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होशियार.....लाल बत्ती वापस लौट रही है...



रमलू की गुमटी पर चाय सुडकते हुये हम अखबार बांचे जा रहे थे. आज का सबसे गर्म मुद्दा लालबत्ती ही अखबार में छाया हुआ था. जिधर देखो लालबत्ती पर हाहाकार मचा हुआ है. कहीं मेमसाहब गमजे में हैं तो कई मंत्री सरकारी अधिकारी अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. क्या इसी दिन के लिये IAS….IPS की दिमागतोडू पढाई की थी? अब सारी उम्र खास के बजाये आम आदमी बनकर रहना पडेगा……इन्हीं सब खबरों से अखबार का पन्ना भरा पडा था और हम इन्हीं खबरों को बांचे जा रहे थे कि इतनी देर में “संटू भिया कबाडी” आ पहुंचे…. आते ही उन्होंने कडक कम मीठी ज्यादा वाली चाय का आर्डर दे मारा और हमारे पास ही सट लिये.


भिया ने हमारी तरफ़ देखते हुये बातचीत की शुरूआत करते हुये कहा – ताऊ में तो कल का तुमारे पास ही आने का सोच रिया था पर कसम झंडू ाबा की…टेम ही नी लगा. हमने पूछा – भिया ऐसा कौनसा जरूरी काम आ लगा था जो ह सरीखे के फ़ालतू आदमी के पास तुमको आना पड रहा था. संटू भिया बोले – देखो ताऊ, मजाक की बात नी है, भौत अंदर की बात हैगी सिर्फ़ तुमारे को बता रिया हूं और ताऊ पीलान ऐसा है कि तुमारी और मेरी दोनों की जिनगी बन जायेगी, तुम भी क्या याद करोगे.

अब हमारी उत्सुकता जागी कि भिया के पास ऐसा कौनसा प्लान आगया जो इस तरह की बहकी बहकी बातें कर रहे हैं. जिंदगी तो पप्पू की नही बनी जो इत्ती बडी पार्टी का सर्वेसर्वा बनकर भी वहीं का वही भी नही रहा. और यहां हमारे पल्ले तो पैदायशी तौर पर कुछ है ही नही. तभी संटू भिया बोले – देख ताऊ, अंदर की खबर हैगी कि लालबत्ती वापस आयेगी भौत जल्दी ही…..

हमने बात बीच में काटते हुये कहा – यार भिया, तुम भी ना, आज शाम शाम को ही गटक आये क्या? अरे लोग सुबह सुबह ऊंची नीची देते हैं और तुम शाम को देने लगे?
संटू भिया थोडे झुंझलाते हुये बोले – यार ताऊ, तुमायी कसम…तुममे ना ये एक भौत बडी कमजोरी हैगी कि सामने वाले की पूरी बात तो सुनते नहीं हो और बात को पल्ले सिरे से पेले ही ले उडते हो. तुम जरा पूरी बात तो सुनो हमायी. हमने कहा ठीक है सुनाईये.

संटू भिया बोले – बात ये है कि आजकल हमायी कबाडे की दुकान में भौत ज्यादा उतारी हुई लालबत्तियां इकठ्ठी हो गई हैं. शुरू शुरू में तो हमने एक रूपये में एक के हिसाब से खरीदी थी और अब हालत ये है कि लोग मुफ़्त में हमारे गोदाम पे पटक पटक के जा रिये हैं. हमारे दिमाग में एक आईडिया आया है और इस आईडिये को तुम अंजाम तक पहुंचा सकते हो और हम कसम झंडू बाबा की, तुमको एक चवन्नी का पार्टनर बना लेंगे इस लालबत्ती वाले पीरोजेक्ट में…
हम भिया का मुंह देखे जारहे थे और वो बोले जा रहे थे…..
ताऊ सरकारी कामकाज ऐसे हैंगे कि आज बंद कल चालू…..जैसे रोड के बीच आज डिवाईडर बना दिया फ़िर तीन महिने बाद तोड दिया….चौराहे को कभी रोटरी बना दिया फ़िर उसे तोड कर फ़ौवारे फ़िट कर दिये. हमारा मतलब ये हैगा कि इसी बनाने तोडने के काम से ठेकेदारों, अफ़सरों और नेताओं की रोजी रोटी चलती हैगी. अब तुम ठहरे नेता आदमी…तो हमारे साथ इस लालबत्ती के काम में साझेदारी कर लो.

हम भिया की बाते सुन सुन कर पक चुके थे, हमने कहा – संटू भिया आप घर जावो और हमें भी जाने दो….आज आपका चित ठिकाने पर नही है.

संटू भिया बोले – देख ताऊ, हमने तुमारा वो ईवीएम वाला काम करवाया था ना? सारी ईवीएम ऐसी सेट करके दी थी कि तुम चुनाव जीत गये थे. हमारे इस एहसान के बदले ही साझेदारी कल्लो हमसे इस पीरोजेक्ट में……बस माल हमारा और काम तुमारा. अब कोई ऐसा चक्कर चलावो कि सरकार वापस लालबत्ती लगाने की घोषणा कर दे और हमारे पास जो स्टाक में बत्तियां इकठ्ठी हो गई हैं उन्हें हम सप्लाई करके लाखों करोडों के वारे न्यारे कर लें और ईमानदारी से चवन्नी  मुनाफ़ा तुमारा….देखो मना मत करना, हमको मालूम है कि तुम भौत ही ऊंची चीज हो…बस चक्कर चलादो कुछ… हमें ये पक्का पता चला है कि सारे अफ़सर, मेमसाहब..नेता मिनिस्टर लालबत्ती उतरने से बहुत दुखी हैंगे और इसे वापस लगवाने के लिये एडी चोटी का जोर लगा रिये हैंगे....

हम वहां से सन्नाटी खाये हुये आदमी की तरह उठकर चल दिये.

मैं नागनाथ, तू सांपनाथ, मौसम है दिखावा करने का

अभी तक तो हस्तिनापुर में ताऊ महाराज धृतराष्ट्र का एक छत्र शासन चल ही रहा है  पर आजकल विपक्षियों ने महाराज की नाकों में दम कर रखा है. पिछले काफ़ी लंबे अर्से से  अभी तक महाराज और उनके चेले चपाटे ही घोटालों पर घोटाले करके माल कमाये  जा रहे हैं. विरोधियों के सब्र का बांध टूटा जा रहा है वो किसी भी कीमत पर आने वाले चुनाव में अपना शासन स्थापित करने को बेताब हैं क्योंकि घोटालों में उनको बराबरी का हिस्सा नही मिला.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र को उनके खुफ़िया सुत्रों ने  आगाह कर दिया है कि अबकि बार विपक्षी नेता सतीश सक्सेना  के इरादे नेक नही लग रहे हैं, क्योंकि लूट का माल महाराज ने कहीं छुपा दिया था और चाबी की हवा भी किसी को नही लगने दे रहे हैं.  पार्टी प्रवक्ता खुशदीप सहगल भी महाराज को लगातार इस अनहोनी के लिये तैयार रहने को  चेता रहे थे और आजकल क्राईसेस मैनेज करने में जुटे हुये थे.

इस बात से महाराज काफ़ी चिंतित से रहने लगे हैं कि कहीं ऐसा ना हो कि अगली बार उन्हें घोटाले करने का मौका नही मिले. क्योंकि घोटाले, बेईमानी, भ्रष्टाचार ही तो ताऊ महाराज के जीवन की डोर है. यह सब ना हों तो महाराज जिंदा ही नही रह सकते.

