स्कूल में पढाता हुआ ताऊ
एक रोज वो छात्र खडा होकर सवाल पूछने लगा और ताऊ उसके कुछ भी उल्टे सीधे जवाब देता रहा. अंत में उस छात्र ने पूछा - मास्टर जी, ये बताईये कि गाय और बकरी क्या है?
अब ऐसे सवाल कोई ताऊ से पूछे तो इनका जवाब देना उसके बांये हाथ का काम था सो ताऊ ने तुरंत जवाब दिया - तुमको इतना भी नही मालूम कि ये दोनों ही पशु हैं.
छात्र ने पूछा - तो मास्टर जी, ये बताओ कि जब ये दोनों ही पशु हैं तो गाय को चार थन (दूध देने वाले) और बकरी को सिर्फ़ दो ही थन क्यों होते हैं?
अब ताऊ मुश्किल में पड गया. जवाब कुछ सूझा नही सो ताऊ ने उसका कान मरोडते हुये कहा - चल चुपचाप बैठ.. बावलीबूच कहीं का...तेरे को कौन सा पशु विभाग का निर्देशक बनना है, जो इतनी जानकारी ले रहा है? छात्र बेचारा चुपचाप अपना कान सहलाता हुआ बैठ गया.
ताऊ के इस व्यवहार व स्कूल में नींद निकालने की शिकायत ऊपर विभाग में भी पहूंच चुकी थी. कई बार स्कूल निरीक्षक भी आया लेकिन ताऊ इतना शातिर और हाजिर जवाब था कि कभी भी पकडा नही गया और स्कूल के छात्र ताऊ के डर की वजह से कुछ बोलते नही थे.
एक दिन सर्दियों के दिन बाहर धूप में ताऊ ने क्लास लगवाई और बच्चों को कुछ काम देकर खुद कुर्सी पर बैठ कर नींद निकालने लगा. थोडी देर में खर्राटे भी लेने लगा. तभी स्कूल निरीक्षक वहां आ पहूंचा और बोला - ताऊ, आज तो तुम रंगे हाथों सोते हुये पकडे ही गये...अब तुमको सस्पेंड करवाऊंगा.
ताऊ ने बडे ही सहज भाव से उत्तर दिया - अरे इंस्पेक्टर जी....मैं सो नही रहा था, मैं तो बच्चों को प्रेक्टिकल करके बता रहा था.
अब स्कूल निरीक्षक भी चौंका और पूछा कि ये कौन सा प्रेक्टीकल करवा रहे थे?
ताऊ बोला - मैं बच्चों को बता रहा था कि सोते समय खर्राटे कैसे लिये जाते हैं.
स्कूल निरीक्षक ने बच्चों से भी पूछा तो डर के मारे बच्चों ने भी ताऊ की बात का ही समर्थन किया. स्कूल निरीक्षक अपना सर धुनता हुआ वापस चला गया.
