चच्चा रामपुरी के चाकू को देखकर हमेशा की तरह आन लाईन कैट स्केनिंग का कार्यभार संभालने वाली मिस रामप्यारी कहीं दुबक गई है. अत: चच्चा की रचना बिना कैट स्केन के ही सीधे आन एयर करना पड रही है. तो अब मैं आमंत्रित करता हूं आज की रेवडी प्राप्त चाकू कवि चच्चा रामपुरी को...आईये चच्चा .. अपनी बिल्कुल ताजी और नई नवेली चाकू रचना से इस गरही सम्मेलन की गरिमा बढाकर हम सब को कृतार्थ किजिये..
कुछ गाने को दिल करता है, सुना लूँ?
तालियाँ बजाओगे या रामपुरी निकालूँ?
दिल के बहाने कहीं ले न उडें चुप के
ज़रा सा रुक जाओ, बटुआ छिपा लूँ
जिनकी होनी थी उन सबकी हो ली
मस्ती में मैं भी तो रंग में नहा लूँ
लाज की लाली से लाल हो रहे हैं जो
उन गालों से थोडा सा रंग चुरा लूँ?
कुछ गाने को दिल करता है, सुना लूँ?
तालियाँ बजाओगे या रामपुरी निकालूँ?
आप सब को अनुराग शर्मा की ओर से होली की अनंत शुभकामनाए.