Showing posts with label चाँद. Show all posts
Showing posts with label चाँद. Show all posts

ताऊ ने चाँद पर कालोनी काटी : बुकिंग शुरू

ताऊ को जब से यमराज जी ने चाँद वरदान में दिया तब से सभी ब्लागर्स की अनंत शुभकामनाएं और बधाईयाँ आई है ! सभी खुश हैं ! आईये उस पोस्ट पर किसने क्या कहा ? संक्षिप्त में देखते हैं ! भाई कुश ने चिंता दिखाई की चाँद पर अब भाटिया जी के ठेले का क्या होगा ? डॉ .अनुराग जी की जिज्ञासा है की  वहाँ पर प्लाट कब काटे जायेंगे ? PALLAVI TRIVEDI जी को चाँद पर घुमने की सहूलियत मिलने से खुशी थी !

 

आ.GYAN DUTT PANDEY जी यमराज के हाईटेक ना होने से ताऊ की जान बचने से खुश थे ! दिनेशराय द्विवेदी DINESHRAI DWIVED जी को चम्पाकली के ना लौटने का दुःख था की अब उनको चम्पाकली का दूध कैसे मिलेगा   ? मान.लावण्यम्` ~ अन्तर्मन् जी को ब्लागर्स के लिए मांगे गए वरदान और चांद पर कब्जे की खशी थी  ! गौतम राजरिशी जी को चांद पर चम्पाकली का तबेला देखने की इच्छा थी ! अशोक पाण्डेय जी और RATAN SINGH SHEKHAWAT जी  शेखावत ताऊ के बचने की खुशी में प्रशन्न थे !

 

अल्पना वर्माजी को अब भी भरोसा  नही की चाँद को ताऊ पूरा का पूरा डकार गया ! वो लिखती हैं चाँद ताऊ का है -Breaking news hai. ! अल्पना जी यकीन करिए यह ब्रेकिंग न्यूज नही है बल्कि हकीकत है !

 

लवली कुमारी / LOVELY KUMAR जी को चम्पाकली के बिछुड़ जाने का मलाल था ! रंजना [रंजू भाटिया]  जी को वरदान और चाँद पर कब्जे की  खुशी थी ! PN SUBRAMANIAN जी को पुरे प्रकरण में ही आनंद आया ! PT. D.K.SHARMA "VATSA" जी को ताऊ के ख़िलाफ़ देवताओं की  साजिश की ख़बर लग चुकी थी वो उसका ईलाज करने की तैयारी कर रहे थे ! ABHISHEK जी को ताऊ के शेयर ब्रोकर होने की खुशी थी !

 

 POEMSNPUJA  को वरदान की खुशी और चाँद पर कब्जे की इतनी खुशी थी की  खुशी का पारावार नही था ! जैसे बच्चे ने चाँद को मुठ्ठी में बंद कर लिया हो ! देखिये उन्ही के शब्दों में - ये आपने बहुत अच्छा किया ताऊ जो चाँद मांग लिया, अब मैं लिखूंगी और कोई मुझे चाँद को नीला पीला करने को कहेगा तो बोल दूंगी मेरे ताऊ का चाँद है, मेरा जैसा मन रंगुंगी...कोई आपका थोड़े है, सो ठंढ रखो. 

 

 कुछ दिन पहले पूजा जी को कोई चाँद को काला पीला ना करने की सीख  दे गया था ! अब करलो जिसको जो  करना हो ! अब पूरा चाँद ही उनके ताऊ का है तो जाहिर है उनका ही  है !  अब कोई झंझट ही नही बचा  ! 

ताऊ ब्लागरो  के लिए चाँद तो क्या सूरज को भी हथिया लेगा ! खबरदार सीख देने वालो ! अब सूरज से दुश्मनी मत निकालना !   विष्णु बैरागी  जी चंद्र यात्रा और यमराज संवाद सुनकर बिल्कुल फ्रेश हो गए  थे !

 

SEEMA GUPTA जी को डर था की कही ताऊ ने, नटवर लाल ने जैसे ताजमहल  बेच खाया था उस तरह का कोई कारनामा नही कर दिया हो पर वरदान की बात पढ़ कर तसल्ली हो गई ! और चांद पर जाने की सुविधा मिल जाने से बड़ी खुश थी !

 

ZAKIR ALI 'RAJNEESH' साहब ताऊ को पटा कर रखने की जोगाड़ में थे ! जाकिर साहब, ताऊ को  ज़रा खांटी चिलम कानपुरिया चाहिए पटने के लिए, वैसे लखनवी तम्बाकू भी चलेगी ! :)  CMPERSHAD भी आश्चर्यचकित थे ! यमराज के चक्कर में आने से जीवन सफ़र भी बहुत खुश !

 

 मोहन वशिष्‍ठ जी ने बड़ी काम की बात कही पर भाई आप थोडा लेट हो गए ! आप  अगर ये हमेशा तीन वरदान मांगने की सलाह पहले दे देते तो हम सब ब्लागरिए हमेशा के लिए सुखी हो जाते ! अबकी बार चंगुल में चढ़ने दो यमराज को ! बस यही वरदान मान्गुगा !

 

अभिषेक ओझा जी तो प्रशन्नता वश ताऊ के शिष्य भी बनने को राजी और कोचिंग भी लेने को तैयार ! धन्यवाद भाई ओझा साहब ! आप भी बैंकर हैं ! अत: आप तो ट्रेंड ही हैं !  हम जल्दी ही चाँद पर एक अन्तर ब्रहमान्डिय  मेनेजमेंट ट्रेनिंग कोर्स शुरू करने वाले हैं ! आप अमेरिकन असाईन्मैन्ट पूरा करके वहाँ का काम संभालिये ! अभी वहाँ पर चम्पाकली अकेली है ! सब रिक्रुट्मैन्ट आपको ही देखना है !

