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माता बखेडा वाली, ताऊ और मरी हुई भैंस

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था. चारों तरफ़ युद्ध के बाद का भयावह सन्नाटा...दूर दूर तक सुनसान....गिद्ध कौव्वों के आकाश में मंडराते झुंड.....अधिकतर जवान युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो चुके थे.

थके मायूस महाराज धृतराष्ट्र भी अपने भतीजों यानि पांडवों के साथ रहने चले गये थे. उनके दिल का दर्द तो सिर्फ़ समझा ही जा सकता है. हम आपको यहां कोई महाभारत की कहानी सुनाने नहीं आये हैं. कहानी दो अन्य पात्रों की है जो ठीक उसी समय की है. तो सुनिये.....

एक तो थी "माताश्री बखेडा वाली" जिनकी उम्र उस समय भी 780 साल की थी और आज भी उतनी ही है. गरीबों का दुख दर्द दूर करना, उनकी सहायता करना और अपने व्यापार में लीन रहना ही उनकी दिनचर्या का मुख्य हिस्सा था. गरीबों के लिये महाराज धृतराष्ट्र से भी उलझ लेती थी. उन्होंने द्रौपदी चीरहरण के समय महाराज धृतराष्ट्र...पितामह भीष्म...विदूर जी सबकी बखिया उधेड कर बहुत बडा बखेडा खडा कर दिया था....वो तो कृष्ण भगवान वहां आगये दौपदी की लाज बचाने वर्ना तो माता बखेडा वाली ने दुर्योधन, दुशासन और विकर्ण के शीश ही कलम कर दिये होते. वैसे कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि "माता बखेडा वाली" चाहती तो कृष्ण के आने के पहले ही   द्रौपदी की रक्षा कर चुकी होती पर उन्हें तो कृष्ण को यह सम्मान दिलाना था...खैर जो भी हो.....माता बखेडा वाली की जय.....

उनकी इसी वीरता की वजह से भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि "सत्य के पक्ष में आपने अन्याय का विरोध किया, इसी से प्रसन्न होकर मैं आपको वरदान देता हूं कि आप कलयुग में "माता बखेडा वाली" के नाम से पूरे सोशल मीडिया में सर्वत्र पूज्यनीय रहेंगी और इस पृथ्वी के रहने तक आपकी उम्र जो अभी है वही 780 साल की ही रहेगी.   युद्धकाल के बाद जीवन यापन के लिये उन्होंने  साहुकारी का धंधा चालू रखा था जो कि पहले भी करती थी.

अब हमारी कहानी का दूसरा पात्र है ताऊ महाराज...जिनसे आप भली भांति परिचित ही होंगे.....जो नये पाठक हैं उनको कम शब्दों में ही बता देते हैं कि ताऊ महाराज में छूट भलाई सारे गुण कूट कूट कर शुरू से ही भरे थे. ताऊ महाराज उस समय में भी चोरी, डकैती, ठगी, बेईमानी... उठाईगिरी के ही धंधे किया करते थे.... उनको ना पहले कुछ और काम आता था और ना कुछ अब आता है...

महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था....दोनों पक्षों की तरफ़ से सैनिकों की भर्ती चालू थी. ताऊ महाराज भी कौरवों के सेनापति की पकड में आ गये और कौरव दल में जबरदस्ती भर्ती कर लिये गये.... ताऊ ने सोचा फ़ंस गये अब तो...युद्ध के नाम से ही ताऊ कांप रहा था....एक दिन मौका देखकर भाग निकला और जाकर जंगल में छुप गया....पूरे 18 दिन के बाद वापस लौटा जब युद्ध समाप्त हो गया था......

अब ताऊ क्या करे? किसको लूटे..किसको ठगे...किसके यहां डकैती डाले? कोई बचा ही नहीं था.....तो ताऊ ने गुजर बसर करने को एक भैंस पाल ली और अपना गुजारा करने लगा.

यूं ही काफ़ी समय बीत चला था. अब एक दिन हुआ यूं कि ताऊ की भैंस मर गई, ताऊ को काटो तो खून नहीं. अब ताऊ क्या करे? कैसे पेट पाले? पर ताऊ तो ताऊ .....ताऊ को पुराने शौक फ़िर याद आये....ताऊ ने सोचा अब इस मरी हुई भैंस के पैसे वसूल कर लिये जायें तो काम चल सकता है. ताऊ ने चारों तरफ़ नजर दौडाई पर ऐसा कोई सख्श नहीं नजर में आया जिसको इस मरी हुई भैंस की टोपी पहनाई जा सके....अचानक ताऊ को माताश्री बखेडा वाली का ध्यान आया तो खुशी से उछल पडा.

ताऊ  माता बखेडा वाली को दादीश्री कहकर बुलाता था क्योंकि दोनों की उम्र में 300 साल का फ़र्क था. ताऊ उनके  पास पहुंचा और बोला - दादीश्री राम राम....
माता बखेडा वाली ने सोचा आज ये ताऊ मेरे पास क्या लेने आया है? फ़िर भी बोली - रामराम ताऊ रामराम...बता क्या हाल चाल है? कैसे आना हुआ?

ताऊ बोला - दादीश्री मुझे मेरी भैंस एक हजार रूपये में बेचना है...भैंस तो ज्यादा की है पर मुझे रूपये की जरूरत है इसलिये एक हजार में दे दूंगा.
माता बखेडा वाली भी कम नहीं थी...पूरी साहुकार व्यापारी थी और बिजनेस में किसी तरह का कोई कंप्रोमाईज पसंद नहीं करती थी...आप कह सकते हैं कि पूरी कडक व्यापारी थी. बोली - अच्छा...तेरी वो मरगिल्ली सी भैंस के कौन देगा एक हजार?  तुझ पर दया करके तेरी भैंस के 500  रूपया दे सकती हूं.... लेना हो तो ले वर्ना अपना रास्ता नाप.....मुझे बहुत काम है और माता अपने हिसाब किताब में लग गई.

ताऊ ने सोचा....आसामी तो फ़ंस गई...फ़िर भी उदास सा मुंह बनाकर बोला - ठीक है...मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठा रही हो आप....लावो दे दो पांच सौ ही...और भैंस मेरे घर पर पडी मिलेगी....बुलवा लेना.....

