गब्बर और सांभा वापस ठाकुर की हवेली में : ताऊ की शोले

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ताऊ की शोले (एपिसोड - 3)
लेखक : ताऊ रामपुरिया और अनिता कुमार
एपिसोड निर्देशक : अनिता कुमार


गब्बर और सांभा सूरमा भोपाली से मिलने थकेले घोड़ों पर चढ़ते ही हैं कि सांभा घोड़े की लगाम खींच लेता है, गब्बर थोड़ा आगे निकल जाता है तो देखता है कि सांभा साथ साथ नहीं है, पीछे मुड़ कर देखता है तो सांभा अपने घोड़े पर बैठा दो दिन की बड़ी दाढ़ी खुजिया रहा था और घोड़ा जमुहाइयां ले रहा था, गब्बर ने आवाज लगाई

गब्बर: अरे ओ कामचोर…क्या हुआ?

सांभा : ( धीरे से आगे आते हुए) सरदार मैं सोच रहा थाssssss

गब्बर: अबे जो काम तेरा नहीं वो काहे करे है। की खुजली हो रयी है जी तेरे को?

सांभा: सरदार ठाकुर साब तो हैं आप के दोस्त्…

गब्बर: हां! तो फ़िर?

सांभा: सरदार, वो भी तो इत्ते साल थाने में घंटी बजाय रहे, सूरमा भोपाली से मिलने को इत्ती दूर जाने की क्या जरुरत, ठाकुर ने बोलो घंटी खड़का दें बस्…॥

गब्बर: ( अपनी गंदी दाड़ी खुजाते हुए) बात तो तूने पते की की, सूरमा से तो मिले घणा वख्त हो गया, ठाकुर ते रोज मिले से, हां चल चल उधर ही चलते हैं..
 
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सांभा का घोडा भी सरदार के पीछे हवा की तरह उड  लिया !

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गब्ब्रर ने घोडे को सरपट ठाकुर की हवेली की और लपका दिया !



और दोनों ने फ़ुर्ती से अपने घोडे सरपट ठाकुर की हवेली की तरफ़ दौडा दिये ।

ब्लागिंग करता ठाकुर गब्बर-सांभा को वापस आता देख चौंक ऊठता है.

ठाकुर अपनी हवेली के बाग में झूले पे बैठा है, आखें लैपटॉप पर गड़ी, उंगलियां ऐसे चल रही है मानो लैपटॉप न हो पियानो हो, होठों पे गीत है बाप्पी दा इश्टाईल में:

ब्लॉगिंग बिना चैन कहां रेSSS
कॉमेन्टिंग बिना चैन कहां रेSSS
सोना नहीं चांदी नहीं, ब्लॉग तो मिला
अरे ब्लॉगिंग कर लेSSS
गब्बर भी घोड़े से उतर कर नाचने लगता है।

सांभा: सरदाssssर क्या कर रहे हो? भूल गये हम काहे आये?

गब्बर : ओह! हाँ , ठाकुर, क्या बात है आज तो बड़े अच्छे मूड में हो

ठाकुर: अरे ! तू फ़िर आ गया? अभी अभी तो गया था।

गब्बर: हां सरदार एक मुश्किल आन पड़ी है ।
लेकिन ठाकुर जब लैपटॉप के साथ हों ( यानी कि अपनी दूसरी रानी के साथ, ठकुराइन लैपटॉप को अपनी सौत जो कहती है) तो अपना मूड किसी को खराब करने की परमिशन नहीं दे सकते, लेकिन गब्बर दोस्त है, उसे कह भी नहीं सकते थे ‘तख्लिया’ इस लिये गीत बदल लिये..

ठाकुर झूम कर गा रहे है....

जब सर पे ख्याल मंडराएं,
और बिल्कुल रहा ना जाए।
आजा प्यारे ब्लॉग के द्वारे,
काहे घबराए? काहे घबराए?

सुन सुन सुन, अरे बाबा सुन
इस ब्लॉगिंग के बड़े बड़े गुन
हर बलॉगर बन गया है पंडित
गूगल भी थर्राए।
काहे घबराए? काहे घबराए?

गब्बर: ठाकुर क्या बके जा रहे हो, मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा.

ठाकुर: यार अब शाम के समय तू कोई प्रोब्ल्म व्रोब्लम तो सुना मति, साला माथा ठनक जाएगा, अभी अभी राधा गरमा गरम चाय की प्याली थमा कर गयी है, तू बता पियेगा तो आवाज लगाऊं

गब्बर: (रुआंसा होता हुआ बोला) नहीं ठाकुर, मैं ने तो सुना था तुम अपने वचन के बड़े पक्के हो, प्राण जाएं पर वचन न जाएं बोला था न ?

ठाकुर: ये हमने कहा था? गब्बर तेरी यादाश्त को क्या हो गया है, अबे बावली बूच.. ये तो दशरथ ने कहा था और देखा न उसका क्या हाल हुआ? मुझे क्या मूड़मतियों का सरदार समझा है?
( गब्बर चुपचाप अनमना सा बैठा रहता है, ठाकुर का मूड उखड़ रहा है, वो कहता है)

ठाकुर: अच्छा चल एक शर्त पे मैं तेरी बात सुनुंगा। अपनी बात कहने से पहले तू एक गाना गा के मेरा मूड ठीक कर।
(गब्बर गाने लगता है)

तुम तो ठहरे बलॉगवाले
साथ क्या निभाओगे।
सुबह पहले मौके पे
नेट पे बैठ जाओगे।
तुम तो ठहरे बलॉगवाले
साथ क्या निभाओगे।
ठाकुर मुस्कुराता है

ठाकुर: अच्छा बच्चू हमरी जूती हमारे ही सर, इसका मतलब तू चोरी चोरी मेरा ब्लोग पढ़ता है, मुझसे तो कहता था कि तुझे पढ़ना लिखना नहीं आता। बोल क्या चाह्ता है बच्चा।

गब्बर: खाकी वर्दी वालों ने कालिया को पकड़ लिया

ठाकुर: तो उसे उड़वा दें क्या? अबहिं उस ससुर का एनकाऊंटर करवाये देत हैं...(और मोबाईल निकालने लगता है)

गब्बर: नहीं नही ठाकुर.. उसे तो सरकारी मेहमान नवाजी के मजे लूटने दो, तुम तो मेरा माल मत्ता छुड़वा दो, और दूसरे पुलिस मुझे ढूंढ रही है, थोड़े दिन अपनी हवेली में रहने दो न, हम भी थोड़ी ब्लोगिंग सीख लेगें

ठाकुर: अरे ओ सांभाssss, तू तो घोड़े ले के वापस गांव निकल ले, ये खाकी वर्दी वाले घोड़े की लीद सूंघते चलते हैं

सांभा: जी ठाकुर साहब……

गब्बर : और सुन सांभा...कोई भी पूछे तो ये मत बताना की हम कहां हैं?

