कैसे गुजरी तमाम रात, बताऊं कैसे ?
रात भर करवटें बदलीं , सुनाऊं कैसे ?
"बेचैनी का बुरा आलम,
दर्दे दिल तुझको, दिखाऊं कैसे ?
लग रहा भोर हो चुकी अबतो,
रात के जख्म, छुपाऊं कैसे ?
जीने की कोई तमन्ना ही नही,
जिंदगी का बोझ, उठाऊं कैसे ?
तन्हाई मुझको पुकारे यारो
सजदे में सर अब, झुकाऊं कैसे ?


