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एक गधे के इश्क की दास्ताँ

कहानी किस्से कहना सुनना ही लोग भूल चुके हैं तो आज आपको एक किस्सा सुना रहे हैं पर आप लोग ये मत  समझना कि मैं आपको ऐसे ही कोई ऐरी गैरी कहानी सुना रहा हूं. आप अब कोई बच्चे तो हो नही जो मैं आपको बहलाने के लिये कुछ भी कहानी किस्सा जोड जाडकर सुना दूं...ये कहानी बिल्कुल खरी सौ प्रतिशत सही है, तो सुनिये...
....... 

एक था गधा... और वो भी था एक धोबी का गधा..अब आप पूछोगे कि ताऊ ये कौनसे जमाने की बात है ? आज कल ना तो धोबी रहे और ना उनके पास गधे? अब जो धोबी थे उन्होंने लांड्रियां खोल ली और गधे की जगह स्कूटर ने  ले ली.......फ़िर ये धोबी और उसका गधा कहां से टपक गये आपकी कहानी मे?

बिल्कूल भाई... थारी बात भी कती सांची सै,  पर यार ये तो सोचो की सारे कुओं में ही भांग थोडेई पडगी सै ? अरे भाई थोडे बहुत परम्परावादी धोबी आज भी जिंदा सैं और उतने ही परम्परा वादी और वफ़ादार उनके गधे भी मौजूद सैं....भाई यकिन ना आरया हो तो आजाना ताऊ के धौरै (पास)... आपको मिलवा देंगे,  इस परंपरावादी  ज्ञानी धोबी और उसके गधे चन्दू से.

ये दोनों यानि ज्ञानी धोबी और  चंदू गधा, बडे मजे मे थे.  रोज सुबह धोबी अपने जवान गधे पर कपडे लाद के, छोरियां के कालेज कै सामने से होता हुया कपडे धोनै जलेबी घाट जाया करता और धोबी जब तक अपने कपडे धोता तब तक चन्दू गधा नदी किनारे की हरी हरी घास खाया करता.  फ़िर भी समय बचता तो ठंडी छांव मे लोट पोट हो लिया करता. चंदू इतना सुथरा और गबरू गधा था की , आप पूछो ही मत.....ये तो ज्ञानी धोबी ने इसका नाम चंदू रख दिया, इसकी जगह सलमान या शाहरूख भी रख देता तो सही होता क्योंकि इस गबरू गधे के सामने ये दोनों हीरो बिल्कुल जीरो ही लगेंगे आपको.

कभी चंदू गधे का मूड आजाया करता था तो नेकी राम की रागनी भी बडे उंचे सुर मे गा लिया करता था.... और भाई बडा सुथरा गाया करै था....राग खींचने में तो इसको महारत हासिल थी. अच्छे से अच्छा और बडे से बडा गवैया भी इसके सामने पानी भरता ही नजर आता. पर पता नही यो गधा कुण सी जात का था कि इतना सुन्दर, जवान और पक्के रागों का जानकार  होने के बाद भी इसने कभी किसी पराई गधी पर बुरी नजर नही डाली....और ना ही कभी किसी गधी पर लाइन मारने की सोची...किसी शरीफ़ प्रजाति से ताल्लूक रखने वाला रहा होगा.

वहां जलेबी घाट  पर दुसरे धोबियों और कुम्हारों की सुन्दर सुन्दर और जवान गधियां भी आया करती थी. कोई कोई कपडे और मटकों को लाद कर आती थी तो कई यों ही मटरगश्ती करने चली आती थी. कुछ दिनों से ये देखने में आ रहा था कि जलेबी घाट पर जवान और शोख गधेडियों की आवक जावक बहुत बढ गयी थी. जब इतनी सजी धजी गधेडियों की आवक बढ गई तो स्वभाविक ही था कि आवारा और मटरगश्ती वाले गधों की भी बाढ सी आगई थी वहां. हर कोई महंगे से महंगे मोबाईल हाथ में थामे...अपनी पसंद की गधेडी पर लाईन मारने की कोशीश में लगा रहता था. बस यूं समझिये कि ये धोबी घाट ना होकर कोई कोचिंग क्लास का अड्डा हो गया था जहां कई तो तफ़रीह बाजी करने के लिये ही एडमिशन ले लिया करते हैं.

पर मजाल जो कभी चन्दू गधे  ने सजी धजी गधियों की तरफ़ नजर उठा कर भी  देखा हो.  हालांकि ये और बात है कि चन्दू की हीरो टाईप बाडी और शराफ़त को देखते हुये,  उसको रिझाने के लिये काफ़ी सारी गधियों ने बहुत सारी कोशिशें की जो सब बेकार ही गई,  यहां तक कि उन पुरातन पन्थी गधियों ने भी टाइट जीन्स और लांडी कुर्ती भी पहनना शुरू कर दिया पर वो चन्दू का दिल नही जीत सकी. उनका लांडी कुर्ती और टाईट जींस पहनना भी बेकार साबित हुआ.

चंदू था ही इतना शरीफ़ कि, जब वो लंच करता हुवा यानि घास चरता हुवा कभी कभार भूलवश  इन गधियों के झूंड के बीच पहुंच जाता तो भी उन सुन्दर और जवान गधियों के मालिकों को कभी कोई ऐतराज नही होता था, बल्कि कोई कोई तो अपनी गधी का ध्यान रखने का जिम्मा भी चन्दू गधे को दे देता कि कहीं कोई दूसरा आवारा टाईप शोहदा गधा उनकी जवान गधी को बहला फ़ुसला कर भगा ना ले जाये. तो इतना शरीफ़ और लायक था चन्दू. 

इधर कुछ दिनों से ज्ञानी धोबी ने नोटिस किया कि आजकल कालेज के सामने से निकलते हुये चंदू  थोडा धीरे  चलने लगता था और कालेज के  सामने  वाली दुकान पर आकर  तो एकदम रुक ही जाता था. अब ज्ञानी धोबी को क्या पता कि उसके शरीफ़ और नेक चंदू को असल में एक सुन्दर, जवान और चटक मटक सी कालेज की छोरी से इश्क  हो चला था...धोबी ठहरा पुराने जमाने का सो इस जवान गधे की प्रेम लीला की तरफ़ उसका ध्यान ही नही गया.

अब गधा तो गधा... सो चढ गया इस नव यौवना बला के  चाल्हे में. सो आजकल चंदू गधा बडे रोमान्टिक मूड में रहने लगा और घर से गठरी लादने के पहले शीशे के सामने खडा होकर बाल बनाता, दाढी कटिंग सब सलमान खान टाईप करके घर से निकलता था. अब धीरे धीरे इन दोनों का इश्क परवान चढने लगा. कभी छोरी इसके तरफ़ देखकर  मुसकरा देती थी, कभी बाल झटककर अपनी अदा दिखा देती और कभी मुस्करा के गर्दन को बडी अदा से घुमाकर अपने मोबाईल में खो जाती. अब उसको क्या पता कि उसकी इन अदाओं से चंदू का दिल घायल हो चुका था.