सांभा : जी सरदार...हम अब डाक्टर के यहां से दवा लेते हुये मौसी के यहां जा छुपेंगे.....पर मौसी आपके बारे मे पूछेंगी तो क्या जवाब देंगे?

गब्बर : अबे ..तू मौसी को हमारा पता मत बताना..भले तेरी इच्छा हो तो पुलिस को बता देना..पर मौसी को हरगिज नही.
सांभा ने तेजी से घोडा वापस पलटा कर दौडा दिया!


सांभा : नही सरदार..हम मौसी से झूंठ नही बोल सकते....और सांभा घोडे को ऐड लगा देता है...और फ़र्राटे से गब्बर की बात सुने बिना ही गायब हो जाता है.....

श्रीमती और श्री समीर जी, शादी की सालगिरह मुबारक हो !

आज २५ अगस्त को उडनतश्तरी यानि समीरलाल जी की शादी की साल गिरह है. इस अवसर पर उनको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं.
"ताऊ की शोले" की युनिट की तरफ़ से हार्दिक बधाईयां

श्रीमती और श्री समीरलाल जी आप दोनो को ईश्वर सुख शांति के साथ सम्रूद्ध दाम्पत्य जीवन प्रदान करें.
समीरलाल जी के बारे मे तो आप सब कुछ जानते हैं. वो तो जन जन के प्रिय हैं, इसलिये उनके बारे मे आप सब कुछ जानते हैं. उनका एक साक्षात्कार हमने उनके भारत प्रवास के दौरान लिया था जो आप ताऊ डाट इन पर पढ ही चुके हैं.

आइये आज के इस शुभ दिन हम आपको थोडा बहुत उस शख्सियत के बारे मे बताते हैं जिनको समीरजी की सफ़लता और उनको बनाने का श्रेय जाता है. जिन्हे आप जानते हैं श्रीमती साधना भाभीजी के नाम से.


जोडी सलामत रहे!

-आपका बाहर का नाम है श्रीमती साधना लाल ,

-आपका जन्म पुर्णीमा को हुआ तो घर का प्यार का नाम है पूनम.

-शिक्षा : एम ए हिन्दी साहित्य में. ..गोल्ड मेडेलिस्ट.

-जन्म से शादी तक आप मिर्जापुर, उ.प्र. में रही !!

-जन्म - १९ अक्टूबर.

-भाषा ज्ञान : हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी और फ्रेन्च मे बराबरी की दखल.

- राज की बात : समीरजी फ़्रेंच बोल ही नही पाते अत: जब मांट्रियल या पेरिस वगैरह में कहीं कहीं बिना फ्रेन्च जाने काम नहीं चलता तब उनके भरोसे ही रहते हैं.

- खास शौक : बागवानी का बेहद शौक मगर खरीददारी से थोड़ा सा कम.

-बडा शौक : फ़िर से खरीददारी, अगर बाजार २४ घंटे खुला रहे तो दर्शन पाना भी मुश्किल हो जाये.

-प्राथमिकता : उनका परिवार, और उसके सदस्यों के आगे सब कुछ नगण्य.

-अन्य शौक : साफ सफाई और घर को फाईव स्टार होटल बना कर रखने का ऐसा जज्बा कि समीरजी को रहते हुए डर लगता है कि कहीं गन्दा न हो जाये.

- हिम्मत : बहुत हिम्मति मगर सिर्फ़ परिवार के लिए.
श्रीमती और श्री समीर जी दोनों बेटो के साथ

- भावुकता : बहुत ज्यादा, यहाँ तक की परिवार में पल रहे जानवरों के लिए भी बहुत भावुक.

- सेवा : समाज सेवा में अव्वल, ..हर साल भारत में दान पुण्य, गरीबों में कम्बल बांटना, नौकरों के बच्चों की शादी में आर्थिक योगदान करना आदत का हिस्सा.

- जीवन का अर्थ : अपना घर , अपने लोग, अपना सम्मान.

-हमेशा सही : बेटे और बहु
साधना भाभीजी दोनों बेटो और बहू के साथ

अपने परिवार में पांच बहन और एक भाई के बीच, तीसरे नम्बर पर. कुछ अधिकारों में छोटा होने की वजह से कमी रह गई होगी..वो हमेशा समीरजी पर पूरी होती है.

-संगीत : प्रयाग संगीत समिति से संगीत विशारद

-गायन : रियाज कम होने के बावजूद भी लाजवाब गाती है.

-कनाडा में इतने बरस रह कर भी संस्कृति और धर्म का सम्मान

-कहीं भी हो, सात बजे शाम गुरु जी की पूजा, देवघर वाले श्री अनुकुल जी महाराज (राधा स्वामी सतसंग) की दीक्षा प्राप्त भक्त.

-अनुशासन : चाहे पति या बच्चे, भंग होते सह पाना उनके लिये संभव नहीं.
अब इतनी बातें तो हमने पता करली जो आपको बतादी. फ़िर हमने उनके बारे मे समीरजी से पूछा. अब समीरजी ने उनके बारे मे निम्न विचार प्रकट किये.

-भयंकर आत्मविश्वासी -हिम्मती और विपरीत परिस्थियों में संबल प्रदान करने वाली पर सामान्य परिस्थितियों में बेवकूफी की आशा करने योग्य.

-दिमाग की बजाय घर के मामले में दिल से विचार करने वाली

-सामान्य भारतीय महिला.

-अगर हम भारत बसना चाहें या कनाडा - सब हम पर - इस मामले में पति की इच्छा सर्वोपरि.

जब जीवन मे इस स्तर का हमसफ़र मिल जाये तो सुख सौभाग्य और सम्रूद्धि तो कदम चूमती ही है.

पुन: आप दोनो के सुखद, स्वस्थ और सुदीर्घ दाम्पत्य जीवन की शुभकामनाएं. ईश्वर आपको और आपके परिवार को उन्नति पथ पर अग्रसर रखें.

ताऊ साप्ताहिक पत्रिका अंक -36

प्रिय बहणों, भाईयो, भतिजियों और भतीजो आप सबका ताऊ साप्ताहिक पत्रिका के 36 वें अंक मे हार्दिक स्वागत है.

