अपने खिलाडियों, कलाकारो और नेताओं  का सम्मान करने मे कोई कसर नही छोडते ! पर तुम फ़िरंगियों ने आज तक बनाया किसी को डाक्टर ? अब बेचारे बीनू को मालूम हो तो बताये !

 

सैम फ़िर बोला - अरे तुम तो तुम्हारे इलाज करने वाले डाक्टरो तक की हर साल परिक्षा लेते हो कि वो इलाज करने लायक हैं कि नही ? तुमको उनकी काबिलियत पर ही भरोशा नही है  और एक हम हैं कि जिसको एक बार डाक्टर बना  दिया सो बना दिया ! मरते दम तक मरीज देखता रहे !

 

अरे हम तो लोगो का सम्मान और इज्जत करना जानते हैं ! हम तो हमारे ताऊ जैसे चमरटोली के ठल्लुओं को भी डाक्टर बना देते हैं ! सोचो, ताऊ जब डाक्टर बन कर मरीजो का इलाज करेगा तो मरीज बीमार पडने के पहले ही ठीक नही हो जायेगा ?

 

और सैम जैसे दोगली नस्ल के कुत्ते से कौन उलझे ? अगर काट खाये तो बीनू सरीखे कुत्ते को २८ इन्जेक्शन का डोज लेना पडे !

 

बीनू समझ तो गया था कि आज सैम का मूड कुछ उखडा हुआ  है सो उसको ठीक करने की गरज से बोला - सुना है यार अपने शहर मे कल तो  अब तक की सबसे बडी बै्क डकैती हो गई ? करीब ६० लाख की और वो भी दिन दहाडे , बैंक खुलते ही ?

 

सैम - अबे तो तेरा क्यों पेट दुख रहा है ? हमारा बैंक हमारे डकैत.. तेरे को क्यों दरद हो रहा है ?  तुमको सिर्फ़ हमे बदनाम करने से ही मतलब  है ! इसमे सकारात्मकता नही देखोगे तुम ?

 

आश्चर्य से बीनू फ़िरंगी ने पूछा - इसमे कैसी सकारात्मकता ? डकैती तो डकैती ही है हर हाल मे !

 

सैम - अबे फ़िरंगी..तुम्हारे यहां डकैती होती है तो साले डकैत तिजोरी तक ऊठा ले जाते हैं ! और यहां देखो ..बिचारे कितने शरीफ़ डकैत थे कि आधी तिजोरी का माल छोड गये जबकि पुलिस वगैरह कुछ नही थी ! जितना जरुरत थी उतना सब्जी के थैलों मे डाल के ले गये बिचारे ! बडे नैतिक हैं हमारे डकैत भाई भी !

 

बीनू फ़िरंगी - ये तो कोई कारण  नही लगता तुम्हारी बात सिद्ध करने का !

 

अब सैम गुस्से मे आ गया ! और बोला - अबे तू साले मुझे सिखायेगा ये बाते ? अबे तुम लोगो को अभी सूट तक तो सीलने नही आते और मुझे सीखा रहा है ये नीति  की गुढ बाते !

 

बिनू फ़ीरंगी - अब यहां पर ये सूट सीलने की कौन सी बात हुई ?

 

सैम - अबे तेरा राष्ट्रपति ओबामा जब शपथ लेगा , उस दिन जो सूट पहनेगा वो  इकबटनिया सूट तो होमी पटेल ही बनायेगा ना ! और ओबामा ने  २००४ मे सीनेट का चुनाव भी होमी पटेल का सूट पहन कर ही जीता था ! सैम ने अकड कर बताया !

 

बीनू फ़ीरंगी - यार सैम भाई , आप कैसी बहकी बहकी बाते कर रहे हो ? सूट पहन कर चुनाव जीतने का क्या सम्बन्ध ?

 

सैम - अबे तुम फ़िरंगियो पर तो  फ़िरंगी भी विश्वास नही करते ! क्या पता , सिलाई करते ही तुम एन्थरेक्स की पुडिया सूट मे रख कर सिलाई कर डालो !   ओबामा ने  इसी लिये् मुझसे  फ़ोन  करके किसी टेलर का नाम बताने को कहा तो मैने अपने होमी पटेल का नाम बताया ! मैं तो हमेशा उसके सिये हुये सूट ही पहनता हूं ! दुसरे किसी की फ़िटिंग ही मेरे को नही जमती ! 

