भक्तजनो, ह्में मालूम है कि कोरोना काल में आपके कष्ट बहुत बढे हुये हैं. और बाबाश्री तो सदैव से आपके कष्टों का शमन करते आये हैं. इन दिनों काफ़ी भक्तों के समाचार आ रहे हैं कि वो कष्ट में हैं. आपमें से कई "क रोना" से पीडित हैं. कुछ भक्त पत्नियों से पीडित हैं मार खा खा कर मोटू पतलू वाले पतलू जैसी हालात में पहुंच गये हैं.
मोबाईल पर "क रोना" झाडा देते बाबाश्री
कुछ पति भी पत्नियों पर अत्याचार कर रहे हैं जिसकी वजह से पुलिस भी परेशान है. अब पुलिस लोक डाऊन को मैनेज करे या इन खूसट पतियों की खबर ले? चारों तरफ़ हालत बहुत ही नाजुक और दयनीय हैं.
आपको इन कष्टों से छुटकारा दिलाने के लिये बाबाश्री ताऊ महाराज ने अचूक उपाय खोज निकाले हैं. और कोरोना के लोक डाऊन को देखते हुये आपको बाबाश्री के पास आने की आवश्यकता भी नहीं है बल्कि मोबाईल पर ही आपका ग्यारंटेड इलाज उपलब्ध करवा दिया जायेगा.
इस ईलाज की न्यौछावर फ़ीस बहुत ही मामूली रखी है. आप यह न्यौछावर फ़ीस आन-लाईन "बाबाश्री ताऊ महाराज 420 अपर्माथिक ट्रस्ट" के अकाऊंट में ट्रांसफ़र करवाये और मिस समीरा टेडी (Finance Controller) से फ़ोन पर अपाईंटमैंट लेकर फ़ोन करें. आपको ईलाज उपलब्ध करवा दिया जायेगा.
मर्ज का नाम न्यौछावर फ़ीस
1. "करो ना" झाडा रूपये 21,001/ मात्र
2. "करो ना" ऊपरी फ़ेंट बचाव रूपये 17,501/ मात्र
3. "करो ना" आपसी गृह क्लेश रूपये 25,001/= मात्र
4. "करो ना" पतिकूट यंत्र रूपये 27,501/ मात्र
5. "क रोना" पत्नी पीडा बचाव यंत्र रूपये 31,001/ मात्र
6. "क रोना" घर में मन लगाऊ झाडा रूपये 16,501/ मात्र
7. " क रोना" समस्त असाध्य बाधा पीडा यंत्र रूपये 38,501/ मात्र
हमारे सभी ईलाज जांचे हुये और शर्तिया ग्यारंटेड हैं. ईलाज करवाने वाले की जानकारी गुप्त रखी जाती है. ईलाज किसी कारणवश फ़ेल होने की स्थिति में आपका जमा रूपया वापस नहीं करने की हमारी पक्की ग्यारंटी रहेगी.
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अरै सत्यानाशी कोरोना तू ताऊ के घर क्यूंकर आया?
जैसे ही कोरोना के चलते मोदीजी ने लोक डाऊन की घोषणा की, ताऊ की बांछे खिल गई। अब 3 सप्ताह का पूरा आराम, ना जल्दी उठना, ना आफिस जाना और ना ही घर का कोई सामान लेने बाजार जाना... वाह, यह आराम तो पृथ्वी पर शायद वर्तमान काल के मनुष्यों के अलावा किसी ने ही भोगा होगा अब तक।
ताऊ का दिल बाग बाग हो रहा था तभी ताई की आवाज आई - सुणै सै के?
ताई बोली - ईब कल तैं झाड़ू पौंछे वाली, रोटी बनाने वाली कोई नही आएगी।
ताई बोली - मुझे मालूम है तुम कितने भले हो। हम अपने अपने काम का बंटवारा कर लेते है।
ताऊ बोला यह भी ठीक है। बताओ मुझे क्या क्या करना है?
ताई बोली - सुबह उठते ही चाय बनाने का काम तुम्हारा और पीने का काम मेरा। फिर मंजन ब्रश करके योगा करने का काम मेरा तब तक झाड़ू बुहारी और पौंछा करने का काम तुम्हारा।
ताई काम का यह सब बंटवारा लठ्ठ पास में रखकर ही कर रही थी सो ताऊ चुपचाप हाँ में गर्दन हिलाते हुए बोला - ठीक है और कुछ?
ताई बोली - अभी तो सारे दिन के काम बाकी पड़े हैं...इसके बाद बाथरूम में नहाने का काम मेरा, फिर बाथरूम साफ करने और लत्ते (कपड़े) धोने का काम तुम्हारा।
नहा धोकर भगवान की दिया बत्ती करने का काम मेरा तब तक रोटी सब्जी बनाने का काम तुम्हारा.
इसके बाद खाना टेबल पर लगाने का काम तुम्हारा और खाने का काम मेरा.
खाना खाने के बाद आराम करने का काम मेरा तब तक झूंठे बर्तन भांडे साफ़ करने का काम तुम्हारा.
अब तक ताऊ समझ गया था कि मन गया उसका तो लोक डाऊन......
ताई गंगाराम (लठ्ठ) पर हाथ फ़िराते हुये बोली - दोपहर में टीवी देखने और आराम का काम मेरा और तब तक घर के गार्डन की सफ़ाई का काम तुम्हारा. फ़िर शाम को चाय नाश्ता बनाने का काम तुम्हारा और नाश्ता करने और चाय पीने का काम मेरा. इसी तरह रात को खाना बनाने का काम तुम्हारा और खाने का काम मेरा.
ताऊ का सारा उत्साह काफ़ूर हो चुका था. मन ही मन बोला - अरे मोदी जी....ये लोक डाऊन से तो अच्छा था कि ताऊ की घेट्टी (गला) ही दबा देता. इतने काम करके तो वैसे ही कोरोना हो जायेगा.
ताऊ सर पकड कर ताई के पास बैठने लगा तो ताई ने लठ्ठ फ़टकारते हुये कहा - "परै नै मर ले" (दूर होकर बैठ)....पता नहीं है क्या? मोदीजी ने कहा है कि कम से कम दो मीटर दूर होकर बैठना है...
ताऊ बोला - हो गया सब काम का बंटवारा या कुछ बाकी रह गया?
ताई लठ्ठ उठाते हुये बोली - ज्यादा बकबास मत कर, यह तो शुकर मना कि तुम्हारे हिस्से मैंने सब सीधे सरल काम ही रखे हैं. अब एक रात का काम बाकी बचा है, रात को लेटकर टीवी देखने का काम मेरा और मेरे सोने तक पांव दबाने का काम तुम्हारा.
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