 

कविता वाचक्नवी जी तो बहुत ही खुश हैं ! उन्ही के शब्दों में - ईब आपणै वरदाण म्हारी खात्तिर भी माँग्या ही होगा कि चंगू-मंगू तै .... बचै रह्वैं, सो म्हणै भी थैन्क्यू क्हैण का मौका देणा बणै आपका!
थारे धोरे टोकरा-भर थैन्क्यू देणा बणता है जी म्हारा। स्वीकारो।

बहुत शुक्रिया कविता जी ! योगेन्द्र मौदगिल  जी ने तो यमराज की ऎसी तैसी करके चार बार ताऊ की जय बोल दी !

 
 मेरे प्यारे ब्लागियों
म्हारे होते होये ताऊ की कोए पूंझड़ बी नी पाड़ सकता
यमराज की के बिसात सै
प्रेम से बोलो
ताऊ जिंदाबाद

नीरज गोस्वामी  जी कहते हैं :- 

मोदगिल भाई के साथ मैं भी ताऊ की जय बोल रहा हूँ लेकिन मुहं नीचा कर के...क्या पता कब ताऊ की भैंस चाँद पे पोठा (गोबर) गिरा दे जो सीधा मुहं पे आ गिरे...रे ताऊ अब तो चाँद को ताकने काबिल भी न रहे रे...

नीरज जी आप नाहक चिंता कर रहे हैं ! चम्पाकली निहायत ही जहीन और खानदानी और विद्वान् भैंस है ! उसका ताल्लुक राजा भोज के दरबार से है ! जिनको पता नही हो उनकी जानकारी के लिए बता देते हैं की ये भैंस ताऊ को राजा भोज ने दी थी ! श्री योगीन्द्र मोदगिल अच्छी तरह परिचित हैं इससे ! और ये काव्य की भी बड़ी गहरी पकड़ रखती है ! आप आराम से चाँद को ताकिये ! 

 

राज भाटिय़ा  जी भी बड़े खुश हैं ताऊ की जान बचने से ! भाटिया जी आपको कहीं जाने की जरुरत नही है ! आपका ठेला वहीं रखिये ! मार्स पर यमराज का झौठा और चम्पाकली कब्जे की जुगत भिडा रहे हैं!

 

अनुपम अग्रवाल जी को ताऊ के लौटने की खुशी है पर उनको ये डर भी सता रहा है की अगर ताऊ चाँद पर शिफ्ट हो गए तो यहाँ ब्लागारियों को बिगाड़ने का काम कौन करेगा ? अनुपम जी आप चिंता मत करिए ! हम वहाँ का काम शुरू करने के लिए यहाँ का काम अधूरा नही छोडेंगे !

 

अनूप शुक्ल  जी क्या शान जमाई ताऊ की। वाह। ताऊ हो तो ऐसा चाहे एक ही हो।

शुक्ल जी भी बड़े प्रशन्नचित  है ! NITISH RAJ जी को फिक्र है की ताई ने आपको पीटा क्यों नही ? लो बोलो - ताऊ अच्छा करे या बुरा ! ताऊ नही मन्दिर का घंटा होगया जो आप सुबह शाम ताई से बजवाते रहो ! JAYAKA  जी बड़ी प्रशन्न हैं ताऊ के लौटने से ! अब हंसाने का सुखा नही पडेगा ! MUSAFIR JAT जी ने कहा की नरक का राज ही मांग लेते जिससे स्वर्ग के बजाये हम हमेशा नरक मांगते और हमेशा के लिये मौज हो जाती ! भई चिंता मत करो ! ताऊ जहां भी रहेगा , अपने लिये नर्क का निर्माण स्वयम कर लेगा !

 

MAKRAND और दीपक "तिवारी साहब"  जी भी प्लाट काटने जैसी बात करते हैं !

फ़न्डेबाज   और DR. NAZAR MAHMOOD साहब  बधाई देते हैं !

 

 PREETI BARTHWAL  भी खुश होकर  कहती हैं कि ताऊ की अक्ल के आगे यमराज क्या चीज है !


*************************

कुल मिलाकर सारे ब्लागर्स इतने खुश थे की जैसे चाँद उनको ही मिल गया हो ! सही है जब ताऊ ही आपका है तो चाँद तो आपका है ही ! चाँद पर एक ताऊ शाला का निर्माण करवा दिया गया है ! इसमे ७ स्टार से भी बेहतरीन ठहरने की व्यवस्था है ! वहाँ आप ब्लागर्स का खाने पीने का इंतजाम भाटिया जी के ७ स्टार ठेले से होगा ! ये सब सुविधाए आपके लिए बिल्कुल मुफ्त हैं ! ताऊ के खेमे वालो के अतिथि भी फ्री में इन सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे ! बाकी लोगो को नोमिनल चार्जेस देने पड़ेंगे ! ट्रांसपोर्टेशन के लिए समीर जी से आप लोग सीधे बात कर ले !  

*************************


आईये अब हम इस विषय में कुछ जरुरी घोषणाए कर देते हैं ! चाँद पर हमने बहुत तेजी से एक कालोनी का काम शुरू कर दिया है ! चम्पाकली द्वारा वहाँ पर  एक मीठे पानी की झील खोज ली गई है उसी झील के पास यह कालोनी बसाई जा रही है  ! यह सर्वसुविधायुक्त कालोनी होगी  !    इसके निर्माण के पैमाने इन्टर्गेलिक्टिक होंगे ! इतनी उन्नत प्रोद्योगिकी इस्तेमाल की जारही है की आप आश्चर्यचकित हो जायेंगे ! आपकी कल्पना से बाहर होगा इसका निर्माण !

 

जितने भी ब्लॉगर भाई और बहने हैं उन सबको ताऊ की तरफ़ से एक एक प्लाट, जिसकी साईज एक लाख स्कवेयर फीट है, वह रजिस्ट्री सहित फ्री दिए जायेंगे ! यानी आपको कोई पैसा नही देना पडेगा ! और एक बात जो ब्लॉगर ताऊ के खेमे के हैं उनको एक एक प्लाट इसी साईज का और फ्री ! अब खेमा ताऊ को भी नही मालुम ! आप इसे शास्त्री जी से प्रमाणित करवा ले  और   अपना खेमाकरण करवा ले ! आपसे निवेदन है की अपने अपने  प्लाट वगैरह के कागज़ आप शास्त्री जी से यथासम्भव शीघ्रता से प्राप्त कर ले ! आपको इसके अलावा प्लाट चाहिए तो उसकी आप बुकिंग  करवाले !

