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ताऊ साप्ताहिक पत्रिका अंक १६

प्रिय बहणों, भाईयो, भतिजियों और भतीजो आप सबका ताऊ साप्ताहिक पत्रिका के 16 वें अंक मे स्वागत है.  

राऊंड दो के छठे अंक की पहेली का सही जवाब मा कामाख्या का मंदिर था. जिसके बारे मे आज के अंक मे विशेष जानकारी दे रही हैं सुश्री अल्पना वर्मा.

 

आजकल की ताजा खबर तो चुनाव ही हैं, पर इससे अलग एक खबर यह भी है कि दिल्ली सरकार ने कुछ लाख रुपये (शायद ३४ लाख के करीब) मध्यप्रदेश सरकार को दिये थे. और यह रुपये इस एवज मे दिये थे कि दिल्ली से बंदरों को पकड कर उन्हे मध्य-प्रदेश मे भेज दिया जाये.

 

तो साहब इस आफ़र से भला म.प्र. शाशन को क्या आपत्ति हो सकती थी?  हींग लगे ना फ़िटकरी और रंग चोखा. यहां पहले ही ताऊ जैसे बडे बडे बंदर रह रहे हैं तो दिल्ली के बंदर यहां क्या करेंगे?  सो रुपये अंटी मे किये और पहली खेप  आदर सहित बुलवा कर जंगलों मे छोड दी गई.

 

पिछले सप्ताह फ़िर आफ़र आया कि और रुपये ले लिजिये और कुछ ताऊओं को अपने यहां बसा लिजिये.  अबकी बार यहां की सरकार ने कहा – साहब आप तो आपके रुपये अपने पास रखो और पिछले रुपये दुगुने

वापस ले लो और इन ताऊओं को वापस बुलवा लो.

 

यहां आकर इन दिल्ली के ताऊओं (बंदरों) ने इतना उपद्रव मचाया कि जिन जंगलों म्र इनको छोडा गया था वहां के आसपास के गांवों में रहने वाले ग्रामीण परेशान हो गये. आखिर दिल्ली के बंदर थे सो शांति से नही रह सकते थे.

 

बात मजाक की नही है. हमने जंगली जानवरों के ठीकानों (जंगलों) को इस बेदरदी से उजाडा है कि अब इन जंगल के बाशिंदों को शहरों का रुख करना पड रहा है.  और अब ये बंदर तो कहते हैं कि शहरी जीवन के अभ्यस्त भी हो गये हैं.

 

आखिर इन्सान अपनी करनी का फ़ल तो भुगतेगा ही. आखिर इन्सान क्या चाहता है? शायद अकील नेमानी साहब ने इसीलिये कहा होगा :

 

मैं ये सर खुद ही कलम करके तुझे दे देता

मसले   तेरे   अगर   हल    मेरे    सर से होते

 

आज हमारे तकनीकी संपादक आशीष खंडेलवाल जी के ब्लाग हिंदी टिप्स की वर्ष गांठ है. उनको हार्दिक बधाईयां .

 

आइये अब चलते हैं सु अल्पनाजी के “मेरा पन्ना” की और:-

 

 

-ताऊ रामपुरिया



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"मेरा पन्ना"

-अल्पना वर्मा

नमस्कार,

फ़िर एक नई जगह की जानकारी के साथ आपके सामने उपस्थित हुई हूं. आशा है हमेशा की तरह आप इसे भी पसंद करेंगे.

उत्तर पूर्वी भारत में एक हरा भरा सरहदी राज्य है 'आसाम' जो मानसून और चाय के बागानों लिए प्रसिद्द है.यही बहती है ब्रह्मपुत्र नदी.प्राचीन भारतीय ग्रंथों में इस स्थान को 'प्रागज्योतिषपुर' के नाम से जाना जाता था.इस राज्य की राजधानी है -गुवाहाटी.प्राचीन मंदिरों के दर्शन आप को यहाँ होंगे.मगर यहाँ 'पिकॉक-आइलैंड 'में बने सुंदर 'शिव मंदिर 'में छेनी की धार और हाथ के कौशल से वास्तुकला के आश्चर्यजनक काम को देख कर कोई भी आश्चर्यचकित रह जायेगा.

मुख्य दर्शनीय स्थल हैं-कामाख्या मंदिर,नवग्रह मंदिर,उमानन्दा मंदिर,वशिष्ठ आश्रम,असम जू एवं बॉटनिकल गार्डन्स,हाजो,पाव मक्का मस्जिद.

मां भगवती कामाख्या मंदिर



देवी भागवत पुराण में 108, कालिकापुराण में छब्बीस, शिवचरित्र में इक्यावन, दुर्गा शप्तसती और तंत्रचूड़ामणि में
शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है.इस बार की पहेली में हमने एक शक्ति पीठ के बारे में ही आप से पूछा था.
गुवाहाटी से 7 कि.मी की दूरी पर स्थित नीलांचल अथवा नीलशैल पर्वतमालाओं पर समुद्र तल से ८०० फीट ऊँचाई पर स्थित मां भगवती कामाख्या का सिद्ध शक्तिपीठ सती के इक्यावन शक्तिपीठों में सर्वोच्च स्थान रखता है.