स्वागत कक्ष में बैठे पार्टी प्रवक्ता श्री खुशदीप सहगल, प्रमुख विपक्षी नेता
श्री सतीश सक्सेना, कामरेड श्री  दिनेशराय द्विवेदी, स्वास्थ्य मंत्री डा. दराल
एवम विज्ञान व अंतरिक्ष मंत्री श्री अरविंद मिश्र.


आखिर ताऊ  महाराज को एक तरकीब सूझ ही गई और उन्होंने सत्ता छोडने की बजाय एक नया फ़ार्मुला निकाला. सभी  विपक्षी पार्टियों को एक शाम मुशायरे के नाम पर खाने पीने के लिये  आमंत्रित कर लिया. महाराज  अपना लठ्ठ कंधे पर रख कर आमंत्रितों का गर्मजोशी से स्वागत करने लगे.   कंधे पर लठ्ठ रख कर स्वागत करना यूं तो शालीन नही कहा जा सकता  पर महाराज के पास बस यही एक तो हथियार है विपक्षियों को काबू में रखने का.  कंधे पर रखा लठ्ठ महाराज की CBI यानि Celebrity Blog Investigation
द्वारा जांच बैठाने  का सूचक है जिसको देखते ही सामने वालों को पता चल जाता है कि यदि महाराज की बात नही मानी तो CBI प्रमुख परिकल्पना वाले श्री रवींद्र प्रभात जी को उनके ब्लाग की जांच का  काम सौंपा  जा सकता  है.

ताऊ महाराज मुशायरे में अपनी बात रखते हुये

मुशायरे की संध्या पर ताऊ महाराज ने सबका  स्वागत करने के बाद सबसे  खाने पीने का इसरार करते हुये अपने कंधे पर लठ्ठ  रखते हुये बोलना शुरू किया.....

प्यारे भाईयो, चाहे आप या हम सत्ता में रहें या विपक्ष में, उससे क्या फ़र्क पडता है? हम सबका एक ही उद्देष्य है कि देश को आगे ले जाना है और देश आगे तभी जायेगा जब यहां के लोगों में 100 रूपये किलो टमाटर और 50 रूपये किलो प्याज जैसी चीजे खरीदने की क्षमता हो.....खैर यह सब एजेंडा तो हम दोनों ही पक्ष विपक्ष के लोग जानते हैं.

मैने आज आपको इस गोपनीय मुशायरा संध्या में इसलिये बुलाया है कि आने वाले चुनाव का अंदरूनी एजेंडा हम तय करले, हममें से किसी एक की हार या जीत तो होनी ही  है. .. लेकिन हम ये वादा करें कि शासन चाहे जिसका भी रहे हम एक दूसरे का पूरा ख्याल रखेंगे.

मैं मानता हूं कि इस बार मेरे मंत्रियों ने घोटाले कुछ ज्यादा ही कर दिये और आपको ज्यादा मौका नही मिला किंतु इस बार ऐसा नही होगा. लूट के माल का बंटवारा बराबर होगा.


ताऊ महाराज की चाबी वाली बात गौर से सुनते सतीश सक्सेना

इसी बीच विपक्ष के नेता सतीश सक्सेना तमतमा कर उठे और बीच में ही बोले ......ताऊ महाराज, ऐसा नही चलेगा, तुमने लूट का सारा माल कहीं छुपा दिया है, यदि बराबरी की बात करते हो तो उस खजाने की चाबी हमारे हवाले करो वर्ना विरोध जारी रहेगा........

सतीश सक्सेना को शांत करते हुये ताऊ महाराज धृतराष्ट्र बोले - सतीश जी प्लीज...प्लीज आप शांत हो जाईये और मेरी पूरी बात तो सुनिये.....आप नाराज क्यूं हो रहे हैं? आपके लिये एक गजल पेश कर रहा हूं..आपकी सब शिकायते दूर हो जायेंगी और चाबी का राज भी पता चल जायेगा. सुनिये....

मैं नागनाथ, तू सांपनाथ, मौसम है दिखावा करने का 
या मैं जीतूँ  या तू जीते, न गम हो किसी के पिटने का

प्रजातंत्र की लूट मे हम, मिलजुल कर मलाई खा लेंगे

जब जेब भरें हम दोनों की , काहे झंझट में, पडने का   

तू मेरी सीडी पब्लिश कर , मैं तेरा  बैण्ड  बजवा  दूंगा 

मिलता है हमको कभी कभी, मौका नोटों के गिनने का  

तू  पक्ष में हो या विपक्ष में, हर तरफ़  फसल  है,  चांदी की 

काटो चुपचाप बिना पंगा, क्यों  व्यर्थ का  झगडा रोने का 

जनता के चक्कर में प्यारे क्यों अपना समय ख़राब करें 

चुपचाप गड्डिया रखता जा स्विस का बैलेंस बढाने का 

मिल बाँट खाओ और मौज करो, बेकार बहस में पड़ते हो  
ताऊ कहता , हद में ही रहो, मौका  आये क्यों लठ्ठ उठाने का



इस तरह ताऊ महाराज ने अंत में लठ्ठ (CBI) की छुपी हुई धमकी देते हुये  अपनी बात पूरी की, चारों तरफ़ शांति पसर गई  और अब बोलने के लिये खडे हुये प्रमुख विपक्षी नेता सतीश सक्सेना .......

(क्रमश:)

यह ब्लाग संसद है....बेवकूफ़ कहीं का...

ब्लाग संसद खचाखच भरी हुई थी. इस सत्र में कई बिल पास होने थे इनमें भी महत्वपूर्ण बिल यह था कि इस साल का "सर्वश्रेष्ठ ब्लाग रत्न शिरोमणी" अवार्ड किसे दिया जाये? यूं तो ब्लागिस्तान में क्षेत्रिय दलों की तरह अनेकों छोटे मोटे ब्लाग मठ  हैं जो अपनी अपनी ढपली बजाते रहते हैं और अपने अपने इलाके में राज भी करते हैं.  

पर राष्ट्रीय स्तर पर ब्लागिंस्तान मुख्य रूप से दो मठों में बंटा हुआ है. दोनों ही मठों के मठाधीष चाहते हैं कि इस बार का "सर्वश्रेष्ठ ब्लाग रत्न शिरोमणी" अवार्ड उन्हीं को मिले, सारी ताकत दोनों मठों  ने झौंक रखी है. और  इसके लिये संसद में भारी बहस चल रही थी. सभी अपने अपने कारनामें बढ चढकर बता रहे हैं कि किसने सबसे ज्यादा मौज ली? किसने सबसे ज्यादा बेनामी टिप्पणियां की? किसने कितने ब्लागरों को ब्लागिंग छोडने के लिये मजबूर किया...इत्यादि इत्यादि.....


ताऊ अपनी भैंसों के साथ ब्लाग संसद की ओर बढता हुआ

इधर ताऊ अपनी प्यारी भैंस चंपाकली सहित अपनी सारी भैंसों को लेकर  ब्लाग  संसद की और जाने वाली सडक पर बढता जा रहा है. मुख्य मार्ग पर यह नजारा देखकर भीड भी ताऊ के पीछे हो लेती है. ताऊ अपनी भैंसों सहित ब्लाग संसद में घुसने के लिये कोशीश करता है पर  ब्लाग  पुलिस  उसे गेट पर ही रोक लेती हैं. ताऊ नाराज होने लगा तो ब्लाग पुलिस का मुखिया अंदर जाकर ब्लाग संसद के अध्यक्ष को सूचित करता है   की एक ताऊ अपनी बहुत सारी भैंसों के साथ ब्लाग संसद में घुसना चाहता है.

