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चेतावनी : इस पोस्ट को कृपया ब्लागर गण ना पढें.

आदरणीय ब्लागर गणों, आज मैं आप सभी को यहीं से चेता देना चाहता हूं कि प्लिज...प्लिज...आप यह पोस्ट यहां से आगे मत पढिये. तो आप पूछेंगे "प्यारे जी" जब आपने ब्लाग पोस्ट लिखी है तो हम क्यूं नही पढेंगे? तो मैं आपको स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह पोस्ट ब्लागर्स के परिजनों और शुभचिंतकों की सेवा के लिये लिखी गई है. अत: अगर आप ब्लागर हैं तो यहीं से उल्टे पांव लौट जाईये और अगर आपका कोई परिजन या मित्र ब्लागरत्व प्राप्ति की और अग्रसर है तो आप आगे पढिये.

आप जानते हैं कि आजकल तंबाकू, शराब के नशे छुडवाने के लिये कितने प्रकार के लुभावने विज्ञापन छपते हैं कि बिना बताये चुपचाप नशा छुडवाईये. और आजकल तो उडनतश्तरी से सुना है कि सिगरेट छुडवाने के लिये बेलन रूपी मशीन भी आगई है. क्या किया जा सकता है? जो बेचारा तकलीफ़ में है वो तो अवश्य खरीदेगा. और बेलन रूपी मशीन खरीदने की क्या आवश्यकता है? वो तो हर भारतीय घर मे मौजूद है ही. बस मशीन चलाने वाले आपरेटर की दया पर निर्भर है कि वो कब चलायेगी?

पर दोस्तो मैं मजाक नही कर रहा हूं. क्या आप जानते हैं कि आजकल असली नशा कौन सा है? जिससे हर परिजन त्रस्त हो चुका है? जी हां आप ठीक समझे हैं...आजकल सबसे खतरनाक नशा है ब्लागिंग का. और आज तक इससे मुक्ति दिलवाने की कोई दवाई गोली, केप्सूल या मशीन इजाद नही हुई है. पर अब आप चिंता मत किजिये. ताऊ प्रोडक्ट्स ने अनेक दिनों की अथक मेहनत और खोज द्वारा ब्लागिंग नशे से मुक्त करने के लिये शर्तिया और अचूक नुस्खें ढूंढ लिये हैं. अब आप इस खतरनाक नशे से बिना बताये आपके ब्लागिंग करने वाले परिजन की ब्लागिंग की लत छुडवा सकते हैं.



इस के लिये हमने अलग अलग पेकैज तैयार किये हैं. यानि नशा जिस स्तर का है उसी के हिसाब से कोर्स दिया जायेगा. यह कोर्स टेस्टेड हैं जिनका परीक्षण ताऊ पर किया गया है. अत: आप बेफ़िक्र होजायें और निम्न स्थितियों वाले ब्लागिंग के नशे की लत छुडवाने के लिये तुरंत संपर्क करें.

आपका परिजन निम्न में से किसी भी श्रेणी की लत का आदि हो सकता है. हमने ब्लागिंग के नशे के संपूर्ण लक्षण लिख दिये हैं और कोर्स लेने का तरीका और कीमत भी सामने ही लिख दी है. तुरंत संपूर्ण एडवांस के साथ आर्डर भेजे. VPP से कोई माल नही भेजा जायेगा.

पहली स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस हालत में ब्लागर को सपने में भी ब्लाग पोस्ट दिखाई देने लगती हैं. और वो खुद इसी बारे मे सोचता रहता है कि ब्लाग पोस्ट कैसे लिखी जाये?

दूसरी स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस स्थिति का लतियल ब्लागर दिन रात पोस्ट लिखता और मिटाता रहता है. किसी तरह संतुष्ट होकर एक दो पोस्ट ठेलने में कामयाब हो ही जाता है. पुरानी मेगजिन्स और अखबारों की कतरनें बैग मे भरे रहता है कि उनसे ही पोस्ट निकल आयेगी.

