और इसके बारे मे संक्षिप्त सी जानकारी दे रही हैं सु. अल्पना वर्मा.
बहनों और भाईयो नमस्कार. आईये अब आज के पहेली के स्थान के बारे में कुछ जानते हैं.
सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की देवाशरीफ दरगाह
उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है 'बाराबंकी'.यह लखनऊ से २९ किलमीटर पूरब में स्थित है.
बाराबंकी को नवाबगंज के नाम से भी जाना जाता है.यह जगह ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण है।
इस जगह पर कई राजाओं ने लम्बे समय तक शासन किया|
देवाशरीफ स्थित दरगाह लखनऊ से 42 किलोमीटर और बाराबंकी के जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर की दूरीपर स्थित है.सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की जन्मस्थली देवा है.उनका जन्म वर्ष 1823 इसवी में हुआ था

'जो रब वही राम 'का संदेश देने वाले सूफी संत हाजी शाह ने विश्व के सभी लोगों को प्रेम से रहने का संदेश दिया था. उनकी मृत्यु के पश्चात् उनके हिन्दू और मुस्लिमों शिष्यों ने मिलकर उनकी याद में यह स्थान बनवाया था
हर साल यहाँ जुलाई के महीने में उर्स और कार्तिक माह में .सैयद कुर्बाद अली शाह के उर्स पर काफी बड़े मेले काबाराबंकी- फतेहपुर मार्ग पर आयोजन किया जाता है,जिसे देवा मेला के नाम से जाना जाता है.
कहते है की मुस्लिमो के तीन मुख्य तीर्थ स्थान ख्वाजा साहब अजमेर और निजामुद्दीन औलिया दिल्ली की यात्रादेवा के हाजी वारिस अली शाह पर माथा टेकने के बाद ही पूरी मानी जाती है। यहाँ अन्य धर्मो के लोग भी उसी संख्या में माथा टेकते हैं जितने की मुस्लिम समुदाय के लोग।
हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक भी इस दरगाह को माना जाता है.
बाराबंकी में देखने के लिए अन्य स्थल-

१-पारिजात:-बाराबंकी पारिजात वृक्ष के लिए विश्व प्रसिद्ध है.
पारिजात किन्तूर गांव में है। इस जगह पर एक मंदिर है जिसकी स्थापना कुंती ने की थी. मंदिर के समीप में ही यह वृक्ष है जिसे पारिजात के नाम से जाना जाता है. माना जाता है कि यह वृक्ष लगभग 1000 से 5000 वर्ष पुरानाहै। इस वृक्ष की ऊंचाई लगभग 45 फीट है। इस वृक्ष में लगने वाले फूल काफी सुंदर होते हैं और इन फूलों का रंग सफेद होता है.इस वृक्ष के बारे में लोगों के अलग-अलग विचार है.कुछ का मानना है कि इस वृक्ष को अर्जुन स्वर्ग से लाए थे.इस वृक्ष के बारे में कहा गया है कि जो भी इस वृक्ष के नीच खड़े होकर कोई दुआ मांगता है, तो उसकी मुराद जरूर पूरी होती है।
2-महादेवा: इस जगह पर भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर लोधीश्वर मंदिर है.
3-सिद्धेश्वर मंदिर:प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है. यहांपर सूफी संत काजी कुतुब का मकबरा भी स्थित है.काफी संख्या में लोग यहां पर आते हैं.
4-श्री त्रिलोकपुर तीर्थ: बाराबंकी जिले के त्रिलोकपुर में है.यह मंदिर भगवान नेमिनाथ को समर्पित है।
5-कोटव धाम मंदिर: इस मंदिर की स्थापना राजा द्वारा लगभग 550 पूर्व की गई थी।
6-सतरिख: यह वहीं तपोभूमि है जहां काफी संख्या में संत और योगियों ने तपस्या की थी.
यहां सैयद सलर मसूद का के पिता सलर शाह का मकबरा भी स्थित है. कहाजाता है कि इस जगह पर शेख सलाहुद्दीन के साथ सलर शाह भी आए थे और यहीं बस गए थे.
कैसे जाएं ?
वायु मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा लखनऊ .
रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन बाराबंकी रेलवे स्टेशन.
सड़क मार्ग: बाराबंकी सड़कमार्ग कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है.
अभी के लिये इतना ही. अगले शनिवार एक नई पहेली मे आपसे फ़िर मुलाकात होगी. तब तक के लिये नमस्कार।
आज के सम्माननिय विजेता क्रमश: इस प्रकार हैं. सभी को हार्दिक बधाई!
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श्री प्रकाश गोविंद अंक १०१ |
श्री काजलकुमार अंक ९८ |
डा. महेश सिन्हा अंक ९७ |
प.श्री डी.के. शर्मा "वत्स" अंक ९५ |
श्री विवेक रस्तोगी अंक ९३ |
श्री रतनसिंह शेखावत अंक ९२ |
श्री संजय तिवारी ’संजू’ अंक ९० |
श्री मकरंद अंक ८८ |
श्री अविनाश वाचस्पति अंक ५० |
श्री दिगम्बर नासवा अंक ४९ |
निम्न महानुभावों के हम बहुत आभारी हैं जिन्होने इस अंक में भाग लेकर हमारा उत्साह बढाया. हार्दिक आभार.
सु.M A Sharma "सेहर",
सु. निर्मला कपिला
सु. वंदना
डा.रुपचंद्र शाश्त्री "मयंक,
श्री मुरारी पारीक
श्री राज भाटिया
श्री गौतम राजरिशी
आप सभी का बहुत आभार !
अच्छा अब नमस्ते.सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. ताऊ पहेली – 53 का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सु. अल्पना वर्मा ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार सुबह आठ बजे आपसे फ़िर मिलेंगे तब तक के लिये नमस्कार.