और इधर चंदू गधा भी कभी आंख का कोना दबा कर और कभी कोइ प्रेम गीत गुन गुना कर जबाव देता था. गाने में तो चंदू माहिर था ही. चंदू की जबान पर आजकल बस यही एक गाना रहने लगा....."हम तो तेरे आशिक हैं सदियों पुराने".... जब कभी वो शोख गधी इसके पास से निकलती बस चंदू के होठों से यही गीत फ़ूटता था और बाकी भी चंदू की आत्मा में यह गाना अंतर्संगीत की तरह गुंजायमान रहने लगा.

आप ये समझ लिजिये कि  अब से पहले भी इस हसींन जवान कन्या ने कई गधों को अपने इश्क के जाल मैं उलझाया था और अबके बारी आगयी इस  चिकने और कर्म जले चन्दू गधे की जो इतनी सुन्दर और सुशील गधियों को छोडकर इस सर्राटा आफ़त के लपेटे मे आगया....ईश्वर भी सीधे लोगों को ही इन चक्करों में उलझाता है वर्ना कोइ चालू गधा होता तो फ़ंसता ही नही और फ़ंस भी जाता तो ही ही ही करके बाहर भी निकल लेता.

अब धीरे धीरे बात यहां तक आ गई कि दोनों  डेटिंग भी करने लग गये.  धोबी जब तक कपडे धोता तब तक चन्दू गधा फ़ुर्र हो लेता और वो जवान छोरी भी तडी मारके कालेज से गायब और सीधे जलेबी घाट पर चंदू के साथ....दोनों कभी माल मे जाकर  सिनेमा देखते.....कभी काफ़ी शाप में गपशप....दोनों अलग होते तो अपने मोबाईल पर व्हाटस-एप्प या अन्य किसी मेसेंजर को आबाद करते....

ये समझ लिजीये  कि चन्दू तो 24 घन्टे इसी परी के ख्वाबों और ख्यालों में डूबा रहने लग गया.  उस इश्क के अन्धे को ये भी नही दिखाई दिया कि उन दोनों को खुले आम लप्पे झप्पे करते देख कर दूसरे गधे भी उस कन्या पर डोरे डालने में  लगे हुये हैं.कुछ समय बाद चन्दू को लगा की वो कन्या उससे कुछ ढंग से बात नही करती थी  और उससे कूछ उखडी उखडी सी रहने लगी थी. अब चन्दू ठहरा सीधा बांका नौजवान और उपर से गधा , सो वो क्या जाने इन अजाबों के चाल्हे....

इस सीधे सादे गधे चंदू को क्या मालूम था कि वो बला तो उसके साथ अपना टाइम पास कर रही थी,  वर्ना तो उसके सामने क्या चन्दू और क्या चन्दू की ओकात ! और अपने लिये एक मोटे से बैंक बैलेंस वाले आसामी की तलाश में थी. चंदू तो एक खिलौना था उसके लिये....
अपनी जात से बाहर जाकर प्यार करने के यही अन्जाम हुआ करते हैं गधा होकर आदमजाद से प्यार करने चला था नाशपीटा...... गधा कहीं का....... ! हमने तो यही सुना था कि गधे ही दुल्लत्ती झाडा करते हैं पर इस बला ने तो चन्दू गधे को वो दुल्लत्ती मारी कि  चन्दू ओंधे मुंह चारों खाने चित्त हो गया.

वाह रे चन्दू गधे की किस्मत.....तूने भी क्या कमाल दिखाया बेचारे को? असल में हुआ ये की अब उस छोरी का दिल चन्दू से ऊब गया था और वो अपनी तलाश के मुताबिक उसने एक सेठ के गधे को फ़ंसा लिया या खुद  फ़ंस गई...! ये सेठ का गधा भी क्या गधा? बल्कि गधे के नाम पर कलंक,  पर चुंकि सेठ का गधा था... तो था... आप और हम इसमे क्या कर लेंगे? इसीलिये तो कहते हैं "जिसका सेठ मेहरवान उसका गधा पहलवान" ! बिल्कुल मोटा काला भुसन्ड और दो जवान बच्चों का बाप था ये गधा....

पैसे वाले सेठ का गधा था सो  मर्सडीज कार में चलता था और उसने भी इस गधी पर बहुत दिनों से डोरे डालने शुरू कर रखे थे. अब कहां ज्ञानी धोबी का गधा चन्दू और कहां सेठ किरोडीमल का गधा? चन्दू पैदल छाप और ये मर्सडिज बेन्ज मै चलने वाला गधा... सो छोरी को तो फ़सना ही था... फ़ंस ली....हो सकता है दोनों ने एक दूसरे को फ़ंसाया हो या किसी एक ने....पर एक बात पक्की है कि छोरी का फ़ंसना और फ़ंसाना ही उसके प्रिय शगल थे, तो सेठ किरोडीमल के गधे पर ही सारा दोष भी नहीं मढ सकते. किरोडीमल सेठ के गधे ने इस गधी के नखरे उठाने मे कोई कोर कसर नहीं रखी. एपल के मोबाईल से लेकर तो एक से एक ब्रांडेड कपडे, परफ़्यूम गिफ़्ट में ऐसे देता था जैसे चार रूपये की मूंगफ़ली खा ली हो. चन्दू की तो इस सेठ के गधे के सामने ओकात ही क्या ?

अब चन्दू सडक के बीचों बीच गाता जा रहा था..." वो तेरे प्यार का गम इक बहाना था सनम".......ताऊ उधर तैं निकल रह्या था ! गधे नै यो गाना गाते हुये सुण के बोल्या - अबे सुसरी के ! बेवकूफ़ गधे के बच्चे...! इब क्युं देवदास बण रह्या सै? तेरे को पहले सोचना चाहिये था कि इन बलाओं से तेरे जैसे साधारण गधे को इश्क नही करना चाहिये.  इनसे तो कोई बडे सेठ का गधा ही इश्क कर सकै सै,  फ़िर वो भले ही दो जवान बच्चों का बाप हो या काला मोटा और उम्रदराज हो ? आखिर धन माया ही तो सब कुछ है इस जमाने में...अरे उल्लू के पठ्ठे... ये कोइ लैला मजनूं वाला जमाना नही सै.... अबे गधेराम ये इक्कसवीं सदी है,  इसमे तो धन माया के पीछे भाई भाई , बाप बेटे यहां तक की मियां बीबी भी एक दुसरे की कब्र खोद देवैं सै ! तू भले कितना ही सुथरा और शरीफ़ गधा हो, पर है तो तू आखिर ज्ञानी धोबी का ही गधा.....!