अधयक्ष महोदय घबरा जाते हैं, उन्हें यह अंदेशा था कि हो ना हो यह वही भैंसों वाला ताऊ होगा जिसने एक बार कैट एयरवेज के एयरक्राफ़्ट से अपनी भैंस को बांध दिया था.  आज तो वो हद ही कर रहा है कि  अपनी सारी भैंसों को लेकर ब्लाग संसद  में घुसना चाहता है. क्या मालूम इस ताऊ का क्या इरादा है? यह सोचकर वो बाहर गेट पर आकर ताऊ से उसके वहां आने का कारण पूछते हैं.

ब्लाग संसद   के अध्यक्ष महोदय ने पूछा - ताऊ, यहां कैसे आना हुआ? तुमको मालूम नही कि ये ब्लागरों की संसद है और बहुत जरूरी बहस चल रही है?

ताऊ बोला - मैं कौन सी तुम्हारी बहस में लठ्ठ मार रहा हूं? मैं तो यहां अपनी भैंसों की पूंछ की  कटिंग करवाने और उनका रंग काला करवाने आया हूं जो कि उनकी उम्र के हिसाब से थोडा भूरेपन पर आ गया है.

अध्यक्ष महोदय ने गुस्से से तमतमाकर कहा - तो फ़िर किसी हेयर कटिंग सैलून में ले जाकर  करवावो ना, यहां क्या करने आये हो? यह ब्लाग संसद है....बेवकूफ़ कहीं का...

ताऊ बोला - मैने सुना था  कि ब्लागिस्तान  में इससे बेहतर  कटिंग  और  डाई करने की कोई दूसरी सैलून  नही हो सकती, इसलिये  आया हूं.....मेरी भैंसें जरा नाजुक हैं इसलिये मैं उनकी पूंछ की कटिंग और डाई किसी उच्च स्तर की सैलून में ही करवाता हूं.

अध्यक्ष महोदय ने तल्खी से कहा - चल भाग यहां से ताऊ कहीं का. आया बडा भैंसों की पूंछ के बाल कटाने वाला....जैसे हमने कटिंग सैलून खोल रखी हो....

अब ताऊ का दिमाग घूम गया सो चिल्ला कर बोला - तुमको मेरी भैंसों की कटिंग तो करनी ही पडेगी..  तुमसे बडा कटिंग मास्टर और कौन होगा?  तुम लोग यहां बैठकर कितनी खूबसूरती से जनता की गर्दन काटते हो, रिश्वत और घोटालों की  फ़सल काटते हो तो मेरी भैंसों की कटिंग क्यों नही काट सकते? और तुम इतने काले कारनामे करते हो तो तुमसे बढकर मेरी भैंसों का रंग काला और कौन कर सकता है?

अध्यक्ष महोदय को गुस्सा   आ रहा था पर सही बात के आगे कुछ निरूत्तर से होगये...इतनी ही देर में ताऊ की सबसे लाडली भैंस  चंपाकली आकर  बोली - ताऊ, सब भैंसों को भूख लग आई है....उनके खाने का कुछ इंतजाम करावो.

ताऊ बोला - जावो, अंदर घुस जावो और चारा खा आवो.

अब अध्यक्ष महोदय चिल्लाकर बोले - अरे ओ ताऊ, तेरे को कहा ना, यह ब्लाग संसद है कोई तबेला नही जो यहां भैंसों को चारा खिलाने के लिये कह रहा है?

ताऊ बोला - देख भाई, तुम ब्लाग नेता यहां बैठकर चारा नही खाते क्या? अगर नही खाते तो चारा घोटाला कैसे हुआ? जब तुम यहां चारा खा सकते हो, रिश्वत खा सकते हो तो यही सब चीजें मेरी भैंसों को भी खा लेने दो. अब वैसे भी तुम्हारा लंच टाईम हो रहा है सो मेरी भैंसों को भी लंच कर लेने दो.

बाहर जब  इतनी  देर तक बवाल चलता रहा तो अंदर से ब्लाग सांसद सतीश सक्सेना निकल कर बाहर आये और सामने ताऊ को भैंसों सहित देखकर मुस्कराये और बोले - ताऊ, आज भैंसों को चराने  अकेले ही आये हो क्या? ताई को साथ नही लाये?

ताऊ बोला - सतीश जी,   आज मुझे अपनी भैंसों को चराने के अलावा उनकी कटिंग भी करवाना थी और घर को आजकल चोरों के डर से ज्यादा देर सूना नही छोडा जा सकता, इसलिये उसे गृह मंत्रालय सौंप आया हूं जिसे वो संभाल रही है.

ताऊ और ताऊ की भैंसें ब्लाग संसद के गेट पर चारा खाने के लिये अंदर घुसने की जद्दोजहद कर रहे हैं और ब्लाग पुलिस उनको खदेडने में डटी हुई है. हो सकता है आंसु गैस के गोले भी फ़ोडने पड जाये. पर अबकि बार भैंसे मानने वाली नही हैं.

इतनी ही देर में ब्लाग पुलिस ने वाटर कैनन से पानी की फ़ुहारें मारनी शुरू कर दी.... ताऊ और  भैंसे समझ रहे हैं कि ये उनको डाई करने के  के लिये धुलाई शुरू हो गई है.  वैसे भी भैंसों को पानी की ठंडी  फ़ुहारे बहुत अच्छी लगती हैं.

जैसे जनता को कोई भी कानून बनता देखकर खुशी होती है कि बस अब तो हमारे दुख दर्द दूर हुये ही समझो. उसी तरह  वाटर कैनन के इस्तेमाल को भैंसों ने अपने हक में कानून समझकर  खुश होकर  नाचना गाना शुरू कर दिया.......

मन डोले मेरी पूंछ  डोले        
मेरे पेट की मिट गई भूख रे     
ये कौन मारे है फ़ुहारिया          

मधुर मधुर सपनों में देखा था चारा घना अकेला     
छोड़ चली हूं लाज शर्म, अब  खालूं सारा चारा     
  
रस घोले धुन यूँ बोले     
ठंडी पड़ रही फुहार रे     
ये नेताजी बजाये बांसुरिया      
मन डोले मेरी पूंछ  डोले  ...  


इसी तरह  खाद्द्य सुरक्षा कानून के बनने से गरीब जनता भी नाचना गाना शुरू कर देगी मानो  उनका पेट ही भर गया हो.



काश हम ताऊ ना होकर मामा होते !

बाबाश्री ताऊ महाराज आश्रम में उदास से बैठे हुये थे कि इतने में परम भक्त सतीश सक्सेना जी  प्रकट हुये.   ताऊ महाराज को उदास देखकर वो बडे चिंतित हुये और स्वाभाविक रूप से जिज्ञासा प्रकट करना चाहकर भी कुछ बोल नही पाये, क्योंकि ताऊश्री उस समय बेहद गंभीर चिंतन की मुद्रा में थे. सतीश जी ने इससे पहले बाबाश्री को इस तरह गंभीर मुद्रा में कभी नही देखा था सो चुपचाप अपना आसन ग्रहण कर किया.


कुछ देर बाद बाबाश्री से सतीश जी ने पूछा - ताऊ श्री आज आप उदास से क्यों हैं? क्या परेशानी खडी हो गयी?