 

इस कालोनी की विशेषता है की इस में पेंटिंग के लिए १० स्कवेयर मील का एरिया छोडा गया है जहाँ आप अपनी मन मर्जी से पेंटिंग कर सकते हैं ! अर्थात चाँद को आप अपनी मनमर्जी के रंग से पेंट  कर सकते हैं ! इस जोन में चाँद आपको मना नही करेगा ! 


दूसरा एक जोन १०० स्कवेयर मील का  कवियो और शायरों के लिए है ! इस जोन में नदी , पहाड़ , झरने , बगीचे और पशु पक्षी यानि पूरा प्राकृतिक वातावरण है ! इस जोन में घुसते ही कविताए अपने आप फूट पड़ेगी !  


और भी बहुत से फायदे हैं ! मसलन इस  कालोनी में ज्यादातर पृथ्वी ग्रह के वासियों को जगह दी गई है अन्यथा सभी अन्य ग्रह वासियों  की भी कालोनिया काटी जा रही हैं ! एक कालोनी एलियंस  के लिए भी काटी जा रही है अगर आपको उसमे चाहिए तो हम आपको उसमे भी प्लाट दे सकते हैं ! ज़रा जल्दी करे ! 

 

और एक जरुरी सूचना :- चाँद पर जाने और आने  के लिए आप समीर जी से बात करले ! पृथ्वी से चाँद तक उनकी सर्व सुविधायुक्त Intergalactic Udantashtari Service उपलब्ध है ! एक मात्र यही उड़नतश्तरी सर्विस है जिसमे मुफ्त भारतीय खाने का शानदार प्रबंध है !  और वो आजकल सुना है भारत में ही आए हुए हैं इसी  की बुकिंग को लेकर ! सो आप अपना आने जाने का ईयरली पास बनवा ले ! काफी फायदे में रहेंगे !

 

 

इब खूंटे पै पढो :-

 

योगीन्द्र मोदगिल साहब  - मेरे परदादा गुजरे तब आठ मकान, ४ बैल, १० झौठी और ५० किले जमीन छोड़ कर गए थे !

 

राज भाटिया साहब - अरे ये तो कुछ भी नही ! मेरे परदादा गए तब ४ मकान, २५ दूकान,  ८ फेक्ट्री और ७० किलो सोना छोड़ कर गए थे !

 

ताऊ - अरे भाई पूछो ही मत ! ये तो कुछ भी नही था ! न्यू समझ ल्यो की मेरे परदादा तो सारी की सारी दुनिया ही छोड़ कर गए थे !

 

 

  

यमराज ने ताऊ को सजा के बदले दिए वरदान

जैसा की आप जानते ही हैं की चम्पाकली यानि राजा भोज द्वारा ताऊ को दी गई विद्वान् भैंस, योजनानुसार यमराज जी के भैंसे को लेकर चंपत हो गई तो सबके लिए मुश्किल खड़ी हो गई ! बिना झौठे के  यमराज जी वहाँ चाँद से कैसे जाए ? और सबसे बड़ी समस्या तो यह की इस ताऊ का क्या किया जाए ! चाँद पर इन सब बातो को लेकर घमासान मचा हुआ था !

 

यमराज ने जलते नेत्रों से ताऊ की तरफ़ देखते हुए कहा - मुझे तुम्हारी साजिश दिखाई दे रही है  इसमे ! मेरा इतना सीधा सच्चा भैंसा ऐसे कैसे गायब हो सकता है ?

 

ताऊ : यमराज जी महाराज ! इब या तो थम ही जाण सको हो !

 

यमराज : तुम क्या सोच रहे हो ? इस तरह तुम मरने से बच जाओगे !

 

ताऊ : यमराज जी , हम तो पैदायशी मरे हुए हैं ! अब क्या दुबारा मारोगे ?

 

यमराज जी ने नाराज होते हुए कहा : अरे मुर्ख ताऊ ! ज्यादा ज्ञान मत बघार ! अभी तुझको खोलते तेल के कडाव में डलवाउन्गा तब मालुम पडेगा तुझे !

 

इतनी देर में चित्रगुप्त का फोन आता है यमराज जी के पास, और वो बताता है की -

 

आपके भैंसे को ताऊ की चम्पाकली नाम की झौठ्डी के पीछे पीछे  मंगल ग्रह की तरफ़ जाते देखा गया है ! और यह सुनकर तो यमराज आग बबूला हो गए ! और उन्होंने चित्रगुप्त से कहा की उस चम्पाकली की खाल खिंचवा ली जाए !

 

अब ताऊ बोला - यमराज जी , ये कोई अनारकली नही है जो आप उसकी खाल खिंचवा लेंगे ! वो चम्पाकली है , उसका आप कुछ नही बिगाड़ सकते !

 

यमराज ने दहकते अंगारों जैसी आँख से ताऊ को देखा ! तभी उनका मोबाईल घनघना उठा !

 

उधर से चित्रगुप्त ने बताया की - महाराज   मरे हुए लोग आ आकर लाइन लगा कर खड़े हैं और उनको सजा देने में देर हो रही है ! आप जल्दी आए !

 

यमराज - अब हम आए कैसे ? पता नही वो महिषराज कहाँ मुंह काला पीला करते फ़िर रहे हैं ! हम अब इसको हमारे विश्वस्त वाहन स्वरूप नही रक्खेंगे ! हमारे लिए  किसी दूसरी गाडी या वाहन का प्रबंध किया जाए !