इस मंदिर का निर्माण कब हुआ?


कोई कहता है इसे राजा नरकासुर ने बनवाया था.कोई कहता है कामदेव ने!.मगर इतिहास कहता है की वर्तमान ढांचा १५६५ में कच्छ वंश के राजा चिलाराय[?]ने बनवाया था और मुगल बादशाह औरंगजेब [?] के हमलों में यह नष्ट हो गया था .इस पुनर्निर्माण राजा नर नारायण ने १६५६ में करवाया.

इस का गुम्बद मधुमक्खियों के छत्ते की भांति है। इस की शक्ती है कामाख्या और भैरव को उमानंद कहते हैं।

इस मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अतिरिक्त अन्य देवियों - काली , तारा , बगला , छिन्नमस्ता ,भुवनेस्वरी , भैरवी और धूमावती के मंदिर भी हैं.कुछ और मंदिर इसी मंदिर के काम्प्लेक्स में हैं-सीतला , ललित कांता, जय दुर्गा 'वन दुर्गा ,राजराजेस्वरी ,स्मसनाकल , अभयानंद धर्मशाला का काली मंदिर और संखेस्वरी मंदिर.कामख्या मंदिर प्रांगण में भगवान शिव के भी ५ मंदिर हैं जो उनके ५ रूप 'कामेस्वारा, सिद्धेस्वरा , अम्रतोकेस्वारा , अघ्प्रा और तत्पुरुसा 'को बताते हैं.भगवान विष्णु के ३ मंदिर भी यहीं हैं.


-मंदिर के गर्भगृह स्थित 'महामुद्रा' पर प्राकृतिक जल धारा बहती है.जिस को रेशम के परिधान और फूलों में ढका देखा जा सकता है.इनके दर्शन में आलौकिक अनुभूति होती है.


-सती स्वरूपिणी आद्यशक्ति महाभैरवी कामाख्या तीर्थ को विश्व का सर्वोच्च कौमारी तीर्थ भी माना जाता है.इसीलिए इस शक्तिपीठ में कौमारी-पूजा अनुष्ठान का भी अत्यंत महत्व है

-इस स्थान को मानवता के उद्गम का केंद्र भी माना जाता है.

दर्शन हेतु मंदिर द्वार खुलने का समय-सुबह ८ से १- पुनः २.३० से

कब जाएँ- जब भी माता का बुलावा हो तब दर्शन हेतु जाएँ.

कैसे जाएँ -गुवाहाटी शहर सभी मुख्य शहरों से सड़क,वायु,रेल मार्ग से जुडा है.

मंदिर से सम्बंधित प्रचलित पुरानी कथाएँ-


१-कहा जाता है कि सती पार्वती ने अपने पिता द्वारा अपने पति, भगवान शिव का अपमान किए जाने पर हवन कुंड में कूदकर अपनी जान दे दी थी. भगवान शिव को आने में थोड़ी देर हो गई, तब तक उनकी अर्धांगिनी का शरीर जल चुका था. उन्होंने सती का शरीर आग से निकाला और तांडव नृत्य आरंभ कर दिया. अन्य देवतागण उनका नृत्य रोकना चाहते थे, अत: उन्होंने भगवान विष्णु से शिव को मनाने का आग्रह किया. भगवान विष्णु ने सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए और भगवान शिव ने नृत्य रोक दिया. कहा जाता है कि सती की योनि (सृजक अंग) गुवाहाटी में गिरी. यह मंदिर देवी की प्रतीकात्मक ऊर्जा को समर्पित है।


यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है.इसका महत् तांत्रिक महत्व है.प्राचीन काल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र सिद्धि का सर्वोच्च स्थल है.यहीं माँ भगवती की महामुद्रा (योनि-कुण्ड) स्थित है।


