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इब रामराम.
ताऊ की शोले (एपिसोड - 7)
लेखक और एपिसोड निर्देशक : समीरलाल "समीर" और ताऊ रामपुरिया
गब्बर को बड़ी मुश्किल से ठाकुर घेर घार के ब्लॉगिंग में लाये थे. धीरे धीरे गब्बर का मन भी रमने लगा था ब्लॉगिंग की दुनिया मे. जंगल में छिप छिप कर अड्डा चलाते चलाते वो भी थक गया था.
सांभा ने भी पुलिस की मार से बचने के लिए जंगल में सेफ पहुँचने तक अपना नाम बदल कर सांभा 'सज्जन' रख लिया और गब्बर ने अपना ब्लॉग पासवर्ड से प्रोटेक्ट कर लिया. नाम बदलने के बाद भी सांभा की लड़कपने की आदत तो थी ही तो सांभा लड़कपना करते करते जंगल की तरफ चले जा रहे थे. गब्बर उसके लड़कपने पर उसे समझाने की बजाये कभी उसे और लड़कपना करने के लिए उकसाता तो कभी ताली बजा कर हौसला अफजाई करता तो कभी सिर्फ मुस्करा देता लेकिन रोकता कभी नहीं.
अंत में : - मैं इस बात के लिये क्षमायाचना चाहता हूं कि ताऊ की शोले में ज्यादा मदद नहीं कर पाया बस, यही एक स्क्रिप्ट लिख पाया हूँ. ताऊ की शोले- २ में मैं वादा करता हूं कि ज्यादा से ज्यादा लिखने की कोशीश करुंगा. इसमे आप लोगों द्वारा की गई गई सराहना और उत्साह वर्धन के लिये आपका आभार व्यक्त करता हूं.
-समीरलाल "समीर"
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इब खूंटे पै पढो:- सांभा : सरदार अगर वाहवाही नही दी तो..इस झील मे डुबकर प्राण दे दूंगा....!!! गब्बर : अरे नही सांभा..तू तो मेरा प्रिय चेला है....तुझे डुबने थोडे ही दूंगा, भले मैं ही डूब जाऊं...तू चालू रह...!!! वाह..वाह...वाह..वाह..क्या खूब...सांभा...जीता रह..क्या मौलिक तान छेडी...पानी में जले..तेरा गोरा बदन..पानी में... जियो मेरे लाल…पानी मे और जलाओ…शाबास… कालिया : सरदार...ये गलत बात है...उडाये हुये...माल पर वाह वाह...ये पक्षपात है...मैं नही रुक सकता यहां पर...सरदार सांभा का नही हमारा बदन गोरा है...सांभा तो काला कलूटा बैंगन लूटा है...अगर इसे मौलिक गाना है तो गाये...पानी में जले मेरा काला बदन..पानी में...गोरा बदन क्यों जलवा रहा है ये? गब्बर : अरे ओ कालिया खामोश..वर्ना तेरी खुपडिया में सारी की सारी गोलियां उतार दूंगा…..खबरदार जो मेरे सांभा के लिये कुछ भी कहा तो ..अब सांभा की इच्छा गोरा बदन जलाने की है तो गोरा ही जलेगा...समझा ना? सरदार से जबान लडाने का नही...बोल दिया अपुन ने तो बोल दिया..समझा क्या? कालिया : ठीक है सरदार..अब तुम और तुम्हारा सांभा ही गिरोह चला लेना…...हमको तो मालूम था कि ग्रहों की चाल ही कुछ टेढी मेढी हो गई है...और यों भी चारों तरफ़ हल्ला मचा है कि ब्लाग जगत आजकल ग्रहों की मार मे पडा है. शनि की वक्र दृष्टी का शिकार है और रोज एक दो पोस्ट तक इस पर लिखी जा रही हैं. गब्बर : कालिया...ज्यादा बोलने का नईं...अपुन सब समझ गयेला है...तू होशियारी मत दिखा...तू किस के साथ मिल गयेला है? अपुन को सब मालूम है...जब दूर दूर समन्दर पार तक किसी पकड का पता नही चलता है तो लोग कहते है कि गब्बर सरदार उठा ले गया होगा...... कालिया : सरदार बात को समझा करो...और इस चेला मोह से बाहर निकल कर किसी योग्य पंडित से झाड फ़ूंक कराओ .. सरदार एक बार और सोचलो..