तीसरी स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस तरह का ब्लागर दिन रात टिप्पणीयों का इंतजार करता है और इसी की उम्मीद मे इधर उधर टिप्पणीयां फ़ेंका करता है. कुछ कुछ खोया खोया सा रहने लगता है और घर वाले समझते हैं कि इस बेचारे पर आफ़िस के काम का बोझ ज्यादा है जो ये घर से लेपटोप पर आफ़िस का काम करता रहता है जबकि वास्तव में वो ब्लागिंग मे उलझा रहता है.

उपरोक्त पहली, दूसरी और तीसरी हालत के लतियलों की लत छुडवाने हेतु दवा का कोर्स : ब्लागगुटिका वटी की दो दो गोली सुबह शाम देवें. सोते समय ब्लागनिषेध पाऊडर की धूणी देवें. दो कोर्स में पूरा फ़ायदा मिलेगा.

कीमत : रुपया ३७५०/ मात्र प्रति कोर्स

चौथी स्थिति का लतियल :

लक्षण : चौथी स्थिति तक पहुंचते पहुंचते सुबह उठते ही जैसे तैसे आदमी नित्य कर्म से निपट कर कंप्यूटर की तरफ़ लपकने लगता है. सीधे ब्लाग खोलकर अपनी टिप्पणी बाक्स चेक करने बैठ जाता है. जाहिर है कि टिप्पणीयां नही मिलने पर झल्लाता है और सारी झल्लाहट घरवालों पर निकालता है और बिना नाश्ता किये ही आफ़िस के लिये रवाना होजाता है .

पांचवी स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस हालत मे आदमी ज्यादा से ज्यादा टिप्पणीय़ां करता है और बदले में टिप्पणीय़ां मांगने लगता है. तबियत गिरी गिरी सी रहने लगती है. सिवाय ब्लागिंग के कुछ याद नही रहता. सुबह का घूमना फ़िरना छूट जाता है. उठते बैठते सिर्फ़ ब्लागिंग ही याद रहती है.

छठी स्थिति का लतियल :

लक्षण : छठी स्थिति में आदमी किसी तरह पोस्ट ठेलकर बाकी सभी ब्लागर्स को इमेल भेजकर टिप्पणीयां मांगना शुरु कर देता है. किसी के मना करने पर भी नही मानता. और अपने आपको साहित्यकार समझने लगता है. चोबीसो घंटे कैमरा जेब मे लिये घूमता है.

उपरोक्त चौथी, पांचवीं और छठी हालत के लतियलों की लत छुडवाने हेतु दवा का कोर्स : इन स्थितियों वाले ब्लागरत्व की और अग्रसर लोगो कों ब्लागबेलन प्रहार वटी की तीन तीन गोली की खुराक प्रत्येक छह छह घंटे से नियमित देवे. रात्रि में सोते समय ब्लागमोह भंग चूर्ण की एक पुडिया करेले के रस में घोल कर नियमित पिलायें. तीन कोर्स में फ़ायदा नही मिले तो दो कोर्स और मंगवा कर देवें. अवश्य फ़ायदा मिलेग

कीमत : रुपया ७२५०/ प्रति कोर्स

सातवीं स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस स्थिति मे आदमी नींद में बडबडाने लगता है तब जाकर घरवालों पर यह राज खुलता है कि ये लेपटोप पर आफ़िस का काम नही बल्कि ब्लागिंग ब्लागिंग खेल रहा होता है. अब घरवालों से झगडे रोज की बात हो जाती है. और यह स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है. क्योंकि आदमी समाज और मित्रों से तो पहले ही कट चुका होता है अब घरवाले भी उसको जलीकटी सुनाने मे पीछे नही रहते. अगर आपका परिजन इस स्थिति तक पहुंच चुका है तो आपको सलाह दी जाती है कि तुरंत ताऊ प्रोडक्ट्स का शाही कोर्स लेकर इलाज करवायें अन्यथा स्थितियां और भी बिगड कर काबू से बाहर हो सकती हैं.

आठवीं स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस स्थिति का ब्लागर अपने आपको चेंपियन समझने लगता है. जैसे कुछ अपने आपको टेक्निकल ब्लागर समझने लगते हैं और दूसरों को ज्ञान बांटने लगते हैं. चाहे खुद को कुछ नही आता हो पर दूसरों को ज्ञान जरूर देता है. और खुद को परिजनों के बीच भी सेलेब्रिटी समझने लगता है.

