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ताऊ पहेली - 115 (सिलिसेढ लेक अलवर, siliserh lake, alwar) :विजेता : श्री समीरलाल "समीर"

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली अंक - 115 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही जवाब है (सिलिसेढ लेक अलवर, राजस्थान, siliserh lake, alwar, rajasthan)

पहेली के विषय से संबंधित थोडी सी जानकारी मिस. रामप्यारी आपको दे रही है.


हाय एवरी वन...गुड मार्निंग...मी राम की प्यारी...रामप्यारी.

अब सबसे पहले तो मैं पहेली के विषय में आपको दो शब्द ताऊ के यात्रा वृतांत से सीधे ही कापी करके बताऊंगी...दो से ज्यादा भी हो सकते हैं मैं गणित में जरा कमजोर हूं...गिनती आप ही लगा लिजियेगा. और उसके बाद मैं आपको विजेताओं के नाम बताऊंगी.



बहरोड से बानसूर होते हुये हम अलवर पहुंच गये. इस बार हमने पहले से ही सिलिसेढ लेक पैलेस होटल में रिजर्वेशन करा लिया था. अलवर के किले पहले भी देख हुये थे. अत: अबकि बार पूरे दो दिन इस सुरम्य झील के सानिंध्य में ही बिताने का तय कर चुके थे. सिलिसेढ (siliserh) झील अलवर (राजस्थान) से मात्र १५ किलोमीटर की दूरी पर है. यह झील करीबन ११ वर्ग किलोमीटर मे फ़ैली हुई है. इस झील का निर्माण महाराजा विनय सिंह द्वारा 1844 में अलवर को जलप्रदाय के लिये कराया गया था. इसका नामकरण उनकी रानी शीला के समान मे सिलिसेढ (siliserh) किया गया था. यहीं पर इस झील किनारे एक महल का निर्माण भी कराया गया. यह जगह महाराजाओं की पसंदीदा शिकार गाह रही है.


siliserh lake palace


इस झील किनारे स्थित महल को आजकल एक आरामदायक हेरिटेज होटल में तबदील कर दिया गया है जिसका संचालन RTDC द्वारा किया जाता है. सभी तरह के कमरे और सभी तरह की सुविधायें यहां उपलब्ध हैं. यहां ठहरते समय एक बात का ध्यान अवश्य रखे कि यहां लंच डिनर नियत समय पर ही दिया जाता है.

इस झील में मोटरबोट चलाते हुये आप स्वर्गिक आनंद का अनुभव करेंगे. होटल की छत से या अपने कमरे की खिडकियों से आप झील के आसपास कलरव करते परिंदों को देखकर घंटो खोये से रह जायेंगे.


siliserh lake view from hotel roof


यहां का पूरा वातावरण एक दम शांत और पहाडी वनों से आच्छादित है. प्रकृति के नजदीक छुटियां बिताने के लिये यह एक सर्वोत्तम जगह है. जुलाई से मार्च के मध्य का समय सर्वोत्तम रहेगा. यहां का रेल्वे स्टेशन अलवर है जो दिल्ली जयपुर लाईन पर स्थित है. नजदीकी एयरपोर्ट देल्ली करीबन १६५ किलोमीटर है. तो देर किस बात की...अबकी बार जब भी प्रकृति के पास शांत वातावरण में समय बिताने की इच्छा हो तब यहां पहुंच जाईये, साथ ही सरिस्का अभयारण्य तो है ही. (ताऊ यात्रा वृतांत से)

आईये अब मिलते हैं आज के विजेताओं से :-

आज के प्रथम विजेता हैं श्री समीर लाल "समीर"


प्रथम विजेता श्री समीर लाल "समीर" अंक 101


आईये अब बाकी विजेताओं से आपको मिलवाती हूं.

श्री दीपक तिवारी "साहब"

अब उनसे रूबरू करवाती हुं जिन्होनें इस अंक में भाग लेकर हमारा उत्साह वर्धन किया

श्री सतीश सक्सेना
श्री सोमेश सक्सेना
श्री केवलराम
श्री विजय कुमार "सप्पाति"
श्री काजल कुमार
सुश्री अंशुमाला
श्री दिनेशराय द्विवेदी
श्री भारतीय नागरिक
सुश्री वंदना
श्री नरेश सिंह राठौड
श्री पी.सी.गोदियाल "परचेत"
श्री राज भाटिया
डाँ. रूपचंद्र शाश्त्री "मयंक"
श्री राकेश कुमार
सुश्री अंजू
श्री गगन शर्मा "कुछ अलग सा"
डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
सुश्री वाणी गीत
सुश्री पूर्णिमा
श्री रोनित सरकार

सभी प्रतिभागियों का हार्दिक आभार प्रकट करते हुये रामप्यारी अब आपसे विदा चाहेगी. अगली पहेली के जवाब की पोस्ट में मंगलवार सुबह 4:44 AM पर आपसे फ़िर मुलाकात के वादे के साथ, तब तक के लिये जयराम जी की.