 

चित्रगुप्त ने बताया की - महाराज ये आपके और मेरे वश में नही है ! ये वाहन  तो आपको  अलोकेट किया हुआ है शुरू से ही ! आप इसमे कुछ रद्दोबदल नही कर सकते !

 

यमराज - तभी चित्रगुप्त ! अब मेरे समझ में आया की हमारे झौठे ने क्यों हमसे बगावत करने का साहस किया ! शायद वो भी ये बात जानता है ! इसलिए उसकी मण्डी आजकल बहुत तेज है ! खैर अब क्या किया जाए ? इतनी देर में ताऊ बोल पडा बीच में --

 

ताऊ - महाराज आप कहे तो आपके लिए एक उड़नतश्तरी का इंतजाम करवा दूँ ? समीर जी की Intergalactic Udantashtari Service से चार्टर उड़नतश्तरी का कह देते हैं ! और अभी वो भारत पहुंचे ही  हैं ! आपके ये चंगू मंगू (यमदूत) हमें यहाँ पकड़ लाये हैं , इसी चक्कर में गुरुदेव हमारी खोज ख़बर करने भारत आए हैं !

 

महाराज आपको यमलोक छोड़ कर हम भी उसी उड़नतश्तरी से लौट जायेंगे ! हमें भी अपने गुरु का स्वागत करने जाना चाहिए की नही ?

 

यमराज अब गुर्राए - अरे मूर्ख ताऊ ! तू  मौत के मुंह में खडा है और हमको होशियारी दिखा रहा है ?

 

इतनी देर में चित्रगुप्त का फोन आगया ! उसने बताया की महाराज आपके लिए आज की कोर्ट लगाने का इंतजाम वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये चाँद पर ही करवा दिया है ! छोटे मोटे केस में तो यहाँ पर  मैं ही सजा सूना दूंगा ! एक बड़ा केस आया है किसी बाबा का ! बड़े सिद्ध बता रहे हैं अपने आपको और कह रहे हैं की हम खड़े खड़े इंतजार नही कर सकते ! हम बहुत पुण्यात्मा है ! हमने बहुत प्रभु भक्ति की है सो हमें तुंरत स्वर्ग का वीसा दिया जाए !  कुछ और है ! और एक ये ताऊ का केस भी आप वहीं से निपटा दीजियेगा ! सुना है ये बड़ा जंगली लंगूर ताऊ है !

 

yamaraj चाँद पर यमराज जी के लिए टेंट हाउस में शानदार दरबार का इंतजाम कर दिया गया ! और  अब वीडियो कांफ्रेंसिंग शुरू होती है और एक बड़े जटाजूट धारी बाबा स्क्रीन पर दिखाई देने लगते हैं !

 

यमराज ने उनसे सब सवाल जवाब किए और यमदूतों को तुंरत उन्हें नर्क में डालने का आदेश सुना दिया , वो भी बामशक्कत ! बाबा बड़े हैरान हुए ! उन्होंने जिरह की,  की उनको शायद गलत समझा जा रहा है ! इतने लोगो को प्रभुभक्ति सिखलाने का यही इनाम दिया जा रहा है ? 

 

यमराज बोले - अरे मुर्ख ! तू क्या प्रभुभक्ति सिखलाएगा ? वहाँ प्रभु का प्रतिनिधि बन कर तू ख़ुद ही प्रभु बन गया ? मेरे नाम से  सबसे ख़ुद के  पाँव पकडवाता रहा  ! और  सारा माल दक्षिणा मेरे नाम पे लेके ऐश करता रहा ? मेरे तक किसी एक को भी नही आने दिया ! और मैं यहाँ भक्तो के लिए तरसता रह गया ?   चल जल्दी नर्क में  जा ! नही तो उससे भी बड़ी सजा तेरे को दे देंगे ! यमदूत ले गए उसे नर्क में !

 

अब यमराज ताऊ की तरफ़ मुखातिब हुए यह सोचते हुए की इस ताऊ को तो सीधे खोलते हुए गर्म तेल में डालने की सजा सुनाऊंगा !

 

ताऊ का सारा प्रोफाईल ऊपर से चित्रगुप्त सुनाता रहा ! और यमराज नोट लगाते रहे बीच बीच में सजा के हिसाब से ! फ़िर उधर से चित्रगुप्त ने  बताया की ताऊ का मुख्य काम लोगो को  बिगाड़ने का है ! तो यमराज के माथे पर बल पड़ गए ! उसको लगा की ये तो बच जायेगा ! फ़िर जब चित्रगुप्त ने बताया की ताऊ तो शेयर ब्रोकर है ! बस यमराज तो तुंरत उठे और आकर ताऊ को गले लगा लिया !

 

यमराज बोले - ताऊ , पहले बताना था ना की तुम शेयर ब्रोकर हो ? अरे तुम तो पृथ्वी लोक में हमारे सच्चे सेवक और प्रतिनिधी हो ! तुम वहाँ लोगो को इतना दारुण दुःख देते हो की लोग सीधे हमको ही याद करते हैं ! तुम्हारे द्वारा दिए गए कष्टों  की वजह से वो सीधे  राम नाम पुकारने लगते हैं ! यानि लुट पीटकर मेरी शरण आ जाते हैं ! तुम मेरे सच्चे भक्त हो ताऊ ! आजकल पृथ्वी लोक में सिर्फ़ तुम्हारी वजह से ही लोग हमको याद करते हैं वरना तो ये बाबा लोग ख़ुद ही भगवान् बन बैठे हैं ! वहा किसी को हमारी जरुरत ही नही रह गई लगती है !

 

अगर तुम उनको दुःख ना दो तो वो हमको याद ही नही करे ! तुम्हारी वजह से ही हमारी दूकान दारी चल रही है ! नही तो आजकल ये बाबा लोग ख़ुद ही भगवान् बन कर लोगो को हम तक आने से रोक लेते हैं ! तुम तो सीधे स्वर्ग के अधिकारी हो ! और तुमसे तो हम बहुत प्रशन्न हुए ! मांग लो तीन वरदान तुम तो ताऊ ! तुम भी क्या याद करोगे की किसी यमराज से मुलाक़ात हुई थी !