 

अब तो बीनू फ़िरंगी ने माथा ठोंक लिया ! आखिर वो भी अमेरिकी फ़िरंगी था ! कोई कमजोर पडने वाला थोडे ही था ! वो बोला - यार सैम भाई , माफ़ करना यार ! तुम लोग बहुत ही ऊंची नीचीं देने वाले और एहसान फ़रामोश होते हो...

 

अब एहसान फ़रामोशी की बात पर सैम को मिर्च लग गई क्योन्कि सैम खुद धर्मेन्द्र  पा जी को कल्टी करके आया था ! और एक "अ" हटाकर जी को भी खम्बा बना आया था !

 

सो गुर्राते हुये बोला - अबे सुन बे ओ फ़िरन्गी की ओलाद.....अरे एहसान फ़रामोश तो सालो तुम हो हम नही ! अरे इससे बडा उदाहरण क्या होगा कि ताऊ बुश की पार्टी को तुम एहसान फ़रामोशों  ने हरवा दिया ?

 

बीनू फ़िरंगी ने माथा पीट लिया और समझ गया कि ताउ के साथ रहते रहते ये भी पक्का मुंह्जोर हो गया है ! अब इस गंवार और जंगली से पीछा कैसे छुडवाया जाये ? सो वो पीछा छुडाने की गर्ज से बोला - अच्छा मेरे बाप ..अब आप ही बता दो हमारी एहसान फ़रामोशी ?

 

सैम - देख बे फ़िरन्गी .. मुझे अपना बाप बता कर मुझे गाली तो दे मत और ना ही मेरे से रिश्तेदारी करने की कोशीश करना कभी ! मैं तुम्हारी रग रग पहचानता हूं ! अरे वो ताऊ बुश ही था जिसने  तुम अमेरिकियों को आतंक वादी हमलो से बचाने को अपनी जान जोखिम मे डाल दी और पार्टी को चुनाव मे हारने की भी रिस्क ऊठा ली ? 

 

और तुम एहसान फ़रामोशों ने उसकी पार्टी को  चुनाव मे हरवा भी दिया ! और एक हम हैं कि.........सैम थोडा तैश मे आगया था सो एक घूंट पानी का पिया और फ़िर बोलने लगा !

 

अब हमको देखो कि हम कितने एहसान मंद रहते हैं ?

 

अब बीनू पूरी तरह पक चुका था ! और मन ही मन कसम खाई कि आईन्दा इस साले सैम का चिकन आलाफ़ूस खाना तो दूर उसकी तरफ़ देखेगा भी नही ! सो अब वो बोला - भाई बतादे तेरी एहसान मन्दी भी ! फ़िर मुझे जाना भी है !

 

सैम बोला - अबे ठहर जाता कहां है ? पूरी बात सुन ! तुझे कौन सा दफ़्तर जाना है ? घर के बाहर बैठकर भोंकना ही तो है  यहां से बैठे बैठे भोंक लेना !

 

बीनू बोला - ठीक है भाई , बता !

सैम - देख ताऊ का दोस्त था रामदयाल ?  बोल - हां !

बीनू - हां  भाई हां .. बिल्कुल पक्का दोस्त था !

सैम - अब ताऊ उसको ठग कर पांच सौ चांदी के कलदार खा गया ! सबके सामने साहुकारी से ! अब बोल हां !

बीनू - बिल्कुल हां !

 

सैम - अब चुनाव मे ताऊ खडा हुआ तो रामदयाल ने वोट देकर किसको जिताया ? बीनू उसका मुंह देखने लगा तो सैम गुर्राकर बोला - अबे साले बोलता क्यों नही है ? क्या चिकन आलाफ़ूस की हड्डी गले मे अटक गई ?

 

बीनू डर के मारे बोला - रामदयाल ने ताऊ को जिताया !

 

सैम - हां तो ठीक और तुम लोगो ( अमेरिकी) ने किसको जिताया ? बीनू फ़िर चुप !