और ये सुन कर चन्दू , चुपचाप, हारे जुआरी जैसा कपडे की गठरी लादे जलेबी घाट की और बढ लिय’.



#हिन्दी_ब्लॉगिंग
(सन 2008 की हरयाणवी भाषा में लिखी पोस्ट को सरल हिंदी में प्रस्तुत किया है .)

ताऊ की शनीचरी पहेली-५

आप सबनै शनीचर की राम राम. इस शनीचरी पहेली न.५ मे आपका स्वागत है . नीचै ध्यान तैं देख कै जवाब देणा है बिल्कुल ही आसान पहेली है . यह कौन सी प्रसिद्ध जगह, कहां पर है. तो जरा सा दिमाग पर जोर डालिये. और पहेली जीत कर अपनी मेरिट को उपर कर लिजिये.

 

आपसे गुजारिश है कि जवाब बिल्कुल सुस्पष्ट देवे, यह कौन सी जगह है? इसकानाम लिखें, और फ़टाफ़ट अपना जवाब दे दे. विवरण के लिये दुसरी टीपणि करें, जिससे आपके पहले कोई दुसरा जवाब देकर आपसे अधिक अंक नही ले जाये.

 

अगर आपको यह पहेली आयोजन पसंद आया है तो पसंद पर भी एक चटका लगाने की कृपा करें. इससे हमारा उत्साह वर्धन होता है.

paheli-5

यह कौन सी प्रसिद्ध जगह है.

आप विषय से संबंधित जितनी सही जानकारी देंगे वो सभी के ज्ञानवर्धन के लिये ज्यादा अच्छा रहेगा . और आपकी टिपणी भी प्रकाशित की जायेगी .


इसका जवाब आपके जागने से पहले परसों सोमवार को मिल जायेगा . यानि ठीक ४८ घन्टे बाद.

 

सर्दी का मौसम होने से इस शनीचरी पहेली के प्रकाशन का समय अब हर शनीवार सूबह ७.०० AM कर दिया गया है. और रिजल्ट पुर्ववत सोमवार को सुबह ४.४४ AM पर प्रकाशित कर दिये जायेंगे. 

 

तो है ना छुट्टी के दिनो का भरपूर मजा घर बैठे.

 

इस ब्लाग के दाहिंने तरफ़ आप आपकी मेरिट की स्थिति देख सकते हैं. सोमवार को इस अंक के रिजल्ट के साथ ही यह अपग्रेड कर दी जायेगी.

 

पहेली के नियम कायदे पहेली न.१ के रिजल्ट के साथ साथ बता दिये गये थे. जो यहां चटका लगा कर भी देखे जा सकते हैं.

 

पहेली नम्बर ४ तक जिन्होने भी इस पहेली मे हिस्सा लिया है वो अपने अंक की स्थिति यहां चटका लगा कर देख सकते हैं. शुरु से अंत तक की मेरिट लिस्ट यहां पर प्रकाशित कर दी गई है.


आपके सुझावो का हमेशा ही स्वागत है.

एक विशेष सूचना हम अवश्य देना चाहेंगे कि आप चाहे जितनी देर से आयें आपको अगर सही जवाब मालूम है तो जवाब अवश्य देवें .

 

यहां पर आपको हर सही जवाब के साथ मार्क्स दिये जाते हैं जो इकठ्ठे होकर कभी भी भविष्य मे आपको बहुत काम आयेंगे. और हर भाग लेने वाले प्रतिभागी को एक अंक दिया जाता है.

 

आपने अगर जवाब दे दिया हो तो आप इन्तजार करें. हो सकता है आप का जवाब जान बुझकर रोका गया हो. हम पहले ही बता देते हैं कि निरणायक गण आपको भ्रम मे डालने के लिये और पहेली की मनोरंजकता बढाने के लिये पहले जो टिपणियां प्रकाशित करते हैं वो गलत भी हो सकती हैं और सही भी. दोनो ही बाते हैं. अत: अपने विवेक से उत्तर देवें.


और आपसे एक निवेदन है कि किसी भी हालत में जवाब मे लिंक नही देवें. अगर आपका जवाब सही है तो हम उसे गलत नही करेंगे, पर आपके Link देने से आपके बाद आने वालों के लिये कोई चार्म नही बचता.

अत: प्लीज..प्लीज..Link कतई नही देवें. वर्ना आपकी टीपणी प्रकाशित नही की जावेगी.

 

इब खूंटे पै पढो :-

ताऊ की बीबी यानि ताई स्वर्गवासी हो गई, शवयात्रा मे अथाह भीड. लोगो का हुजुम टुटे पड रहा था.

भाटिया जी को खबर लगी तो वो भी आगये और शवयात्रा मे शामिल हो गये. पर
उन्होने देखा कि इतनी भीड हो रही है तो उन्होने पूछा लोगो से कि भई बात क्या है?
इतनी भीड क्यों है? ताऊ की तो इतनी ओकात नही है कि इतनी भीड इक्कठी कर ले.

तो क्या ताई कोई मिनिस्टर वगैरह बन गई थी या कोई महिला मोर्चा की नेता थी?
लोग जवाब देने की बजाये, भाटिया जी की तरफ़ देख कर मुस्करा कर रह जाते.

अब भाटिया जी को और भी उत्सुकता हुई तो उन्होने सीधे जाके ताऊ से ही पूछ
लिया कि भई ये क्या कारण है इतनी भीड का?

ताऊ बोला - भाटिया जी, इसका असली कारण है मेरा गधा

भाटिया जी - अरे यार ताऊ, तेरी बीबी की शवयात्रा है और इसमे भी तू मजाक कर रहा है? कुछ तो शरम कर. और सही बात बता.

ताऊ - मैं सही ही बोल रहा हूं. मेरे गधे को दुल्लत्ती मारने की खराब आदत थी और उसकी दुल्लत्ती लगने से ताई की ये गति हो गई. अब सारे गांव वाले उस गधे को खरीदना चाहते हैं.

भाटिया जी - अच्छा है तो फ़िर बेच दे. पर ये क्या कोई नई स्कीम है?

ताऊ -  भई भाटिया जी अपनी स्कीम तो चोबिसों घंटे चालू रहती है. काम धंधा तो मैं कभी बंद कर ही नही सकता.

इसीलिये मैने सबको कह दिया कि उस गधे को जो भी खरीदना चाहे वो 
शमशान मे आ जाये वहीं पर उस गधे की नीलामी होगी. जो ज्यादा बोली लगायेगा
वो गधा मैं उसी को बेचूंगा. और देखो सब आसपास के गांवों के लोग भी इक्कठ्ठा
हो रहे हैं. 