 

और ताऊ ने - पहला वरदान माँगा  , मेरे लिए ब्लागीवूड ही स्वर्ग है ! जब तक मेरी इच्छा हो मुझे वहीं रहने दिया जाए !


यमराज - तथास्तु !

 
दूसरा वरदान ताऊ ने माँगा - मेरे संगी साथी ब्लागरो पर आपके ये चंगूमंगू (यमदूत) , बिना उनकी मर्जी के नजर नही डाले !

 
यमराज - तथास्तु !


ताऊ - और तीसरा वरदान दीजिये की मेरी चम्पाकली और अनारकली की  आप ना तो खाल खिंचवायेंगे और ना उनको जिंदा दीवार में चुन्वायेंगे ! और अगर आपका भैंसा उनको पसंद आ गया तो उनकी शादी में आप रोडा नही अटकाएंगे !

 

यमराज - ताऊ ये ज़रा मुश्किल काम है ! फ़िर हम पैदल हो जायेंगे !

 

ताऊ ने कहा - महाराज आप की सेवा में महिष राज हमेशा प्रस्तुत रहेंगे ! आप चिंता मत कीजिये !

 

यमराज - वाह ताऊ वाह मैं तुमसे बहुत प्रशन्न हूँ ! एक वरदान और मांग लो !

 

ताऊ ने सोचा - इसको बड़ी वरदान देने की चढी है ! ताऊ की एक बार तो इच्छा हुई की इनको कहे - आप नर्क का राज्य मेरे को दो और आप संन्यास लेके निकल लो ! पर फ़िर कुछ सोच कर चुप रह गया ! 

 

फ़िर ताऊ बोला - महाराज आप इतना आग्रहपूर्वक कह रहे हैं तो और एक मांग लेता हूँ ! मेरे बाप का क्या बिगड़ने वाला है ? ये चाँद का पट्टा मेरे नाम करवा दीजिये !

मेरी भैंसों को यहाँ चाँद पर रखूंगा ! एक तो पृथ्वी पर प्रदुषण बहुत ज्यादा है ! इस वजह से मेरी नाजुक भैंसे बहुत जल्दी सर्दिया और जुखामियाँ जाती है !


यमराज - तथास्तु !

 

इतनी देर में गुरुदेव की उड़नतश्तरी आ गई और यमराज को नर्क के दरवाजे तक छोड़ कर ताऊ उसी उड़नतश्तरी से पृथ्वी लोक लौट आया ! अब चूंकी चाँद ताऊ का है सो चम्पाकली वहा रहे या यहाँ !  क्या फर्क पङता है ? दोनों ही उसके घर हैं !

 

इब खूंटे पै पढो :-                                                                                 

 

ताऊ के हाथ पैर जगह जगह से सूजे हुए थे !  कहीं  से पिट कर आया था !
सहानुभूति जताते हुए भाटिया साहब और  मोदगिल साहब  आए और बोले - अरे ताऊ , तेरे को किस कमीने ने मारा ? अरे कीडे  पड़े उस मारने वाले दुष्ट को ! सत्यानाश हो उस हरामी का ! अरे उस बदमाश....

 

अब ताऊ बीच में ही बोल पडा - बस बस भाटिया साहब ! ताई के लिए अब मैं और ज्यादा गालियाँ नही सहन कर सकता !



ताऊ की भैंस से यमराज के भैंसे का इश्क परवान चढ़ा !

अब वहाँ चाँद पर से यमदूतो के साथ ताऊ चलने लगा तो भाटिया साहब की आँखे भर आई ! और दौड़ कर आकर ताऊ के गले लग गए ! ताऊ भी काफी भावुक हो गया ! फ़िर भाटिया जी बोले भाई तू इब हमेशा के लिए जावै सै  ! एक बार ताजा लस्सी  और पीले और उसके बाद हुक्का पीके चले जाना ! तेरे को आज के बाद  वहाँ हुक्का चिलम कुछ नही मिलेगा ! इब भाटिया साहब बोले - ताऊ तुम चिंता मत करना ! तुम मुझे ख़बर करवा देना की तुमको ये कौन से नर्क में ले गए हैं !

 

अपने तिवारी साहब और भूतनाथ वहीं पर नरको में सजा देने के ठेके आज कल लेते हैं ! और उनकी बॉस भी जर्मनी वाली यूनिटी ही है ! और मेरी उससे काफी गहरी जान पहचान है ! और तिवारीसाहब से तो तेरी पहचान है ही और भूतनाथ भी समझ ले अपना ख़ास आदमी है ! मेरे कहने के बाहर नही वो !  सो मैं ऐसा इंतजाम कर दूंगा की तुमको वहाँ कोई तकलीफ नही हो !

 

Yamaraj vahan इतनी देर में ताऊ की भैंस जोर जोर से रेंकने लग गई ! सबने देखा तो सामने से झौठे ( भैंसे ) पर बैठे यमराज चले आ रहे थे ! आते ही उन यमदूतो पर बरस पड़े ! तुम लोग निक्कमे और काम चोर हो गए हो ! तुमको ज़रा भी शर्म  नही है ! अगर एक आदमी को लाने में इतनी देर लगाओगे तो नर्क का काम काज कैसे चलाऊंगा मैं ? और उन्होंने भैंसे की पीठ से उतर कर ताऊ की तरफ़ देखा ! जैसे किसी मच्छर की तरफ़ देखते हैं !

 

ताऊ और उसकी प्यारी भैंस पृथ्वी  से चलते समय एक प्लान  बना कर निकले  थे ! अब लगता  है उसका  कार्यान्वन का समय आ गया था !

 

ताऊ चुपचाप अपनी भैंस के पास गया और धीरे से उसको बता दिया की अब मेरी जान तेरे हाथ है ! बहुत होशियारी से सब काम करना है ! अगर सफल रहे तो ब्लागीवूड में वापस,  नही तो यहाँ नर्क में ही मरना है !