ताऊ पहेली के इस अंक का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और रामप्यारी ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार 1:00 AM से 11:00 PM के मध्य कभी भी आपसे फ़िर मुलाकात होगी तब तक के लिये नमस्कार.


मग्गाबाबा का चिठ्ठाश्रम
मिस.रामप्यारी का ब्लाग
ताऊजी डाट काम
रामप्यारे ट्वीट्स

ताऊ पहेली - 99 "पटवों की हवेली" जैसलमेर, विजेता : श्री प्रकाश गोविंद

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली - 99 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है Patwon ki haveli-Jaisalmer-Rajsthan

और इसके बारे मे संक्षिप्त सी जानकारी दे रही हैं सु. अल्पना वर्मा.

आप सभी को मेरा नमस्कार,

पहेली में पूछे गये स्थान के विषय में संक्षिप्त और सारगर्भित जानकारी देने का यह एक लघु प्रयास है.

आशा है, आप को यह प्रयास पसन्द आ रहा होगा,अपने सुझाव और राय से हमें अवगत अवश्य कराएँ.


जैसलमेर-

ऎतिहासिक विरासत खुद में समेटे जैसलमेर की नींव यदुवंशी भाटी राजपूत महारावल जैसल ने श्रावण शुक्ला 12, संवत् 1212 को एक त्रिकूट पहाडी पर रखी थी.

इसका प्राचीन नाम माडधरा व वल्ल मंडल भी था.स्वर्ण नगरी जैसलमेर को महलनुमा ‘हवेलियों , झरोखों की नगरी’ ‘रेगिस्तान का गुलाब’ और ‘राजस्थान का अंडमान’ भी कहा जाता है. थार मरूस्थल में बसा जैसलमेर जिला क्षेत्रफल की दृष्टि से देश में तीसरा सबसे बडा जिला है. क्षेत्रफल के आधार पर राजस्थान का सबसे बड़ा जिला है.

पटवों की हवेली -
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पहेली में पूछा गया स्थान 'पटवों जी की हवेली या 'पटवों की हवेली' थी जो की पांच हवेलियों का समूह है, जिन्हें पांच भाइयों ने मिल कर सन् 1800 से 1860 के मध्य बनवाया था.

इन हवेलियों की दीवारों ,खिड़कियों, छज्जों, बारीक़ जालियों, नक्काशी और बेलबूटों का महीन और सुंदर काम देखने वाले को आश्चर्य चकित कर देता है.


पटवों की हवेली, जैसलमेर (राजस्थान)


1805 में बनी यह पांच मंज़िला हवेली यहाँ की सभी हवेलियों में सबसे पुरानी है .नक्काशीदार खंभे , विशाल गलियारे व प्रकोष्ट मुख्य आकर्षण हैं.

धनी व्यवसायी गुमान चंद पटवा द्वारा शुरू की गयी इस हवेली को पूरा होने में ५० साल लगे थे.वर्तमान में यह हवेली भारत सरकार द्वारा संरक्षित है.

इसके अलावा यहाँ सालिम सिंह की हवेली,नथमल की हवेली,सम के टीले ,आकल गांव में फॉसिल पार्क (जीवाश्म उद्यान),मरू उद्यान,जवाहर विलास,बादल विलास , जैसलमेर दुर्ग [ सोनारगढ़ या सोनगढ़ ], लोद्रवा,पवित्र गडसीसर सरोवर,सातलमेर आदि पर्यटन स्थल हैं .



आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" की नमस्ते!

प्यारे बहनों और भाईयो, मैं आचार्य हीरामन “अंकशाश्त्री” ताऊ पहेली के रिजल्ट के साथ आपकी सेवा मे हाजिर हूं. उत्तर जिस क्रम मे मुझे प्राप्त हुये हैं उसी क्रम मे मैं आपको जवाब दे रहा हूं. एवम तदनुसार ही नम्बर दिये गये हैं.



