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गोटू सुनार ने लिया ताऊ से बदला.

आप लोग पहले पढ चुके हैं कि गोटू सुनार का माल असबाव से लदा ऊंट लेकर ताऊ भाग कर घर आगया और सारा माल अपने घर की जमीन मे दबा के कुये म्ह जाकै छुप गया.

 

पर भाटिया जी को यह सहन नही हुआ. ताऊ ने गोटू से उनके दस लाख भी वसुळ कर लिये थे और मौका पाकर उनको भेजने वाला ही था. पर आजकल दोस्ती की भी हद हो गई. भाटिया जी को ताऊ पर यकीन नही कि ताऊ पिस्से लौटायेगा. सो भाटिया जी ने समीर लाल जी को फ़ोन करके कहा कि लालाजी आप ताऊ से मेरे १५ लाख लेलेना और ताऊ को यह कह देना कि मैं कनाडा अबकी बार युरोप होते जुये ही जारहा हूं. सो भाटिया जी को पिस्से मैं देता जाऊंगा. आपका मनी ट्रांसफ़र का खर्चा बच जायेगा.

 

पर भाटिया जी आपने ताऊ को कहा था कि पिस्से तो आपको आपके घर रोहतक म्ह चाहिये थे? पर चलो जी कोई बात नही? दोस्ती की पिछाण भी हो गई और आप लोगो की नजर भी लग गई. इब पिस्से तो गोटू सुनार वापस ले गया.मैं कोई झूंठ नही बोल रहा हूं. पूरा किस्सा नीचे पढ लो.

 

जैसे ही गोटू सुनार दुसरी जूती उठाकै वापस आया और उसने देखा कि ऊंट तो माल असबाव सहित गायब हो गया तो तुरंत समझ गया कि ये ताऊ की कारगुजारी है. और बिना समय खराब किये सीधे ताउ के घर आया.

 

गोटू ने आते ही ताई को कहा - भाभी रामराम. इब मन्नै न्युं बता अक भाई (ताऊ) कित सै? मन्नै घणा जरुरी काम सै उसतैं.

 

इब ताई तो ठहरी ताई. साफ़ झूंठ बोल गई. बोली- देवर इब के बताऊं? मैं तो घणी चिंता म्ह मरी जारी सूं. थारा भाई तो घणा दिनां का गया हुआ सै. और इब्बी तक कोई समाचार भी नही भेजा, सो  के बताऊं? मेरी तो दिन पर दिन  चिंता बधती ही जावै सै.

 

गोटू समझ गया कि ताई भी कोई बेवकूफ़ नही है. और इससे पूछने मे कोई फ़ायदा नही है. सो इब जासूसी करनी पडेगी. गोटू ने अपनी जासूसी करके  ताऊ का अता पता लगा लिया. पर समस्या ये थी की उससे माल कहां है? इसका पता कैसे लगाया जाये?

 

एक दिन गोटऊ अपनी स्कीम बनाकै ताई के पास पहुंचा और बोला - भाभी आपकी कोई चालखी ( लुगडी, चुन्नी) हो तो देदे. एक गरीब औरत को जरुरत है.

 

ताई ने ज्यादा कुछ विचार नही किया और अपनी एक नई चालखी और घाघरा  संदूक मे से निकाल कर गोटू को देदी.

 

गोटू सुनार दुसरे दिन सुबह ही करीब ११ बजे ताई के कपडे पहन कर यानि ताई बनकै सीधे उस अंधे कुये पर जा पहुंचा.

 

और जाते ही सीधे एक रस्सी से बाल्टी बांध कर उसमे एक सूखा टिक्कड (मोटी रोटी) और एक घंठा (प्याज) रख कै नीचे उतार दिया.

 

ताऊ को बडा आश्चर्य हुआ कि आज इतनी जल्दी रोटी और वो भी सूखी और साथ मे एक घंठी (प्याज)? हमेशा तो घी से भरे रोटे और गुड साथ मे आता था.

 

ताऊ को गुस्सा आ गया. उसने सर ऊठाकर उपर देखा. ताई के जनाने कपडे पहने गोटु सुनार को देख कर उसको कुछ भी शक नही हुआ. अब ताऊ घणि जोर तैं चिल्लाया - अरे क्या घर म्ह कंगाली आगई जो ये सूखे रोट और वो भी एक, लेके आ गई?