माता बखेडा वाली हिसाब किताब में व्यस्त थी सो यह नहीं सुना कि भैंस पडी है....ताऊ को पांच सौ रूपये दे दिये और ताऊ ने रूपये अपने खीसे में डाले और गांव छोडकर यह जा...वो जा...होगया.

ताऊ को डर था कि बखेडा वाली माता उसे छोडने वाली नहीं है सो काफ़ी समय तक तो वापस लौटा ही नहीं....फ़िर एक दिन चुपचाप अपने घर लौट आया...आखिर कब तक बाहर रहता. ताऊ को रोज डर लगता था कि आज माता बखेडा वाली आई कि कल आई. जब माता आई ही नहीं तो ताऊ खुद उनके पास पहुंच गया और प्रणाम करके बैठ गया.....माता बखेडा वाली ने ताऊ का काफ़ी आदर सत्कार किया और मरी हुई भैंस का कोई जिक्र ही नहीं किया तो ताऊ आश्चर्य में पड गया और पूछ बैठा...

तब माता बखेडा वाली बोली - ताऊ, तुम तो मरी भैंस मेरे गले बांध गये थे पर मुझे तो उससे काफ़ी मुनाफ़ा हुआ. अब ताऊ के चौंकने की बारी थी....पूछ बैठा - दादीश्री....मरी भैंस से फ़ायदा...?

माता बखेडा वाली बोली - ताऊ तुम बेईमानी ठगी से कमाते हो और हम व्यापारी हैं, अक्ल से कमाते हैं......जब तुम मरी भैंस बेचकर भाग गये तो मुझे मालूम था कि तुमको भागने के बाद पकडना ऐसा ही है जैसे गधे के सर से सींग पकडना....मैंने एक एक रूपये के लाटरी टिकट निकाल दिये और ईनाम में भैंस रख दी. कुल दस हजार रूपयों से ज्यादा के टिकट बिके. एक आदमी को भैंस ईनाम में निकल गयी. मैने उसको तुम्हारी मरी भैंस ईनाम में   दे दी....वो बोला - यह तो मरी हुई भैंस है...मैं इसका क्या करूंगा...मुझे तो जिंदा मुर्रा भैंस चाहिये.

मैंने कहा - ज्यादा चकर बकर नहीं.....लेना हो तो ले वर्ना तूने जो एक रूपया का टिकट खरीदा था वो एक रूपया वापस पकड....और निकल ले....वो अपना एक रूपया लेकर वापस चला गया....इस तरह पूरे दस हजार से ज्यादा का मुनाफ़ा तेरी मरी हुई भैंस दे गई.....

ताऊ भौंचक्का सा हुआ दादीश्री के मुंह की तरफ़ देखता रह गया.

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

ताऊ की भैंस से यमराज के भैंसे का इश्क परवान चढ़ा !

अब वहाँ चाँद पर से यमदूतो के साथ ताऊ चलने लगा तो भाटिया साहब की आँखे भर आई ! और दौड़ कर आकर ताऊ के गले लग गए ! ताऊ भी काफी भावुक हो गया ! फ़िर भाटिया जी बोले भाई तू इब हमेशा के लिए जावै सै  ! एक बार ताजा लस्सी  और पीले और उसके बाद हुक्का पीके चले जाना ! तेरे को आज के बाद  वहाँ हुक्का चिलम कुछ नही मिलेगा ! इब भाटिया साहब बोले - ताऊ तुम चिंता मत करना ! तुम मुझे ख़बर करवा देना की तुमको ये कौन से नर्क में ले गए हैं !

 

अपने तिवारी साहब और भूतनाथ वहीं पर नरको में सजा देने के ठेके आज कल लेते हैं ! और उनकी बॉस भी जर्मनी वाली यूनिटी ही है ! और मेरी उससे काफी गहरी जान पहचान है ! और तिवारीसाहब से तो तेरी पहचान है ही और भूतनाथ भी समझ ले अपना ख़ास आदमी है ! मेरे कहने के बाहर नही वो !  सो मैं ऐसा इंतजाम कर दूंगा की तुमको वहाँ कोई तकलीफ नही हो !

 

Yamaraj vahan इतनी देर में ताऊ की भैंस जोर जोर से रेंकने लग गई ! सबने देखा तो सामने से झौठे ( भैंसे ) पर बैठे यमराज चले आ रहे थे ! आते ही उन यमदूतो पर बरस पड़े ! तुम लोग निक्कमे और काम चोर हो गए हो ! तुमको ज़रा भी शर्म  नही है ! अगर एक आदमी को लाने में इतनी देर लगाओगे तो नर्क का काम काज कैसे चलाऊंगा मैं ? और उन्होंने भैंसे की पीठ से उतर कर ताऊ की तरफ़ देखा ! जैसे किसी मच्छर की तरफ़ देखते हैं !

 

ताऊ और उसकी प्यारी भैंस पृथ्वी  से चलते समय एक प्लान  बना कर निकले  थे ! अब लगता  है उसका  कार्यान्वन का समय आ गया था !

 

ताऊ चुपचाप अपनी भैंस के पास गया और धीरे से उसको बता दिया की अब मेरी जान तेरे हाथ है ! बहुत होशियारी से सब काम करना है ! अगर सफल रहे तो ब्लागीवूड में वापस,  नही तो यहाँ नर्क में ही मरना है !

 

भैंस बोली -- ताऊ आप चिंता ही मत करो ! मैं मेरे प्राण रहते तक आपके प्राण संकट में नही पड़ने दूंगी ! हम दोनों ही इनके चंगुल  से लौट कर वापस चलेंगे ! आख़िर मुझे भी तो ब्लागीवूड की हिरोईन बनना है !


ताऊ अपनी भैंस की पीठ थप थपा कर बोला -  शाबास , मुझे तुझसे यही उम्मीद थी !

 

बस जैसे ही ताऊ ने अपनी भैंस की तरफ़ एक इशारा भर किया और ताऊ की प्यारी भैंस तुंरत समझ गई ताऊ की भाषा ! इब ताऊ की भैंस ने यमराज के झौठे की तरफ़ बड़े प्यार से देखा ! जैसे फ़िल्म नया दौर में वैजयंतीमाला ने दिलीप कुमार की तरफ़ देखा था ! बस यमराज का झौठा महाराज तो ताऊ की झौठडी पै मर मिटा ! आख़िर ताऊ की झौठडी किसी हिरोईन से कम नही  थी !  

