प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरै की घणी राम राम. आज हम ताऊ शनीचरी पहेली के दुसरे राऊंड के अंक पांच की पहेली पूछने वाले हैं.
हमको पता लगा है कि रामप्यारी उल्टी सीधी बकबास करती रहती है. खाली दिमाग शैतान का घर..यही सोच कर रामप्यारी को हमने क्ल्यु देने का और बोनस सवाल पूछने का जिम्मा दे रखा है.
पर रामप्यारी मे बचपना बहुत ज्यादा है. दूसरी कक्षा मे पढने लग गई पर अभी तक अक्ल कोडी की नही है. ताऊ जब दूसरी कक्षा मे पढता था तब अंगरेजी में अंगरेजों को हरा देता था. लगता है रामप्यारी ताऊ का नाम डूबोयेगी.
ताऊ ने सिफ़ारिश करके उसको पुलिस मे भर्ती करवा दिया तो पिस्तौल लेकर जानवरो और पक्षियों को डराती है. उसका आज का सवाल वो खुद की बेवकूफ़ी के बारे मे ही पूछ रही है. अत: सोच समझ कर जवाब दिजियेगा. क्योंकि बेवकूफ़ो के सवाल भी बडे बेवकूफ़ाना होते हैं.
रामप्यारी के ब्लाग तक पहुंचने के लिये आप रामप्यारी की फ़ोटॊ जो कि यहां साईड बार मे लगी है, उस पर चटका लगायें और वहां पहुंच जाये और वहां क्ल्यू की फ़ोटो पर चटका लगा कर आप वापस यहां आ जायें.आपको सब क्ल्यु रामप्यारी के ब्लाग पर ही मिलेंगे.
आईये अब आपको सीधे पहेली की तरफ़ लिये चलते हैं.
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यह कौन सी जगह है?
इस पहेली के जवाब देने का समय कल रविवार सूबह दस बजे तक बढा दिया गया है. ताऊ साप्ताहिक पत्रिका का प्रकाशन सोमवार सूबह पुर्ववत होगा.
अब रामप्यारी का विशेष बोनस सवाल : - ३० अंक के लिये.

वैरी गुड वाली मार्निंग अंकलों, आंटियों एंड दीदीयों,
अब मैं आपको क्या बताऊं? रामप्यारी तो लगता है आज आफ़त मे फ़ंस गई है. हुआ युं कि मैने ताऊ को साफ़ मना कर दिया कि मैं अब और नही पढूंगी. मैने दूसरी कक्षा मे फ़ैल होने का सर्टीफ़िकेट प्राप्त कर लिया है. ज्यादा पढकर क्या करना? और ज्यादा दिमाग खराब होगा.
मेरी इस बात पर ताऊ बोला कि - हां रामप्यारी तेरी बात तो सही है. मैं भी इसीलिये पांचवी फ़ैल का लायसेंस मिलते ही पढना बंद कर चुका था और लूट मार शुरु कर दी थी.
अब हुआ युं कि ताऊ ने मुझे पुलिस मे काम पर लगवा दिया और मुझे वहां से एक पिस्तौल भी मिल गया जिससे मैं सब पर रौब भी गांठती हूं. और सब मुझसे डरते भी हैं. अब इसी मे लफ़डा हो गया.
आप तो जानते ही हो कि मुझे सिर्फ़ खेलना और चाकलेट खाना पसंद है. अब जब मैं ड्युटी पर जाती हूं तो हाजिरी लगा कर तफ़्तीश करने के बहाने दिन भर मटरगश्ती करती हूं. काम कभी नही करती. कई साथ वालों ने मेरी शिकायत भी साहब लोगों से कर दी.
एक दिन हमारे बडे साहब ने मुझे एक केस सौंपा तफ़्तीश करने के लिये. हुआ युं कि एक मर्डर होगया और जांच का काम पूरा करने मैं रवाना हुई. रास्ते मे मेरे साथ वाले बच्चे मिल गये और मैं दिन भर खेलती रही. शाम को याद आया कि - अरे रामप्यारी आज तो तेरी नौकरी गई. मैं तो भूल ही गई की मुझे मौका-ए-वारदात पर पहुंचना था.