 

उपर गोटू सुनार को हंसी आगई पर अपनी हंसी को दबा गया और जनानी आवाज में उलाहना देते हुये बोला - तुम तो कब से कुये मे मजे से छुप के बैठे हो और घर मे अनाज पैसा, घी, गुड सब कुछ खत्म हो चुका है. मैं अकेली बीरबानी की जात मैं क्या करुं?

 

इब ताऊ थोडा तुनक कर बोला - यहां क्या खाक मजे मे हूं? वो तेरे बाप सुनार को पता चल गया तो सब साफ़ कर जायेगा. फ़िर रोते रहना.  और अब हमारे पास पैसों कि क्या कमी? जो तू उलाहना दे रेही है? अरे तू अपने घर मे रसोई मे, चुल्हे के पीछॆ, चाकी के नीचे, तुलसी चौरे के नीचे, भैंस की ल्हास ( चारा रखने की जगह) के पास ..कही से भी खोद कर निकाल ले पैसे. पूरे घर मे पैसे ही पैसे दबे पडे हैं. ताऊ ने बडे मस्ती मे शान से कहा.

 

गोटू सुनार ने जनानी आवाज मे कहा कि - ठीक है कल से घी भरी रोटी और गुड ही ल्याया करुंगी. और वहां से फ़ुर्ती से रवाना हो गया. और ताऊ कुये मे अपनी धुन मे ही खोया था.

 

इधर ताई ने दोपहर मे ताऊ के खाने की गठरी उठाई और अंधे कुये की तरफ़ चल दी. इधर गोटु सुनार इसी ताक मे बैठा था. जैसे ही ताई घर से बाहर निकली वो घर मे घुस गया और सारा माल असबाव खोद खाद कै निकाल कर वहां से रफ़्फ़ुचक्कर हो गया.

 

taau in well उधर ताई ने जैसे ही जाकर कुये मे रोटी की बाल्टी लटकाई..ताऊ बडे आश्चर्य से बोला - अभी तो तू रोटी देकर गई थी...

 

ताई -  मैं..? नही तो... मैं तो घर से ही अभी निकली हूं.

 

अब ताऊ माथा पीटते हुये बोला - अरे मैं तो लुट गया..बरबाद हो गया.. अब देखती क्या है? मुझे फ़टाफ़ट कुये से निकाल...

 

और ताई ने जैसे तैसे ताऊ को रस्से के सहारे कुये से बाहर निकाला.

 

 

इब खूंटे पै पढो :-

आप तो जानते ही हैं कि ताऊ गाम म्ह अंग्रेजी का जानने वाला विद्वान आदमी था. और
बाद मे ताऊ को स्कूल मे मास्टर की नोकरी मिल गई.

एक दिन स्कूल  मे स्कूल इंसपेक्टर आगया. और ताऊ आंठवी कक्षा  को अंग्रेजी पढाण लाग रया था. स्कूल का हैड मास्टर और इंसपेक्टर ताऊ वाली क्लास मे आकर चुप चाप खडे हो गये. और ताऊ का छात्रों को अंग्रेजी पढाणा चालू था.

ताऊ : हां तो बच्चों बोलो गधा (donkey)

कक्षा के छात्र : गधा

ताऊ : बोलो बच्चों गधे के पीछे गधा.

कक्षा के छात्र : गधे के पीछे गधा.

ताऊ : बोलो बच्चों.. गधा,  गधे के पीछे गधा, गधे के पीछे मैं

कक्षा के छात्र बोले -  गधा,  गधे के पीछे गधा, गधे के पीछे मैं

अब ताऊ के पढाने के ये ढंग देखकर हैड मास्टर तो गुस्से मे उबल ही रहा था और सोच रहा था कि ये बावली बूच ताऊ मास्टर आज स्कूल की मान्यता रद्द करवाकै
रहेगा और इण्स्पेक्टर भी गुस्से से नाक फ़ुला रहा था. और ताऊ का इधर पढाणा चालू था.

ताऊ : हां तो बालकों बोलो .. गधा,  गधे के पीछे गधा, गधे के पीछे मैं..मेरे पीछे देश (Nation)

सारे बच्चे बोले : गधा,  गधे के पीछे गधा, गधे के पीछे मैं..मेरे पीछे देश

इतने मे इंसपेक्टर गुस्से से हैड मास्टर  से बोला - ये क्या बेवकूफ़ी की हरकत है? ये बच्चों को अंग्रेजी पढा रहा है या मजाक कर रहा है? आज तो मैं बहुत सख्त से सख्त  एक्शन लूंगा तुम्हारे स्कूल के खिलाफ़.

