ताऊ महाराज धॄतराष्ट राजभवन में चिंता मग्न बैठे हैं, ब्लाग पुत्र दुर्योधन और ब्लागपुत्री दु:शला की नाफ़रमानियां बढती ही जा रही थी. इधर उनके चहेते मंत्री आपस में एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा कर तोतलों को एक और मौका दे रहे थे. ताऊ महाराज धॄतराष्ट की सरकार हिलने लगी थी. उधर ताई महारानी से भी कुछ विशेष सहयोग नही मिल रहा था...महारानी की तबियत बुढौती मे नासाज चल रही थी.
ताऊ महाराज धॄतराष्ट जब भी परेशान होते थे तब भीष्म पितामह को याद कर लेते थे. आज भी पितामह और ताऊ महाराज धॄतराष्ट आपस में विचारमग्न थे. युवराज दुर्योधन को भीष्म पितामह समझा रहे थे कि वत्स दुर्योधन, दूसरों को अपमानित करना, बेनामी टिप्पणी करना यह अच्छी बात नही है. इससे ब्लागिंग का पतन होता है और अगर तुमने यही रवैया जारी रखा तो तुम्हारा ब्लाग पतन निश्चित है.
इस बात पर दुर्योधन उतेजित होकर बोला - पितामह, आप क्या चाहते हैं कि वो आकर मुझे गरियाते रहें? और मैं उनके तलुवे चाटता रहूं? नही पितामह नही, मैं ईंट का जवाब पत्थर से भी दूंगा और जरुरत लगी तो मानसिक ब्लेकमेल करके जनता का समर्थन भी हासिल करूंगा. मुझे लोगों का समर्थन और हमदर्दी हासिल करने की कला आ गई है, यह द्वापर नही है कि सारी हमदर्दी का टोकरा पांडव ही बटोर ले गये थे. अब मेरे साथ प्राक्सी सरवर भी है.
भीष्म पितामह बोले - वत्स, इस नीति पर हम भी कभी चले थे पर हमारा क्या हश्र हुआ? आज हम ब्लाग पोस्ट लिखने के काबिल ही नही रहे. अगर भूल से कभी कोई पोस्ट लिख भी दी तो कोई टिप्पणी को रोने वाला भी नही फ़टकता. हम दो चार जनों को मेल या फ़ोनिया कर बताते हैं तब जाकर कहीं दस पंद्रह टिप्पणी का इंतजाम होता है. हमने मठ में जितने चेले चमचे इकठ्ठे किये थे वो भी सब किनारा कर गये. हम आज अकेले सर शैया पर लेटे हैं. अत: वत्स तुम ऐसा मत करो.
पितामह की यह बात सुनकर ताऊ महाराज धॄतराष्ट ने पूछा - पर पितामह, आपको शर शैया पर लेटने की क्या आवश्यकता है? आप आराम से राजमहल में रहकर ब्लागिंग किजिये, यहां राजमहल में लेपटोप, हाईस्पीड नेट कनेक्शन, डेटाकार्ड और प्राक्सी सर्वर इत्यादि सभी कुछ तो उपलब्ध है. आप जिसकी चाहे उसकी खटिया खडी कर सकते हैं, हमारा दुर्योधन इन कामों में पारंगत हो चुका है....आप चाहे जिसे आपस में भिडवाकर बुढापे में घर बैठे मजे लूट सकते हैं.
पितामह बोले - नही वत्स धॄतराष्ट्र, अब और नही, हमने ब्लागिंग में लोगों को आपस में खूब लडाया भिडाया, खूब मजे लिये, पर अब और पाप की गठरी सर पर नही ले सकते. तुम जानते हो कि हम को शर शैया पर क्यों लेटना पडा है?
ताऊ महाराज धॄतराष्ट - नही तात श्री, आप बताये.
पितामह बोले - वत्स धॄतराष्ट्र, हमने बचपन में एक भंवरा पकड लिया था और खेल खेल में उसके शरीर को शूलों से बींध दिया और उस दुष्ट भंवरे ने हमको श्राप दे दिया कि जावो, जिस तरह तुमने मेरा शरीर शूलों से बींध दिया है उसी प्रकार एक दिन तुम्हारा शरीर भी शूलों से बींधा जायेगा, तब तुम्हें पता चलेगा की शूलों से बींधे जाने की वेदना क्या होती है? आह वत्स धॄतराष्ट्र... सच में..बडी वेदना हो रही है...इसीलिये हमने ब्लागिंग में भी श्राप और शूलों से बींधे जाने के डर से मजे लेने कम कर दिये हैं...यानि बुरा करने से बुराई ही हाथ लगती है वत्स....पर क्या करें... ये ससुरी ब्लागिंग की आदत पूरी तरह छूटती भी तो नही है.
(क्रमश:)
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दुनियां की सबसे श्रेष्ठ और खराब वस्तु क्या है?
मैं स्वयं काल यानि समय हुं. अक्सर लोग कहते हैं कि जब कुछ काम नही होता तब हम समय काटने के लिये ब्लागिंग करते हैं. पर उन मूर्खानंदों को यह समझ नही आता कि मुझ साक्षात काल यानि समय को कौन काट सकता है? ये तो मैं ही उन काटने वालों को काट डालता हुं. इस सॄष्टि के आदि से अभी ब्लागयुग तक की स्मॄतियां मुझमें समायी हुई है.
आज यूं ही एक घटना याद आरही है जो आपको सुनाना जरूरी समझता हूं. सभी ब्लागर बच्चों से गुजारिश है कि इसे अति श्रर्द्धा पूर्वक मन लगाकर सुने जिससे वो निश्चित ही कल्याण को प्राप्त हो सकेंगे.
