पीछले कुछ दिनों से आपने देखा होगा कि इन्होने सबको थर्र्रा रखा है. और सही है नंगे के नौ ग्रह बलवान. उडनतश्तरी जी तो इतने भयभीत हो गये कि "बाबा समीरानंद आश्रम में" इनके नाम की सुबह शाम आरती ही शुरु होगई है. आप भी पहुंचिये वहां जाकर आरती मे शामिल हो कर प्रसाद लिजिये.
ॐ जय बिन नामी देवा, स्वामी जय बे नामी देवा
तुमको पकड़ न पाये, गुगल की सेवा.
ॐ जय बिन नामी देवा....
यह आरती भी चेचक के टीके की तरह असरकारक हो सकती है. तो जल्दी किजिये वर्ना फ़िर कहेंगे कि आपको खबर ही नही थी और आप भी कहीं आजावो लपेटे मे.
आप सोच ही सकते हैं कि कितना परेशान सब हो रहे हैं. जैसे बारिश के लिये सभी बाबा लोग यज्ञ हवन पूजन शुरु कर देते हैं उसी तरह सभी आश्रमों मे अनाम / अनामिकाओं के इलाज के लिये उपाय शुरु हो गये हैं. राज भाटिया जी ने तो पूरा वैज्ञानिक खोजतंत्र ही शुरु कर दिया. अब शाश्त्री जी का फ़ोन आया ताऊ के पास. और ताऊ से जब राय मांगी गई तो ताऊ बला - इन अनाम अनामिकाओं को पकडने का काम हमारे लिये तो बांये हाथ का खेल है.
शाश्त्री जी बोले - यार ताऊ तुम तो वाकई कोरे हरयाणवी लठ्ठ ही हो? अरे क्या जब हमारी बारात निकल जायेगी तब पकडोगे?
ताऊ बोला - बात ऐसी है कि इसके लिये शमशान साधना करनी पडेगी. अब तक राज भाटिया भी आ चुके थे. वो बोले ताऊ करो जरुर करो.
ताऊ बोला - श्मशान साधना अकेले से नही होगी. साथ मे तुम दोनों को भी चलना पडेगा नहा धोकर और बाबाजी बनकर एक तांत्रिक अनुष्ठान करवाना पडेगा. तब देखना - अनुष्ठान पुर्ण होते होते वो अनाम कुमार या अनामिका कुमारी वहां खुद चल कर आजायेगे. और माफ़ी मांगेंगे..पर हम उसे बोतल मे बंद करके दरिया में डाल देंगे.
अब राज भाटिया जी और शाश्त्री जी इन दकियानुसी बातों मे विश्वास नही करते थे. पर क्या करें? डर के मारे दोनो ने आपस मे विचार विमर्श किया और यह समझा कि लगता है ताऊ इस बहाने हमसे कुछ रुपया पैसा वसूल करेगा. बाकी इन तांत्रिक अनुष्ठानों से कुछ होने वाला नही है. दोनों ने आकर ताऊ से पूछा - इस अनुष्ठान मे खर्च कितना आयेगा?
ताऊ बोला - अरे यारों , आपने मुझे हमेशा के लिये ही ऊठाईगिरा समझ लिया क्या? अरे ठीक है मैं कभी कभी चोरी बेईमानी डकैती कर लेता हूं पर ब्लाग जगत से ऐसा नही कर सकता . खर्चा सब मेरे जिम्मे. बस अगर आप लोगों का काम हो जाये तो आश्रम मे सब लोग मिलकर जितना चाहो लगा देना. पर काम होने के बाद.
तो अब तीनों तैयार होकर यानि बाबा बनकर दुसरे दिन अमावस को श्मशान मे आधी रात को पहुंच गये. गीदडों की हुआं..हुआं की डरावनी आवाज....के बीच तीनों महातपस्वी बाबा पहुंच गये शमशान साधना के लिये. महाबाबाश्री ताऊ आनंद के आचार्यत्व मे अनुष्ठान करवाने के लिये. और क्या करें? आखिर ब्लाग जगत को तबाही से बचाने का भारी बीडा जो ऊठा लिया था.
बाबा श्री ताऊ आनंद ने हवन मे नमक मिर्च लोबान की पहली ही आहुति डाली तो भाटिया जी और शाश्जीत्री को खांसी छुट गई पर बाबाश्री ने बीच मे बोलने को मना किया हुआ था. और ताऊ बाबा ने उनको सब विधी समझा कर अनुष्ठान चालु कर दिया.
ताऊ बाबा - खट स्वाहा: स्वाहा ..स्वाहा..खट खटाखट आहा.
बाबा भाटिया - ला पकड ला अनाम और अनामिका फ़ट फ़टाफ़ट स्वाहा...
बाबा शाश्त्री - पी जहर का घूंट गट गटागट स्वाहा..