पिछले सप्ताह श्री अनूप शुक्ल "फ़ुरसतिया" जी ने अपने ब्लाग लेखन के ५ साल पूरे किये. उनको ताऊ साप्ताहिक पत्रिका की तरफ़ से हार्दिक बधाईयां. सचमुच एक बहुत बडी उपलब्धि है. जिस तरह का परिपक्व लेखन वो निरंतरता पुर्वक करते है वो अपने आप मे उनकी लेखनी का मुरीद बनने पर मजबूर करता है. फ़ुरसतिया जी का ब्लाग एक मात्र ऐसा ब्लाग है जहां ताऊ फ़ुरसत मिलते ही उनकी पिछली पोस्टों को पढने मे अपना समय गुजारना पसंद करता है. बहुत कुछ सीखने को मिलता है उनसे. आप भी उनकी पिछली पोस्टों को खंगालिये. अनमोल खजाना है वहां.

ताऊ के पसंदीदा ब्लागर श्री अनूप शुक्ल "फ़ुरसतिया"

पांच साल इसलिये यहां उप्लब्धि कहलायेगी कि पांच साल यहां टिकना ही मुश्किल है. उनके साथ के कितने लोग हैं अब यहां? होने को और भी बहुत से लोग पांच साल पूरे कर रहे होंगे पर जिस तरह की निरंतरता फ़ुरसतिया जी के लेखन मे हैं, और जिस तरह का हौसला उन्होने दूसरे ब्लागर्स को दिया है, यह एक बहुत बडी बात है.

आज वो ब्लाग जगत के चमकते सितारे हैं जो अपने साथ दूसरों को भी सितारे जैसा चमकने का हौंसला देते है. ईश्वर उन्हे कामयाबी दे और वो अपनी हर मुहीम मे कामयाब हों. और हिंदी ब्लाग जगत उनके मार्गदर्शन मे फ़ले फ़ूले.
हमारे परम मित्र श्री अरविंद मिश्रा जी ने "ताऊ की शोले" को लेकर फ़िर से टंकी पर चढने उतरने की याद लोगों को दिला दी. अब ताऊ की शोले मे तो वही टंकी पर चढेगा जिसे आप लोग चाहेंगे. तो आप अपनी अमूल्य राय अवश्य बतायें कि आप किसे टंकी पर चढा हुआ देखना चाहते हैं? देखते हैं आपका अनुमान कहां तक स्क्रिप्ट से मेल खाता है?
और एक खुश खबर यह है कि "ताऊ की शोले" में संगीत निर्देशन का जिम्मा अब संभालेगे श्री दिलीप कवठेकर जी. उनके निर्देशन मे गीत रिकार्डिंग का काम शुरु हो गया है. आप सबका असीम आशिर्वाद हमको मिला है उसके लिये हम आपके आभारी हैं.

पिछले सप्ताह श्री राज भाटिया जी की तबियत थोडी खराब होगई थी. कल उनसे काफ़ी देर बात हुई, वो अब स्वस्थ हैं किसी तरह की चिंता की बात नही है. थोडी कमजोरी है जो जल्द ही दूर हो जायेगी.

उनको माताजी के जाने का थोडा सदमा सा लगा है. यह तो ऐसा सदमा है जिसका भर पाना असंभव है. पर यह दुनिया दारी के विधान हैं जो अपने हिसाब से चलते हैं. आप सबकी शुभकामनाओं के लिये उन्होने आभार व्यक्त किया है. जल्दी ही वो पुर्ववत नियमित हो जायेंगे.


आपका यह सप्ताह शुभ हो.

-ताऊ रामपुरिया

"सलाह उड़नतश्तरी की" -समीर लाल

आज बात करते हैं ईमेल के विषय में.
कृपया ईमेल को ईमेल ही रहने दें, ब्रॉडकास्टिंग का माध्यम न बनायें.

आपने पोस्ट लिखी, बहुत अच्छा किया. आप उसे पढ़वाना चाहते हैं, यह और भी अच्छी बात है किन्तु इस हेतु ईमेल का इस्तेमाल. इस कार्य हेतु एग्रीगेटरर्स हैं. ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत इस कार्य को पूर्ण सफलता से निष्पादित कर रहे हैं. फिर ईमेल किसलिये?

ईमेल निजी वार्तालाप और पत्र व्यवहार के लिए है. ईमेल पता भी निजी ही होता है और आप १०० लोगों को एक साथ ईमेल भेज कर एक तो पते की निजता को भंग कर रहे हैं, दूसरे आप पर विश्वास करके जिसने आपको अपना पता दिया, उसे सार्वजनिक कर आप उसके साथ विश्वासघात भी कर रहे हैं.

आश्चर्य तब होता है, जब सीधे मना करने का भी कोई असर नहीं होता. मानो उस ईमेल को वो इग्नोर कर अपना ईमेल ब्रॉडकास्ट पूर्ववत जारी रखते हैं.

मुझे लगता है कि जिस तरह किसी भी वस्तु के इस्तेमाल के पूर्व जैसे आप उसके संचालन बारे में सारी जानकारी एकत्रित कर जान लेते हैं वैसे ही ईमेल के सामान्य शिष्टाचार के बारे में भी आपको जानकारी एकत्रित कर उसे आत्मसात करना चाहिये.

कहीं ऐसा न हो कि आपकी हरकत से तंग आ कोई आपको ब्लॉक कर दे और फिर आप जब जरुरी कार्य हेतु निजी पत्र भी भेजना चाहें तो वो उस तक न प्राप्त हो.

तो अंत में:

हमने देखे हैं हजारों पते

ब्लॉक होते हुए...

ईमेल को ईमेल ही रहने दो,

कोई और नाम न दो..

बाकी अगले सप्ताह!!

-समीर लाल "समीर"


"मेरा पन्ना" -अल्पना वर्मा


सिद्धिविनायक मंदिर -मुम्बई
आप सभी को गणेश चतुर्थी की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें.
'जय गणेश लम्बोदर: वक्रतुण्ड विध्नेश।
गजानन विकट महोदर, शुभकर सुमुख गणेश॥'
देवों में सर्वप्रथम पूज्य देव गणेश के विभिन्न अवतार और अनेक रूप हैं. विवरणगणेश पुराण में और विशद वर्णन मुदगल पुराण में मिलता है.

