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ताऊ और ताई का वेलेंटाईन डे....




ताऊ को सुबह ताई ने
बेलन की जगह चिमटे से
चिमटी काटते हुये 
प्यार से उठाया

आंखे खोलते ही देखा
सामने ताई मुस्कराते हुये 
चिमटा लिये खडी थी

ताऊ का माथा ठनका
ताई का स्वर खनका
बोली - आज वेलेंटाईन डे है
हम भी मनायेंगे
आज दिन भर  करेंगे
प्यार की बातें
लठ्ठ नही चलायेंगे

पर हाय री किस्मत
मिड डे तक ही चल पाया 
दोनों का वेलेंटाईन डे
उसके बाद दोनों में पूर्ववत
वाकयुद्ध छिड गया

फ़िर लठ्ठ और चिमटे की 
मधुर स्वर लहरियां  गूंजने लगी
ताऊ और ताई का युगल स्वर
एक महाराग पैदा कर रहा था.

गीत संगीत मय महफ़िल की गूंज
पडौसी सतीश सक्सेना तक पहुंची
संगीत के कद्रदान सक्सेना जी
अपने आपको रोक ना पाये

सीधे आ पहुंचे 
ताऊ और ताई की 
महा संगीत महफ़िल में
आकर दोनों को समझाने लगे
वेलेंटाईन का महत्व बताने लगे

काफ़ी देर बाद 
दोनों से बर्दाश्त नही हुआ
तब ताऊ बोला - अरी भागवान
हम तो रोज ही लठ्ठ और चिमटे से 
महा संगीत बजाते हैं
ये सक्सेना जी कब कब आते हैं?

ताई ने समझा इशारा
लठ्ठ बजाया करारा
दोनों ने मिलकर 
सक्सेना जी को बजा डाला
एक महान संगीत रच डाला