द्वापर से ही अक्सर तोतलों (जनता) को ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र की काबिलयत पर हमेशा शक रहा है. ज्यादातर लोग मानते हैं कि ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र अंधे, अक्षम और बेअक्ल हैं और शासन करने की क्षमता उनमें नही है, उन्होने जोडतोड करके हस्तिनापुर की कुर्सी हथिया ली थी जो आज तक छोडने के लिये तैयार नही है. और तो और महाभारत युद्ध से लेकर ब्लागयुद्ध एवम भ्रष्टाचार तक के लिये तोतले उन्हें जिम्मेदार ठहराने की कोशीश करते है. जबकि यह सभी बाते गलत हैं.

गोल्ड मेडलिस्ट ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र
सच यह है कि ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र नितांत सज्जन, शरीफ़, ब्लाग प्रजापालक और कुशाग्र बुद्धि हैं. मैं आपको उस समय की एक घटना बताता हुं जब ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र अन्य राजकुमारों के साथ गुरूकुल में विध्याययन किया करते थे. आपको इस घटना से ही ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र की बुद्धि की गहराई का पता चल जायेगा.
गुरूकुल में वार्षिक परीक्षाएं चल रही थी. गुरू सभी छात्रों से वायवा के प्रश्नों सहित उनसे प्रेक्टीकल भी करवा रहे थे.
ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र की बारी आई तब गुरू ने उनसे पूछा : वत्स धॄतराष्ट्र, तुम जावो और अति शीघ्र दुनियां की सर्वश्रेष्ठ वस्तु लेकर आवो.
ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र तुरंत छात्रावास में अपने कमरे में गये और वहां से अपने डेस्कटोप का की बोर्ड उठाकर ले आये और उसे गुरू को देते हुये बोले - गुरूदेव यह लिजिये इस दुनियां की सर्वश्रेष्ठ चीज.....
ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र के इतना कहते ही गुरू कुपित होगये और ताऊ महाराज को उल्टी सीधी आगे पीछे दो चार बेंत लगादी. ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र ने बेंत लगा अपना अगवाडा पिछवाडा सहलाया और चुपचाप सर झुका कर खडे रहे क्योंकि उस युग में आज की तरह छात्रों को शिक्षक की बेंते खाने पर विरोध का हक नही था.
इसके बाद गुरू ने ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र को कहा - ठीक है धॄतराष्ट्र, तुम इस सवाल का जवाब लाने में तो असफ़ल रहे पर तुम्हारा यह साल खराब ना हो इसलिये मैं तुमको एक मौका और देना चाहता हुं. अब तुम दुनियां की कोई ऐसी वस्तु लावो जो सबसे बेकार और गंदी हो.
यह प्रश्न सुनकर ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र ने वहां से वापस छात्रावास की तरफ़ दौड लगा दी. ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र ताले तोडने और चोरी चकोरी करने में तो जन्मजात ही माहिर थे सो सीधे डाँ. दराल के कमरे की तरफ़ गये और उसका ताला तोडकर उनका की बोर्ड उठाया और लाकर गुरू के सामने रख दिया.
दूसरे सवाल के जवाब मे भी की बोर्ड देखकर गुरू भडक गये और बेंत उठाने लगे तभी वहां वायवा के लिये बैठे पितामह बोले - आचार्य, आप वत्स धॄतराष्ट्र को बेंत मारने के पहले उससे इस बात का कारण नही जानना चाहेंगे कि वो दोनों प्रश्नों के जवाब में की बोर्ड क्यों लेकर आया है? आचार्य गुरू को पितामह की यह सलाह पसंद आई और उन्होने ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र से इसका कारण पूछा.
ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र बोले - गुरूदेव और पितामह आप दोनों को प्रणाम, असल में कंप्यूटर का यह की बोर्ड ही है जिससे ज्ञान, प्रकाश फ़ैलाने वाली, भाईचारा और सोहाद्र बढाने वाली पोस्ट और टिप्पणियां की जा सकती हैं इसलिये यह दुनियां की सर्वश्रेष्ठ वस्तु है. और इसी की बोर्ड से गंदी, बदबूदार, गाली गलौच, किसी का दिल दुखाने वाली, कुंठित और लुंठित, परेशान करने वाली और दुश्मनी नफ़रत फ़ैलाने वाली पोस्ट और टिप्पणियां लिखी जा सकती हैं, इस वजह से यह दुनियां की सबसे गंदी और बेकार वस्तु भी है.
ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र का यह जवाब सुनकर आकाश से देवताओं ने भी फ़ूल बरसाये और गुरू ने उन्हें उस बैच का सबसे होनहार और मेधावी छात्र घोषित करके गोल्ड मेडल देते हुये आशीर्वाद दिया कि - वत्स धॄतराष्ट्र मैं तुमको वरदान देता हूं कि तुम अंधे होकर भी देखते रहोगे और बहरे होकर भी सुनते रहोगे.
इसके बाद ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र ने पितामह के चरण छुये तो भीष्म पितामह ने भी आशीर्वाद दिया कि - वत्स धॄतराष्ट्र, तुमने मेरे कुल का नाम रोशन कर कर दिया, जावो मैं तुम्हे आशीर्वाद देता हूं कि तुम द्वापर से लेकर ब्लागयुग तक अखंड राज्य करोगे.
(क्रमश:)
द्वापर से ही अक्सर तोतलों (जनता) को ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र की काबिलयत पर हमेशा शक रहा है. ज्यादातर लोग मानते हैं कि ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र अंधे, अक्षम और बेअक्ल हैं और शासन करने की क्षमता उनमें नही है, उन्होने जोडतोड करके हस्तिनापुर की कुर्सी हथिया ली थी जो आज तक छोडने के लिये तैयार नही है. और तो और महाभारत युद्ध से लेकर ब्लागयुद्ध एवम भ्रष्टाचार तक के लिये तोतले उन्हें जिम्मेदार ठहराने की कोशीश करते है. जबकि यह सभी बाते गलत हैं.
