पिछले सप्ताह से सब परेशान थे कि अचानक ऊडनतश्तरी यानि गुरुदेव समीर जी किधर गायब हो गये ? और स्वाभाविक ही है कि अगर कोई पोस्ट लिखी जाये और उस पर समीर जी की टिपणी ना हो तो ये पोस्ट लिखने वाले नये या मेरे जैसे सामान्य ब्लागर के लिये तो बहुत निराश करने वाली बात है पर उस पोस्ट पर समीर जी की टिपणी का ना होना ब्लागिंग के शीर्ष पुरुष आदरणीय ज्ञानदत्त जी पान्डेय को भी आश्चर्यचकित करती है !
अभी १३ दिसम्बर को उन्होने एक बडी मस्त चकाचक पोस्ट लिखी "ढिंचक लेखन" !
देखिये इस पोस्ट की चंद लाईने :-
"अभी अभी एक नये ब्लॉग की खबर चिठ्ठाजगत ने दी है अपनी ई मेल के माध्यम से। ब्लॉग है – मेरी कलम, मेरे जज्बात। मैं चला गया पोस्ट पर। तीन कमेण्ट थे। मैने सोचा एक उड़न तश्तरी (समीर लाल) का अवश्य होगा। पर नहीं। पहला कमेण्ट रोमनागरी में किसी सिम्मी जी का था।
अब दो चीजें – समीर लाल जी से पहले हम कैसे पहुंच गये नये ब्लॉग पर! और दूसरे, इतना बढ़िया टिप्पणी मेरी किसी पोस्ट को क्यों न मिल सकी अब तक? "
कहने का मतलब ये कि हर आदमी समीर जी की अनुपस्थिति को बडी शिद्दत से महसूस करता है ! और ऐसा नही है कि सिर्फ़ हम ही महसूस करते हैं बल्कि वो भी ऐसा ही महसूस करते हैं जब वो किन्ही निजी कारणों वश हमारे बीच नही रहते !
तभी तो आज रात को करीब दस बजे उनका फ़ोन आया कि ताऊ आप तो सो गये होगे ? हमने कहा कि गुरुदेव आपने ये ब्लागिंग की दीक्षा दे दी है सो अभी से सोने का क्या काम ? अभी तो ताई ने डिनर भी नही खिलाया है !
जैसा कि उनका विनम्र स्वभाव है उन्होने ये सूचना आप सब तक पहुंचाने के लिये कहा है कि एक तो उनको अभी नेट कनेक्शन मे बडी दिक्कत है सो वो हम सब के साथ सम्पर्क नही कर पा रहे हैं !
दुसरे उनके चिरंजीव ( बेटे ) की शादी २५ दिसम्बर की है सो उसकी तैयारियों मे उनकी अति व्यस्तता है इस वजह से भी वो अभी ब्लागिन्ग से दूर हैं और हम सबको मिस करते हैं ! २८ या २९ दिसम्बर को वो शादी विवाह के कार्य क्रमों से निवृत हो कर हम सब के बीच पुर्व वत नियमित रहेंगे !
श्री गणेश जी उनके पुत्र के विवाह समारोह के सब कार्य क्रमों को बडे आनन्द पुर्वक सम्पन्न करवायेंगे ऐसी गणेश जी से प्रार्थना है ! उनके चिरंजीव (पुत्र) और होने वाली पुत्र वधु को अग्रिम में शादी की अनन्त शुभकामनाएं और आशिर्वाद ! उनका दाम्पत्य जीवन सुखमय और मंगल मय हो यही प्रभु से प्रार्थना !
| इब खूंटे पै पढो :- भाई यो बात सै तब की जब ताऊ बस कंडक्टरी करता था ! ताऊ की हो गई किसी तरियां शादी ! इब सुहाग रात आले दिन ताई खटिया के बीच म्ह घूंघट काढकै बैठी थी ! ताऊ कमरे म्ह पहुंचा और ताई को खटिया कै बिचालै म्ह बैठी देख कै बोल्या - अरे थोडी सी परै नै हो ले , आडे एक सवारी और बैठेगी ! |