ताऊ महाराज बोले - भक्त, हमारे साथ बहुत बडा छल हुआ है. त्रेता युग में माता सीता ने हमे जबरन ताऊ बना दिया था. आज पता चला कि ताऊ बनने में कोई फ़ायदा नही हुआ. इतने युगों से हम बस फ़ोकट के ताऊ बने घूमते हैं और मिला क्या? छोटी मोटी चोरी चकोरी के अलावा? कोई बडा हाथ नही मार पाये आज तक. और ना ही हमारे भतीजों के लिये कुछ कर पाये. काश हम मामा होते तो हम और हमारे भांजे आज मलाई मार रहे होते.  काश  हम मामा होते तो अपने भांजो को मौज करवाते..अपनी जेब से ना सही जनता की जेब ही करवाते.  हाय...हम मामा क्यों ना हुये......

सतीश जी ने आश्चर्यचकित होकर पूछा - महाराज श्री आपको कहीं सन्निपात तो नही हो गया है? आप क्या बोल रहे हैं यह आपको मालूम भी है?

ताऊ महाराज तैश में आते हुये बोले - भक्त हम पूरे होशोहवाश में हैं. माता सीता ने हमें ताऊ होने का वरदान देकर वैसे ही छला है जैसे भोलेनाथ ने भस्मासुर को छला था. हमें ताऊ बनकर क्या मिला? बस दस बीस टिप्पणियां? या कोई भला ब्लागर हो तो ताऊ के साथ बस जी लगा देता है.......

सतीश सक्सेना - पर ताऊश्री, आप इतना उबाल क्यों खा रहे हैं? हुआ क्या है आखिर?

ताऊ श्री बोले - सतीश जी, यदि माता सीता हमें ताऊ की जगह मामा बनने का वरदान दे देती तो आज हम भी क्या बडी बडी कोठियों में ना रहते? हमारे पास भी निजी जेट-प्लेन  ना होता? इतने युगों बाद भी हमारे पास क्या है? सिर्फ़ ये टूटा फ़ूटा झौंपडेनुमा आश्रम? और थोडे बहुत ब्लागर भक्त....जो ताऊ समझकर दस बीस रूपये (टिप्पणियां) की भेंट दक्षिणा चढा देते हैं और हमें उनसे ही गुजारा करना पडता है?

सतीश जी - तो ताऊ श्री, आपको अच्छी इज्जत मान मर्यादा मिली हुई है...अब और क्या चाहिये?

ताऊ श्री तैश में आते हुये बोले - भाड में गयी ऐसी इज्जत और मान मर्यादा....आपको मालूम है मामा बनने के कितने फ़ायदे है? पौराणिक काल से मामा भांजों की जुगलबंदी चलती है...कभी ताऊ भतीजे की जुगलबंदी सुनी आपने?    काश माता सीता ने हमें मामा बना दिया होता.

सतीश जी बोले - ताऊ श्री, लगता है आज आपका दिमाग सटक गया है.....आपको मालूम भी है हमारे दिल्ली के पास शाहपुर जट इलाके में तो मामा शब्द को गाली समझा जाता है और आप  हैं कि मामा बनने पर तुले हुये हैं?

बाबाश्री बोले - सतीश जी, हमें ताऊ बनकर माया मिली ना राम वाली कहावत याद आ रही है. त्रेता में रावण का मामा मारीच था ना, कितने मजे किये मामा ने भांजे के साथ मिलकर? इतिहास में अमर हो गया? राम रावण युद्ध का श्रेय भी मामा मारीच को मिला...हमें क्या मिला?

सतीश जी कुछ बोलते इसके पूर्व ही ताऊ श्री ने उनको रूकने का इशारा करते हुये बोलना चालू रखा - हां तो, त्रेता के बाद द्वापर में मामा कंस को देख लिजीये. मामा कंस ने ही भांजे कृष्ण को अवतारी कृष्ण बनवा दिया, ना मामा कंस होता और ना साधारण सा ग्वालिया अवतारी कृष्ण होता. यहां भी मामा कंस को ही सारा श्रेय जाता है. यहां भी मामा भांजे की जुगलबंदी ने दोनों को  इतिहास पुरूष बना दिया.

सतीश जी बोले - ताऊश्री, आप को मामा कंस की स्वयं से तुलना नही करनी चाहिये, आप आदरणीय ताऊ हैं और कंस एक अत्याचारी.....

बीच में ही बात काटते हुये ताऊश्री बोले - सतीश जी, आप दुनियादारी और इतिहास की बात समझते नही हैं. इतिहास मामा गाथाओं से भरा पडा है. आप मामा शकुनि और भांजे दुर्योधन को ही देख लिजीये, मामा के सहयोग के बिना क्या दुर्योधन की ताकत थी कि पांडवों को जुए में हरा देता? महाभारत युद्ध में मामा शल्य और उनके भांजे  कर्ण की जुगलबंदी देख लिजीये.....

सतीश जी का सर चकराने लगा सो सर पकड कर टुकुर टुकुर ताऊ श्री की तरफ़ देखते रहे और ताऊश्री का भाषण चालू रहा - सतीश जी, सारे इतिहास को छान लिजीये, सभी कामों का श्रेय कहीं ना कहीं मामा भांजों की जुगलबंदी को ही जाता है, ताऊ भतीजों को नही. महाभारत युद्ध के पश्चात  मामा कृपाचार्य ने भांजे अश्वत्थामा द्वारा ही द्रौपदी के पांच पुत्रों का सर कलम करवा दिया था......मामा माहिल के कारण ही आल्हा-ऊदल जैसे भाई एक दूसरे के बैरी होकर जंग करने लगे......

सतीश जी बीच में ही बोले - पर ताऊश्री, ये तो सब निगेटिव करेक्टर माने जाते हैं...फ़िर आप मामा बनने के लिये इतने व्यग्र क्यों हो रहे हैं?

बाबा ताऊश्री बोले - करेक्टर कैसा भी हो, माल और मलाई तो मामा भांजे की जुगल बंदी में ही आती है. नाम भी बडा होता है, कहीं मामा-भांजे की कब्र पर झाड फ़ूंक होती है, कहीं मामा - भांजे के  मंदिर बनते हैं पर ताऊ भतीजों के आज तक सुनने में नहीं आये.

सतीश जी बोले - ताऊश्री यदि नाम और माल का इतना ही शौक है तो किसी भतीजे को साथ लेकर आप भी जुगलबंदी कर लो, इसमें कौन सी बडी बात है? आप कहें तो मैं किसी भतीजे से आपकी सेटिंग बैठवा देता हूं....

ताऊश्री बोले - सतीश जी, आप यही बात तो समझ नही रहे हैं.......ताऊ भतीजे की जुगलबंदी बैठ ही नही सकती, क्योंकि दोनों का एक ही सरनेम होता है.  मान लिजिये मामा बंसल अपने किसी बेटे भतीजे के साथ जुगलबंदी करता तो वो भतीजा भी बंसल ही होता ना. मामा बंसल ने असली मामा होने का परिचय दिया और भांजे सिंगला के साथ जुगलबंदी करके माल ऐसे ही  कूटा,  जैसे रोड कूटते हैं.... ये तो  बुरा हो इन सत्यानाशी सरकारी एजेंसियों का जिन्होने मामा बंसल और भांजे  सिंगला का रिश्ता पकड लिया वर्ना हिंदुस्थान में सिंगला नाम की कोई प्रजाति  रहती है यह भी कोई नही जान पाता, और   मामा भांजों की यह  जुगलबंदी इस सरकार के रहने तक तो  चलती ही रहती......