नवीं स्थिति का लतियल :

लक्षण : इस स्थिति का ब्लागर अपने आपको महान चर्चाकार समझने लगता है और अपनी मंडली को बढाता जाता है. और इसी नवीं स्थिति के ब्लागरों में यह पाया गया है कि वो दिन रात टोप चालीस में पहूंचने की कवायद में लगा रहता है. यानि बहुत ही खतरनाक स्थिति को प्राप्त हो चुका होता है.

उपरोक्त सातवीं, आठवीं और नवीं हालत के लतियलों की लत छुडवाने हेतु दवा का शाही कोर्स : यह बहुत ही गंभीर स्थितियां हैं,. इनसे छुटकारा सिर्फ़ शाही कोर्स से ही प्राप्त हो सकता है. शाही जूतमपैजार वटी की चार चार गोलियां दिन में चार बार देवें. ब्लाग निचोडरस की दो दो चम्मच सुबह शाम देवें. बेनामी चूर्ण की दो पुडिया रात सोते समय देवें. इस शाही कोर्स की चार खुराकों में संपुर्ण फ़ायदा मिलेगा.

कीमत : रुपया ११००१/ मात्र प्रति कोर्स

ऊपर वर्णित नौ प्रकार के लतियलों के अलावा दसवीं ग्यारहवीं और बारहवीं स्थितियों के लतियल अक्सर बेकाबू पाये गये हैं जिनके लक्षण और कोर्स नीचे बताये गये हैं. इन तीनों तरह के लतियलों को सुपर स्पेशल शाही दवा का कोर्स दिया जायेगा और जरुरत पडने पर ताऊ अस्पताल मे एडमिट भी होना पड सकता है.

दसवीं स्थिति का लतियल : इस स्तर तक लतियल होने पर अतिशय मौज लेने की आदत पड जाती है. एक ही चीज को बार बार दोहराने के खतरनाक लक्षण स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं. ऐसा लतियल आदमी अपने मन की करने लगता है. ब्लाग पर पहेली पूछने का चस्का लग जाता है. मौज लेने के चक्कर मे खुद को ज्ञानी समझने लगता है. जब देखो ब्लागर सम्मेलन करवाने के लिये उतावला रहता है. कुल मिलाकर दसवीं स्थिति दस नंबरीकी तरह चरितार्थ होने लगती है.

लत छुडवाने हेतु दवा का कोर्स : यह बहुत ही खतरनाक स्थिती को प्राप्त हुआ ब्लागर होता है.
वैसे तो इसका इलाज स्वयं ब्रह्माजी के पास भी नही है पर हमने निरंतर खोज और अनुसंधान द्वारा इसका उपाय खोज लिया है. इस श्रेणी के लतियलों को सुपर स्पेशल शाही दवा के सात कोर्स लेने पडेंगे.

पूरा इलाज इस प्रकार चलेगा : शाही जूतमपैजार वटी की चार चार गोलॊ सुबह शाम, शाही बेनामी गुटिकाकी तीन तीन गोलॊ दिन में तीन में बार, महा ब्लाग मोह भंग वटी की चार चार गोली सुबह शाम.

हर कोर्स में तीसरे दिन एक इलेक्ट्रिक शाक दिया जायेगा.

कीमत : रुपया ३१०००/ प्रति कोर्स एवम इलेक्ट्रिक शाक मुफ़्त दिया जायेगा. अगर एक सप्ताह में दूसरा शाक देना पडा तो उसका नियमानुसार चार्ज लिया जायेगा.

ग्यारहवीं स्थिति का लतियल : ऐसे लतियलों के हाथ की अंगुलियों में झुनझनी और कंपकपी आना शुरु हो जाती है. पीठ मे दर्द रहना शुरु हो जाता है. वजन तेज गति से बढता है. दिल दिमाग काम नही करता. नींद कम हो जाती है. जब भी नींद टुटती है तब ब्लाग खोलकर बैठ जाते हैं. आफ़िस में भी ब्लागिंग करने की लत लग जाती है. पूछने पर मना करते हैं यानि झूंठ बोलने की बीमारी भी घेर लेती है. ब्लागजगत और घर में भी पंगे लेने की आदत पड जाती है.