 

अब सैम बोला - अबे बोल ना ..ताले क्यों पड गये तेरी जबान पर ?

 

अब सैम के तेवर देख कर बीनू फ़िरंगी बोला - ओबामा को !

 

सैम - तो साले अब बता कि एहसान फ़रामोश कौन ? रामदयाल ने तो लुट कर भी दोस्ती निभाई और तुम लोगों ने  ताऊ बुश की लुटिया ही डुबो दी ! एहसान फ़रामोश कहीं के !

 

और सैम तैश मे आते हुये बोला - अरे जब तुम ही घर के होकर ताऊ बुश कि इज्जत नही करोगे तो फ़िर क्या इराकियों से ये उम्मीद करोगे ?

 

बीनू फ़िरंगी का इराकीयों के नाम से ही मुंह कडवा हो गया और बोला  -  अब ये इराकीयों को कहां से  बीच मे ले आये ?

 

सैम बोला - अबे ओ फ़िरंगी की ओलाद.. ज्यादा भोला मत बन ! मुझे सब मालुम है कि कल ताऊ बुश जब जोश जोश मे अपना आखिरी भाषंण  देने अचानक इराक पहुंच  गये  थे तो एक ईराकी पत्रकार ने उनके मुंह पर सरे आम जूता फ़ेंक कर मारा और   यह कहा कि  " कुत्ते ... ये होता है अलविदा "  और एक नही दो दो जूते फ़ेंके !

 

बीनू फ़िरंगी - यार सैम भाई इस तरह की गप्पे मत ऊडाया करो ! वो तो खुद ताऊ बुश ने कहा कि शायद दस नम्बर का जूता दिया होगा क्योंकि ताऊ बुश खुद दस नम्बरी हैं ! 

 

सैम - अबे ये गप्प नही है ! मैं तो दुनियां की सारी भाषाये जानता हूं ! अरबी मे उसने यही कहा था " कुत्ते ... ये होता है अलविदा " ! विश्वास नही हो तो तेरे घर फ़ोन लगा के पूछ ले !

 

 

 

  इब खूंटे पै पढो :-

  

 

  गांवों  मे अंग्रेजी का पहले बडा हौवा था ! एक बार गांव मे दुसरे गांव का

  अंग्रेजी  पढा  लिखा आदमी आगया ! और उसने कहा कि तुम्हारे गांव मे

  कोई अंग्रेजी नही जानता ! अगर जानते हो तो इस वाक्य की हिन्दी करके

  बताओ ! पहले गांवों मे अंगरेजी के जानकार इस तरह अपना रौब झाडा करते थे !

 

  "more people in india live in villeges than cities"

 

  इब गांव मे कोई पढे लिखे तो थे नही सो किसी के कुछ समझ मे नही

  आया ! ताऊ के बाबू (पिताजी) को बडी बेइज्जती लगी !

 

  सो उन्होने ताऊ को बुलवा कर कहा  - अरे छोरे..तू कित  हांडता (घूमता) फ़िरै सै ?

  तन्नै इतना पढाया लिखाया और तू  पांचवी क्लास फ़ेल होकै भी इस

  अंग्रेज की औलाद तैं गांव आलो की बेईज्जती करवावै सै ?

  यो के बोल रया सै ? इसकी हिन्दी करके बता जरा गांव वालो को !

 

  ताऊ बोला - बाबू यो के बात कह दी थमनै ? इब की इब हिन्दी कर देता हूं !

  और उपर वाले वाक्य की ताऊ ने हिन्दी कर दी :-

 

  भारत के गांवों मे मोर (peacock) पीपल (पीपल का पेड) पर सीटी

  बजाते हुये   पाये जाते हैं !

 

  इब सारे गाम आले एक साथ बोल पडे - वाह भाई छोरे वाह , तन्नै तो सारे गाम

  की आज इज्जत राख ली !

 








ताऊ भारी बहुमत से चुनाव जीता

कल शाम को सैम और  बीनू फिरंगी बाहर से फ्रेश होकर आए तो दोनों बडे दार्शनिक की तरह चिंतन और बातों में लीन दिखे !