सतीश जी भी ताऊश्री की बातों के आगे निरूत्तर होगये और इधर बाबाश्री का संध्या भजन का समय हो चला था सो वो अपनी मौज में भजन गाने लगे......

कसम खुदा की हमने कैसे देश को लूट के खाया है !!

मामू तेरे राज
में हमको
कुछ बेनिफिट
आया है !

आज रात ही
मुझको
चेयरमैन का
सपना आया है !
एक नौकरी में
ही मामू एक
करोड़ कमाया है !

मगर कसम से
मामू मेरा, पेट न
इससे भरता है
जब तक तू हैं
मंत्री पद पर
घर तो हमारा
भरता है !

प्लाट ख़रीदे
फ्लैट ख़रीदे
मज़ा न मुझको आता है
बड़े बड़े है पैसे वाले
हमको मज़ा न आता है
कोई ऐसा काम बताओ
जो धन का अम्बार लगे
बरसों खाएं खूब लुटाएं
घर में धन का पेड़ लगे ,


ताऊ महाराज धृतराष्ट्र का हस्तिनापुर की जनता के नाम संदेश

चारों तरफ़ आर्थिक विकास दर को लेकर हल्ला मचा हुआ है. शेरसिंह जी (शेयर मार्केट) लंगडा आम हो गये हैं. ऐसे में सबने  महान शासक व  अर्थशाश्त्री ताऊ धृतराष्ट्र को घेर कर आरोप लगाना शुरू कर दिया है. आप जानते हैं कि ताऊ धृतराष्ट्र महाराज ना कभी गलत बोलते हैं और ना ही कभी गलत करते हैं. और गलत देखना तो महा पाप समझते हैं, इसीलिये आंखों पर प्रभु श्रीराम द्वारा प्रदत  काला चश्मा हमेशा चढाये रहते हैं.  जो भी बोलते हैं, करते हैं, देखते हैं वो  सब इमानदारी से, कहीं कोई बेईमानी का भाव नही  हैं.

पर महाराज की नीतियों की आलोचना होते देखकर  महारानी ने उन्हें डांटते हुये जनता के सामने बयान देने को बाध्य कर दिया. अत: महाराज ने महल की प्राचीर से जनता को संबोधित करते हुये कहा:-

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र महल की प्राचीर से प्यारी जनता को संबोधित करते हुये


मेरी प्यारी प्यारी आंखों की दुलारी जनता, मैं आपका सेवक हूं और आने वाले युगों तक आपका सेवक ही रहूंगा. विपक्ष बिना सोचे समझे, सिर्फ़ मुझे बदनाम करने की नियत से हो हल्ला मचाता है. हम विकास दर कैसे बढायें? इसकी राह में सबसे बडा रोडा विपक्ष है, वो संसद चलने ही नही देता फ़िर असली विकास तो दूर बल्कि विकास की बात ही नही हो सकती.

प्यारे भाईयो, वैसे भी आप भुलावे में नही आयें, मैं जो कुछ भी बोल रहा हूं वह सौ प्रतिशत सच बोल रहा हूं, प्रभु श्रीराम का भक्त हूं, बिल्कुल रामराज्य जैसा शासन चला रहा हूं. मुझे यह बताईये कि  जब विकास दर 9/10  प्रतिशत थी तब क्या सबको रोटी, कपडा, मकान, बिजली पानी और सडक मिली थी? मुझे यह स्वीकारने में कोई हिचक नही है कि  देश की अधिकतर जनता तब भी भूखी थी और आज पांच प्रतिशत विकास दर में  भी भूखी है.

पुरातन काल में जब दस फ़ीसदी के आसपास विकास दर थी तब बडी बडी गगनचुंबी इमारते, महंगी कारें, ऐशोआराम के कीमती सामान  आ गये. पर उस समय भी मजदूर और काम वाली बाईयां आज के ही हालात में थी. यानि उनकी जो हालत दस फ़ीसदी विकास दर में थी वही आज पांच फ़ीसदी में भी  है तो फ़िर यह हल्ला क्यों?

मेरी प्यारी जनता, आप यह समझ लें कि यह हस्तिनापुर अमीरों के लिये  अमीर ही चलाते हैं. आप जानते हैं कि हमने विकास दर बढाने के लिये आपकी जमीने कब्जे में लेकर एयरपोर्ट और सडकें मुहैया करवायी जिनके चलते विकास दर बढी थी. मुझे यह स्वीकार करने में खुशी हो  रही है कि हमने उच्च विकास दर हासिल करने  के लिये पुल, सडके, ऐशो आराम की हर चीज आपको उपलब्ध करवायी है. यह अलग बात है कि इस उच्च विकास दर की वजह से प्याज सिर्फ़ चालीस पचास रूपये किलो और आलू पच्चीस तीस रूपये किलो ही हुआ है. नकली  दूध की समस्या को दूर करने के लिये हमने मिल्क पाऊडर उपलब्ध करवाया है. इस मिल्क पाऊडर ने भी विकास दर बढाने में काफ़ी मदद की है, यह अलग बात है कि गरीब बच्चों के मुंह से दूध का घूंट छिन गया है. पर उच्च विकास दर प्राप्त करने के लिये देश के बच्चों को इतनी सी कुर्बानी तो देनी ही पडेगी.

प्यारी जनता, हमें मालूम है कि नक्सल वाद या अन्य क्राईम में बढोतरी हुई है और इसका मूल कारण खेती बाडी का खात्मा करके आलीशान इमारते सडकों का निर्माण कर पाई गई उच्च विकास दर ही थी.

प्यारी जनता आप चिंता नही करें, ये विकास दर के आंकडे मात्र छलावा हैं, इन्हें जब चाहे, जैसे चाहे, लोगों को बरगलाने के लिये किया जाता है. यदि थोडे समय के लिये ये आंकडे यहीं पडे रहें तो भी आपकी सेहत पर कोई असर पडने वाला नही है.

प्यारे प्रजा जनों, इस विकास दर से गम या खुशी मनाने का कोई कारण नही है यह तो सिर्फ़ लोगों को बेवकूफ़ बनाने का एक तरीका मात्र है. इससे डरने या मातम मनाने की कोई आवश्यकता नही है.

प्यारे प्रजा जनों, आपकी जो स्थिति महान लेखक प्रेमचंद के पात्रों होरी धनिया व भीकू की थी,  मैं आपकी वही स्थिति हमेशा बरकरार रखूंगा, यह मैं आपसे वादा करता हूं,   आप निश्चिंत रहें और हस्तिनापुर  निर्माण के अपने अपने कार्य में लग जायें, यानि जो चोरी करता है वो चोरी करे, डकैत ड्कैती डालें, भ्रष्टाचारी भ्रष्टाचार करें, सट्टे वाले सट्टा करें, ट्क्स चोर कर की चोरी करें, रिश्वत खोर जम कर रिश्वत खोरी करें....पर सब काम बिल्कुल इमानदारी से करें जिससे हमारे प्यारे हस्तिनापुर का नाम इस दुनियां में रोशन हो जाये और सब हमारी मिसाल देतें रहें.

जय हस्तिनापुर...जय ताऊ महाराज.