लत छुडवाने हेतु दवा का कोर्स : इन्हें सुपर स्पेशल शाही दवा के ग्यारह कोर्स लेने की सलाह दी जाती है. अगर फ़ायदा नही होतो एक बार फ़िर से रिपीट करें. पूरा इलाज इस प्रकार चलेगा :

ब्लाग सटक वटी की असली तीन तीन गोलियां - दिन में चार बार, ब्लाग मोह भंग चूर्ण रात को सोते समय. ऐसे लोगों पर दवाईयों का असर ज्यादा नही होता. इन्हें ग्यारह सप्ताह तक एक दिन छोडकर एक दिन इलेक्ट्रिक शाकदिये जायेंगे. इनको कंप्यूटर पर बैठने का मौका नही दिया जाना चाहिये. घर गृहस्थी के कामों में उल्झाकर रखें. खाली दिमाग शैतान का घर समझकर इनसे कडाई से काम लें और घर के कामों में मशगूल रखें जिससे इनको ब्लागिंग की तरफ़ झांकने का मौका ही नही मिले. अगर ज्यादा ही चिडचिडाहट दिखाये तो जूतमपैजार वटी और बेलनगुटिका वटी की चार चार गोलियों का SOS सेवन करवाये, तुरंत काबू में आजायेंगे.

कीमत : रुपया ३८५००/ मात्र प्रति कोर्स ( इनको इलेक्ट्रिक शाक आधे फ़्री दिये जायेंगे)

बारहवीं स्थिति का लतियल : इस स्थिति का ब्लागर चंद्रयान की तरह समस्त कक्षाओं को पार कर चुका होता है. इनका इलाज अत्यंत ही दुष्कर कार्य है. ऐसे लोग दिन में अंधाधुंध टिप्पणीयां करने के शौकीन होते हैं. इन्हें खुद की पोस्ट पर भी सौ से कम टिप्पणीयां आयें तो बेचेनी रहती है. ये चाहे जमीन पर चले, रेल मे चले या हवाईजहाज में चले, इनको ब्लागिंग का भूत चौबीसों घंटे सवार रहता है. लेखन की हर विधा में दखल रखते हैं. वजन अनियंत्रित हो जाता है. मधुमेह की शिकायत घेरने लगती है. पीठ में दर्द होने लगता है.

लत छुडवाने हेतु दवा का कोर्स : इनको २१ डबलराजा शाही कोर्स की खुराक देने की सलाह दी जाती है. पूरा इलाज इस प्रकार चलेगा.

मनशांत गुटिका की तीन तीन गोली दिन में चार बार, ब्लागमोह भंग वटी की ४ - ४ गोली की तीन खुराक,टिप्पणी मोह भंग रस की चार चार चम्मच दिन मे तीन बार, और इलेक्ट्रिक शाक शुरु के दो सप्ताह नित्य प्रति सुबह शाम, अगले दो सप्ताह दिन में सिर्फ़ एक बार, फ़िर एक दिन छोडकर दिया जायेगा. इनको सख्ती से घर गृहस्थी और खासकर रसोई के कामों में उलझाकर रखा जाये. अनियंत्रित होने पर जूतमपैजार वटी और बेलनगुटिका वटी की चार चार गोलियों का SOS सेवन करवाये, तुरंत फ़ायदा होगा.

कीमत : रुपया ५१०००/ मात्र प्रति कोर्स

उपरोक्त कीमत के अलावा डाक खर्च और पैकिंग का चार्ज अलग लगेगा. हमारी कोई ब्रांच नही है. डायरेक्ट हमसे संपर्क करें. हर ब्लाग रोग का शर्तिया इलाज उपलब्ध है. एक बार आजमाकर देखें, बार बार आजमायेंगे. ऊपर लिखे गये लक्षणो को ध्यान से पढे और आपका मरीज जिस केटेगरी का हो उसी केटेगरी की दवा का आर्डर करें.