 

इब ताऊ और भैंस की योजना के मुताबिक  भैंस धीरे धीरे पीछे खिसकना शुरू हुई ! इधर यमराज अपने यमदूतो यानी अपने एजेंटो को डांटने में लगा था ! और उधर ताऊ की झौठडी अपने इरादों में सफल हो गई !

 

काफी दूर निकलने के बाद झौठडी बिल्कुल इठला इठला कर हिरोईन की तरह चलने गई !  जैसे ही झौठा राम पास आते ,  वो तेज तेज दौड़ लगा देती ! उनका यह लुका छिपी का दौर काफी देर चलता रहा !

 

 

yam-bhainsa आख़िर झौठाराम के काफी अनुनय विनय के बाद वो एक पेड़ के नीचे रुक गए ! और घंटो एक दुसरे की आँखों में खोये रहे ! दोनों में प्यार हो गया !

 

भैंसा : आप का नाम क्या है ? आपका परिचय देने की कृपा करे ! हे महिषनि जी   मैं अब आपके बिना जिंदा  बिना जिंदा नही रह पाउँगा !

 

भैंस : हे महिष राज ! कहाँ मैं और कहाँ आप ? आप साक्षात महिषासुर अवतार हैं और मैं एक सीधी साधी पृथवी लोक में  एक ताऊ के घर रहने वाली गाँव की भैंस हूँ ! आपकी मेरी क्या बराबरी ?


भैंसा : हे महिष्नन्दिनी ! प्रिये ! आप इस तरह के वचन मत बोलिए ! हम आपके लिए आकाश पाताल एक कर देंगे ! हमने आपके जैसी अनिन्ध्य सुन्दरी और रूपवती कोई दूसरी राजमहिषी नही देखी ! आज से आप हमारे दिल की रानी हैं ! हम आपसे अभी और इसी वक्त शादी करना चाहते हैं !

 

भैंस : ये आपकी जर्रानवाजी है मेरे सरताज ! और बड़े प्रेम से उसकी तरफ़ निहारा ! और चलने लगी ! दोनों चलते चलते काफी दूर निकल गए ! और प्यार की पींगे बढाते हुए गाने गाते हुए हरी हरी घास खाने में मगन हो गए ! भैंस उसको ज्यादा से ज्यादा दूर लेकर निकलना चाहती थी !

 

yamraj उधर ताऊ का नर्क में प्रवेश का समय निकलता जा रहा था ! यमराज अपने दूतों से बोले :  अरे नालायको , अभी और तुंरत निकलो यहाँ से ! और मेरा भैंसा कहाँ है ? सब भैंसे को देखने लगे ! भैंसा हो तो मिले ! इब ताऊ मन ही मन मुसकराने लगा !


एक ताऊ को छोड़ कर किसी को नही मालुम था की क्या हुआ ? बहुत देर हो गई ! यमराज परेशान दिखाई देने लगे ! उनको काफी तेज तेज गुस्सा आने लगा ! उन्होंने तुंरत चित्रगुप्त , अपने सेक्रेटरी से संपर्क किया और उसको सारी बात बताई ! उधर से चित्रगुप्त बोला - महाराज आप दो मिनट इंतजार करिए मैं आपको पता लगाके फोन करता हूँ !

 

दो मिनट यमराज जी के लिए दो युगों के बराबर साबित हुए ! यमराज बड़ी व्यग्रता से चक्कर काट रहे थे ! जैसे ही उनके मोबाईल की घंटी बजी उन्होंने तुंरत फोन उठाकर कहा  - हेल्लो , हाँ .. चित्रगुप्त .. मैं बोल रहा हूँ ! क्या ..? क्या कहा तुमने ..?

नही ...नही .. ! ऐसा नही हो सकता ! वो मुझे धोखा नही दे सकता ! अब मैं कैसे लौटूंगा ?

 

इधर ताऊ मन ही मन मुसकरा रहा था ! भाटिया जी को कुछ समझ नही आरहा था ! उधर यमदूत दांत पीस रहे थे ताऊ के ऊपर ! और भैंस को साथ लाने का मतलब भी उनके अब समझ आया ! अगर ये भैंस सहित नरक में प्रवेश पा गया तो वहाँ की सब व्यवस्थाए ही ध्वस्त कर देगा ! और लगा की अब उनकी नौकरी गई और ताऊ की तरफ़ जलती नजरो से देखने लगे !

 

भैंस और ताऊ की योजना यहाँ तक तो सही काम कर गई ! और ताऊ का दिमाग  अब तेजी से आगे की योजनाओं में उलझ गया ! और ताऊ को ये चिंता भी सताने लग गई की कहीं उसकी प्यारी भैंस किसी परेशानी में ना फंस जाए ! पता नही वो यमराज का दुष्ट झौठा उसे कहाँ ले कर गया होगा ? 


पर ताऊ को अपनी भैंस की बुद्धि पर पूरा यकीन था !  आख़िर ताऊ के साथ रहते रहते उसने भी काफी दांव पेच सीख लिए थे ! बस ताऊ के दो ही तो संगी साथी रह गए थे बिल्कुल भरोसे मंद , पहला  लट्ठ और दूसरी ये भैंस !



 

        इब खूंटे पै पढो :-

 

        तीन प्रकार के मित्रों से बचना चाहिए !

 

        १. झूँठी वाहवाही करके जब तक कुछ मिले वह "ताली मित्र"
        २. दारु की प्याली जब तक मिले वह "प्याली मित्र"
        ३. खाने को जब तक मिले वह "थाली मित्र"


यमदूत ताऊ को लेकर चाँद पर पहुंचे

ताऊ को जब यमराज के एजेंट आकर बोले - ओये ताऊ चल उठ खडा हो और हमारे साथ चल ! 

ताऊ एक बार तो कुछ समझा कोनी ! फ़िर अपना साफा बाँध कर लठ्ट उठाया और भैंस को खोल कर उनकै साथ चल दिया ! 

इब उनमै तैं एक घणा काला सा हब्शी जैसा एजेंट था वो बोल्या - अरे ओ ताऊ के ! तेरे को किम्मै दिखै कोनी के ? 

अरे हम यमराज के दूत हैं और तेरे को नरक ले जाने आए हैं ! तू ये लट्ठ और भैंस खोल कर कहाँ जावै सै ?