गणेश के चार अवतारों की कथा उल्लेखनीय हैं:-
१-आदिकाल में दशभुजी आदिगणेशका अवतार ब्रह्मा की सृष्टि की श्रीवृध्दि के लिए हुआ था.
२-सतयुग में मिथिला के राजा चक्रपाणि के दुरदम्य पुत्र सिन्धु के वध लिए षट्भुजी गणेश काअवतार हुआ.
३-त्रेता युग में ब्रह्मा जी की जम्हाई से उत्पन्न दैत्य सिन्दूर का वध करने के लिए शिवपुत्र चतुभुर्जी गणेश का अवतार हुआ.
४-द्वापर में कलिमल के विनाश एवं वेद प्रचार हेतु द्विभुजी गणेश का धूम्रकेतु अवतार हुआ. पाराशर मुनि की पत्नी वत्सला ने गजानन की पूजा कर गणपति को पुत्र रूप में प्राप्त किया जो धूम्रकेतु, शूपकर्ण, सुमुख आदि नामों से जाने गये.

-परशुराम द्वारा दांत तोड़ दिये जाने पर एकदन्त रूप कहलाये .
गौरी सुत गजानन के आठ रूप हैं जो विघ्न नाशक और शुभंकर हैं.
'वेद' मुनि व्यास जी ने बोले मगर लिखने वाले धूम्रकेतु गणेश जी थे.कहते हैं,यही गणेश अन्तरिक्ष युध्द के समय आकाश में धूम्र रूप में छायेंगे और कलियुग का अन्त कर सतयुग का आरंभ करेंगे.
आईये गणेश जी के इस रूप सिद्धिविनायक के बारे में जाने.यूँ तो हमने गणेश जी कि तस्वीरों में उनकी सूँड बायीं तरह मुडी देखी है.जिन मूर्तियों में सूंड दायीं तरफ मुडी हो वह सिदधि विनायक कहलाते हैं. यह रूप सर्वाधिक लोकप्रिय है.और जहाँ ये मूर्तियाँ स्थापित हैं वे मंदिर सिद्धिविनायक मंदिर कहलाये जाते हैं.ऐसी मान्यता है भगवान् शिव की तरह गणेश जी का यह रूप जितनी जल्दी भक्तों से प्रसन्न हो जाता है और मन्नतें पूरी करते हैं मगर क्रोधित भी यह उतनी ही जल्दी हो जाता है.सिद्धि विनायक की दूसरी खासियत यह है कि वह चतुर्भुजी विग्रह है.
चतुर्भुजी विग्रह क्या है--
इस में उनके ऊपरी दाएं हाथ में कमल और बाएं हाथ में अंकुश है और नीचे के दाहिने हाथ में मोतियों की माला और बाएं हाथ में मोदक (लड्डुओं) भरा कटोरा है. गणपति के दोनों ओर उनकी दोनो पत्नियां रिद्धि और सिद्धि मौजूद हैं जो धन, ऐश्वर्य, सफलता और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने का प्रतीक है. माथे पर अपने पिता शिव के समान एक तीसरा नेत्र और गले में एक सर्प हार के स्थान पर लिपटा है. सिद्धि विनायक का विग्रह ढाई फीट ऊंचा होता है और यह दो फीट चौड़े एक ही काले शिलाखंड से बना होता है.इनका यह रूप अनुपम है.

भारत में कई जगह सिध्दिविनायक के मंदिर हैं लेकिन जो मंदिर मुम्बई[महाराष्ट्र ]में है उसकी महिमा अपरम्पार है.ज्ञात हो कि इस मंदिर की न तो महाराष्ट्र के 'अष्टविनायकों ’ में गिनती होती है और न ही 'सिद्ध टेक ’ से इसका कोई संबंध है!जैसा कि महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के सिद्ध टेक के गणपति भी सिद्धिविनायक के नाम से जाने जाते हैं और उनकी गिनती अष्टविनायकों में की जाती है.केवल महाराष्ट्र में ही भगवान गणेश के आठ सिद्ध ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल हैं.
माना यही जाता है कि दाहिनी ओर मुड़ी गणेश प्रतिमाएं सिद्ध पीठ की होती हैं,और यहाँ [मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में] गणेश जी की जो मूर्ती है, वह दाईं ओर मुड़े सूड़ वाली है, इस तरह तो यह मंदिर भी सिद्ध पीठ है.
भले ही यह अष्ट विनायकों में शामिल नहीं है मगर इस मंदिर में होने वाली गणेश पूजा का बहुत अधिक महत्व है ! इस का अंदाजा यहाँ हर मंगलवार को आई भीड़ को देखकर लगाया जा सकता है.इसके अलावा यहाँ हर धरम के लोग पूजा अर्चना और दर्शन करने आते हैं.आये दिन यहाँ आने वाले विशेष व्यक्तियाँ [सेलेब्रिटियों]के कारण भी यह मंदिर सुर्खियों में रहता है.

यह मंदिर मुम्बई के प्रभा देवी क्षेत्र में स्थित है.सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इस मंदिर का १९ नवंबर १८०१ में पहली बार निर्माण हुआ था[लेकिन बहुत से लोग इसे संवत् १६९२ में बना मानते हैं.पुराना मंदिर ३.६० x ३.६० मीटर वर्ग के क्षेत्रफल में बना हुआ था.इसका निर्माण स्वर्गीय श्री लाक्स्मन विधु पाटिल ने करवाया जिसके लिए आर्थिक मदद स्वर्गीय श्रीमती द्विबाई पाटिल ने दी थी वे माटुंगा क्षेत्र से अगरी समाज की बहुत ही सम्पन्न महिला थीं.वह निसंतान थीं.एक दिन पूजा करते समय इस मंदिर के निर्माण का विचार उनके दिमाग में आया.
उन्होंने मन ही मन भगवान् गणपति से अनुमति मांगी.और इस तरह मंदिर का निर्माण शुरू हुआ.भगवान गणेश जी कि यह प्रतिमा एक काले पत्थर से काट कर बनवाई गयी .
१९५२ के बाद से यहाँ भक्तजनों कि संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई.१९५२ में ही सड़क कि खुदाई के समय पाई गयी हम्नुमान जी की एक मूर्ति को यहाँ लाया गाया था.जिसकी पूजा अर्चना हर शनिवार को होती है.हर मंगलवार यहाँ डेढ़ से दो लाख तक भक्तजन आते हैं[ऐसा अनुमान है]