२-कामाख्या के शोधार्थी एवं प्राच्य विद्या विशेषज्ञ डॉ. दिवाकर शर्मा के अनुसार कामाख्या के बारे में किंवदंती है कि घमंड में चूर असुरराज नरकासुर एक दिन मां भगवती कामाख्या को अपनी पत्नी के रूप में पाने का दुराग्रह कर बैठा था. कामाख्या महामाया ने नरकासुर की मृत्यु को निकट मानकर उससे कहा कि यदि तुम इसी रात में नील पर्वत पर चारों तरफ पत्थरों के चार सोपान पथों का निर्माण कर दो एवं कामाख्या मंदिर के साथ एक विश्राम-गृह बनवा दो, तो मैं तुम्हारी इच्छानुसार पत्नी बन जाऊँगी और यदि तुम ऐसा न कर पाये तो तुम्हारी मौत निश्चित है। गर्व में चूर असुर ने पथों के चारों सोपान प्रभात होने से पूर्व पूर्ण कर दिये और विश्राम कक्ष का निर्माण कर ही रहा था कि महामाया के एक मायावी कुक्कुट (मुर्गे) द्वारा रात्रि समाप्ति की सूचना दी गयी, जिससे नरकासुर ने क्रोधित होकर मुर्गे का पीछा किया और ब्रह्मपुत्र के दूसरे छोर पर जाकर उसका वध कर डाला। यह स्थान आज भी [दर्रांग जिले में `कुक्टाचकि' /'kukarkata' के नाम से विख्यात है और यह सीढियाँ 'मेखेलौजा पथ' के नाम से जानी जाती हैं.

बाद में मां भगवती की माया से भगवान विष्णु ने नरकासुर असुर का वध कर दिया। नरकासुर की मृत्यु के बाद उसका पुत्र भगदत्त कामरूप का राजा बना। भगदत्त का वंश लुप्त हो जाने से कामरूप राज्य छोटे-छोटे भागों में बंट गया और सामंत राजा कामरूप पर अपना शासन करने लगा।नरकासुर के नीच कार्यों के बाद एवं विशिष्ट मुनि के अभिशाप से देवी अप्रकट हो गयी थीं.


यहाँ मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण पर्व है -अम्बुवाची पर्व-:


विश्व के सभी तांत्रिकों, मांत्रिकों एवं सिद्ध-पुरुषों के लिये वर्ष में एक बार पड़ने वाला अम्बूवाची योग पर्व वस्तुत एक वरदान है. यह अम्बूवाची पर्वत भगवती (सती) का रजस्वला पर्व होता है. पौराणिक शास्त्रों के अनुसार सतयुग में यह पर्व 16 वर्ष में एक बार, द्वापर में 12 वर्ष में एक बार, त्रेता युग में 7 वर्ष में एक बार तथा कलिकाल में प्रत्येक वर्ष जून माह में तिथि के अनुसार मनाया जाता है. साल २००८ में अम्बूवाची योग पर्व जून की 22, 23, 24 तिथियों में मनाया गया.
पौराणिक सत्य है कि अम्बूवाची पर्व के दौरान माँ भगवती रजस्वला होती हैं और मां भगवती की गर्भ गृह स्थित महामुद्रा (योनि-तीर्थ) से निरंतर तीन दिनों तक जल-प्रवाह के स्थान से रक्त प्रवाहित होता है. यह अपने आप में, इस कलिकाल में एक अद्भुत आश्चर्य का विलक्षण नजारा है. कामाख्या तंत्र के अनुसार -


योनि मात्र शरीराय कुंजवासिनि कामदा। रजोस्वला महातेजा कामाक्षी ध्येताम सदा।।


इस बारे में `राजराजेश्वरी कामाख्या रहस्य' एवं `दस महाविद्याओं' नामक ग्रंथ के रचयिता एवं मां कामाख्या के अनन्य भक्त ज्योतिषी एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ. दिवाकर शर्मा ने बताया कि अम्बूवाची योग पर्व के दौरान मां भगवती के गर्भगृह के कपाट स्वत ही बंद हो जाते हैं और उनका दर्शन भी निषेध हो जाता है. इस पर्व की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे विश्व से इस पर्व में तंत्र-मंत्र-यंत्र साधना हेतु सभी प्रकार की सिद्धियाँ एवं मंत्रों के पुरश्चरण हेतु उच्च कोटियों के तांत्रिकों-मांत्रिकों, अघोरियों का बड़ा जमघट लगा रहता है। तीन दिनों के उपरांत मां भगवती की रजस्वला समाप्ति पर उनकी विशेष पूजा एवं साधना की जाती है।


आद्य-शक्ति महाभैरवी कामाख्या के दर्शन से पूर्व महाभैरव उमानंद, जो कि गुवाहाटी शहर के निकट ब्रह्मपुत्र नदी के मध्य भाग में टापू के ऊपर स्थित है, का दर्शन करना आवश्यक है. यह एक प्राकृतिक शैलदीप है, जो तंत्र का सर्वोच्च सिद्ध सती का शक्तिपीठ है. इस टापू को मध्यांचल पर्वत के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहीं पर समाधिस्थ सदाशिव को कामदेव ने कामबाण मारकर आहत किया था और समाधि से जाग्रत होने पर सदाशिव ने उसे भस्म कर दिया था. भगवती के महातीर्थ (योनिमुद्रा) नीलांचल पर्वत पर ही कामदेव को पुन जीवनदान मिला था. इसीलिए यह क्षेत्र कामरूप के नाम से भी जाना जाता है.