ताऊ, रामदयाल और वही गधेडी


बात नु हुई कि रामदयाल कुम्हार की गधेडी मर गई या मार दी गई या चोरी हो गई ! पर अब रामदयाल बडा परेशान हो गया क्योंकि बिना गधे या गधेडी के उसका काम चलना मुश्किल था ! सो वो नई गधेडी खरीदने के लिये वित जुटाने मे लगा था !

 

इधर ताऊ जन्मजात कडका ! बडी कडकी म्ह चाल रया था ! ताऊ की साख इतनी गिर चुकी थी कि उसको कोई उधार देना तो दूर अपने पास भी नही बैठने देता था !

 

उसकी   खेती तो बरसात के अभाव मे चौपट हो गई और दो  भैंसों मे से  एक चम्पाकली तो  यमराज के झोठे को भगा ले गई और आज तक नही लौटी और  दुसरी अनारकली हिरोईन बनने चली गई ! सो दुध धार का धन्धा भी बंद !

 

ताऊ को जैसे ही मालुम पडा कि रामदयाल की गधेडी मर गई तो वो अपने मन मे स्कीम सोच कै एक गधा किसी का चरता हुआ मिल गया ! उसको पकड लाया और अपने ठान पै खूंटे तैं बांध दिया !

 

और रामदयाल को जाकर बोला - रामदयाल मेरे रहते तू चिन्ता मत कर ! मेरे पास एक बढिया नस्ल का गधा है ! तू वो खरीद ले ! गधा तो दस हजार का है पर तेरे से मैं सिर्फ़ पांच हजार लूंगा ! पर रुपया पूरा एक साथ लेकर ही गधा तेरे को दुंगा !

 

रामदयाल एक बार तो चमका ! फ़िर सोचा कि खैर ताऊ ऊठाईगिरा हुआ तो क्या हुआ ? है तो अपना दोस्त ही ! और इसिलिये बेचारा अपने को गधा इतना सस्ता बेच रहा है !

 

रामदयाल आकर गधा देख गया ! बिल्कुल कम से कम दस हजार का गधा था ! क्योंकि रामदयाल तो गधों का पारखी था !

 

रामदयाल के पास तीन हजार रुपये थे सो वो टोकन मनी मे ताऊ को थमा दिये और बोला - बाकी के दो हजार मैं परसों देकर गधा ले जाऊंगा !

 

ताऊ बोला - रामदयाल तू बिल्कुल सौ टका सही बात कह रहा है ! परसों आकर तेरा गधा ले जाना !

 

रामदयाल खयाली पुलाव पकाते हुये चला गया कि देखो ताऊ कितना भला आदमी है ? बेचारे ने दस हजार  का गधा पांच मे दे दिया ! और बाकी के पैसो का इन्तजाम करने मे लग गया !

 

इधर ताऊ को कौन सी गधे की डीलीवरी देनी थी ? रामदयाल के जाते ही गधे को जहां से लाया था वहीं पर छोड आया और खींसे मे तीन हजार आ ही गये थे उनकी मस्ती लेने लगा !

 

तीसरे दिन रामदयाल आया और बोला - ताऊ ये ले बाकी के दो हजार रुपये और मेरा गधा मुझको दे दे !

 

ताऊ तो ये बात सुनते ही बिदक गया जैसे किसी ने उसको गाली दे दी हो ! वो बडे छोह मे बोला - यार रामदयाल तू भी कैसी बाते करता है ? भाई वो गधा तो कल तेरे को जब मैने बेचने का सौदा किया उसी वक्त तेरा हो गया था कि नही ?

 

रामदयाल बोला - बिल्कुल हो गया था ! पर अब मुझे देदे ताऊ !

 

ताऊ बोला - देख भाई तेरे जाते ही वो गधा तो मर गया ! अब तेरा गधा था ! मर गया तो मैं क्या करूं ? तू मेरे को बाकी के पैसे देगा तो भी मैं लेने वाला नही हूं ! इतनी नुक्सानी मैं बर्दाश्त कर लूंगा !

 

पर रामदयाल अबकी बार अड गया ! बोला - ठीक है ताऊ ! अगर मेरा गधा मर गया तो मुझे मरा हुआ ही दे दे ! पर मैं अबकी बार गधा लिये बिना नही मानूगा !

 

ताऊ ने सोचा कि कहां इस बावलीबूच को कह दिया कि गधा मर गया ! सीधा कह देता कि कोई सौदा ही नही हुआ था और कोई टोकन मनी नही मिली थी ! ये क्या कर लेता ? अब इतने लोगो के बीच मे बोल कर फ़ंस गया मैं तो !

 

खैर ताऊ ने कहीं से सौ दो सौ रुपये मे मरे हुये गधे की लाश लाकर १५ दिन बाद ताऊ को दे दी और बात खत्म हो गई !

 

अब एक रोज सामने से रामदयाल अपनी गधेडी के साथ आ रहा था ! ताऊ को बडा ताज्जुब हुआ ! ताऊ ने रामदयाल से पूछा - रामदयाल क्या हाल चाल हैं ?

 

रामदयाल बोला - ताऊ,  वही रामदयाल और वही गधेडी !

 

ताऊ - भाई तेरे ये ठाठ कैसे ? और ये इतनी मोटी ताजी गधेडी कहां से ले आया  ?

 

रामदयाल बोला - ताऊ अब मैं भी होशियार हो गया हूं ! और ये सब तुमने जो मरा हुआ गधा दिया था उसके बदले  है ! और इसके बावजूद १९०० रुपये नगद भी बच गये !

 

ताऊ को और ताज्जुब हुआ कि मरे गधे के बदले इतनी शानदार गधेडी और बाकी नगद भी बच गया ! सो बोला - रामदयाल जल्दी और सच सच बताओ !

 

रामदयाल बोला - मैं  तुम्हारे पास से लुट पिट कर गया तो एक आईडिया मेरे दिमाग मे आया और मैने एक लाटरी निकालने की घोषणा कर दी ! जीतने वाले को गधा ईनाम मे मिलेगा यह कह कर १०० रुपये मे एक टिकट बेचा ! आसपास मे १५० टिकट  बेच दिये !  और इस तरह   मैने १५ हजार रुपये इकठ्ठे कर लिये !

 

ताऊ  - फ़िर इनाम मे  गधा कहां से दिया  ? गधा तो तुम्हारे पास था ही नही ?

 

रामदयाल - ताऊ , पूरी बात तो सुन ! गधा तो देना होगा तब ना आयेगा ! मैं तुमसे लुट पिट कर सीख चुका हूं कि यहां कुछ नही होता चाहे जितनी बेइमानी करो ! सब रामराज है !