 

भैंस बोली -- ताऊ आप चिंता ही मत करो ! मैं मेरे प्राण रहते तक आपके प्राण संकट में नही पड़ने दूंगी ! हम दोनों ही इनके चंगुल  से लौट कर वापस चलेंगे ! आख़िर मुझे भी तो ब्लागीवूड की हिरोईन बनना है !


ताऊ अपनी भैंस की पीठ थप थपा कर बोला -  शाबास , मुझे तुझसे यही उम्मीद थी !

 

बस जैसे ही ताऊ ने अपनी भैंस की तरफ़ एक इशारा भर किया और ताऊ की प्यारी भैंस तुंरत समझ गई ताऊ की भाषा ! इब ताऊ की भैंस ने यमराज के झौठे की तरफ़ बड़े प्यार से देखा ! जैसे फ़िल्म नया दौर में वैजयंतीमाला ने दिलीप कुमार की तरफ़ देखा था ! बस यमराज का झौठा महाराज तो ताऊ की झौठडी पै मर मिटा ! आख़िर ताऊ की झौठडी किसी हिरोईन से कम नही  थी !  

 

इब ताऊ और भैंस की योजना के मुताबिक  भैंस धीरे धीरे पीछे खिसकना शुरू हुई ! इधर यमराज अपने यमदूतो यानी अपने एजेंटो को डांटने में लगा था ! और उधर ताऊ की झौठडी अपने इरादों में सफल हो गई !

 

काफी दूर निकलने के बाद झौठडी बिल्कुल इठला इठला कर हिरोईन की तरह चलने गई !  जैसे ही झौठा राम पास आते ,  वो तेज तेज दौड़ लगा देती ! उनका यह लुका छिपी का दौर काफी देर चलता रहा !

 

 

yam-bhainsa आख़िर झौठाराम के काफी अनुनय विनय के बाद वो एक पेड़ के नीचे रुक गए ! और घंटो एक दुसरे की आँखों में खोये रहे ! दोनों में प्यार हो गया !

 

भैंसा : आप का नाम क्या है ? आपका परिचय देने की कृपा करे ! हे महिषनि जी   मैं अब आपके बिना जिंदा  बिना जिंदा नही रह पाउँगा !

 

भैंस : हे महिष राज ! कहाँ मैं और कहाँ आप ? आप साक्षात महिषासुर अवतार हैं और मैं एक सीधी साधी पृथवी लोक में  एक ताऊ के घर रहने वाली गाँव की भैंस हूँ ! आपकी मेरी क्या बराबरी ?


भैंसा : हे महिष्नन्दिनी ! प्रिये ! आप इस तरह के वचन मत बोलिए ! हम आपके लिए आकाश पाताल एक कर देंगे ! हमने आपके जैसी अनिन्ध्य सुन्दरी और रूपवती कोई दूसरी राजमहिषी नही देखी ! आज से आप हमारे दिल की रानी हैं ! हम आपसे अभी और इसी वक्त शादी करना चाहते हैं !

 

भैंस : ये आपकी जर्रानवाजी है मेरे सरताज ! और बड़े प्रेम से उसकी तरफ़ निहारा ! और चलने लगी ! दोनों चलते चलते काफी दूर निकल गए ! और प्यार की पींगे बढाते हुए गाने गाते हुए हरी हरी घास खाने में मगन हो गए ! भैंस उसको ज्यादा से ज्यादा दूर लेकर निकलना चाहती थी !

 

yamraj उधर ताऊ का नर्क में प्रवेश का समय निकलता जा रहा था ! यमराज अपने दूतों से बोले :  अरे नालायको , अभी और तुंरत निकलो यहाँ से ! और मेरा भैंसा कहाँ है ? सब भैंसे को देखने लगे ! भैंसा हो तो मिले ! इब ताऊ मन ही मन मुसकराने लगा !


एक ताऊ को छोड़ कर किसी को नही मालुम था की क्या हुआ ? बहुत देर हो गई ! यमराज परेशान दिखाई देने लगे ! उनको काफी तेज तेज गुस्सा आने लगा ! उन्होंने तुंरत चित्रगुप्त , अपने सेक्रेटरी से संपर्क किया और उसको सारी बात बताई ! उधर से चित्रगुप्त बोला - महाराज आप दो मिनट इंतजार करिए मैं आपको पता लगाके फोन करता हूँ !

 

दो मिनट यमराज जी के लिए दो युगों के बराबर साबित हुए ! यमराज बड़ी व्यग्रता से चक्कर काट रहे थे ! जैसे ही उनके मोबाईल की घंटी बजी उन्होंने तुंरत फोन उठाकर कहा  - हेल्लो , हाँ .. चित्रगुप्त .. मैं बोल रहा हूँ ! क्या ..? क्या कहा तुमने ..?

नही ...नही .. ! ऐसा नही हो सकता ! वो मुझे धोखा नही दे सकता ! अब मैं कैसे लौटूंगा ?

 

इधर ताऊ मन ही मन मुसकरा रहा था ! भाटिया जी को कुछ समझ नही आरहा था ! उधर यमदूत दांत पीस रहे थे ताऊ के ऊपर ! और भैंस को साथ लाने का मतलब भी उनके अब समझ आया ! अगर ये भैंस सहित नरक में प्रवेश पा गया तो वहाँ की सब व्यवस्थाए ही ध्वस्त कर देगा ! और लगा की अब उनकी नौकरी गई और ताऊ की तरफ़ जलती नजरो से देखने लगे !

 

भैंस और ताऊ की योजना यहाँ तक तो सही काम कर गई ! और ताऊ का दिमाग  अब तेजी से आगे की योजनाओं में उलझ गया ! और ताऊ को ये चिंता भी सताने लग गई की कहीं उसकी प्यारी भैंस किसी परेशानी में ना फंस जाए ! पता नही वो यमराज का दुष्ट झौठा उसे कहाँ ले कर गया होगा ? 