चल हमारे साथ , सीधी तरह से !  इब ताऊ कै समझ म्ह आया की असली माजरा क्या है ?

ताऊ बोला - देख भाई कालिए ! ताऊ अपने लट्ठ और भैंस क बिना तो घर सै बाहर भी नही निकलता है ! 

और लट्ठ तान कर किम्मै छोह (गुस्सा ) म्ह आके बोल्या -  नही तो निकल ले यहाँ से !

असल में यमराज जी के एजेंटो को भी हमारे यहाँ के बैंक वसूली एजेंटो की तरह ऎसी बात सुनने की आदत ही नही थी ! और जैसे बैंक वसूली एजेंटो को देख कर कर्ज दार छुप जाया करता है वैसे ही यम् एजेंटो को देख कर आदमी थर थर कांपने लगता है ! यम् दूतो को कुछ करना नही पड़ता वो तो उनके भय से ही आदमी मर जाता है ! बिना मेहनत की कमाई खाते हैं आजकल यमदूत भी !   और कुछ यमदूत तो इतने सयाने हैं की उन्होंने बैंक वसूली एजेंटो को ठेका दे रखा है ! इसीलिए बैंक वसूली  एजेंट कर्जदारों को इतना परेशान करते हैं की वो ख़ुद ही आत्महत्या कर लेते हैं ! इधर बैंक से वसूली कमीशन मिल जाता है और उधर यमदूतो से भी तगडा कमीशन झटक लेते हैं ! आम के आम और गुठलियों के दाम ! असल में यमदूतो ने अपना ये काम आउट सोर्स कर रखा है इनको ! 

अब वो ताऊ की जिद्द से परेशान होके बात कर रहे थे की इसको कैसे ले चले ? ये आदमी कुछ उलटा सीधा ही है ! उनमे से एक बोला - ऐसा करो ,  इस ताऊ की सुपारी किसी बैंक के वसूली  एजेंट को दे दो ! इसको वाया आत्महत्या ही आने दो ! अगर ये भैंस और लट्ठ ले के नरक में घुस गया तो हमारी रेप्युटेशन की बारह बज जायेगी ! और हमारी सी.आर. खराब होगी अलग से !

पता लगाओ इस ताऊ ने कौन से बैंक का लोन ले रखा है ! उन लोगो ने सब जगह मोबाईल से पता किया पर कोई भी बैंक का लोन नही बाक़ी था ! अब बाक़ी नही था या लिया ही नही था ! अब ये अलग बात थी की बैंक वालो ने ताऊ के चाल चलन की वजह से ताऊ को लोन  दिया ही नही था ! क्योंकि ताऊ का प्रोफाईल ही लोन देने लायक नही था ! क्यों नही था ?  वो आपको अगली पोस्ट में पता लग जायेगा !   और मुश्किल बढ़ गई ! और उनमे से एक  यमदूत बोला - देखना , इस पागल ताऊ से संभलके रहना ! यह देखने में बावलीबूच जरुर लगता है पर है नही ! ये होशियार आदमी है ! अगर होशियार ना होता तो बैंक का लोन इसपे जरुर  होता !  ये कैसे सम्भव है की इसपर बैंक का लोन भी ना हो ! बिना बैंक के लोन वाला आदमी खतरनाक होता है ! इसकी झौठडी भी बिना लोन की है इसी लिए ये उससे भी प्रेम करता है ! और अपने साथ ही नर्क ले जाना चाहता है !   और वो बिचारे चिंता में पड़ गए ! ऐसे करते २ चाँद तक पहुँच गए !

वहाँ चाँद पर  भाटिया जी के ठेले पर जाकर ताऊ रुक गया ! अपनी भैंस को बाँध दी ! ख़ुद ने भी पानी पीया और उन यमदूतो को भी पिलवाया ! वहाँ मालुम पडा की नीचे से योगीन्द्र भाई का फोन आया था की ताऊ की फोटो उठावने में रखने के लिए चाहिए ! भाटिया जी बोले - ताऊ मैं तो तेरी गमी के लिए घर जा ही रहा था ! बस यहाँ का ठेला का काम काज निपटाने आया था ! अच्छा हुआ तुम यहाँ से होके आगये ! तुमसे मिलना भी हो गया ! चल इब तेरी फोटू खिंचवा देता हूँ ! मैं ही साथ लेता जाउंगा ! कोरियर का खर्चा भी बचेगा !

चाँद पर स्टूडियो आले ने फोटू खिंची तो उसमे जूते कोनी आवै थे ! अगर जूते आते फोटू में तो सर नही आ रहा  था ! और ताऊ जिद्द पर अड़ गया की मेरे सर के साथ साथ  मेरे नए जूते जरुर आने चाहिए फोटू म्ह ! उधर यमदूत परेशान हो रहे थे की इसे ले जाने में देर हो रही है और इधर भाटिया जी परेशान की नीचे धरती पर ताऊ को फूकने ( अर्थी निकालने में ) में देर हो री सै ! हार थक कै भाटिया जी नै ताऊ से कही - अरे ताऊ एक काम कर, तेरे जूते उतार ले और उनको सर पर बाँध ले  और फ़िर फोटू म्ह तेरा सर भी आजावैगा और तेरे जूते भी आजावैंगे ! 

ताऊ बोल्या - वाह वाह भाई साहब क्या बढिया आईडिया दिया आपने ! इसीलिए तो आप हम सब भाईयो म्ह सबसे बुद्धिमान हो ? इनको एक घंटा हो गया बावली बूचो को , मुझ मरे हुए को परेशान करते हुए ! और डांटते हुए उन यमदूतो को बोला - चलो रे बावली बूचो,   जल्दी से, नही तो  देर हो जायेगी ! हम भी थारे नर्क का तमाशा देखेंगे ! ( नरक में ताऊ के साथ क्या हुवा ? यह अगली बार )

                   

इब खूंटे पै पढो :-

(रमकुडी - झमकुडी)

रमकुडी  - यो ताऊ के हौवे सै ?
झमकुडी - ऐ छोरी इब सोज्या ना ! यो ताऊ तो बालकां नै 
             डराण के काम आवै सै ! असल मे यो किम्मै ना होता ! 
             कोरा मन का बहम हौवे सै !



ताऊ के सौ वर्ष पुरे हुए !