 

रामदयाल आगे बोला - फ़िर मैने उसमे से दस हजार की ये चंपा गधेडी खरीदी और तीन हजार तुमने डकार लिये वो ! ये हुये तेरह हजार ! बाकी बचे दो हजार मे से एक सौ रुपये लौटाने पड गये ! सो बाकी का  नगद मुनाफ़ा १९०० रुपये का हुआ !

 

ताऊ अब तो और भी चक्कर मे पड गया कि ये लूटने का कौन सा जादू है जो ताऊ नही जानता और रामदयाल जानता है ! सो ताऊ बोला - रामदयाल जब तेरे पास गधा था ही नही तो लाटरी मे तूने गधा कैसे दिया और जनता कैसे मान गई ?

 

रामदयाल बोला - जनता ने विरोध किया था जब मैने इनाम मे मरा गधा दे दिया तुम्हारा वाला ! तब मैने कहा कि - मैने ये कब कहा था कि गधा जिन्दा दुंगा या मरा ?

मेरे इनाम मे तो यह मरा हुआ गधा ही था !

 

एक नेता टाईप के आदमी ने ज्यादा हुज्जत की तो मैने उससे कहा - कि भाई साहब काहे को झगडना ? आप अपनी टिकट के सौ रुपये वापस लेलो ! उसको मैने उसके सौ रुपये वापस कर दिये !  इस वजह से दो हजार का मुनाफ़ा घट कर उन्नीस सो रह गया !

 

ताऊ ने सोचा - अब रामदयाल होशियार भी हो चला है और आगे जाकर प्रतिद्वद्वी भी हो सकता है ! इसका इलाज करना पडेगा !

 

 

 

  इब खूंटे पै पढो :-

  ये बात है जब रामजीडे ने बिल्कुल नया नया टेम्पू खरीदा ही था ! उसको सपने
  मे   भी   टेम्पू चालता दिखै था और वो एक रात सोता सोता ही आवाजे लगाने
  लग रहा था !
 
  चलो भाई आज्यावो, तावले.. तावले.. बस अड्डॆ.. रेलवाई का अड्डा ..चलो आ जाओ..
  जल्दी करल्यो भाइ... ग्यारह आळी पसेन्जर आवण का टेम हो रया सै !

  वो नींद मे यही बाते जोर जोर तैं बोलण लागरया था ! तो उसकी बहु ( बीबी )
  बोली - अजी थम ये किस तरियां की बात बोलण लागरे हो ? के होगया जी ?
 
  रामजीडा नींद मे ही बोला - कित जाणा सै बेबे ?   

  ये सारी बातें रामजीडे का बाबू भी सुनने लग रहा था सो वो बोला - अरे मेरी
  सुसरी के ! यो के बहू नै बेबे बोलण लाग रया सै ? शरम  नी आंदी ? 

  रामजीडा नींद म्ह ही बोल्या - ताऊ तैं तो पाछै नै लटक ले !

ताऊ की रविवारीय पहेली का जवाब

kids with....

 

आप सबका धन्यवाद ! आज रविवार की छुट्टी का दिन होने के बावजूद भी आप लोगो ने काफ़ी उत्साह से इसमे भाग लिया !

 

यहां जीत हार कोई मायने नही रखती ! हम मे से ज्यादातर लोग शहरों मे रहने के कारण इन दृष्यों से वाकिफ़ नही हैं ! फ़िर भी जवाब जो सही है वो सही है !

 

sheep1jpg असल मे भेडो का रेवड रखने वाले गडरिये ऊन के लिये ही मुख्य रूप से भेडे पालते हैं पर ध्यान रखिये कि जब ऊन पर्याप्त मात्रा मे भेडों पर अजाती है तो वो लोग अपने गांव लौट जाते हैं और वहां भेडो से ऊन उतार कर व्यापारियों से उसका सौदा करते हैं ! यानी ऊन ये लोग अपनी यायावरी मे नही ईक्कठ्ठी करते ! उस समय कुछ दिन ये लोग एक जगह ठहर जाते हैं !

 

 

 

ये लोग इन भेडो के रेवडों को लेकर बहुत दूर दूर तक जाते हैं क्योन्कि इतनी सारी भेडों को चारा खिलाने की समस्या भी रहती है ! ये लोग अपने बाल बच्चों के साथ इन भेडो को लिये चलते हैं !

 

कुछ गधे और ऊंट ये लोग अपना सामान ढोने के लिये साथ रखते हैं और खास कर ऊंटनी का दुध ये पीने के काम मे लेते हैं ! मैने अपने जिज्ञासु स्वभाव वश कई बार रास्ते मे इनके साथ रुक कर बात चीत भी की है ! ये लोग बिल्कुल सधे हुये व्यापारियों के जैसे बाते करते हैं !

 

आपको भी शायद पढा हुआ याद आता होगा कि क्लियोपेट्रा गधी के दुध से स्नान करती थी ! और इन चरवाहों के पास मैने पर्याप्त मात्रा मे ताजा ब्याई हुई  दुध देने वाली गधियां भी देखी हैं ! इस विषय मे पूछे जाने पर ये बताते हैं कि गधी के दुध का उपयोग ये लोग किसी भी रुप मे नही करते है ! दुध सिर्फ़ ऊंटनी का ही काम मे लेते हैं !

 

मेरी एक सहज जिग्यासा थी कि फ़िर इन गधों को बोझ ढोने के अलावा कुछ उपयोग है या नही ! उनका कहना था कि हमारे झुण्ड के साथ साथ ये भी पल जाते हैं और जब ये अच्छे जवान हो जाते हैं तो जयपुर के पास चाकसू मे गधो का बडा मेला लगता है ! वहां ले जाकर बेच देते हैं जिससे इन्हे अच्छी और तगडी कमाई हो जाती है !

 

ये बडे सरल और स्वाभाविक मेहनत कश कौम है ! इनकी कमाई का साधन ऊन फ़िर गधा और ऊंट पालन और तीसरा जब ये लोग चलते हुये गांवो के पास से गुजरते हुये निकलते हैं तो गांव वाले इनके रेवड को अपने खेत मे रात बैठाने का अच्छा पैसा देते हैं ! इससे गोबर के खाद कि जरुरत पूरी होती है ! और भेड बकरियों की मेंगणीयों का सर्वोत्तम खाद मिल जाता है !

 

donkey1jpg अब असल बात की तरफ़ चलते हैं - इन लोगो का अधिकांश समय चलते रहने मे ही व्यतीत होता है और भेडो का प्रजनन चलता रहता है ! और इसी दौरान भेड जो बच्चे देती रहती हैं उनको खडे होकर चलने मे कुछ घन्टे का समय लगता है ! और इनके पास रुकने का समय होता नही है तो ये लोग उन नवजात मेमनो को ऊठा ऊठा  कर चित्र जैसी पोटली मे बांध कर गधे की पीठ पर रख देते हैं और इनका कारवां अबाध गति से चलता रहता है !