जिस प्रकार उत्तर भारत में कुंभ महापर्व का महत्व माना जाता है,ठीक उसी प्रकार उससे भी श्रेष्ठ इस आद्यशक्ति के अम्बूवाची पर्व का महत्व है. इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की दिव्य आलौकिक शक्तियों का अर्जन तंत्र-मंत्र में पारंगत साधक अपनी-अपनी मंत्र-शक्तियों को पुरश्चरण अनुष्ठान कर स्थिर रखते हैं. इस पर्व में मां भगवती के रजस्वला होने से पूर्व गर्भगृह स्थित महामुद्रा पर सफेद वस्त्र चढ़ाये जाते हैं, जो कि रक्तवर्ण हो जाते हैं. मंदिर के पुजारियों द्वारा ये वस्त्र प्रसाद के रूप में श्रद्धालु भक्तों में विशेष रूप से वितरित किये जाते हैं. इस पर्व पर भारत ही नहीं बल्कि बंगलादेश, तिब्बत और अफ्रीका जैसे देशों के तंत्र साधक यहां आकर अपनी साधना के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त करते हैं. वाममार्ग साधना का तो यह सर्वोच्च पीठ स्थल है. मछन्दरनाथ, गोरखनाथ, लोनाचमारी, ईस्माइलजोगी इत्यादि तंत्र साधक भी सांवर तंत्र में अपना यहीं स्थान बनाकर अमर हो गये हैं.


खबरों में-


१-उचित देखरेख के अभाव में प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर समेत असम के कई पुराने मंदिरों का ढाँचा कमजोर हो रहा है.
आस्था और अंधविश्वास के आगे इन मंदिरों का पुरातात्विक महत्व लुप्त होता जा रहा है.

२ -हर साल जून मास में लगने वाले मेले में निसंतान दंपत्ति संतान प्राप्ति हेतु आशीर्वाद लेने भी आते हैं.

३-यहाँ दी जाने वाली पशु बलि के विरुद्ध पशु प्रेमी संस्थानों ने अपनी चिंता जतायी है.


[यह जानकारी अंतर्जाल से अव्यवसायिक एवम शैक्षिक उद्देश्य हेतु संकलित की गयी है.]


अगले सप्ताह फ़िर किसी नई जगह के बारे मे जानकारी लेकर मिलते हैं तब तक के लिये नमस्ते.

-अल्पना वर्मा ( विशेष संपादक )

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“ दुनिया मेरी नजर से”

-आशीष खण्डेलवाल

नमस्कार,

हिंदुस्तान के सभी वाशिंदो .. खबरदार!!!




इस कार को ठीक से पहचान लीजिए। यह कार अगर आपके शहर, आपकी गली में दिखाई दी तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। यह कार आपका सुख-चैन छीन सकती है।

जी नहीं, मेरी गूगल कंपनी या इसकी कार से कोई दुश्मनी नहीं है। मैं तो बस आपको आगाह करना चाह रहा हूं। पिछले हफ्ते जब यह कार जब ब्रिटेन के बकिंघमशायर से गुजरी, तो वहां के लोगों ने इसका जमकर विरोध किया और उसके बाद इस कार को अपना काम किए बगैर ही लौटना पड़ा।

आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह कार ऐसा कौनसा काम करती है। दरअसल यह कार गूगल स्ट्रीट व्यू परियोजना का हिस्सा है। इस कार के ऊपर लगा कैमरा आपके शहर की हर गली की तस्वीरें खींचता है और उसके बाद इसे गूगल मैप के जरिए इंटरनेट पर डाल दिया जाता है। यह परियोजना भले ही अभी तक भारत में लागू नहीं हुई हो, लेकिन यह अमेरिका, ब्रिटेन, नीदलैंड्स, फ्रांस, इटली, स्पेन, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान में चल रही है। भारत भी इस परियोजना का अगला हिस्सा हो सकता है।

अब आप सोच रहे होंगे कि इस कार का विरोध आखिर क्यों किया जा रहा है। यह तो अच्छा है कि पूरी जानकारी इंटरनेट पर मुहैया हो जाएगी। अगर आप वाकई ऐसा सोच रहे हैं तो नीचे दिए गए वीडियो को देख लीजिए। आपकी राय बदल जाएगी।



अगले हफ्ते तक के लिए इजाज़त। आपका दिन शुभ हो..
-आशीष खण्डेलवाल ( तकनीकी संपादक )

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"मेरी कलम से"

-Seema Gupta
नमस्कार,





जिंदगी मे युं तो श्रम का अपना एक स्थान है, और सर्वोपरी है. यानि श्रम का कोई मुकाबला नही है. फ़िर भी अनेक बार सभी ने महसूस किया होगा कि कुछ बाते व्यवहारिक रुप से भी अगर उपर वाले पर छोड दी जायें तो ज्यादा हितकारी होती हैं.