ताऊ द्वारा होली पर पोस्ट की छीछालेदर

आज होलिका दहन का दिन था. ताई जब से गले पडे थी तब से यह पहली होली है जब हमको इस दिन आजाद रहने का मौका नसीब हुआ था. पहले हमने जब भी उसको इस मौसम मे मायके टरकाना चाहा तो यही जवाब मिला कि अब मैं ही तुम्हारी होली हूं तो दुसरी तरफ़ आंखे मत ऊठावो और लठ्ठ की तरफ़ देखने लगती. क्या करें मन मार कर चुप रह जाते थे.

 

पर हमारी आज की खुशी अरविंद मिश्रा  जी से नही देखी गई. धोखे से सबके साथ हमको बुलाया और अरहर या जूट का खेत दिखा कर र्भांग के  खेत मे घुसेड दिया हमको औरों के साथ. और जो भांग चर के घर लौटे तो बस हमारे पांव नीचे और सर उपर होगया. और हम   भांग भवानी के सुरुर मे ही उनकी पोस्ट पढने चले गये. देखिये मिश्राजी ने पोस्ट मे क्या लिखा था?

 

 

 

सबसे पहले सही जवाब लेकर आये "काका मौदगिल" :-

 

 

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मैं तो बांसुरी बजाऊं रे.. बिना बांसुरी के

हो जी रे खूटे पर बंध जाऊं रे बिना रस्सी के….

 

 

अब काका मौदगिल भांग का पौधा नही बतायेंगे तो कौन बतायेगा? उनको तो बिना छाने ही दो गोली भांग का नशा रहता है. इसी लिये खूंटे पर बंधे २ कविता रच लेते हैं और बिना बांसुरी के बहुत ही जोरदार तान छेडते हैं.

 

 

 

फ़िर सीमा जी ने अंगरेजी मे जवाब दिया :-

 

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क्या करूं? आज भी क्लास मे लेक्चर देने तो जाना  ही पडेगा.

मैं तो चली लेक्चर देने. पर कोई रंग ना डाल दे.

पर अब कोई कैसे डालेगा?

मैने तो पिछली साल की होली खेली हुई साडी पहनी है.

 

 

अब आगे लिखा था उस पोस्ट मे कि सीमाजी ने भांग का नाम अंगरेजी मे बताया –कैनिबस तो मिश्रा जी अब प्रबंधन की कक्षा मे क्या हरयाणवी मे लेक्चर दिलवाओगे?

 

भांग का नाम ही नशा चढा देता है -देखिये सीमा जीका यह दुबारा आकर जवाब देना वाटर मार्क लगाके -"भांग का पौधा "holi hai ha ha ha ha ha ha ha "रेगार्ड्स"

 

अजी मिश्रा जी आपको लगता है वाटर मार्क ha  का मतलब भी नही मालूम? 


h का मतलब होली और a का मतलब आई  यानि ha = होली आई. 


इब समझे कि नही? आगे से याद रखना.

 

 

 

 


अब स्मार्ट इंडियन यानि अनुराग शर्मा आये

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मेरा जूता है जापानी, सर पे टोपी इंगलिस्तानी
रहता पिटस्बर्ग मे, फ़िर भी  दिल है हिंदुस्तानी.


अब तक स्मार्ट इन्डियन भी आ गये और स्मार्टनेस से नहीं चूके "होली के अवसर पर बहुत सटीक सवाल - देसी भांग"


लो करलो बात… भाई बिलायत मे रहकर ही देशी भांग याद आती है ना. भांग के देशी मेजे वहां बिलायत मे कहां?


 

 


अब राज भाटिया आये :-

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अरे यार ताऊ. देख तू लोगों को बताना मत कि रोहतक में तुम्हारे साथ मैं बिडी और जगाधरी नम्बर वन के साथ साथ भांग भी पी लिया करता था. अब मैं बिलायती बाबू होगया हूं. जरा ईंगलिश विंगलिश झाड लेने दे यार. क्युं मेरी इज्जत खराब करता रहता है? देख अब तो मैं कमीज पायजामा छोडकर पैंट और टी शर्ट पहनने लग गया हूं. 