सच यह है कि ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र नितांत सज्जन, शरीफ़, ब्लाग प्रजापालक और कुशाग्र बुद्धि हैं. मैं आपको उस समय की एक घटना बताता हुं जब ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र अन्य राजकुमारों के साथ गुरूकुल में विध्याययन किया करते थे. आपको इस घटना से ही ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र की बुद्धि की गहराई का पता चल जायेगा.
गुरूकुल में वार्षिक परीक्षाएं चल रही थी. गुरू सभी छात्रों से वायवा के प्रश्नों सहित उनसे प्रेक्टीकल भी करवा रहे थे.
ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र की बारी आई तब गुरू ने उनसे पूछा : वत्स धॄतराष्ट्र, तुम जावो और अति शीघ्र दुनियां की सर्वश्रेष्ठ वस्तु लेकर आवो.
ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र तुरंत छात्रावास में अपने कमरे में गये और वहां से अपने डेस्कटोप का की बोर्ड उठाकर ले आये और उसे गुरू को देते हुये बोले - गुरूदेव यह लिजिये इस दुनियां की सर्वश्रेष्ठ चीज.....
ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र के इतना कहते ही गुरू कुपित होगये और ताऊ महाराज को उल्टी सीधी आगे पीछे दो चार बेंत लगादी. ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र ने बेंत लगा अपना अगवाडा पिछवाडा सहलाया और चुपचाप सर झुका कर खडे रहे क्योंकि उस युग में आज की तरह छात्रों को शिक्षक की बेंते खाने पर विरोध का हक नही था.
इसके बाद गुरू ने ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र को कहा - ठीक है धॄतराष्ट्र, तुम इस सवाल का जवाब लाने में तो असफ़ल रहे पर तुम्हारा यह साल खराब ना हो इसलिये मैं तुमको एक मौका और देना चाहता हुं. अब तुम दुनियां की कोई ऐसी वस्तु लावो जो सबसे बेकार और गंदी हो.
यह प्रश्न सुनकर ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र ने वहां से वापस छात्रावास की तरफ़ दौड लगा दी. ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र ताले तोडने और चोरी चकोरी करने में तो जन्मजात ही माहिर थे सो सीधे डाँ. दराल के कमरे की तरफ़ गये और उसका ताला तोडकर उनका की बोर्ड उठाया और लाकर गुरू के सामने रख दिया.
दूसरे सवाल के जवाब मे भी की बोर्ड देखकर गुरू भडक गये और बेंत उठाने लगे तभी वहां वायवा के लिये बैठे पितामह बोले - आचार्य, आप वत्स धॄतराष्ट्र को बेंत मारने के पहले उससे इस बात का कारण नही जानना चाहेंगे कि वो दोनों प्रश्नों के जवाब में की बोर्ड क्यों लेकर आया है? आचार्य गुरू को पितामह की यह सलाह पसंद आई और उन्होने ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र से इसका कारण पूछा.
ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र बोले - गुरूदेव और पितामह आप दोनों को प्रणाम, असल में कंप्यूटर का यह की बोर्ड ही है जिससे ज्ञान, प्रकाश फ़ैलाने वाली, भाईचारा और सोहाद्र बढाने वाली पोस्ट और टिप्पणियां की जा सकती हैं इसलिये यह दुनियां की सर्वश्रेष्ठ वस्तु है. और इसी की बोर्ड से गंदी, बदबूदार, गाली गलौच, किसी का दिल दुखाने वाली, कुंठित और लुंठित, परेशान करने वाली और दुश्मनी नफ़रत फ़ैलाने वाली पोस्ट और टिप्पणियां लिखी जा सकती हैं, इस वजह से यह दुनियां की सबसे गंदी और बेकार वस्तु भी है.
ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र का यह जवाब सुनकर आकाश से देवताओं ने भी फ़ूल बरसाये और गुरू ने उन्हें उस बैच का सबसे होनहार और मेधावी छात्र घोषित करके गोल्ड मेडल देते हुये आशीर्वाद दिया कि - वत्स धॄतराष्ट्र मैं तुमको वरदान देता हूं कि तुम अंधे होकर भी देखते रहोगे और बहरे होकर भी सुनते रहोगे.
इसके बाद ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र ने पितामह के चरण छुये तो भीष्म पितामह ने भी आशीर्वाद दिया कि - वत्स धॄतराष्ट्र, तुमने मेरे कुल का नाम रोशन कर कर दिया, जावो मैं तुम्हे आशीर्वाद देता हूं कि तुम द्वापर से लेकर ब्लागयुग तक अखंड राज्य करोगे.
(क्रमश:)
हिंदी ब्लागिंग के जिन्न से तो ब्रह्मा जी भी कांपते हैं.
आज शाम को क्लब की मिटींग मे माधुरी बडी विचलित सी थी. उन्हें विचलित और उदास देखकर उसकी खास दोस्त मुन्नी और समीरा ने उनसे उदासी का कारण पूछा. बडे दुखी मन से माधुरी ने कहा - अब क्या बताऊं समीरा ? मेरे घर में तो भूचाल आया हुआ है. आजकल मेरे वो बडे बदले हुये से हैं, पता नही क्या हुआ है? मुझे तो लगता है कि उन पर कोई भूत प्रेत का साया लग गया है? अब क्या करूं? तुम ही कुछ बताओ ना...
मिस समीरा कुछ बोलती उसके पहले ही मुन्नी बोल पडी - अरे माधुरी आप को अगर लगता है कि भूत प्रेत का मामला है तो पं.ताऊ नाथ जी ’त्रिकालज्ञ’ को संपर्क करो ना, सब कुछ ठीक हो जायेगा. ये समीरा भी तो पं. ताऊ नाथ रमलशाश्त्री जी की सलाह ले लेकर इंटरनेशनल माडल बनकर चांदी काट रही है.