कुछ पूजा पाठ और दान दक्षिणा के साथ मिष्ठान्न भोजन करवा दो ब्लागरों को...वर्ना ये शनि नही उतरेगा तुम्हारे सर से..और बिना शनि उतरे डकैती और पकड करना बडा मुश्किल है....और कालिया व्यंगात्मक हंसी हंसकर अपना बैग वहां से जाने के लिये कंधे पर डाल लेता है और गब्बर अपने नथुने फ़ुलाता हुआ कुछ गंभीर मुद्रा अख्तियार कर लेता है....और अचानक पिस्तौल उठाकर पूछ बैठता है...अरे ओ सांभा..कितने आदमी थे रे.. ऊहां? सांभा : सरदार पूरे के पूरे ... ३६..... गब्बर : हूंSSSS....पहले ३ थे... अब ३ पर ६ आके बैठ गये...और पूरे ३६...बहुत ना इंसाफ़ी है रे कालिया... (गब्बर सरदार गुर्राकर बोला) और कालिया की रुह कांप जाती है....गोलियों की आवाज...ठांय..ठांय..ठांय... गोलियां किस पर चली? कालिया जिंदा बचा या गया ऊपर..? ये सब जानने के लिये इंतजार किजिये..ताऊ की शोले - भाग २ का.... |
ताऊ की शोले (एपिसोड - 6)लेखक : ताऊ रामपुरिया और अदा,एपिसोड निर्देशक : ताऊ रामपुरिया और अनिता कुमारसगीत निर्देशक : दिलिप कवठेकरइस एपिसोड से बसंती का रोल कर रही हैं "अदा"
बसंती फरारी में भेष बदलकर इधर से उधर छुपती फिर रही है. उसे पुलिस शिकारी कुत्ते कि तरह ढूंढ़ रही है. बसंती को रामपुर के इलाके से निकलना बहुत ज़रूरी है. खेतों से छुपते छुपाते वो सड़क पर आ जाती है......दूर दूर तक कोई वहां नज़र नहीं आ रहा है. कड़कती दोपहरी है और सुनसान सड़क कोई गाड़ी-छटका नहीं दिख रहा है.
धन्नों भी थक गई है. बसंती ने उसे अपने कांधे पर बैठा लिया है और चली जारही है. तभी एक पेड की छांव में आड लेकर वो अपना मोबाईल निकाल कर सांभा को फ़ोन लगाकर बात करती है..
इधर बसंती भरी दोपहर की गर्मी में चली जारही है.......तभी दूर से एक ठो मोटर साईकिल दिख रहा है. बसंती हाथ का अंगूठा दिखा कर रोकती है.. एक लड़का चला रहा था मोटर साईकिल... बसंती को देख कर रोक देता हैं.लड़का : क्या बात है मैडम कोनो दिक्कत है का ?
इतने में एक बकरी का बच्चा दौड़ता हुआ आता है और बसंती कि गोद में चढ़ जाता है ...लड़का : अरे इ बकरी का बच्चा कौन है मैडम ? इसका का काम ?
बसंती धन्नो के साथ मोटर साईकिल में पीछे बैठ जाती है..रस्ते में धन्नो के कान में बसंती कुछ कहती है,,, और धन्नो लड़के का कान कुतरने लगती है.....लड़का बहुत परेशां हो जाता है.
लड़का उतरता है, बसंती मोटर साईकिल स्टार्ट करती है धन्नो को सामने 'बिठाती' है और इसके पहले की लड़का पीछे बैठे मोटर साइकिल लेकर भाग जाती है ..लड़का चिल्लाता रहता है 'अरे रोको'..अरे मेरी बाईक उडा ले गई रे....कोई तो रोको...अरे मैं लुट गया रे...
ताऊ की शोले (एपिसोड - 5)
आप पहले पढ चुके हैं कि कालिया रेल्वे टेशन बसंती के साथ गया था गोला बारुद की खेप लेने..वापस लौटते मे पुलिस मुठभेड मे कालिया अरेस्ट होकर जेल पहुंच गया..तांगा और धन्नों गोला बारुद सहित जब्त होगये..बसंती किसी तरह भागने मे कामयाब होगई थी जिसका अभी तक पता नही चला. अब आगे पढिये........
जेलर ने उसको अपने पीछे आने का इशारा किया और तेजी से अपने आफ़िस की तरफ़ बढ गया.जेलर - हरीराम...तुमने कालिया को मुझसे यहां आकर मिलने को कह दिया कि नही?