एक बार एक लड़का अपनी माँ के साथ एक दुकान मे गया. दुकान दार ने छोटे प्यारे बच्चे को देखा तो उसने स्वाभाविक रुप से उसे टाफियों का डिब्बा दिखाया और कहा, लो बेटे इसमें से तुम अपनी पसंद की टाफ़ियां लेलो. लेकिन बच्चे ने नहीं टाफ़ियां नही ली.

दुकान दार ..बडा हैरान था की इतना छोटा सा बच्चा है और वह डिब्बे से टाफ़ियां क्यों नही ले रहा है?

उसने फिर से उसे ....लो बेटे टाफ़ियां खाओ.

अब माँ ने भी दुकान दार की बात सुन कर कहा कि, 'बेटा टाफ़ियां ले लो "

मगर बच्चे ने फिर भी नहीं ली...

दुकानदार ने देखा की बच्चा टाफ़ियां नही ले रहा है. तो उसने खुद ही अपने हाथॊं में भरकर टाफ़िया बच्चे के दोनों हाथो में और जेब मे भर दी.

अब बच्चा अपने दोनों हाथों और जेब में चाकलेट टाफ़ियां भरी देख कर बहुत खुश हुआ.

घर लौटते हुए माँ ने बच्चे से पूछा : 'तुम चाकलेट क्यूँ नहीं ले रहे थे जब दुकान दार ने लेने के लिए कहा था?'

क्या आप प्रतिक्रिया अनुमान कर सकते हैं: की बच्चे ने क्या कहा होगा ????

उस बच्चे, ने उत्तर दिया : 'माँ, मेरे हाथ बहुत छोटे हैं और यदि मैं अपने हाथों से टाफ़ियां ले लेता तो शायद एक या दो ही मेरे हाथ में आती लेकिन, तुम ने देखा ना की दुकान वाले अंकल ने अपने बड़े बडे दोनों हाथों से दिया तो मेरे दोनों हाथ और जेबे भी भर गये टाफ़ियों से ...!!!




सीख :



जब हम खुद लेते हैं तो कम मिलता है
लेकिन, जब भगवान - सर्वशक्तिमान, देता है
वह हमें हमारी उम्मीदों से कहीं अधिक देता है . ...


अब अगले सप्ताह फ़िर मिलते हैं तब तक के लिये इजाजत, नमस्कार.

-Seema Gupta संपादक (प्रबंधन)


आईये आपको मिलवाते हैं हमारे सहायक संपादक हीरामन से. जो तीन अति मनोरंजक टिपणियां छांट कर लाये हैं आपके लिये.

 

 




 

मैं हूं हीरामन

राम राम ! सभी भाईयों और बहनों को.


आज के प्रथम विदूषक का खिताब जाता है पुन: श्री योगिंद्र मौदगिल को..

 


 


 


योगेन्द्र मौदगिल

April 5, 2009 8:28 AM


 

हे खेती-बाड़ी वाले पाण्डेय जी, आपने कहा कि
"रामप्‍यारी, लगता है डॉक्‍टर के छोटे बाल देखकर तुम भी अपने पुलिस अंकल की तरह गच्‍चा खा गयी। अच्‍छी बच्‍ची, डॉक्‍टर लड़के की मां हैं। पुत्र पिता का ही थोड़े ही होता है, माता का भी तो होता है।"
आपने ने बाप की सारी मेहनत पर ट्यूबवैल की धार छोड़ दी. ताऊ तै पूछ ल्यो म्हारे हरियाणे मैं तो पुत्र पिता का भी होवै.... है तो हरियाणा मैं बी कल्चर की जगह एग्रीकल्चर पर इतनी कोनी जितनी आपने बता दी... सर म्हारी प्यारी रामप्यारी तो वैसे भी शाकाहारी है..


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My Photo

 

 

द्वितिय स्थान पर हैं :-

 

 

दीपक "तिवारी साहब"

April 4, 2009 5:43 PM

रामप्यारी तू ४२० है. और इतनी भी सीधी नही है जितनी लगती है. ये बिल्कुल सही है की तू सबको चालीस चक्कर लगवा के बेच आये.


अरे माताजी,  आपसे ऐसे सवाल की उम्मीद नही थी. खोपडी खाली हो गई. ये साथ मे लेडा डाक्टर नही बल्कि बल्की लेडी डाक्टर है और इस छोरे की अम्मा है.
अब जयरामजी की.


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और आज की तीसरी मनोरंजक टीपणि है हम सब की लाडली रामप्यारी की :

 


 

मिस. रामप्यारी

April 4, 2009 7:04 PM

 

@ तरुण अंकल

अंकल वो दोनो एक साथ ही घूम रहे थे. मैने अपने कानो से देखा और आंखों से ये बाते सुनी थी. इसमे कोई संदेह नही है. विद्द्या माता की कसम वो दोनो एक साथ ही घूम रहे थे. पक्का सौ प्रतिशत पक्का.