मुन्नी की ऐसी बात सुनते ही मिस समीरा टेढी तमतमा कर बोली - मुझे ही क्यों... तुमको मुन्नी से मुन्नी बदनाम किसने बनवाया? तुम भी तो सिर्फ़ मुन्नी ही थी तुम भी पंडीत जी की सलाह से ही बदनाम हुई हो ना. अब तक की सबसे ज्यादा मेहनताना पाने वाली वाली मुन्नी बदनाम बन गई हो. अब पंडित जी की महिमा ही अपरंपार है. माधुरी जी आप तो आपके पति देव की जन्मकुंडली लेके पं. ताऊनाथ रमलशाश्त्री "त्रिकालज्ञ" के पास पहुंच जाईये...पंडितजी सब ठीक कर देंगे.
मिस समीरा टेढी और मुन्नी बदनाम की सलाह से माधुरी सीधे घर आकर अपने पतिदेव की जन्मकुंडली लेकर पं. ताऊनाथ के आफ़िस पहुंच गई, वहां जाकर फ़ीस जमा करवाई और अपना नंबर आने का व्यग्रता पूर्वक इंतजार करने लगी. जैसे ही उनका नंबर आया पंडितजी ने उन्हें अंदर बुलवा लिया.
घुसते ही सामने बैठे हुये पंडितजी को माधुरी ने नमस्कार किया और बदले में पंडित जी उनको लंबा सा आशीर्वाद फ़ेंका - सौभाग्वती हो...सदा खुश रहो...
बीच में ही माधुरी बोली - पंडित जी महाराज कहां से सुखी रहूं? सब कुछ उलट पुल्ट होरहा है. मेरे पति को शायद भूत प्रेत या चुडैल ने पकड लिया है. महाराज मेरी सहायता किजिये...मेरी गृहस्थी बचा लिजिये.
पं. ताऊनाथ बोले - शांत बालिके...शांत.... हमको मालूम है तुम यहां क्यों आई हो?
माधुरी बोली - पंडितजी बिना बताये हुये ही आप सब जान गये? इसका मतलब समीरा और मुन्नी सच ही कहती थी. धन्य हो महाराज...अब तो मुझे पकका भरोसा होगया कि आप मेरे पति का भूत अवश्य उतार देंगे. ये लिजिये जन्मकुंडली...
पं. ताऊनाथ बोले - ओहो...तो आपको समीरा और मुन्नी ने भेजा है? अरे हमारी सलाह से ही समीरा जी ने माडलिंग शुरू की और आज टाप की इंटरनेशनल माडल होगई हैं, पर आज भी हमसे सलाह लिये बिना फ़िल्म साईन करना तो दूर ...किसी से मिलती तक नही हैं....और मुन्नी तो एक साधारण सी आयटम गर्ल थी ...समीरा जी की सलाह से हमारे पास आई और हमने उसे देखते देखते कहां से कहां पहुंचा दिया...सीधे मुन्नी से "मुन्नी को बदनाम" हमने ही करवाया है. आप चिंता मत किजिये....लाईये हम आपके पतिदेव की जन्मकुंडली देखते हैं....कि समस्या क्या है?
और ताऊ महाराज जन्मकुंडली का अध्ययन करने लगते हैं....
अचानक आंखे ऊपर आकाश की तरफ़ देखते हुये पं. ताऊनाथ बोले - बालिके.....अब तुम हमारे कुछ प्रश्नों का जवाब दो...जिससे हम समस्या की जड तक पहुंच सकें...
माधुरी बोली - जी महाराज आप आदेश करिये...जवाब तो क्या मैं सब कुछ आपके चरणों में अर्पण कर दूंगी...बस मेरी गृहस्थी बरबाद होने से बचा लिजिये...मेरे दो छोटे छोटे से बच्चे हैं महाराज...
पं. ताऊनाथ बोले - चिंता मत करो बालिके... तुम ये बताओ कि क्या तुम्हारे पति...गुमशुम से रहते हैं? और ज्यादा किसी से बात नही करते?
माधुरी - हां महाराज...बस जब देखो तब अपने...
बीच में ही पं. ताऊनाथ बोले - बालिके हम जितना पूछे उतना ही जवाब दो...
माधुरी - जी महाराज...गलती होगई...
पं. ताऊनाथ बोले - हूं...क्या वो अपने कंप्य़ुटर की स्क्रीन को देखते हुये ही मुस्कराते भी रहते हैं?
माधुरी - सत्य वचन महाराज...कंप्य़ुटर से वो नजर ही नही हटाते महाराज...उसी में कोई भूत प्रेत घुसा है महाराज...मुझ पर कृपा किजिये महाराज....
पं. ताऊनाथ बोले - हूं...अब ये बतावो कि कभी उनके चेहरे पर तनाव चिंता गुस्सा भी दिखाई देता है?
माधुरी - महाराज दिखाई क्या....वो तो गालियां तक बडबडाहट में देते हैं...तेरी ऐसी तैसी...जमीन में गाड दूंगा स्साले को....पता नही किस बेनामी...वेनामी को गालियां देते हैं? ये कौन सी जात का भूत है महाराज? कभी कभी मुस्कराते हैं...कभी
पं. ताऊनाथ बोले - बालिके...हमने कहा ना हमको सब पता चल गया है....तुम कुछ मत बतावो...सिर्फ़ हमारे प्रश्नों का जवाब दो...अब ये बतावो कि वो खाने मे कितनी देर लगाते हैं?