कल अचानक ही ताऊ गुजर लिया ! यानी स्वर्गवासी या नर्क वासी हो गया !  जिसने भी सुना वो चला आया शोक परगट करण खातर ! ताऊ का छोटा भाई योगीन्द्र  मौदगिल बाहर नीम के पेड़ के नीचे  फर्श  बिछाकर गमगीन हुआ बैठ्या था ! बड्डा भाई  राज भाटिया जर्मनी तैं आण खातर रवाना हो चुका था ! और सबतें छोटा जगदीश त्रिपाठी चंडीगढ़ तैं चाल पडया था !  गाम के लोग आ आ कर अफ़सोस परगट करण  लाग रे  थे ! जैसे जैसे ताऊ के ब्लॉगर दोस्तों को मालुम पडा वो भी आना शुरू हो गए ! क्या किया जा सकता है ? ताऊ ब्लागरों में इतना लोकप्रिय हो चुका था की आज की चिठ्ठा चर्चा में तरुण भाई ने भी लिखा था की  ताऊ के ब्लोग में कमाल की बात है कि बगैर ताऊ शब्द  का ईस्तेमाल किये कोई टिप्पणी ही नही करता।   ऐसे निहायत  ही नेक, इमानदार और शरीफ ताऊ की गमी में सबका आना तो स्वाभाविक ही था !

 

धीरे धीरे ब्लागर्स आना शुरू हो गए ....और योगीन्द्र  मोदगिल को ढाढस  बंधाते हुए कहने लगे - अरे काल भी बड़ा क्रूर है ! हम तो कल ही ये टिपणी करके गए थे ! ताऊ को श्रद्धांजलि स्वरूप ये  टिपनीया  ही हैं अब तो ! कुछ ब्लागर्स अभी दीपावली की छुट्टियों से लौटे नही हैं सो वो आ नही पाये !  देखिये कौन कौन आया और उसने क्या कहा था !

 


Blogger udan tashtari said...

बहुत खूब!! स्वर्ग का रास्ता तो एकदम याद हो गया होगा. एकबार जेवर पहुँचाने भी गये थे न!!
खूंटा भी सही बांधा है-लालू, अटल जी वाला.

November 7, 2008 5:04 AM


Blogger arvind mishra said...

तूं तो मानेगा नही ताऊ फिर वही ठगी का धंधा ! वैसे भैंस तो बड़ी आलीशान दिख रही हैकितना दूध देवे है ? और लालू का भी तो परिवार नियोजन का कोई अनुभव कहाँ है ?

November 7, 2008 5:30 AM


Blogger smart indian - स्मार्ट इंडियन said...

क्या बात है? बेईमान लाला का घी पहुंचाने के लिए "धरती-स्वर्ग ट्रांसपोर्ट सेवा" भी शुरू कर दी ताऊ ने?

November 7, 2008 5:45 AM


Anonymous अनूप शुक्ल said...

बढ़िया है। ताऊ ने यह जरूर कहा होगा - हिसाब देख ले डायरी में लिखा है।

November 7, 2008 6:20 AM

Blogger सतीश पंचम said...

ये हुई न बात, एकदम खरी-खरी। ताउ तू अपना वही पुराना लूटपाट का धंधा चालू रख, इस जमाने में सही आदमी, इमानदारी करने लगे तो चैन से नहीं रह सकता, उसे लोग रहने ही नहीं देंगे - अब देख मैं ही तुझे गलत चलने की सलाह दे बैठा :)
पोस्ट मजेदार रही, और वो भैंस तो वाकई लाजवाब दिख रही है, ऐसे तन के खडी है माने कह रही हो कि जल्दी से मुझे दुह लो नहीं तो ताउ दुह ले जायगा :)
मजेदार पोस्ट .

November 7, 2008 6:34 AM


Blogger gyan dutt pandey said...

हर चालाक को उसी के चालाकी के नियमों के अन्तर्गत मात दी जा सकती है।
ताऊलॉजिकल स्टडीज़ यह पूरे पक्के से सिखाती हैं। और यह बहुत बड़ा सबक है।

November 7, 2008 6:56 AM


Blogger ratan singh shekhawat said...

ताऊ तो शुरू से ही सवा शेर ही है बस कभी कभी भोलेपन में कुछ गच्चा खा जाता है |

November 7, 2008 7:08 AM


Blogger योगेन्द्र मौदगिल said...

ताऊ
खूंटे नै तो चाला पाड़ दिया
कहाणी बी बढ़िया थी
wah..wa

November 7, 2008 8:18 AM


Blogger जितेन्द़ भगत said...

ताऊ, मजा आ गया पढ़कर। स्‍वर्ग का रास्‍ता मन्‍नै भी बता दयो।

November 7, 2008 8:35 AM

Blogger सतीश सक्सेना said...

"ताऊलॉजिकल स्टडीज़"
वाह ! नए शब्द सृजन के लिए ज्ञान भाई को धन्यवाद !

November 7, 2008 9:00 AM

Delete


Blogger pd said...

कहानी भी अच्छी रही और आखिरी खूंटा भी..
बहुत बढिया ताऊ.. :)

November 7, 2008 9:20 AM

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Blogger dineshrai dwivedi दिनेशराय द्विवेदी said...

जैसे को तैसा सिखा रहे हो ताऊ!

November 7, 2008 9:37 AM

Blogger सुशील कुमार छौक्कर said...

पढ़कर अच्छा लगा। जैसे को तैसा वाली कहावत याद आ गई। अजी ये भैंस तो घनी सोनी हैं। कहाँ से लाए और कितने में खरीदी। और आखिर में लालू और अटल जी पसंद आए।

November 7, 2008 10:17 AM

Blogger समीर यादव said...

ये सबक "ताऊ-अनेकतंत्र" के नाम से संग्रहित की जाये....ताऊ, आप इतने लोकप्रिय होकर लालू को नहीं छेड़िए...नहीं तो भोजपुरी फिल्मों के हीरो बनने में देर नहीं लगेगी....आपको.!!

November 7, 2008 10:55 AM


Blogger मोहिन्दर कुमार said...

ताऊ मन्ने भी आ गई तरकीव..लाला लोंगों से निपटने की... और मुर्राह झौठडी ( भैंस ) तो जोरदार से (नजर न लगे)..किबी लस्सी पीण की खातिर थार धोरे आवांगे...