मंदिर के ऊपर गुम्बद पर एक कलश स्थापित है.
यह मंदिर पांच मंजिलों वाला है,यहां प्रवचन ग्रह, गणेश संग्रहालय व गणेश विद्यापीठ , अस्पताल भी है.मंदिर के रसोईघर से एक लिफ्ट सीधे गर्भग्रह में आती है यहीं से पुजारी गणपति बाप्पा के लिए निर्मित प्रसाद व मोदक लाते हैं.
१९९१ में महाराष्ट्र सरकार ने इस मंदिर के भव्य निर्माण के लिए २० हजार वर्गफीट की जमीन प्रदान की थी.
इस मंदिर के पुनर्निर्माण के समय यहाँ का गर्भगृह इस प्रकार बनवाया गया कि अधिक से अधिक भक्त गणपति का सभामंडप से सीधे दर्शन कर सकें.अष्टभुजी गर्भग्रह तकरीबन १० फीट चौड़ा और १३ फीट ऊंचा है. गर्भग्रह के चबूतरे पर स्वर्ण शिखर वाला चांदी का बना सुंदर मंडप है, जिसमें श्री सिद्धि विनायक विराजते हैं. गर्भग्रह में भक्तों के जाने के लिए तीन दरवाजे हैं, जिन पर अष्टविनायक, अष्टलक्ष्मी और दशावतार की आकृतियां चित्रित हैं.इनके अलावा पहली मंजिल से भी दर्शन की सुविधा है.

हर साल गणपति पूजा महोत्सव यहां भाद्रपद की चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक विशेष समारोह किस उल्लास और आनंद पूर्वक मनाया जाता है इस से तो कोई भी अनभिज्ञ नहीं है.


“ दुनिया मेरी नजर से” -आशीष खण्डेलवाल

क्या यह सबसे लंबी ब्लॉग पोस्ट है?


कुछ हिन्दी चिट्ठों पर भ्रमण करते वक्त अक्सर लंबी-लंबी ब्लॉग पोस्ट भी मिल जाती है। ऐसे में अचरज होता है कि जब पाठकों के लिए इसे पढ़ पाना ही मुश्किल होता है तो ब्लॉग लेखक ने उस पोस्ट को लिखा कैसे होगा।

शनिवार को मेरे मन में यही जिज्ञासा जागी कि एक बहुत लंबी ब्लॉग पोस्ट को ढूंढ़ा जाए। मैंने थोड़ा सा गूगल को कष्ट दिया और पाया कि हिन्दी चिट्ठाकारी से ज्यादा लंबी प्रविष्ठियां अंग्रेजी चिट्ठों पर मौजूद है। इसी तलाश के दौरान मेरी स्क्रीन पर Living the Dream: A Coincidence Diary ब्लॉग खुला।

इस ब्लॉग की पोस्ट Part Two: The Narrative, Epilogues and Appendices पर जब मेरी नजर पड़ी तो मैं दंग रह गया। इस अकेली पोस्ट की सामग्री को जब मैंने 12 प्वाइंट साइज के साथ एमएस वर्ड पर पेस्ट किया तो इसने वहां 111 पेज बनाए और इसमें 37874 शब्दों की मौजूदगी दिखाई।

इस उपलब्धि के चलते मैं तो इसे सबसे लंबी ब्लॉग पोस्ट की उपाधि दे रहा हूं। अगर आपको इससे लंबी कोई पोस्ट दिखे तो कृपया बताइएगा। यह उपाधि उसी वक्त यहां से सरकाकर उस पोस्ट को दे दी जाएगी।

अगले हफ्ते आपसे फिर मुलाकात होगी.. तब के लिए हैपी ब्लॉगिंग.



"मेरी कलम से" -Seema Gupta


लकड़हारा

एक दिन एक लकड़हारा अपने पोते को ओक के पेड़ के चयन के अनुभव के लिए जंगल में ले गया, जो बाद में नाव बिल्डरों को बेचने के काम आयेगे.

जैसे जैसे वो साथ चलने लगे , लकड़हारा अपने पोते को समझाने लगा कि हर एक पेड़ के उद्देश्य अपनी प्राकृतिक अवस्था में निहित है: कुछ काष्ठफलक के लिए सीधे हैं, कुछ एक नाव की पसलियों के लिए उचित है, और कुछ मस्तूल के लिए लंबा है. इसलिए वो हर एक पेड़ के विवरण के लिए ध्यान दे, और इन विशेषताओं को पहचानने में अनुभव के साथ, किसी दिन वह भी जंगल के लकड़हारा बन सकता है अपने पोते कहा था. किसी दिन वह भी जंगल में लकडहारा बन सकता है अपने पोते के साथ.

तभी पोते ने एक पुराने ओक वृक्ष को देखा, जो शायद कभी भी काटा नहीं गया था, क्योंकि यह नाव बनाने के लिए बेकार था क्योंकि उसके तने छोटे और टेढे मेढे थे, पोते ने दादा से कहा हम इस ओक के वृक्ष को काट लेते हैं कम से कम ये हमारे आग जलाने के काम तो आएगा वरना तो ये बेकार ही है. दादा ने कहा अभी हमे अपना समय नाव बनाने के काम आने वाले वृक्ष को काटने में लगाना है, बाद में लोटते समय हम यहाँ दुबारा आ सकते हैं.



एक विशाल पेड़ काटने के कुछ ही घंटों के बाद, पोता थक गया और दादा से बोला क्या वो कुछ देर ठंडी छाया में आराम के लिए काम बंद कर सकता है? इस पर लकड़हारा अपने पोते को उसी पुराने ओक के वृक्ष के नीचे ले आया , जहाँ उन्होंने उस पेड़ के मुडे अंगों के नीचे ठंडी छाया में विश्राम किया.

थोड़ी देर आराम करने के बाद लकड़हारा ने अपने पोते को समझाया जंगल को और सारी दुनिया को समझने के लिए चौकस नजरो और जागरूकता की आवश्यकता है. कुछ चीजे सहज, लम्बे , सीधे पेड़ की तरह स्पष्ट हैं; अन्य चीजें कम स्पष्ट हैं, और करीब से ध्यान देने की आवश्यकता है, जैसे एक नज़र मे ये टेढे मेढे तने वाला ओक का वृक्ष पहली नज़र में बेकार लगा था मगर जब तुम काम से थक कर चूर हो गये तब इसकी घनी छाया में तुम्हे आराम और सुकून मिला.

लकड़हारे ने फिर कहा तुम्हे हर दिन सावधानी से सीखने के लिए ध्यान देने की जरूरत है की भगवान् ने हर एक चीज़ का सृजन क्यों किया है .जैसे तुमने इतनी जल्दी इस ओक के वृक्ष को बेकार समझ कर आग जलाने को काटने का निर्णय ले लिया. जबकि इसने हमे अपनी छाया तले आराम और सुख दिया.