और हैड मास्टर ताऊ पर गुस्से से चिल्लाया कि तुम ये क्या गधा..गधे के पीछ गधा..आखिर तुम पढा क्या रहे हो? मैं तुमको नोकरी से निकाल दुंगा.

ताऊ बोला - सर..जी..  मैं बच्चो को   एसेसीनेशन की स्पेलींग याद करवाने की कोशीश कर रहा था.

 

ASSASSINATION..... यानि .... ASS... ASS... I... NATION.



गोटू सुनार ने ताऊ को पहनाई टोपी

पिछली बार आपने पढा - गोटू सुनार ताऊ का दोस्त था और दोनो दोस्त होने के साथ शातिर ठग भी थे. और उनका जोईंट वेंचर भी बन गया था. जैसा कि कल की पोस्ट मे फ़ुरसतिया जी ने बताया था कि समीरलालजी ने चिरंजीव की शादी मे दिल खोल कर खर्च किया था सो Udan Tashtari जी बेटे के ब्याह का कुछ खर्चा इस जोईंट वेंचर की आडिट फ़ीस के रुप मे वसुलना चाहते थे. और इस जोईंट वेंचर से Gyan Dutt Pandey जी को इतनी आशा थी कि उन्होने "ताऊ और गोटू सुनार का ब्लॉग! " नाम से इस जोईण्ट वेंचर का नाम करण भी कर दिया था.


भाई अभिषेक ओझा जी तो कह रहे थे ये तो भाई इन्वेस्ट करने लायक वेंचर है... तगड़ा रिटर्न मिलेगा ! और अनूप शुक्ल फ़ुरसतिया जी ने तो भविष्य ताडते हुये ताऊ को पहले ही महान घोषित कर दिया. यानि शायद खुद को ही. आपको याद है ना कि ताऊ कौन पहेली मे सबसे ज्यादा शक या कहें दावेदारों मे फ़ुरसतिया जी भी हैं


ताऊ ने भी सोचा था कि दो चार लंबे हाथ मारकर जैंटलमैन बन जायेगा और हमेशा के लिये स्विटरजर्लैंड मे जाकै बस जायेगा. पर क्या बेईमानों के भी वेंचर कभी चला करते हैं? समीरलालजी, ज्ञानजी, अभिषेकजी और फ़ुरसतिया जी की आशायें क्या पूरी हुई?

पढिये इस वेंचर का और एक कारनामा.


ताऊ और गोटू सुनार दोनो ने तय कर लिया था कि अब साथ मिलकर ठगी किया करेंगे और एक दुसरे को बिल्कुल भी नही ठगेंगे.


गोटू सुनार बोला- भई ताऊ, एक शिकार सै मेरी नजर म्ह.


ताऊ - अरे तो बावली बूच, जल्दी बता दे, इब घणी कडकी चाल री सै.


गोटू सुनार - ताऊ, म्हारै गाम का सेठ मर लिया सै पिछले महिने ही. उसके छोरे को चूना लगाते हैं चल के.


ताऊ - अरे बेकूफ़ आदमी, वो तो घणा शातिर सेठ था उसके छोरे तो और भी घणै शातिर होंगे? सांप के सपोलिये ही तो होंगे ना? एक बार मन्नै उस सेठ नै सांप के साथ बंद कर दिया था कमरे म्ह. वो तो मैं जोड तोड करके निकल लिया था वर्ना सेठ ने तो मेरा खात्मा ही कर दिया था. भाई तू तो कोई दुसरा शिकार बता.


गोटू सुनार - देख ताऊ, बहुत लंबा हाथ मारते हैं, बस तू साथ हो जा. मेरे अकेले का खेल होता तो अभी तक कभी का निपटा चुका होता. ये जोईंट वेंचर ही इस सेठ के छोरे को ठगने के लिये मैने बनाया है.