November 7, 2008 11:12 AM


Blogger कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

ताऊ के आगे तो बंटी और बबली भी फैल है.. लालू का जवाब बढ़िया रहा.. :)

November 7, 2008 11:14 AM


Blogger makrand said...

ताऊ जी , अब ये खूंटा और गाड़ दिया आपने ? मजा आगया आपके खूंटे पर तो ! इसको गाडे रहना ! और आप तो यही लूट-पाट का काम चालू रखो ! हमको भी अच्छा लगता है आपका लूटपाट करना ! और एक धंधा मेरे को आपके लायक समझ आया है ! आप तो लूट-पाट और ठगी सिखाने वाला एज्युकेशन इन्स्टिच्युट शुरू कर दो ! देखना एडमिशन लेने वालो की लाइन लग जायेगी ! और आपसे बढ़ इस सब्जेक्ट को कौन पढा सकता है ? :)
आपके इस संस्थान में डोनेशन देकर एडमिशन मिलेगा ! कंसल्टेंसी फीस मेरी भी दे देना ! :) कैसी लगी मेरी सलाह ?

November 7, 2008 11:15 AM


Blogger seema gupta said...

इब ताऊ छूटते ही बोल्या - अरे लाला वहीं (स्वर्ग) तो पहुंचा कै आया सूं !
" iss line ko pdh kr ek idea aya hai mind mey..... ek transport company kholee ja sktee hai sverg or dhartee ke beech mey, by god khub chlege ..... advance ticket booking rhege hmesha.. sach mey ... ek project report ready kejeye...ha ha ha "
Regards

November 7, 2008 11:45 AM


Blogger डॉ .अनुराग said...

तभी कहूँ ...अटल जी कभी परिवार नियोजन पर कोई बयान क्यों नही आता !

November 7, 2008 1:51 PM


Blogger parul said...

hariyaanvi seekh jaayengey hum bhi...

November 7, 2008 3:33 PM


Blogger कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

राम राम जी आपका ए मेल आई डी चाहिए.. यहा पर दिजियेगा bhaikush@gmail.com

November 7, 2008 3:47 PM


Blogger अभिषेक ओझा said...

अरे भाई ये ताऊ बड़ी चालु चीज है... ऐसा कुछ करने का हमें भी सीखना पड़ेगा :-) ताऊ को एक अकेडमी खोलनी चाहिए !

November 7, 2008 5:07 PM


Blogger लवली कुमारी / lovely kumari said...

ताऊ तो बेईमानी के ब्रांड एम्बेसडर हो लिए ..:-)

November 7, 2008 5:18 PM


Blogger राज भाटिय़ा said...

ताऊ ईब सीधा तो नही हो सकता, चलो जब भी अगली बार स्व्र्ग नरक मे जाओ तो मेरे ठेले पर रुक जाया करो, अभी साथ मे ही सीमा जी की ब्युटई पार्लर की दुकान भी खुल रही है, वहा से थोडा मेकअप करवा लिया करना, बस थोडे दिनो मे वहा एक बाजार खुलने वाला है, नाम कया रखे??
चल सुखी लाला के पेसे अब मत दियो,इस ने मदर इन्दिया मै सब को बहुत तंग किया था.
राम राम जी की


Blogger preeti barthwal said...

ताऊ जी राम राम
क्या पाठ पढ़ाया आपने लाला को मजा आ गया। वैसे आपने अधिकतर सारे ही धन्धे कर के देख लिए, अब जरा किसी पोस्ट पर ये भी जरुर बता दीजिएगा कि मजा किसमें ज्यादा आया,और किसमें मन लगा।

November 7, 2008 7:04 PM


Blogger दीपक "तिवारी साहब" said...

बहुत अच्छा है ताऊ ! जैसे को तैसा ! नमन है आपको ! कहाँ से लाते हो आप रोज नए नए आईडिये ?

November 7, 2008 9:46 PM


Blogger rukka said...

ताऊ पहले तो झंडे गाड़ राखे थे , इब खूंटे भी गाड़ दिए ? बहुत बढिया किया आपने सुखी लाला के साथ ! :) और लालूजी वाला खूंटा तो घणा ऐ सुथरा लाग्या !

November 7, 2008 9:53 PM


Blogger गौतम राजरिशी said...

ताऊ को राम-राम!!क्या जबरद्स्त लिक्खते हो...अपनी फ़ैन लिस्ट हमारा नाम भी दर्ज कर लियो
गुरू जी से जो रिक्वेस्ट करी और गज़ल भायी उसका हृदय से धन्यवाद.
दुसरा ये "ताऊनामा" के प्रवेश-द्वार कुछ चुने लोगों के लिये ही खुले हैं क्या?

November 8, 2008 11:31 AM

 

फ़िर इसी सप्ताह ये भी ताऊ से मिल कर गए थे !

 


Blogger लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

आपको पँडितजी से मिलने का वाकया सुनाऊँ ?
बहुत सुँदर पोस्ट लिखी है आपने
पँडित भीमसेन जोशी जी पर -
वाकई वे विश्वरत्न हैँ -
सँगीत ईश्वर की आराधना है -
ऐसा समर्पण ही
उन्हेँ परमात्मा से
जोडे रखता है -
मेरी भेँट
"राम श्याम गुण गान "
की सी.डी. रीलीज़ के समय
उनसे हुई थी --
पापाजी ने गीत रचे और लतादी व पँडितजी ने उन्हेँ गाया था -
उसी केसेट से
"सुमति सीता राम "
"बाजे रे मुरलिया बाजे "
"राम का गुणगान करीये "
उनके सिँह घोष से स्वरोँ मेँ सुनकर मन प्रसन्न हो जाता है :-)
- लावण्या

November 5, 2008 7:51 PM

 


Blogger mired mirage said...

आपने इतनी सारी जानकारी दी, पढ़कर बहुत अच्छा लगा । धन्यवाद । भीमसेन जी को मेरा भी नमन ।
घुघूती बासूती

November 6, 2008 12:41 AM

 


Blogger दीपक said...

एक अच्छा आलेख है यह उनकी "हरि आओ "और रघुवर तुमको मेरी लाज मै आज भी सुनता हुँ !!

November 6, 2008 8:41 PM

 


Blogger गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said...