माधुरी - महाराज काहे की देर? उनकी थाली ठंडी होकर बर्फ़ होजाती है...कुछ कहो तो कहते हैं कि जरूरी काम कर रहा हूं...दिखाई नही दे रहा है क्या? और गुस्सा होने लग जाते हैं...खाना खाने मे बस दो मिनट ही लगाते हैं महाराज.
पं. ताऊनाथ बोले - हूं...और दुकान पर कब जाते हैं?
माधुरी - आजकल तो दोपहर बाद ही दुकान खोलते हैं....और पंडितजी महाराज... दुकान पर जाकर भी ये भूत पीछा नही छोडता....... दुकानदारी भी चौपट हो गई है महाराज...रक्षा किजिये...इस भूत प्रेत को भगवाईये महाराज...खर्चा जो भी आजाये, बस आप तो इनको पहले जैसा ही कर दिजिये.
पं. ताऊनाथ बोले - अच्छा अब अंतिम बात बताओ...क्या ये किसी को फ़ोन करते हैं या या कोई इनको फ़ोन करता है?
माधुरी - महाराज फ़ोन का तो पूछिये मत, जब देखो तब फ़ोन कान से लगा रहता है और ऐसे ऐसे नाम ले लेकर बात करते हैं जिनका कभी नाम नही सुना...ना हमारे रिश्तेदार...ना जान पहचान के....फ़िर भी घंटो लगे रहते हैं...घर पर कोई मेहमान आजाये तब भी कंप्य़ूटर नही छोडते....बस महाराज अब तो बहुत होगया....दया किजिये पंडित जी...इस भूत प्रेत से पीछा छुडवाइये.
पं. ताऊनाथ बोले - बालिके...ये साधारण भूत प्रेत चुडैल नही है...ये उससे भी खतरनाक जिन्न है. भूत प्रेत होता तो हमारे पास ताऊ का सोटा है....उस सोटे से अच्छे २ भूत भाग जाते हैं बल्कि Taau's Baton का नाम सुनते ही भूत प्रेत खुद जमीन में गंड जाते हैं. पर तुम्हारे पति को जो जिन्न लगा है उससे कोई लड नही सकता. इसे ब्लागिंग नाम का भूत लगा है और वो भी सबसे खतरनाक माना जाने वाला हिंदी ब्लागिंग का भूत.
माधुरी - क्या कह रहे हैं महाराज? ये कौन सा भूत है महाराज? कुछ उपाय बतावो महाराज श्री. बडी उम्मीद लेके आयी थी आपके दरबार में.....
पं. ताऊनाथ बोले - बालिके, तुम्हारे पति की जन्मकुंडली का तृत्तीय भाव अत्यंत बलि (strong) हो रहा है. और तृतीय भाव भ्रम का होता है. और दशा भी तृतीयेश की चल रही है. कोई ऐसी वैसी दशा नही है. इस दशा में मनुष्य भ्रम में जीता है जो नही है उसको सच मानता है और जो है उसकी परवाह नही करता. बहुत खतरनाक दशा है. इस दशा में मनुष्य को हिंदी ब्लागिंग का जिन्न पकड लेता है.
माधुरी - दया किजिये महाराज....मेरी गृहस्थी बरबाद हो रही है महाराज.
पं. ताऊनाथ बोले - देखो बालिके, हम अब उपाय बताते हैं....पर हमारा नाम मत लेना उस भूत को. हिंदी ब्लागिंग के जिन्न से हमारी भी रूह कांपती है...सही बात तो ये है कि हम भी इसका पक्का इलाज आज तक नहीं ढूंढ पाये. तुम उपाय लिख लो और आजमा कर बताना. अवश्य सफ़लता मिलेगी.
कागज पेन उठाते हुये माधुरी बोली - जी महाराज, बताईये.
पं. ताऊनाथ बोले - सबसे पहले तो एक मेड-इन-जर्मन लठ खरीद कर उसे तेल पिलाकर, धूपबत्ती लोबान का धुंआ देके पिडित की टांगो और हाथ पर एक एक लठ्ठ मारना है.
माधुरी - जी महाराज, आगे बताईये, ये काम तो मैं कर लूंगी.
पं. ताऊनाथ बोले - इसके बाद ब्राड बैंड कनेक्शन का वायर काट दो और तुरंत एक गिलास हल्दी वाला दूध पिलाकर उनको सुला दो. क्योंकि दो लठ्ठ खाने के बाद नींद अच्छी आयेगी.
माधुरी - पर महाराज ब्राड बैंड वाले से ये वायर कंप्लेन करके जुडवा लेंगे..
पं. ताऊनाथ बोले - पूरी बात तो सुनो बालिके...तुम बीच में बोलती बहुत हो...हमारा ध्यान भंग होता है इससे...
माधुरी - गलती मुआफ़ करें महाराज...आप बताईये अब नही बोलूंगी बीच में.
पं. ताऊनाथ बोले - हां अब ध्यान से सुनो.. पिडित को ताऊ प्रोडक्ट्स द्वारा उत्पादित ब्लागिंग भस्म काढा की तीन तीन खुराक सुबह शाम दोपहर सेवन करवाना है और फ़िर एक खास हवन करना है. असली काम यह हवन ही करेगा. सामान लिख लो बालिके....हम कल सुबह आकर यह हवन सम्पन्न करवायेंगे..फ़िर देखना तुम्हारा पति सिर्फ़ तुम्हारा होगा.
माधुरी - जी महाराज आप बडे दयालु हैं... लिखवाईये महाराज.
पं. ताऊनाथ - लिखिये...कोई सामान छूट ना जाये...
