बादशाह सलामत तो एक दम ही मुगलेआजम वाले गेट अप मे सोफ़े पर पसरे हुये इंटर्व्यु ले रहे थे...ताऊ भी अपना नंबर आने पर डरता डरता ऊठा ..और भाटिया जी का हाथ पकडे पकडे जिल्ले-इलाही के सामने खडा हो कर आदाब बजाते हुये बोला - लामलाम... सलदाल....लामलाम...
( असल मे ताऊ बादशाह के दरबार मे पहले बार गया था सो घबरा गया और घबराहट मे रामराम को लामलाम बोल गया और ताऊ की शोले का असर उस पर अभी बाकी था सो बादशाह सलामत की जगह सरदार बोल गया और वो भी तुतला कर सलदाल..कह गया. )
बादशाह अकबर - हूं..ये कौन सी भाषा बोल रहे हो बरखुरदार तुम? और भाटिया जी की तरफ़ प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा.
भाटिया जी ने आदाब बजाते हुये कहा - जहांपनाह...ये आपकी पुरानी सल्तनत दिल्ली के पास रोहतक का रहने वाला है हुजुर...आपको वो सल्तनत छोडे मुद्दतें हुई..अब आप जर्मनी मे जन्म लेकर वो भाषा भूल चुके हैं....ये आपको आपकी पुरानी सल्तनत की याद दिलाते हुये वहीं की हरयाणवी भाषा में कह रहा था...जहांपनाह का पुराना रुतबा वापस कायम हो....
बादशाह अकबर - वाह ..वाह..हमे ऐसे ही आदमी की आवश्यकता है...पुराना रुतबा तो आज भी हमारे सपनों मे रह रह कर आता है...अब जर्मनी मे रहकर नौ रत्न रखना तो हम अफ़ोर्ड नही कर सकते पर एक रत्न तो रख ही सकते हैं. हमारा मन भी लगा रहेगा. हां तो तुम्हारा नाम क्या है?
ताऊ - हुजुर मुझे ताऊ कहते हैं.
बादशाह अकबर - अरे वाह ...ताऊ..वाह..मा बदौलत को नाम पसंद आया...हमे ऐसा ही नाम वाला आदमी चाहिये था...आज से तुम हमारी सेवा मे सरकारी मुलाजिम हुये.....
ताऊ मन लगाकर जहांपनाह की सेवा करने लगा.. अब बादशाह सलामत तो ठहरे बादशाह सलामत... जो भी उटपटांग सवाल मन मे उठता उसका जवाब मांगते...जवाब देने पर इनाम नही तो हर बात मे ताऊ को या तो फ़ांसी चढवा दूंगा या..देश निकाला दे दूंगा की धमकी मिलती..ताऊ भी इन सबका अभ्यस्त हो चुका था.
कुछ दिन बाद .........बादशाह सलामत सोफ़े पर पसरे पडे हैं...ताऊ आदाब अर्ज की मुद्रा मे खडा है... जींस की पैंट पहने दो आधुनिक सेविकायें चाय नाश्ते की ट्रे लिये आरही हैं.....
अकबर -- हां तो ताऊ, हमको कुछ दिन से यह विचार आरहा है कि इस दुनियां मे सर्वश्रेष्ठ क्या है? बताओगे? वर्ना हम तुम्हारा जर्मनी से बाहर युगांडा ट्रांसफ़र करवा देंगे...
अब ताऊ ने सोचा कि आज फ़ंस गये...ताऊ ने सोचने के लिये २४ घंटे की मोहलत मांगना उचित समझा...और बोला - हुजुर, दुनियां की सर्वश्रेष्ठ चीज कल सुबह ही आपकी खिदमत मे पेश कर दी जायेगी....हुजुर. अब मुझे आज्ञा दिजिये...मैं वो चीज लेकर कल सुबह आऊंगा.