और यार आज तो हमारी शादी की सालगिरह है. यार क्युं मेरे पीछे पडा है.
आज तो बख्श दे मेरे ताऊ. जा तेरा कर्जा माफ़ किया. मेरा पीछा छोड



राज भाटिया जी ने मामला ही बिल्कुल साफ़ कर दिया '"अर्बिन्द जी , इसे हमारी भाषा मै Hanf, ओर अग्रेजी मै Cannabis कहते है हिन्दी मै शायद भांग कहते होगे, हिन्दी मे पक्का पता नही, लेकिन Cannabis पक्का

 

 

लो करलो जी बात मिश्रा जी. इब म्हारै बड्डॆ भाई की भाषा हरयाणवी छोड्कै गिटपिट गिटपिट हो गई? क्या करे भांग का नशा ही ऐसा है. उतर जायेगा तो सीधे हरयाणवी पर आजायेंगे.


भाटिया जी और भाभीजी आप दोनों को शादी की हार्दिक शुभकामनाए. 

आपका जीवन इसी तरह हंसी खुशी और मंगलमय हो. ताऊ और उसके भतीजे, भतिजियों की तरफ़ से आपको बहुत बधाई.

 

 

 


अब आये आशीष खंडेलवाल :-


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" आज ना छोडेँगेँ बस हमजोली, खेलेँगेँ हम होली "

" आशीष खंडेलवाल जी आये जवाब दिया और होली की शुभकामनाएं भी दीं !"जी हां, ये भांग के ही पौधे लग रहे हैं॥ आपको और आपके परिवार को होली की ढेरों शुभकामनाएं..."

मिश्राजी आपने इनको भी भांग पिलवा दी तभी तो घर के बाहर जाकर हमजोली तलाश रहे हैं?  और क्या बन ठन कर होली खेलने चले हैं?

पर कोई बात नही शाम तक भांग उतरने के बाद तो घर ही लौटोगे ना? फ़िर सब हमजोली भूल जाओगे.

 

 

अब मिश्रा जी ने आगे लिखा - अपने समीर भाई ,पारुल जी और अल्पना जी कहाँ किसके साथ मशगूल हो गये ? बिना इनके यह भंग पहेली?

 



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तुम आज मेरे संग हंस लो
तुम आज मेरे संग गा लो

नही टिपियांऊंगा आज सारे दिन. करलो क्या करोगे? सक्रांति पर खूब मंजा सूता था.      अब सारे दिन मैं तो जबलपुरिया भांग पी के भांगडा करते हुये होली खेलूंगा. वहां बिलायत मे ऐसा मौका थोडे ही ना मिलेगा. 

   

 

 


अब मिश्राजी को अल्पना जी की भी याद आगई कि वो भी नही आई :


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" लाई है हज़ारोँ रँग होली “

सोचती हुं फ़टाफ़ट एक होली गीत  भी पाड कास्ट कर ही दूं. फ़िर शनिवार को सबको छकाने वाली पहेली की प्लानिंग भी करनी है.

गावे कवित्त और फाग,बस चढ़ रहा खुमार,

गले भंग लो    उतार,थोड़ा   कर लो हुडदंग!

भीजे रंगों में तन,    मन में प्रेम की फुहार,

करो सब को शुमार,      खेलो होली के रंग.

 

 

बिल्कुल जी . पाठक तो आपकी इसी रचना के पाडकास्ट का इंतजार कर रहे हैं.


 



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जब ताऊ ने मिश्राजी की पोस्ट की ऐसी छीछालेदर करदी तो मिश्राजी का फ़ोन आया
कि ताऊ तू क्यों मेरा रकीब बना हुआ है?

ताऊ बोला – मिश्राजी ये रकीब क्या होता है? और ये कहां की अंग्रेजी है? हमको तो
नही पता हम तो फ़ुरसतिया जी की तरह वो क्या करते हैं? चर्चा उर्चा क्या होती है?
बस वैसे ही पोस्ट की छीछालेदर कर रहे थे.

अब मिश्रा जी बोले – ताऊ तेरी इतनी ही हिम्मत है तो फ़ुरसतिया जी की पोस्ट की छीछालेदर कर के दिखा तब मानूं.