इसलिए बेटे जो पहली बार में दिखाई देता है वो वैसा नहीं होता इसलिए धीरज रखते हए ध्यान देते हुए सही और गलत की खोज और पहचान करो.




"हमारा अनोखा भारत" -सुश्री विनीता यशश्वी


बागेश्वर

बागेश्वर कुमाऊँ का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यह नीलेश्वर और भीलेश्वर पर्वत श्रृंखलाओं के बीच सरयू गोमती व विलुप्त सरस्वती नदी के संगम पर बसा है। पुराने समय से ही बागेश्वर को व्यापारिक मंडी के रूप में जाना जाता है। बागेश्वर में प्रतिवर्ष के बागनाथ मंदिर में ही प्रतिवर्ष विश्वप्रसिद्ध उत्तरायणी मेला भी लगता है।

प्राचीन समय में दारमा, व्यास, मुनस्यारी के निवासी भोटियों और साथ ही मैदान के व्यापारी भी इस मेले में आते थे। भेटिया जाति के लोग ऊन से बने वस्त्रों और जड़ी-बूटियों को बेचते थे और उसके बदले में अनाज व नमक इत्यादि जरूरत का सामान यहां से ले जाया करते थे। इसी कारण वर्तमान में नुमाइश मैदान कहे जाने वाले स्थान को पहले दारमा पड़ाव व स्वास्थ्य केन्द्र वाले स्थान को भोटिया पड़ाव कहा जाता था।

बागेश्वर के संगम पर हमेशा ही स्नान पर्व चलते रहता है। अयोध्या में बहने वाली सरयू और बागेश्वर की सरयू नदी एक ही मानी जाती है। सरमूल से निकलकर बागेश्वर से बहते हुए पिथौरागढ़ तक इसे सरयू उसके आगे टनकपुर तक इसे रामगंगा तथा टनकपुर से आगे इसे शारदा नाम से जाना जाता है। तथा अयोध्या में इसे पुन: सरयू नाम से पुकारा जाता है।

बागेश्वर का जिग्र स्कन्द पुराण के मानस खंड में भी किया गया है। इसके अनुसार बागेश्वर की उत्पत्ति आठवीं सदी के आस-पास की मानी जाती है। और यहां के बागनाथ मंदिर की स्थापना को तेरहवीं शताब्दी का बताया जाता है।

1955 तक बागेश्वर ग्राम सभा में आता था। 1955 में इसे टाउन ऐरिया माना गया। सन् 62 में इसे नोटिफाइड ऐरिया व 1968 में नगरपालिका के रूप में पहचान मिली। 1997 में इसे जनपद बना दिया गया।

स्वतंत्रता संग्राम में भी बागेश्वर का महत्वपूर्ण स्थान है। कुली बेगार आंदोलन की शुरुआत बागेश्वर से ही हुई थी। बागेश्वर अपने विभिन्न ग्लेशियरों के लिये भी विश्व में अलग स्थान रखता है।

इन ग्लेशियरों के नाम है-

सुंदरढु्रगा, कफनी और पिण्डारी ग्लेशियर

-विनीता


"नारीलोक" -प्रेमलता एम. सेमलानी


कुरमुरे उपमा

अब तक हमने कुछ अधिक समय लगने वाले खाना बनाने के तरीक़ो के बारे मे जाना. अल्पनाजी वर्मा के विशेष दिशा निर्देशो को पालन करते हुए, हम आज से कुछ ऐसे नाश्तों को बनाने की विधि जानेगे जो चुटकी बजाते ही गरमा गरम तैयार हो जाऍ।

यह रेसिपि भाईयो के लिए बडी ही कारगर साबित होगी. क्यो कि भाभीजी गर्मी की छूट्टियों मे पीहर चली जाऐ, तब आपको आफिस जाने मे देरी ना हो जाए इस डर की वजह से फटाफट घर से निकल पडते है, या जब तक भाभीजी मायके से लोट ना आऐ तब तक आप रोज-रोज होटल का नास्ता-खाना खाते है। जिससे पैसे के साथ-साथ स्वास्थ्य की भी हानि होती है। अत सभी भाई इस को सीख ले। मेरे पति को भी मैने यह इन्सटन्ट बनने वाले नास्ते सिखाऐ थे, उन्होने कुछ रेसिपि तो मेरे किचन के दिवार पर ही लिख दी। आप ऐसा मत करना नही तो...........?

कुरमुरे उपमा Puffed Rice Upama

3 व्यक्तियो के लिये

सामग्री

कुरमूरे 350 ग्राम

लाल टमाटर 1

प्याज 1

हरी मिर्च 1

दालिया पाउडर 50 ग्राम

मुगफली के दाने थोडे से

लालमिर्च पाउडर

धनिया पत्ते

हल्दी

जीरा

नमक स्वाद अनुसार

बनाने की विधी

बर्तन मे कुरमूरे को साफ कर दस मिनट पानी मे भिगो दे। दस मिनट बाद ''कुरमूरो'' को अच्छी तरह से नितार कर इसमे थोडी सी हल्दी,

दालिया पाउडर,लालमिर्चपाउडर, और नमक डालकर, हाथ से या चम्मच से मिला कर अलग से रख दे।

अब एक कढाई ले । उसमे तेल गर्म करे। राई जीरा का छोक दे। इसमे कटे हुऍ प्याज, टमाटर और हरी मिर्च के टुकडे डाले, अब इसमे मुगफली के दाने डाले। अब मसाला मिलाकर रखे कुरमूरो को भी कढाई मे डाल दे। एक मिनट तक पकने दे। बीच-बीच मे चम्मच से हिलाए। अब तैयार गरमा-गरम ''कुरमूरे उपमा'' मे धनिया पत्ती को काट उपर से सजाए।

नोट- भाईयो! मसालो मे कुछ समान(जैसे दालिया पाउडर ) किचन मे आपको नही मिल रहे हो तो भी चिन्ता की बात नही, जो है उसी मे काम चला ले।)

जीवन-विज्ञान


आज मै कुछ अलग तरह की बात करने जा रही हू. कुछ दिन पुर्व मैने अपनी ''ज्ञान-शाला'' के विधार्थियो को ''जीवन-विज्ञान'' की सरल बाते बताई. एक ऎसे विज्ञान की जो जीवन मे मन से ''स्वस्थ'' और ''सपन्न परिवार'' की कोई कल्पना की गई है। तो इन बातो को जीवन मे अपना कर यह सपना भी साकार कर सकते है. देखे, जीवन-विज्ञान कोर्स मे कैसे ''किचन'' एवम ''खान-पान'' को मनुष्य के स्वस्थ- जीवन को अहम भागीदार बनाया है.