प्रदेश के चुनाव नतीजे कल दोपहर बाद  घोषित हो गए थे ! अभी तक सांपनाथ पार्टी की सरकार थी और वापस सान्पनाथों  की सरकार बनने के सारे रास्ते साफ़ हो चले थे ! उम्मीद के विपरीत ताऊ जो शुरुआत में ४ हजार वोटो से हार रहा था नागनाथ से , वो अब दस हजार वोटो से जीत चुका था !

 

बीनू फिरंगी - यार सैम ये तो गजब हो गया यार ! इस रामदयाल को शर्म भी नही आती ? फ़िर से ताऊ को वोट देकर जितवा दिया ? इतना लुट पीटकर  भी ! ताऊ एक नंबर का मक्कार और डाकू , ठग लुटेरा ..उठाई गिरा ... और चुनाव जीत गया ...?

 

सैम - बस यार बीनू भाई ...तू नही समझेगा...ये तेरा अमेरिका नही है... वहाँ का मुझे नही मालुम ! पर हमारे यहाँ तो ताऊ ही चुनाव लड़ और जीत सकता है ! और कोई नही !

 

बीनू फिरंगी - कैसे ?

 

सैम - देखो , ताऊ पिछली सरकार में मंत्री था ?

 

बीनू बोला -- हाँ था !

सैम बोला - ताऊ ने इतनी लुट मचाई थी की उसका टिकट ही कट हो गया था ! पर फ़िर भी ताऊ ने अपनी सीट तो अपने पट्ठे को दिलवा दी और ख़ुद ने  ग्रामीण क्षेत्र से टिकट जोगाड़ लिया !

बीनू फिरंगी - पर इतने मक्कार आदमी को टिकट मिला कैसे ?

सैम - क्योंकि वो ताऊ है !

बीनू फिरंगी - चलो ये भी मान लिया की टिकट का जोगाड़ ले दे के कर लिया होगा पर जीता कैसे ? और वो भी ग्रामीण से ?

सैम बोला - यार बीनू , तुम फिरंगी लोग दुसरे कामो में हमसे सालो आगे होगे पर चुनाव प्रबंधन में तुम लोग कहीं नही लगते ! अगर हमारा ताऊ तुम्हारे वहाँ खडा हो जाए तो सबकी जमानत जब्त करवा दे !

 

अब बीनू ने पूछा की मेरे यह नही समझ आया की जिस ग्रामीण से ताऊ ने चुनाव लड़ा था वो नागनाथो की परम्परागत सीट थी ! और ताऊ की पार्टी सांपनाथ पार्टी ने ताऊ को निपटाने के लिए ही टिकट दी थी पर ये उलटा खेल कैसे हुआ ?

 

सैम बोला - देख यार बीनू भाई ! तुमने मुझको परसों ही बड़ा भाई बनाया है सो तेरे को मैं बता देता हूँ ! पर किसी को कानो कान ख़बर नही होनी चाहिए ! नही तो मेरा दाना पानी यहाँ से खत्म हो जायेगा ! और अब मुझे ताऊ के साथ मजा आने लग गया है सो

मैं छोड़ कर जाने वाला नही हूँ !

 

बीनू फिरंगी बोला - यार सैम भाई , आप भी कैसी बातें करते हो ? हम फिरंगियों ने आज तक किसी को नही छोडा तो फ़िर मैं आपका साथ कैसे छोडूंगा ? आप तो बेखटके बताओ !

 

सैम - देख यार बीनू ! तू बताना मत ! वो तो मुझे इसलिए मालुम है की ताऊ समझता है की मैं इंसानों की भाषा बोल और समझ नही सकता सो मेरे सामने ही ये सब प्लानिंग कर लेता है !

 

वरना ये तो बहुत ही गोपनीय बात है ! और तू जानता है की मैं घाट घाट का पानी पीया हुआ हूँ ! और दुनिया की सारी भाषाए जानता हूँ !

बीनू फिरंगी ने सैम को चने के झाड़ पर चढाते हुए कहा - अरे सैम भाई ! आप तो भाषाओं के मामले में सरस्वती के अवतार हो ! मैंने आज तक आपके जितना विद्वान् कोई दूसरा नही देखा ! बीनू ने अपना चढाने का अमेरिकी पैंतरा फेंका !