और गोटू सुनार ने सारा प्लान ताऊ को समझा दिया. प्लान सुनते ही ताऊ की तो बांछे खिल ऊठी. प्लान के मुताबिक ताऊ श्मशान मे एक पेड के ठूंठ के पास गड्ढा खोदकर अंदर छुप के बैठ गया और गोटू सुनार सेठ के घर उसके लडके के पास चला गया और सेठ जी की हवेली के सामने जाकर आवाज लगाई - अरे भई सेठ जी बाहर निकलो जी. देखो थारा यार गोटू आया है,


सेठ का लडका बाहर आया तो गोटू सुनार ने पूछा कि - लालाजी हैं क्या? सेठ का लडका बोला - जी आप कौन? तब गोटू बोला - भई मैं लाला का असली दोस्त.


तब सेठ का लडका रुआंसा होकर बोला-जी चाचाजी क्या बताऊं? बापू तो स्वर्गवासी हो गये. अब गोटू सुनार दहाड मार कर रोने लगा और बोला - अरे ये क्या जुल्म किया तुमने? मेरा यार चला गया और तुमने मुझे खबर ही नही की?


लडका बोला - जी, बापू ने कभी आपके बारे मे जिक्र ही नही किया हम लोगो से तो.


अब गोटू बोला - भई हमारी दोस्ती तो अटूट थी. अब तुम को तो ये भी नही बताया होगा कि मेरी सुनारी की दुकान के ५६० किलो चांदी के सिक्के, दस किलो सोना और एक ऊंट बिना किसी लिखा पढी के मैने तुम्हारे बापू को उधार देदिया था.


अब हमारी कोई हल्कट लोगों की दोस्ती तो थी नही, कि किसी को दोस्ती की दुहाई देते या कोई लिखा पढी करते. गोटू सुनार ने दांव फ़ेंकते हुये कहा.


लडका बोला - जी, पर बापू जी ने तो इसका कभी जिक्र ही नही किया था?


गोटू सुनार बोला - अरे भाई तुमको विश्वास नही है तो चलो, श्मशान मे चलकर सेठ जी से ही पूछ लेते हैं.


सेठ जी का लडका बोला - पर वे तो मर चुके हैं? फ़िर श्मशान मे.... उसकी बात बीच मे काटते हुये और आंखों मे आंसू लाते हुये गोटू सुनार बोला - बेटे, इमानदार आदमी मरकर भी सही ही बोलता है. इसमे "हाथ कंगन को आरसी क्या और पढे लिखे को फ़ारसी क्या?"


चलो वहीं श्मशान मे लालाजी से ही पूछ लेते हैं, और मैं भी अपने दोस्त से मिल लूंगा. और गोटु सुनार सेठ के लडके का हाथ पकड कर श्मशान की तरफ़ चल दिया.


श्मशान से कुछ दुरी पर रुकते हुये ही गोटू सुनार ने जोर से आवाज लगाई- अरे भई सेठ जी ओ सेठ जी.....


उधर गड्ढे में छुपे बैठे ताऊ ने जवाब दिया - अरे कौन है भाई? क्या मेरा यार गोटू सुनार है क्या?


इधर से गोटू सुनारे रुआंसा होते हुये बोला - अरे यार लाला तू बिना बताये ही स्वर्गवासी हो गया. अरे कमसे कम हम जैसे दोस्तों को तो बता देता?


उधर से सेठ बने हुये ताऊ ने जवाब दिया - भाई गोटू, क्या बताऊं ? मुझे तो ऐसी बीमारी लगी कि बिना बताये ही मरना पडा. आपके ५६० किलो चांदी के सिक्के, दस किलो सोना और एक ऊंट भी मुझे वापस करने का मौका नही मिला. मेरे बेटे से कहना कि वो तुमको लौटा दे. नही तो मेरी आत्मा पर मरने के बाद भी भयानक बोझ रहेगा.


यह संवाद सुनकर सेठ का छोरा रुआंसा हो गया, और सुबकते हुये गोटू सुनार से लिपट कर बोला - चाचाजी बस अब तो आप घर चलो. गोटु उसे पुचकारते हुये बोला - बेटा, तू चिन्ता मत कर. मैं हूं ना अभी. तू बैठ यहां . मैं एक मिनट मे लघुशंका करके आता हूं. फ़िर घर चलते हैं.