* खान-पान मे अनुशासन रखे.

* अपने खान-पान मे सयम रखे.

* जरुरत से ज्यादा नही खाये.

* जितनी भुख हो उतना खाए.

* अपने खाने मे सादगी और स्वच्छता बनाऎ रखे.

* तली हुई चीजो का सेवन कम करे.

* अपने खाने मे हरी सब्जियो और सलादो का प्रयोग करे.

* पेट को साफ़ रखने के लिए दही और मठ्ठे का प्रयोग करे.

* बाहर बनी चीजो से ज्यादा घर बनी चीजो का प्रयोग करे.

* ज्यादा मसाले वाले खाने से दुर रहे.

* खाना खाते समय पानी नही पिये,और खाना खाने के बाद ४५ मिनट तक पानी का सेवन नही करे.

* दोपहर का खाना खाते ही थोडी देर विश्राम ले. रात के खाने के बाद आधा-एक घन्टा टहलने जरुर निकले.

* महीने मे एक उपवास रखे तो पुरा शरीर हल्का हो जाऎगा.

* रात का खाना सुर्यास्त से पहले खाए या खाने के और सोने के बीच चार घण्टे का अन्तराल रखे.

* एक ही समय पर नियमित नास्ता एवम खाना खाए.

* खाने मे उपर से नमक ना डाले.

* निवाले को 32 बार चबा कर खाऎ.

* खाना खाते समय बोले नही. अपनी पानी का गिलास स्वय भरकर बैठे, खाना झुटा नही डाले.



चलते चलते

क्षमा सच्चे अर्थो मे


आज जैनो का पर्व ''संवत्सरी'' है। जिसे हम क्षमा दिवस-मैत्री दिवस के रुप मे मनाते है।

हाथ जोड तन मन वाणी से,

सब जीवो से क्षमा मांगती।

जाने हो चाहे अनजाने,

अपराधो की क्षमा चाहती॥

जीव मात्र के अन्तर्तल से,

फुटे क्षमा भाव का झरना।

वैर नही बस मैत्री भाव हो,

सीखे हिलमिल कर रहना॥

क्षमा वंदनीय, क्षमा जिंदगी ,

क्षमा साधना,क्षमा प्रार्थना।

ताऊ डॉट ईन के पाठको को मेरा शतश: वन्दन,

आपमे गुंजित क्षमा भावना॥

क्षमायाचना दिवस
पर आप सभी से मिच्छामी- दुक्कडम- खमत खामणा एवम भगवान श्री गणेशजी के आगमन पर हार्दीक बधाई के साथ अगले सोमवार तक मुझे आज्ञा दे ।

प्रेमलता एम सेमलानी


सहायक संपादक हीरामन मनोरंजक टिपणियां के साथ.
"मैं हूं हीरामन"

अरे हीरू पेलवान…आज इत्ती लेट क्यूं आ रिये हो पेलवान?

अरे पीरू..मैं जिस इमली के पेड की कोटर मे रहता हूं ना..आज उसमे किसी ने नकली फ़ूल लगा दिये रंग बिरंगे उस्ताद जी..गणेश उत्सव की वजह से..

तो इससे तू क्युं लेट हुआ? हिंया टिपणी छांटने मे मजगपच्ची मैं इकेला ही करे जा रिया हूं?

अरे यार पीरू भाई तम तो खामखा नाराज हो रिये हो..अरे वहां जनता ने जब इस तरह इमली के पेड पर रंगबिरंगे फ़ूल देखे तो ट्रेफ़िक जाम कर दिया.

अबे तो इसमे जाम करने की कौन सी बात आ गई?

अरे देखो खां..तुम दिमाग खराब तो मती करो हमारा..अरे जनता ने चमत्कार समझ के भीड लगा दी थी और क्या?

अच्छा अच्छा..नाराज मत हो पेलवान..माफ़ी मांग लेते हैं..चल टिपणी बता तू तो आज की …

ले पढले पेलवान खुद ही… वो कवठेकर अंकल के घर में एक शेरनी बैठी हैगी..

अरे नही यार...ला जल्दी पढने दे मुझे..

 Blogger दिलीप कवठेकर said...

शेर कहां रहता है?
लगता है, रामप्यारी मौसी को अपने भांजे शेर के बारे में कन्फ़्युज़न हो गया है.
शेर रहता है मांद में, गुफ़ा में, जंगल में , सर्कस में , गिर के अभयारण्य में , और बाकी बचे खुचे लायंस क्लब के मीटिंग में . अब और तो खबर नहीं , हां एक शेरनी मेरे घर में ज़रूर रह्ती है.

August 22, 2009 8:23 PM

  Blogger नीरज गोस्वामी said...

रामप्यारी कित्ता अजीब सवाल पूछन लाग री है तू...अरे जंगल का राजा तो जंगल में ही रवेगा...थारे मारे घर तो रैन से रया...कभी पकडा जावे तो बिचारा चिडिया घर में भी रैने को मजबूर हो जाया करता है...और हाँ जंगल में अपनी मांद में रहता है...और बोल के जवाब दूं?
नीरज

 Blogger अविनाश वाचस्पति said...

एक शेर शायरों की
गजलों में
भी रहता है
पर वो गजलों का राजा
कहाता है रामप्‍यारी
और वो जंगल का
नहीं होता राजा
पर
जंगल में मंगल
जरूर कर देता है।

 

अच्छा पेलवान चल अब गणेशजी की मुर्ति ले आते हैं..फ़िर उनकी स्थापना करते हैं…और फ़िर लड्डुओं का भोग लगाते हैं.

अरे हां  यार मैं तो लड्डुओं को भूल ही गया था..अब तो दस दिन अपनी भी मस्ती..जय गणेश देवा..

आप सबको भी गणेश चतुर्थी की घणी रामराम…गणेश जी आपके सब काम पूरे करें..सब मंगल हो…



ट्रेलर : - पढिये :श्री अविनाश वाचस्पति से ताऊ की खास बातचीत
"ट्रेलर"


"ट्रेलर"


गुरुवार शाम को ३: ३३ पर ताऊ की खास बात चीत : श्री अविनाश वाचस्पति से...पढना ना भुलियेगा.

ताऊ : अविनाश जी कुछ अपने बारे में बताईये?

अविनाश जी : ताऊजी सीधे से कहिए न कि अपना गुणगान करना है।

ताऊ : जी ठीक है..ऐसा ही समझ लीजिये.