 

अब सैम बोला - जब चुनाव की तैयारी शुरू हुई तब ताऊ ने अपने चुनाव क्षेत्र के सब पञ्च सरपंचो को बुलाया जो की ६० या ६५ के करीब थे ! सो इनके लिए इतनी ही महंगी गाडिया खरीदी गई और उन पर फाईनेंस भी उन लोगो के नाम से ही करवा दिया ७५ % का ! बाकी २५ % ख़ुद ने दे दिए !

 

और ताऊ ने कहा - देखो भाईयो , अब अगर तुम चुनाव जितवा दोगे तो गाडी की बाक़ी किश्ते मैं चुकवा दूंगा ! और नही जितवाया तो अपनी अपनी ख़ुद भर लेना ! सो सारे लोग जो ताऊ की खिलाफत में थे वो सब जुट गए ८ लाख की गाडी पुरी डकारने में !

 

बीनू फिरंगी - चुनाव खर्च की सीमा .....?

अब और खुलासा करते हुए सैम ने बताया - हर कार्यकर्ता को मुंह मांगी रकम दी गई ! चुनाव आयोग क्या खर्चे का हिसाब मांगेगा ? अब पुरे क्षेत्र के मंदिरों में भंडारे चल रहे हैं ! कहीं भजन संध्या चल रही है ! कहीं ताऊ ख़ुद भजन सुना रहे हैं !  ये किस के दम पर ? ये सारे ताऊ के दम पर ही चल रहे हैं! सब कार्यकर्ता वहाँ पर ही आनंद करते हैं ! और मंदिरों से तो चुनाव आयोग खर्च का हिसाब मांगने से रहा !

 

बीनू फिरंगी - वाह यार सैम ! ताऊ तो बड़ा शातिर दिमाग है ! मैंने सुना है ताऊ बड़ा गरीबी में हुआ करता था !

सैम - भई बीनू, अब ये देखले.. की ताई तो एक छोटी सी पान की दूकान चला कर घर चलाया करती थी ! बच्चे सरकारी स्कुलो में पढ़ते थे ! और पिछले पांच साल से  ताऊ मंत्री बने तबसे उनके बच्चे अमेरिका और इंग्लैंड में पढ़ते हैं !

 

खपरैल का एक टूटा फूटा घर था ! अब पता नही कितने अनगिनत बंगले और कोठियां हैं ! और अंट संट बैंक बैलेंस हैं स्विस बैंको में !

 

अब बीनू फिरंगी बोला - यार सैम भाई , कल बड़ी गाने की आवाजे आ रही थी तुम्हारे घर से ?

सैम - यार अब हर बात मुझे ही बतानी पड़ेगी क्या ? ताऊ ने आज जीतने के बाद टी.वी. वालो को नही बताया था की मुझे मालुम था की मैं चुनाव जीता हुआ ही हूँ और कल के बाद मुझे जनता की सेवा से  समय नही मिलेगा अपने लिए ! सो मैंने दिन भर पियानो बजाया कल छुट्टी मनाते हुए ! अब रामदयाल की सेवा शुरू करनी है !

 

बीनू -- यार पियानो तो बहुत महंगा बाजा आता है लाखो का ? ताऊ कहाँ से ले आया ?

सैम - अब ये छोडो बीनू भाई ! बस समझ जाया करो ! जिस आदमी पर  स्विस बैंको में पैसा रखने  का शक किया जाता हो वो पियानो तो जरुर रखता और बजाता होगा  ! अब रामदयाल की तरह पेटी हारमोनियम बजाने आले तो स्विस बैंको में खाता खुलवाने से रहे ! ये तो  ताऊ जैसे लोग हैं दुनिया में  , नही तो स्विस बैंको में ताले पड़ जाए !

 

बीनू ने आश्चर्य से पूछा - सैम भाई , फ़िर तो आपके ताऊ की अबकी बार मंत्रिमंडल में और भी बड़ी हैसियत हो जायेगी !