सभी विजेताओं को हार्दिक शुभकामनाएं.


आज के प्रथम विजेता श्री प्रकाश गोविंद

श्री प्रकाश गोविंद अंक 101


आईये अब आज के अन्य विजेताओं से आपको मिलवाते हैं.

 

ajju5

Dr.Ajmal Khan अंक 100

shekhar

 श्री Shekhar Suman अंक 99

sabir h khan

श्री sabir*h*khan अंक 98

darshan_jpg

श्री Darshan Lal Baweja अंक 97

bantichor

श्री बंटी चोर अंक 96

gajendra singh

श्री गजेंद्र सिंह अंक 95

OSHO

श्री ओशो रजनीश अंक 94

vijay karn

 श्री विजय कर्ण अंक 93


श्री भारतीय नागरिक - Indian Citizen अंक 92

श्री नीरज गोस्वामी अंक 91

My Photo

श्री पी.एन.सुब्रमनियन अंक 90

lalit 50

श्री ललित शर्मा अंक 89

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक अंक 88

anil (1)

प० अनिल जी शर्मा सहारनपुर अंक 87

श्री रंजन अंक 86

श्री रतन सिंह शेखावत अंक 85

upendra

 श्री उपेन्द्र अंक 84

seema-gupta-2

सुश्री सीमा गुप्ता अंक 83

ssb

श्री Surendra Singh Bhamboo अंक 82

dwivediji

श्री दिनेशराय द्विवेदी अंक 81

श्री उडनतश्तरी अंक 80

अगला अंक ताऊ पहेली का १०० वां अंक होगा.


आईये अब रामप्यारी मैम की कक्षा में





हाय गुड मार्निंग एवरीबड्डी... मेरे सवाल का सही जवाब है : गोखरू का पौधा निम्न सभी प्रतिभागियों को सवाल का सही जवाब देने के लिये 20 नंबर दिये हैं सभी कॊ बधाई.



गोखरू का पौधा


श्री Darshan Lal Baweja
सुश्री इंदु अरोड़ा
श्री प्रकाश गोविंद
सुश्री सीमा गुप्ता
श्री Surendra Singh Bhamboo
श्री डी. के. शर्मा “वत्स”
श्री नरेश सिंह राठौड

अब अगले शनिवार को ताऊ पहेली में फ़िर मिलेंगे. तब तक जयराम जी की!

अब आईये आपको उन लोगों से मिलवाता हूं जिन्होने इस पहेली अंक मे भाग लेकर हमारा उत्साह वर्धन किया. आप सभी का बहुत बहुत आभार.

श्री आशीष मिश्रा
श्री तारकेश्वर गिरी
श्री M VERMA
श्री प्रवीण त्रिवेदी
श्री राज भाटिया
सुश्री वंदना
सुश्री बबली
श्री अविनाश वाचस्पति

अब अगली पहेली का जवाब लेकर अगले सोमवार फ़िर आपकी सेवा मे हाजिर होऊंगा तब तक के लिये आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" को इजाजत दिजिये. नमस्कार!


आयोजकों की तरफ़ से सभी प्रतिभागियों का इस प्रतियोगिता मे उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. !

ताऊ पहेली के इस अंक का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार सुबह आठ बजे आपसे फ़िर मिलेंगे तब तक के लिये नमस्कार.


विशेष सूचना :-


अगला अंक ताऊ पहेली का 100 वां अंक होगा.

ताऊ पहेली - 86 (Junagadh Fort-Bikaner-Rajasthan) विजेता : श्री रतन सिंह शेखावत

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 86 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है Junagadh Fort-Bikaner-Rajasthan

और इसके बारे मे संक्षिप्त सी जानकारी दे रही हैं सु. अल्पना वर्मा.

आप सभी को मेरा नमस्कार,

पहेली में पूछे गये स्थान के विषय में संक्षिप्त और सारगर्भित जानकारी देने का यह एक लघु प्रयास है.

आशा है, आप को यह प्रयास पसन्द आ रहा होगा,अपने सुझाव और राय से हमें अवगत अवश्य कराएँ.


राजस्थान है ही इतना खूबसूरत और रंग बिरंगा प्रदेश कि इस के जिस भी हिस्से की बात करें वहाँ दिल रमने लगता है.थार के रेगिस्तान भी यहाँ के लोगों के मस्त मस्त स्वभाव को बदल न सके और उन्होंने इन्हीं रेत के टीलों के बीच अपनी जीवटता की छाप छोड़ी हैं.