पर ताऊ को अपनी भैंस की बुद्धि पर पूरा यकीन था !  आख़िर ताऊ के साथ रहते रहते उसने भी काफी दांव पेच सीख लिए थे ! बस ताऊ के दो ही तो संगी साथी रह गए थे बिल्कुल भरोसे मंद , पहला  लट्ठ और दूसरी ये भैंस !



 

        इब खूंटे पै पढो :-

 

        तीन प्रकार के मित्रों से बचना चाहिए !

 

        १. झूँठी वाहवाही करके जब तक कुछ मिले वह "ताली मित्र"
        २. दारु की प्याली जब तक मिले वह "प्याली मित्र"
        ३. खाने को जब तक मिले वह "थाली मित्र"


यमदूत ताऊ को लेकर चाँद पर पहुंचे

ताऊ को जब यमराज के एजेंट आकर बोले - ओये ताऊ चल उठ खडा हो और हमारे साथ चल ! 

ताऊ एक बार तो कुछ समझा कोनी ! फ़िर अपना साफा बाँध कर लठ्ट उठाया और भैंस को खोल कर उनकै साथ चल दिया ! 

इब उनमै तैं एक घणा काला सा हब्शी जैसा एजेंट था वो बोल्या - अरे ओ ताऊ के ! तेरे को किम्मै दिखै कोनी के ? 

अरे हम यमराज के दूत हैं और तेरे को नरक ले जाने आए हैं ! तू ये लट्ठ और भैंस खोल कर कहाँ जावै सै ?

चल हमारे साथ , सीधी तरह से !  इब ताऊ कै समझ म्ह आया की असली माजरा क्या है ?

ताऊ बोला - देख भाई कालिए ! ताऊ अपने लट्ठ और भैंस क बिना तो घर सै बाहर भी नही निकलता है ! 

और लट्ठ तान कर किम्मै छोह (गुस्सा ) म्ह आके बोल्या -  नही तो निकल ले यहाँ से !

असल में यमराज जी के एजेंटो को भी हमारे यहाँ के बैंक वसूली एजेंटो की तरह ऎसी बात सुनने की आदत ही नही थी ! और जैसे बैंक वसूली एजेंटो को देख कर कर्ज दार छुप जाया करता है वैसे ही यम् एजेंटो को देख कर आदमी थर थर कांपने लगता है ! यम् दूतो को कुछ करना नही पड़ता वो तो उनके भय से ही आदमी मर जाता है ! बिना मेहनत की कमाई खाते हैं आजकल यमदूत भी !   और कुछ यमदूत तो इतने सयाने हैं की उन्होंने बैंक वसूली एजेंटो को ठेका दे रखा है ! इसीलिए बैंक वसूली  एजेंट कर्जदारों को इतना परेशान करते हैं की वो ख़ुद ही आत्महत्या कर लेते हैं ! इधर बैंक से वसूली कमीशन मिल जाता है और उधर यमदूतो से भी तगडा कमीशन झटक लेते हैं ! आम के आम और गुठलियों के दाम ! असल में यमदूतो ने अपना ये काम आउट सोर्स कर रखा है इनको ! 

अब वो ताऊ की जिद्द से परेशान होके बात कर रहे थे की इसको कैसे ले चले ? ये आदमी कुछ उलटा सीधा ही है ! उनमे से एक बोला - ऐसा करो ,  इस ताऊ की सुपारी किसी बैंक के वसूली  एजेंट को दे दो ! इसको वाया आत्महत्या ही आने दो ! अगर ये भैंस और लट्ठ ले के नरक में घुस गया तो हमारी रेप्युटेशन की बारह बज जायेगी ! और हमारी सी.आर. खराब होगी अलग से !

पता लगाओ इस ताऊ ने कौन से बैंक का लोन ले रखा है ! उन लोगो ने सब जगह मोबाईल से पता किया पर कोई भी बैंक का लोन नही बाक़ी था ! अब बाक़ी नही था या लिया ही नही था ! अब ये अलग बात थी की बैंक वालो ने ताऊ के चाल चलन की वजह से ताऊ को लोन  दिया ही नही था ! क्योंकि ताऊ का प्रोफाईल ही लोन देने लायक नही था ! क्यों नही था ?  वो आपको अगली पोस्ट में पता लग जायेगा !   और मुश्किल बढ़ गई ! और उनमे से एक  यमदूत बोला - देखना , इस पागल ताऊ से संभलके रहना ! यह देखने में बावलीबूच जरुर लगता है पर है नही ! ये होशियार आदमी है ! अगर होशियार ना होता तो बैंक का लोन इसपे जरुर  होता !  ये कैसे सम्भव है की इसपर बैंक का लोन भी ना हो ! बिना बैंक के लोन वाला आदमी खतरनाक होता है ! इसकी झौठडी भी बिना लोन की है इसी लिए ये उससे भी प्रेम करता है ! और अपने साथ ही नर्क ले जाना चाहता है !   और वो बिचारे चिंता में पड़ गए ! ऐसे करते २ चाँद तक पहुँच गए !

वहाँ चाँद पर  भाटिया जी के ठेले पर जाकर ताऊ रुक गया ! अपनी भैंस को बाँध दी ! ख़ुद ने भी पानी पीया और उन यमदूतो को भी पिलवाया ! वहाँ मालुम पडा की नीचे से योगीन्द्र भाई का फोन आया था की ताऊ की फोटो उठावने में रखने के लिए चाहिए ! भाटिया जी बोले - ताऊ मैं तो तेरी गमी के लिए घर जा ही रहा था ! बस यहाँ का ठेला का काम काज निपटाने आया था ! अच्छा हुआ तुम यहाँ से होके आगये ! तुमसे मिलना भी हो गया ! चल इब तेरी फोटू खिंचवा देता हूँ ! मैं ही साथ लेता जाउंगा ! कोरियर का खर्चा भी बचेगा !