अब बहुत सोच समझकर ताऊ ने आशीष खंडेलवाल जी से कहकर एक की-बोर्ड का इंतजाम करवाया और अगले दिन ताऊ वह कंप्युटर का की-बोर्ड लाल कपडे में लपेट कर बगल मे दबाये दबाये दरबार मे पेश हुआ और आदाब अर्ज बजाने के बाद उसे जहांपनाह को देते हुये बोला - हुजुर ये लिजिये दुनियां की सर्वश्रेष्ठ चीज.
बादशाह अकबर - ये क्या लाये हो ताऊ? क्या है इसमे ?
ताऊ - माई बाप...इसमे कंप्युटर का की-बोर्ड है हुजुर...
बादशाह सलामत की त्योरियां चढ गई और बुरी तरह से गुस्सा होकर अपनी पुरानी आदत अनुसार अकबरी तलवार खींचकर बोले - खामोश बद दिमाग ताऊ...हमसे मजाक करता है? तेरी हिम्मत कैसे हुई? मत भूल की हम अब भी बादशाह अकबर हैं. एक की-बोर्ड दुनियां की सर्वश्रेष्ठ वस्तु कैसे हो सकती है? अब आज अकबरी प्रकोप से तुझको कोई नही बचा सकता.
ताऊ बोला - गुस्ताखी माफ़ हो हुजुर..असल मे आजकल जीभ का काम की-बोर्ड से होने लगा है....जैसे जीभ से किसी के लिये अच्छा और मधुर बोलकर किसी का प्यार और प्रसंशा पाई जा सकती है हुजुर...वैसे ही आजकल ब्लागिंग मे इसी की-बोर्ड से सुंदर और मधुर लिखकर परम आनंद प्राप्त किया जा सकता है. यानि सबसे दोस्ती निभाई जा सकती है...सबकी आंखों का तारा बना जा सकता है अत: हे बादशाह श्रेष्ठ..आज के युग मे यह की-बोर्ड ही सर्वश्रेष्ठ है.
ताऊ के इस उत्तर पर बादशाह सलामत अति प्रशन्न हुये और बोले - ताऊ, तेरे उत्तर से हमारी तबियत गार्डन से भी बडा गार्डन हुई...मुगलिया सल्तनत का दौर होता तो आज हम तुमको दस बीस गांव की जागीर अता कर देते..पर फ़िल्हाल तुम ये १० हजार युरो की थैली स्वीकार करो. और अब हमको ये बताओ कि दुनियां मे सबसे निकृष्ट चीज क्या है?
ताऊ मन ही मन भुनभुनाते हुये बोला -- हुजुर निकृष्ट चीज भी कल सुबह आपकी पेशे खिदमत करुंगा. और ताऊ वहां से सोचते हुये निकल लेता है.
अगले दिन ताऊ फ़िर एक की-बोर्ड आशीष खंडेलवाल जी से मंगवा कर, लाल कपडे मे बांध कर बादशाह सलामत के पेशे खिदमत करता है और कहता है कि जहांपनाह यही है दुनियां की निकृष्ट चीज. फ़िर से की-बोर्ड देखकर बादशाह सलामत का पारा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है.
अकबर बादशाह लाल पीले होते हुये चिल्लाए - दारोगा-ए-जिंदान....फ़ौरन से पेश्तर इस नामाकूल इंसान को ले जाकर अंधेरी कोठरी मे डाल दिया जाये. ये हमसे मजाक करने की जुर्रत कर रहा है? इस दो चव्वन्नी के ताऊ की हिम्मत तो देखो? अरे कल जिस चीज को सर्वश्रेष्ठ बता रहा था आज उसको ही निकृष्ट बता रहा है?
(ताऊ मन ही मन सोचता है कि राज भाटिया जी और समीर जी ने भी मुझसे क्या दुशमनी निकाली है? कैसे आदमी के पास नौकरी दिलवाई है? अगर इसका बस चले तो ये दिन मे तीन बार मुझे अनारकली की तरह दीवार मे चुनवादे?)