 

 

 

 

अब ताऊ साप्ताहिक पत्रिका का यह अंक यहीं समाप्त करने की इजाजत चाहते हैं. अगले सप्ताह फ़िर आपसे मुलाकात होगी. संपादक मंडल के सभी सदस्यों की और से आपके सहयोग के लिये आभार.


संपादक मंडल :- मुख्य संपादक : ताऊ रामपुरिया

विशेष संपादक : अल्पना वर्मा

संपादक (प्रबंधन) : Seema Gupta

संपादक (तकनीकी) : आशीष खण्डेलवाल

सहायक संपादक : बीनू फ़िरंगी एवम मिस. रामप्यारी

सहायक संपादक : हीरामन

ताऊ पहेली राऊंड २ अंक ६ का जवाब

प्रिय बहणों,  भाईयो, भतीजियों और भतीजों आप सबका ताऊ की रविवारीय क्लास मे  घणा स्वागत है. कल की पहेली का सही जवाब था कामाख्या मंदिर गौहाटी (आसाम).   जिसके बारे मे कल सोमवार की ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे विस्तार से बता रही हैं सु अल्पना वर्मा.

 

 

 

maa-kamakhya-temple-way                                              मां कामाख्या मंदिर को जाने वाला रास्ता

 

 

इस विषय पर हमारे कुछ पाठकों ने भी अपने विचार और अनुभव हमे भेजे हैं जो हम इसी अंक मे छाप रहे हैं. हम पाठकों से एक निवेदन और करना चाहेंगे कि वो विषय पर हमें अपने निजी अनुभव और सम्स्मरण भेजे तो यह ज्यादा उपयुक्त होगा. क्योंकि जो सामग्री नेट से अंगरेजी मे कट-पेस्ट करके भेजी जायेगी वो हम प्रकाशित नही कर पायेंगे.

 

और हम चाहते हैं कि आप उस जगह के बारे मे आपके या आपके परिचितों के निजी अनुभवों से हमारे पाठकों को  परिचित कराये. जैसे की पिछले अंक मे श्री महावीर जी ने माऊंट आबू पर लिखे थे.

 

अब हम आज का रिजल्ट जानने  के लिये  आपको बीनू फ़िरंगी के पास लिय चलते हैं.

 

 

ताऊ रामपुरिया की तरफ़ से आपको बहुत  घणी रामराम.

 

 

 

 

 

binu-firangiआदर्णीय देवियों और सज्जनों, ताऊ के भाइयो, बहणों, भतीजियों और भतीजो, समस्त संपादक मंडल के सदस्य गणों,   आप सबको बीनू फ़िरंगी का सादर प्रणाम.

 

और मिस रामप्यारी को विशेष रामराम.

 

ताऊ पहेली राऊंड –२ के पांचवें अंक का रिजल्ट घोषित करते हुये मुझे  अपार हर्ष हो रहा है. और मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि मुझे ये मौका आज फ़िर  मिला. और जब तक ताऊ चाहेगा आगे भी मिलता रहेगा.

 

कई लोग हमसे पूछते हैं कि रामप्यारी को विशेष रामराम क्युं? तो रामप्यारी हमारे परिवार मे सबसे छोटी है और घर मे सबकी लाडली है तो उसको तो विशेष रामराम करनी ही पडती है, वर्ना वो कब हमारे बोरिया बिस्तर गोल करवादे इसका पता नही है. वो बहुत तेज खोपडी है.

 

तो आईये अब चलते हैं रिजल्ट की तरफ़ :-  हमारी इस पहेली का सही जवाब है मा कामाख्या मंदिर

गौहाटी आसाम.  और इस विषय पर विस्तृत जानकारी  कल के अंक मे पत्रिका की विशेष संपादक सु.अल्पना वर्मा दे रही हैं.

 

 

 

सर्वाधिक अंक प्रात किये १०१


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घणी बधाई प्रथम स्थान के लिये. .सुश्री Parul

तालियां..... तालियां..... तालियां..... जोरदार  ….  तालियां

विशेष बधाई….

 

 

 

 

आज की उप विजेता  अंक १०० के साथ बधाई


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सुश्री सीमा गुप्ता

 

 


 

आज के तृतिय विजेता अंक ९९ के साथ ...बधाई


shubham


श्री शुभम आर्य

 

 

 

आईये अब अन्य माननिय विजेताओं के बारे में  क्रमश:  जानते हैं. सभी को हार्दिक बधाई.