ताऊ
जय राम जी की
इतै सब ठीक है, आपकी जा पोस्ट मिलतै गूगल
कक्का की ट्रांसलेटर किंक खोल खैं हम तिपियाबे के लाने
बुन्देली सोची रए हथे कै मिसरा जी को फोन आ गओ बे कहन लगे ........कहन लगे कि "काय,बांच लाई ताऊ की चिट्टी"
हओ कह के हम ने फोन पटक दओ . अब ताऊ को लगो घाटा इनको # पेट पिरा र ओं काय ?
मिसरा हरे [वगैरा] जा बात नें जान पाए कि "कि स्टोरी को मारल क या "[व्हाट इस द मारल ऑफ़ थे स्टोरी ]
बे औरै ताऊ के घाटे में अपनो घाटा तपास रए हैं
भैया इस कहानी से हमें जा सिच्छा मिला रई है कि "ब्लागरन को भरोसा नै करना भैया और उन पै तो रत्ती भर नैं करियो जीतते नाम लाऊ नें गिनाएं हैं ''
"बेहतरीन पोस्ट के लिए बधाइयां ताऊ का आ रए हमाए जबलैपुर न आओ तो भी ठीक आ ओ तो ठीकै है

November 4, 2008 2:06 AM

 


Blogger डा. अमर कुमार said...

बेहतरीन पोस्ट सै, ताऊ !
देख लिया जातिवाद, प्रदेशवाद का नतीज़ा ?
मेरे को बोला कोन्नीं, कम्प्यूटर का लाक हैक कर लेता !

November 4, 2008 10:12 AM

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Blogger pn subramanian said...

भाई मज़ा आ गया.

November 4, 2008 10:50 AM

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Blogger zakir ali 'rajneesh' said...

कमाल हो गया भई, आपकी यह पोस्‍ट तो ताऊ के लटठ और भैंस के गोबर की तरह लाजवाब है जी। पर बेचारे ताऊ को 75 लाख का नुकसान हो गया, यह जानकर दुख हुआ। देखो जी, एक टब आंसू निकल चुके हैं अब तक। घबराओ नहीं ताऊ, हम तुम्‍हारे साथ हैं।

November 4, 2008 4:03 PM

 
Blogger pallavi trivedi said...

are...bada bura hua. ek minute ne aapke ek karod rupaye harwa diye. khair agli baar hame fone lagana..shaayad ham aapko jitwa den.commission ki baaat baad mein kar lenge.

November 4, 2008 11:54 PM

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Blogger poemsnpuja said...

ताऊ ये पैसे तो आप अपनी गलती से हारे हो, अरे फ़ोन रखने की क्या जरूरत थी, कौन से आपके पैसे से आईएसडी लग रहा था, आराम से पूरी बात सुन लेते, घर वालो की ख़बर ले लेते...अब लगा न घाटा.

November 6, 2008 10:18 PM

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Blogger मा पलायनम ! said...

डा. अरविन्द मिश्रा जी नै सलाह दे डाली की " धंधा -जमाये रहो इसी को अब !" तो ताऊ क्यों सलाह को मानने के लिए बाध्य हो गया ! तो फिर जमाये रहो धंधे को ताऊ जी .

भाई दोस्ती में सलाह तो क्या जान भी देदे ताऊ ! आपका मतलब यही धंधा चालू रखा जाए  ? और पुलिस से सटके खाए जाए ?

 


Blogger neelima sukhija arora said...

paisa waisa to hamari samajh mein aata nahi, hamen to ye pataa hai chutti ki dino mein blog jagat ka saara bhoj aapke kandhon par tha.

October 31, 2008 2:48 PM

 


Blogger जगदीश त्रिपाठी said...

भाई अपने को अर्थ की बात आती नहीं। और हम व्यर्थ की चिंता नहीं करते। राजभाटिया भाई ने सही कहा, हम उनके मंत्र पर अमल करने वाले प्राणी हैं। वैसे आपने बहुत अच्छी और गंभीर जानकारी दी, बड़े रोचक ढंग से इसके लिए आभार। पर पिछली दोनों पोस्ट अभी इसके ठीक पहले पढ़ी हैं, इसलिए उनके सुरूर के आगे यह कुछ फीकी सी लगी। बुरा मत मानना।

October 31, 2008 6:28 PM

 


Anonymous tarun said...

वाह ताऊ तेरा घर तो कमाल का सै, मैं सोच रिया हूँ कि अगली पोस्ट तेने दे दूँ छापणे से पहले, जिससे २-३ दिन में वो टिप्पणी के रूप में कुछ बच्चे जने तो फिर पोस्ट और टिप्पणी एक साथ छापूँ। तेरे बहाणे कम से कम अपनी पोस्ट भी लगने लगेगी किसी ने पढ़ी सै वरना तो सभी ब्लोगर किणारे से निकल जावे सै।

October 22, 2008 6:59 AM

 


Blogger shiv kumar mishra said...

मंदी की शुरुआत तो है ही. मंदी और तेजी अर्थव्यवस्था में होती रहेगी. हम लगातार एक जैसे दिनों से नहीं गुजर सकते. असल में सवाल मंदी का नहीं है. सवाल ये है कि मंदी से निबटने के लिए हमारे पास क्या इंतजाम हैं? १९३० से जो मंदी अमेरिका में शुरू हुई थी, वो तीन साल के बाद नियंत्रण में आ गई थी. कारण था अमेरिकी सरकार की सोच, उनका प्लान और प्लान के हिसाब से काम. उनदिनों की बातें पढ़ते, तसवीरें देखते हैं तो सिहरन सी हो जाती है. लेकिन मंदी का मुकाबला किया वहां की सरकार ने. मंदी का कारण वही था, जो आज है. मतलब जनता को ऐसी चीजें खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना जिसकी जरूरत उसे नहीं थी. आज भी वही बात है. लेकिन उस मंदी के दौर में वहां की सरकार जिस तरह से इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाया वो बहुत बड़ी दूरदर्शिता का परिणाम था. पैसे की कमी के कारण लोगों को फ़ूड फॉर वर्क जैसे प्रोग्राम में लगाया गया. और भी बहुत से काम किए गए जिससे मंदी को नियंत्रित किया जा सके.
लेकिन हमारे देश में क्या ऐसा हो सकता है? पता नहीं, जिस तरह के दिन आ रहे हैं, सरकार कुछ कर सकेगी, उसका चांस बहुत कम है. अगले साल हमारे यहाँ चुनाव हैं. ऐसे में सरकार और राजनैतिक दल अर्थव्यवस्था के लिए समय देंगे, ऐसा नहीं लगता. और फिर इसी साल सरकार ने क्या किया? कुछ नहीं. केवल न्यूक्लीयर डील पास करवाया. आर्थिक मामलों पर जब काम करने की बात आई तो केवल व्याज दरें बढ़ाकर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई. नतीजा सामने है. उद्योग और लोगों के लिए पैसे का अकाल. अब केवल स्टॉक मार्केट की हालत देखकर सीआरआर कम किया जा रहा है. शायद सरकार को लगता है कि स्टॉक मार्केट का अच्छा होना ही अर्थव्यवस्था के लिए ज़रूरी है.
ऐसी सरकार क्या देगी हमें?
दो रुपया किलो चावल और मुफ्त की बिजली? वो बिजली जो है ही नहीं.