चाँद पर स्टूडियो आले ने फोटू खिंची तो उसमे जूते कोनी आवै थे ! अगर जूते आते फोटू में तो सर नही आ रहा  था ! और ताऊ जिद्द पर अड़ गया की मेरे सर के साथ साथ  मेरे नए जूते जरुर आने चाहिए फोटू म्ह ! उधर यमदूत परेशान हो रहे थे की इसे ले जाने में देर हो रही है और इधर भाटिया जी परेशान की नीचे धरती पर ताऊ को फूकने ( अर्थी निकालने में ) में देर हो री सै ! हार थक कै भाटिया जी नै ताऊ से कही - अरे ताऊ एक काम कर, तेरे जूते उतार ले और उनको सर पर बाँध ले  और फ़िर फोटू म्ह तेरा सर भी आजावैगा और तेरे जूते भी आजावैंगे ! 

ताऊ बोल्या - वाह वाह भाई साहब क्या बढिया आईडिया दिया आपने ! इसीलिए तो आप हम सब भाईयो म्ह सबसे बुद्धिमान हो ? इनको एक घंटा हो गया बावली बूचो को , मुझ मरे हुए को परेशान करते हुए ! और डांटते हुए उन यमदूतो को बोला - चलो रे बावली बूचो,   जल्दी से, नही तो  देर हो जायेगी ! हम भी थारे नर्क का तमाशा देखेंगे ! ( नरक में ताऊ के साथ क्या हुवा ? यह अगली बार )

                   

इब खूंटे पै पढो :-

(रमकुडी - झमकुडी)

रमकुडी  - यो ताऊ के हौवे सै ?
झमकुडी - ऐ छोरी इब सोज्या ना ! यो ताऊ तो बालकां नै 
             डराण के काम आवै सै ! असल मे यो किम्मै ना होता ! 
             कोरा मन का बहम हौवे सै !



हाथी परमात्मा और मक्खी ताऊ


रात समय तकरीबन आठ बजे ! सांयकाल को टहलते समय
अचानक चांद पर नजर पडी ! और ताऊ बस देखता ही रह गया !
हलके बादलों के बीच इतना सुन्दर चांद दिखाई दे रहा था कि उसकी
तसवीर उतारने की कोशीश की ! जैसी भी आई , उससे अच्छी
फ़ोटो एक मोबाइल कैमरे से क्या आयेगी !

वहीं एक दिवार पर बैठे बैठे चांद को देखते देखते पता नही
कब मन खो सा गया ! इतनी गहरी शान्ति अनुभव हुई कि बता
नही सकता ! अजीब मदहोशी पूरे आलम मे बिखरी हुई थी !
वहीं चांद को देखते देखते कुछ पल तो मन ठहरा फ़िर
चलायमान हो गया !

वहीं बैठे बैठे युं ही एक विचार पैदा हुआ ! कारण कुछ समझ
मे नही आया ! सपना भी नही था ! शायद कोरा विचार ही था !
शायद आप समझ पायें तो सोचा आपसे भी साझा करता चलुं !

एक जन्गल मे एक हाथी था ! हाथी बडा मस्त ! ना किसी के
लेने मे और ना किसी के देने मे ! गजराज अपने मे ही मस्त !
और इसी हाथी के आस पास एक मक्खी भी रहती थी ! और भी
रहती होंगी पर ताऊ को इसके अलावा किसी का पता नही !
और हाथी को तो इसका भी पता नही ! हाथी जहां जहां
भी जाता , मक्खी भी वहां वहां आनन्द लेती ! और हाथी को
इससे क्या फ़र्क पडना था ! हाथी अपनी मस्ती मे कभी पेड
उखाड देता, कभी नदी मे तैरता.. पानी उछाल देता ! मूड आ गया
तो किसी को उठा कर पटक देता ! अब आप जानते ही हैं कि हाथी
की ताकत का क्या अन्दाजा ? हाथी का रुप तो आप समझ लें
की परमात्मा जैसा ! कहीं तान्डव कही भुकम्प ! कही शान्ति !

और ये जो महारानी मक्खी थी , ये तो हाथी की पीठ पर ही रहती
थी ! और धीरे धीरे उसने भी अपने आपको हाथी के इन कामों मे
भागीदार समझना शुरु कर दिया ! मतलब वो समझने लग गई
की ये हाथी जो भी काम करता है ! उन सब कामों मे मैं भी
बराबर की हिस्सेदार हुं ! मतलब सब काम हाथी उसकी मदद
से ही करता है ! ले दे कर हाथी बिना मक्खी की मदद के कुछ
नही करता है !

एक दिन हाथी एक लकडी के पुल पर से गुजर रहा था ! और
आदतन मक्खी उसकी पीठ पर सवार थी ! हाथी को पुल पर से
गुजरते हुये कुछ अटपटा सा लगा ! और इसी अटपटे पन मे
हाथी ने दो चार बार पैर पटका और चुंकी पुल कमजोर था !
सो टुट गया ! और हाथी पुल पर से आगे की तरफ़ कूद गया !
और मक्खी उपर से चिल्लाई -- बेटा आखिर हमने पुल को
तोड ही लिया !
हाथी चौन्का और उडती हुई मक्खी को देख कर
बोला -- हां अम्मा ! तेरी मेहरवानी ! पर इतने दिन तू
कहां थी ?
मक्खी बोली-- तू जितने भी कार्य करता था उन सबमे मैं ही
तो तेरी मदद करती थी ! हमेशा सब कामों मे तेरी मदद मैं
करती आई हूं ! अब हाथी को बोलने के लिये बाकी ही
क्या बचा था ! हाथी अपनी धुन मे आगे बढ गया !

इस विचार का मतलब क्या है ? मुझे नही पता ! पर इतना पता
जरुर है कि ये हाथी ही परमात्मा है और ये मक्खी ही ताऊ है !
क्या वाकई ताऊ को ये भ्रम नही हो गया है ? हे परमात्मा रुपी
हाथी, इस मक्खी रुपी ताऊ की भूल को माफ़ कर !
और मेरे प्रणाम स्वीकार कर !