 

 


वरुण जायसवाल

अंक ९८
 

 HEY PRABHU YEH TERA PATH अंक ९७

 आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) अंक ९६

 Udan Tashtari अंक ९५

 संजय तिवारी ’संजू’ अंक ९४

 मुसाफिर जाट अंक ९३

 दीपक "तिवारी साहब" अंक ९२

 Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" अंक ९१

 प्रकाश गोविन्द अंक ९०

 

नितिन व्यास  अंक ८९

 makrand   अंक ८८


 हिमांशु । Himanshu  अंक ८७

 दर्पण साह 'दर्शन' अंक ८६

सतीश चंद्र सत्यार्थी  अंक ८५

 दिलीप कवठेकर अंक ८४

 

 

 

 

 

 

 

इसके अलावा निम्न महानुभाओं ने भी इस पहेली अंक मे शामिल होकर हमारा उत्साह बढाया. जिसके लिये हम उनके हृदय से आभारी हैं.

 

श्री रतन सिंह शेखावत,  डा.रुपचन्द्र शाश्त्री मयंक,  श्री दिनेश राय द्विवेदी,  श्री अरविंद मिश्रा, 

 

श्री संजय बैंगाणी,  श्री आलोक सिंह,  श्री पंकजरागो,  डा. मनोज मिश्रा,  श्री अंतर सोहिल,  श्री राज भाटिया, 

 

श्री दिगम्बर नासवा,  श्री सैयद अकबर,  श्री महाभारत,  श्री PD,  श्री नरेश सिंह राठोड,  सुश्री लवली कुमारी,

 

डा. भावना,  श्री तरुण ,  श्री योगिंद्र मौदगिल.  मदारी और सुश्री सोनिया.

 

 

आप सबका बहुत बहुत आभार..

 

 

 

 

अब आईये रामप्यारी की क्लास में:-

 

 

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रामप्यारी की क्लास मे :-

आप सबको रामप्यारी की घणी नमस्ते.

 

अब आप पूछेंगे की रामप्यारी आज तेरे को क्या होगया? तू घणी नमस्ते क्युं कर रही है? तो सच्ची बात तो ये है कि मुझे खुद नही मालूम कि घणी का मतलब क्या होता है? वो तो ताऊ घणी रामराम बोलता है तो मैने सोचा कि ये भी कोई अच्छी चीज होती होगी, सो मैने भी घणी नमस्ते बोल दिया.

 

अब कल का सवाल तो बिल्कुल आसान था. तभी तो काजल अंकल ने आते ही फ़टाक से जवाब दे दिया कि “रामप्यारी, तुझे पता नहीं कि डॉक्टर उस लड़के की माँ है ?”

 

अरे अंकल मुझे पता था तभी तो पूछा था मैने. ही..ही..ही..ही..काजल अंक आज बोनस सवाल के प्रथम विजेता रहे हैं बधाई…..

 

 

अब उपविजेता अशोक पांडे अंकल आकर बोले “रामप्‍यारी, लगता है डॉक्‍टर के छोटे बाल देखकर तुम भी अपने पुलिस अंकल की तरह गच्‍चा खा गयी। अच्‍छी बच्‍ची, डॉक्‍टर लड़के की मां हैं। पुत्र पिता का ही थोड़े ही होता है, माता का भी तो होता है।”


अरे अंकल जी मुझे आज ही मालूम पडा..ही..ही..ही…ही……

फ़िर तीसरे विजेता आये आशीष अंकल और आते ही बोले “रामप्यारी.. वो जो डॉक्टर है ना वो आंटी है.. और वो उस लड़के की मां है.. पिता नहीं.. लड़के को तो बेटा ही कहेंगी न वो... वैसे आज ताऊजी और अल्पना जी ने पहेली में बहुत ही मुश्किल सवाल पूछा है.. प्लीज़ क्लू दो ना...“

देखा ना अंकल..मैने आपके मांगते ही हिंट दिया था…अब आप मेरे लिये दो जींस वाली पैंट..एक सलवार सूट और चाकलेट का डिब्बा भिजवा देना..


इसके बाद नितिन व्यास अंकल,  उडनतश्तरी अंकल, संजय तिवारी संजू अंकल, और प्रकाश गोविंद अंकल आये और बिल्कुल सही जवाब दे दिये.

और फ़िर आज सीमा आंटी तो बहुत ही परेशान हुई…फ़िर भी जवाब देकर ही मानी..मजा आया ना आंटी अबकी बार? ही…ही..ही…ही… अरे आंटी अब मेरे दांत ही मत तोड देना…अगली बार बिल्कुल उल्टा सवाल पूछूंगी…

फ़िर मकरंद अंकल और दीपक तिवारी अंकल तो बहुत ही हैरान परेशान हुये पर दे दिया जवाब उन्होने ने भी. बधाई अंकल.

फ़िर गगन शर्मा अंकल और इसके साथ ही शाश्त्री अंकल आये और बोले “

 

मेरे प्रिय ताऊजी,
आज दौडतेभागते लिख रहा हूँ अत: मन भर के लिख न पाऊंगा.
हां रामप्यारी से जरा पूछ लें कि क्या सिर्फ पुरुष योनि में जन्मे हुए लोग ही डाक्टर बन सकते हैं??