लघुशंका करने के बहाने गोटू सुनार उस गड्ढे की तरफ़ जाकर बैठ गया, जहां ताऊ छुपा था. और धीरे से ताऊ को बोला - ताऊ, तू अभी यहा से बाहर मत जाना. क्या पता, सेठ के छोरे की नियत खराब हो जाये और फ़िर एक दो लोगों को लेकर यहां सवाल जवाब करने आ जाये. सो तू तैयार होकर यहीं बैठे रहना. जैसे ही माल मिल जायेगा मैं सीधा यहीं आऊंगा.


घर जाकर सेठ के लडके ने सारा माल यानि चांदी के सिक्के और दस किलो सोना ऊंट पर लाद कर गोटू सुनार को दे दिये. गोटू सुनार की तो माल देखते ही नियत खराब हो गई और माल लेकर रफ़्फ़ुचक्कर हो लिया. उधर ताऊ दुसरे दिन तक भूखा प्यासा पडा रहा गड्ढे मे इंतजार करता. अब ताऊ की बत्ती जल गई कि गोटू दांव दे गया. अब माल मे हिस्सा मिलना बडा मुश्किल है.


पर आसानी से हार मान जाये वो ताऊ ही क्या? ताऊ वहां से निकल कर गोटू सुनार की खोज मे निकल पडा.


क्या ताऊ को हिस्सा मिला? ये अगले अंक मे....




इब खूंटे पै पढो :-


ताऊ को एक नया चाल्हा सूझ गया. डा. अनुराग जी के क्लिनिक के बाहर रोज जाकै
खडा होण लाग ग्या. इस बात पर किसी का ध्यान नही गया. ताऊ का ये रोज का
काम हो गया. सुबह दस बजे से दोपहर एक बजे तक क्लिनिक के सामने खडे हो कर ताका झांकी करता था.

ताऊ को मालुम नही था कि डाक्टर साहब किसी कांफ़्रेंस म्ह बंगलोर गये हैं. बंद क्लिनिक के सामने खडा हो जाता था. किसी के चक्कर कुछ समझ मे नही आया कि
आखिर रोज रोज यहां क्युं खडा होता है?

तभी राज भाटिय़ा जी वहां ताऊ को अपने पैसे वापस लेने का तकादा करने, ढुंढते हुये आगये और ताऊ से पूछा कि यहां क्यो खडे होकर समय खराब करते हो? कुछ काम धंधा करो.

ताऊ के ध्यान मे यह नही आया कि ये राज भाटिया जी ढुंढते हुये आ गये हैं, वर्ना जवाब देना तो दूर, वहां से भाग ही लेता. सो ताऊ जवाब दे बैठा - भाई मैं तो सुथरी २ बीरबानियां और छोरियां नै देखण का ही काम कर रया सूं.

इब राज भाटिया जी नाराज होते हुये बोले - अरे बावलीबूच.. इब तेरी उम्र सै के ये बाळकपणे के काम करण की? मेरे पिस्से तो लौटाता कोनी?
अरे भाग तावला सा, देख वो डाक्टर साहब इधर ही आरया सै लठ्ठ लेके.

इतनी देर म्ह डाक्टर साहब आगये और नाराज होते हुये बोले - क्योंजी आप ताऊ होकर मेरे क्लिनिक के सामने खडे होकर महिलाओं और लडकियों को रोज क्यूं घूरते हैं ? लगता है मुझे पुलिस बुलानी पडेगी?

ताऊ बोला - अजी डाक्टर साहब, वो देखो, आपने ही लिख रखा है कि मरीजों को देखने का समय, सूबह दस बजे से एक बजे तक. और मैं इसके अलावा यहां एक मिनट भी नही रुकता. अब पुलिस मेरा क्या बिगाड लेगी?

ताऊ को मिला बराबरी का जोडीदार

ताऊ की तरफ़ तैं  आज सबेरे की  रामराम. भाई ताऊ का एक घणा पक्का दोस्त था गोटू सुनार. इन दोनुआं म्ह पक्की दांत काटी दोस्ती थी. और दोनू के दोनूं ही शातिर ठग थे. ताऊ के कारनामें तो आप जानते ही हो. पर गोटू सुनार उससे भी दो हाथ आगे था.

 

इन दोनो की एक विशेषता और थी कि दोस्ती के बावजूद भी एक दुसरे को  ठगने का कोई भी मौका नही छोडते थे. इसके बावजूद भी उनकी दोस्ती मे कोई दरार कभी नही आई.