सैम - अब ये भी कोई बताने वाली बात है ? पहले ताऊ सांपनाथ पार्टी में अजगर की हैसियत रखता था ! पर अबकी बार ताऊ ने नागनाथो से परम्परागत सीट छुड़वाकर अपनी पार्टी में अपने लीये एनाकोंडा ( नीतिनिर्धारक करने की हैसियत वाला मंत्री ) वाला स्थान बना लिया है !

 

और यार बीनू बात मेरे पेट में पच नही रही है तेरे को बताये बिना ! इसलिए तेरे को विद्यामाता की सौगंध है की किसी को बताना मत वरना मेरी बेईज्जती की इज्जत खराब हो जायेगी !

 

बीनू फिरंगी बोला - अरे नही यार सैम .. चल तू कहता है तो मैं विद्यामाता की कसम खाता हूँ ! तू बेफिक्र होके बता !

 

अब सैम बोला - बीनू भाई ! देखना मेरी इज्जत रख लेना ! बात ये है की आज ही ताऊ को मैंने ताई से बात करते सुना था की अबकी बार इस मुख्यमंत्री   की  खटिया खडी करनी है जिससे मैं ही मुख्यमंत्री बन जाऊ !

 

और दुसरे अब तो सैम के नाम का भी स्वीस बैंक में अकाउंट खुलवाना पडेगा ! अरे बीनू भाई , ज़रा सोचो ..मेरे नाम का स्विस बैंक अकाउंट .. कितना रोमांचित हो रहा हूँ मैं ?  ताऊ मेरा कितना ख्याल रखता है ?

ताऊ का सैम और बीनू फिरंगी

कल दोपहर बाद की बात है ! घर सैम के हवाले करके हम सब घरवाले बाहर गए थे और शाम को ४ बजे हम वापस आए तो देखा की सैम साहब पड़ोसी बालानीजी के फिरंगी कुत्ते ( शुद्ध जर्मन शेफर्ड ) के साथ बाहर बैठा शाम की चाय पी रहा था !

 

 

हमे ताज्जुब हुआ ! क्योंकि सैम को हमने लिया तो फिरंगी समझ कर ही था पर पता नही कैसे एंग्लो इंडियन निकल गया ! जब तक उसकी जात मालुम पडी तब तक उसे वापस करने के बजाए उससे प्रेम हो गया !

 

 

अब सैम इतना चालु क्यों है ये आप सबको समझ आ गया होगा ! क्योंकि दोगली नस्ल का है ! पड़ोसी का कुता बीनू ख़ुद को उंची नस्ल का समझ कर सैम से बात कम ही करता था ! क्योंकि वो भी नस्ल भेद को मानकर ऐंठा रहता था !  सो आज स्वाभाविक रूप से हमको ताज्जुब होना ही था !

 

 

हमने  चुपके  से  आकर उनकी बातें सुनने की कोशीश की ! उन दोनों में कुछ यो बातें हो रही थी !

 

 

बीनू - यार सैम भाई , मैंने सुना है की यहाँ के नेता  तो बहुत ही खतरनाक हैं ! कितने ओछे हैं ! नारायण राणे ने कैसी कैसी दोगली बातें की ? सुना  तुमने ? जिस हांडी में खाया उसी को फोड़ने लग गया सत्यानाशी कहीं का !

 

 

सैम - हाँ यार सुना तो मैंने भी है ! उसको सी.एम्. नही बनाया तो बिलासराव देशमुख  पर इल्जाम लगा दिया की आतंकी हमले का दोषी भी बिलास राव है !

 

 

अभी तक तो आतंकी हमलो की तेरहवीं भी नही हुई है और ये हमारी तरह लड़ने लग गए हैं ! सैम ने चुटकी लेते हुए कहा !

 

 

बीनू बोला - सैम भाई माफ़ करना , अभी तक मैंने तुमसे ठीक व्यवहार नही किया पर आइन्दा ऐसा नही करूंगा ! तुम मेरे बड़े भाई हो आज से !

 

 

सैम ने समझ लिया की ये साला अमेरिकी फिरंगी है ! आज इसकी जान आफत में आई है तो मेरे पास आया है ! वरना मेरे को हमेशा देशी कह कर मखोल उडाता था !