तभी बीच मे ही अपना हैट उतारते हुये महारानी जोधाबाई बोली - अय हुजुर..आप ये क्युं भूल जाते हैं कि ये हमारी दिल्ली वाली सल्तनत का समय नही है? ये जर्मनी है और यहां कोई किसी को काल कोठरियों मे नही डलवा सकता. आपको अपने बादशाह होने का शौक पूरा करना है तो तरीके से किया किजिये. पहले ताऊ की बात तो सुनिये पूरी तरह से....और ताऊ से मुखातिब होते हुये महारानी जोधा बाई बोली - हां तो ताऊ, बताओ कि ये की-बोर्ड कैसे दुनियां की निकृष्ट चीज है?
ताऊ - महारानी साहिबा की जय हो..आपका इकबाल बुलंद हो महारानी साहिबा...आपको जल्दी ही शहजादे सलीम की प्राप्ति हो....( महारानी जोधा ने जैसे ही शहजादे सलीम की प्राप्ति की दुआ सुनी तो जोधा बाई ने अपने गले का हार उतार कर ताऊ की तरफ़ बढा दिया)
ताऊ सर झुका कर हार लपकते हुये बोला - हुजुर..जहांपनाह, आजकल ब्लागिंग हो रही है जमकर..और यही वो चीज है की-बोर्ड.. जिससे चाहे जिसके खिलाफ़ जहर उगला जाता है.... और आदमी इस की-बोर्ड से जहर उगलकर...और मोटी मोटी गालियां देकर ... सबकी नफ़रत का पात्र बन जाता है... और कभी कभी ...आई. पी. एडरेस पकड मे आने पर बहुत ही तबियत से जूते भी खाता है.... और कई बार गलती से सांप के बिल मे भी हाथ डाल देता है. यानि ये समझ लिजिये हुजुर...कि इसी सत्यानाशी की-बोर्ड की वजह से अच्छा भला आदमी अपनी दुर्गति करवा लेता है. बहुत गंदी चीज है ये की बोर्ड जहांपनाह....
अत: हुजुर इससे बढकर आज की दुनियां मे कोई दूसरी निकृष्ट चीज हो ही नही सकती. और अगर आपको यकीन ना हो तो हिंदी ब्लागजगत मे दरियाफ़्त करवा लिजिये हुजुर....आजकल तो चारों तरफ़ यही मंजर है....कोई सरेआम किसी को गालियां देरहा है ..तो कोई बेनामी के नाम से शौक पूरा कर रहा है....चारों तरफ़ माहोल खराब है हुजुर....
ताऊ की बात सुनते सुनते ही बादशाह सलामत का गुस्सा आसमान पर चढ गया और चिल्ला कर बोले - दारोगा-ए-जिंदान... इन बेनामियों को पकडकर हमारे सामने पेश किया जाये....
ताऊ मन लगाकर जहांपनाह की सेवा करने लगा.. अब बादशाह सलामत तो ठहरे बादशाह सलामत... जो भी उटपटांग सवाल मन मे उठता उसका जवाब मांगते...जवाब देने पर इनाम नही तो हर बात मे ताऊ को या तो फ़ांसी चढवा दूंगा या..देश निकाला दे दूंगा की धमकी मिलती..ताऊ भी इन सबका अभ्यस्त हो चुका था.
कुछ दिन बाद .........बादशाह सलामत सोफ़े पर पसरे पडे हैं...ताऊ आदाब अर्ज की मुद्रा मे खडा है... जींस की पैंट पहने दो आधुनिक सेविकायें चाय नाश्ते की ट्रे लिये आरही हैं.....
अकबर -- हां तो ताऊ, हमको कुछ दिन से यह विचार आरहा है कि इस दुनियां मे सर्वश्रेष्ठ क्या है? बताओगे? वर्ना हम तुम्हारा जर्मनी से बाहर युगांडा ट्रांसफ़र करवा देंगे...