 

अब एक दिन गोटू सुनार के छोरे का ब्याह था. सुनार ने ताऊ को उसके यहां आने का न्योता दिया. ताऊ शादी मे पहुंचा. सब कार्यक्रमों मे शामिल हुआ .  दहेज मे सभी सामान आया जो कि सभी शादियों मे आता है. पर एक सोने का बडा सा थाल भी दहेज मे आया था और उस पर ताऊ की नियत खराब हो गई थी. पर ताऊ को कोई मौका हाथ नही लगा इसको पार करने का.

 

कुछ दिन बाद लगता है गोटू की किस्मत खराब होगी जो उसने ताऊ को फ़िर बुलावा भेजा और ताऊ आ धमका. ताऊ के आते ही दोनों दोस्त हुक्का गुडगुडाते हुये गप्पें मारने लगे. रात को सुनार ने ताऊ को उसी सोने के थाल मे खाना खिलाया. बस ताऊ के दिमाग मे तो स्कीम दौडने लगी.

 

उधर गोटू सुनार भी समझ गया कि ताऊ की नियत खराब हो गई है और किसी भी तरह थाल को बचाना है. पर ताऊ जैसे ठग से वो भी घबराता था. खैर उसने अपना इन्तजाम कर लिया. और दोनो की खटिया बिल्कुल पास पास लगा दी और दोनो सो गये,

 

थोडी देर मे ताऊ नकली खर्राटे लेने लगा. ये देख कर गोटू सुनार भी सो गया.

ताऊ ने देखा कि सुनार खर्राटे ले रहा है तो उसने सुनार की खटिया के उपर एक छींका बंधा देखा और उसमे वही सोने का थाल रखा था और पानी से पूरा लबालब भरा हुआ. ताऊ समझ गया कि सुनार की चालाकी है ये.


खैर ताऊ भी ताऊ था.  ताऊ चुपचाप ऊठा, और हुक्के की नलकी निकाल लाया. उस नलकी को धीरे से उस सोने के थाल के पानी मे डाला और चुपचाप सारा पानी खींच कर पी गया. फ़िर उस थाल को ऊठाया और सीधे गांव के बाहर तालाब मे कमर तक पानी मे घुस गया और वहां सोने के थाल को  गाड कर वापस आकर चुपचाप अपनी खाट पर सो गया.

 

अब रात के दुसरे प्रहर मे गोटू सुनार की आंख खुली और उसकी नजर छींके पर गई तो उसके होश ऊड गये. ताऊ बगल की चारपाई पर सो रहा है और थाल गायब है.

 

धीरे २ उसने पूरे कमरे को छान मारा. और ताऊ की चतुराई पर दंग रह गया कि आखिर इसने बिना पानी गिराये थाळ को पार कैसे किया ? पर उसकी अक्ल मे ये गुथ्थी नही सुलझी. आखिर वो भी ताऊ के सामने हार मान गया.

 

पर सुनार दिमाग लडाता रहा कि ये सब कैसे हुआ ? अचानक उसका हाथ ताऊ के शरीर से लग गया. उसने टटोल कर देखा तो ताऊ का शरीर कमर के नीचे ठंडा था और कमर के उपर गर्म.

 

सुनार सारा माजरा समझ गया और चुपके से ऊठकर उस तालाब तक गया और सोने का  थाल उसमे से निकाल लाया. वापस आकर चुप चाप सो गया.

 

सुबह हुई, सुनार ऊठ कर हुक्का भर लाया, इतनी देर मे ताऊ भी ऊठ गया.
सुनार - ताऊ राम राम ! कहो रात कैसी गुजरी ? नींद तो ठीक से आई ?
ताऊ - अरे यार गोटू, जैसा मेरा घर वैसा तेरा घर ! भाई घणी बधकी ( बढिया) नींद आई.मैं तो रात को सोया तो अब नींद खुली है,

 

हुका पीके ताऊ बोला - भाई गोटू इब मैं जाऊंगा मेरे गांव,   घर और खेतां का घणा काम पडया सै.
सुनार बोला - ताऊ इब थोडी देर डटज्या ! खाना वाना खाकै चले जाणा. मैं थारी भाभी तैं बोलकै जल्दी खाणा बनवाता हूं. मुस्कराते हुये सुनार बोला.