अब मैं जल्दी २ वहां से भागी घटना स्थल की और. रास्ते मे सामने से ताऊ आता दिखाई दिया और मुझे इस तरह बेतहासा भागते देख कर कारण पूछा. मैने ताऊ को सब सच्ची २ बात बतादी. क्योंकि मैं दुनियां मे सबसे झूंठ बोल सकती हूं पर ताऊ से नही.
मेरी बात सुनकर ताऊ बोला - कि रामप्यारी अब तू एक काम कर. मैं वहीं से आ रहा हूं. तेरे को सारा विवरण बताता हूं. तू यहीं बैठकर रिपोर्ट बना ले और फ़िर जाकर यही रिपोर्ट सबमिट कर देना.
बात मुझे जम गई.अब ताऊ ने मुझे बताया कि - लिख रामप्यारी --
एक कमरा..जिसका एक दरवाजा, जो अंदर से बंद है. उस कमरे की दो खिडकियां..एक अंदर से बंद और दूसरी खुली है. अंदर का सारा नजारा इसी खिडकी से झांक कर देखा जा सकता है.
खिडकी से झांकने पर सामने की दिवार पर एक घोडे की फ़ोटो टंगी है. उस फ़ोटो का कांच टुटा हुआ है.
कमरे के बीचोंबीच एक गोल टेबल है. जिस पर तीन चाय के कप रखें हैं..दो खाली हैं और एक कप आधा अब भी भरा हुआ है. साथ मे दो प्लेट रखी हैं...एक खाली है और दुसरी मे चार बिस्कुट रखे हैं. सिगरेट की ऐश ट्रे से अभी भी धुंआ निकल रहा है. और वहीं पर एक जासूसी उपन्यास " मौत का सौदागर" रखा है जिसके पेज नम्बर इक्कासी - बयांसी खुले हुये हैं.
टेबल के चारों और तीन कुरसियां लगी हैं. दो कुर्सी खाली हैं और एक पर लाश है.. लाश की गर्दन लटक चुकी है और सीने मे एक बडा सा खंजर घुसा हुआ है... कमरे मे घुटनों तक पानी भरा है... और कोई सा FM रेडियो स्टेशन बज रहा है. माहौल मे एक अजीब सा सन्नाटा पसरा है.
यह रिपोर्ट लिख कर मेरी तो खुशी के मारे चीख ही निकल पडी. और मैने कहा - वाह ताऊ वाह..क्याअ खूब रिपोर्ट लिखवाई है आपने. लगता है कि आप भी "पेरी मेशन" से कम नही हो? आज तो अब मेरा प्रोमोशन पक्का ही समझो.
मैं बहुत खुश होती हुई साहब के केबिन मे घुसी और रिपोर्ट साहब के सामने रख दी.
साहब ने पुरी रिपोर्ट पड्गी और मेरे उपर जोर से चिल्लाये - रामप्यारी ..ये क्या तमाशा लगा रखा है? मैं तुमको अभी सस्पेंड करता हूं.
मैं तो घबरा गई. मैं कुछ बोलती उसके पहले ही साहब चिल्ला कर बोले - तुम मौका-ए-वारदात पर गई ही नही थी और यह झूंठी रिपोर्ट बना कर लाई हो. सच बताऒ? वर्ना नौकरी से बाहर समझो अपने आपको. और सात दिन के अंदर मुझे जवाब चाहिये.
अब आप मुझे ये बताइये कि इस रिपोर्ट मे ऐसा क्या लिखा गया जो साहब ने तुरंत पकड लिया कि रामप्यारी ने बिना वहां गये ही रिपोर्ट लिख दी?
अब आपका जवाब आने पर ही साहब के आरोपों का जवाब दूंगी. रामप्यारी की नौकरी का सवाल है. कृपया मेरी मदद किजिये.
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