अरे अंकल आप तो पहली बार मे ही सही ताड गये…ही..ही..ही…थैंक्यु अंकल.

इसके बाद अनुराग अंकल (स्मार्ट ईंडियन) ने भी बिल्कुल फ़टाक से जवाब दिया. फ़िर दर्पण शाह दर्पण अंकल और सोनिया आंटी ने सही जवाब दिये.

और सबसे आखिर मे सही जवाब लेकर आये दिलिप कवठेकर अंकल और सतीश चंद्र सत्यार्थी अंकल.

आप सबके अकाऊंट मे मैने तीस तीस नम्बर जमा करवा दिये हैं. आप सबका आभार और अब रामप्यारी अगले शनीवार आपसे मिलेगी एक नये बोनस सवाल के साथ. तब तक के लिये अलविदा.


 

 

कुछ पाठको के विचार :-

 

 



mahaveer

                                                     हे प्रभु यह तेरापन्थ

                                              महावीर बी सेमलानी " भारती'





HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

 

 

यौन इच्छा कि हिंदू देवी.Kamakhya का यह मन्दिर है। यह जगह 51 सती पीठ में से एक है, बहिष्कार के दौरान जहां सती की लाश कई भागों मे पृथ्वी पर गिरी उस मे से एक भाग यह भी जहॉ यह मन्दिर है।

 

(This place is one of the 51 satipithas, i.e., places where parts of Sati's corpse fell to Earth during dismemberment by Vishnu (Sati being the wife of Shiva who had committed suicide after she and her husband were insulted by her father). This is the place where her yoni (vulva) fell, and this temple is sacred to Kamakhya, the Hindu goddess of sexual desire. )

 

कामाख्या मन्दिर भारत का सबसे महत्वपुर्ण तान्त्रिक सेन्टर है।

 

इस मंदिर कि संरचना काफी बड़ी है. सबसे पुराना हिस्सा कई छत्रक के साथ एक संरचना-गुंबदों आकार का है. देवताओं के carvings के साथ कई लंबा कॉलम हैं. इस पुराने ढांचे से बढ़ा एक नया एक है, जो चारों ओर पैनलों जिसमें गणेश सहित विभिन्न हिंदू देवताओं और भगवान है।. वहाँ कबूतरों के झुंड, को तीर्थयात्रियों चुगा डालते है ।

 

जहां उसे (योनी) गिर पड़ा, और यह मंदिर yoni की जगह है Kamakhya के लिए पवित्र है, ताऊ पहेली मे जो फोटु दिखा रहे है वह Kamakhya मन्दिर का अन्दर से बहार जाने का रास्ता है।






prakash-govind1

                                                         प्रकाश गोविन्द said...

 

 

कामाख्या मंदिर :


कामाख्या मंदिर असम की राजधानी गुवाहाटी मे है ! यह मंदिर शक्ति की देवी सती का
मंदिर है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है व इसका तांत्रिक महत्व है।

 

प्राचीन काल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र सिद्धि का सर्वोच्च स्थल है। पूर्वोत्तर के मुख्य द्वार कहे जाने वाले असम राज्य की राजधानी दिसपुर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नीलांचल अथवा नीलशैल पर्वतमालाओं पर स्थित मां भगवती कामाख्या का सिद्ध शक्तिपीठ सती के इक्यावन शक्तिपीठों में सर्वोच्च स्थान रखता है।

 

यहीं भगवती की महामुद्रा (योनि-कुण्ड) स्थित है। सती स्वरूपिणी आद्यशक्ति महाभैरवी कामाख्या तीर्थ विश्व का सर्वोच्च कौमारी तीर्थ भी माना जाता है। इसीलिए इस शक्तिपीठ में कौमारी-पूजा अनुष्ठान का भी अत्यंत महत्व है। यद्यपि आद्य-शक्ति की प्रतीक सभी कुल व वर्ण की कौमारियाँ होती हैं। किसी जाति का भेद नहीं होता है। इस क्षेत्र में आद्य-शक्ति कामाख्या कौमारी रूप में सदा विराजमान हैं।
इस क्षेत्र में सभी वर्ण व जातियों की कौमारियां वंदनीय हैं, पूजनीय हैं। वर्ण-जाति का भेद करने पर साधक की सिद्धियां नष्ट हो जाती हैं।

 

 

 

 

अच्छा अब नमस्ते. कल सोमवार को ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे आपसे पुन: भेंट होगी.

 

सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. इस दुसरे राऊंड की छठी  पहेली का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया.

 

संपादक मंडल :-

 

मुख्य संपादक : ताऊ रामपुरिया

 

विशेष संपादक : अल्पना वर्मा

 

संपादक (प्रबंधन) : seema gupta

 

संपादक (तकनीकी)  : आशीष खण्डेलवाल

 

सहायक संपादक : बीनू फ़िरंगी एवम मिस. रामप्यारी

 

सहायक संपादक : हीरामन