ताऊ बोला – आप नाराज काहे होते हैं जी? हम खुद अपनी छीछालेदर करने मे नही शरमाते तो फ़ुरसतिया जी से काहे शर्मायेंगे. लो अभी इसी पोस्ट मे नीचे आज उनकी चिठ्ठा चर्चा की छिछालेदर किये देते हैं.

 

 

तो आईये अब बताओ भला बुरा काहे न मानें?  की छीछालेदर करते हैं.

 

 

अब  फ़ुरसतिया जी का ये काम हमको पसंद नही आया. अब बताईये यों तो जब चाहे ताऊ के फ़ोन की घंटी टन टना देते हैं पर देखो ई काम अकेले अकेले कर लिये.

 

 

Anup

 

 

ताऊ को खबर भी नही लगने दी. और हमको तो पता भी नही चलता पर अचानक उनका फ़ोन किसी दिल के अंदर से आया – ताऊ राम-आ-राम.

 

हमने पूछा – फ़ुरसतिया जी क्या बात है ? आपकी आवाज कुछ बदली बदली सी लग रही है. तब कहने लगे – हां ताऊ बात ऐसी हुई कि होली के चक्कर मे एक किसी के दिल मे घुस के बैठ गये रहे.

 

हमने पूछा कि ये कौन है भाई?

 

उन्होने कहा – ताऊ हम तो कुछ और ही समझ के बैठे रहे . पर ज्ञान जी कह रहे हैं कि ये उर्वशी है. तब हमने कहा कि – बस… बस… हम समझ गये फ़ुरसतिया जी..आप झूंठी दोस्ती का दम लगाते हैं. 


जब उर्वशी के दिल मे बैठने की बात आई तो अकेले अकेले बैठ गये? ई भी तो सोचा होता कि ताऊ को भी साथ मे बैठालें?  कि ताऊ   बेचारा  अकेला है आजकल. 

जिंदगी मे पहली बार मौका मिला है, उसको भी साथ लेलेते.

 

वो बोले – ताऊ अभी तो हम संकट मे आगये है. हमको यहां से बाहर निकलने का उपाय बताओ. सुना है तुमने गधे को कुएं से निकलने का उपाय बता दिया था. अब हमको यहां डर लग रहा है. जरा जल्दी करो. सही कह रहे हैं अगली बार तुमको साथ लेके घुसेंगे ऐसी वैसी जगह.

 

हमने कहा भाई- हमने भी झांक झूंक कर देख लिया है. ईन्नर देवता की अप्सरा के दिल मे बैठे हो, बैठे रहो , मौज करो और क्या?

 

अब फ़ुरसतिया जी असली बात पर आये. बोले देखो ताऊ, ज्ञान जी को पता चल गया है कि हम उर्वशी के दिल में विराजमान हैं. और वो हमको धमकी दे के गये हैं कि तुम हमारी बडी मौज लेते हो. अब देखना हम क्या करते हैं?

 

ताऊ बोला – क्या कर लेंगे? वो भी आपकी आज थोडी मौज लेलेंगे. यों भी होली है. मजा करिये.

 

अब फ़ुरसतिया  जी थोडे नाराज होकर बोले – ताऊ मजा ससुरा गया तेल लेने. तुमको मजे की पडी है और हमको जान की पडी है. अरे ताऊ वो ज्ञान जी ने सीधे शुकलाईन को फ़ोन मिला दिया होगा और बस अब शुकलाईन आती ही होंगी. जरा जल्दी करो. अगली बार जब भी किसी रम्भा मेनका के दिल मे घुसेंगे आपको साथ लेके घुसेंगे जिससे निकलने मे परेशानी ना हो.

 

 

cartoon-furasatiaji

                                     फ़ुरसतिया जी उर्वशी का दिल लेके भागे

 

 

 

अब हमने उनको बाहर निकलने का तरीका बताया तो कहने लगे कि इस दिल के बिना तो हम कैसे जिऊंगा? फ़िर बाहर आने का फ़ायदा ही क्या?

 

तब हमने कहा कि उस उर्वशी के  दिल को हाथ से झटका मार के खींचो और भागो वहां से. हमको शुकलाईन जी आती दिख रही हैं. और ये सुनते ही फ़ुरसतिया जी उर्वशी का दिल हाथ मे ऊठाकर भागते नजर आये.