आज एक बहुत ही खूबसूरत शहर लिए चलते हैं वह है बीकानेर.नमकीन भुजिया का पर्याय है बीकानेरी भुजिया!नमकीन ही नहीं यहाँ का रसगुल्ला ,पतीसा भी अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में लोकप्रिय है.राजस्थान के इस जिले के बारे में हलकी सी जानकारी देती चलूँ.

यह जिला राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी भाग में है.इसका अधिकांश हिस्सा अनुपजाऊ और रेगिस्तान है .इसके दक्षिण-पश्चिम में मगरा नाम की पथरीली भूमि है,जहाँ बारिश होने के कारण कुछ पैदावार हो पाती है.

इसका पुराना नाम जांगल देश था.जोधपुर के शासक राव जोधा के पुत्र राव बीका द्वारा १४८५ में इस शहर की स्थापना की गई.राजा राय सिंह ने इसे सुन्दर रूप दिया.महाराजा गंगासिंह जी ने नवीन बीकानेर रेल नहर व अन्य आधारभूत व्यवस्थाओं से समृद्ध किया.अक्षय तृतीया के दिन बीकानेर स्थापना दिवस मनाया जाता है और यहाँ के लोग पतंग उड़ाकर उत्सव मनाते हैं.बीकानेर शहर के रहने वाले प्रसिद्ध गज़लकार राजेंद्र स्वर्णकार जी ने अपने शहर की प्रशंसा में दोहे लिखे और पढ़े हैं उन्हें यहाँ सुन सकते हैं.

*बीकानेर का लोक साहित्य काफी समृद्ध हैं.राजपरिवार के लोगों ने भी साहित्य में योगदान किया है.उदाहरण हेतु बीकानेर के राज रायसिंह ने भी ग्रंथ लिखे थे उनके द्वारा ज्योतिष रतन माला नामक ग्रंथ की राजस्थानी मे टीका लिखी थी.

*राज्‍य की शिक्षा व्‍यवस्‍था का कुंभ भी कहा जाता है.

*बीकानेर में ज्योतिष ,तंत्र मन्त्र आदि के कई ज्ञाता भी बड़े राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं.इन में ज्योतिषाचार्य पंडित बाबूलालजी शास्‍त्री का नाम बड़े आदर से लिया जाता है.

*यहाँ के रंग बिरंगे जीवन में तीज ,त्यौहार,मेले ख़ास भूमिका रखते हैं.कोलायत मेला,मुकम मेला,देशनोक मेला,नागिनी जी मेला,तीज मेला, शिवबाड़ी मेला, नरसिंह चर्तुदशी मेला, सुजनदेसर मेला, केनयार मेला, जेठ भुट्टा मेला, कोड़मदेसर मेला, दादाजी का मेला, रीदमालसार मेला, धूणीनाथ का मेला आदि लोकप्रिय मेले हैं.

*मुख्य दर्शनीय स्थल लालगढ़ का महल,गंगा गोल्‍डन जुबली संग्रहालय,राज रतन बिहारी और रसिक शिरोमणी मंदिर,बीका-की-टेकरी का भव्य किला,लक्ष्मीनारायण मंदिर, भंडेसर मंदिर, नागणेची जी का मंदिर, देवकृण्डसागर में प्राचीन शासकों की छतरियॉ, शिवबाडी मंदिर,चूहों के लिये प्रसिद्ध करणीमाता का मंदिर हैं और शहर से थोड़ी दूर भव्य महलों और प्रवासी पक्षियों के लिये प्रसिद्ध 'गजनेर' भी दर्शनीय है.

