"ताऊ की शोले" की युनिट की तरफ़ से हार्दिक बधाईयां
श्रीमती और श्री समीरलाल जी आप दोनो को ईश्वर सुख शांति के साथ सम्रूद्ध दाम्पत्य जीवन प्रदान करें.
समीरलाल जी के बारे मे तो आप सब कुछ जानते हैं. वो तो जन जन के प्रिय हैं, इसलिये उनके बारे मे आप सब कुछ जानते हैं. उनका एक साक्षात्कार हमने उनके भारत प्रवास के दौरान लिया था जो आप ताऊ डाट इन पर पढ ही चुके हैं.
आइये आज के इस शुभ दिन हम आपको थोडा बहुत उस शख्सियत के बारे मे बताते हैं जिनको समीरजी की सफ़लता और उनको बनाने का श्रेय जाता है. जिन्हे आप जानते हैं श्रीमती साधना भाभीजी के नाम से.

-आपका बाहर का नाम है श्रीमती साधना लाल ,
-आपका जन्म पुर्णीमा को हुआ तो घर का प्यार का नाम है पूनम.
-शिक्षा : एम ए हिन्दी साहित्य में. ..गोल्ड मेडेलिस्ट.
-जन्म से शादी तक आप मिर्जापुर, उ.प्र. में रही !!
-जन्म - १९ अक्टूबर.
-भाषा ज्ञान : हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी और फ्रेन्च मे बराबरी की दखल.
- राज की बात : समीरजी फ़्रेंच बोल ही नही पाते अत: जब मांट्रियल या पेरिस वगैरह में कहीं कहीं बिना फ्रेन्च जाने काम नहीं चलता तब उनके भरोसे ही रहते हैं.
- खास शौक : बागवानी का बेहद शौक मगर खरीददारी से थोड़ा सा कम.
-बडा शौक : फ़िर से खरीददारी, अगर बाजार २४ घंटे खुला रहे तो दर्शन पाना भी मुश्किल हो जाये.
-प्राथमिकता : उनका परिवार, और उसके सदस्यों के आगे सब कुछ नगण्य.
-अन्य शौक : साफ सफाई और घर को फाईव स्टार होटल बना कर रखने का ऐसा जज्बा कि समीरजी को रहते हुए डर लगता है कि कहीं गन्दा न हो जाये.
- हिम्मत : बहुत हिम्मति मगर सिर्फ़ परिवार के लिए.
श्रीमती और श्री समीर जी दोनों बेटो के साथ
- भावुकता : बहुत ज्यादा, यहाँ तक की परिवार में पल रहे जानवरों के लिए भी बहुत भावुक.
- सेवा : समाज सेवा में अव्वल, ..हर साल भारत में दान पुण्य, गरीबों में कम्बल बांटना, नौकरों के बच्चों की शादी में आर्थिक योगदान करना आदत का हिस्सा.
- जीवन का अर्थ : अपना घर , अपने लोग, अपना सम्मान.
-हमेशा सही : बेटे और बहु
साधना भाभीजी दोनों बेटो और बहू के साथ
अपने परिवार में पांच बहन और एक भाई के बीच, तीसरे नम्बर पर. कुछ अधिकारों में छोटा होने की वजह से कमी रह गई होगी..वो हमेशा समीरजी पर पूरी होती है.
-संगीत : प्रयाग संगीत समिति से संगीत विशारद
-गायन : रियाज कम होने के बावजूद भी लाजवाब गाती है.
-कनाडा में इतने बरस रह कर भी संस्कृति और धर्म का सम्मान
-कहीं भी हो, सात बजे शाम गुरु जी की पूजा, देवघर वाले श्री अनुकुल जी महाराज (राधा स्वामी सतसंग) की दीक्षा प्राप्त भक्त.
-अनुशासन : चाहे पति या बच्चे, भंग होते सह पाना उनके लिये संभव नहीं.
अब इतनी बातें तो हमने पता करली जो आपको बतादी. फ़िर हमने उनके बारे मे समीरजी से पूछा. अब समीरजी ने उनके बारे मे निम्न विचार प्रकट किये.
-भयंकर आत्मविश्वासी -हिम्मती और विपरीत परिस्थियों में संबल प्रदान करने वाली पर सामान्य परिस्थितियों में बेवकूफी की आशा करने योग्य.
-दिमाग की बजाय घर के मामले में दिल से विचार करने वाली
-सामान्य भारतीय महिला.
-अगर हम भारत बसना चाहें या कनाडा - सब हम पर - इस मामले में पति की इच्छा सर्वोपरि.
जब जीवन मे इस स्तर का हमसफ़र मिल जाये तो सुख सौभाग्य और सम्रूद्धि तो कदम चूमती ही है.
पुन: आप दोनो के सुखद, स्वस्थ और सुदीर्घ दाम्पत्य जीवन की शुभकामनाएं. ईश्वर आपको और आपके परिवार को उन्नति पथ पर अग्रसर रखें.