अब ताऊ ने सोचा कि आज फ़ंस गये...ताऊ ने सोचने के लिये २४ घंटे की मोहलत मांगना उचित समझा...और बोला - हुजुर, दुनियां की सर्वश्रेष्ठ चीज कल सुबह ही आपकी खिदमत मे पेश कर दी जायेगी....हुजुर. अब मुझे आज्ञा दिजिये...मैं वो चीज लेकर कल सुबह आऊंगा.
अब बहुत सोच समझकर ताऊ ने आशीष खंडेलवाल जी से कहकर एक की-बोर्ड का इंतजाम करवाया और अगले दिन ताऊ वह कंप्युटर का की-बोर्ड लाल कपडे में लपेट कर बगल मे दबाये दबाये दरबार मे पेश हुआ और आदाब अर्ज बजाने के बाद उसे जहांपनाह को देते हुये बोला - हुजुर ये लिजिये दुनियां की सर्वश्रेष्ठ चीज.
बादशाह अकबर - ये क्या लाये हो ताऊ? क्या है इसमे ?
ताऊ - माई बाप...इसमे कंप्युटर का की-बोर्ड है हुजुर...
बादशाह सलामत की त्योरियां चढ गई और बुरी तरह से गुस्सा होकर अपनी पुरानी आदत अनुसार अकबरी तलवार खींचकर बोले - खामोश बद दिमाग ताऊ...हमसे मजाक करता है? तेरी हिम्मत कैसे हुई? मत भूल की हम अब भी बादशाह अकबर हैं. एक की-बोर्ड दुनियां की सर्वश्रेष्ठ वस्तु कैसे हो सकती है? अब आज अकबरी प्रकोप से तुझको कोई नही बचा सकता.
ताऊ बोला - गुस्ताखी माफ़ हो हुजुर..असल मे आजकल जीभ का काम की-बोर्ड से होने लगा है....जैसे जीभ से किसी के लिये अच्छा और मधुर बोलकर किसी का प्यार और प्रसंशा पाई जा सकती है हुजुर...वैसे ही आजकल ब्लागिंग मे इसी की-बोर्ड से सुंदर और मधुर लिखकर परम आनंद प्राप्त किया जा सकता है. यानि सबसे दोस्ती निभाई जा सकती है...सबकी आंखों का तारा बना जा सकता है अत: हे बादशाह श्रेष्ठ..आज के युग मे यह की-बोर्ड ही सर्वश्रेष्ठ है.
ताऊ के इस उत्तर पर बादशाह सलामत अति प्रशन्न हुये और बोले - ताऊ, तेरे उत्तर से हमारी तबियत गार्डन से भी बडा गार्डन हुई...मुगलिया सल्तनत का दौर होता तो आज हम तुमको दस बीस गांव की जागीर अता कर देते..पर फ़िल्हाल तुम ये १० हजार युरो की थैली स्वीकार करो. और अब हमको ये बताओ कि दुनियां मे सबसे निकृष्ट चीज क्या है?
ताऊ मन ही मन भुनभुनाते हुये बोला -- हुजुर निकृष्ट चीज भी कल सुबह आपकी पेशे खिदमत करुंगा. और ताऊ वहां से सोचते हुये निकल लेता है.
अगले दिन ताऊ फ़िर एक की-बोर्ड आशीष खंडेलवाल जी से मंगवा कर, लाल कपडे मे बांध कर बादशाह सलामत के पेशे खिदमत करता है और कहता है कि जहांपनाह यही है दुनियां की निकृष्ट चीज. फ़िर से की-बोर्ड देखकर बादशाह सलामत का पारा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है.