 

 


अब इसी पोस्ट मे ज्ञान जी के बारे मे लिखा :-

ज्ञानजी होली की आड़ में बहकने का प्रयास किये। पहले हौलट बनने का प्रयास किया फ़िर प्रॉमिस्कुअस (promiscuous – एक से अधिक को सेक्सुअल पार्टनर बनाने वाला) बिल्लू जैसा बनने के लिये हुड़कने लगे! जहां रीता भाभीजी ने यह देखा ब्लाग का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया और ज्ञानजी के सामने पति आचार संहिता पेश कर दी जिसका पालन करते हुये ज्ञानजी फ़िर से मंदी ,भरतलाल, गुझिया-पापड़ की दुनिया में लौट गये- होली मुबारक कहते हुये।



बस ये पढते ही ज्ञान जी तो हंटर लेके आगये.


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और आते ही हंटर फ़टकारते हुये बोले – अरे ओ ताऊ (सांबा)  ये क्या हमारे लिये  
उल्टे सीधे हौलटिया रहे हो तुम लोग? कितना मौज लिये हो हमरा?


ताऊ – सरदार हम नाही लिया ऊ फ़ुरसतिया लिये रहिन आपका मौज तो.


ज्ञान जी – हूं … अब हम समझे. पर हम भी उसी ट्रेन को हांक रहे थे जिसमे
ठाकुर जा रहा था. अब आयेगा मजा खेल का असली... फ़ुरसतिया क्या समझे थे? हमरी मौज     हमेशा लेते रहेगें? हम कोई बच्चा हूं क्या?   हैं? 


ताऊ : नही  सरदार… आप तो बडे बुजुर्ग हैं...


ज्ञान जी : – हम सरदार नही हूं. और तुमको बुजुर्ग किधर से लगने लगा हूं?  जबान संभाल कर बात करो ताऊ.  अब तुम लोगों का खेल बहुत होगया.


ला ताऊ, जरा तनिक फ़ोनवा दे हमको.


ताऊ : पर फ़ोनवा काहे को सरदार?


ज्ञानजी – अरे बुडबक ताऊ . जरा शुकलाईन को फ़ोन कर देते हैं. फ़िर सारा हिसाब किताब आज चूकता हो जायेगा फ़ुरसतिया से हमारा. बहुत मौज लेए है हमारी.
आज चढें हैं चक्कर मे फ़ुरसतिया महाराज.    



अब ताऊ ने जैसे ही ये खबर सुनी. और सरदार की आंखों का जलाल देखते हुये वहां से रवानगी डालना ही बेहतर समझा.  

क्या पता शुकलाईन को फ़ोन घुमाते घुमाते कहीं ताई को ही ना घुमा दें ?



 


अब कुश भी लपेटे मे हैं

फोटो के बारे में तो नो कमेंट टाइप फीलिंग आ रही है.. पर करे क्या? आदत से लाचार है तो फोटू के लिए तो बस चकाचक कहेंगे..
@रचना जी
हमने लगा तो दी है आपकी अर्जी
इंटरव्यू देना, नही देना उनके पति क़ी मर्ज़ी..



cartoon-kush 

ताऊ मुझको भी कहां फ़ंसा दिया. मैं तो भाग रहा हुं यहांसे. मामला कुछ ज्यादा ही
होलिया रहा है. अब होली के बाद ही मिलूंगा.


 

 

भाई हम पर भंग भवानी कुछ ज्यादा ही असर दिखा गई. किसी को अपनी छीछालेदर बुरी लगी हो तो वो हमारी छीछालेदर करने के लिये स्वतंत्र है. हम अपनी आदत से मजबूर हैं सो हम तो यों ही अपनी  और सामने वाले की छीछालेदर करते और करवाते रहेंगे.

 

आपको अपनी छीछालेदर पसंद आई हो और फ़िर रंगपंचमी को करवानी हो तो छीछालेदर करवाने के लिये बुकिंग करवाये. सारे कार्टूनों की छीछालेदर हमारे तकनीकी संपादक आशीष खंडेलवाल ने की है और फ़ुरसतिया जी की छीछालेदर भरत मुदगल ने की है.

 

अब होली की घणी रामराम.