आंसू बिकते हैं...
एक नेताजी बोले
भैया मगर
जरा से आंसू
उधार दो अगर
तो देश की बदहाली पर
हम भी ऑंखें कर आये तर...
पथरीली आंखों से
बोला मगर
नेता हु्जूर
बडी देर कर दी
कुछ जल्दी आते अगर ...
सारा का सारा
आंसुओं का स्टाक तो
दस दिन पहले ही
दूसरी पार्टी वालो
को हम कर चुके है नज़र
नेता जी बोले
कुछ करो हेरफ़ेर
अच्छे दाम दूंगा
तुमको भाई मगर
मगर बोला
नेताजी
हम आंसूओं का व्यापार
करते हैं
कोई हेराफ़ेरी
या नेता गिरी नही करते
तुम्हारा कोई तीर अब
नहीं करेगा मुझ पर असर .....
(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)