October 18, 2008 3:26 PM

 

 

 

अब जो वरिष्ठ थे वो मोदगिल जी को घेर कर बैठे थे ! और उनको ढाढस बंधा रहे थे की भाई अब तो तुमको ही ताऊ की भी जिम्मेदारी संभालनी है ! ताऊ तुम्हारे लिए और तो कुछ छोड़ कर  नही गया , बस एक ब्लॉग ही छोड़ कर गया है ! और पता कर लेना कहीं ये ब्लॉग भी सुखी  लाला को गिरवी नही रख गया हो ! अगर सुखी लाला के पास गिरवी हो तो हम चन्दा करके छुड़वा देते हैं और ताऊ की याद में  इसका स्मारक बना देते हैं !  इत्यादि इत्यादि ... !


ज्ञान जी ने पूछा - कल तक तो ताऊ ठीक था !  अचानक ही  क्या हो गया ? कोई दुःख या सदमा ?

 
योगीन्द्र मोदगिल : ना  जी ! पिछले समय से ताऊ परेशान तो था !  छोरे  विदेश चले गए ! फ़िर भी ताऊ राजी था !

 

अब समीर जी ने पूछा -  फ़िर हुआ क्या  था ? आख़िर अचानक ....

 
योगीन्द्र मोदगिल : अजी समीर जी इब के बताऊ थमनै ? फेर छोरे की बहु टूम जेवर ले के घर से भाग गई ! फ़िर भी ताऊ राजी था !  ताऊ वो गम भी झेल गया !


फ़िर अनुराग शर्मा जी ( पितस्बर्गिया )  ने पूछा - यार कल ही तो मेरी एक घंटा फोन पर बात हुई थी ! आख़िर ये हो कैसे सकता है ? मुझे तो फ़िर भी विश्वास नही हो रहा है !

 
योगीन्द्र मोदगिल : अजी शर्माजी इब के बताऊँ ? ताऊ के  छोरे  नै नीची जात आली छोरी तैं ब्याह कर लिया था तब भी ताऊ को कोई दुःख नही था ! ताऊ राजी था !

 
अब अनूप शुक्ल जी (फ़ुरसतिया जी )  पूछने लगे  : तो ऐसी कौन सी मौज में कमी आ गई थी ?  और क्या दुःख पहुँच गया था ? ताऊ खुश दिख रहा था ! सबेरे ही क्षमा याचना सहित  मेरी कविता की टांग तोड़ मरोड़ कर  आया था !  समझ नही आता की अचानक क्या हुआ ?

 
योगीन्द्र मोदगिल : अजी फुरसतिया जी , जब ताऊ के ऊपर सुखी लाला का कर्जा चढ़ गया था,  तब भी ताऊ तो राजी ही था ! ताऊ को उसका भी गम नही था !

 
अब डा. अनुराग जी ने पूछा : भाई मोदगिल जी , जब इनमे से  कोई कारण नही है तो वो कौन सा सदमा लगा जो ताऊ चल बसे !

 
योगीन्द्र मोदगिल : अजी डागदर साहब इब के बताऊँ ? जब ताई मरी तब भी ताऊ राजी था ! उस बखत भी कोई गम या दुःख ताऊ को नही  था !

 

अब कुश ने कहा - कल रात ताऊ से  मेरी एक घंटा  फोन पर बात हुई थी ! इतनी देर में क्या हो गया ? मुझे भी ताऊ ने कुछ नही बताया की कोई दुःख है ? बल्की बड़े प्रशन्न लग रहे थे !

 

मोदगिल : हाँ कुश भाई ! क्या करे ? हमारी किस्मत ही ख़राब थी जो घर का बड़ा बुजुर्ग चला गया !

 

अब डा. अरविन्द मिश्रा जी ने पूछा : अरे भाई तो फ़िर ताऊ ऊपर क्यूँ कर चला गया ?  ज़रा साफ़ साफ़ बताईये ? आख़िर कैसे मान ले ? सुबह ही तो तसलीम पर पहेली का जवाब दे कर आया था ताऊ !


योगीन्द्र मोदगिल : अजी मिश्रा साब ! मन्नै तो कल न्यू ही बताई थी  की दो दिन तैं ताऊ की भैंस ने दूध नही दिया ! सबके  सामने यहाँ चोपाल ( ब्लॉग पर ) में लाकर बाँध दी थी ! और  किसी की नजर लग गई थी ! और मोहिंदर कुमार ने तो कहा भी था की झौठडी को नजर ना लगे !   बस इसी गम में ताऊ मर गया !

 

इब खूंटे पै पढो :-

 

भाईयो और बहण बेटियों , असल में जबान फिसल गयी थी ! ताऊ के सौ साल पूरे नही हुए बल्कि सौ पोस्ट आज पूरी   हुई हैं  ! आप चिंता मत करना ! आपने ताऊ को इतना प्यार दिया है की ताऊ मर कर भी जिंदा हो जायेगा ! आपका प्यार आशीर्वाद बना रहे ! यही प्रार्थना है ! मैं  सभी टिपणी दाताओं की टिपनीया शामिल करना चाहता था पर जल्दी में कुछ छुट गए हो तो क्षमा करिएगा ! आपके किसी के भी सहयोग और आशीर्वाद के बिना  यह सम्भव नही हो पाता ! मैं आप सबका अत्यन्त आभारी हूँ !