रगडमपट्टि की जड १०० ग्राम,
झगडमपटि की जड २५० ग्राम,
बेनामी का अर्क २२५ ग्राम,
सुर्पणखां सत्व ५० ग्राम,
मारीच कंद एक किलो,
बिच्छु गुटिका १० नग,*
गीदड सींगी ४ नग,*
केले के पत्ते २ नग,
चुडैल के पीले बाल एक गुच्छी,
डाईन की चोटी,
मर्तबान का पंख,*
मुर्गे की रीढ,*
गधे के सींग,
सुबह के कान....*
बात काटते हुये माधुरी बोली - पर महाराज...इन सब सामानों का कभी नाम भी नही सुना...मैं कहां से लाऊंगी ये सब?
पं. ताऊनाथ - बालिके तांत्रिक अनुष्ठान इन सब सामानों के बिना नही हो सकता और ये जिन्न कोई ऐसा वैसा नही है हिंदी ब्लागिंग का जिन्न है इसके लिये तो समस्त सामान के साथ अनुष्ठान करना पडॆगा....किसी भी सामान की कमी रह गयी तो ये हमारे ऊपर भी आक्रमण कर सकता है हम रिस्क नही लेंगे. हां चाहो तो हम सामान का इंतजाम करवा सकते हैं.
माधुरी - पंडितजी, फ़िर क्या दिक्कत है? आप तो सामान लेके कल आजाईये और यह हवन संपन्न करवा दिजिये.
पं. ताऊनाथ बोले - तो ठीक है आप सामान की कीमत रूपये १.२१,०००/- हमारे आफ़िस में जमा करा कर रसीद ले लिजिये.
माधुरी - पंडीत जी, सामान की कीमत कुछ ज्यादा लग रही है. कुछ हिसाब किताब से करवाईये ना.
पं. ताऊनाथ - बालिके, हम तंत्र अनुष्ठान में इस तरह की सौदेबाजी नही करते. हमने बोल दिया सो बोल दिया. वो तुम मिस समीरा और मुन्नी बदनाम के रिफ़रेंस से आई हो तो ये सामान इकठ्ठा करने का जिम्मा हम ले रहे हैं वर्ना हम इतना रिस्क नही लेते. हिंदी ब्लागिंग के जिन्न से तो ब्रह्मा जी भी कांपते हैं. हमारी तो औकात ही क्या है? देख लो अपना पति बचाना हो तो करवावो हवन वर्ना जाने दो.
माधुरी - महाराज नाराज मत होईये, मैं अभी घर जाकर पैसे लाती हूं आप तो कल ये हवन करवा ही दिजिये. दक्षिणा भी बता दिजिये महाराज.
पं. ताऊनाथ - अवश्य बालिके अवश्य....चिंता ना करो, दक्षिणा हम कार्य सफ़ल होने पर ही लेंगे. अभी तो सिर्फ़ सामान की कीमत जमा करवा दो.
माधुरी - जो आज्ञा पंडित जी महाराज.
(क्रमश:)
मिस समीरा कुछ बोलती उसके पहले ही मुन्नी बोल पडी - अरे माधुरी आप को अगर लगता है कि भूत प्रेत का मामला है तो पं.ताऊ नाथ जी ’त्रिकालज्ञ’ को संपर्क करो ना, सब कुछ ठीक हो जायेगा. ये समीरा भी तो पं. ताऊ नाथ रमलशाश्त्री जी की सलाह ले लेकर इंटरनेशनल माडल बनकर चांदी काट रही है.
मुन्नी की ऐसी बात सुनते ही मिस समीरा टेढी तमतमा कर बोली - मुझे ही क्यों... तुमको मुन्नी से मुन्नी बदनाम किसने बनवाया? तुम भी तो सिर्फ़ मुन्नी ही थी तुम भी पंडीत जी की सलाह से ही बदनाम हुई हो ना. अब तक की सबसे ज्यादा मेहनताना पाने वाली वाली मुन्नी बदनाम बन गई हो. अब पंडित जी की महिमा ही अपरंपार है. माधुरी जी आप तो आपके पति देव की जन्मकुंडली लेके पं. ताऊनाथ रमलशाश्त्री "त्रिकालज्ञ" के पास पहुंच जाईये...पंडितजी सब ठीक कर देंगे.
मिस समीरा टेढी और मुन्नी बदनाम की सलाह से माधुरी सीधे घर आकर अपने पतिदेव की जन्मकुंडली लेकर पं. ताऊनाथ के आफ़िस पहुंच गई, वहां जाकर फ़ीस जमा करवाई और अपना नंबर आने का व्यग्रता पूर्वक इंतजार करने लगी. जैसे ही उनका नंबर आया पंडितजी ने उन्हें अंदर बुलवा लिया.
समस्त ज्तोतिषिय विधाओं के मर्मज्ञ त्रिकाल दर्शी
पं. ताऊनाथ रमलशाश्त्री
घुसते ही सामने बैठे हुये पंडितजी को माधुरी ने नमस्कार किया और बदले में पंडित जी उनको लंबा सा आशीर्वाद फ़ेंका - सौभाग्वती हो...सदा खुश रहो...
बीच में ही माधुरी बोली - पंडित जी महाराज कहां से सुखी रहूं? सब कुछ उलट पुल्ट होरहा है. मेरे पति को शायद भूत प्रेत या चुडैल ने पकड लिया है. महाराज मेरी सहायता किजिये...मेरी गृहस्थी बचा लिजिये.
पं. ताऊनाथ बोले - शांत बालिके...शांत.... हमको मालूम है तुम यहां क्यों आई हो?
माधुरी बोली - पंडितजी बिना बताये हुये ही आप सब जान गये? इसका मतलब समीरा और मुन्नी सच ही कहती थी. धन्य हो महाराज...अब तो मुझे पकका भरोसा होगया कि आप मेरे पति का भूत अवश्य उतार देंगे. ये लिजिये जन्मकुंडली...