तेरी ऐसी की तैसी ताऊ की….. नागपत्नि

ब्लागिंग के ठंडेपन से  निराश हताश  ताऊ तपस्या करने जंगल की और  चला जा रहा था. रास्ते में ठंड और बर्फ़ीली हवाओं  की वजह से परेशान था. पर ब्लागर की यात्रा जारी रही. थोडी देर बाद बरसात भी होने लगी तो मन मारकर  ब्लागर ताऊ वहीं एक बूढे बरगद के तने के सहारे बैठ गया. ताऊ आगे बढने के लिये बरसात बंद होने का इंतजार करने लगा तभी वहीं पास में एक  बडे से शाही नाग देवता  भी बैठे दिखाई दिये. उसे देखकर पहले तो ताऊ डरा फ़िर यह सोचकर मुस्कराया कि इससे क्या डरना? यह तो अपनी ही प्रजाति का भाई बंद है.


ताऊ ने उससे राम राम की. बदले में नागराज ने भी जय श्री राम का उद्घोष किया. मालूम पडा कि नाग देवता का बिल वहां से काफ़ी दूर था इस वजह से वह भी यहां बरसात रूकने का इंतजार कर रहा था. समय काटने के लिये दोनों आपस में बातचीत करने लगे.

नाग बोला – हे मनुष्य तुम कौन हो? शक्ल से कुछ कुछ बंदर जैसे दिखाई देते हो पर मनुष्यों जैसी पगडी और लठ्ठ  धारण किये हुये हो? तुम मनुष्य हो या बंदर?

ताऊ ने जवाब दिया – हे सर्पराज, मेरे पूर्वज बंदर थे और मैं अपने पूर्वजों के कुछ ज्यादा ही नजदीक हूं इसलिये आधा बंदर और आधा मनुष्य दिखाई देता हूं. पर हकीकत यह है कि मैं ना बंदर हूं और ना मनुष्य हूं.

सांप ने विस्मय पूर्वक पूछा –  तुम  तो बडे दार्शनिक भाव से बात कर रहे हो? तुम्हारा नाम क्या है? क्या तुम्हारी बंदरिया तुम्हें छोड कर भाग गई या कुछ और हुआ है जो तुम इस बियाबान और खतरनाक जंगल में चले आये हो? यहां पग पग पर मौत खडी रहती है, फ़िर भी तुमने यहां आने का साहस किया है, इसके पीछे कोई बडा गहरा राज होगा? मुझे भी  जानने की इच्छा हो रही है.

ताऊ बोला –  मेरा नाम ताऊ है सर्पराज. यह भी जान लिजिये कि   ना तो मेरी बंदरिया कहीं भागी है, और ना मैं उससे पिटने की वजह से भागा हूं. ये बात अलग है कि आज कल महिला अधिकार कुछ ज्यादा ही बढ गये हैं. इस वजह से  पहले तो वो  मुझे दिन भर में चार छ लठ्ठ ही मारा करती थी पर आजकल जब उसका मूड चाहे मुझे कूट पीट देती है और मैं चूं तक नही कर सकता. और सच कहूं तो अपनी बंदरिया से आठ दस लठ्ठ खाए बिना आजकल मेरी पीठ भी सीधी नही होती, बस यूं समझ लिजिये कि आदत सी पड गई है पर ये  मेरी परेशानी का कारण नही है.

सांप ने बीच में ही टोका – यार ताऊ, तुम अजीब आदमी हो? तुम्हारी बंदरिया तुम्हें सरे आम दिन दहाडे मारती है और तुम्हारा घर छोडने का यह कारण भी नही है? मेरी उत्सुकता और बढ गई है? कहीं चोरी डकैती… की वजह से फ़रारी काटने तो नही आ गये हो?   

ताऊ बोला – नही नही…चोरी डकैती तो मैं वर्षों पहले छोड चुका हूं…और मेरी कोई सरकारी सजा भी बाकी नही है…

नाग देवता की उत्सुकता बढती ही जा रही थी उन्होंने पूछा – तो ताऊ, फ़िर तुम जरूर कोई सरकारी मंत्री संत्री रहे होगे और कोई घोटाला करके आये हो? सुना है आजकल घोटाले बाजों और रिश्वतखोरों के खिलाफ़ सख्त माहोल बना हुआ है?

ताऊ ने जवाब दिया – नाग देव, आप भी  अजीब सी बाते कर रहे हैं? अफ़्सोस तो यही है कि मुझे घोटाले और रिश्वत खोरी का मौका ही नही मिला वर्ना मैं यहां जंगल में क्या करता? कही विदेश में जाकर अपनी बंदरिया के साथ  छुट्टियां बिता रहा होता. काश घोटाले और भ्रष्टाचार करने के मौके मुझे मिल गये होते.

सर्पराज ने पूछा – ताऊ, अब मुझे सच सच बताओ……मेरी उत्सुकता बढती ही जा रही है…तुम जरूर किसी महिला उत्पीडन के मामले में फ़ंस कर यहां आये हो……साधारण स्थिति में कोई इस जंगल में आने की हिम्मत नही करता….तुम सही बात जल्दी से बताओ…

ताऊ बोला – नागराज, आप मुझ पर सरासर गलत शक कर रहें हैं…मैं तो अपनी बंदरियां के अलावा सबको मां बहन बेटी समझता हूं. असल में मैं अपनी बंदरिया के लठ्ठ की वजह से इतना डरता हूं कि ऐसे कामों के बारे में सपने में भी नही सोच सकता.

सर्पराज ने पूछा – तो  तुम करते क्या हो?  लगता है कहीं गहरी चोट खाई है?

ताऊ ने जवाब दिया – करने के नाम पर तो मैं बस  ब्लागिंग करता हूं और अब इससे निराश हो चला हूं इसलिये परेशान होकर इस भयानक जंगल में तपस्या करने चला आया हूं.

सांप ने पूछा – ब्लागिंग से परेशान होने की क्या बात है? वो तो तुम यहां से भी कर सक सकते हो. मेरे बिल में हाईस्पीड नेट कनेक्शन और कंप्यूटर सब कुछ है. कुछ दिन के लिये  मेरे घर चलो वहां  मुझे भी ब्लागिंग सिखा देना…

ताऊ बोला – सर्पराज, अब ब्लागिंग में क्या रखा है? ब्लागिंग का स्वर्णयुग तो कभी का खत्म हो चुका है….अब तो सारे ब्लागर फ़ेसबुक की और फ़ेस कर चुके हैं …कुछ ट्विटर पर टर टरा लेते हैं…..

बीच में ही नाग देवता बोले – नही नही ताऊ….तुम्हें कुछ दिन मेरा आतिथ्य तो स्वीकार करना ही पडेगा और मुझे ब्लागिंग भी सिखानी पडेगी. अब बरसात भी बंद हो चुकी है और रात गहराने लगी है. इस जंगल में अब कहां जाओगे…बेवजह किसी शेर चीते का शिकार बन जाओगे…अब जल्दी चलो.

ताऊ ने जल्दी से अपना लठ्ठ उठाया और नाग देवता के पीछे पीछे हो लिया. रास्ते में नागदेवता ने पीछे मुडकर ताऊ के हाथ में लठ्ठ देखा तो बोला – ताऊ, इस लठ्ठ को तुरंत फ़ेंक दो…तुम्हारा क्या भरोसा? आदमी की जात के हो…कहीं पीछे से मेरे सर पर ही मार दो..तो? मेरे पिताजी ने कहा था कि आदमी का कभी भरोसा मत करना. ताऊ ने मौके की नजाकत देखकर अपना लठ्ठ दूर फ़ेंक दिया.