अविनाश जी : हूं..तो... झूठा करना है या सच्‍चा करना है?

ताऊ : जैसा आप चाहें? यह आपको मौका दिया जाता है.

अविनाश जी : ..............

याद रखिये गुरुवार शाम ३ : ३३ ताऊ डाट इन पर




अब ताऊ साप्ताहिक पत्रिका का यह अंक यहीं समाप्त करने की इजाजत चाहते हैं. अगले सप्ताह फ़िर आपसे मुलाकात होगी. संपादक मंडल के सभी सदस्यों की और से आपके सहयोग के लिये आभार.

संपादक मंडल :-
मुख्य संपादक : ताऊ रामपुरिया
वरिष्ठ संपादक : समीर लाल "समीर"
विशेष संपादक : अल्पना वर्मा
संपादक (तकनीकी) : आशीष खण्डेलवाल
संपादक (प्रबंधन) : Seema Gupta
संस्कृति संपादक : विनीता यशश्वी
सहायक संपादक : मिस. रामप्यारी, बीनू फ़िरंगी एवम हीरामन
स्तम्भकार :-
"नारीलोक" - प्रेमलता एम. सेमलानी

कल शाम 3:33 PM पर ताऊ की शोले! कल शाम 3:33 PM पर ताऊ की शोले! कल शाम 3:33 PM पर ताऊ की शोले!

ताऊ पहेली - 36 : विजेता श्री शुभम आर्य

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको गणेश चतुर्थी की घणी रामराम !

कल की ताऊ पहेली - 36 का सही उत्तर है सिद्धि विनायक मंदिर मुम्बई, जिसके बारे मे कल ताऊ साप्ताहिक पत्रिका में विस्तार से बता रही हैं सुश्री अल्पना वर्मा. .

अब बात करते हैं ताऊ पहेली - 36 के परिणामों की.

Blogger शुभम आर्य

आज के प्रथम विजेता अंक १०१ हार्दिक बधाई

Blogger संजय तिवारी ’संजू’

आज के द्वितिय विजेता अंक १०० हार्दिक बधाई

Blogger सतीश पंचम

आज के तृतिय विजेता अंक ९९ हार्दिक बधाई



आईये अब क्रमश: आज के अन्य माननिय विजेताओं से आपको मिलवाते हैं.

Blogger Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" अंक ९८

Blogger अभिषेक ओझा अंक ९७

Blogger संजय बेंगाणी अंक ९६

Blogger HEY PRABHU YEH TERA PATH ९५

Blogger AlbelaKhatri.com अंक ९४

Blogger प्रकाश गोविन्द अंक ९३

Blogger मीत अंक ९२

Blogger M.A.Sharma "सेहर" अंक ९१

Anonymous रंजन अंक ९०


Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक अंक ८९

Blogger Pankaj Mishra अंक ८८

Blogger नीरज गोस्वामी अंक ८७

Blogger seema gupta अंक ८६

Blogger अजय कुमार झा अंक ८५

OpenID woyaadein अंक ८४

Blogger अविनाश वाचस्पति अंक ८३

Blogger रविकांत पाण्डेय अंक ८२

Blogger प्रेमलता पांडे अंक ८१

Blogger योगेश समदर्शी अंक ८०

Blogger सैयद | Syed अंक ७९

Blogger Gagan Sharma, Kuchh Alag sa ७८

Blogger दिलीप कवठेकर अंक ७७


इसके अलावा निम्न महानुभावों ने भी इस पहेली अंक मे शामिल होकर हमारा उत्साह बढाया. जिसके लिये हम उनके हृदय से आभारी हैं.

श्री दीपक तिवारी साहब, सु. सोनिया, श्री मकरंद, श्री भैरव, श्री नीरज जाट जी, श्री काजलकुमार, सु. अन्न्पुर्णा, श्री अजित वडनेरकर, श्री सही और श्री भानाराम जाट .

आपका सबका तहेदिल से शुक्रिया.

हाय…गुड मोर्निंग एवरी बडी…आई एम राम..की प्यारी… रामप्यारी.

हां तो अब जिन्होने सही जवाब दिये उन सबको दिये गये हैं ३० नम्बर…अगर भूल चूक हो तो खबर कर दिजियेगा..सही कर दिये जायेंगे.

आज के सवाल का सही जवाब है कि मगर पानी में रहता है. सबसे पहले आये शुभम अंकल, फ़िर रविकांत पांडे अंकल, गगन शर्मा अंकल, और फ़िर पंडित जी..अरे वो जबलपुर से चिट्ठी लिखने वाले महेंद्र मिश्र अंकल.

फ़िर आये वो लुधियाना वाले पंडितजी..हां डी.के. शर्मा " वत्स" अंकल, और फ़िर डाक्टर पूजा उपाध्याय..हैल्लो डाक्टर..कैट स्केन के लिये अब कितना इंतजार करना पडेगा? जरा प्रेक्टिस शुरु करिये ना.

हां तो फ़िर मीत अंकल, अजयकुमार झा अंकल, वो यादें भैया, और संजय तिवारी संजू अंकल, और अंतर सोहिल अंकल ने भी बिल्कुल सही जवाब दिया.

और फ़िर आये योगेश समदर्शी अंकल, सैय्यद अंकल, आर. सी. मिश्रा अंकल और अविनाश वाचस्पति अंकल..आप सबके जवाब बिल्कुल सही सही आये.
अब रामप्यारी की तरफ़ से रामराम…अगले शनीवार फ़िर से यही मिलेंगें. वैसे आजकल शाम ६ बजे मैं ताऊजी डाट काम पर रोज ही मिल जाती हूं. ..और हां आपका कल से शुरु होने वाला सप्ताह शुभ हो.
अच्छा अब नमस्ते. कल सोमवार को ताऊ साप्ताहिक पत्रिका मे आपसे पुन: भेंट होगी.
सभी प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता मे हमारा उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद.
ताऊ पहेली – 36 का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया.
संपादक मंडल :-

मुख्य संपादक : ताऊ रामपुरिया
वरिष्ठ संपादक : समीर लाल "समीर"
विशेष संपादक : अल्पना वर्मा
संपादक (तकनीकी) : आशीष खण्डेलवाल
संपादक (प्रबंधन) : Seema Gupta
संस्कृति संपादक : विनीता यशश्वी
सहायक संपादक : मिस. रामप्यारी, बीनू फ़िरंगी एवम हीरामन
स्तंभकार : प्रेमलता एम. सेमलानी ( नारीलोक)