अकबर बादशाह लाल पीले होते हुये चिल्लाए - दारोगा-ए-जिंदान....फ़ौरन से पेश्तर इस नामाकूल इंसान को ले जाकर अंधेरी कोठरी मे डाल दिया जाये. ये हमसे मजाक करने की जुर्रत कर रहा है? इस दो चव्वन्नी के ताऊ की हिम्मत तो देखो? अरे कल जिस चीज को सर्वश्रेष्ठ बता रहा था आज उसको ही निकृष्ट बता रहा है?
(ताऊ मन ही मन सोचता है कि राज भाटिया जी और समीर जी ने भी मुझसे क्या दुशमनी निकाली है? कैसे आदमी के पास नौकरी दिलवाई है? अगर इसका बस चले तो ये दिन मे तीन बार मुझे अनारकली की तरह दीवार मे चुनवादे?)
तभी बीच मे ही अपना हैट उतारते हुये महारानी जोधाबाई बोली - अय हुजुर..आप ये क्युं भूल जाते हैं कि ये हमारी दिल्ली वाली सल्तनत का समय नही है? ये जर्मनी है और यहां कोई किसी को काल कोठरियों मे नही डलवा सकता. आपको अपने बादशाह होने का शौक पूरा करना है तो तरीके से किया किजिये. पहले ताऊ की बात तो सुनिये पूरी तरह से....और ताऊ से मुखातिब होते हुये महारानी जोधा बाई बोली - हां तो ताऊ, बताओ कि ये की-बोर्ड कैसे दुनियां की निकृष्ट चीज है?
ताऊ - महारानी साहिबा की जय हो..आपका इकबाल बुलंद हो महारानी साहिबा...आपको जल्दी ही शहजादे सलीम की प्राप्ति हो....( महारानी जोधा ने जैसे ही शहजादे सलीम की प्राप्ति की दुआ सुनी तो जोधा बाई ने अपने गले का हार उतार कर ताऊ की तरफ़ बढा दिया)
ताऊ सर झुका कर हार लपकते हुये बोला - हुजुर..जहांपनाह, आजकल ब्लागिंग हो रही है जमकर..और यही वो चीज है की-बोर्ड.. जिससे चाहे जिसके खिलाफ़ जहर उगला जाता है.... और आदमी इस की-बोर्ड से जहर उगलकर...और मोटी मोटी गालियां देकर ... सबकी नफ़रत का पात्र बन जाता है... और कभी कभी ...आई. पी. एडरेस पकड मे आने पर बहुत ही तबियत से जूते भी खाता है.... और कई बार गलती से सांप के बिल मे भी हाथ डाल देता है. यानि ये समझ लिजिये हुजुर...कि इसी सत्यानाशी की-बोर्ड की वजह से अच्छा भला आदमी अपनी दुर्गति करवा लेता है. बहुत गंदी चीज है ये की बोर्ड जहांपनाह....
अत: हुजुर इससे बढकर आज की दुनियां मे कोई दूसरी निकृष्ट चीज हो ही नही सकती. और अगर आपको यकीन ना हो तो हिंदी ब्लागजगत मे दरियाफ़्त करवा लिजिये हुजुर....आजकल तो चारों तरफ़ यही मंजर है....कोई सरेआम किसी को गालियां देरहा है ..तो कोई बेनामी के नाम से शौक पूरा कर रहा है....चारों तरफ़ माहोल खराब है हुजुर....
ताऊ की बात सुनते सुनते ही बादशाह सलामत का गुस्सा आसमान पर चढ गया और चिल्ला कर बोले - दारोगा-ए-जिंदान... इन बेनामियों को पकडकर हमारे सामने पेश किया जाये....
दारोगा साहब आदाब बजाते हुये डर के मारे बोले - जो हुक्म ..मेरे आका...फ़ौरन से पेश्तर हुक्म की तामिली करवाता हूं और दारोगा साहब बेनामियों को हथकडी लगाने चल पडे...और ताऊ को फ़िर से दस हजार यूरो की थली इनाम मे देकर बादशाह सलामत ने अगला सवाल पूछा....... (क्रमश:)