 

अब जवाब तो आपको मिल ही गया होगा ! और भाटिया जी ने गिफ़्ट हैम्पर की घोषणा भी कर ही दी है ! और जिन्होने ऊन जवाब दिया है उनको भी सान्तवना पुरुस्कार देने की घोषणा करने वाले हैं ! 

 

सबसे पहला सही जवाब सटीकता से नरेश सिंह राठोड जी का  आया ! क्योंकि ये फ़ोटो भी उनके गांव के आस पास के ही हैं और वहां ये बिल्कुल सहजता से दिखाई देते हैं !  उनके ब्लाग पर भी पहले एक शानदार  फ़ोटो लगी थी ऊंटनी का दुध पीते हुये उसके बच्चे की !  

 

दुसरा सही जवाब आया अरविन्द मिश्रा जी ( इन्होने अपने पहले जवाब को तुरन्त सुधार लिया ), फ़िर तीसरे नम्बर पर आये पी.एन.सुब्रमनियन जी और चोथे पर रहे भाई स्मार्ट ईन्डियन जी और  पांचवे नम्बर पर सही जवाब आया प्रवीण त्रिवेदी जी का !

 

हिण्ट वाला कमेन्ट मैने किया उसके बाद प्रवीण त्रिवेदी जी ने फ़िर भेड का बच्चा बताया जबकी  वो पहले भी सही थे और उनके पीछे पीछे अनिल पुसदकर जी भी बिल्कुल सही जवाब के साथ आये ! 

 

अल्पना वर्माजी ने बिल्कुल सही जवाब दिया था परंतु तुरन्त ही उस सही जवाब को गलत जवाब मे बदल दिया !

 

बधाई सब विजेताओ को ! और बाकी जिन्होने ऊन जवाब दिया वो लगता है कि खूंटे के असर मे ज्यादा बारीकी से ध्यान नही दे पाये ! इसी असर मे भाई संजय बैंगानी जी और अनिल जी ने भेड के बच्चे की जगह बकरी का बच्चा बता दिया !

 

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी ने बडे तर्क पुर्वक बकरी का बच्चा होने से  इन्कार किया और दुसरे गडरियो के सामान होने के साथ भेड का बच्चा भी हो सकता है मतलब स्पष्टता से नही कहा ! 

 

और अंत मे भाटिया साहब -- आप सही कह रहे हैं ! ये दोनो बच्चे मेरे ही हैं और फ़ोटू भी पच्चीस साल  पुराना है ! पर गठरी मे मैं अकेला नही हूं ! एक तरफ़ मैं और दुसरी तरफ़ ताई हो सकती है नही तो बैलन्स कैसे बनेगा ? :) आप तो विजेताओं को गिफ़्ट भिजवाओ !


और नीचे नरेश सिंह जी राठोड द्वारा  इस पुरे अर्थ प्रबन्धन की समरी दी गई है ! क्यों ना हम मुंगफ़ली और मक्के के भुट्टे बेचने की जगह इस धन्धे पर विचार करे  जबकि एक महा जानकार भी पार्टनर बनने को तैयार है !

और ऊंटनी का दुध भी बडा फ़ायदे मंद है !  भेडों के साथ गधे और ऊंट पालन आपस मे सहायक धन्धे हैं ! 

Blogger नरेश सिह राठौङ said...

राम राम,ताऊ । जी घणा खुश हो ग्या। थम इस गडरिये कि कमाइ भी जाणल्यो । एक भेङ साल मे दो बार प्रजनन करै सै । एक महीने के मेमने की कीमत 1,000 रू. होवे सै । इस तरह एक भेड साल के दो हजार रू. कम सै कम देवै , गडरिये कै पास मै 100से500 भेड तो होती है । साल मे एक बार गर्मी मे ऊन उतारते है। एक भेड की ऊन की कीमत 100 रू. है । जिस खेत में इस को बैठाया जाता है उस खेत का मालिक गडरिये को एक रात का 100 से 200 रू देता है । अब आप उसकी कमाइ का हिसाब लगाये मेमेने 1000x2x100भेड=2,00,000रू. + ऊन 50x100=500 + बैठाने का किराया 200x30x12=72,000 इस तरह वार्षिक कमाई 2,72,500 ताऊ ब्लागिगं छोङ के मेरै सेती मिल ज्याओ । भाई भाटिया जी,मै आ रहा हू, अपनी भेडो के साथ गिफ़्ट लेने ।


  RATAN SINGH SHEKHAWAT

December 15, 2008 8:32 AM

सबसे पहले विजेताओं को बधाई ! और ताऊ एक बात और ऊँटनी का दूध पीने वालों में रोगप्रतिरोधक क्षमता का प्रतिशत अन्य लोगों से ज्यादा होता है कुछ सालों पहले बाड़मेर में एक शोध के तहत रायका जाति के लोगों का (जो ऊंट पालन का कार्य करते है व ऊँटनी का दूध पीते है) खून टेस्ट किया गया तो उनमे रोगप्रतिरोधक क्षमता अधिक पाई गई | और बीकानेर में डेयरी विभाग ने शोध भी किया है कि ऊँटनी के दूध को ज्यादा समय तक कैसे फटने(ख़राब) से बचाया जा सके थोड़े दिनों में डेयरी के उत्पादों के साथ ऊँटनी का दूध भी उपलब्ध होगा |

 


  इब खूंटे पै पढो :-


  ताऊ घणी दारू खींचणैं लाग गया और ताई परेशान हो गई ! अब ताई ने
  एक दिन अक्ल लडाई और रात को जब ताऊ घर आने वाला था तो भूतनी
  की जैसी डरावनी वेशभूषा धारण करके ताऊ को डराने लग गई और बोली -
  दारू पीना बन्द करो वर्ना अब तुम मुझसे बच नही सकोगे ! 

  ताई ने सोचा था कि भूतनी के डर से ताऊ दारू पीना छोड देगा !

  अब ताऊ ने जवाब दिया - अरे भूतनी, तू खुद की खैर चाहती है तो जल्दी
  निकल ले यहां से ! बस मेरी घर आली (ताई) आती ही होगी वो तेरे से भी 
  बडी भूतनी और चुडैल   है ! फ़िर उससे तेरे को कौन बचायेगा ?

 

सैम गुर्राया ताऊ पर

सरदी की धूप सेकने बाहर बैठा हूँ ! अखबार भी देखते जारहा हूँ ! पास ही अपनी बेंत की कुर्सी पर सैम बडे मनोयोग से अखबार में खोया हुआ है काफी देर से !