पं. ताऊनाथ बोले - ओहो...तो आपको समीरा और मुन्नी ने भेजा है? अरे हमारी सलाह से ही समीरा जी ने माडलिंग शुरू की और आज टाप की इंटरनेशनल माडल होगई हैं, पर आज भी हमसे सलाह लिये बिना फ़िल्म साईन करना तो दूर ...किसी से मिलती तक नही हैं....और मुन्नी तो एक साधारण सी आयटम गर्ल थी ...समीरा जी की सलाह से हमारे पास आई और हमने उसे देखते देखते कहां से कहां पहुंचा दिया...सीधे मुन्नी से "मुन्नी को बदनाम" हमने ही करवाया है. आप चिंता मत किजिये....लाईये हम आपके पतिदेव की जन्मकुंडली देखते हैं....कि समस्या क्या है?
और ताऊ महाराज जन्मकुंडली का अध्ययन करने लगते हैं....
अचानक आंखे ऊपर आकाश की तरफ़ देखते हुये पं. ताऊनाथ बोले - बालिके.....अब तुम हमारे कुछ प्रश्नों का जवाब दो...जिससे हम समस्या की जड तक पहुंच सकें...
माधुरी बोली - जी महाराज आप आदेश करिये...जवाब तो क्या मैं सब कुछ आपके चरणों में अर्पण कर दूंगी...बस मेरी गृहस्थी बरबाद होने से बचा लिजिये...मेरे दो छोटे छोटे से बच्चे हैं महाराज...
पं. ताऊनाथ बोले - चिंता मत करो बालिके... तुम ये बताओ कि क्या तुम्हारे पति...गुमशुम से रहते हैं? और ज्यादा किसी से बात नही करते?
माधुरी - हां महाराज...बस जब देखो तब अपने...
बीच में ही पं. ताऊनाथ बोले - बालिके हम जितना पूछे उतना ही जवाब दो...
माधुरी - जी महाराज...गलती होगई...
पं. ताऊनाथ बोले - हूं...क्या वो अपने कंप्य़ुटर की स्क्रीन को देखते हुये ही मुस्कराते भी रहते हैं?
माधुरी - सत्य वचन महाराज...कंप्य़ुटर से वो नजर ही नही हटाते महाराज...उसी में कोई भूत प्रेत घुसा है महाराज...मुझ पर कृपा किजिये महाराज....
पं. ताऊनाथ बोले - हूं...अब ये बतावो कि कभी उनके चेहरे पर तनाव चिंता गुस्सा भी दिखाई देता है?
माधुरी - महाराज दिखाई क्या....वो तो गालियां तक बडबडाहट में देते हैं...तेरी ऐसी तैसी...जमीन में गाड दूंगा स्साले को....पता नही किस बेनामी...वेनामी को गालियां देते हैं? ये कौन सी जात का भूत है महाराज? कभी कभी मुस्कराते हैं...कभी
पं. ताऊनाथ बोले - बालिके...हमने कहा ना हमको सब पता चल गया है....तुम कुछ मत बतावो...सिर्फ़ हमारे प्रश्नों का जवाब दो...अब ये बतावो कि वो खाने मे कितनी देर लगाते हैं?
माधुरी - महाराज काहे की देर? उनकी थाली ठंडी होकर बर्फ़ होजाती है...कुछ कहो तो कहते हैं कि जरूरी काम कर रहा हूं...दिखाई नही दे रहा है क्या? और गुस्सा होने लग जाते हैं...खाना खाने मे बस दो मिनट ही लगाते हैं महाराज.
पं. ताऊनाथ बोले - हूं...और दुकान पर कब जाते हैं?
माधुरी - आजकल तो दोपहर बाद ही दुकान खोलते हैं....और पंडितजी महाराज... दुकान पर जाकर भी ये भूत पीछा नही छोडता....... दुकानदारी भी चौपट हो गई है महाराज...रक्षा किजिये...इस भूत प्रेत को भगवाईये महाराज...खर्चा जो भी आजाये, बस आप तो इनको पहले जैसा ही कर दिजिये.
पं. ताऊनाथ बोले - अच्छा अब अंतिम बात बताओ...क्या ये किसी को फ़ोन करते हैं या या कोई इनको फ़ोन करता है?
माधुरी - महाराज फ़ोन का तो पूछिये मत, जब देखो तब फ़ोन कान से लगा रहता है और ऐसे ऐसे नाम ले लेकर बात करते हैं जिनका कभी नाम नही सुना...ना हमारे रिश्तेदार...ना जान पहचान के....फ़िर भी घंटो लगे रहते हैं...घर पर कोई मेहमान आजाये तब भी कंप्य़ूटर नही छोडते....बस महाराज अब तो बहुत होगया....दया किजिये पंडित जी...इस भूत प्रेत से पीछा छुडवाइये.
पं. ताऊनाथ बोले - बालिके...ये साधारण भूत प्रेत चुडैल नही है...ये उससे भी खतरनाक जिन्न है. भूत प्रेत होता तो हमारे पास ताऊ का सोटा है....उस सोटे से अच्छे २ भूत भाग जाते हैं बल्कि Taau's Baton का नाम सुनते ही भूत प्रेत खुद जमीन में गंड जाते हैं. पर तुम्हारे पति को जो जिन्न लगा है उससे कोई लड नही सकता. इसे ब्लागिंग नाम का भूत लगा है और वो भी सबसे खतरनाक माना जाने वाला हिंदी ब्लागिंग का भूत.
माधुरी - क्या कह रहे हैं महाराज? ये कौन सा भूत है महाराज? कुछ उपाय बतावो महाराज श्री. बडी उम्मीद लेके आयी थी आपके दरबार में.....
