इस उपलक्ष में ताऊ के भतीजे श्री ललित शर्मा जी ने एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया जो कि सुबह के सत्र मे हुआ. जहां अनेक गणमान्य दोस्तों ने अपनी रचनाएं पढी.
अन्य रचना कारों की कविताओं का आनंद आप आने वाले दिनों मे लेते रहेंगे.
शाम के सत्र मे मुशायरे का आयोजन हुआ जिसमे महान गजलकारा मिस समीरा टेढी जी ने अपने गजल गायन से सभी को अभीभूत कर लिया.
अब मैं आपको सीधे ताऊ थियेटर में ले चलता हूं. जहां पर श्री ललित शर्मा जी अपनी रचना प्रस्तुत करने जा रहे है. तो आईये अब सीधे ताऊ थियेटर में आज का प्रोग्राम देखने चलते हैं. उम्मीद है आपको बहुत पसंद आयेगा.
यह दोनों ही कार्यक्रम ताऊ थियेटर्स के सजे धजे हाल में संपन्न हुये. तो अब मैं आमंत्रित करता हूं श्री ललित शर्माजी को. वो आयें और अपनी रचना सुनायें.
बहणों और भाईयो, यह अत्यंत खुशी का मौका है और अब मैं इस अवसर पर ताऊ वंदना से इस कार्यक्रम की शुरुआत करता हूं.
हास्य व्यंग के तुम हो रसिया हास्य रस की भेंट धरें
ब्लाग की सेवा सुन ताऊ देवा हाथ जोड वंदना करें॥
गुण के आगर हास्य के सागर टिप्पणी के भंडार भरें
बांट बांट के सबको खुशियां जगती का क्ल्याण करें
ब्लाग की सेवा सुन ताऊ देवा हाथ जोड वंदना करें॥
बीनू फ़िरंगी औ रामप्यारे जी तेरे कारज सिद्ध करें
रमलू सियार औ रामप्यारी भी शरण तेरी हैं आन परें
ब्लाग की सेवा सुन ताऊ देवा हाथ जोड वंदना करें॥
जब जब भीर पडे भक्तों पर हीरामन आय सहाय करें
ज्योतिष पढके भाग्य बांचके नित तेरा ही ध्यान धरें
ब्लाग की सेवा सुन ताऊ देवा हाथ जोड वंदना करें॥
चंपाकली तुझको देकर के राजा भोज नित मगन रहें
दौडे दौडे अकबर आकर अनारकली तेरी शरण करें
ब्लाग की सेवा सुन ताऊ देवा हाथ जोड वंदना करें॥
मिस. समीरा टेढी ढिंग तेरे बैठी भक्तन का उद्धार करें
खुल्ले हाथ से बांटने टिप्पणी ब्लागवुड का भ्रमण करें
ब्लाग की सेवा सुन ताऊ देवा हाथ जोड वंदना करें॥
हास्य भेद पढके तेरे द्वारे सकल भुवन में राज करें
मोरे ताऊ देवा, तु ताऊ देवा सकल सिद्ध सब काज करें
ब्लाग की सेवा सुन ताऊ देवा हाथ जोड वंदना करें॥
इसके बाद अन्य महानुभावों ने अपनी रचनाये प्रस्तुत की. जिन्हे आगामी दिनों मे आप पढ पायेंगे. और शाम के सत्र मे मुशायरे का आयोजन हुआ, जिसकी मुख्य आकर्षण रही मिस. समीरा टेढी.
तो अब हम आमंत्रित करते हैं गज़ल सम्राज्ञि- गज़ल की व्याकरण की अद्भुत जानकार, मिस. समीर टेढी को :
साथियों, आप सबको मिस. समीरा टेढी का सलाम.
मैं कोई गज़ल की ज्ञाता नहीं. जो कुछ सीखा है, यहीं से सीखा है, इसलिए यहीं लुटा दे रही हूँ. अब मैं
आपको अपनी गज़ल बहर, बहर है बहरे मुतदारिक मुसमन मकतूअ:
२२ २२ २२ २२
फालुन फालुन फालुन फालुन में प्रस्तुत कर रही हूँ, इस गज़ल में मैने ७ शेरों को बुना है, कृप्या गौर फरमाये-तरर्नुम की बहुत फरमाईश न करियेगा, आज जरा गला खराब है :
लट्ठ रहा बरसाता ताऊ
कठिन पहेली सबको देकर
घर जाकर सो जाता ताऊ
जगह नई दिखलाकर सबका
ज्ञान रहा बढ़वाता ताऊ.
होली में जब रंग लगाया
छिप कर के शरमाता ताऊ
दुनिया भर में लफड़ा करता
ताई से डर जाता ताऊ.
रामप्यारी को ले संग में
खेल रहा खिलवाता ताऊ.
गाली बक दो या दुत्कारो
सबसे प्यार जताता ताऊ.
-मिस समीरा टेढी.
और अंत में आप सभी का हार्दिक आभार. (कार्यक्रम का बाकी हिस्सा आगामी पोस्टों में जारी रहेगा. अगली पोस्ट मे श्री अजयकुमार झा जी का काव्य पाठ होगा )