खैर ताऊ और बंदर में कुछ फ़र्क नही होता....इधर उधर जहां इच्छा हुई वहां क्लिक करना शुरू किया....ज्यादातर पहचान वाले ब्लागरों की पोस्ट वहां थी सो ट्रायल मारने के लिये Like दबा दिया वहां तुरंत Unlike लिखा आ गया...अब हम तो घबरा गये कि ये शायद हमने उसकी पोस्ट को Unlike कर दिया है...पता नही, अब वो क्या सोचे? ब्लाग पर किसी की पोस्ट पर Unlike ठोक दो तो भूचाल आजाये..... इसलिये दो चार दिन तो डर के मारे फ़ेसबुक की तरफ़ मुंह ही नही किया. बंदर को कुछ कुछ स्वाद आ गया था सो एक दिन फ़िर हिम्मत जुटाकर फ़ेसबुक की तरफ़ फ़ेस किया. जैसे चोर चोरी करने के पहले हालात का जायजा यानि रैकी करते हैं उसी तरह से इधर उधर देखते रहे कि कौन कैसे क्या क्या कर रहा है...
रैकी करते करते पता नही.. कितनों की पुरानी फ़्रेंड रिक्वेस्ट पडी थी...उन सबको बिना सोचे समझे confirm कर दिया. फ़ेसबुक द्वारा सुझाये गये कई नामों पर हमने क्लिक कर दिया ये समझकर कि वो हमे फ़्रेंड बनने का न्योता दे रहे हैं. कुल मिलाकर बंदर के हाथ उस्तरा लग चुका था.
इसी तरह क्लिक करते करते एक जगह क्लिक हो गया, वहां डा. मोनिका शर्मा का मेसेज दिखा कि आपके ब्लाग की खबर राजस्थान पत्रिका में है...ताऊ ने तुरंत निवेदन किया कि एक स्केन कापी भिजवा सकें तो मेहरवानी होगी....यह लिखकर बटन दबाते ही तुरंत उनके मेसेज के नीचे ध्यान गया तो वहां पहले से ही ई-संस्करण का लिंक उन्होने दे रखा था....अपनी ताऊ बुद्धि पर थोडी शर्म आई, फ़िर यह सोचकर अपने को माफ़ कर लिया कि इसीलिये लोग हमें ताऊ कहते हैं.
ताऊ और नान-ताऊ में बस यही एक मोटी बुद्धि का फ़र्क होता है.:)
राजस्थान पत्रिका में छपी खबर नीचे है. बाद में मालूम पडा कि 16/03/2013 के पत्रिका अखबार के सभी संस्करणों में यही छपा था. जो हमारे शहर के संस्करण मे भी था जिसकी कापी भी हमें प्राप्त हो गई है.
वाह वाह ताऊ क्या लात है? प्रतियोगिता आगे भी जारी रहेगी.....