कुमारी राजुल शेखावत के अनुसार -:बीकानेर आए और यहां की हवेलियां नहीं देखीं तो आपकी सैर अधूरी मानी जाएगी। पुराने बीकानेर शहर में तंग बल खाती गलियों के ठीक ऊपर इनके झरोखों की छटा बेहतरीन होती है। लाल पत्थर से बनी इन हवेलियों में इनके दरवाज़े ,नक्काशीदार खिड़कियां या फिर बारामदे , सबमे कुछ ऐसा है, जिसे राजसी कहा जाता है।पुराने वक्त मे ये हवेलियां धन्ना सेठों के रहने की जगह हुआ करती थी। बीकानेर की हवेलियों में से रामपुरिया हवेलियां खासी मशहूर हैं। इन हवेलियों को देखकर आपको जैसलमेर की पटवा हवेली की याद आएगी। वैसे, बीकानेर की रामपुरिया हवेलियां लाल डलमेरा पत्थरों की बनी हैं।हवेलियों की दीवारों और झरोखों पर पत्तियां और फूल उकेरे गए हैं। कमरों के भीतर सोने की जरी का बेशकीमती काम देखकर आप दांतो तले उंगली दबा बैठेगें।विरासत को सहेजने का अपना अनोखा अंदाज कहें या फिर विरासत से कमाई करने वाली व्यापारिक बुद्धि - नई पीढी ने इन हवेलियों को कमाऊ जायदाद में तब्दील करदिया है। रामपुरिया हवेलियों के मालिक प्रशांत रामपुरिया के मुताबिक,हवेलियों को होटल में तब्दील करने की वजह से उनका रखराखाव आसान हो जाता है। कमाई के साथ-साथ ही विरासत भी सहेजी जा रही है.

जूनागढ़ का किला -:


बीकानेर में स्थित जूनागढ़ किले को भारतीय कलात्मक-जगत का अदभूत केंद्र कहा जाता है .इस किले का निर्माण राजा राय सिंह ने ३० जनवरी १५८६ में शुरू करवाया था और यह आठ साल में १७ फरवरी १५९४ को पूरा हुआ.उनके बाद भी बीकानेर के हर शासक ने इस किले को समृद्ध किया.मुग़ल साम्राज्य के पतन के बाद बीकानेर के कला प्रेमी शासकों ने विस्थापित उस्ता कारीगरों को अपने दरबार में शरण दी.

Junagarh Fort


इसका नाम पहले चिंतामणि दुर्ग रखा गया था.बाद में सिर्फ 'गढ़ ' कहा जाता था. लालगढ़ दुर्ग बन जाने के बाद इसे लोग पुराना किला [ जूनागढ़ ]कहने लगे .

विकिपीडिया और रतन सिंह शेखावत जी के लिखे विवरण- के आधार पर -इस के परकोटे की परिधि ९६८ मीटर है जिसके चारों और नौ मीटर चौडी व आठ मीटर गहरी खाई है,किले ३७ बुर्जे बनी है जिन पर कभी तोपें रखी जाती थी |

किले पर लाल पत्थरों को तराश कर बनाए गए कंगूरे देखने में बहुत ही सुन्दर लगते है |

Junagarh fort kings palace


पूरब और पश्चिम के दरवाजों को कर्णपोल और चांदपोल कहते है.मुख्य द्वार सूरजपोल के अलावा दौलतपोल,फतहपोल, तरनपोल और ध्रुवपोल है.किले के भीतरी भाग में आवासीय इमारते ,कुँए ,महलों की लम्बी श्रंखला है जिनका निर्माण समय समय पर विभिन्न राजाओं ने अपनी कल्पना अनुरूप करवाया था.

जनानी ड्योढी से लेकर त्रिपोलिया तक पांच मंजिला महलों की श्रंखला है पहली मंजिल में सिलहखाना,भोजनशाला ,हुजुरपोडी बारहदरिया,गुलाबनिवास,शिवनिवास,फीलखाना और गोदाम के पास पाचों मंजिलों को पार करता हुआ ऊँचा घंटाघर है | दूसरी मंजिल में जोरावर हरमिंदर का चौक और विक्रम विलास है | रानियों के लिए ऊपर जालीदार बारहदरी है | भैरव चौक ,कर्ण महल और ३३ करौड़ देवी देवताओं का मंदिर दर्शनीय है | इसके बाद कुंवर-पदा है जहाँ सभी महाराजाओं के चित्र लगे है |

जनानी ड्योढी के पास संगमरमर का तालाब है फिर कर्ण सिंह का दरबार हाल है जिसमे सुनहरा काम उल्लेखनीय है | पास में चन्द्र महल,फूल महल , चौबारे,अनूप महल,सरदार महल,गंगा निवास, गुलाबमंदिर, डूंगर निवास और भैरव चौक है | चौथी मंजिल में रतननिवास, मोतीमहल,रंगमहल , सुजानमहल और गणपतविलास है |