मैंने पूछा - सैम भाई , क्या बात है ? आज बड़े डूब कर अखबार पढ़ रहे हो ?
सैम - हाँ ताऊ , कुछ पुरानी यादे ताजा हो आई ! आज के फोटो में फ़िल्म स्टार धर्मेन्द्र का फोटो छपा है वही देख रहा था !
मैंने कहा - यार अब ये धर्मेन्द्र से कौन सी रिश्तेदारी हो गई तुम्हारी ?
सैम बोला - ताऊ मैं तुम्हारा कुत्ता बना उसके पहले कभी धर्मेन्द्र का कुत्ता भी हुआ करता था !
मैंने आश्चर्य से पूछा - वाह यार , फ़िर तो तुने हेमामालिनी को भी देखा होगा ? इशा आहना सबको देखा होगा ?


सैम बोला - ताऊ उस घर में तो मैं कभी कभी ही जाता था ! मेरी ड्यूटी तो बडे घर पर होती थी !
मैंने कहा - फ़िर तू वहाँ से छोड़ कर यहाँ मेरे पास क्यूँ आगया कड़के ताऊ के पास ?
सैम बोला - ताऊ आपके पहले तो मैं एक "अ"हटाकर नामक नेता के यहाँ भी रह आया !
मैंने सोचा , आज सैम कुछ ज्यादा ही लम्बी छोड़ने  के मूड में है ! सो मैंने कहा - तो फ़िर नेताजी को क्यों छोड़ आया ? वहाँ तो तेरे बडे मजे रहे होंगे !


सैम बोला - ताऊ, धर्मेन्द्र पापाजी वैसे तो ठीक थे पर जब चाहे किसी को भी मेरे नाम की गालिया देते थे ! कुत्ते.... तेरा खून पी जाउंगा...कुत्ते..... तेरी हड्डियां तोड़ डालूँगा...आदि आदि !
मैंने पूछा - फ़िर -?
सैम बोला - फिर क्या ! पापाजी तो बुजुर्ग थे सो मैं उनको तो बर्दाश्त भी कर लेता  था ! फ़िर सन्नी , जिसको मैंने गोद में खिलाया था , वो भी बड़ा होकर ऎसी ही गालियाँ देने लगा .. कुत्ते ...कमीने... तेरा खून पी जाउंगा ....तब मैंने समझ लिया की दोष पापाजी का ही है जो बच्चो को कुत्तो का खून पिलाने की आदत डाल दी !


अब मुझे गहन इंटरेस्ट आने लगा सो मैंने शोले में जैसे जगदीप लम्बी लम्बी छोड़ रहा था तब जय और  वीरू उससे पूछते हैं उसी स्टाईल में मैंने पूछा --  फ़िर क्या हुआ ? 


अब सैम बोला - अब होना क्या था ? बुजुर्गगियत  के नाते पापाजी की गालियाँ तो झेल गया   पर अब  बच्चो की गालियाँ कौन खाए ? सो पापाजी के लाख मना करने पर भी मैं उनको छोड़ कर नेताजी "अ"हटाकर जी के पास चला गया ! 

अब मैंने पूछा - फ़िर वहाँ क्या हुआ ?

सैम बोला -  सब कुछ एक ही दिन में पूछ लोगे क्या ? अब मेरा दूध ब्रेड लेने का समय होगया है ! ज़रा ये क्या लिखा है अन्ग्रेज़ी में बताना तो ! सैम ने अखबार का पेज मेरी तरफ़ बढाते हुए कहा ! 


अब उसकी इन ओछी हरकतों पर मुझे गुस्सा आरहा था ! मैंने कहा - गधा कहीं का ! तुझसे इतनी बार कहा था  की पढ़ ले.. पढ़ ले .. पर नही ! अब समझ आया की तेरे को तो "अ"हटाकर जी के साथ नेतागिरी का चस्का लग गया था सो तू क्यों पढने लगा ? अरे पढ़ लिख गया होता तो आज आदमी बन गया होता !


अब सैम ने गुर्राते हुए कहा - ताऊ, आदमी की गाली मत दो !  मैं तो ऐसे आदमी से कुत्ता ही भला ! और गधा तो रामदयाल कुम्हार का है ! जिस दिन दोनों जाग गए तुम सारे तथाकथित आदमी  भागते फिरोगे ! 


 
  

एक गधे की दुःख भरी दास्ताँ



आप लोग न्युं मत समझना कि मैं आपको ऐसे ही कोइ कहानी सुना रह्या सूं ! भाई थम इब कोई बालक थोडे ही हो ! या कहानी सै बिल्कूल सांचीं, तो भाइ सुनो !


एक था गधा ! और भाइ वो था एक धोबी का गधा ! इब आप पूछोगे कि भाइ यो कुणसे जमाने की बात सै ? आज कल ना तो धोबी रहे और ना उनके पास गधे ! इब जो धोबी थे उन्होने लान्ड्री खोल ली और गधे की जगह स्कूटर ले लिये !

बिल्कूल भाई थारी बात भी कती सांची सै ! पर यार ये तो सोचो की सारे कूओं में ही भांग थोडे पडगी सै ? अरे भाई थोडे बहुत परम्परावादी धोबी भी सैं और उतने ही परम्परा वादी उनके गधे भी सैं ! और भाइ यकिन ना हो तो आजाना ताउ के धौरै (पास) ! आपको मिलवा देंगे , इस ज्ञानी धोबी और उसके गधे चन्दू से !

यो दोन्युं बडे मजे मे थे ! रोज सुबह धोबी अपने गधे पर कपडे लाद के और छोरियां के कालेज कै सामने से होता हुया कपडे धोनै जलेबी घाट जाया करता और वो जब तक अपने कपडे धोता तब तक चन्दू गधा नदी किनारे की हरी हरी घास खाया करता ! और फ़िर समय बचता तो ठन्ढी छांव मे लोट पोट हो लिया करता ! इतना सुथरा और गबरू गधा था की , आप पूछो ही मत !

कभी इसका मूड आजाया करता था तो नेकी राम की रागनी भी बडे उंचे सुर मे गा लिया करै था ! और भाइ बडा सुथरा गाया करै था !पर भाइ पता नही यो गधा कुण सी जात का था कि इतना सुन्दर और जवान होने के बावजूद भी इसने कभी किसी पराई गधी पर बुरी नजर नही डाली ! और ना ही कभी किसी गधी पर लाइन मारनै की सोची !

वहां पर दुसरे धोबियों और कुम्हारों की सुन्दर सुन्दर और जवान गधियां भी आया करै थी पर चन्दू ने कभी उनकी तरफ़ नजर उठा कर भी नही देखा ! हालांकि ये और बात है कि चन्दू को रिझाने के लिये उन गधियों ने बहुत सारी कोशिशें की जो सब बेकार गई ! यहां तक कि उन पुरातन पन्थी गधियों ने टाइट जीन्स और लांडी कुर्ती भी पहनना शुरू कर दिया
पर वो चन्दू का दिल नही जीत सकी !

