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ताऊ पहेली 110 (महेश्वर, म.प्र.) विजेता : समीर लाल "समीर"

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली अंक - 110 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही जवाब है महेश्वर घाट (म.प्र.)

पहेली के विषय से संबंधित थोडी सी जानकारी मिस. रामप्यारी आपको दे रही है.


हाय एवरी वन...गुड मार्निंग...मी राम की प्यारी...रामप्यारी.

अब सबसे पहले तो मैं पहेली के विषय में आपको दो शब्द बताऊंगी...दो से ज्यादा भी हो सकते हैं मैं गणित में जरा कमजोर हूं...गिनती आप ही लगा लिजियेगा. और उसके बाद मैं आपको विजेताओं के नाम बताऊंगी.




महेश्वर

नर्मदा नदी के किनारे बसा, मध्य प्रदेश राज्य के खरगोन जिले का, तकरीबन २५/३० हजार की आबादी वाला एक छोटा सा शहर है महेश्वर. कभी यही महेश्वर रावण को पराजित करने वाले हैहयवंशी राजा सहस्रार्जुन की राजधानी रहा है. बाद में सहस्रार्जुन का वध भगवान परशुराम ने अपने पिता ऋषि जमदग्नि को प्रताडना देने के कारण किया था.

महेश्वर को महिष्मती नाम से भी जाना जाता था. महेश्वर का उल्लेख रामायण और महाभारत में भी आया है. कहते हैं आदिगुरु शंकराचार्य तथा पंडित मण्डन मिश्र का प्रसिद्ध शास्त्रार्थ इसी शहर में हुआ था. इतनी विशेषताओं के बाद भी यह नगर अपने देवी अहिल्याबाई से संबद्ध होने के कारण ज्यादा गौरवान्वित और प्रसिद्ध है.


महेश्वर किले का अंदरूणी दृष्य


कहा जाता है कि अकबर ने सन् 1601 में यहाँ किले का निर्माण करवाया था. रानी अहिल्या बाई ने, अपने पति खांडेराव होल्कर के 1754 में कुम्हेर की लडाई में वीरगति प्राप्त करने और उसके 12 साल पश्चात ससुर मल्हारराव होल्कर के मरणोपरांत होल्कर राज्य की बागडोर संभाली. तथापि उस काल में चारों तरफ़ अशांति का साम्राज्य था फ़िर भी रानी अहिल्या बाई ने होल्कर राज्य का संचालन बहुत ही शांतिपूर्ण और कुशलता पूर्वक किया. रानी अहिल्या बाई ने अनेकों तीर्थों के मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया और वहां यात्रियों के ठहरने के लिये धर्मशालाओं का निर्माण करवाया.

यूं तो होल्कर राज्य की राजधानी इंदौर था परंतु रानी अहिल्या बाई होल्कर ने अपने शासन काल में महेश्वर से ही राज काज संचालित किया और वहां पर अनेक भव्य मन्दिरों और घाटों का निर्माण करवाया. यहां के घाट बहुत ही सुंदर व भव्य हैं. यहां नर्मदा किनारे घाट पर अत्यंत कलात्मक मंदिर बने हैं


महेश्वर घाट पर एक सुंदर शाम


महेश्वर का किला, देवी अहिल्या बाई की किले में लगी जीवंत मुर्ति एवं राजगद्दी, राजराजेश्वर मन्दिर, नर्मदा नदी के सुरम्य घाट तथा सहस्त्रधारा इत्यादि पर्यटकों को विशेष रूप से अपनी और आकर्षित करते हैं. यहां पर हाथ से बनें लूमों पर सुनहरी किनारी वाली साडियां बनाई जाती हैं जो कि माहेश्वरी साड़ियों के नाम से अत्यंत प्रसिद्ध है. इनकी कुशल बुनावट और डिजाईन ऐसी है कि आप बिना खरीदे वापस लौट ही नही सकते.

मण्डलेश्वर यहां से 10 किलोमीटर है जहां एक प्रमुख जल विद्युत परियोजना नर्मदा नदी पर बनाई जा रही है. यहां पर पर्यटको के लिये नर्मदा नदी के किनारे सर्वसुविधायुक्त ठहरने की व्यवस्था है. यहां एयर कंडीशंड तंबू एवम हट्स उपलब्ध है. सप्ताहांत में यहां काफ़ी भीड हो जाती है अत: सुविधा के लिये सप्ताहांत में बुकिंग करवा कर जाना ही ठीक रहेगा.


महेश्वरी साडी लूम पर


यहां मण्डलेश्वर के निकट ही वांचू पॉइन्ट नामक स्थान है जहां से इन्दौर शहर को नर्मदा नदी के जल की आपूर्ति की जाती है. नर्मदा का जल विद्युत पंपों द्वारा वांचू पॉइन्ट तक ऊपर खींचा जाता है जहां से यह अपने आप गुरुत्व के कारण करीब 70 किलोमीटर की दूरी तय करता हुआ इन्दौर तक पहुंचता है.

महेश्वर इन्दौर से 85 कि.मी., धार से 75 कि.मी. एवं खण्डवा से 90 कि.मी. की दूरी पर है जो कि सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है. महेश्वर के लिये नजदीकी एयरपोर्ट एवम रेल्वे स्टेशन इंदौर है. दक्षिण पश्चिम भारत से आने वालों के लिये नजदीकी रेल्वे स्टेशन खंडवा रहेगा.

आईये अब मिलते हैं आज के विजेताओं से :-

आज के प्रथम विजेता हैं श्री समीर लाल "समीर"


श्री समीर लाल "समीर" अंक 101

आईये अब बाकी विजेताओं से आपको मिलवाती हूं.

श्री विजयकुमार सप्पात्ति
श्री सुशील बाकलीवाल
सुश्री सीमा गुप्ता
श्री बंटी द मास्टर स्ट्रोक
श्री विजय कर्ण
श्री उस्मान
श्री ओशो रजनीश
श्री सवाईसिंह राजपुरोहित
डा. अजमल खान
श्री दिलीप कवठेकर

अब उनसे रूबरू करवाती हुं जिन्होनें इस अंक में भाग लेकर हमारा उत्साह वर्धन किया

श्री रतन सिंह शेखावत
डाँ. नूतन डिमरी गैरोला-नीति
श्री अभिषेक ओझा
श्री ललित शर्मा
श्री दिनेशराय द्विवेदी
श्री विवेक रस्तोगी
श्री भारतीय नागरिक
श्री नीरज गोस्वामी
श्री काजल कुमार
श्री नीरज जाट जी
श्री दर्शन लाल बवेजा
डाँ. अरूणा कपूर
श्री गजेंद्र सिंह
श्री राज भाटिया
श्री गगन शर्मा कुछ अलग सा
डाँ. मनोज मिश्र
सुश्री वाणीगीत
सभी प्रतिभागियों का बहुत आभार प्रकट करते हुये रामप्यारी अब आपसे विदा चाहेगी. अगली पहेली के जवाब की पोस्ट में मंगलवार सुबह 4:44 AM पर आपसे फ़िर मुलाकात के वादे के साथ, तब तक के लिये जयराम जी की.


ताऊ पहेली के इस अंक का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और रामप्यारी ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार 1:00 AM से 11:00 PM के मध्य कभी भी आपसे फ़िर मुलाकात होगी तब तक के लिये नमस्कार.


मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग
ताऊजी डाट काम
रामप्यारे ट्वीट्स