नाग देवता के घर पहुंचते ही ताऊ दंग रह गया. बिल क्या…यह तो आलीशान नाग महल था. वहां पहुंचते ही नाग देवता की पत्नि ने इठलाते हुये बडे प्रेमपूर्वक नाग देव का स्वागत किया……और ताऊ को देखकर थोडा सकुचा कर ठिठकी तो नागराज ने कहा – डरो मत, ये मित्र ताऊ है….रात के डिनर की व्यवस्था करो. 

नागराज की पत्नि एक आदर्श पत्नि की तरह मेहमान नवाजी की तैयारियों में लग गई. पास के ही कक्ष में नागराज के  वृद्ध माता पिता रजाई में दुबके हुये  आराम फ़रमा रहे थे वहीं दूसरी तरफ़ उनके बाल बच्चे धमाचौकडी मचाये हुये थे. नाग राज ने सबका ताऊ से परिचय कराया और ड्राईंग रूम में बैठकर दोनो गप शप करने लगे.

डिनर खत्म होने के बाद नागराज ने अपना कंप्यूटर चालू किया और  बोले – ताऊ अब मुझे ब्लागिंग सिखाओ कि कैसे क्या करना है?

जैसे कोई कनिष्ठ ब्लागर अपने वरिष्ठ ब्लागर को गुरूवर के संबोधन से  नवाजता हुआ कुछ सलाह मांगता है. इस तरह की खुशी ताऊ ने महसूस की.  ताऊ को भी ऐसी खुशी  काफ़ी समय बाद मिल रही थी सो  इसे चूकना नही चाहता था. 

ताऊ ने ब्लागर पर नाग राज का अकाऊंट बनाकर ब्लाग तैयार किया और सर्पराज को ब्लागिंग के गुर सिखाने लगा कि कहां कहां टिप्पणी देने जाना है…किसके यहां नही जाना है…किसकी टंगडी खींचनी है… किसकी वाह वाही करनी है…बेनामी टिप्पणी कैसे करनी है…. ब्लागिंग के कौन कौन से मठाधीश हैं? कौन सा मठाधीश अपने गुट का है? कौन सा दुश्मन गुट का है? किससे सतर्क रहना है…इत्यादि इत्यादि….

ठंड काफ़ी हो रही थी सो नागराज ने गर्मागर्म काफ़ी बुलवायी. थोडी ही देर में नागपत्नि काफ़ी लेकर आ गयी. ताऊ और नागराज को ब्लागिंग पर बातें करते सुनकर नागपत्नि का माथा ठनक गया और वो फ़ुफ़कारने लगी. ताऊ डर गया…थोडी देर पहले ही जो निहायत ही  आज्ञाकारी पत्नि  और सर्पसुंदरी दिखाई दे रही थी उसका रूप अब बदल चुका था, नागराज भी अपनी पत्नि का यह ताई छाप रूप देखकर सहमें हुये थे. नागराज ने पत्नि से इशारों में ही पूछा कि बात क्या है?

नागपत्नि बोली – नही नही…तुम ब्लागिंग नही करोगे नागराज. और ताऊ की तरफ़ मुखातिब होकर बोली - ताऊ, तुम जानते नही हो…पिछले जन्म में मैं तुमसे भी बडी ब्लागर थी. तुम्हारे सारे मठाधीश मेरी चिलम भरा करते थे…….

ताऊ ने बीच में ही टोका – भाभीजी, फ़िर आप इतना नाराज क्यों हो रही हैं? जब  आप स्वयं ब्लागर थी तो अब भाई साहब को ब्लागिंग करने दिजिये..आजकल हिंदी ब्लागरों का यों भी टोटा हो गया है.

नागपत्नि बोली – ताऊ तुम क्या जानो ब्लागिंग का दर्द? तुमको तो  ब्लागिंग की वजह से ताई  दो चार लठ्ठ ही मारती है पर मुझे तो जिंदा जलना पडा था पिछले जन्म में…. मुझे ब्लागिंग का इतना बडा नशा था कि मैं चौबीस घंटे बस उसी में खोयी रहती थी. दिन रात ब्लागिंग सेवा में ही लगी रहती……

ताऊ ने बीच में ही टोक कर पूछा – तो भाभीजी इसमें बुराई क्या थी? ब्लागिंग का जल कर मरने से क्या संबंध? आजकल भी कई ब्लागर चौबीसों घंटे ब्लागिंग करते हैं? तो उनको क्या जलकर मरना पडेगा? मैं तो खुद कभी चौबीस क्या बल्कि  अडतालीस घंटे ब्लागिंग किया करता था.

नागपत्नि बोली – ताऊ, असल में ब्लागिंग तो एक बहाना भर था. सत्य यह था कि मैं दहेज कम लायी थी. शादी के समय कम दहेज की वजह से मेरी सास मुझसे बहुत ज्यादा नाराज  रहती थी. बस हर समय मुझे ताने दिया करती थी. और मैं सास के तानों से अपना दिमाग हटाने के लिये ब्लागिंग में डूबी रहती. उसको मुझमें बुराई निकालने का इससे बडा और क्या बहाना मिलता?  एक दिन जब मैं बेनामी टिप्पणियां करने  में मशगूल थी तब चुपचाप पीछे से आकर  मेरी सास ने  मुझ पर केरोसिन डाल कर आग लगा दी और मुझे संभलने का मौका तक नही मिला…. और इस जन्म में मैं यहां हूं… ताऊ, तुम हमें माफ़ करो और अपने घर जावो… हमें नही करनी ब्लागिंग… हमें अपनी दुनियां में ही खुश रहने दो….

ताऊ को ऐसा झटका लगा जैसे आसमान से जमीन पर गिरा हो. नागराज जैसा सुलझा हुआ एक ब्लागर चेला हाथ से निकला जा रहा था...…क्योंकि नागराज जैसा दबंग चेला हो तो बडे बडे मठाधीशों के मठों की बैंड आसानी से बजायी जा सकती है सो नागपत्नि को समझाने के उद्देष्य से ताऊ बोला – भाभी जी आप मेरी बात तो सुनिये…. आज हिंदी की सेवा के लिये नये और भाई साहब जैसे  सुलझे हुये ब्लागरों की सख्त आवश्यकता है…

ताऊ के इतना कहते ही नागपत्नि फ़ुफ़कारते हुये बोली – तेरी ऐसी की तैसी ताऊ की….. तुझे मालूम नही है कि इस जन्म में भी मेरे बाप ने दहेज नही दिया है और ये रजाई में दुबक कर बैठी मेरी जिंदा  सास अभी भी नाराज होकर ताने मारती रहती है. पिछले जन्म में भी जला कर मारी गई हूं....…इस जन्म में नहीं जलना चाहती…..

ताऊ इस हाथ आये ब्लागर को छोडना नही चाहता था सो कुछ बोलता इसके पहले ही नागपत्नि फ़ुफ़कारते हुये लहरायी और पास पडा लठ्ठ उठाकर ताऊ की टांगों पर दे मारा. ताऊ चीखते हुये झटके से उठा तो देखा  सामने ताई दूसरा  लठ्ठ मारने को तैयार खडी चिल्ला रही थी….सबेरे के नौ बज गये…अब तक नही उठा..आफ़िस क्या तेरा ताऊ जायेगा?