पं. ताऊनाथ बोले - बालिके, तुम्हारे पति की जन्मकुंडली का तृत्तीय भाव अत्यंत बलि (strong) हो रहा है. और तृतीय भाव भ्रम का होता है. और दशा भी तृतीयेश की चल रही है. कोई ऐसी वैसी दशा नही है. इस दशा में मनुष्य भ्रम में जीता है जो नही है उसको सच मानता है और जो है उसकी परवाह नही करता. बहुत खतरनाक दशा है. इस दशा में मनुष्य को हिंदी ब्लागिंग का जिन्न पकड लेता है.
माधुरी - दया किजिये महाराज....मेरी गृहस्थी बरबाद हो रही है महाराज.
पं. ताऊनाथ बोले - देखो बालिके, हम अब उपाय बताते हैं....पर हमारा नाम मत लेना उस भूत को. हिंदी ब्लागिंग के जिन्न से हमारी भी रूह कांपती है...सही बात तो ये है कि हम भी इसका पक्का इलाज आज तक नहीं ढूंढ पाये. तुम उपाय लिख लो और आजमा कर बताना. अवश्य सफ़लता मिलेगी.
कागज पेन उठाते हुये माधुरी बोली - जी महाराज, बताईये.
पं. ताऊनाथ बोले - सबसे पहले तो एक मेड-इन-जर्मन लठ खरीद कर उसे तेल पिलाकर, धूपबत्ती लोबान का धुंआ देके पिडित की टांगो और हाथ पर एक एक लठ्ठ मारना है.
माधुरी - जी महाराज, आगे बताईये, ये काम तो मैं कर लूंगी.
पं. ताऊनाथ बोले - इसके बाद ब्राड बैंड कनेक्शन का वायर काट दो और तुरंत एक गिलास हल्दी वाला दूध पिलाकर उनको सुला दो. क्योंकि दो लठ्ठ खाने के बाद नींद अच्छी आयेगी.
माधुरी - पर महाराज ब्राड बैंड वाले से ये वायर कंप्लेन करके जुडवा लेंगे..
पं. ताऊनाथ बोले - पूरी बात तो सुनो बालिके...तुम बीच में बोलती बहुत हो...हमारा ध्यान भंग होता है इससे...
माधुरी - गलती मुआफ़ करें महाराज...आप बताईये अब नही बोलूंगी बीच में.
पं. ताऊनाथ बोले - हां अब ध्यान से सुनो.. पिडित को ताऊ प्रोडक्ट्स द्वारा उत्पादित ब्लागिंग भस्म काढा की तीन तीन खुराक सुबह शाम दोपहर सेवन करवाना है और फ़िर एक खास हवन करना है. असली काम यह हवन ही करेगा. सामान लिख लो बालिके....हम कल सुबह आकर यह हवन सम्पन्न करवायेंगे..फ़िर देखना तुम्हारा पति सिर्फ़ तुम्हारा होगा.
माधुरी - जी महाराज आप बडे दयालु हैं... लिखवाईये महाराज.
पं. ताऊनाथ - लिखिये...कोई सामान छूट ना जाये...
रगडमपट्टि की जड १०० ग्राम,
झगडमपटि की जड २५० ग्राम,
बेनामी का अर्क २२५ ग्राम,
सुर्पणखां सत्व ५० ग्राम,
मारीच कंद एक किलो,
बिच्छु गुटिका १० नग,*
गीदड सींगी ४ नग,*
केले के पत्ते २ नग,
चुडैल के पीले बाल एक गुच्छी,
डाईन की चोटी,
मर्तबान का पंख,*
मुर्गे की रीढ,*
गधे के सींग,
सुबह के कान....*
बात काटते हुये माधुरी बोली - पर महाराज...इन सब सामानों का कभी नाम भी नही सुना...मैं कहां से लाऊंगी ये सब?
पं. ताऊनाथ - बालिके तांत्रिक अनुष्ठान इन सब सामानों के बिना नही हो सकता और ये जिन्न कोई ऐसा वैसा नही है हिंदी ब्लागिंग का जिन्न है इसके लिये तो समस्त सामान के साथ अनुष्ठान करना पडॆगा....किसी भी सामान की कमी रह गयी तो ये हमारे ऊपर भी आक्रमण कर सकता है हम रिस्क नही लेंगे. हां चाहो तो हम सामान का इंतजाम करवा सकते हैं.
माधुरी - पंडितजी, फ़िर क्या दिक्कत है? आप तो सामान लेके कल आजाईये और यह हवन संपन्न करवा दिजिये.
पं. ताऊनाथ बोले - तो ठीक है आप सामान की कीमत रूपये १.२१,०००/- हमारे आफ़िस में जमा करा कर रसीद ले लिजिये.
माधुरी - पंडीत जी, सामान की कीमत कुछ ज्यादा लग रही है. कुछ हिसाब किताब से करवाईये ना.
पं. ताऊनाथ - बालिके, हम तंत्र अनुष्ठान में इस तरह की सौदेबाजी नही करते. हमने बोल दिया सो बोल दिया. वो तुम मिस समीरा और मुन्नी बदनाम के रिफ़रेंस से आई हो तो ये सामान इकठ्ठा करने का जिम्मा हम ले रहे हैं वर्ना हम इतना रिस्क नही लेते. हिंदी ब्लागिंग के जिन्न से तो ब्रह्मा जी भी कांपते हैं. हमारी तो औकात ही क्या है? देख लो अपना पति बचाना हो तो करवावो हवन वर्ना जाने दो.
माधुरी - महाराज नाराज मत होईये, मैं अभी घर जाकर पैसे लाती हूं आप तो कल ये हवन करवा ही दिजिये. दक्षिणा भी बता दिजिये महाराज.
पं. ताऊनाथ - अवश्य बालिके अवश्य....चिंता ना करो, दक्षिणा हम कार्य सफ़ल होने पर ही लेंगे. अभी तो सिर्फ़ सामान की कीमत जमा करवा दो.
माधुरी - जो आज्ञा पंडित जी महाराज.
(क्रमश:)
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