 

 

मुझ देशी पर रोज अत्याचार होते  रहे पर ये ससुरा हमेशा ही मेरे ख़िलाफ़ माहोल बनाता रहा ! जैसे अब अमेरिका को भारत के पक्ष में झूंठे आंसू बहाते देखा जा रहा है !

 

 

अब बीनू बोला - यार सैम भाई , इन नेताओं की तो क्या बताऊ ? एक तरफ़ कुर्सी के लिए लड़े जारहे हैं ! दूसरी तरफ़ जो शहीद हो गए उनको "अ"हटाकर जी ने खुले आम गालिया दी ! कोई कुछ नही बोला !

 

 

आर आर पाटिल ने कह दिया की ५००० हजार की जगह हमने दौ सौ लोग ही मरने दिए ! कितना बड़ा काम किया ? उसका कोई इनाम तो भाड़ में गया उल्टे स्तीफा देना पड़ गया !

 

 

लो बोलो ! इनको तो टाडा में अन्दर करना था ! सिर्फ़ स्तीफा ही लिया ! जहाँ के नेता और सरकार इतनी निक्कमी हो मैं तो वहाँ अब एक पल भी नही रह सकता !

 

 

सैम बोला - यार बीनू भाई अब कहाँ जाओगे ?

 

 

बीनू  बोला - मैं तो मेरे वतन बिलायत वापस चला जाउंगा ! वहाँ कम से कम कद्र तो है ! वहाँ की सरकार कुछ करती तो हैं ! यहाँ तो आदमी और कटने वाले बकरे में कोई फर्क ही नही है !

 

 

कितने लोग बेमोत मारे गए ? उनकी शहीदी को प्रणाम करना तो दूर  उल्टे "अ"हटाकर सरीखे नेता उनकी शान में गुस्ताखी करते रहे और कोई यहाँ बोलने वाला नही है ! 

 

 

अब सैम थोडा तैश में आके बोला - यार तू अंग्रेज की औलाद हो रहा  है तो जा वहाँ कौन सा  तेरे को परमवीर चक्र मिल जायेगा ? अरे जनता तो यहाँ की हो या वहाँ  की ! उसे तो नेताओं के हाथ जलील ही होना है !

 

 

अब बीनू गुस्से में आगया और बोला - बस सैम भाई बस ! अब बहुत हो गया ! यहाँ की जनता और वहाँ की जनता में बहुत फर्क है ! तुम्हारी मुम्बई में इतने लोग मर गए और तुम्हारी सरकार ने उनको बेईज्जत करने के सिवाए कुछ नही किया !

 

 

वो तो ख़ुद ही कुर्सी की लड़ाई लड़ रहे हैं उनको आतंकवादियों को रोकने की या जनता की चिंता करने का समय ही कहां मिलता है ?

 

 

और एक तरफ़ इजराईल को देखो !

अब सैम ने नजर तीखी करते हुए पूछा  - बीनू , तेरा दिमाग तो नही खिसक गया ! अब ये इजराइल कहाँ से आगया ?

 

 

बीनू कटाक्ष पूर्वक बोला - अरे तुमको इजराईल नही दिख रहा है  इसी से मालुम पड़ता है की यहाँ के "अ"हटाकर जैसे नेता जनता को सिर्फ़ भेड़ समझते हैं और कुछ नही !

 

 

थोड़ी तेजी से बीनू बोला -  तुमको मालुम है मोशे जब अपने मृतक मा बाप की लाशो के बीच खून में सना बैठा था तब उसकी आया सैन्ड्रा सेम्युअल जो स्टोर रूम में छुपी बैठी थी !

 

 

उसने जब नन्हे मोशे की रोने  की आवाज सुनी तो चलती गोलियों में उसको उठाकर सुरक्षित बाहर ले आयी ! और इस काम के लिए इजराइल सरकार ने सैन्ड्रा को इजराईल के सबसे  बडे सम्मान से नवाजा !

 

और यहाँ शहीदों और मृतकों का अपमान करने के सिवाए इन नेताओं ने क्या किया ? कितनो को  सर्वोच्च  सम्मान दिया ? यहाँ भी ना जाने कितने मोशे जैसो की जान बचाई गई !

