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ताऊ शनीचरी पहेली राऊंड २ (अंक - १)

प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरै की घणी राम राम. आज से ताऊ पहेली का दुसरा राऊंड शुरु कर रहे हैं. इस राऊंड मे सब कुछ पहले जैसा ही है. आज से राऊंड दो की मेरिट लिस्ट बिल्कुल अलग बनेगी.

 

कुछ और बाते जो जरुरी हैं उनकी घोषणा हम नीचे किये दे रहे हैं. कृपया ध्यान पुर्वक पढने की कृपा करें.

 

चुनाव का समय है सो हम अपनी थोडी बहुत जिम्मेदारी अपने कुछ सहयोगियों को सौंप रहे हैं. जिससे सब काम यथा संभव आराम से चल सके. क्योंकि हमको सैम को चुनाव लडने मे समय देना पडेगा.

 

१. शनीवार को इस पहेली का प्रकाशन पुर्ववत सूबह ७ बजे होगा. पहेली का संचालन हम स्वयम करेंगे.

 

२. बोनस सवाल अब से हमारी रामप्यारी पूछा करेगी. जो कि जब भी पूछा जायेगा वो ३० नम्बर का ही होगा. इस विषय का स्वतंत्र प्रभार रामप्यारी के पास रहेगा. आपको जो भी सवाल जवाब इस बारे मे करना है वो आप स्वतंत्र रुप से रामप्यारी से ही करें. वो हर निर्णय लेने के लिये स्वतंत्र है.

 

३. पहेली के जवाब का समय अब २५ घंटे का कर दिया गया है. यानि शनीवार सूबह ७ बजे इसका प्रकाशन होगा और ठीक २५ घंटे बाद यानि रविवार सूबह आठ बजे के बाद के जवाब किसी भी हालत मे स्वीकार नही किये जायेंगे. और ना ही उसके लिये कोई अंक दिये जायेंगे.

 

कृपया ध्यान रखे कि नियम ३ का पालन सख्ती से किया जायेगा. क्योंकि पिछले राऊंड मे कुछ प्रतिभागियों ने इस पर ऐतराज भी ऊठाया था. और हमको रिजल्ट तैयार करने मे भी समय लगता है.

 

४. पहेली का जवाब अब सोमवार की ताऊ साप्ताहिक पत्रिका के बजाये रविवार शाम को ही रिजल्ट तैयार होते ही प्रकाशित कर दिये जयेंगे. जिसमे सिर्फ़ रिजल्ट और मेरिट ही रहेगी.

 

५. पहेली की जवाबी पोस्ट यानि रविवार को रिजल्ट तैयार करने की जिम्मेदारी बिनू फ़िरंगी निभायेंगे. बीनू फ़िरंगी काफ़ी पढे लिखे हैं. प्रथम राऊंड मे भी इन्होने काफ़ी सहयोग दिया है सो इस दुसरे राऊंड मे इनको स्वतंत्र प्रभार दिया जा रहा है.

 

६. सोमवार की ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे संपादक की बात, सु. अल्पना जी का " मेरा पन्ना", सु सीमा जी का स्तम्भ "मेरी कलम से" और श्री आशीष खंडेलवाल का कालम यथावत रहेगा. यानि रिजल्ट वाला भाग इस पत्रिका से हटाकर स्वतंत्र रुप से रविवार को बीनू फ़िरंगी करेंगें.

 

यह निर्णय इस लिये लिया गया है कि सोमवार की पोस्ट काफ़ी बडी होने से उसकी फ़ीड मिलने मे दिक्कते आ रही थी.

 

 

आईये अब ताऊ शनीचरी पहेली के राऊंड दो के अंक एक का आगाज करते हैं. नीचे का चित्र देखिये और बताईये इसके बारे में?

 

 

round2 

             पहचानिये ये क्या है?

 

 

याद रखिये कि इसका जवाब कल सूबह ८ बजे यानि रविवार सुबह आठ बजे के पहले देना है. उसके बाद का जवाब मान्य नही होगा. हां आपकी कोई मनोरंजक टिपणि होगी तो वो छपते छपते मे जरुर शामिल की जा स्कती है. पर किसी भी तरह के मार्क्स नही दिये जायेंगे.

 

 

 

 

                          अब विशेष बोनस सवाल : -  ३० अंक के लिये.

rampyari

 

          "रामप्यारी का सवाल" 
  




आप सबको  नमस्ते.

मैं हूं आपकी रामप्यारी. मुझे स्कूळ जाना बिल्कुल अच्छा नही लगता. और
खासकर गणित वाली टीचर की क्लास मे तो बिल्कुल भी अच्छा नही
लगता. मालूम है क्यों?

वो ना, उलटे सीधे सवाल फूछती है और नही करके ले जाओ तो चांटे
मारती है. अब मुझे नीचे वाला सवाल बिल्कुल नही आता. अब सोमवार को
मुझे पिटने से आप ही बचा सकते हैं.

बदले मे मैं आपको पूरे ३० नम्बर दूंगी. आपको मुझे पिटने से बचाने का
पुण्य भी मिलेगा और साथ मे नम्बर भी. 

और हां मेरे सवाल का ताऊ की टीपणी मे जवाब मत दिजियेगा. मेरे लिये
आप एक बिल्कुल अलग टिपणी करियेगा. ठीक है ना? तो अब सवाल ध्यान
से सुनिये. और आराम से जवाब दिजियेगा.

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मेरी गणित की टीचर के पास कुल १६ चोक बचे हैं. और वो रोज १ चोक काम मे लेती है. 

और मजे की बात कि जब चोक  १/४ यानि चौथा हिस्सा बाकी रह जाता है
तब वो नया चोक ले लेती है. और बचे हुये चोथे हिस्से को रख देती है.

फ़िर जब बचे हुये चोथे हिस्से के जैसे चार टूकडे इक्कठ्ठे हो जाते हैं तब उन चारों को जोडकर फ़िर एक चोक बनाकर वैसे ही काम मे ले लेती है. 

अब मेरी टीचर पूछ रही है कि रामप्यारी बता - इन १६ चाक से मैं कितने दिन तुम लोगों को पढा सकूंगी?
 
मैने मन ही मन कहा कि भगवान करे एक दिन ही मे पूरा कर लो जिससे हम बच्चों का पीछा छुटे तुमसे. पर उसकी बेंत के डर से मैं ऐसा तो नही बोल सकती ना? और मेरा तो सर दर्द करने लगता है ऐसे सवालों से.

अगर आपको इसका जवाब आता हो तो बताईये ना, मैं पिटने से बच जाऊंगी.

-आपकी रामप्यारी

   


ताऊ की यादों मे :-

हर शम्आ बुझी रफ्ता रफ्ता हर ख्वाब लुटा धीरे - धीरे
शीशा न सही पत्थर भी न था दिल टूट गया धीरे - धीरे

- कैसर उल जाफरी

 

"मुर्ख व्यक्ति ना तो भूलता है और ना ही माफ़ करता है.

भोला भाला भूल भी जाता है और माफ़ भी कर देता है.

मगर समझदार माफ़ तो कर देता है, पर भूलता नही."