पांचवी मंजिल में छत्र निवास पुराने महल ,बारहदरिया आदि महत्वपूर्ण स्थल है | अनूप महल में सोने की पच्चीकारी एक उत्कृष्ट कृति है | इसकी चमक आज भी यथावत है | गढ़ के सभी महलों में अनूप महल सबसे ज्यादा सुन्दर व मोहक है | महल के पांचो द्वार एक बड़े चौक में खुलते है | महल के नक्काशीदार स्तम्भ ,मेहराब आदि की बनावट अनुपम है | फूल महल और चन्द्र महल में कांच की जडाई आमेर के चन्द्र महल जैसी ही उत्कृष्ट है | फूल महल में पुष्पों का रूपांकन और चमकीले शीशों की सजावट दर्शनीय है | अनूप महल के पास ही बादल महल है | यहाँ की छतों पर नीलवर्णी उमड़ते बादलों का चित्रांकन है | बादल महल के सरदार महल है | पुराने ज़माने में गर्मी से कैसे बचा जा सकता था ,इसकी झलक इस महल में है | गज मंदिर व गज कचहरी में रंगीन शीशों की जडाई बहुत अच्छी है | छत्र महल तम्बूनुमा बना है जिसकी छत लकडी की बनी है | कृष्ण-रासलीला की आकर्षक चित्रकारी इस महल की विशेषता है |

junagarh fort queens


श्री नरेश सिह राठौङ जी कहते हैं -इस गढ़ के अन्दर जो सोने की पच्चीकारी की गयी है उसके कारीगर आज गुमनामी की जिन्दगी जी रहे है । बीकानेर मे एक मोहल्ला है जो भुजिया बाजार के पिछे है उसे उस्तों का मोह्ल्ला के नाम से जाना जाता है यह मोहल्ला इन्ही कारीगरो का मोहल्ला है ।

इस बारे मे उन्हें यह जानकारी यहाँ के एक विद्युत अधिकारी शकूर साहब ने दी है जो कि इन्ही उस्ता कारीगरो के खानदान से हैं ।


आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" की नमस्ते!

प्यारे बहनों और भाईयो, मैं आचार्य हीरामन “अंकशाश्त्री” ताऊ पहेली के रिजल्ट के साथ आपकी सेवा मे हाजिर हूं. उत्तर जिस क्रम मे मुझे प्राप्त हुये हैं उसी क्रम मे मैं आपको जवाब दे रहा हूं. एवम तदनुसार ही नम्बर दिये गये हैं.



सभी विजेताओं को हार्दिक शुभकामनाएं.


 


आईये अब रामप्यारी मैम की कक्षा में





हाय गुड मार्निंग एवरीबड्डी... मेरे सवाल का सही जवाब है : मोर/मोरनी का बच्चा (Baby Peacock)और नीचे देखिये मोर, मोरनी और उनके प्यारे प्यारे बच्चों का यह शानदार विडियो.




निम्न सभी प्रतिभागियों को सवाल का सही जवाब देने के लिये 20 नंबर दिये हैं सभी कॊ बधाई.

सुश्री सीमा गुप्ता
श्री प्रकाश गोविंद
श्री अंतर सोहिल
श्री Darshan Lal Baweja
सुश्री इंदु अरोड़ा
डा.रुपचंद्रजी शाश्त्री "मयंक,
सुश्री Anju

अब अगले शनिवार को ताऊ पहेली में फ़िर मिलेंगे. तब तक जयराम जी की!

अब आईये आपको उन लोगों से मिलवाता हूं जिन्होने इस पहेली अंक मे भाग लेकर हमारा उत्साह वर्धन किया. आप सभी का बहुत बहुत आभार.

श्री ललित शर्मा
अभिषेक ओझा,
श्री अविनाश वाचस्पति
श्री मनोज कुमार
श्री पी.एन.सुब्रमनियन
श्री राम त्यागी
श्री संजय बेंगाणी
डा. अरुणा कपूर.
श्री पी.सी.गोदियाल,
सुश्री anshumala
श्री राज भाटिया
श्री महेंद्र मिश्र
श्री नीरज गोस्वामी
सुश्री वंदना
डॉ टी एस दराल
सुश्री अनामिका की सदायें .....

अब अगली पहेली का जवाब लेकर अगले सोमवार फ़िर आपकी सेवा मे हाजिर होऊंगा तब तक के लिये आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" को इजाजत दिजिये. नमस्कार!


आयोजकों की तरफ़ से सभी प्रतिभागियों का इस प्रतियोगिता मे उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. !

ताऊ पहेली के इस अंक का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार सुबह आठ बजे आपसे फ़िर मिलेंगे तब तक के लिये नमस्कार.