प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरै की घणी राम राम.
ताऊ शनीचरी पहेली के दुसरे राऊंड के अंक नौ में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं.
आपके सुझावों का हमे सदैव ही इंतजार रहता है. आपकी राय हमारे लिये महत्व पुर्ण है. कृपया अपनी राय अवश्य देते रहिये. अब दूसरे राऊंड की समाप्ति मे सिर्फ़ एक अंक और बचा है. उसके बाद इस पहेली के स्वरुप मे आपकी तरफ़ से कुछ सुझाव हों तो अवश्य बतायें. आपकी बात जानकर हमें हार्दिक प्रशन्नता होगी.
इस पहेली के भी नियम पुर्ववत ही हैं. क्ल्यु आपको रामप्यारी के ब्लाग से मिलेगा. जो आप यहां चटका लगा कर भी जा सकते हैं. या साईड बार की उसकी फ़ोटो पर चटका लगा कर भी जा सकते हैं. उसके ब्लाग पर साईड बार मे आप क्ल्यु की फ़ोटो पर चटका लगा कर वापस यहां आ सकते हैं.
यहां साईड बार के सूचना पटल पर भी नजर डाल कर देखते रहियेगा.
जैसा की आप जानते हैं कि दिलचस्प टिपणी खोज कर विदुषक के तीन खिताब हमारे नये सदस्य हीरामन देते हैं. अत: टिपणि को भी आप मनोरंजक शब्दों से लिखें
कृपया मुख्य पहेली और रामप्यारी का जवाब अलग अलग टिपणी मे देवें. क्योंकि इससे जवाब बनाने मे आसानी रहती है. और नम्बर देने मे भी गलती की संभावना नही रहती.
आईये अब आपको आज की पहेली की तरफ़ ले चलते हैं.
यह कौन सी जगह है?
अब रामप्यारी का विशेष बोनस सवाल : - ३० अंक के लिये
हाय आंटीज, अंकल्स एंड दीदी लोग..वैरी सवीट एंड समाईली गुड मोर्निंग फ़्रोम मिस रामप्यारी…
वो पिछले हफ़्ते क्या हुआ ना…आप लोगों ने मुझे सात चिरंजिवियों के नाम तो बता दिये. पर वो है ना..वो है ना..प्रकाश गोविंद अंकल….उन्होने ना…मुझे टीचर से बिना फ़ालतू मे डांट पिटवा दी…वो तो मैं कूद कर आलमारी पर चढ कर बैठ गई वर्ना तो वो टीचर मुझे इनिशियल एडवांटेज भी दे ही देती..
हुआ यों कि टीचर ने आते ही पूछा – रामप्यारी खडी हो जाओ…तो मुझे काहे का डर? मैं तो खडी हो गई. अब टीचर ने पूछा : सप्त चिरंजिवियों के नाम बताऒ.
अब हुआ ये कि प्रकाश गोविंद अंकल ने सप्तचिरंजिवियों के अलावा सप्त ऋषि और सप्त प्रजापतियों के नाम भी बताये थे . अब आपको तो मालुंम है कि रामप्यारी तो रट्टे मारकर याद करती है, अक्ल लगाने का तो कोई काम नही, सो मैं भी उसी जवाब को पक्का घोट कर गई थी. सो मैने बोलना शुरु किया. : टीचर जी…मैं सब याद करके आई हूं. अभी बताती हुं सब कुछ.
टीचर बोली : बताओ.
मैं बोली - टीचर जी पक्का जवाब याद करके आई हूं…. और र्मैने बोलना श्रु किया…. टीचर जी …मिल गए...मिल गए...मिल गए सप्त चिरंजीवियों के नाम मिल गए ! रामप्यारी लक्ष्मण का नाम तुम हटा दो ! इस बार पक्का ! सप्त चिरंजीवी हैं :- विभीषण, कृपाचार्य परशुराम हनुमान, वेद व्यास, बलि, अश्वत्थामा और टीचर जी आठवें नंबर पर मार्कंडेय का नाम होना चाहिए.
और टीचर जी अगली बार फिर कोई इसी तरह का लफड़ा मत पूछ लेना , इसलिए सप्त ऋषि और सप्त प्रजापति के नाम भी आज ही सुन ले. सप्त ऋषि :-
1. देव ऋषि, 2. ब्रह्म ऋषि, 3. महर्षि, 4. परम ऋषि, 5. राज ऋषि, 6. कंद ऋषि, 7. रुथ ऋषि
अब टीचर बीच मे ही चिल्लाई : रामप्यारी ये क्या बक बक कर रही हो तुम? भांग पी कर आई हो क्या? मैने कहा – टीचर्जी, भांग की आधी गोली का नशा तो रामप्यारी को बिना पिये ही रहता है. इसीलिये तो इतनी बकबक करती हूं. टीचर अब सात प्रजापतियों के नाम भी सुन ही लो, वर्ना बाद मे मैं भूल जाऊंगी. ये सप्त प्रजापति हैं :- 1. महर्षि भ्रगु, 2. महर्षि अंगीरा, 3. महर्षि मिरिच, 4. महर्षि पुलह, 5. महर्षि अत्री, 6. महर्षि पुलस्य 7. महर्षि केतु अब तो टीचर जोर से डंडा उठाकर मेरी तरफ़ दौडी और बोली : जबान चलाती है? जो सवाल पूछा गया उतने का ही जवाब देना चाहिये.
मैने कहा : ऎडवांस मे रखलो टीचर…फ़िर कभी तो फूछोगी ही.
अब तो टीचर बस गुस्से मे पागल हो गई और डंडा फ़ेंक मारा मेरी तरफ़. मैं तो चढ गई आलमारी पर.
टीचर बोली – ठीक है तू इतनी ही होंशियार और अक्लमंद है तो इंद्र की सभा की सात सर्वश्रेष्ठ अप्सराओं के नाम बता.
मैने कहा – टीचर जितने भी सात होते हैं वो तो मैने बता दिये.
टीचर बोली – सोमवार को याद करके आना वर्ना तेरी पिटाई पक्की.
तो मैने घर आकर इस सवाल का जवाब ढूंढ कर रट्टे मार कर याद कर लिया. अब यहां भी वही गडबड हो गई कि एक नाम ज्यादा याद कर लिया. अब आप तो मुझे यह बता दिजिये कि इनमे से कौन सा नाम हटा दूं? यानि जो आठवां नाम गलत है उसे हटाना है.
सवाल इस प्रकार है :- इन्द्र की इन्द्रसभा मे सात सर्वश्रेष्ठ अप्सराओं की गिनती मे निम्न अप्सराएं आती हैं. इनमे से सात नाम सही हैं और एक गलत है. कौन सा नाम गलत है? बताईये.
१. मेनका २. रम्भा ३. उर्वशी ४. स्वर्णलता ५. तिलोतमा ६. सुकेशी ७ धृताची ८ मंजुघोषा
अब मैं आपको दस बजे मेरे ब्लाग पर क्ल्यु के साथ मिलूंगी..आज मेरी छुट्टी है तो मैं जरा आराम से सोकर ऊठूंगी दस बजे तक. अच्छा अब रामप्यारी की तरफ़ से रामराम
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इस अंक के आयोजक हैं ताऊ रामपुरिया और सु,अल्पना वर्मा