तीनों बाबाओं का सम्मिलित स्वर : हाजिर कर..अनाम/अनामिका को... टपा टप.. शमशान भवानी...डाकिनी..काकिनी..जय श्मशान माई...जल्दी कर..बुला..बुला..फ़ट स्वाहा..स्वाहा..स्वाहा..आहा...
बाबा ताऊ : जल्दी प्रकट होजा...वर्ना मारुंगा चांटा..चट चटाचट स्वाहा..
बाबा भाटिया : मार ही दे ताऊ पट पटापट स्वाहा..
बाबा शाश्त्री : कुछ आवाज आई ठक ठकाठक स्वाहा..
तीनों बाबाओं का सम्मिलित स्वर : हाजिर कर..अनाम/अनामिका को... टपा टप.. शमशान भवानी...डाकिनी..काकिनी..जय श्मशान माई...जल्दी कर..बुला..बुला..फ़ट स्वाहा..स्वाहा..स्वाहा..आहा...
तीनों बाबाओं का सम्मिलित स्वर : हाजिर कर..अनाम/अनामिका को... टपा टप.. शमशान भवानी...डाकिनी..काकिनी..जय श्मशान माई...जल्दी कर..बुला..बुला..फ़ट स्वाहा..स्वाहा..स्वाहा..आहा...
और इस तरह तीनों विभुतियों ने अपने प्राणों कि बाजी लगाकर तांत्रिक अनुष्ठान शुरु कर दिया..तीनों के सम्मिलित स्वर मे गजब का तांत्रिक अनुष्ठान चल रहा था. फ़ट फ़टाफ़ट स्वाहा ....गट गटागट स्वाहा.... चट चटाचट स्वाहा.. ओम गटागट आहा...स्वाहा...
....... फ़ट फ़टाफ़ट स्वाहा ....गट गटागट स्वाहा.... चट चटाचट स्वाहा......... फ़ट फ़टाफ़ट स्वाहा ....गट गटागट स्वाहा.... चट चटाचट स्वाहा.
....... फ़ट फ़टाफ़ट स्वाहा ....गट गटागट स्वाहा.... चट चटाचट स्वाहा. ....... फ़ट फ़टाफ़ट स्वाहा ....गट गटागट स्वाहा.... चट चटाचट स्वाहा.
अब भाटिया जी अचानक चिल्लाये..ताऊ बाबा देखो जरा कोई कट कटाकट स्वाहा..करता हुआ आरहा है. अब ताऊ बाबा आनंद बोले - अरे भाटिया जी..आपने अनुष्ठान के बीच मे बोल कर सारा अनुष्टान ही खराब कर दिया.. बीच मे नही बोलना चाहिये था. अब अगली अमावस पर फ़िर से आकर करना पडॆगा.
शाश्त्री जी बोले - तो ताऊ अगली अमावस तो एक महिना बाद आयेगी?
ताऊ - तो क्या हुआ ? जब तक अनाम कुमार और अनामिका कुमारी को मजे लेने दो. तब तक हम साधना करके अपनी शक्ती बढायेंगे.
भाटिया जी - मुझे मालुंम था ताऊ. तुम ऐसा ही कोई दोष मेरे मत्थे लगाओगे और उनको पकडने नही दोगे.
ठीक है ताऊ अब तुम करते रहना अपना अनुष्ठान..मैं तो अरविंद मिश्रा जी के पास बनारस जारहा हूं वहीं वैज्ञानिक विधि से खोज बीन करुंगा.
अब किसी को अगली बुधवारी अमावश को अनुष्ठान मे शामिल होना हो तो सूचना देवे. हमको विश्वस्त भक्तों की नितांत आवश्यकता है.
और चलते चलते पुछल्ला यह है कि पुरुषों को अब चुगलखोरी के रस का पान करने की आदत डाल लेनी चाहिये. भाईयों उठो जागो और इस पर महिलाओं का एकाधिकार तोड दो. आज यही आपकी सबसे बडी जरुरत है. इस रस के पान से बडी अनन्य तृप्ति प्राप्त होती है यह सु. शेफ़ाली पांडे तो आज कह रही हैं किंतु हरीशंकर जी परसाई वर्षों पहले कह गये हैं. अगर फ़ुरसतिया जी अमेरिका से भारत आये हुये हों तो वो भी इस बात का समर्थन करेंगे.
और अब देखिये यह प्रसिद्ध हरयाणवी लोक गीत, जिसे परफ़ोर्म कर रही हैं प्रसिद्ध रशियन कत्थक नृत्यांगना सुश्री स्वेतलाना निगम. और फ़िर इस गीत को सुन देख कर ताजा दम होकर अनाम /अनामिकाओं की आत्मा की शांति के लिये प्रार्थना किजिये. क्युंकि अगली अमावस को तो बाबाश्री उसको पकड ही लेंगे और बोतल मे बंद करके दरिया मे बहा देंगे.