और साहब आप ये समझ ल्यो कि चन्दू गधा लन्च करता हुवा यानि घास चरता हुवा इन गधियों के बीच मे चला जाता तो भी उन सुन्दर और जवान गधियों के मालिकों को कोई ऐतराज नही होता , बल्कि कोइ कोइ तो अपनी गधी का जिम्मा भी चन्दू गधे को दे देता कि कहीं कोइ दुसरा गधा उनकी जवान गधी को बहला फ़ुसला कर भगा ना ले जावै !
इतना शरीफ़ और लायक था चन्दू !

इधर कुछ दिनों तैं ग्यानी धोबी नै देख्या कि आज कल कालेज कै पास आकै गधा थोडा धीरे हो जाता था ! और कालेज कै सामनै आली दुकान पै आके तो एकदम रुक ही जाया करै था ! असल मै चंदू गधे को एक सुन्दर, जवान और चटक मटक सी कालेज की छोरी धोरै प्यार हो गया था !

इब गधा तो था ही सो चढ गया इस नव योवना कै चालै ! और आज कल बडा रोमान्टिक मूड मै रह्या करता और घर से गठरी लादनै के पहले बाल बनाके, दाढी कटिंग सब तरिके से करकै निकल्या करै था ! इब धीरे धीरे इन दोनुआं का इश्क परवान चढनै लग गया ! कभी छोरी इसके तरफ़ देखकै मुसकरा देवे, कभी बाल झटक कै अपनी अदा दिखावै
और कभी मुस्करा के गर्दन को बडी अदा से घुमा ले !

और चंदू गधा भी कभी आंख का कोना दबा कर और कभी कोइ प्रेमगीत गुन गुना कर जबाव देता था ! और साहब "हम तो तेरे आशिक हैं सदियों पुराने" इसी गाने को चन्दू गधा गुन गुनाया करै था !

आप न्युं समझ ल्यो की इब से पहले भी इस हसींन जवान कन्या ने कई गधों को अपने इश्क के जाल मैं उलझाया था और इबकै बारी आगी सै इस चिकनै और कर्म जले चन्दू गधे की जो इतनी सुन्दर और सुशील गधियों को छोडकर इस सर्राटा आफ़त के लपेटे मे आ लिया !

इब धीरे धीरे बात यहां तक आ गई कि दोन्युं डेटिंग भी करनै लग गये ! धोबी जब तक कपडे धोता तब तक चन्दू गधा फ़ुर्र हो लेता और वो जवान छोरी भी तडी मारके कालेज से गायब ! कभी माल मै जाकै सिनेमा तो कभी काफ़ी शाप
पर ! और साहब ये समझ लो कि चन्दू तो २४ घन्टे इसी परी के ख्वाबों और ख्यालों में डूबा रहने लग गया ! उस इश्क के अन्धे को ये भी नही दिखाई दिया कि उन दोनु को खुले आम लप्पे झप्पे करते देख कै दुसरे गधे भी उस कन्या पर डोरे डालनै लग गये हैं !

कुछ समय बाद चन्दू को लगा की वो कन्या उससे कुछ ढंग से बात नही करती थी ! और उससे कूछ उखडी उखडी सी
रहण लाग री थी ! इब चन्दू ठहरा सीधा बांका नौजवान और उपर से गधा , सो वो क्या जाने इन अजाबों के चाल्हे !
और इस सीधे सादे गधे को क्या मालूम था कि वो बला तो अपना टाइम पास कर रही थी ! वर्ना तो उसके सामने क्या चन्दू और क्या चन्दू की ओकात ! अपनी जात से बाहर जाकै प्यार करने के यो ही अन्जाम हुया करै सैं ! गधा होकै आदम जाद तैं प्यार करनै चला था !...... गधा कहीं का....... ! हमनै तो सुण राख्या था कि गधे ही
दुल्लत्ती मारया करै सैं पर भाई इस बला नै तो चन्दू गधे को वो दुल्लत्ती मारी कि यो चन्दू ओंधे मूंह कुलांट खा गया !

वाह रे चन्दू गधे की किस्मत ! असल में हुया यो की इब उस छोरी का दिल चन्दू से ऊब गया था और वो एक सेठ के गधे से फ़ंस गई थी ! ये सेठ का गधा भी क्या गधा ? बल्कि गधे के नाम पर कलंक ! पर चुंकि सेठ का गधा था तो था ! आप और हम इसमे क्या कर लेंगे ? इसिलिये तो कहते हैं "जिसका सेठ मेहरवान उसका गधा पहलवान" ! बिल्कुळ मोटा काला भुसन्ड और दो जवान बच्चों का बाप !
पर आया जाया करै था मर्सडीज कार मे और घने दिनों तैं डोरे फ़ेंक राखे थे इस छोरी पै ! इब कहां ज्ञानी धोबी का गधा चन्दू और कहां सेठ किरोडीमल का गधा ? चन्दू पैदल छाप और ये मर्सडिज बेन्ज मै चलने वाला गधा ! सो छोरी को तो फ़सना ही था ! फ़ंस ली !

क्यों की फ़ंसना और फ़साना ही तो उसके प्रिय शगल थे ! और इसकै नखरै उठानै मैं इस मोटे गधे ने कोइ कमी भी नही
छोड राखी थी ! चन्दू की तो इस सेठ के गधे के सामने ओकात हि क्या ?

इब चन्दु सडक के बीचों बीच गाता जावै था
" वो तेरे प्यार का गम इक बहाना था सनम"
ताऊ उधर तैं निकल रह्या था ! गधे नै यो गाना गाते सुन के बोल्या --
अबे सुसरी के ! बेवकूफ़ गधे के बच्चे ! इब क्युं देवदास बण रह्या सै ? तेरे को पहले सोचना चाहिये था कि इन बलाओं से तेरे जैसे साधारण गधे को इश्क नही करना चाहिये ! इनसे तो कोई बडे सेठ का गधा ही इश्क कर सकै सै ! फ़िर वो भले ही दो जवान बच्चों का बाप हो ! या काला मोटा और उम्रदराज हो ? आखिर धन माया ही तो सब कुछ है इस जमाने में ! अरे उल्लू के पठ्ठे... ये कोइ लैला मजनूं वाला जमाना नही सै ! अबे गधेराम ये इक्कसवीं सदी है ! इसमे तो धन माया के पीछे भाइ भाइ , बाप बेटे यहां तक की मियां बीबी भी एक दुसरे की कब्र खोद देवैं सै ! तु भले कितना ही सुथरा और शरीफ़ गधा हो ! है तो तू आखिर धोबी का ही गधा !

और ये सुन कर चन्दू , चुपचाप, हारे जुआरी जैसा कपडे की गठरी लादे जलेबी घाट की और बढ लिया !