आखिर मिस. समीरा टेढी ने ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र को खोज ही लिया

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र, ब्लागिस्तान का सारा कार्यभार रामप्यारे के हवाले करके काफ़ी समय पूर्व ही दंडकारण्य के लिये प्रस्थान कर गये थे. अंधे होते हुये भी महाराज ताऊ धॄतराष्ट्र में शायद भविष्य में झांकने की असीम ताकत रही होगी जो समय रहते यहां से गमन कर गये. शायद उनको मालूम था कि अब सब घोटालों का पर्दा फ़ास होने का समय आ चुका है. हस्तिनापुर के सम्राट होने के नाते सारा ठीकरा तो आखिर उनके माथे ही फ़ूटना था.

महाराज को ढूंढने के अनेक लोगों ने प्रयास किये परंतु महाराज तो रामप्यारे के सींगों की तरह गायब हो गये थे. ऐसे में मिस समीरा टेढी को कहां चैन पडता सो अनेकों जगह ढूंढते ढूंढते मिस समीरा ने ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र को हिमालय की वादियों में जाकर ढूंढ ही लिया. मिस समीरा को देखते ही महाराज धॄतराष्ट्र खिल उठे और काफ़ी गर्मजोशी से उनका स्वागत किया.

आखिर मिस. समीरा टेढी ने ताऊ महाराज को खोज ही लिया


ताऊ महा घोटाला धाम के आसपास बिखरी पडी शुभ्र धवल बर्फ़ पर महाराज के साथ चहलकदमी करते हुये समीरा जी ने महाराज से राजकाज के प्रति उनकी बेरूखी का सबब जानना चाहा तो महाराज धॄतराष्ट्र आखिर बोल ही पडे - अब आप ही बताईये समीरा जी, हम क्या कर सकते हैं? हस्तिनापुर में हम सिर्फ़ नाम के महाराज रह गये थे. सब पक्ष विपक्ष के राजकुमार एक दूसरे की टांग खिंचाई में लगे थे, सरकारी अधिकारी, मंत्री, कर्मचारी किसी भी तरह अपना बैंक बैलेंस बढाने में लगे थे. तो हम वहां रह कर क्या करते?

मिस समीरा टेढी : पर महाराज, आपके इस तरह पलायन करने से तो आपके हस्तिनापुर में और घोर अव्यवस्था फ़ैल गई है, आपकी प्रजा दुखी है?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : हम क्या कर सकते हैं समीरा जी? हम तो बस मंत्रि मंडल की कठपुतली भर रह गये हैं. हमारे राजकुमारों के अपने अपने खजाने भरने की महत्वाकांक्षाओं और भ्रष्टाचार के चलते हमारे लिये सांप छछूंदर जैसी हालात हो गई है, हमे ना चाहते हुये भी अपने राजकुमारों और मंत्रियों के गलत काम काज का बचाव और समर्थन करना ही पडता है.

समीरा जी : हां महाराज आपकी ये बात तो सही है, अब देखिये ना बाबा कामदेव और उनके सोते हुये शिष्यों पर आपके सिपहसालारों ने आंसू गैस और लाठियां पडवा दी, ये तो बहुत गलत बात हुई महाराज?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : अब समीरा जी हमारे मंत्री और राजकुमार इतने बुरे भी नही है, आप जानती है ना कि बाबा कामदेव योगासन सिखाने के नाम पर वहां शासन के खिलाफ़ साजिश रच रहे थे? इसमे क्या बुरा किया? इस मसले में हमारे अधिकारियों ने राज धर्म का पालन किया है, हम उनको साजिश बेनकाब करने के लिये धन्यवाद देते हैं, आखिर शासन थोडी सख्ती के बिना नही चल सकता.

समीरा जी - पर महाराज आपके अधिकारी एवम मंत्री तो कन्ना साहेब के रोकपाल बिल के भी खिलाफ़ हैं. वो कहते हैं कि बिना चुनाव लडे कोई सिविल सोसाईटी थोडे ही बन सकती है? या तो राजवंश में पैदा होके दिखाये या चुनाव लडे, तब ठीक है, यूं ही बैठ गये अनशन पर और बन गये रोकपाल बिल के कर्ता धर्ता?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : बिल्कुल सही कहा, आखिर प्रजा को प्रजा ही रहना चाहिये, हमने यहां से ही सख्त आदेश दे दिये हैं कि बगावत की कोशीशे हर स्तर पर नाकाम कर दी जानी चाहिये.

समीरा जी :- और महाराज आजकल आतंकवादी घटनाएं बढ गई है? आपकी इंटेलीजेंसिया नाकाम हो रही हैं? प्रजा रोज मर रही है.

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : अरे समीरा जी आप कहीं पत्रकारिता के पेशे में तो नही आ गई हैं? आप तो बाल की खाल निकाले जा रही हैं? अरे इतने सालों से जब आतंकवादी घटनाएं नही हुई तो उसका श्रेय आप हमारे शासन को नही दे रही हैं और कहीं दो चार बम फ़ूट गये, ट्रेनें पलटा दी गई तो आप आसमान सर पर उठा ले रही हैं? आपको मालूम है कि पडौस के मुल्कों में रोज आतंकवादी वारदातें होती हैं और हमारे यहां कभी कभी होती हैं. आतंकवादी घटनाओं को कोई भी नही रोक सकता, फ़िर आप उल्टे हमें दोष दे रही हैं? आपको तो हमारे मंत्री और अधिकारियों की पीठ थपथपानी चाहिये, उनका एहसानमंद होना चाहिये.

समीरा जी :- बस महाराज श्री एक बात और बता दिजिये कि डीजल, पेट्रोल, दवाई, स्कूल फ़ीस, खाना पीना सब कुछ महंगा हो गया है, अधिकतम जनसंख्या दो वक्त की रोटी और दूसरे संशाधन नही जुटा पा रही है. क्या आप इस के लिये कोई उपाय करेंगे?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : देखिये समीरा जी, महंगाई का बढना बहुत जरूरी है, इससे अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में हमारा रूतबा बढता है, इसलिये महंगाई को तो हम चाहकर भी कम नही करेंगे, अपना रूतबा बढाने के लिये हम चाहेंगे कि महंगाई अभी कम से कम दुगूनी तक बढ जाये तो हम विश्व बिरादरी के नंबरदार बनने की हैसियत वाले हो जायेंगे.

समीरा जी :- पर महाराज, अगर महंगाई दुगूनी तक बढ गई तो प्रजा भूखों मर जायेगी, कैसे जिंदा रहेगी प्रजा? कुछ तो सोचिये? बोलिये महाराज बोलिए?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : समीरा जी हमारे हाथ में कुछ नही है. महंगाई तो नही रूकने वाली, अलबत्ता जो प्रजा जन इस महंगाई के साथ नही चल सकते उनके लिये हम कुछ उपाय अवश्य सोचेंगे.

समीरा जी ने तनिक खुश होते हुये पूछा - बताईये महाराज बताईये, प्रजा के लिये आपका क्या प्रोग्राम है?

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र : समीरा जी, हम क्या कर सकते हैं? हमारे हाथ में कुछ नही है, हम तो बेबस तिकडमी सरकार के प्रधान हैं, हमारे हस्तिनापुर की प्यारी प्रजा रोज तिल तिल कर भूख प्यास से मरे, इसके बजाये हम सब्सीडी देकर सरकारी खजाने से मुफ़्त के जहर की बोरियां चौपाल में रखवा देंगे, जो तिल तिल कर मरने से डरता हो वो एक बार खाकर मर जाये.

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र की ये बाते सुनकर मिस समीरा टेढी अवाक सी उनको देखती रह गयी.