 

दोनों तालाब पर जाकर फ़्रेश हौ   कै नहा धौकै आगये तब तक खाना तैयार था. सुनार ने अब फ़िर से ताऊ को सोने उसी थाल मे खाना परोसा. ताऊ परेशान ! जैसे तैसे खाना खाया और आखिर पूछ ही बैठा कि गोटू भाई तुम्हारे पास ऐसे कितने सोने के थाल हैं ?

 

सुनार बोला - बस एक ही है  ताऊ.
ताऊ आश्चर्य से बोला - पर वो तो मैं.......! और ताऊ विस्मय से बोला - ये कैसे हो सकता है ?


सुनार बोला - ताऊ पहले तू बता फ़िर मैं बताता हूं . अब मैं कोई रामदयाल कुम्हार तो हूं नही . मैं हूं गोटू सुनार . और तेरे से कमजोर इन कामों मे नही पडूंगा. फ़िर दोनो ने अपनी अपनी कारस्तानी सुनाई. और दोनो एक दुसरे की बडाई करने लगे.

 

अचानक ताऊ के दिमाग मे एक आईडिया आगया और वो सुनार से बोला कि - यार हम दोनो ही मंजे  हुये ठग हैं. अगर हम दोनो मिल जाये तो कोई लम्बा हाथ मार सकते हैं . और मेरी निगाह मे एक शिकार भी है.

 

सुनार भी कडका और पका शातिर  था सो बोला - ताऊ जल्दी बता शिकार का पता , बस समझ  ले अपना joint venture शुरु.

 

और ताऊ ने उसको बताया कि सेठ के पास बहुत तगडा माल है, सो एक हाथ मार देते हैं. मेरा पुराना हिसाब किताब भी चुकता हो जायेगा.

 

और इस प्रकार इन दो शातिरों का joint venture शुरु हो गया और उसका पहला शिकार कौन बना ? ये सब अगले अंक मे देखना.

 

इब खूंटे पै पढो :-

ताऊ घणा परेशान था.  ताऊ ने राज भाटिया जी को फ़ोन लगा कर कुछ मदद करने
को कहा. पहले तो भाटिया जी ने मना कर दिया.

पर आप जानते ही हो कि ताऊ भी नम्बर एक का स्कीमबाज है सो उसने भाटिया
जी को ऐसी स्कीम समझाई कि भाटिया जी ने तुरंत ५ लाख रुपये ताऊ को ट्रांसफ़र करवा दिये.

अब ताऊ ने जो स्कीम भाटिया जी को बताई थी उसका हिसाब उनसे लग नही रहा
था. ताऊ की बताई स्कीम आज तक किसी को समझ नही आई तो भाटिया जी को
क्या समझ आने वाली थी?

ताऊ ने यह कह कर रुपये ट्रांसफ़र करवाये थे कि ५ रुपया सैकडा प्रतिमाह का ब्याज
और मुनाफ़े का चालीस टका और नुक्सान मेरा. पर हिसाब बारह महिने बाद करूंगा.

अब भाटिया जी हिसाब लगा रहे थे कि ५ रुपये सैकडे से २५ हजार महिना का तो ब्याज का मिलेगा, फ़िर मुनाफ़ा अलग. जब पूरा नही जोड पाये तो उन्होने समीरलाल जी
को फ़ोन लगा पूछा. 

भाटिया जी :- अजी समीर जी रामराम. कैसे हैं?
समीर जी :- रामराम जी भाटिया साहब, सब ईश्वर की कृपा है. आप सुनाईये, आज
कैसे याद कर लिया?
भाटिया जी :- अजी एक हिसाब जुडवाना था. थोडा बडा हिसाब है, अगर आपको समय
हो तो यह बताईये कि मैने ५ लाख रुपया ५ रुपये सैकडे प्रतिमाह से ताऊ को बारह महिने के लिये उधार दिये है तो मुझे कुल वापस कितने रुपये मिलेंगे?

समीर जी :- अजी भाटिया जी ! आपको कुछ भी नही मिलेगा.
भाटिया जी :- क्यों ? आप क्या गणित का हिसाब नही जानते? मैने तो सुना है आप
बहुत पहुंचे हुये CA  हैं?

समीर जी : अजी भाटिया साहब मैं तो गणित जानता हूं पर लगता है आप ताऊ को
नही जानते? इतनी बडी रकम देने के पहले हिसाब पूछना चाहिये था ना ?