जेलर साहब अपने आफ़िस में पांव मेज पर रख कर पीठ कुर्सी पर टिकाये बैठे हैं....डण्डा मेज पर रख दिया है..हरीराम कुर्सी के पीछे आकर उनके सर पर चंपी मालिश कर रहा है. और कालिया की तरफ़ देखकर कुटिल हंसी हंस रहा है.
इतनी देर मे कालिया अंदर प्रवेश करता है.कालिया : नमस्ते जेलर साहब....मुझे क्युं याद फ़रमाया था हुजुर?
जेलर सांभा का नंबर लगाकर कालिया को देता है...उधर फ़ोन गब्बर उठाता है..पर कालिया समझ रहा है कि वो सांभा से बात कर रहा है.
कालिया को अब समझ आया कि उसने सांभा समझ कर गब्बर से बात करली और डरता हुआ अपनी बात सुधारने की गरज से बोला....कालिया - सरदार...अरे सरदार सुनो तो..हम तो ऊ जरा जेलर को बेवकूफ़ बना रहे थे सरदार..हम आपसे कैसे गद्दारी कर सकते हैं? सरदार...हम तो आपका जन्मों से नमक खाये हैं सरदार...हमें माफ़ करो सरदार...
ताऊ की शोले (एपिसोड - 4)
पिछली बार आपने पढा : कालिया और अपना माल छुडवाने के लिये गब्बर और सांभा वापस ठाकुर की हवेली में लौट आते हैं. जहां ठाकुर उनको ब्लागिंग ब्लागिंग खेलता हुआ मिलता है. गब्बर द्वारा यह कहने पर कि वो और सांभा थोडे दिन ठाकुर की हवेली पर पुलिस से छुपकर रहना चाहते हैं. ठाकुर ने सांभा को घोडे लेकर कहीं और जाने का कहा. क्युंकि पुलिस घोडे की लीद सूघ कर उनको यहां ढुंढने आ सकती थी. और सांभा वहां से अपने घोडे पर सवार होकर गांव में मौसी के घर जा पहुंचता है. मौसी ने उसको बडे प्यार से खाना खिलाया और दोनों बातें करने लगे. अब आगे पढिये...मौसी : अरे सांभा...वो गब्बर नही आया बहुत दिनों से?
मौसी आंखे बडी करके कहती है : वो कैसे ?सांभा : अरे मौसी, अब देखो, डाका डालना हो तो पहले खबरी का खर्चा, फ़िर कम से कम दस घोड़े का खर्चा, एक एक घोड़ा, साठ सत्तर हजार का आता है, फ़िर घास भी कित्ती मंहगी हो रेली है आजकल, आदमियों का खर्चा सो अलग, और फ़िर पुलिस का खटका हुआ तो उल्टे पैर भाग लेते है, कित्ता लुकसान हो जाता है, समझ रही हैं न ?
अब मौसी ने लठ्ठ हाथ मे ऊठाया और सांभा पर तानते हुये बोली - देख बचूआ..तू हमका सही सही बता वर्ना आज तेरी हड्डी पसली हम तोड ताड के रख देंगे..
ताऊ की शोले (एपिसोड - 3)लेखक : ताऊ रामपुरिया और अनिता कुमारएपिसोड निर्देशक : अनिता कुमार
ठाकुर अपनी हवेली के बाग में झूले पे बैठा है, आखें लैपटॉप पर गड़ी, उंगलियां ऐसे चल रही है मानो लैपटॉप न हो पियानो हो, होठों पे गीत है बाप्पी दा इश्टाईल में:
गब्बर भी घोड़े से उतर कर नाचने लगता है।
लेकिन ठाकुर जब लैपटॉप के साथ हों ( यानी कि अपनी दूसरी रानी के साथ, ठकुराइन लैपटॉप को अपनी सौत जो कहती है) तो अपना मूड किसी को खराब करने की परमिशन नहीं दे सकते, लेकिन गब्बर दोस्त है, उसे कह भी नहीं सकते थे ‘तख्लिया’ इस लिये गीत बदल लिये..
ठाकुर झूम कर गा रहे है....
( गब्बर चुपचाप अनमना सा बैठा रहता है, ठाकुर का मूड उखड़ रहा है, वो कहता है)
(गब्बर गाने लगता है)
ठाकुर मुस्कुराता है

ताऊ की शोले (एपिसोड - 2)लेखक : ताऊ रामपुरिया और अनिता कुमारएपिसोड निर्देशक : अनिता कुमार