 

 

अब सैम भी बीनू फिरंगी के मुंह की तरफ़ देखे जा रहा था ! और मेरे भी कान सुन्न हो गए थे !

ताऊ का सैम और "अ" हटाकर अच्युतानंदन

मेरा कुता सैम ( ताऊ बुश से क्षमा याचना सहित , हालांकि तीन साल पहले पाले गए इस स्वामिभक्त के नामकरण में मैं उनसे प्रभावित जरुर था ! )  आज सुबह ही भास्कर अखबार में आँखे गडाकर पढने की कोशीश कर रहा था ! कोशीश इसलिए की सैम भी रामदयाल की तरह पढने लिखने में काफी कमजोर था !

 

 

मैंने उसे पढाने की बहुत  कोशीश की थी पर उसने सारे ट्यूटरों को,  ताऊ बुश ने जैसे आतंकी भगाए थे,  उसी स्टाईल में भगा दिया ! और अब पढने के नाम पर सिर्फ़ अक्षर जोड़ जाड कर किसी तरह पढ़ लेता है ! मेरी सुबह की चाय पर वो ही मेरा साथी होता है !

 

 

मैं भी सुबह की धूप सेकते हुए वहीं बैठ कर, चाय पीते हुए ,  अखबारों के व्यापार परिशिष्ट देखते जारहा था ! 

 

 

सैम को आज इतनी शिद्दत से अखबार पढ़ते देख कर मुझे बड़ा अटपटा लगा ! मैंने सैम से पूछा की भाई रोज तो तू मेरे अखबारों से दुश्मनी निकालता है  और उनको फाड़ कर फुटबाल खेलता है ! आज तेरे को क्या सरदी लग रही है  जो बड़े आराम से एक ही पन्ने को इतनी देर से पढ़े जारहा है ?

 

 

अब लगता है सैम तो मेरे पूछने के इंतजार में ही था ! वो बोला - ताऊ , आपके रहते ये "अ" हटाकर अच्युतानंदन शहीद मेजर उन्नीकृष्णन के पिताजी को कह गया की तेरे घर कोई कुत्ता भी नही झांकता अगर तेरा बेटा शहीद नही होता तो !

 

 

मुझे बड़ा गुस्सा आया की उस  "अ"  हटाकर अच्युतानंदन ने शहीद को भी गाली दी और वो भी मेरे नाम पर ? और आप चुप रह गए ! कहाँ गया था आपका वो लट्ठ उस समय ? क्या मैं आपको ऐसा नालायक लगता हूँ ?

 

मैंने कहा की भाई सैम तू तो बड़ा स्वामिभक्त और लायक है ! इसमे कोई संदेह ही नही है ! पर तू नाराज क्यों हो रहा है ? तेरे को थोड़े गाली दी थी बस तेरा नाम लिया था !

 

 

सैम बोला - ताऊ सब समझता हूँ इन "अ" हटाकर अच्युता नन्दनो    को ! हमारे नाम को  भी गाली समझकर इस्तेमाल करते हैं ! मैं शहीदों का अपमान बर्दाश्त नही कर सकता ! और मैंने इसको सबक सिखाने की ठान ली थी !

 

 

मैंने बड़े आश्चर्य से पूछा - यार सैम क्यूँ उंची दिए जारहा है ?  कहाँ तू,  ताऊ का कुत्ता और कहाँ वो केरल का चीफ मिनिस्टर ?

 

 

saim सैम गुस्से से बोला - ऐसी तैसी साले "अ" हटाकर अच्युतानंदन की तो ! मैं सीधे उसके घर गया और साले को खम्बा समझ कर उस  पर टांग उठाकर पेशा...............  कर आया ! अब मुझे क्या मालुम था की कैमरामैन और पत्रकार भी वहीं पर हैं !

 

 

ये देखो भास्कर वाले ने मेरी इस करतूत की फोटो खींच ली और अपने अखबार में छाप दी ! वो मुझे अखबार में छपी अपनी ये फोटू दिखाते हुए बोला !

 

( कार्टून दैनिक भास्कर के सौजन्य से )